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इस अध्भुत कहानी के इस मोड़ पर मैं इस संशय में हूँ के कहानी को किधर ले जाया जाए ?


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deeppreeti

DEEP PREET
1,802
2,470
159
परिचय

आप सब से एक महिला की कहानी किसी न किसी फोरम में पढ़ी होगी जिसमे कैसे एक महिला जिसको बच्चा नहीं है एक आश्रम में जाती है और वहां उसे क्या क्या अनुभव होते हैं,

पिछली कहानी में आपने पढ़ा कैसे एक महिला बच्चे की आस लिए एक गुरूजी के आश्रम पहुंची और वहां पहले दो -तीन दिन उसे क्या अनुभव हुए पर कहानी मुझे अधूरी लगी ..मुझे ये कहानी इस फोरम पर नजर नहीं आयी ..इसलिए जिन्होने ना पढ़ी हो उनके लिए इस फोरम पर डाल रहा हूँ



GIF1

मेरा प्रयास है इसी कहानी को थोड़ा आगे बढ़ाने का जिसमे परिकरमा, योनि पूजा , लिंग पूजा और मह यज्ञ में उस महिला के साथ क्या क्या हुआ लिखने का प्रयास करूँगा .. अभी कुछ थोड़ा सा प्लाट दिमाग में है और आपके सुझाव आमनत्रित है और मैं तो चाहता हूँ के बाकी लेखक भी यदि कुछ लिख सके तो उनका भी स्वागत है

अगर कहानी किसी को पसंद नही आये तो मैं उसके लिए माफी चाहता हूँ. ये कहानी पूरी तरह काल्पनिक है इसका किसी से कोई लेना देना नही है .


वैसे तो हर धर्म हर मज़हब मे इस तरह के स्वयंभू देवता बहुत मिल जाएँगे. हर गुरु जी स्वामी या महात्मा एक जैसा नही होता. मैं तो कहता हूँ कि 90% स्वामी या गुरु या प्रीस्ट अच्छे होते हैं मगर 10% खराब भी होते हैं. इन 10% खराब आदमियों के लिए हम पूरे 100% के बारे मे वैसी ही धारणा बना लेते हैं. और अच्छे लोगो के बारे में हम ज्यादा नहीं सुनते हैं पर बुरे लोगो की बारे में बहुत कुछ सुनने को मिलता है तो लगता है सब बुरे ही होंगे .. पर ऐसा वास्तव में बिलकुल नहीं है.


1. इसमें किसी धर्म विशेष के गुरुओ पर या धर्म पर कोई आक्षेप करने का प्रयास किया है , ऐसे स्वयंभू गुरु या बाबा कही पर भी संभव है .

2. इस कहानी से स्त्री मन को जितनी अच्छी विवेचना की गयी है वैसी विवेचना और व्याख्या मैंने अन्यत्र नहीं पढ़ी है .

Note : dated 1-1-2021

जब मैंने ये कहानी यहाँ डालनी शुरू की थी तो मैंने भी इसका अधूरा भाग पढ़ा था और मैंने कुछ आगे लिखने का प्रयास किया और बाद में मालूम चला यह कहानी अंग्रेजी में "समितभाई" द्वारा "गुरु जी का (सेक्स) ट्रीटमेंट" शीर्षक से लिखी गई थी और अधूरी छोड़ दी गई थी।


बाद में 2017 में समीर द्वारा हिंदी अनुवाद शुरू किया गया, जिसका शीर्षक था "एक खूबसूरत हाउस वाइफ, गुरुजी के आश्रम में" और लगभग 33% अनुवाद "Xossip" पर किया गया था।

अभी तक की कहानी मुलता उन्ही की कहानी पर आधारित है या उसका अनुवाद है और अब कुछ हिस्सों का अनुवाद मैंने किया है ।

कहानी काफी लम्बी है और मेरा प्रयास जारी है इसको पूरा करने का ।
Note dated 8-1-2024


इससे पहले कहानी में , कुछ रिश्तेदारों, दूकानदार और एक फिल्म निर्देशक द्वारा एक महिला के साथ हुए अजीब अनुभवो के बारे में बताया गया है , कहानी के 270 भाग से आप एक डॉक्टर के साथ हुए एक महिला के अजीब अनुभवो के बारे में पढ़ेंगे . जीवन में हर कार्य क्षेत्र में हर तरह के लोग मिलते हैं हर व्यक्ति एक जैसा नही होता. डॉक्टर भी इसमें कोई अपवाद नहीं है अधिकतर डॉक्टर या वैध या हकिम इत्यादि अच्छे होते हैं, जिनपर हम पूरा भरोसा करते हैं, अच्छे लोगो के बारे में हम ज्यादा नहीं सुनते हैं ...
वास्तव में ऐसा नहीं है की सब लोग ऐसे ही होते हैं ।

सभी को धन्यवाद,


कहानी का शीर्षक होगा


औलाद की चाह



INDEX

परिचय

CHAPTER-1 औलाद की चाह

CHAPTER 2 पहला दिन

आश्रम में आगमन - साक्षात्कार
दीक्षा


CHAPTER 3 दूसरा दिन

जड़ी बूटी से उपचार
माइंड कण्ट्रोल
स्नान
दरजी की दूकान
मेला
मेले से वापसी


CHAPTER 4 तीसरा दिन
मुलाकात
दर्शन
नौका विहार
पुरानी यादें ( Flashback)

