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इस अध्भुत कहानी के इस मोड़ पर मैं इस संशय में हूँ के कहानी को किधर ले जाया जाए ?


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deeppreeti

DEEP PREET
1,796
2,470
159
परिचय

आप सब से एक महिला की कहानी किसी न किसी फोरम में पढ़ी होगी जिसमे कैसे एक महिला जिसको बच्चा नहीं है एक आश्रम में जाती है और वहां उसे क्या क्या अनुभव होते हैं,

पिछली कहानी में आपने पढ़ा कैसे एक महिला बच्चे की आस लिए एक गुरूजी के आश्रम पहुंची और वहां पहले दो -तीन दिन उसे क्या अनुभव हुए पर कहानी मुझे अधूरी लगी ..मुझे ये कहानी इस फोरम पर नजर नहीं आयी ..इसलिए जिन्होने ना पढ़ी हो उनके लिए इस फोरम पर डाल रहा हूँ



GIF1

मेरा प्रयास है इसी कहानी को थोड़ा आगे बढ़ाने का जिसमे परिकरमा, योनि पूजा , लिंग पूजा और मह यज्ञ में उस महिला के साथ क्या क्या हुआ लिखने का प्रयास करूँगा .. अभी कुछ थोड़ा सा प्लाट दिमाग में है और आपके सुझाव आमनत्रित है और मैं तो चाहता हूँ के बाकी लेखक भी यदि कुछ लिख सके तो उनका भी स्वागत है

अगर कहानी किसी को पसंद नही आये तो मैं उसके लिए माफी चाहता हूँ. ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है इसका किसी से कोई लेना देना नही है .


वैसे तो हर धर्म हर मज़हब मे इस तरह के स्वयंभू देवता बहुत मिल जाएँगे. हर गुरु जी स्वामी या महात्मा एक जैसा नही होता. मैं तो कहता हूँ कि 90% स्वामी या गुरु या प्रीस्ट अच्छे होते हैं मगर 10% खराब भी होते हैं. इन 10% खराब आदमियों के लिए हम पूरे 100% के बारे मे वैसी ही धारणा बना लेते हैं. और अच्छे लोगो के बारे में हम ज्यादा नहीं सुनते हैं पर बुरे लोगो की बारे में बहुत कुछ सुनने को मिलता है तो लगता है सब बुरे ही होंगे .. पर ऐसा वास्तव में बिलकुल नहीं है.


1. इसमें किसी धर्म विशेष के गुरुओ पर या धर्म पर कोई आक्षेप करने का प्रयास किया है , ऐसे स्वयंभू गुरु या बाबा कही पर भी संभव है .

2. इस कहानी से स्त्री मन को जितनी अच्छी विवेचना की गयी है वैसी विवेचना और व्याख्या मैंने अन्यत्र नहीं पढ़ी है .

Note : dated 1-1-2021

जब मैंने ये कहानी यहाँ डालनी शुरू की थी तो मैंने भी इसका अधूरा भाग पढ़ा था और मैंने कुछ आगे लिखने का प्रयास किया और बाद में मालूम चला यह कहानी अंग्रेजी में "समितभाई" द्वारा "गुरु जी का (सेक्स) ट्रीटमेंट" शीर्षक से लिखी गई थी और अधूरी छोड़ दी गई थी।


बाद में 2017 में समीर द्वारा हिंदी अनुवाद शुरू किया गया, जिसका शीर्षक था "एक खूबसूरत हाउस वाइफ, गुरुजी के आश्रम में" और लगभग 33% अनुवाद "Xossip" पर किया गया था।

अभी तक की कहानी मुलता उन्ही की कहानी पर आधारित है या उसका अनुवाद है और अब कुछ हिस्सों का अनुवाद मैंने किया है ।

कहानी काफी लम्बी है और मेरा प्रयास जारी है इसको पूरा करने का ।
Note dated 8-1-2024


इससे पहले कहानी में , कुछ रिश्तेदारों, दूकानदार और एक फिल्म निर्देशक द्वारा एक महिला के साथ हुए अजीब अनुभवो के बारे में बताया गया है , कहानी के 270 भाग से आप एक डॉक्टर के साथ हुए एक महिला के अजीब अनुभवो के बारे में पढ़ेंगे . जीवन में हर कार्य क्षेत्र में हर तरह के लोग मिलते हैं हर व्यक्ति एक जैसा नही होता. डॉक्टर भी इसमें कोई अपवाद नहीं है अधिकतर डॉक्टर या वैध या हकिम इत्यादि अच्छे होते हैं, जिनपर हम पूरा भरोसा करते हैं, अच्छे लोगो के बारे में हम ज्यादा नहीं सुनते हैं ...
वास्तव में ऐसा नहीं है की सब लोग ऐसे ही होते हैं ।

सभी को धन्यवाद,


कहानी का शीर्षक होगा


औलाद की चाह



INDEX

परिचय

CHAPTER-1 औलाद की चाह

CHAPTER 2 पहला दिन

आश्रम में आगमन - साक्षात्कार
दीक्षा


CHAPTER 3 दूसरा दिन

जड़ी बूटी से उपचार
माइंड कण्ट्रोल
स्नान
दरजी की दूकान
मेला
मेले से वापसी


CHAPTER 4 तीसरा दिन
मुलाकात
दर्शन
नौका विहार
पुरानी यादें ( Flashback)

CHAPTER 5- चौथा दिन
सुबह सुबह
Medical चेकअप
मालिश
पति के मामा
बिमारी के निदान की खोज

CHAPTER 5 - चौथा दिन -कुंवारी लड़की

CHAPTER 6 पांचवा दिन - परिधान - दरजी

CHAPTER 6 फिर पुरानी यादें

CHAPTER 7 पांचवी रात परिकर्मा

CHAPTER 8 - पांचवी रात लिंग पूजा

CHAPTER 9 -
पांचवी रात योनि पूजा

CHAPTER 10 - महा यज्ञ

CHAPTER 11 बिमारी का इलाज

CHAPTER 12 समापन



INDEX

औलाद की चाह 001परिचय- एक महिला की कहानी है जिसको औलाद नहीं है.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 002गुरुजी से मुलाकात.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 003पहला दिन - आश्रम में आगमन - साक्षात्कार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 004दीक्षा से पहले स्नान.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 004Aदीक्षा से पहले स्नान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 005आश्रम में आगमन पर साक्षात्कार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 006आश्रम के पहले दिन दीक्षा.Mind Control
औलाद की चाह 007दीक्षा भाग 2.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 008दीक्षा भाग 3.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 009दीक्षा भाग 4.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 010जड़ी बूटी से उपचार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 011जड़ी बूटी से उपचार.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 012माइंड कण्ट्रोल.Mind Control
औलाद की चाह 013माइंड कण्ट्रोल, स्नान. दरजी की दूकान.Mind Control
औलाद की चाह 014दरजी की दूकान.Mind Control
औलाद की चाह 015टेलर की दूकान में सामने आया सांपो का जोड़ा.Erotic Horror
औलाद की चाह 016सांपो को दूध.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 017मेले में धक्का मुक्की.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 018मेले में टॉयलेट.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 019मेले में लाइव शो.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 020मेले से वापसी में छेड़छाड़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 021मेले से औटो में वापसीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 022गुरुजी से फिर मुलाकातNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 023लाइन में धक्कामुक्कीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 024लाइन में धक्कामुक्कीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 025नदी के किनारे.Mind Control
औलाद की चाह 026ब्रा का झंडा लगा कर नौका विहार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 027अपराध बोध.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 028पुरानी यादें-Flashback.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 029पुरानी यादें-Flashback 2.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 030पुरानी यादें-Flashback 3.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 031चौथा दिन सुबह सुबह.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 032Medical Checkup.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 033मेडिकल चेकअप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 034मालिश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 035मालिश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 036मालिश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 037ममिया ससुर.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 038बिमारी के निदान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 039बिमारी के निदान 2.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 040कुंवारी लड़की.First Time
औलाद की चाह 041कुंवारी लड़की, माध्यम.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 042कुंवारी लड़की, मादक बदन.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 043दिल की धड़कनें .NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 044कुंवारी लड़की का आकर्षण.First Time
औलाद की चाह 045कुंवारी लड़की कमीना नौकर.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 046फ्लैशबैक–कमीना नौकर.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 047कुंवारी लड़की की कामेच्छायें.First Time
औलाद की चाह 048कुंवारी लड़की द्वारा लिंगा पूजा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 049कुंवारी लड़की- दोष अन्वेषण और निवारण.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 050कुंवारी लड़की -दोष निवारण.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 051कुंवारी लड़की का कौमार्य .NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 052कुंवारी लड़की का मूसल लंड से कौमार्य भंग.First Time
औलाद की चाह 053ठरकी लंगड़ा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 054उपचार की प्रक्रिया.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 055परिधानNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 056परिधानNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 057परिधान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 058टेलर का माप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 059लेडीज टेलर-टेलरिंग क्लास.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 060लेडीज टेलर-नाप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 061लेडीज टेलर-नाप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 062लेडीज टेलर की बदमाशी.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 063बेहोशी का नाटक और इलाज़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 064बेहोशी का इलाज़-दुर्गंध वाली चीज़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 065हर शादीशुदा औरत इसकी गंध पहचानती है, होश आया.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 066टॉयलेट.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 067स्कर्ट की नाप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 068मिनी स्कर्ट.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 069मिनी स्कर्ट एक्सपोजरNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 070मिनी स्कर्ट पहन खड़े होना.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 071मिनी स्कर्ट पहन बैठनाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 072मिनी स्कर्ट पहन झुकना.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 073मिनी स्कर्ट में ऐड़ियों पर बैठना.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 074फोन सेक्स.Erotic Couplings
औलाद की चाह 075अंतर्वस्त्र-पैंटी.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 076पैंटी की समस्या.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 077ड्रेस डॉक्टर पैंटी की समस्या.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 078परिक्षण निरक्षण.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 079आपत्तिजनक निरक्षण.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 080कुछ पल विश्राम.How To
औलाद की चाह 081योनि पूजा के बारे में ज्ञान.How To
औलाद की चाह 082योनि मुद्रा.How To
औलाद की चाह 083योनि पूजा.How To
औलाद की चाह 084स्ट्रैप के बिना वाली ब्रा की आजमाईश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 085परिधान की आजमाईश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 086एक्स्ट्रा कवर की आजमाईश.How To
औलाद की चाह 087इलाज के आखिरी पड़ाव की शुरुआत.How To
औलाद की चाह 088महिला ने स्नान करवाया.How To
औलाद की चाह 089आखिरी पड़ाव से पहले स्नान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 090शरीर पर टैग.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 091योनि पूजा का संकल्प.How To
औलाद की चाह 092योनि पूजा आरंभ.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 093योनि पूजा का आरम्भ में मन्त्र दान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 094योनि पूजा का आरम्भ में आश्रम की परिक्रमा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 095योनि पूजा का आरम्भ में माइक्रोमिनी में आश्रम की परिक्रमा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 096काँटा लगा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 097काँटा लगा-आपात काले मर्यादा ना असते.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 098गोद में सफर.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 099परिक्रमा समापन.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 100चंद्रमा आराधना-टैग.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 101उर्वर प्राथना सेक्स देवी बना दीजिये।NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 102चंद्र की रौशनी में स्ट्रिपटीज़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 103चंद्रमा आराधना दुग्ध स्नान की तयारी.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 104समुद्र के किनारेIncest/Taboo
औलाद की चाह 105समुद्र के किनारे तेज लहरIncest/Taboo
औलाद की चाह 106समुद्र के किनारे अविश्वसनीय दृश्यNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 107एहसास.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 108भाबी का मेनोपॉज.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 109भाभी का मेनोपॉजNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 110भाबी का मेनोपॉज.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 111भाबी का मेनोपॉज- भीड़ में छेड़छाड़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 112भाबी का मेनोपॉज - कठिन परिस्थिति.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 113बहन के बेटे के साथ अनुभव.Incest/Taboo
औलाद की चाह 114रजोनिवृति के दौरान गर्म एहसास.Incest/Taboo
औलाद की चाह 115रजोनिवृति के समय स्तनों से स्राव.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 116जवान लड़के का आकर्षणIncest/Taboo
औलाद की चाह 117आज गर्मी असहनीय हैNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 118हाय गर्मीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 119गर्मी का इलाजNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 120तिलचट्टा कहाँ गया.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 121तिलचट्टा कहाँ गयाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 122तिलचट्टे की खोजNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 123नहलाने की तयारीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 124नहलाने की कहानीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 125निपल्स-आमों जितने बड़े नहीं हो सकते!How To
औलाद की चाह 126निप्पल कैसे बड़े होते हैं.How To
औलाद की चाह 127सफाई अभियान.Incest/Taboo
औलाद की चाह 128तेज खुजलीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 129सोनिआ भाभी की रजोनिवृति-खुजलीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 130सोनिआ भाभी की रजोनिवृति- मलहमNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 131स्तनों की मालिशIncest/Taboo
औलाद की चाह 132युवा लड़के के लंड की पहली चुसाई.How To
औलाद की चाह 133युवा लड़के ने की गांड की मालिश .How To
औलाद की चाह 134विशेष स्पर्श.How To
औलाद की चाह 135नंदू का पहला चुदाई अनुभवIncest/Taboo
औलाद की चाह 136नंदू ने की अधिकार करने की कोशिशIncest/Taboo
औलाद की चाह 137नंदू चला गयाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 138भाभी भतीजे के साथExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 139कोई देख रहा है!Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 140निर्जन समुद्र तटExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 141निर्जन सागर किनारे समुद्र की लहरेExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 142फ्लैशबैक- समुद्र की लहरे !Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 143समुद्र की तेज और बड़ी लहरे !Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 144फ्लैशबैक- सागर किनारे गर्म नज़ारेExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 145सोनिआ भाभी रितेश के साथMature
औलाद की चाह 146इलाजExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 147सागर किनारे चलो जश्न मनाएंExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 148सागर किनारे गंदे फर्श पर मत बैठोNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 149सागर किनारे- थोड़ा दूध चाहिएNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 150स्तनों से दूधNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 151त्रिकोणीय गर्म नजाराExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 152अब रिक्शाचालक की बारीExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 153सागर किनारे डबल चुदाईExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 154पैंटी कहाँ गयीExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 155तयारी दुग्ध स्नान की ( फ़्लैश बैक से वापसी )Mind Control
औलाद की चाह 156टैग का स्थानंतरण ( कामुक)Mind Control
औलाद की चाह 157दूध सरोवर स्नान टैग का स्थानंतरण ( कामुक)Mind Control
औलाद की चाह 158दूध सरोवर स्नानMind Control
औलाद की चाह 159दूध सरोवर में कामुक आलिंगनMind Control
औलाद की चाह 160चंद्रमा आराधना नियंत्रण करोMind Control
औलाद की चाह 161चंद्रमा आराधना - बादल आ गएNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 162चंद्रमा आराधना - गीले कपड़ों से छुटकाराNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 163चंद्रमा आराधना, योनि पूजा, लिंग पूजाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 164बेडरूमHow To
औलाद की चाह 165प्रेम युक्तियों- दिलचस्प संभोग के लिए आवश्यक माहौलHow To
औलाद की चाह 166प्रेम युक्तियाँ-दिलचस्प संभोग के लिए आवश्यक -फोरप्ले, रंगीलेHow To
औलाद की चाह 167प्रेम युक्तियाँ- कामसूत्र -संभोग -फोरप्ले, रंग का प्रभावHow To
औलाद की चाह 168प्रेम युक्तियाँ- झांटो के बालHow To
औलाद की चाह 169योनि पूजा के लिए आसनHow To
औलाद की चाह 170योनि पूजा - टांगो पर बादाम और जजूबा के तेल का लेपनHow To
औलाद की चाह 171योनि पूजा- श्रृंगार और लिंग की स्थापनाHow To
औलाद की चाह 172योनि पूजा- लिंग पू जाHow To
औलाद की चाह 173योनि पूजा आँखों पर पट्टी का कारणHow To
औलाद की चाह 174योनि पूजा- अलग तरीके से दूसरी सुहागरात की शुरुआतHow To
औलाद की चाह 175योनि पूजा- दूसरी सुहागरात-आलिंगनHow To
औलाद की चाह 176योनि पूजा - दूसरी सुहागरात-आलिंगनHow To
औलाद की चाह 177दूसरी सुहागरात - चुम्बन Group Sex
औलाद की चाह 178 दूसरी सुहागरात- मंत्र दान -चुम्बन आलिंगन चुम्बन Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 179 यौनि पूजा शुरू-श्रद्धा और प्रणाम, स्वर्ग के द्वार Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 180 यौनि पूजा योनि मालिश योनि जन दर्शन Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 181 योनि पूजा मंत्र दान और कमल Group Sex
औलाद की चाह 182 योनि पूजा मंत्र दान-मेरे स्तनो और नितम्बो का मर्दन Group Sex
औलाद की चाह 183 योनि पूजा मंत्र दान- आप लिंग महाराज को प्रसन्न करेंगी Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 184 पूर्णतया अश्लील , सचमुच बहुत उत्तेजक, गर्म और अनूठा अनुभव Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 185 योनि पूजा पूर्णतया उत्तेजक अनुभव Group Sex
औलाद की चाह 186 उत्तेजक गैंगबैंग अनुभव Group Sex
औलाद की चाह 187 उत्तेजक गैंगबैंग का कारण Group Sex
औलाद की चाह 188 लिंग पूजा Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 189 योनि पूजा में लिंग पूजा NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 190 योनि पूजा लिंग पूजा NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 191 लिंग पूजा- लिंगा महाराज को समर्पण NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 192 लिंग पूजा- लिंग जागरण क्रिया NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 193 साक्षात मूसल लिंग पूजा लिंग जागरण क्रिया NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 194योनी पूजा में परिवर्तन का चरण NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 195 योनि पूजा- जादुई उंगलीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 196योनि पूजा अपडेट-27 स्तनपान NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 197 7.28 पांचवी रात योनि पूजा मलाई खिलाएं और भोग लगाएं NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 198 7.29 -पांचवी रात योनि पूजा योनी मालिश NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 199 7.30 योनि पूजा, जी-स्पॉट, डबल फोल्ड मालिश का प्रभाव NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 200 7.31 योनि पूजा, सुडोल, बड़े, गोल, घने और मांसल स्त NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 201 7.32 योनि पूजा, स्तनों नितम्बो और योनि से खिलवाड़ NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 202 7. 33 योनि पूजा, योनि सुगम जांच NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 203 7.34 योनि पूजा, योनि सुगम, गर्भाशय में मौजूद NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 204 7.35 योनि सुगम-गुरूजी का सेक्स ट्रीटमेंट NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 205 7.36 योनि सुगम- गुरूजी के सेक्स ट्रीटमेंट का प्रभाव NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 206 7.37 योनि सुगम- गुरूजी के चारो शिष्यों को आपसी बातचीत NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 207 7.38 योनि सुगम- गुरूजी के चारो शिष्यों के पुराने अनुभव NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 208 7.39 योनि सुगम- बहका हुआ मन NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 209 7.40 बहका हुआ मन -सपना या हकीकत Mind Control
औलाद की चाह 210 7.41 योनि पूजा, स्पष्टीकरण NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 211 7.42 योनि पूजा चार दिशाओ को योनि जन दर्शन Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 212 7.43 योनि पूजा नितम्बो पर थप्पड़ NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 213 7.44 नितम्बो पर लाल निशान का धब्बा NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 214 7.45 नितम्ब पर लाल निशान के उपाए Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 215 7.46 बदन के हिस्से को लाल करने की ज़रूरत NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 216 7.47 आश्रम का आंगन - योनि जन दर्शब Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 217 7.48 योनि पूजा अपडेट-योनि जन दर्शन NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 218 7.49 योनि पूजा अपडेट योनी पूजा के बाद विचलित मन, आराम! NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 219 CHAPTER 8- 8.1 छठा दिन मामा-जी मिलने आये Incest/Taboo
औलाद की चाह 220 8.2 मामा-जी कार में अजनबियों को लिफ्ट NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 221 8. 3 मामा-जी की कार में सफर NonConsent/Reluctance

