अब आगे
रामसिंह क़े जाने ले बाद श्रीकांत उदास होकर अपने घर क़े अंदर वापस आता हैं ओर सानवी की तरफ देखता हैं उसके मन मे सो ख्याल आ रहे होते हैं की सानवी से कैसे वो ये बात करें जो अभी उसकी मालिक क़े साथ हुई है अंदर आते ही सानवी ने उस पर सवालों की बारिश कर दी
सानवी - सुनो जी मालिक चले गए क्या , क्या बोले वो कुछ बोलिये ना बोलते क्यों नहीं...
श्रीकांत सानवी की बातो को सुनता हैं ओर अपनी सारी हिम्मत जूता कर सानवी को जवाब देता हैं
श्रीकांत - मेरी मालिक से बात हुई हैं वो हमारा कर्जा माफ़ करने क़े लिए तैयार हो गए हैं..
श्रीकांत की बात सुनकर सानवी ख़ुश हो जाती हैं ओर सोचती हैं मालिक तो बड़े दयालु हैं
श्रीकांत - लेकिन
सानवी - लेकिन..... लेकिन क्या
श्रीकांत - उनकी एक शर्त हैं
सानवी - शर्त? केसी शर्त
श्रीकांत - शर्त ये हैं की उसके लिए तुमको मालिक क़े साथ 30 दिनों तक सोना होगा
सानवी जैसे ही श्रीकांत क़े मुँह से ऐ बात सुनती हैं उसके पैरो क़े निचे से ज़मीन निकल जाती हैं उसे अपने कानो पे विश्वास नहीं होता जो भी उसने सुना उसे लगा जैसे वो कोई सपना देख रही हो उसने आज तक सिर्फ अपने पति क़े साथ चुदाई की थी दूसरे आदमी क़े बारे मे तो उसके लिए सोचना भी पाप था ओर ऐ बात वो अपने पति से सुन रही हैं उसे यकीन नहीं हुआ
सानवी - ये क्या बोल रहे हैं आप होश मे भी हैं या नहीं जानते भी हैं क्या कह रहे हैं अपनी पत्नी को किसी प्रए मर्द क़े साथ सोने का कह रहे हैं आपको शर्म जी ऐ बात कहने से पहले आखिर ऐसी घटिया बात क़े लिए आप मान कैसे गए....
सानवी को अपने पति पे बहुत गुस्सा ा रहा था
श्रीकांत - चाहता तो मे भी नहीं हु तुम ही बाताओ कोनसा ऐसा पति होगा जो अपनी बीवी को किसी ओर क़े साथ सोने को कहेगा पर मे करू भी तो क्या करू हमारे पास कोई ओर रास्ता भी तो नहीं हैं मालिक ने साफ कहा हैं की अगर तुम इस बात क़े लिए नहीं मानती तो या तो हम कल उनके सारे पैसे वापस कर दे या ऐ घर खाली कर दे मे करता भी तो क्या करता... बाताओ
सानवी - आखिर इतना भी क्या कर्जा हैं जिसके लिए आप अपनी पत्नी तक को किसी ओर क़े साथ सोने क़े लिए मान गए ऐसा कोनसा कर्जा हैं जो चुकाया नहीं जा सकता बताइये...
श्रीकांत - वो मालिक से मेने 5 लाख रुपये कर्ज पे लिए थे हमारे घर क़े काम क़े लिए सोचा था की फसल बेच कर जितना मुनाफा होगा उसमे से मालिक का आधा कर्ज
दे दूंगा ओर बाकी का कुछ ना कुछ काम करके चूका दूंगा पर बारिश ना होने से फसल ही नहीं हुई ओर ब्याज भी बढ़ता गया ओर ऐसी नौबत आ गयी
कर्ज की रकम सुन क़े सानवी भी सकते मे ा गयी थी इतनी बड़ी रकम एक दिन मे लाना नामुमकिन था वो भी गहरे सोच मे पड़ गयी
श्रीकांत - पर मे तुमपे कोई भी दबाव नहीं डालूंगा तुम्हारा जो भी फैसला होगा मुझे मंजूर होगा आगे जैसी तुम्हारी मर्जी कल सुबह तक सोच क़े बता दो मालिक ने हमें कल तक का समय दिया हैं कल वो इसी समय आएंगे...