CHAPTER 5- चौथा दिन
सुबह सुबह
Medical चेकअप
मालिश
पति के मामा
बिमारी के निदान की खोज

CHAPTER 5 - चौथा दिन -कुंवारी लड़की

CHAPTER 6 पांचवा दिन - परिधान - दरजी

CHAPTER 6 फिर पुरानी यादें

CHAPTER 7 पांचवी रात परिकर्मा

CHAPTER 8 - पांचवी रात लिंग पूजा

CHAPTER 9 -
पांचवी रात योनि पूजा

CHAPTER 10 - महा यज्ञ

CHAPTER 11 बिमारी का इलाज

CHAPTER 12 समापन



INDEX

औलाद की चाह 001परिचय- एक महिला की कहानी है जिसको औलाद नहीं है.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 002गुरुजी से मुलाकात.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 003पहला दिन - आश्रम में आगमन - साक्षात्कार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 004दीक्षा से पहले स्नान.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 004Aदीक्षा से पहले स्नान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 005आश्रम में आगमन पर साक्षात्कार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 006आश्रम के पहले दिन दीक्षा.Mind Control
औलाद की चाह 007दीक्षा भाग 2.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 008दीक्षा भाग 3.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 009दीक्षा भाग 4.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 010जड़ी बूटी से उपचार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 011जड़ी बूटी से उपचार.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 012माइंड कण्ट्रोल.Mind Control
औलाद की चाह 013माइंड कण्ट्रोल, स्नान. दरजी की दूकान.Mind Control
औलाद की चाह 014दरजी की दूकान.Mind Control
औलाद की चाह 015टेलर की दूकान में सामने आया सांपो का जोड़ा.Erotic Horror
औलाद की चाह 016सांपो को दूध.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 017मेले में धक्का मुक्की.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 018मेले में टॉयलेट.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 019मेले में लाइव शो.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 020मेले से वापसी में छेड़छाड़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 021मेले से औटो में वापसीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 022गुरुजी से फिर मुलाकातNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 023लाइन में धक्कामुक्कीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 024लाइन में धक्कामुक्कीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 025नदी के किनारे.Mind Control
औलाद की चाह 026ब्रा का झंडा लगा कर नौका विहार.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 027अपराध बोध.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 028पुरानी यादें-Flashback.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 029पुरानी यादें-Flashback 2.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 030पुरानी यादें-Flashback 3.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 031चौथा दिन सुबह सुबह.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 032Medical Checkup.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 033मेडिकल चेकअप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 034मालिश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 035मालिश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 036मालिश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 037ममिया ससुर.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 038बिमारी के निदान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 039बिमारी के निदान 2.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 040कुंवारी लड़की.First Time
औलाद की चाह 041कुंवारी लड़की, माध्यम.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 042कुंवारी लड़की, मादक बदन.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 043दिल की धड़कनें .NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 044कुंवारी लड़की का आकर्षण.First Time
औलाद की चाह 045कुंवारी लड़की कमीना नौकर.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 046फ्लैशबैक–कमीना नौकर.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 047कुंवारी लड़की की कामेच्छायें.First Time
औलाद की चाह 048कुंवारी लड़की द्वारा लिंगा पूजा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 049कुंवारी लड़की- दोष अन्वेषण और निवारण.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 050कुंवारी लड़की -दोष निवारण.Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 051कुंवारी लड़की का कौमार्य .NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 052कुंवारी लड़की का मूसल लंड से कौमार्य भंग.First Time
औलाद की चाह 053ठरकी लंगड़ा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 054उपचार की प्रक्रिया.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 055परिधानNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 056परिधानNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 057परिधान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 058टेलर का माप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 059लेडीज टेलर-टेलरिंग क्लास.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 060लेडीज टेलर-नाप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 061लेडीज टेलर-नाप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 062लेडीज टेलर की बदमाशी.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 063बेहोशी का नाटक और इलाज़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 064बेहोशी का इलाज़-दुर्गंध वाली चीज़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 065हर शादीशुदा औरत इसकी गंध पहचानती है, होश आया.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 066टॉयलेट.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 067स्कर्ट की नाप.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 068मिनी स्कर्ट.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 069मिनी स्कर्ट एक्सपोजरNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 070मिनी स्कर्ट पहन खड़े होना.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 071मिनी स्कर्ट पहन बैठनाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 072मिनी स्कर्ट पहन झुकना.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 073मिनी स्कर्ट में ऐड़ियों पर बैठना.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 074फोन सेक्स.Erotic Couplings