https://xforum.live/threads/औलाद-की-चाह.38456/page-8
 
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औलाद की चाह

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CHAPTER 8-छठा दिन

निर्मलता परीक्षा- शुद्धिकरण

अपडेट-7

शुद्धिकरण- स्तन मर्दन

मैंने देखा कि गुरुजी का हाथ एकदम स्थिर था, उनकी हथेली नताशा के दाहिने स्तन के शंकु के आकार के सिरे को छू रही थी और फिर उन्होंने धीरे-धीरे अपनी हथेली उसके ब्लाउज से ढके गीले स्तन पर दबाना शुरू कर दिया!

नताशा: आआआआआआआआआआआहहहहह…..

नताशा शायद अब और खुद को रोक नहीं पाई और हल्की-हल्की कराहें निकालने लगी, जिन्हें हम सब सुन सकते थे। गुरुजी अपनी हथेली से उसके स्तन को बहुत धीरे-धीरे दबा रहे थे और उसके जवान उभरे हुए स्तन के पूरे टाइट एहसास का आनंद ले रहे थे। जैसे-जैसे गुरुजी अपने हाथ को उसके शंकु के आकार के सख्त मांस पर और ज़्यादा दबा रहे थे, नताशा की आहें तेज़ और गहरी होती जा रही थीं। मैंने देखा कि जैसे ही उसने गुरुजी की बड़ी हथेली को अपने जवान कोमल स्तन पर महसूस किया, उसके पैर भी खुलने लगे! जैसे ही मैंने देखा, मैंने पाया कि गुरुजी उसके शरीर में आग की गर्मी और पवित्रता पहुँचाने के नाम पर उसके दाहिने स्तन को अच्छी तरह से पकड़े हुए थे! गुरु-जी की बड़ी हथेली उसके पूरे दाहिने ब्रेस्ट को ढकने के लिए काफी थी और हाथ की हरकत से मुझे आसानी से पता चल गया कि गुरु-जी असल में प्यूरिफिकेशन प्रोसेस के बहाने उस जवान लड़की के ब्रेस्ट को ज़ोर से दबा रहे थे!

एक 20 साल की व्यस्क और मज़बूत लड़की के ब्रेस्ट को, जो गद्दे पर बेबस लेटी हो, हाथ में लेकर दबाना वाकई एक अलग ही एहसास रहा होगा! फिर गुरु-जी ने उसके बाएं ब्रेस्ट के लिए भी यही प्रोसेस शुरू किया; नताशा साफ तौर पर बेचैन हो रही थी, क्योंकि नैचुरली वह बहुत एक्साइटेड और शर्मिंदा भी हो रही होगी! सच में यह प्रोसेस काफी धीमा भी था क्योंकि गुरु-जी आग की गर्मी देते हुए उसके ताज़े जवान चुचकों को अच्छी तरह महसूस कर रहे थे। तभी जब गुरूजी उसके बाएं ब्रेस्ट को कप में भरकर सहलाने में बिज़ी थे, नताशा का सब्र जवाब दे गया और उसने अपनी आँखें खोलीं और उसका खाली हाथ जैसे अपने आप उसके ब्रेस्ट पर आ गया और गुरु-जी का हाथ रोक दिया।

नताशा: आह! गुरु-जी… प्लीज़… उफ्फ़! मैं यह बर्दाश्त नहीं कर सकती!

गुरु-जी: मैंने कहा था बेटी… तुम्हें सब्र रखना होगा और अपनी सारी शर्म छोड़नी होगी। यह आश्रम है मेरी बच्ची और यहाँ सब कुछ तुम्हारी मर्ज़ी से नहीं होगा…है ना?

नताशा बुरी तरह शरमा रही थी और इधर-उधर हिल रही थी जब गुरु-जी उससे बात कर रहे थे, उनका हाथ उसके बाएं ब्रेस्ट पर था; उन्होंने अपनी हथेली में उसके कोन जैसे बूब्स का मांस पकड़ा हुआ था!

गुरु-जी: मैंने तुम्हें पहले ही कहा था कि आश्रम में तुम्हें किसी भी चीज़ को लेकर कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। शर्म, एम्बैरेसमेंट, शर्म… ये शब्द आश्रम की डिक्शनरी में नहीं हैं… और तुम यह जानती हो, है ना?

नताशा: हाँ… हाँ गुरु-जी, लेकिन मुझे लग रहा है…

गुरु-जी: तुम्हें बहुत अजीब लग रहा है… है ना? तुम्हें यहाँ थोड़ी खुजली भी हो रही है?

यह कहते हुए गुरु-जी ने अपना हाथ हटाया और सीधे उसके गीले पेटीकोट के ऊपर से उसकी पुसी एरिया को दबाया)

ज़ाहिर है नताशा हैरान थी और हैरान भी लग रही थी!

गुरु-जी: ये तो नैचुरल बातें हैं… बहुत नैचुरल… और इसमें कोई गिल्ट नहीं हो नहीं चाहिए ! अगर मैं अपने चेलों की कमर से उनकी धोती खोलूँ तो तुम्हें उनका टूल खड़ा मिल सकता है… लेकिन क्या यह कोई बहुत हैरानी की बात है? ऐसे ही मर्द और औरत एक्साइटेड होते हैं! क्या तुम्हें यह नहीं पता था?

नताशा (और ज़ोर से शरमाते हुए लगभग फुसफुसाते हुए): हाँ…

गुरु-जी: तो? रिचुअल्स फॉलो करने होंगे और उसके लिए तुम्हें मेंटली मज़बूत होना होगा और इन्हें इग्नोर करके असली गोल पर फोकस करना होगा। तुम यहाँ दीक्षा लेने आई हो और उसके लिए तुम्हें इस निर्मलता परीक्षा से गुज़रना होगा… ताकि तुम्हारा ध्यान विचलित (स्पॉटलाइट डीफोकस ) न हो। क्या मैं स्पष्ट (क्लियर) हूँ?

नताशा (होंठ भींचते हुए): ठीक है गुरु-जी।

गुरु-जी: ज़रा रश्मि से पूछो… वह तुमसे बड़ी है.. शादीशुदा भी! वह आश्रम के कुछ रिचुअल्स से गुज़री है और किसी भी शादीशुदा औरत के लिए उन्हें करना आसान नहीं है…

मैं: हाँ… बहुत टफ़ ( मुश्किल) और कॉम्प्रोमाइजिंग ( समझौतापूर्ण) !

गुरु-जी: लेकिन वह उनसे (उत्तीर्ण) पास हो गई है और इनके लिए महा-यज्ञ लगभग पूरा होने वाला है, जो सच में तारीफ़ के काबिल है।

नताशा: ओ… ठीक है गुरु-जी… मैं कोशिश करूँगी… अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूँगी।

गुरु-जी: अच्छा, यह तारीफ़ के काबिल है… मुझे फिर से आग की गर्मी लेने दो… ॐ नमो ना...... वि... व.... धी... तन्नो वि... प्रचोदयात!

मैंने देखा कि गुरु-जी ने इस बार नताशा के बाएं ब्रेस्ट पर अपनी हथेली थोड़ी ज़्यादा ज़ोर से दबाई और नताशा ने एक लंबी “Ssssshhhhhhhhhh ….” निकाली जब गुरु-जी ने अपनी हथेली को खोखला करते हुए उसे अच्छे से दबाया!

जिस तरह से इस जवान लड़की के ब्रेस्ट को छुआ गया, मुझे पूरा यकीन था कि उसके निप्पल अब तक पूरी तरह से खड़े हो गए होंगे और उसके गीले ब्लाउज से दिख रहे होंगे, लेकिन क्योंकि मैं गद्दे पर लेटी हुई थी , इसलिए मैं वह नहीं देख पा रही थी ।

गुरु-जी ने उसके ब्रेस्ट की आग जैसी सफ़ाई पूरी की और उसके पेट की तरफ़ बढ़े और नताशा और भी बेशर्मी से ज़ोर-ज़ोर से आहें भर रही थी और जिस तरह से वह अपने पैर फेंक रही थी, उससे साफ़ पता चल रहा था कि वह तब तक बहुत ज़्यादा एक्साइटेड हो चुकी थी। गुरु-जी ने अब उदय से आग की गर्मी ली जो उसके शरीर के नजदीक ही पर बैठा हुआ था और तुरंत एक “आउच!” की आवाज़ आई।

यह अचानक आयी कराह साफ़ तौर पर गुरु-जी के हाथ के नताशा के पुसी एरिया में घुसने के बारे में इशारा कर रही थी!

गुरुजी की हथेली सीधे उसके लव स्पॉट पर थी, गीला पेटीकोट शालीनता की दीवार का काम कर रहा था! बिना समय बर्बाद किए, गुरुजी ने बहुत स्पष्ट रूप से उसकी योनि क्षेत्र को सहलाना शुरू कर दिया और उसका पेटीकोट गुरुजी की खोखली हथेली के नीचे इकट्ठा हो रहा था। नताशा स्वाभाविक रूप से बहुत बेचैन थी और संजीव और उदय के लिए उसके हाथ और पैर को पकड़ना मुश्किल हो रहा था।

नताशा: आआ ... यह बहुत ही शर्मनाक शुद्धिकरण प्रोसेस कुछ और देर तक चलता रहा, जब गुरुजी ने नताशा की अच्छी तरह से विकसित और चकनी जांघों और पैरों को सहलाया, ताकि पवित्र अग्नि की गर्मी और पवित्रता इस जवान लड़की के शरीर में ट्रांसफर हो सके।

गुरुजी: आह्ह… बहुत बढ़िया नताशा! अब यह खत्म हो गया! तुमने अग्नि शुद्धिकरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। जय लिंग महाराज!

नताशा लगभग हांफ रही थी और अपनी एक्साइटेड हालत छिपाने के लिए जल्दी से एक तरफ मुड़ गई। जब वह मेरी तरफ मुड़ी तो उसके ब्रेस्ट बहुत अच्छे लग रहे थे – टाइट मांस उसके टाइट ब्लाउज के ऊपर से बाहर निकल आया - वह इस हालत में बिना किसी शक के बहुत आकर्षक लग रही थी।

गुरुजी: रश्मि, अब तुम्हारी बारी है।

मैं: हां… हां गुरुजी।


जारी रहेगी

 

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CHAPTER 8-छठा दिन

निर्मलता परीक्षा- शुद्धिकरण

अपडेट-8

गर्मी - बढ़ती हुई कामुकता

जब गुरु जी नताशा के योनि क्षेत्र को सहला रहे थे तब नताशा के पैर और ज़्यादा खुलने लगे और उसका शरीर धनुष जैसा दिखने लगा, क्योंकि गुरुजी उसकी चूत को बहुत खुलेआम और जानबूझकर सहला रहे थे। गुरुजी की लंबी उंगलियां ज़बरदस्ती उसके पेटीकोट और पैंटी के ऊपर से उसकी चूत की दरार में अंदर तक घुस गईं, जिससे नताशा ज़ोर-ज़ोर से कराहने लगी। यह बहुत शर्मनाक सफाई का प्रोसेस कुछ और देर तक चलता रहा, क्योंकि गुरुजी पवित्र आग की गर्मी और पवित्रता को इस जवान लड़की के शरीर में पहुंचाने के नाम पर नताशा की अच्छी बनी हुई जांघों और पैरों को सहला रहे थे।

गुरुजी: आह्ह… बहुत बढ़िया नताशा! अब खत्म हो गया! तुमने आग की सफाई कामयाबी से पूरी कर ली है। जय लिंग महाराज!

नताशा लगभग हांफ रही थी और अपनी एक्साइटेड हालत को छिपाने के लिए जल्दी से एक तरफ मुड़ गई। जब वह मेरी तरफ मुड़ी तो उसके ब्रेस्ट बहुत अच्छे लग रहे थे – टाइट मांस उसके टाइट ब्लाउज के ऊपर से बाहर निकल आया - वह इस हालत में बिना किसी शक के बहुत आकर्षक लग रही थी।

गुरु-जी: रश्मि, अब तुम्हारी बारी है।

मैं: जी ,,हाँ… जी गुरु-जी।

नताशा की हालत देखकर, मैं पहले से ही काफी उत्सुक और उत्साहित महसूस कर रही थी, गुरु-जी के हाथों को अपने पूरे शरीर पर, खासकर अपने बड़े साइज़ के टाइट मम्मों पर महसूस करने का इंतज़ार कर रही थी। गुरु-जी ने संजीव के हाथ पर जलती आग से गर्मी लेने का वही तरीका दोहराया, मंत्र पढ़ना शुरू किया, और फिर मेरे माथे से शुरू किया। उनका गर्म हाथ मेरे माथे, आँखों और गालों पर बहुत अच्छा लग रहा था। वह अपनी उंगलियों से मेरे मुलायम और मोटे होंठों को सहला रहे थे और क्योंकि मुझे इस समय तक आश्रम में इस तरह के रीति-रिवाजों का काफी अनुभव हो चुका था, मैंने अपने सेक्सी होंठों को थोड़ा सा खोला और गुरु-जी ने तुरंत अपनी उंगली मेरे मुँह में डाल दी और मेरी गर्म और गीली जीभ को छुआ। सच तो यह था कि जैसे ही गुरु-जी मेरे करीब आए, मुझे बहुत कमजोरी महसूस हुई और मैंने बस उनसे और ज़्यादा पाने के लिए एक रंडी की तरह बर्ताव किया! मैं अब बेशर्मी से उनकी उंगली चूस रही थी और पूरी तरह से भूल गई थी कि दो और युवा लड़कियाँ मुझे देख रही थीं!