श्रीकांत की बात सुनकर सानवी कहती हैं
सानवी - नहीं मे अपनी इज्जत ओर मर्यादा को दाँव पे नहीं लगा सकती मे ऐसा कभी नहीं करुँगी उससे तो अच्छा मे मर जाना पसंद करुँगी
ओर रोते हुए अपने कमरे मे चली जाती हैं ओर बिस्तर पे सर दबाकर रोने लगती हैं श्रीकांत भी उसे कुछ नहीं बोलता ओर घर क़े बाहर जा क़े बैठ जाता हैं फिर भी श्री कांत अंदर नजर रखता हैं की सानवी कही कुछ कर ना ले.. ऐसे ही करते शाम हो जाती हैं ओर सानवी की सास पड़ोस से वापस ा जाती हैं परि क़े साथ ओर सानवी को आवाज देती हैं
सास - बहु ओ बहु कहा हो जरा पानी देदो बहुत थक गयी हु
सासुमा की बात सुनकर सानवी अपने आंसू पोचकर कमरे से बहर अति हैं
सानवी - जी माजी बोलिये
सास - अरे पानी दे दे बेटा बहुत थक गयी हु आज तो चला भी नहीं जा रहा क्या करू उम्र जो हो गयी हैं
माजी की बात सुनकर सानवी पानी लेकर अति है ओर माजी को देती हैं ओर माजी ओर अपनी बेटी को देखती हैं
दोनों को देखकर सानवी क़े मन मे कई विचार आने लगते हैं की माजी की काफ़ी उम्र हो गयी हैं उनसे तो ठीक से बैठा भी नहीं जा रहा अगर मालिक ने हमें घर से निकल दिया तो माजी का क्या होगा ओर मेरी बेटी अभी कितनी छोटी हैं उसका क्या होगा अगर मे मर भी गयी तो फिर उसकी देख रेख कौन करेगा.. नहीं मे सिर्फ अपनी ख़ुशी क़े लिए माजी ओर मेरी बेटी को दुख नहीं दे सकती इसी तरह क़े विचार उसके दिमाग मे चल रहे होते हैं शाम से रात हो जाती हैं सानवी ने खाना बनाकर सबको खिला दिया था खाना खाते समय भी श्रीकांत ओर सानवी की कोई बात नहीं होतो ओर दोनों आँखे तक नहीं मिलते खाना खाने क़े बाद माजी अपने कमरे मे चली जाती हैं ओर सानवी परि को लेकर अपने कमरे मे.. थोड़ी देर बाद श्रीकांत भी कमरे मे ा जाता हैं ओर सानवी क़े बगल मे बैठ जाता हैं उसे हिम्मत नहीं हो रही थी.. तभी
सानवी - ठीक हैं जी मे तैयार हु
सानवी की बात सुनकर श्रीकांत हैरान हो जाता हैं उसे लगा था की सानवी इस बात क़े लिए कभी नहीं मानेगी ओर उसे ऐ घर खाली करना पड़ेगा पर वो भी समझ गया था की सानवी क्यों हा कह रही हैं क्युकी उनके पास को चारा नहीं था
श्रीकांत - सच मे
सानवी - जी हा अपने परिवार को मुसीबत से निकलने क़े लिए अगर मुझे मेरी पवित्रता का त्याग भी करना पड़े तो भी मे करुँगी पर मालिक हमारा पूरा कर्जा माफ़ तो कर देंगे ना
श्रीकान्त - हा सानवी मे मालिक को बहुत अच्छे तरीके से जनता हु वो भले ही सख्त हैं ओर अय्याश हैं पर वो अपनी बात क़े भी बहुत पक्के हैं अगर वो किसी से कुछ वादा कर देते हैं तो उसे जरूर पूरा करते हैं
सानवी - ठीक हैं पर एक महीने कुछ ज्यादा नहीं हैं उनसे कहो ना एक हफ्ते क़े लिए सोने क़े लिए मे एक महीने भला कैसे
श्रीकांत - वो नहीं मानेंगे वो जो कहते हैं वो कर के ही मानते हैं एक महीने से एक दिन भी वो कम नहीं करेंगे
सानवी - ऐसा हैं तो ठीक हैं पर माजी ओर परिवार का क्या वो तो कल यही पे रहेंगे.
सानवी की बात सुनके श्रीकांत कुछ सोचता हैं ओर कहता हैं
श्रीकांत - एक काम कर सकते हैं मे कम माजी तो को परी क़े साथ उनकी बहन क़े यहाँ पे छोड़ आऊंगा उनकी तबियत भी काफ़ी ठीक नहीं रहती तो मिल लेगी बोलके
सानवी इस बात को मान जाती हैं ओर दोनों अपनी अपनी तरफ लेट जाते हैं ओर सोने की कोशिश करते हैं पर नींद तो दोनों को ही नहीं ा रही थी जैसे तैसे रात बिताती हैं ओर सुबह हो जाती हैं .... सुबह श्रीकांत प्लान क़े अनुसार माजी ओर परी को उनकी बहन क़े यहाँ छोड़ क़े आ जाता हैं ओर शाम को लेने आता हु कहाके वापस आ जाता हैं घर आ क़े दोने पति पत्नी मालिक क़े आने का इतेज़ार करते हैं जिसका समय होने ही वाला था ओर दोनों की दिल की धड़कने तेज़ चल रही थी... कुछ ही देर मे उनको मालिक क़े आने की आवाज आते हैं जिसे सुनकर सानवी अपने कमरे मे चली जाती हैं ओर श्रीकान्त मालिक से मिलने बाहर आता हैं......