जैसे ही गुरु-जी मेरे ट्विन पीक्स ( स्तनों) पर पहुँचे, मैं नताशा से ज़्यादा ही कराह रही थी और बिना मुँह के कराहें निकाल रही थी और अपने भारी दूध के जग को उनकी हथेली में और ज़्यादा दबा रही थी। गुरु-जी ने इस मौके का फ़ायदा उठाकर मेरे बूब्स को इतना ज़ोर से दबाया जितना किसी मर्द ने कभी नहीं दबाया था। मेरी बेशर्मी से कमज़ोर हालत देखकर, मुझे एहसास हुआ कि उन्होंने मेरे लो-कट ब्लाउज़ के गले के U-कट में भी अपनी उंगलियाँ डालीं और मेरे गर्म रिसते बूब्स के मांस को ठीक से महसूस किया। गुरु-जी का गर्म स्पर्श मुझे लगभग पागल कर रहा था क्योंकि मैं साफ़ महसूस कर सकती थी कि उनका दाहिना हाथ मेरी गीली ब्रा और ब्लाउज़ के अंदर मेरे तने हुए खड़े निपल्स पर फिर रहा है और उन्हें छू रहा है।

गुरु-जी का अगला लंबा स्टॉप साफ़ तौर पर मेरी नंगी नाभि का एरिया था। गुरु-जी ने मेरी पूरी नाभि को अपनी गर्म हथेली से ढक लिया और धीरे-धीरे अपना हाथ मेरे पेट पर फेरा। वह इतने चालाक थे कि उन्होंने अपने अंगूठे से मेरी नाभि के गड्ढे में छेद कर दिया जिससे मैं ज़ोर से हाँफने लगी! जैसे-जैसे गुरु-जी अपनी हथेली और उंगलियों से मेरे मैच्योर औरत के शरीर को महसूस करते रहे, मुझे उनके स्पर्श से महसूस होने लगा था की मुझे थोड़ा गर्व महसूस होने लगा क्योंकि ना सिर्फ़ मैं ही उनके टच के लिए तरस नहीं रही थी, बल्कि गुरु-जी भी मुझे अपनेपन से छूने के लिए काफ़ी उत्सुक लग रहे थे!

गुरु-जी ने पहले ही मेरे शरीर का स्वाद चख लिया था क्योंकि महा-यज्ञ के दौरान उन्होंने मुझे बहुत अच्छे से चोदा था, लेकिन मुझे पूरा यकीन था कि वह अभी भी उस प्यूरिफिकेशन प्रोसेस के बहाने मुझसे जितना हो सके उतना मजे लेने की कोशिश कर रहे थे।

यह असल में मेरे अंदर उनके साथ इस अजीब रिश्ते से और ज़्यादा पाने की इच्छा को बढ़ा रहा था। वह सच में मेरे लिए एक "गुरु" थे और मैं उनकी बहुत इज़्ज़त करती थी, लेकिन महा-यज्ञ की फिजिकल नज़दीकी और कामुकता ने मुझे बहुत ज़्यादा कमज़ोर बना दिया था और ऐसा हर बार होता था जब मैं उनके करीब/अकेली होती थी! एक कंज़र्वेटिव और बिना किसी एडवेंचर वाली हाउसवाइफ़ होने के नाते, मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं सिर्फ़ गुरु-जी की कैसे दीवानी हो रही थी!

मैं: आआआआआआआआह्ह्ह....ऊऊऊऊऊईईईई... आआआआआआआआआआह्ह्ह्ह....

मेरी कामेच्छा बहुत बढ़ रही थी क्योंकि गुरुजी अपना हाथ मेरी कमर से नीचे मेरी योनि पर फेर रहे थे। मैं महसूस कर सकती थी कि गुरुजी की उंगलियाँ मेरे गीले पेटीकोट के नीचे मेरी पैंटी के कमरबंद के स्पर्श पर रुक रही हैं। मेरे पूरे शरीर में तुरंत रोंगटे खड़े हो गए और मैं उत्तेजना से कांपने लगी। स्वाभाविक रूप से गुरुजी मेरे पूरे परिपक्व शरीर को टटोल रहे थे जिससे मैं उबलने लगी थी;

मेरी उत्तेजना में इसलिए भी और भी वृद्धि हो रही थी क्योंकि मुझे पता था कि मुझे दो अन्य लड़कियाँ देख रही हैं। इससे मेरे लिए चीजें बदतर हो रही थीं। मैं उस समय तक आश्रम के पुरुषों की "आदी" हो चुकी थी, लेकिन नताशा और सुधा दोनों बाहरी थीं और मुझसे छोटी थीं और इसलिए मुझे खुद पर नियंत्रण रखने में बहुत मुश्किल हो रही थी।


जारी रहेगी

 
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CHAPTER 8-छठा दिन

निर्मलता परीक्षा- शुद्धिकरण

अपडेट-9

अग्नि निर्मलता-कामुकता

जैसे ही गुरुजी मेरी कमर से नीचे मेरी पुसी एरिया पर हाथ फेर रहे थे, मेरी कामुक उत्तेजना बहुत बढ़ रही थी। मैं महसूस कर सकती थी कि गुरुजी की उंगलियां मेरे गीले पेटीकोट के नीचे मेरी पैंटी के कमरबंद के टच पर रुक रही हैं। मेरे पूरे शरीर पर तुरंत रोंगटे खड़े हो गए और मैं एक्साइटमेंट से कांपने लगी। गुरुजी के मेरे पूरे मैच्योर फिगर को छूने से मैं नेचुरली उबलने लगी थी ।

मेरा स्टिम्युलेशन बढ़ रहा था क्योंकि मुझे पता था कि मुझे दो और लड़कियां देख रही हैं। इससे मेरे लिए चीजें और खराब हो रही थीं। मैं उस समय तक आश्रम के पुरुषों की "आदी" हो चुकी थी, लेकिन नताशा और सुधा दोनों बाहरी थीं और मुझसे छोटी थीं और इसलिए मुझे खुद पर कंट्रोल रखने में बहुत मुश्किल हो रही थी।

मैंने नॉर्मल बिहेव करने की पूरी कोशिश की लेकिन गुरुजी मेरी गीली पैंटी के पूरे सामने वाले हिस्से को बहुत ही सेक्सी और प्रोवोकेटिव ( उत्तेजक ) तरीके से फेर रहे थे। गुरूजी मेरी गीली ड्रेस के ऊपर से अपना अंगूठा मेरी हनी पॉट में भी डाल रहा था! मैं कराह रही थी और बेतरतीब ढंग से बड़बड़ा रही थी। मैं महसूस कर सकती थी कि उनकी पाँचों उंगलियाँ मेरी पुसी एरिया को दबा रही थीं और घुमा रही थीं, जिससे मैं काबू में आने की कगार पर पहुँच गई थी। गुरुजी ने मेरे लव स्पॉट पर काफ़ी समय बिताया और फिर धीरे-धीरे (काफ़ी अनिच्छा से) मेरी गोल जांघों पर नीचे की ओर बढ़े और अपनी फैली हुई हथेली से मेरे केले के तने जैसी टांगो के हर इंच को महसूस किया। इस समय तक मैं दो और ज़ोरदार "घुसपैठ" महसूस कर रही थी जिससे मैं और भी ज़्यादा गर्म और होश में आ गई थी!

संजीव और उदय दोनों ने पहले भी मुझे बहुत अच्छे से छुआ और प्यार किया था। मैं अभी भी उदय के प्रति थोड़ी कमज़ोर थी, हालाँकि मैंने साफ़ तौर पर शुरुआती आकर्षण वापस पा लिया था, लेकिन फिर भी मैं उसके साथ उस बोट राइड को कैसे भूल सकती थी? न ही मैं संजीव के साथ अपने लगभग नग्न लवमेकिंग को भूल सकती थी, जो महा-यज्ञ के दौरान वाकई बहुत बेशर्मी भरा था! उन दोनों ने मेरे कामुक शरीर को पूरी तरह महसूस किया था और इस बार वे दोनों मुझे गुरुजी के हाथों में मेरी कमज़ोर खुशी का एहसास करा रहे थे। संजीव मेरी कलाई पर कुछ लिख रहा था और उदय मेरे पैर पर डूडल बना रहा था, दोनों एक साथ मेरे शरीर पर अपनी उंगलियां बहुत ही सेक्सी तरीके से दबा रहे थे, जिससे मुझे अपने बढ़ते जोश को कंट्रोल करने के लिए अपने होंठों पर दांत भींचने पड़े।

गुरु-जी: आह! तो रश्मि की जोशीली अग्नि निर्मलता खूबसूरती से पूरी हुई! जय लिंग महाराज!

मैं गद्दे पर लेटी लगभग हांफ रही थी, मेरे भारी स्तन मेरे गीले ब्लाउज के अंदर ऊपर-नीचे हो रहे थे और मेरे पैर भी खुल रहे थे जो मेरी खुशी का सबको साफ-साफ बता रहे थे। फिर गुरु-जी ने वही रिचुअल सुधा के शरीर पर भी किया और हम सबने उस छोटी लड़की के कांपने और शरमाने का मज़ा लिया, जब गुरु-जी ने सबके सामने उसके छोटे टाइट स्तनों को अपनी हथेली में लिया। वह भी उस जोशीले एपिसोड के आखिर में मेरी तरह हांफ रही थी और अपनी बड़ी बहन से कहीं ज़्यादा बेचैन दिख रही थी। मुझे शक था कि सुधा ने अपनी 16 साल की उम्र में कभी इतना खुला बूब स्क्वीज़ सेशन देखा होगा! वह पूरी तरह से लाल और बहुत घबराई हुई लग रही थी, उसकी ड्रेस के अंदर उसके ब्रेस्ट का साइज़ बढ़ रहा था और वह सच में बहुत आकर्षक लग रही थी!

गुरु-जी: अब तुम्हें अपना पोस्चर बदलने की ज़रूरत है… तो गद्दे पर खड़ी हो जाओ।

(गुरु-जी खुद खड़े हो गए और हम भी उनके पीछे हो लिए) मुझे खुशी है कि अब तक चीज़ें जिस तरह से आगे बढ़ी हैं। लिंगा महाराज की कृपा से तुम तीनों ने निर्मलता टेस्ट के पहले दो हिस्से पास कर लिए हैं। अब हम आखिरी हिस्से पर आगे बढ़ेंगे, जो है लार की सफाई और पूरी तरह से शरीर की सफाई। पानी और आग ने तुम्हें शरीर की सफाई पाने में मदद की है, और अब लार की सफाई असल में तुम्हारे मुंह के साथ-साथ तुम्हारी बोली को भी घेरेगी! नताशा, क्या तुम समझ रही हो?

नताशा (अभी भी थोड़ी हांफ रही थी): हां… हां गुरु-जी।

गुरु-जी: अच्छा। इस प्रोसेस के लिए एक मीडियम की ज़रूरत होगी और चूंकि रश्मि ने पहले मीडियम का काम किया था, इसलिए उसे इस प्रोसेस के बारे में पता है। है ना रश्मि?

मैं: हां… हां गुरु-जी।

कुछ ही सेकंड में मुझे अच्छी तरह याद आ गया कि मिस्टर यादव के घर पर मेरे साथ क्या हुआ था। शायद वो मेरी ज़िंदगी के सबसे बेइज्ज़ती भरे घंटे थे!

मुझे तुरंत चेहरे याद आ गए – मिस्टर यादव, शिल्पा, मिसेज़ यादव (नंदिनी), और उस घर का वो कमीना नौकर….(इस कहानी का हिस्सा पढ़ें भाग 38 से 53 में )

गुरु-जी: अच्छा। मैं नताशा और सुधा को इसके बारे में बताता हूँ… जैसे हम लिंगा महाराज को खुश करने के लिए अलग-अलग काम करते हैं… हमें कभी-कभी एक मीडियम की ज़रूरत होती है जो एक इंसान हो और भक्त से अलग जेंडर का हो, जो लिंगा महाराज की अच्छाई को सीधे भक्त तक पहुँचाने का साधन (चाबी) हो। ठीक है?

हालांकि नताशा और सुधा हैरान और कन्फ्यूज़ थीं, उन्होंने सिर हिलाया। मुझे हैरानी हुई कि उन्होंने असल में उन बातों से क्या समझा।

गुरु-जी: तो मैं तुम्हारी लार कैसे साफ़ करूँ (गुरु-जी ने नताशा की तरफ देखा)? या तुम कह सकते हो… मैं तुम्हारी ज़बान/बात कैसे साफ़ करूँ? मैं खुद एक मीडियम का काम करूँगा और मेरे बाकी दो शिष्य भी। मैं आप तीनों के लिए मीडियम बन सकता था, लेकिन नियम कहता है कि एक सेशन में कोई सिर्फ़ एक भक्त के लिए मीडियम बन सकता है। तो… नियम तो नियम हैं… (उसने कंधे उचकाए) मैं नताशा के लिए मीडियम बनूंगा… संजीव रश्मि के लिए, और उदय हमारी सबसे छोटी सुधा के लिए… क्या मैं क्लियर हूँ?

हम सबने हाँ में सिर हिलाया।

गुरु-जी: नताशा और सुधा… तुम दोनों को इस प्रोसेस के दौरान मज़बूती से खड़े रहना होगा… इसके लिए तुम्हें मेंटली टफ़ होना होगा क्योंकि इसमें पवित्र लिक्विड को मुँह से मुँह में ट्रांसफर करना होगा और असल में यही निर्मलता परीक्षा में तुम्हारी सफलता की कुंजी है।

नताशा (बहुत, बहुत धीरे से): हां गुरूजी !

हालांकि उसने बहुत धीरे से कहा, हममें से किसी ने भी यह बात मिस नहीं की।

गुरु-जी (उनकी आवाज़ में अचानक बदलाव आया, वह स्टील की तरह ठंडी थी और गूंज रही थी): अपने एक्सप्रेशन का ध्यान रखना छोटी लड़की! हाँ, शायद “मीडियम” से जुड़े किसी भी रिवाज से गुज़रने वाली सभी लड़कियों के एक्सप्रेशन ऐसे होंगे, लेकिन मैं उन्हें बर्दाश्त नहीं करता! क्लियर?

एकदम सन्नाटा छा गया। हम सब गुरु-जी की मज़बूत पर्सनैलिटी के सामने मूर्तियों की तरह खड़े थे – उनका 6 फ़ीट का भारी-भरकम शरीर मानो अपने आप ही बात मानने की मांग कर रहा हो!

गुरु-जी: ऐसे एक्सप्रेशन रखने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन उन्हें अपने अंदर कंट्रोल करने की ज़रूरत है! क्या तुम समझ रही हो नताशा?

नताशा (लगभग कांपती हुई आवाज़ में): जी… जी हां गुरु-जी!

गुरु-जी: जब तुम मेरे आश्रम में हो, तो तुम समाज के दायरे से बाहर हो… तुम्हें यह हमेशा ध्यान में रखना चाहिए… और आश्रम के रीति-रिवाज अलग हैं और तुम्हें वे शर्मनाक, परेशान करने वाले, गंदे, गर्म, ठंडे… जो भी लग सकते हैं! पर नियम तो नियम होते हैं मेरे बच्चे और हम सभी को उन्हें मानना होगा… यहाँ शर्म और डरपोकपन के लिए कोई जगह नहीं है… अगर तुम्हें किसी रस्म के लिए कपड़े उतारने हों, तो तुम्हें अपने कपड़े उतारने होंगे… कोई दूसरा रास्ता नहीं! अगर तुम्हें किसी भी प्रक्रिया के दौरान किसी को गले लगाना हो, तो तुम्हें उसे गले लगाना होगा… कोई दूसरा रास्ता नहीं! तुम शादीशुदा हो या वर्जिन, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता… हं!

गुरु-जी नताशा की उस धीमी (हा गुरूजी) से नाराज़ हो गए थे और उनकी बात उसी की झलक थी!

गुरु-जी: तुम तीनों खुशकिस्मत हो कि तुम इस ज़माने में आश्रम में आए हो… अगर 10 साल पहले की बात होती… तो उस समय सभी तंत्र रीति-रिवाज सबसे शुद्ध तरीके से किए जाते थे… भक्त को दीक्षा लेने के लिए बिल्कुल नंगा होना पड़ता था और सब कुछ! उम्र, लिंग… कोई रोक नहीं, कोई छूट नहीं! तो फिर तुम क्या एक्सप्रेशन दोगे मेरे बच्चे?

संजीव: गुरु-जी… प्लीज़ शांत हो जाओ…

उदय: हाँ गुरु-जी… बच्ची है… हमें इसे बस एक नासमझ बच्चों वाली रेस्पाँस मानना चाहिए…

गुरु-जी (उदय की तरफ देखते हुए थोड़ी देर सोचते हुए): हम्म… ठीक है… अगर तुम कहते हो तो। लेकिन मैं तुम तीनों को एक बार फिर याद दिला दूं (हमारी तरफ मुड़कर) कि तुम सबको इन रीति-रिवाजों को बहुत धार्मिकता और पूरे दिल से मानना है और अपनी सारी बातें और एक्सप्रेशन दूर रखना है… हं! क्या मैं सबको साफ़ समझा पाया ? क्या आप सब समझ गए ?

मैं, सुधा और नताशा: जी गुरु-जी।

गुरु-जी: अच्छा। तो चलिए अब और समय बर्बाद नहीं करते और आगे बढ़ते हैं! जय लिंगा महाराज! लेडीज़… बस यहाँ आओ और लाइन में खड़ी हो जाओ…हाँ… यहीं… गद्दे पर…!


जारी रहेगी
 
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CHAPTER 8-छठा दिन

निर्मलता परीक्षा- शुद्धिकरण

अपडेट-10

मुख शुद्धि

गुरु-जी: जब तुम मेरे आश्रम में हो, तो तुम समाज के दायरे से बाहर हो… तुम्हें यह हमेशा ध्यान में रखना चाहिए… और आश्रम के रीति-रिवाज अलग हैं और तुम्हें वे शर्मनाक, परेशान करने वाले, गंदे, गर्म, ठंडे… जो भी लग सकते हैं! नियम तो नियम होते हैं मेरे बच्चे और हम सभी को उन्हें मानना होगा… यहाँ शर्म और डरपोकपन के लिए कोई जगह नहीं है… अगर तुम्हें किसी रस्म के लिए कपड़े उतारने हों, तो तुम्हें अपने कपड़े उतारने होंगे… कोई दूसरा रास्ता नहीं! अगर तुम्हें किसी सम्मेलन के दौरान किसी को गले लगाना हो, तो तुम्हें उसे गले लगाना होगा… कोई दूसरा रास्ता नहीं! तुम शादीशुदा हो या वर्जिन, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता… हंममम !

गुरु-जी नताशा की इस बात से नाराज़ हो गए और उनकी बात उसी की झलक थी!

गुरु-जी: तुम तीनों खुशकिस्मत हो कि तुम इस ज़माने में आश्रम में आई हो… अगर 10 साल पहले की बात होती… तो उस समय सभी तंत्र रीति-रिवाज सबसे शुद्ध तरीके से किए जाते थे… भक्त को दीक्षा लेने के लिए बिल्कुल नंगा होना पड़ता था वगैरह! उम्र, लिंग… कोई रोक नहीं, कोई छूट नहीं! तो फिर तुम क्या एक्सप्रेशन देती मेरे बच्चे?

संजीव: गुरु-जी… प्लीज़ शांत हो जाओ…

उदय: हाँ गुरु-जी… बच्ची है… हमें इसे बस एक नासमझ बच्चों जैसा आचरण मानना चाहिए…इसे माफ़ कर दीजिये

गुरु-जी (उदय की तरफ देखते हुए थोड़ी देर सोचा): हम्म… ठीक है… अगर तुम कहते हो। लेकिन मैं तुम तीनों को एक बार फिर याद दिला दूँ (हमारी तरफ मुड़कर) कि तुम सबको इन रीति-रिवाजों को बहुत धार्मिकता और पूरे दिल से मानना है और अपनी सारी बातें और एक्सप्रेशन दूर रखना है… हं! क्या मैं सबको साफ़ समझ गया?

मैं, सुधा और नताशा: जी गुरु-जी।

गुरु-जी: अच्छा। तो चलिए अब और समय बर्बाद नहीं करते और आगे बढ़ते हैं! जय लिंग महाराज! लेडीज़… बस यहाँ आओ और एक लाइन में खड़ी हो जाओ…हाँ… यहीं… गद्दे पर…

हम सब लोग, खासकर नताशा,गुरूजी से छोटी सी डांट खाने के बाद, थोड़े नर्वस हो गए थे और हमने झिझकते हुए गुरु-जी के बताए अनुसार अपनी जगह पकड़ ली।

गुरु-जी: यह हमारे निर्मलता परीक्षण का आखिरी शुद्धिकरण है… और यह लिंग महाराज की पूजा का भी एक ज़रूरी हिस्सा है। लिंग महाराज के सामने लार शुद्धिकरण मोक्ष पाने का एक बड़ा ज़रिया है! जय लिंग महाराज! जय हो!

गुरु-जी की तेज़ और भारी आवाज़ उस छोटे से कमरे की दीवारों से गूंज रही थी। मेरे हाथ और पैर के अंगूठे पहले से ही ठंडे हो रहे थे, हालाँकि मैं उस आग जैसे शुद्धिकरण के दौरान बहुत ज़्यादा एक्साइटेड थी ।

गुरु-जी: जैसा कि मैंने पहले बताया, संजीव रश्मि के मुंह के शुद्धिकरण का मीडियम बनेगा, उदय सुधा का, और मैं खुद तुम्हारी (नताशा की ओर इशारा करते हुए) मुंह के शुद्धिकरण में तुम्हारी मदद करूँगा। क्योंकि रश्मि इस प्रोसीजर के बारे में अच्छी तरह जानती है और तुम दोनों नयी हो, इसलिए मैं पहले इसे करके दिखाऊंगा ताकि तुम फिर से बहुत अजीब तरह से रिएक्ट न करो।

मुझे अच्छी तरह पता था कि गुरुजी के आखिरी कुछ शब्द जवान “क्वीन”, नताशा के लिए थे। वैसे भी वह अपने आधे कपड़े उतारे हुए गीले कपड़ों में बहुत सेक्सी लग रही थी - जिस तरह से वह अपना चमकता हुआ क्लीवेज सबको दिखा रही थी और उसकी गीली गोल गांड का शेप बहुत ही आकर्षक था!

गुरुजी: रश्मि, इधर आओ…

मैं: जी ..मैं?

मैं स्वाभाविक रूप से थोड़ी हैरान थी क्योंकि मैंने कभी नहीं सोचा था कि गुरुजी मुझ पर डेमो देंगे!

गुरुजी: हाँ बेटी… तुम इस मायने में इसकी अनुभवी हो… (मुस्कान) आओ… यहाँ खड़ी हो… मेरी तरफ।

मैं शायद बेवकूफ लग रही थी क्योंकि मैं इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी।

मैं: ओ… ओके .. ठीक है गुरुजी!

मैं लगभग कांपते हुए कदमों से उनके पास गई। पूरा ध्यान मुझ पर था और वे चारों - सुधा, नताशा, संजीव, और उदय - बस मुझे घूरते रहे! हालांकि मैं कुछ और गर्म पलों के लिए तरस रही थी , लेकिन क्योंकि यह एक तरह का "पब्लिक डेमोंस्ट्रेशन" था, इसलिए मुझे तुरंत अपने अंदर धड़कन महसूस होने लगी! मेरी उंगलियों और पैर की उंगलियों के सिरे ठंडे हो रहे थे और अब मेरे होंठ भी सूख रहे थे!

गुरु-जी: सुधा, नताशा... ध्यान से देखो... इस प्यूरिफिकेशन प्रोसेस का मुख्य मकसद मीडियम के होंठों और जीभ से लार को भक्त के होंठों और जीभ में ट्रांसफर करना है। ठीक है? तो... इसके लिए मैं खुद एक मीडियम के तौर पर अपने होंठों और जीभ को पवित्र लिक्विड में भिगोऊंगा...

जय लिंग महाराज! (उदय और संजीव ने तुरंत एक साथ कहा “जय लिंग महाराज!”) और बदले में मैं पवित्र लिक्विड को चाटकर और चूसकर भक्त के होंठों और मुंह में डालूंगा…

मैंने देखा कि सुधा और नताशा दोनों बहुत घबराई हुई लग रही थीं और लार साफ करने की प्रक्रिया की घोषणा सुनकर शर्म से फर्श की ओर देख रही थीं, जो असल में एक खुला लिप-टू-लिप किस सेशन था! शादीशुदा होने के कारण मुझे अपने पति के साथ किस करने की काफी आदत थी (और ज़ाहिर है आश्रम आने के बाद मुझे अनजान मर्दों से किस करने और किस करवाने की आदत हो रही थी!), लेकिन ये दो जवान कुंवारी लड़कियां इस मामले में नैचुरली कम अनुभवी थीं, और उन लड़कियों के पीले, घबराए हुए शरीर के रिएक्शन ने यही दिखाया।

गुरु-जी: देखो… तुम्हें अपने हाथ मीडियम की कमर पर रखने होंगे… रश्मि, प्लीज़ अपने हाथ मेरी कमर पर ..यहां रखो… हां…बिल्कुल सही… तुम्हारी पूरी हथेली मीडियम के शरीर को छूनी चाहिए और तुम्हारी उंगलियां पूरी तरह फैली हुई होनी चाहिए… बस ऐसे ही! और मीडियम भी वैसे ही अपने हाथ भक्त की कमर पर रखेगा।
मुझे एहसास हुआ कि मेरा खून अचानक मेरी नसों में तेजी से बहने लगा था और मेरी लिबिडो ( कामुक इच्छा ) तुरंत बढ़ गई थी! मेरी धड़कनें तेज़ हो रही थीं क्योंकि मेरी हथेलियाँ गुरु-जी की कमर के एरिया को महसूस कर रही थीं और बदले में मैं गुरु-जी की ठंडी उंगलियों को अपनी कर्वी कमर पर महसूस कर सकती थी। गुरु-जी ने मुझे ठीक अपने सामने खड़ा किया था और असल में मैं उनके बहुत करीब खड़ी थी, मेरे बड़े साइज़ के बूब्स सेक्सी तरीके से बाहर निकले हुए थे और उनके बालों वाले सीने को छूने और दबाने से बस एक इंच दूर थे!

गुरु-जी: अब मैं तुम्हें दिखाऊंगा कि लिक्विड को होंठों पर कैसे लगाना है... मैं पवित्र लिक्विड को दिखाने के लिए नहीं ले जा सकता... तो तुम दोनों बस यह मान लो कि मेरे होंठों और जीभ पर वह लिक्विड है... ठीक है?

नताशा, सुधा: ठीक है गुरु-जी।

गुरु-जी: पहले मैं अपने होंठ उसके होंठों पर रगड़ूंगा ताकि लिक्विड आसानी से उसके होंठों के बाहरी हिस्से पर लग जाए। बस देखो...

यह कहते हुए गुरु-जी अपना मुंह मेरे बहुत पास लाए और बस अपने गीले होंठों को मेरे होंठों पर रगड़ने लगे! यह एहसास इतना, इतना कामुक था कि मुझे तुरंत अपनी पोज़िशन बनाए रखने के लिए थोड़ा सा हिलना पड़ा। मेरा मुँह बंद था और गुरुजी ने अपने होंठ धीरे से मेरे होंठों पर गोल-गोल घुमाए। ज़ाहिर है, मैं बहुत शरमा रही थी और यह जानते हुए कि मुझे चार लोग देख रहे हैं मुझे बहुत शर्म आ रही थी , मैंने बहुत शर्म से अपनी आँखें बंद कर लीं।

गुरुजी (नताशा की ओर देखते हुए): जैसा कि तुम मानोगे कि इस तरह रगड़ने से सिर्फ़ बहुत ऊपरी और एक जैसा ट्रांसफ़र ही होगा… अब मैं उसके होंठों को ज़्यादा सही तरीके से छूऊँगा ताकि ट्रांसफ़र सही हो। साथ ही, तुम्हें यह भी याद रखना होगा कि मुँह के अंदर काफ़ी मात्रा में लार बने ताकि पवित्र लिक्विड उसमें अच्छी तरह मिल जाए। क्या आप समझ गयी ? हम्म… अब देखो… बस ऐसे ही…

गुरुजी ने जब से अपने होंठ मुझसे हटाए थे, मुझे संभलने का ज़्यादा समय नहीं दिया और मुझे बहुत कमज़ोरी महसूस हुई जब उन्होंने अपने होंठ मेरे होंठों पर दबा दिए जिससे मुझे अपने होंठ अलग करने पड़े और उन्होंने अपना ऊपरी होंठ मेरे गुलाबी कोमल होंठों के बीच डाल दिया और मेरे निचले होंठ को अपने दोनों होंठों से दबाने लगे!

मैं खुद को एक ज़ोरदार आह और एक लंबी कराह निकालने से नहीं रोक पाई क्योंकि मेरे शरीर के सेल्स अब बहुत तेज़ी से एक्टिव हो रहे थे, मेरी कामुक भावनाये जग रही थी, क्योंकि गुरु-जी असल में चार लोगों के सामने मुझे किस कर रहे थे! गुरु-जी के मोटे होंठों ने शुरू में मेरे मुलायम निचले होंठ को दबाया, लेकिन जल्द ही उन्होंने उसे चूसना शुरू कर दिया जिससे मैं एक्साइटमेंट से लगभग पागल हो गई! मेरी कमर पर उनकी हैंडग्रिप भी टाइट होती जा रही थी और मेरा पूरा शरीर अपने आप थोड़ा झुक रहा था ताकि उनके होंठों का प्रेशर मेरे रसीले होंठों पर बना रहे। यह लगभग एक मिनट तक चलता रहा जब तक गुरु-जी अलग नहीं हुए।

गुरु-जी: तो यह स्टेप नंबर दो है (वह थोड़ा हांफ रहे थे)। अब मैं तुम्हें दिखाऊंगा कि पवित्र लिक्विड को अपनी जीभ और मुंह के अंदर कैसे ट्रांसफर करना है। यह असल में एक टंग-प्लेइंग सेशन होगा जैसा कि तुम समझ सकते हो... इस ट्रांसफर के लिए टंग ही चाबी है... ठीक है? मैं तुम्हें यह करके दिखाता हूं...

मेरी हालत बयान नहीं की जा सकती! मैं बहुत बेशर्मी से गुरु-जी से चिपकी हुई थी; मेरे पास कोई और ऑप्शन नहीं था क्योंकि मैं उस समय बहुत ज़्यादा चार्ज हो चुकी थी! मैं अपने बड़े ट्विन ट्रीट्स( चुचकों) को उनकी छाती पर और अपनी गर्म गोल जांघों को उनकी टांगों पर बड़ी बेशर्मी से दबाती रही। मैं इतनी ज़ोर-ज़ोर से साँस ले रही थी कि मेरे मक्खन जैसे सेक्सी बूब्स का लगभग आधा हिस्सा मेरे गीले टाइट ब्लाउज़ के ऊपर से दिख रहा था और संजीव और उदय मेरे इतने करीब खड़े थे कि यह उनके लिए सच में एक ट्रीट रहा होगा!

जैसे ही गुरु-जी फिर से मेरे होंठों पर आए, तभी मैंने अपनी आँखों के कोने से दोनों बहनों, खासकर नताशा की तरफ़ से एक बहुत ही शक भरी और अजीब सी नज़र देखी। वह मुँह बना रही थी और मानो मेरे एक्सप्रेशन पर यकीन नहीं कर पा रही थी! हालाँकि मैं गुरु-जी के किसिंग में बहुत ज़्यादा बहक गई थी, लेकिन मेरा मन एक पल के लिए भटक गया। क्या नताशा को मेरी इज़्ज़त और ईमानदारी पर शक हो रहा था? वह अच्छी तरह जानती थी कि मैं शादीशुदा हूँ। लेकिन मैं क्या कर सकती थी? जब तक मैं आश्रम में थी, मैं गुरु-जी की बात की अवहेलना नहीं कर सकती थी। इसलिए मुझे गुरु-जी के इस किसिंग सेशन के आगे झुकना पड़ा; कोई रास्ता नहीं था! मैंने अपने मन को समझाने की कोशिश की, लेकिन जल्दी ही मुझे एहसास हुआ कि जिस तरह से मैं बर्ताव कर रही थी, उससे उसके मन में कुछ शक पैदा हो गया होगा। गुरु-जी के करीब आने की मेरी इच्छा और मेरे “फिजिकल झुकाव” ने उनके मन में कुछ शक पैदा किया होगा। मैं मन ही मन मुस्कुराई। वह यह सब समझने के लिए बहुत छोटी थी; और तो और, वह अनमैरिड थी; अगर गुरु-जी ने उसे एक बार चोदा होता, तो वह आसानी से मेरी “रुचि” को सूंघकर पढ़ सकती थी।

“चक! चक! चकस पूचच पूच !” हमारे किस से साफ़ और साफ़ आवाज़ें निकल रही थीं! मैं सिर्फ़ सोच सकती थी कि मेरे पति मुझे इतने खुलेआम और बिंदास तरीके से किस कर रहे हैं; कोई और नहीं! लेकिन गुरु-जी एक मैग्नेटिक पर्सनैलिटी थे! मैं हर सेकंड कमज़ोर होती जा रही थी! गुरु-जी की गर्म जीभ मेरे मुँह के अंदर लंबे स्ट्रोक्स के साथ एक्सप्लोर कर रही थी और मैं लगभग सातवें आसमान पर पहुँच गई थी! मैं खुशी से काँप रही थी जब मैंने अपने नाखून उनकी कमर पर गहरे गड़ा दिए।

मैं एक्साइटेड भी थी और नर्वस भी; सुधा और नताशा के देखे जाने से नर्वस, जो मुझसे बहुत, बहुत छोटी थीं! उनकी मौजूदगी असल में मुझे गुरु-जी के पैशनेट किसिंग ( अंतरंग चुंबन ) का पूरा मज़ा लेने में कुछ हद तक रुकावट डाल रही थी और अपनी चिंता में मेरा मुँह सूख रहा था। मैं इतनी एक्साइटेड हो रही थी कि काश मैं अपने भारी ब्रेस्ट को उनके बालों वाले सीने पर रगड़ पाती और उनके कंधे को काट लेती! बदकिस्मती से, मुझे नताशा और सुधा की वजह से अपने इमोशन को कंट्रोल करना पड़ा, हालाँकि गुरु-जी डेमोंस्ट्रेशन के नाम पर अपनी गीली जीभ से मेरे पूरे मुँह को लगभग लूट रहे थे और मुझे पता भी नहीं चला कि कब उनके हाथ मेरी कमर से फिसलकर मेरे गोल गोल बट चीक्स ( नितम्ब) पर आ गए और वह उन्हें बहुत अच्छे से मसल रहे थे!

मैं: उम्म्म्म… आह्ह्ह…. उउ ... गुरु-जी: नताशा, सुधा… मुझे उम्मीद है कि तुमने जो मैंने दिखाया है, उसे ध्यान से समझा होगा और लार को पवित्र लिक्विड के साथ ठीक से मिलाने के लिए, भक्त को मीडियम के होंठ और जीभ चूसने की ज़रूरत होती है… ठीक है? क्या तुम्हें और डेमो चाहिए?

सुधा और नताशा: नहीं गुरु-जी।

मुझे अच्छी तरह पता था कि जैसे गुरु-जी नॉर्मल बात कर रहे थे, मुझे भी सीधी खड़ी हो जानी चाहिए और उनके शरीर से चिपकना बंद कर देना चाहिए, अपने बड़े स्तनों को उनकी बालों वाली छाती से चिपकाना, लेकिन बदकिस्मती से मैं उस समय इतनी ज़्यादा उत्तेजित हो गई थी कि मेरे लिए ठीक से खड़ा होना बहुत मुश्किल हो रहा था। मुझे अपनी पैंटी के अंदर जानी-पहचानी खुजली महसूस हो रही थी और मैं लगभग सबके सामने बेशर्मी से अपनी उंगलियां खुजलाने पर मजबूर हो गई थी!

फिर कुछ ही पलों में कमरे का पूरा माहौल मानो किसी देसी पोर्नो मूवी के सीन में बदल गया! हम तीनों लड़कियां, तीनों मर्दों के सामने गद्दे पर खड़ी थीं, अपने हाथ उनकी कमर पर रखे हुए थे और वे सब हमें सबके सामने किस करने के लिए तैयार थे! संजीव और उदय ने पहले एक कटोरे से कुछ नीला सा लिक्विड, जो शायद पवित्र लिक्विड था, अपने मुँह में लिया और गुरु-जी का इंतज़ार किया, जिन्होंने कुछ मज़बूत संस्कृत मंत्र पढ़ने के बाद, कुछ लिक्विड अपने मुँह में भी लिया। जैसे ही नताशा ने गुरु-जी की कमर पर हाथ रखा, संजीव शुरू करने के लिए बेचैन होता हुआ लगा! मुझे नहीं पता था कि हर बार जब मैं उदय को उस टीनएजर सुधा के पास देखती थी तो मुझे थोड़ी जलन क्यों होती थी! हालाँकि अब उदय के लिए मेरा आकर्षण काफी हद तक कम हो गया था, जो आश्रम में मेरे शुरुआती दिनों में बहुत गहरा था, लेकिन कुछ बची हुई भावनाएँ अभी भी मुझमें मौजूद थीं!

जैसे-जैसे संजीव धीरे-धीरे मेरे होंठों को अपने होंठों के करीब ला रहा था, मैं अभी भी अपनी तरफ देखने की कोशिश कर रही थी जहाँ उदय इस स्वीट सिक्सटीन सुधा को किस करने वाला था। मैं मुश्किल से कहीं और ध्यान लगा पा रही थी क्योंकि मैंने देखा कि संजीव के गर्म मोटे होंठों ने मेरे मुलायम निचले होंठ पर कब्ज़ा कर लिया था और उसकी उंगलियाँ मेरी खुली गीली कमर में गहराई तक धँस रही थीं। क्योंकि मैं वहाँ मौजूद तीनों औरतों में सबसे ज़्यादा चार्ज्ड थी, इसलिए मैंने तुरंत हल्की-हल्की सिसकारियाँ निकालनी शुरू कर दीं और जल्द ही कमरे में हर तरह की सेक्सी बेबाक आवाज़ें गूंजने लगीं, क्योंकि सुधा और नताशा गरम हो गई थीं!

संजीव इस मौके का पूरा फ़ायदा उठाकर एक बार फिर मेरे सेक्सी, कामुक शरीर को टटोल रहा था और महसूस कर रहा था। उसके हाथ मेरी बिना साड़ी वाली पीठ और गीले पेटीकोट पर बहुत हिम्मत से घूम रहे थे, मेरी पैंटी को अंदर महसूस कर रहे थे और बेशक उसकी उंगलियाँ खास जगहों पर दबा रही थीं! किसिंग के इस भारी डोज़ के कारण, उसके मुँह का पवित्र लिक्विड मेरे मुँह में अच्छी तरह से ट्रांसफर हो रहा था और कुछ ही पलों में संजीव पूरी ताकत से मेरी जीभ भी चूस रहा था! हालाँकि मैं संजीव के साथ अपने इमोशन को कंट्रोल करने की पूरी कोशिश कर रही थी, लेकिन वह बहुत जोश में काम कर रहा था और मेरे मज़बूत बटक्स को इतने गंदे तरीके से मसल रहा था कि मेरे लिए खुद को संभालना लगभग नामुमकिन हो रहा था।

जारी रहेगी
 

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341

CHAPTER 8-छठा दिन

निर्मलता परीक्षा-शुद्धिकरण

अपडेट-11

किसिंग

फिर कुछ ही पलों में कमरे का पूरा माहौल मानो किसी देसी पोर्नो मूवी के सीन में बदल गया! हम तीनों लड़कियां, तीनों लड़कों के सामने गद्दे पर खड़ी थीं, अपने हाथ उनकी कमर पर रखे हुए थे और वे सब हमें सबके सामने किस करने के लिए तैयार थे! संजीव और उदय ने पहले एक कटोरे से कुछ नीला सा लिक्विड, जो शायद पवित्र लिक्विड था, अपने मुंह में लिया था और गुरु-जी का इंतज़ार कर रहे थे, जिन्होंने कुछ संस्कृत मंत्र पढ़ने के बाद, कुछ लिक्विड अपने मुंह में भी लिया। जैसे ही नताशा ने गुरु-जी की कमर पर हाथ रखा, संजीव शुरू करने के लिए बेचैन होता हुआ लगा! मुझे नहीं पता था कि हर बार जब मैं उदय को उस किशोरी सुधा के पास देखती थी तो मुझे थोड़ी जलन क्यों होती थी! हालांकि उदय के लिए मेरा आकर्षण काफी हद तक खत्म हो गया था, जो आश्रम में मेरे शुरुआती दिनों में बहुत गहरा था, लेकिन कुछ बची हुई भावनाएं अभी भी मुझमें मौजूद थीं!

जैसे-जैसे संजीव धीरे-धीरे मेरे होंठों को चूम रहा था, मैं अभी भी उदय की तरफ देखने की कोशिश कर रही थी जहां उदय इस स्वीट सिक्सटीन सुधा को किस करने वाला था। मैं अब और कहीं ध्यान नहीं दे पा रही थी क्योंकि मैंने देखा कि संजीव के गर्म मोटे होंठों ने मेरे मुलायम निचले होंठ पर कब्ज़ा कर लिया था और उसकी उंगलियां मेरी खुली गीली कमर में गहराई तक धंस रही थीं। क्योंकि मैं वहां मौजूद तीनों औरतों में सबसे ज़्यादा चार्ज्ड थी, इसलिए मैंने तुरंत हल्की आहें भरनी शुरू कर दीं और बहुत जल्द कमरे में हर तरह की सेक्सी बेबाक आवाज़ें गूंजने लगीं क्योंकि सुधा और नताशा भी गर्म हो गईं!

संजीव इस मौके का पूरा इस्तेमाल एक बार फिर मेरे सेक्सी, कामुक शरीर को टटोलने और महसूस करने के लिए कर रहा था। उसके हाथ मेरी बिना साड़ी वाली पीठ और गीले पेटीकोट पर बहुत हिम्मत से घूम रहे थे, मेरी पैंटी को अंदर महसूस कर रहे थे और बेशक उसकी उंगलियां खास जगहों पर दबा रही थीं! किसिंग के इस भारी डोज़ के कारण, उसके मुंह का पवित्र लिक्विड मेरे मुंह में अच्छी तरह से ट्रांसफर हो रहा था और कुछ ही पलों में संजीव पूरी ताकत से मेरी जीभ भी चूस रहा था! हालांकि मैं संजीव के साथ अपने इमोशन को कंट्रोल करने की पूरी कोशिश कर रही थी, लेकिन वह बहुत जोश में काम कर रहा था और मेरे मज़बूत नितम्ब को इतने गंदे तरीके से मसल रहा था कि मेरे लिए खुद को संभालना लगभग नामुमकिन हो रहा था।

गुरु-जी और नताशा मेरे और सुधा के बीच में खड़े थे और नताशा की आहों और बड़बड़ाहट से मुझे आसानी से पता चल गया था कि गुरु-जी इस खिलती हुई सेक्सी जवान लड़की के होंठों का पूरा मज़ा ले रहे थे! बदकिस्मती से, संजीव जिस तरह से मुझे सहला रहा था, वह हद पार कर रहा था। वह आदमी अब असल में मेरी गीली पैंटी को मेरे पेटीकोट के अंदर मेरे कूल्हों से नीचे खींचने की कोशिश कर रहा था! क्योंकि मेरा पेटीकोट पूरी तरह से गीला था और मेरी गांड के उभार से चिपका हुआ था, इसलिए उसके लिए मेरी पैंटी का कमरबंद पकड़ना और उसे नीचे खींचना काफी आसान था!

मैं: आउच! इई… उम्म… चक… चक…

मैं महसूस कर सकती थी कि मेरी बड़ी गांड मेरे गीले पेटीकोट के अंदर दिख रही है क्योंकि संजीव ने बड़ी होशियारी से मेरी पैंटी को मेरी भारी गांड के मांस से कुछ नीचे खींच दिया था! मेरे पास उसे अपने हाथों से रोकने के अलावा कोई और रास्ता नहीं था और मुझे गुरु-जी के उस निर्देश को तोड़ना पड़ा जिसमें मेरे हाथों को मीडियम की कमर तक सीमित रखने की बात कही गई थी। मैं ज़्यादा खुद को रोक नहीं पा रही थी क्योंकि संजीव अब मुझे बहुत जोश से किस कर रहा था और मेरा लगभग पूरा मुँह उसके मुँह में था! उसकी जीभ की गर्मी और पवित्र लिक्विड के मीठे स्वाद ने मेरे पूरे मुँह को रंग दिया था और मेरी गर्म फिजिकल कंडीशन की वजह से मैं काफ़ी ज़्यादा उत्तेजित होने लगी थी!

अचानक एक ब्रेक हुआ जब मैंने गुरु-जी को बोलते सुना!

गुरु-जी: जय लिंग महाराज! अब जब पवित्र जल आपके मुँह में चला गया है, तो प्लीज़ लिक्विड को पूरा न गटकें... इसे अपने मुँह में रखने की कोशिश करें... और बदले में बस हमारे होंठ चूसें ताकि आपकी लार के साथ सही तरह से मिक्स हो जाए... ठीक है?.... जय लिंग महाराज... शुरू करें...

गुरु-जी के बोलते समय मैं बस हाँफ रही थी और नताशा और सुधा का भी यही हाल था। दोनों लड़कियाँ बेशर्मी से अपने मेल किसिंग पार्टनर से चिपकी हुई थीं और इस सेक्सी निर्मलता परीक्षण सीक्वेंस का पूरा मज़ा ले रही होंगी! मैं अपने पार्टनर संजीव को किस करने में सबसे धीमी थी और उसी पल मैंने देखा कि जैसे ही सुधा उदय के होंठों से मिली, उसने जल्दी से अपना हाथ उसके सपाट पेट की स्किन से होते हुए उसके ब्लाउज के हेम तक ले गया और उसके छोटे साइज़ के ब्लाउज से ढके बूब्स को महसूस करने लगा! मुझे यह देखकर ज़्यादा मज़ा नहीं आया और मैं गुरुजी को कोस रही थी कि उन्होंने सुधा को उदय को दे दिया; वह आसानी से मुझे उदय को और सुधा को संजीव को दे सकते थे…

हालांकि उदय को उस नई लड़की के साथ प्यार करते देखकर मुझे थोड़ी जलन हो रही थी, लेकिन मुझे गुरुजी की बात माननी थी और इसलिए मैंने अपना सिर ऊपर उठाया और संजीव के होंठों तक पहुँच गयी ! जैसे ही मैंने उसके मर्दाना होंठों को छुआ, मेरा पूरा शरीर मजे से कांप उठा। मेरे नाखून उसकी कमर के मांस में गहरे धंस गए और मैंने उसके निचले होंठ को चूसना शुरू कर दिया ताकि उस पवित्र लिक्विड को लार के साथ मिला सकूँ, जो कि प्योर ओपन किसिंग के अलावा कुछ नहीं था! कुछ ही पलों में मैंने देखा कि संजीव के हाथ हमारे शरीर के बीच में आकर मेरे सीने तक पहुँचने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि मैंने शुरू में मना किया, लेकिन पूरी सेटिंग की वजह से (मेरे आस-पास बहुत सारी किस की आवाज़ें और हल्की कराहें और मैं उस आदमी का निचला होंठ अपने होंठों में पकड़े हुए थी) मुझे अपने हथियार डालने पड़े।

संजीव ने ज़्यादा से ज़्यादा मजे के लिए जल्दी से अपनी पोजीशन बनाई और अपना बायां हाथ मेरे कद्दू जैसे हिप्स की चिकनी सतह पर रखा और अपना दायां हाथ मेरे धड़कते हुए स्तन पर रख दिया। मेरा ब्लाउज़ टूटने वाला था और जब संजीव की हथेली ने मेरे बूब्स को कसकर पकड़ा तो हुक पूरी तरह खिंच गए।

उसने मुझ पर अपने शरीर का प्रेशर कम करके हमारे शरीर के बीच जगह बनाई ताकि उसका हाथ मेरे ब्रेस्ट एरिया पर बिना किसी रुकावट के चल सके! संजीव ने मेरे ब्रेस्ट को लगातार और बहुत कॉन्फिडेंस से दबाना शुरू कर दिया, एक बार में एक ब्रेस्ट को अपनी खोखली हथेली से मेरे बूब्स के ज़्यादा से ज़्यादा हिस्से को संभाला और उसकी उंगलियां मेरे टाइट कोन जैसे बिल्डअप पर गहराई से गड़ रही थीं। ज़ाहिर है, मैं बहुत कमज़ोर हो रही थी और एक हेवी ऑर्गेज्म की ओर बढ़ रही थी।

बाकी दो लड़कियों के साथ भी ऐसा ही हुआ होगा – गुरु-जी बड़ी बहन नताशा का दूध निकाल रहे थे जबकि उदय छोटी वाली सुधा का मज़ा ले रहा था! जब ऐसा लगा कि मैं उस पॉइंट पर पहुँच रही हूँ जहाँ से वापसी नहीं हो सकती, तो गुरु-जी ने पर्दे गिरा दिए!

गुरु-जी: बस! बस! जय लिंग महाराज! संजीव, उदय... प्लीज़ अपने पार्टनर्स को छोड़ो और गद्दे से नीचे उतरो!

साफ़ तौर पर अनमने संजीव और उदय को गुरु-जी की बात माननी पड़ी और उन्होंने मुझे और सुधा को छोड़कर गद्दे से बाहर खड़े होने के लिए पीछे हट गए और ज़ाहिर है कि हम तीनों भी बहुत दुखी लग रही थी ! सिर्फ़ मैं ही नहीं, सुधा और नताशा दोनों ही इतने लंबे समय तक अजनबियों से किस किए जाने से बहुत थकी हुई लग रही थीं! और क्योंकि शुद्धिकरण की प्रक्रिया सिर्फ़ "किस" तक सीमित नहीं थी, गीली और गर्म हम तीनों ही बहुत सेक्सी लग रही थीं – हमारे शरीर से कामुकता निकल रही थी! हमारे शानदार ऊपरी खजाने (खासकर मेरे और नताशा के) हमारे ब्लाउज़ से बाहर निकल रहे थे और हमारे निप्पल खड़े थे जो हमारे गीले ब्लाउज़ के कपड़े से साफ़ दिख रहे थे! मुझे नॉर्मल तरीके से खड़े होने में भी मुश्किल हो रही थी क्योंकि मैं अच्छी तरह महसूस कर सकती थी कि मेरी पैंटी मेरे पेटीकोट के नीचे मेरे हिप्स के कर्व पर आधी नीचे थी; मुझे सुधा के लिए भी यही शक था, लेकिन नताशा के बारे में पक्का नहीं था क्योंकि गुरु-जी उसके लिए मीडियम थे। मैं यह देखकर हैरान रह गयी कि सुधा के पेटीकोट का नाड़ा हवा में लटका हुआ था, जिससे साफ़ पता चल रहा था कि उदय ने उसे खोलने की कोशिश भी की होगी! बदमाश!

गुरु-जी: तुम सब ठीक हो? मुझे पता है तुम्हें थोड़ी गर्मी लग रही होगी... (मुस्कुराते हुए) है ना? लेकिन बेबस लड़कियों...इसमें ऐसा ही होता है! मैं निर्मलता परीक्षा के लिए किसी भी रिवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता था... तुम्हें यह अनुभव करना ही था... कोई शॉर्टकट नहीं! लेकिन जैसा कि मैं हमेशा कहता हूँ, लक्ष्य पर ध्यान लगाओ और तुमने शुद्धि पा ली! जय लिंग महाराज!

संजीव और उदय ने कोरस गाया और हम तीनों सुन्न खड़े रहे जैसे हमारे ऊपर कामुकता और शर्म का पर्दा एक साथ पड़ा हो! दो जवान कुंवारी लड़कियाँ स्वाभाविक रूप से तीन बड़े आदमियों के सामने पूरी तरह लाल और कुंडलित दिख रही थीं जो उनकी आधी दिख रही शारीरिक सुंदरता को देख रहे थे। मैं नताशा और सुधा की तुलना में कम से कम कुछ ज़्यादा शांत थIN क्योंकि मुझे पहले से ही इन सेक्सी आश्रम वर्कआउट की आदत थी।

गुरु-जी: अब वॉशरूम जाओ, सूखें और पवित्र कपड़े पहनो… संजीव…

संजीव हमारे कपड़ों का सेट लेकर तैयार लग रहा था और उसने कोने से उठाकर हमें दे दिया। हम नैचुरली अपना बदन ढकने के लिए बगल वाले वॉशरूम में भागी ।

नताशा: उफ्फ! मुझे बहुत बेचैनी हो रही है… आह!

जैसे ही मैंने हमारे पीछे टॉयलेट का दरवाज़ा बंद किया, नताशा ने लगभग तुरंत रिएक्ट किया। यह टॉयलेट खुशकिस्मती से बड़ा था और हम तीनों आराम से आ गयी ।

सुधा: मुझे भी दीदी… मुझे बहुत गर्मी लग रही है… उफ्फ!

मैं: हाँ, यह नैचुरल है। हम सब उन मर्दों के बहुत करीब थे ना….

नताशा: भाबी… करीब! आप कितनी बिंदास हो रही हैं! मुझे बिल्कुल ऐसा लगा जैसे मैं उनके साथ हूँ… आह! (उसने गहरी साँस छोड़ते हुए जल्दी से अपना ब्लाउज खोला) मुझे अभी भी गुरु-जी के होंठ महसूस हो रहे हैं… उफ्फ क्या सेशन था!

मैं: मेरे साथ भी नताशा! लगता है संजीव अभी भी मुझे गले लगा रहा है… आह्ह्ह!

हम तीनों बातें करते हुए अपने गीले ब्लाउज़ के बटन खोल रही थीं।

नताशा: भाबी, बस मुझे बताओ कैसा लगा… मेरा मतलब है कि निर्मलता टेस्ट का आखिरी हिस्सा किश से कैसे अलग था?

मैं: धीरे! धीरे! तुम क्या कर रही हो? धीरे बोलो!

नताशा: उफ़! सॉरी भाबी! मैं तो भूल ही गई…

सुधा: दीदी… सावधान रहना… गुरु-जी तो दीवार के दूसरी तरफ़ ही खड़े हैं!

नताशा: हाँ… हाँ… लेकिन भाबी, मैं क्या कहूँ… एक समय तो मुझे लगा… मुझे लगा जैसे मेरा बॉयफ़्रेंड… हे भगवान! यह कैसा टेस्ट है? क्या तुम्हें भी वैसा ही नहीं लगा भाबी?

सुधा और नताशा दोनों अब सिर्फ़ ब्रा में थीं और अब वे अपने गीले पेटीकोट खोल रही थीं। जैसे ही मेरी उंगलियाँ मेरे ब्लाउज़ के हुक में घुस रही थीं, मेरा मक्खन जैसा क्लीवेज और दूधिया सफ़ेद ब्रा उन्हें दिखने लगी।

मैं: बिल्कुल नताशा! क्या मैं औरत नहीं हूँ? और हाँ… अगर बात सिर्फ़ होंठों तक ही होती तो भी कम से कम…

सुधा: भाबी, तुमने बिल्कुल सही कहा ! बिल्कुल! वो आदमी… उसका नाम क्या था… हाँ… हाँ… उदय… जब उसके होंठ मेरे होंठों पर थे, तो उस कमीने ने न सिर्फ़ मेरे स्तन दबाए, बल्कि मेरे पेटीकोट के अंदर घुसने की भी कोशिश कर रहा था! मैं कुछ नहीं कह सकी क्योंकि गुरुजी वहाँ मौजूद थे।

जारी रहेगी
 

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CHAPTER 8-छठा दिन

निर्मलता परीक्षा-शुद्धिकरण

अपडेट-12

लड़किया आश्रम में किस निदान के लिए आयी ?

नताशा: हाँ… हाँ… पर भाबी क्या कहूँ… एक बार तो मुझे लगा… मुझे लगा जैसे मेरा बॉयफ्रेंड… हे भगवान! यह कैसा टेस्ट है? क्या तुम्हें भी ऐसा नहीं लगा भाबी?

सुधा और नताशा दोनों अब सिर्फ़ ब्रा में थीं और वे अब अपने गीले पेटीकोट खोल रही थीं। जैसे ही मेरी उंगलियाँ मेरे ब्लाउज़ के हुक में घुस रही थीं, मेरा मक्खन जैसा क्लीवेज और दूधिया सफ़ेद ब्रा उन्हें दिख रही थी।

मैं: बिल्कुल नताशा! क्या मैं औरत नहीं हूँ? और हाँ… अगर यह सिर्फ़ होंठों तक ही सीमित होता तो भी कम से कम…

सुधा: तुमने बिल्कुलकहा भाबी! बिल्कुल! वह आदमी… उसका नाम क्या था… हाँ… हाँ… उदय… जब उसके होंठ मेरे होंठों पर थे तो उस बदमाश ने न सिर्फ़ मेरे स्तन दबाए, बल्कि मेरे पेटीकोट के अंदर भी घुसने की कोशिश कर रहा था! मैं कुछ नहीं कह सकी क्योंकि गुरु-जी वहाँ मौजूद थे।

नताशा और सुधा अब केवल अपनी अंडरवियर ( ब्रा पेंटी) में खड़ी थीं और बहुत ही कमाल की लग रही थीं, खासकर नताशा अपने गोल उभरे हुए हिप्स और पके आम जैसे स्तन के साथ। जब मैंने उसे देखा तो मुझे लगा कि उसके फिगर में और मैच्योरिटी के साथ एक बॉम्बशेल बनने के लिए सभी ज़रूरी चीज़ें हैं।

उसकी छोटी बहन सुधा में असल में वह “फ्लेश” नहीं था जो उसकी बड़ी बहन नताशा में था। हाँ पर उसे देख मैं ये कह सकती हूँ की समय के साथ जैसी सुधा का बदन भरेगा वो भी सेक्सी लगेगी " या इसे ऐसा कह सकते हैं की "बड़ी होकर माल बनेगी "!

नताशा: हं! और भाबी… जब गुरु-जी ने मेरे साथ पवित्र लिक्विड ट्रांसफर पूरा किया तो मैंने दूसरे व्यक्ति को देखा… उसका नाम क्या था… हाँ… संजीव… हाँ… वह बस तुम्हें ऐसे गले लगा रहा था जैसे…. मेरा मतलब है एर… बहुत ही गलत तरीके से भाबी!

मुझे नैचुरली थोड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई क्योंकि नताशा ने सीधे संजीव की हॉट ग्रोपिंग की ओर इशारा किया और नैचुरली सिचुएशन को डिफेंड करने के लिए थोड़ा लड़खड़ायी ।

मैं: हाँ… अरे… असल में पता है… मेरा मतलब सुधा की तरह (मैंने पहले ही अपना ब्लाउज खोल दिया था और अब अपनी ब्रा का हुक खोल रही थी) मैं भी गुरु-जी की मौजूदगी से बहुत घबरा गई थी और… अरे… इसीलिए मुझे उनकी बात माननी पड़ी… मेरा मतलब उस आदमी की… तुम्हें पता है…

नताशा: हम्म। मैं समझ सकती हूँ भाबी… समझाने की ज़रूरत नहीं है… मैंने सब कुछ देखा… वह तुम्हें हर जगह छू रहा था और… उफ़! वाह भाबी!

नताशा के अचानक “वाह” कहने पर मैं थोड़ी देर के लिए रुक गई।

मैं: क्या हुआ?

नताशा: भाबी… तुम्हारे कितने बड़े ब्रेस्ट हैं! वाह!

मैं मुस्कुराना बंद नहीं कर सकी और बहुत ज़्यादा शरमा गई। नताशा तुरंत आगे बढ़ी और अपनी उंगलियों से मेरे नंगे ब्रेस्ट को महसूस किया।

नताशा (मुस्कुराते हुए): उम्म… कितने टाइट और मज़बूत भाबी… बहुत सुंदर!

जैसे ही नताशा ने मेरे नंगे टिट्स को छुआ, मेरे निप्पल अपने आप खड़े हो गए और मेरे मम्मे और भी सेक्सी और अट्रैक्टिव लगने लगे।

मैं: चिंता मत करो चिक! तुम्हारे पास भी अच्छे हैं (मैंने उसकी ब्रा के अंदर उसके कड़े बॉल्स को पकड़ा) और एक बार तुम्हारी शादी हो जाएगी तो तुम मेरे साइज़ की हो जाओगी…(कंट्रोल्ड हंसी)

नताशा शरमा गई। सुधा ने मुझे मेरा तौलिया दिया ताकि मैं सूख सकूं।

मैं: थैंक्स… लेकिन रुको डियर… (मैं मुस्कुराया) पैंटी अभी भी पहनी हुई है।

सुधा: हे हे… ठीक है मैं इंतज़ार करूंगी… तुम पहले उसे उतारो….

एक पल के लिए मुझे थोड़ा अजीब लगा क्योंकि मैं सबसे बड़ी होने के नाते पहले नंगी हो रही थी। दोनों बहनों के शरीर पर अभी भी उनकी ब्रा और पैंटी थी।

मैं: अरे… तुम दोनों किसका इंतज़ार कर रही हो? अपनी पैंटी उतारो!

सुधा और नताशा (मुस्कुराते हुए): हां, हां भाबी… खुशी से! हे हे हे…

यह कहते हुए दोनों बहनों ने भी अपनी पैंटी उतार दी और अपनी चूत दिखा दी। मैंने भी अपनी गोल गांड के ऊपर से अपनी पैंटी नीचे खींचकर अपनी बालों वाली चूत दिखानी शुरू कर दी।

सुधा और नताशा: वाह भाबी…. (एक साथ)

मैं: एई… ऐसे मत घूरो… हट!

मैं बहुत शरमा रही थी और दो टीनएज लड़कियों को नंगी देखकर काफी शर्मिंदा भी हो रही थी! मैंने अपने आप उनसे मुँह मोड़ लिया और तौलिए से अपना शरीर पोंछकर सुखाने लगी।

नताशा: भाबी… आप तो शर्मा गई! ह हे हे…

मैं: बस सूख जाओ और यहाँ से निकल जाओ।

मेरा लहजा स्वाभाविक रूप से ठंडा था क्योंकि मुझे इस जवान लड़की की बातें ज़्यादा पसंद नहीं आईं।

सुधा: हाँ दीदी, भाबी सही कह रही हैं! गुरु-जी हमारा इंतज़ार कर रहे हैं!

कुछ ही मिनटों में मैं पूरी तरह सूख गई और संजीव का दिया हुआ पवित्र वस्त्र पहनने वाली थी। जैसे ही मैंने भूरे कागज़ का पैकेट खोला, मुझे पहले अपनी अंडरवियर मिली और फिर मेरा पेटीकोट और ब्लाउज़, लेकिन… लेकिन साड़ी कहाँ थी!

मैं: अरे! क्या तुम्हें पैकेट में साड़ी मिली?

नताशा: नहीं भाबी… सिर्फ़ इनर हैं और… और एक पेटीकोट और एक ब्लाउज़।

मैं: ओ! मैं समझ गयी ।

सुधा: मेरे लिए भी यही।

हम सबने जल्दी से अपने सफ़ेद कपड़े पहन लिए - सफ़ेद ब्रा, सफ़ेद पैंटी, सफ़ेद ब्लाउज़ और सफ़ेद पेटीकोट - शायद असली “पवित्रता” की निशानी! कपड़े पहनने के बाद हम वॉशरूम से बाहर निकले।

गुरु-जी: जय लिंगा महाराज! यहाँ नीचे आओ… हम प्रार्थना करेंगे और यह परीक्षा खत्म करेंगे।

प्रार्थना बहुत छोटी थी और हमने लिंगा महाराज को फूल चढ़ाए और एक साथ “जय लिंगा महाराज” कहकर खत्म की। उसके बाद गुरु-जी कमरे में बीच वाली सीट पर बैठ गए और संजीव और उदय उनके दोनों तरफ़ खड़े हो गए जबकि हम तीनों उनके सामने खड़े हो गए।

गुरु-जी: रश्मि, क्या तुम जानती हो कि नताशा और सुधा असल में यहाँ क्यों आयी हैं?

मैं इस सवाल से थोड़ा हैरान तो हुयी लेकिन मैंने नॉर्मल तरीके से जवाब दिया।

मैं: दीक्षा के लिए, मुझे लगता है गुरु-जी….

गुरु-जी: नहीं मेरे बच्चे। दीक्षा तो एक वजह है, लेकिन इससे भी बड़ी चिंता की बात है।

ज़ाहिर है, मैं थोड़ा हैरान था क्योंकि मुझे इन छोटी लड़कियों में कोई अजीब बात नहीं दिखी।

जब मैंने उन दोनों लड़कियों को शक भरी नज़रों से देखा, तो वे बिल्कुल नॉर्मल लग रही थीं। मुझे कम से कम उनके चेहरों पर कोई "चिंता" नहीं दिखी। मैंने गुरु-जी को शक भरी नज़रों से देखा।

गुरु-जी: हाँ रश्मि, उनके शरीर में एक रेयर डिफॉर्मिटी है।

मैं: ओ!।

गुरु-जी: संजीव, उदय… मैंने तुम दोनों को खास तौर पर इसलिए बुलाया है क्योंकि तुमने पक्का इस तरह की प्रॉब्लम का सामना नहीं किया है और मैं चाहता हूँ कि तुम दोनों आश्रम में आने वाले किसी भी विज़िटर या भक्त में इस रेयर क्राइसिस के बारे में जान लो।

उदय, संजीव: जी गुरु-जी।

यह सुनकर, मैं नैचुरली यह जानने के लिए बहुत उत्सुक हो रही थी कि गुरु-जी असल में किस बारे में बात कर रहे थे।

गुरु-जी: मुझे मानना पड़ेगा कि मैं खुद भी इस अजीब प्रॉब्लम का सॉल्यूशन पाकर काफी खुश हूँ। संजीव और उदय के फायदे के लिए मैं इस कंडीशन के सॉल्यूशन प्रोसेस की असली डिटेल्स में जाने से पहले थोड़ा और डिटेल में बताऊँगा।

संजीव: हाँ, यह सच में हेल्पफुल होगा गुरु-जी।

जारी रहेगी
 

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CHAPTER 8-छठा दिन

निर्मलता परीक्षा-शुद्धिकरण

अपडेट-13

चूचक

गुरुजी ने प्राथना की, प्रार्थना बहुत छोटी थी और हमने लिंगा महाराज को फूल चढ़ाए और एक साथ “जय लिंगा महाराज” कहकर प्रार्थना खत्म की। उसके बाद गुरुजी कमरे में बीच वाली सीट पर बैठ गए और संजीव और उदय उनके दोनों तरफ खड़े हो गए, जबकि हम तीनों उनके सामने खड़े हो गए।

गुरुजी: रश्मि, क्या तुम जानती हो कि नताशा और सुधा असल में यहाँ क्यों हैं?

मैं इस सवाल से थोड़ा हैरान तो हुयी लेकिन नॉर्मल तरीके से जवाब दिया।

मैं: लगता है दीक्षा के लिए गुरुजी….

गुरुजी: नहीं मेरी बच्ची। दीक्षा तो एक वजह है, लेकिन एक बहुत बड़ी चिंता है।

नैचुरली मैं थोड़ा हैरान थी क्योंकि मुझे इन जवान लड़कियों में कोई अजीब बात नहीं लगी। जब मैंने उन दोनों लड़कियों को शक भरी नज़रों से देखा, तो वे बिल्कुल नॉर्मल लग रही थीं। मुझे कम से कम उनके चेहरों पर तो कोई “चिंता” नहीं दिखी। मैंने गुरुजी को शक भरी नज़रों से देखा।

गुरुजी: हाँ रश्मि, उनके शरीर में एक रेयर डिफॉर्मिटी है।

मैं: ओ!

गुरु-जी: संजीव, उदय… मैंने तुम दोनों को खास तौर पर इसलिए बुलाया है क्योंकि तुमने पक्का इस तरह की प्रॉब्लम का सामना नहीं किया है और मैं चाहता हूँ कि तुम दोनों आश्रम में आने वाले किसी भी विज़िटर या भक्त में इस रेयर क्राइसिस के बारे में अवेयर रहो।

उदय, संजीव: जी गुरु-जी।

यह सुनकर, मैं नैचुरली यह जानने के लिए बहुत उत्सुक हो रही थी कि गुरु-जी असल में किस बारे में बात कर रहे थे।

गुरु-जी: मुझे मानना पड़ेगा कि मैं खुद भी इस असाधारण और रेयर प्रॉब्लम का सॉल्यूशन पाकर काफी खुश हूँ। संजीव और उदय के फायदे के लिए मैं इस कंडीशन के सॉल्यूशन प्रोसेस की असली डिटेल्स में जाने से पहले प्रील्यूड को थोड़ा डिटेल में बताऊँगा।

संजीव: हाँ, यह सच में हेल्पफुल होगा गुरु-जी।

गुरु-जी: शुरू करने के लिए मैं तुम्हें इस डिफॉर्मिटी का नाम बताता हूँ – “इनवर्टेड निप्पल”।

संजीव: कौन सा निप्पल गुरु-जी?

गुरु-जी: इनवर्टेड। आसान शब्दों में, इनवर्टेड निप्पल का सीधा मतलब है कि एक औरत के निप्पल बाहर निकलने के बजाय उसके एरोला में अंदर की तरफ मुड़े (इनवेजिनेटिंग) होते हैं।

उदय: कितना अजीब है गुरु-जी! मैंने पहले कभी ऐसा कुछ नहीं सुना! क्या सच में ऐसा होता है?

गुरु-जी: हाँ, मैं मानता हूँ मेरे बच्चे कि ऐसा बहुत कम होता है, लेकिन होता ज़रूर है। हो सकता है कि यह बिना निप्पल वाले ब्रेस्ट जैसा लगे।

मैं भी अपनी हैरानी रोक नहीं पायी ।

मैं: बिना निप्पल वाले ब्रेस्ट…!!! मेरा मतलब है… अरे… ऐसा कैसे हो सकता है… ??!!!??

गुरु-जी: नहीं, नहीं, मैंने तो बस समझने के लिए कहा था… जिस औरत को यह कंडीशन होती है, उसके ब्रेस्ट से निप्पल ऐसे दिखते हैं जैसे गायब हों… असल में वे उसके एरोला के अंदर बंद होते हैं… अब समझी रश्मि?

मैं: ओ… ठीक है गुरु-जी।

हालाँकि मैंने सिर हिलाया, लेकिन यकीन नहीं हो रहा था!

गुरु-जी: नताशा और सुधा इसी रेयर डिफॉर्मिटी की विक्टिम हैं।

यह जानकर मैं काफी शॉक्ड थी और खासकर नताशा के लिए महसूस कर रहा थी जो बहुत वाइब्रेंट और ग्रेसफुल लग रही थी और उसका फिगर भी बहुत अच्छा था!

गुरु-जी: लेकिन यह कहने के बाद मुझे यह भी कहना होगा कि यह सच में ठीक हो सकती है। हाँ, ठीक हो सकती है! तो, मेरी बच्ची… (नताशा और सुधा की तरफ मुड़ते हुए)…आपको किसी भी तरह से कमतर महसूस करने की ज़रूरत नहीं है… खुश हो जाओ!

दोनों बहनें खिलखिला उठीं और ऐसा लगा कि यह खामोश हंसी उनके लिए काफी दर्दनाक थी, जो कि प्रॉब्लम और उससे जुड़ी शर्म को देखते हुए नैचुरल भी था।

उदय: गुरु-जी, क्या आपको इस अजीब हालत के बारे में पहले से पता था? मेरा मतलब है… क्या आपको इसकी गहरी जानकारी थी? मुझे तो यह बहुत कम मिलने वाली बात लगती है!

गुरु-जी: अच्छा सवाल उदय… हाँ, हालाँकि मुझे इस अजीब हालत के बारे में पता था, लेकिन मैंने इसके सॉल्यूशन पर काम नहीं किया था, न ही मेरे पास असल में काम करने के लिए कोई केस था। चूँकि आपने इसके बारे में पूछा है, तो मैं बेहतर समझने के लिए अपना अनुभव डिटेल में शेयर करता हूँ। और मैं डिटेल्स के बारे में इतना फ्रैंक रहूँगा कि प्रॉब्लम को विज़ुअलाइज़ करवा सकूँ।

संजीव: थैंक्स गुरु-जी… इससे हमें फ्यूचर में इस प्रॉब्लम को कैसे सॉल्व करना है, यह जानने में मदद मिलेगी।

गुरु-जी: तुम सही कह रहे हो… (गुरु-जी ने थोड़ी देर के लिए अपनी आँखें बंद कर लीं) … जहाँ तक मुझे याद है, यह मेरे आश्रम के शुरुआती दिनों की बात है जब मेरे गुरुदेव ने पहली बार मुझे इस अजीब कंडीशन के बारे में बताया था। शुरू में मेरा रिएक्शन भी काफी हद तक उदय जैसा ही था, लेकिन जब मेरे गुरुदेव ने मुझे कंडीशन के बारे में बताया तो मुझे प्रॉब्लम की गंभीरता समझ में आई। उन्होंने मुझसे कहा कि इस प्रॉब्लम का सर्जिकल इंटरवेंशन एक ऑप्शन है, लेकिन वह चाहते थे कि मैं इलाज पाने के लिए किसी नेचुरल पारंपरिक तरीके पर काम करूँ।

उदय: क्या आप कर पाए…

गुरु-जी: हाँ उदय… लेकिन यह सच में मुश्किल था… मुझे कोई इलाज फाइनल करने से पहले बहुत स्टडी करनी पड़ी… यह एक लंबी कहानी है…

संजीव: प्लीज़ गुरु-जी… हमें शॉर्ट में बताओ… आप ने कैसे ?…

गुरु-जी: हाँ… मैं इस पर आ रहा हूँ… असल में जब मैंने अपने गुरुदेव से पूछा कि उस सिंड्रोम का शिकार कौन था तो वह थोड़ी देर चुप रहे। मैं नैचुरली क्यूरियस था.. जब मैंने अपना सवाल दोहराया… तो वह थोड़े उदास दिखे और जवाब दिया “तुम्हारी गुरु-माता”।

उदय और संजीव: ओह नहीं! उनकी पत्नी!

गुरुजी: हाँ… यह बात मेरे लिए भी बहुत चौंकाने वाली थी। गुरुदेव ने माना कि वह अपने बहुत बिज़ी शेड्यूल से कोई समय नहीं निकाल पा रहे थे, जो पूरी तरह से ‘तंत्र’ और मोक्ष के रास्ते में कुछ बहुत ज़रूरी लक्ष्यों को पाने पर फोकस था… इसलिए वह चाहते थे कि मैं यह काम करूँ और गुरुमाता के लिए एक ऐसा इलाज तैयार करूँ, जिसमें सर्जरी की ज़रूरत न पड़े।

उदय: और जिसका इस्तेमाल ऐसी ही प्रॉब्लम वाली दूसरी औरतों को ठीक करने में किया जा सकता है।

गुरु-जी: बिल्कुल उदय…

संजीव: लेकिन गुरु-जी… मेरा मतलब है… अरे… क्या आपके गुरुदेव का यह फैसला थोड़ा देर से नहीं आया…?

गुरु-जी: बिल्कुल संजीव… असल में मैंने गुरुदेव से भी यही सवाल पूछा था… और उन्होंने मुझे बताया कि मेरे सीनियर गुरु-भाई, अद्रिजावर्धन, जिन्हें उन्होंने पहले यह काम दिया था, इसका कोई इलाज नहीं निकाल पाए…

संजीव: मैं समझ गया… तो आपके गुरुदेव ने आपको यह काम दिया।

गुरु-जी: हाँ। हालाँकि गुरुदेव ने मुझे बताया कि यह कमी उनकी शादीशुदा ज़िंदगी में कभी रुकावट नहीं बनी, लेकिन उन्हें लगा कि गुरुमाता कहीं न कहीं अपने अंदर दुखी होंगी कि उनमें वह औरत वाला गुण नहीं था।

संजीव: बिल्कुल सही। (मेरी तरफ मुड़कर) आप क्या कहती हैं मैडम?

मैं: उम्म… अरे… हाँ, ज़रूर।

गुरुजी: हाँ रश्मि, लेकिन मैं कभी समझ नहीं पाया कि उन्हें दिमागी तौर पर इतनी तकलीफ़ क्यों हुई।

मैं: वो ज़रूर रही होंगी, मेरा मतलब है... अरे... दिमागी तौर पर बहुत मज़बूत रही होंगी क्योंकि वो गुरुजी के साथ थी ...

गुरुजी: सच में थीं! लेकिन तुम्हें याद रखना चाहिए रश्मि... उनकी शादीशुदा ज़िंदगी की तुलना आम आदमी की ज़िंदगी से नहीं करनी चाहिए... गुरुदेव और गुरु-माता दोनों ही लिंगा महाराज के लिए समर्पित थे और आश्रम का ये इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में लगे हुए थे जो तुम आज देखते हो।

मैं: मैं समझ गया...

गुरुजी: लेकिन ज़रा मेरी हालत तो सोचो! क्योंकि मैं अभी भी आश्रम में एक लर्नर था और गुरु-माता ऐसी थीं... तुम्हें पता है... आश्रम में उनकी बहुत इज़्ज़त थी... ज़ाहिर है... क्योंकि वो गुरुदेव की पत्नी थीं! मैं बस सोच रहा था कि मैं उनसे इस तरह की पर्सनल प्रॉब्लम के बारे में कैसे पूछ सकता हूँ।

संजीव और उदय: बिल्कुल सही गुरु-जी! फिर आपने क्या किया?

गुरुजी: तुम्हें पता है… करने को कुछ खास नहीं था… मैं बिल्कुल भी शुरू नहीं कर पाया… कुछ दिनों तक अपने मन से लड़ने के बाद… मैंने बस गुरुदेव के सामने सरेंडर कर दिया कि… कि मेरे लिए इस बारे में गुरु-माता से बात करना काफी नामुमकिन काम था।

उदय: फिर?

गुरुजी: गुरुदेव ने मेरी हिचकिचाहट को समझा और मुझे उस रात आधी रात को अपनी झोपड़ी में मिलने के लिए कहा।

संजीव: आधी रात… सच में कमाल की बात है! फिर क्या हुआ गुरुजी?

गुरुजी: आपकी तरह मैं भी आधी रात को लेकर थोड़ा हैरान था। असल में मैं इस बात को लेकर एक तरह की दुविधा में था कि गुरुदेव ने मुझे उस समय क्यों बुलाया क्योंकि वह उनका मेडिटेशन का समय होता है। खैर, मैं घबराए हुए कदमों से उनकी झोपड़ी में गया और गुरुदेव ने मुझे एक मज़ेदार बात बताई। गुरु-माता से प्रॉब्लम के बारे में बात करने में मेरी हिचकिचाहट को देखते हुए और क्योंकि नैचुरली इसके लिए ब्रेस्ट एग्ज़ामिनेशन की ज़रूरत थी, उन्होंने रात का वह समय सबसे सही चुना क्योंकि गुरु-माता हमेशा बहुत गहरी और गहरी नींद में सोती थीं और तब तक नहीं जागती थीं जब तक कुछ बहुत, बहुत सीरियस न हो जाए।

उदय और संजीव: ओह्ह! मैं समझ गया… हा हा हा….

मैं, नताशा और सुधा भी यह सुनकर मुस्कुरा रहे थे।

गुरु-जी (मुस्कुराते हुए और हम सबकी तरफ देखते हुए): इसलिए शायद यह कंडीशन की जांच करने का सबसे सेफ़ टाइम था। लेकिन नैचुरली मैं थोड़ा नर्वस था, उस समय छोटा और नासमझ होने के कारण… जैसा कि आप अच्छी तरह समझ सकते हैं… लेकिन गुरुदेव ने मुझे भरोसा दिलाया और कंडीशन के बारे में फिर से बताया, इस बार पूरी डिटेल में।

जारी रहेगी
 

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CHAPTER 8-छठा दिन

निर्मलता परीक्षा-शुद्धिकरण

अपडेट-14

चूचक

गुरु-जी: आपकी तरह मैं भी इस बात से की गुरूजी ने मुझे आधी रात में बुलाया था, को लेकर थोड़ा हैरान था। असल में मैं इस बात को लेकर थोड़ी कन्फ्यूजन में था कि गुरुदेव ने मुझे उस समय क्यों बुलाया, क्योंकि वह उनका मेडिटेशन का समय होता है। खैर, मैं घबराए हुए कदमों से उनकी झोपड़ी में गया और गुरुदेव ने मुझे एक मज़ेदार बात बताई। गुरु-माता से प्रॉब्लम के बारे में बात करने में मेरी हिचकिचाहट को सही ठहराते हुए और क्योंकि नैचुरली इसके लिए ब्रेस्ट एग्ज़ामिनेशन की ज़रूरत थी, उन्होंने रात का वह समय सबसे सही चुना क्योंकि गुरु-माता हमेशा बहुत गहरी और पक्की नींद में सोती थीं और तब तक नहीं जागती थीं जब तक कुछ बहुत, बहुत सीरियस न हो जाए।

उदय और संजीव: ओह! मैं समझ गया… हा हा हा….

मैं, नताशा और सुधा भी यह सुनकर मुस्कुरा रहे थे।

गुरु-जी (मुस्कुराते हुए और हम सबकी तरफ देखते हुए): इसलिए शायद यह कंडीशन की जांच करने का सबसे सेफ टाइम था। लेकिन ज़ाहिर है, मैं थोड़ा नर्वस था, क्योंकि उस समय मैं छोटा और नासमझ था... जैसा कि आप अच्छी तरह समझ सकते हैं... लेकिन गुरुदेव ने मुझे भरोसा दिलाया और इस बार पूरी डिटेल में हालत के बारे में बताया।

उन्होंने मुझे बताया कि उन्होंने निप्पल स्टिम्युलेशन के आसान तरीके आज़माए हैं जैसे रगड़ना और धीरे से चूसना और उंगलियों से निप्पल को बाहर निकालने की कोशिश करना, लेकिन नाकाम रहे। गुरुदेव ने बताया कि बहुत ज़्यादा स्टिम्युलेटेड हालत में भी निप्पल मुश्किल से स्किन की सतह तक आते हैं। उन्होंने मुझे उस दिन सिर्फ़ गुरु-माता के निप्पल को स्टडी करने और पहले फिज़ियोलॉजिकल डिफॉर्मिटी को समझने को कहा।

संजीव: ठीक है, मुझे लगता है कि फर्स्टहैंड इंप्रेशन के लिए...

गुरु-जी: बिल्कुल संजीव... फिर गुरुदेव मेडिटेशन के लिए दूसरे कमरे में चले गए लेकिन उन्होंने मुझे गारंटी दी कि गुरु-माता अपने ब्रेस्ट एरिया में हल्की हलचल के कारण नहीं उठेंगी।

उदय (मुस्कुराते हुए): गुरु-जी... कहना होगा..आपके लिए . बहुत ही डेसी सिचुएशन थी!

गुरु-जी: डेसी एक बहुत पोलाइट शब्द है मेरे बच्चो ... यह एक बहुत ही डाउटफुल ( संदेहपूर्ण) और खतरनाक सिचुएशन थी जिसमें मेरे गुरुदेव ने मुझे रखा था... ज़रा सोचो अगर गुरु-माता ने आँखें खोलीं और मुझे बिस्तर पर अपने पास पाया!

संजीव: खतरनाक! एकदम खतरनाक!

गुरु-जी: लेकिन साथ ही मैं यह भी समझ सकता था कि अगर गुरुदेव ने मुझ पर भरोसा किया था और इस काम के लिए रात का वह हिस्सा चुना था, तो यह एकदम सही होना चाहिए। इसलिए मैंने भी अपने मन को तैयार कर लिया।

गुरु-जी थोड़ी देर रुके और सबकी तरफ देखा, खासकर हम तीनों लड़कियों की तरफ, जो कमरे में थीं – मैं, नताशा और सुधा। ज़ाहिर है, कहानी में अजीब हालात की वजह से हम सब काफी अजीब महसूस कर रहे थे।

गुरु-जी: जैसे ही गुरुदेव दूसरे कमरे में गए, उन्होंने एक तेज़ लैंप जला दिया ताकि मैं बेहतर तरीके से देख सकूँ। मैं अब कमरे में अकेला था और मैंने देखा कि गुरु-माता खाट पर गहरी नींद सो रही थीं।

उदय: यह आपके लिए बहुत अजीब हालत रही होगी गुरु-जी…

गुरु-जी: ज़ाहिर है… मुझे लगा जैसे मैं उनकी प्राइवेसी में दखल दे रहा हूँ… मैं बहुत, बहुत अजीब महसूस कर रहा था! गुरु-माता 40+ की थीं और मैंने गुरु-माता को पहले कभी ऐसे नहीं देखा था… अपनी नाइट ड्रेस में गहरी नींद में सोती हुई… लेकिन… लेकिन मुझे अपना इंस्पेक्शन ( जाँच) शुरू करना थी क्योंकि यह मेरे गुरुदेव का ऑर्डर था।

मैंने मन ही मन गुरु-जी को अपनी बात में इतना सस्पेंस बनाने का पूरा क्रेडिट दिया और हम सब आगे की कहानी जानने के लिए काफी बेचैन थे। जैसे ही मैंने नताशा और सुधा की तरफ देखा, मैंने देखा कि दोनों बहनों के होंठ थोड़े खुले हुए थे और उनका पूरा ध्यान गुरु-जी पर था।

गुरु-जी: पहले कमरे में हल्की रोशनी थी, लेकिन अब जब गुरुदेव ने बल्ब ऑन किया तो मैं यह देखकर थोड़ा हैरान रह गया कि गुरु-माता ने ब्लाउज और घाघरा वाला थोड़ा सा छोटा नाइटवियर पहना हुआ था। चूंकि गर्मी का मौसम था, इसलिए उनके कम कपड़ों में होने की और भी वजह थी, लेकिन उन्होंने जो घाघरा पहना हुआ था वह बहुत छोटा था और उनकी जांघों को भी पूरी तरह से ढक नहीं रहा था। यह एक तरह का मिनी-घाघरा था जो जवान लड़कियां पहनती हैं, लेकिन मुझे लगा कि गुरु-माता सोते समय गर्मी से बचने के लिए इसे पहनती होंगी।

संजीव: उफ़! आपके लिए तो यह बहुत अजीब सिचुएशन है गुरु-जी! आप क्या कहती हैं मैडम?

संजीव मुझ पर बहुत मतलब से मुस्कुराया जैसे मैं बिस्तर पर मिनी-घाघरा पहने लेटी हूँ और वह मेरे पास बैठकर मेरे नंगे, आधे कपड़ों को देख रहा हो।

मैं: हाँ… उफ़… पूरी तरह से बेकार सिचुएशन!

गुरु-जी: हाँ रश्मि… और… मुझे उम्मीद है कि तुम दोनों इस बात से बोर नहीं हुई हो? (नताशा और सुधा की ओर इशारा करते हुए)

नताशा: उफ़… नहीं, नहीं… आप बहुत मेहरबान हैं गुरु-जी कि आपने हिस्ट्री डिटेल में बताई… जो… उफ़… हमारी अपनी प्रॉब्लम से जुड़ी है।

गुरु-जी: हाँ, बहुत बढ़िया कहा नताशा! हालाँकि इससे शायद सीधे तौर पर तुम्हें कोई मदद न मिले या तुम उससे जुड़ न पाओ, लेकिन उदय और संजीव के लिए प्लीज़ इस सिंड्रोम की पूरी कहानी और इसके नॉन-सर्जिकल इलाज के बारे में जानने पर ध्यान दो जो मैंने बता रहा हूँ ।

नताशा और सुधा: जी गुरु-जी।

गुरु-जी: चलो मैं फिर से उस रात की बात करता हूँ.... (गुरु-जी रुके और अपनी मज़ेदार कहानी सुनाना शुरू किया) हालाँकि मैं थोड़ा अटका हुआ महसूस कर रहा था, फिर भी मैं बहुत सावधानी से आगे बढ़ा... मैंने धीरे से गुरु-माता के ब्लाउज के हुक खोले.... (गुरु-जी ने मेरी आँखों में देखा और मुझे औरतों वाली शर्म से अपनी आँखें नीची करनी पड़ीं)... मेरे पास आगे बढ़ने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं था क्योंकि यह मेरे गुरुदेव का आदेश था...

उदय: लेकिन... गुरु-जी... क्या दादी (आपकी ) गुरु-माता को सच में कुछ महसूस नहीं हुआ... मेरा मतलब है कि वह कितनी गहरी नींद में सो रही थीं?

गुरुजी: उदय, यह देखकर मैं भी काफी हैरान था! मुझे लगता है कि शायद इसीलिए गुरुदेव इतने कॉन्फिडेंट थे! (फिर से मुस्कुराते हुए)

गुरुजी ने फिर मेरी तरफ देखा और मैं बेवकूफी में मुस्कुरा दी, मुझे ठीक से समझ नहीं आ रहा था कि कैसे रिएक्ट करूँ। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ रही थी, मेरी साँसें अब थोड़ी तेज़ चल रही थीं और मेरे गीले ब्लाउज के अंदर मेरे दो घने गोले तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहे थे।

संजीव: फिर भी गुरुजी… मेरा मतलब है… आप बहुत ज़्यादा नर्वस रहे होंगे…

गुरुजी: सच में नहीं, लेकिन हाँ, बेशक थोड़ी सी घबराहट हुई… सिर्फ इसलिए क्योंकि वह मेरी गुरु-माता थीं… अगर कोई और औरत होती तो भी यह फीलिंग नहीं आती…

संजीव: फिर क्या हुआ गुरुजी?

गुरुजी: खुशकिस्मती से गुरु-माता ने नीचे कुछ नहीं पहना था और जैसे ही मैंने उनके ब्रेस्ट पर नज़र डाली, मैं सच में सदमे में आ गया!

उदय और संजीव गुरु-जी को देखकर बहुत नाराज़ थे। सच कहूँ तो मैं भी और जानने के लिए बहुत उत्सुक थी । गुरु-जी बेवजह रुक रहे थे जिससे हम सब बेसब्र हो रहे थे।

उदय: आपने क्या नोटिस किया गुरु-जी?

गुरुजी: अच्छा… आप जानते हैं गुरु-माता एक एवरेज बॉडी वाली औरत थीं, थोड़ी ज़्यादा मोटी, लेकिन मैं बस… मेरा मतलब है… यह देखकर हैरान रह गया कि उनके भूरे निप्पल पूरी तरह से उल्टे थे! मेरा यकीन करो उदय… अगर मैंने वह नहीं देखा होता तो मुझे यकीन नहीं होता! जब मैंने उनके निप्पल देखने की कोशिश की तो मुझे सिर्फ़ उनके बड़े गोल भूरे एरोला दिखे… निप्पल उनके बूब के अंदर पूरी तरह से उल्टे थे! मैंने उनके निप्पल को छूने और उन्हें थपथपाने की कोशिश की ताकि वे बाहर निकल आएं, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर पाया। निप्पल अंदर तक धंसे हुए थे और बिल्कुल भी खड़े नहीं हो रहे थे!

उदय: क्या आपको नैचुरल रिएक्शन भी नहीं दिखा गुरु-जी?

गुरु-जी: बहुत अच्छी बात उदय... आम तौर पर जब आप किसी औरत के ब्रेस्ट एरिया को छूते हैं, तो लगभग रेगुलर तौर पर उसके पैरों में हलचल होती है... लेकिन मैंने इस पर ध्यान दिया, जो सबसे कमाल की बात थी! मैं गुरु-माता के और पास गया और निप्पल को बाहर निकालने के लिए अपने अंगूठे को उनके एरोला के बीच में डालने की कोशिश की, लेकिन मेरी कोशिश का कोई पॉज़िटिव रिस्पॉन्स नहीं मिला!

संजीव: बहुत अजीब लग रहा है!

गुरु-जी: बिल्कुल! मैंने ध्यान से देखने पर पाया कि उनके निप्पल का एरोला पर चिपकाव इतना सख़्त था कि यह असल में किसी भी स्टिम्युलेशन के कारण निप्पल को नॉर्मल रूप से बढ़ने नहीं दे रहा था।

संजीव: क्या दादी गुरु मा के साथ स्टिम्युलेशन का कोई और तरीका भी काम कर सकता था?... मेरा मतलब है क्या आपने वह ट्राई किया गुरु-जी?

गुरु-जी: सोचने का सही तरीका संजीव… (गुरु-जी ने तारीफ़ में आगे सिर हिलाया) मैंने भी स्टिम्युलेशन का एक अलग तरीका सोचा, लेकिन ज़ाहिर है कि बहुत सावधान रहना था ताकि मैं गुरु-माता को जगा न दूँ। मैंने अपने मुलायम हाथों से धीरे-धीरे उनके नंगे ब्रेस्ट को पकड़ना शुरू किया और उनके निप्पल एरिया को ध्यान से देख रहा था कि कोई हलचल तो नहीं हो रही।

संजीव: क्या कोई हलचल हुई?

गुरु-जी: (गुरु-जी ने अपने होंठ मरोड़े) बदकिस्मती से नहीं! फिर मैंने उनके ब्रेस्ट के लिए कुछ सेकेंडरी स्टिम्युलेशन के बारे में सोचा और उनके मोटे मुलायम होंठों को छूने की कोशिश की… लेकिन उससे भी कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। मैंने अपनी पूरी हथेली से उनके पूरे बूब को धीरे से पकड़कर कुछ और दबाने की कोशिश की…

जारी रहेगी
 

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CHAPTER 8-छठा दिन

निर्मलता परीक्षा-शुद्धिकरण

अपडेट-15

चूचक-उल्टे और फ्लैट निप्पल

गुरु-जी: (गुरु-जी ने अपने होंठ मरोड़े) बदकिस्मती से नहीं! फिर मैंने उनके ब्रेस्ट के लिए कुछ सेकेंडरी स्टिम्युलेशन के बारे में सोचा और उनके मोटे मुलायम होंठों को छूने की कोशिश की… लेकिन उससे भी कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला। मैंने अपनी पूरी हथेली से उनके पूरे बूब को धीरे से पकड़कर कुछ और दबाने की कोशिश की…

उदय: कोई पॉज़िटिव नतीजा नहीं?

गुरु-जी: नहीं! निप्पल बिल्कुल नहीं दिखे। मैंने कुछ और बार उनके नंगे बूब के अंदर अपना अंगूठा और बीच की उंगली डालकर उनके निप्पल को हिलाने की कोशिश की, लेकिन कोई पॉज़िटिव नतीजा नहीं निकला, लेकिन जब मैंने देखा कि मेरी हरकतों की वजह से गुरु-माता नींद में बहुत थोड़ा हिल रही थीं, तो मैंने वहाँ और ज़्यादा समय नहीं बिताया और मैंने जो भी अपनी जांच में देखा था उसके बारे में बताने के लिए गुरुदेव के पास वापस चला गया। सुधा और नताशा अब मैंने इस बारे में जो भी समझा तुम भी ये सब ध्यान से सुनो.

सुधा : गुरु-जी, इस जांच से आपका क्या ऑब्ज़र्वेशन था?

गुरूजी- गुरुमाता की जाँच के बाद मैंने यह नतीजा निकाला कि गुरु-माता के निप्पल उनके एरोला से इतने सख़्त थे कि बाहरी स्टिम्युलेशन पर रिस्पॉन्ड नहीं कर पा रहे थे।

उदय- ऐसा क्यों होता है गुरूजी?

गुरूजी- इसके लिए हमे इस समस्या के बारे में गहराई से समझना पड़ेगा। दरअसल फ्लैट और उल्टे निप्पल बाहर निकलने के बजाय फ्लैट या अंदर की ओर निकले रहते हैं। ये आमतौर पर नुकसान नहीं पहुंचाते, लेकिन इनसे ब्रेस्टफीडिंग ( बच्चे को दूध पिलाने ) में मुश्किल हो सकती है। फ्लैट या उल्टे निप्पल वाले ज़्यादातर लोग जन्म से ही ऐसे होते हैं। लेकिन अगर आपके निप्पल अचानक से उल्टे हो जाते हैं, तो यह किसी अंदरूनी हेल्थ प्रॉब्लम का संकेत हो सकता है।

फ्लैट निप्पल आपके आस-पास के ब्रेस्ट टिशू के साथ एक सीध में होते हैं। उल्टे निप्पल बाहर निकलने के बजाय आपके ब्रेस्ट की तरफ अंदर की ओर होते हैं। उल्टे और फ्लैट निप्पल आमतौर पर हेल्दी ब्रेस्ट की बनावट के नुकसान न पहुंचाने वाले बदलाव होते हैं।

हालांकि फ्लैट और उल्टे निप्पल आमतौर पर नुकसान न पहुंचाने वाले होते हैं, लेकिन आपके निप्पल के रंग या आकार में अचानक बदलाव किसी अंदरूनी हेल्थ प्रॉब्लम का संकेत हो सकता है। अगर आपके निप्पल अचानक उल्टे हो जाते हैं या बदल जाते हैं तब उन पर ध्यान देने की जरूरत होती है और किसी चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

साधारणतया निप्पल तीन प्रकार के हो सकते हैं।

बाहर निकले हुए। निप्पल आस-पास के ब्रेस्ट टिशू से बाहर निकले हुए। ये अधिकाँश लोग के लिए ऐसे ही होने चाहिए - इसलिए इसे साधारण स्तिथि कह सकते हैं।

फ्लैट। आपके निप्पल फ्लैट और आपके आस-पास के ब्रेस्ट टिशू के साथ एक सीध में होते हैं।

उल्टे। आपके निप्पल अंदर की ओर खिंचते हैं, आपके आस-पास के ब्रेस्ट टिशू के अंदर दब जाते हैं।
फ्लैट और उलटे निप्पल धिकाँश लोग के लिए ऐसे नहीं होते - इसलिए इसे असाधारण स्तिथि कह सकते हैं ।

संजीव:- फ्लैट और उल्टे निप्पल कितने आम हैं?

गुरूजी- जैसा मैंने पहले भी कहा ऐसा काफी कम होता हैं, ये एक दुर्लभ अवस्था है ।

उदय - गुरूजी इसके क्या लक्षण और कारण हैं? और फ्लैट या उल्टे निप्पल क्यों होते हैं?
गुरूजी- किसी के निप्पल फ्लैट या उल्टे होने के कई कारण हो सकते हैं। संभावित कारणों में शामिल हैं:

१ भ्रूण का विकास। आपके निप्पल तब बने थे जब आप भ्रूण थीं। वे चपटे या उल्टे दिख सकते हैं क्योंकि आपके निप्पल का बेस छोटा है या क्योंकि भ्रूण के विकास के दौरान आपके मिल्क डक्ट पूरी तरह से नहीं बने थे।
२. ब्रेस्ट में चोटें। ब्रेस्ट सर्जरी या ब्रेस्टफीडिंग से हुए निशान आपके निप्पल के टिशू को बदल सकते हैं।
इंफेक्शन। बैक्टीरिया आपके निप्पल पर हमला कर सकते हैं और फोड़ा या मैमरी डक्ट एक्टेसिया (जब आपके मिल्क डक्ट बंद हो जाते हैं) पैदा कर सकते हैं। इन स्थितियों के कारण निप्पल चपटे या उल्टे हो सकते हैं।
३. उम्र से जुड़े ब्रेस्ट में बदलाव। उम्र बढ़ने के साथ आपके ब्रेस्ट बदलते हैं। मेनोपॉज तक, आपके मिल्क डक्ट छोटे हो सकते हैं, जिससे आपके निप्पल उल्टे या सपाट हो सकते हैं।
प्रेग्नेंसी। प्रेग्नेंसी के दौरान आपके ब्रेस्ट में दूध भरने से आपके निप्पल चपटे हो सकते हैं।
४ ब्रेस्ट में सूजन। सूजन के कारण आपके निप्पल चपटे या उल्टे दिख सकते हैं। सूजन कम होने के बाद यह आमतौर पर ठीक हो जाता है।
बिनाइन ब्रेस्ट डिजीज। बिनाइन ब्रेस्ट डिजीज वाले लोगों में चपटे या उल्टे निप्पल एक आम लक्षण हैं। इस कंडीशन में ब्रेस्ट में नॉन-कैंसर वाली गांठें होती हैं।
५ ब्रेस्ट की पेजेट डिज़ीज़। यह रेयर टाइप का ब्रेस्ट कैंसर आपके निप्पल की स्किन में होता है। कभी-कभी इसे एक्ज़िमा समझ लिया जाता है, ब्रेस्ट की पेजेट डिज़ीज़ से स्किन पर रैश, सूजन, या निप्पल का चपटा या उल्टा होना जैसे लक्षण हो सकते हैं।
६ ब्रेस्ट कैंसर। जब ब्रेस्ट ट्यूमर मिल्क डक्ट में घुस जाता है, तो इससे आपके निप्पल चपटे या उल्टे हो सकते हैं।

नताशा;- गुरूजी चपटे या उल्टे निप्पल कैंसर के क्या लक्षण हैं ?

गुरूजी- चपटे या उल्टे निप्पल आमतौर पर कैंसर का संकेत नहीं देते हैं। लेकिन अगर आपके निप्पल का लुक अचानक बदल जाए, तो चिकित्स्क को जरूर दिखाना चाहिए और उससे परामर्श करना चाहिए । यह किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है।

जारी रहेगी
 
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