औलाद की चाह 075अंतर्वस्त्र-पैंटी.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 076पैंटी की समस्या.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 077ड्रेस डॉक्टर पैंटी की समस्या.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 078परिक्षण निरक्षण.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 079आपत्तिजनक निरक्षण.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 080कुछ पल विश्राम.How To
औलाद की चाह 081योनि पूजा के बारे में ज्ञान.How To
औलाद की चाह 082योनि मुद्रा.How To
औलाद की चाह 083योनि पूजा.How To
औलाद की चाह 084स्ट्रैप के बिना वाली ब्रा की आजमाईश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 085परिधान की आजमाईश.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 086एक्स्ट्रा कवर की आजमाईश.How To
औलाद की चाह 087इलाज के आखिरी पड़ाव की शुरुआत.How To
औलाद की चाह 088महिला ने स्नान करवाया.How To
औलाद की चाह 089आखिरी पड़ाव से पहले स्नान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 090शरीर पर टैग.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 091योनि पूजा का संकल्प.How To
औलाद की चाह 092योनि पूजा आरंभ.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 093योनि पूजा का आरम्भ में मन्त्र दान.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 094योनि पूजा का आरम्भ में आश्रम की परिक्रमा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 095योनि पूजा का आरम्भ में माइक्रोमिनी में आश्रम की परिक्रमा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 096काँटा लगा.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 097काँटा लगा-आपात काले मर्यादा ना असते.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 098गोद में सफर.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 099परिक्रमा समापन.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 100चंद्रमा आराधना-टैग.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 101उर्वर प्राथना सेक्स देवी बना दीजिये।NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 102चंद्र की रौशनी में स्ट्रिपटीज़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 103चंद्रमा आराधना दुग्ध स्नान की तयारी.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 104समुद्र के किनारेIncest/Taboo
औलाद की चाह 105समुद्र के किनारे तेज लहरIncest/Taboo
औलाद की चाह 106समुद्र के किनारे अविश्वसनीय दृश्यNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 107एहसास.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 108भाबी का मेनोपॉज.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 109भाभी का मेनोपॉजNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 110भाबी का मेनोपॉज.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 111भाबी का मेनोपॉज- भीड़ में छेड़छाड़.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 112भाबी का मेनोपॉज - कठिन परिस्थिति.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 113बहन के बेटे के साथ अनुभव.Incest/Taboo
औलाद की चाह 114रजोनिवृति के दौरान गर्म एहसास.Incest/Taboo
औलाद की चाह 115रजोनिवृति के समय स्तनों से स्राव.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 116जवान लड़के का आकर्षणIncest/Taboo
औलाद की चाह 117आज गर्मी असहनीय हैNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 118हाय गर्मीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 119गर्मी का इलाजNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 120तिलचट्टा कहाँ गया.NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 121तिलचट्टा कहाँ गयाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 122तिलचट्टे की खोजNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 123नहलाने की तयारीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 124नहलाने की कहानीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 125निपल्स-आमों जितने बड़े नहीं हो सकते!How To
औलाद की चाह 126निप्पल कैसे बड़े होते हैं.How To
औलाद की चाह 127सफाई अभियान.Incest/Taboo
औलाद की चाह 128तेज खुजलीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 129सोनिआ भाभी की रजोनिवृति-खुजलीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 130सोनिआ भाभी की रजोनिवृति- मलहमNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 131स्तनों की मालिशIncest/Taboo
औलाद की चाह 132युवा लड़के के लंड की पहली चुसाई.How To
औलाद की चाह 133युवा लड़के ने की गांड की मालिश .How To
औलाद की चाह 134विशेष स्पर्श.How To
औलाद की चाह 135नंदू का पहला चुदाई अनुभवIncest/Taboo
औलाद की चाह 136नंदू ने की अधिकार करने की कोशिशIncest/Taboo
औलाद की चाह 137नंदू चला गयाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 138भाभी भतीजे के साथExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 139कोई देख रहा है!Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 140निर्जन समुद्र तटExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 141निर्जन सागर किनारे समुद्र की लहरेExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 142फ्लैशबैक- समुद्र की लहरे !Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 143समुद्र की तेज और बड़ी लहरे !Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 144फ्लैशबैक- सागर किनारे गर्म नज़ारेExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 145सोनिआ भाभी रितेश के साथMature
औलाद की चाह 146इलाजExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 147सागर किनारे चलो जश्न मनाएंExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 148सागर किनारे गंदे फर्श पर मत बैठोNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 149सागर किनारे- थोड़ा दूध चाहिएNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 150स्तनों से दूधNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 151त्रिकोणीय गर्म नजाराExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 152अब रिक्शाचालक की बारीExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 153सागर किनारे डबल चुदाईExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 154पैंटी कहाँ गयीExhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 155तयारी दुग्ध स्नान की ( फ़्लैश बैक से वापसी )Mind Control
औलाद की चाह 156टैग का स्थानंतरण ( कामुक)Mind Control
औलाद की चाह 157दूध सरोवर स्नान टैग का स्थानंतरण ( कामुक)Mind Control
औलाद की चाह 158दूध सरोवर स्नानMind Control
औलाद की चाह 159दूध सरोवर में कामुक आलिंगनMind Control
औलाद की चाह 160चंद्रमा आराधना नियंत्रण करोMind Control
औलाद की चाह 161चंद्रमा आराधना - बादल आ गएNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 162चंद्रमा आराधना - गीले कपड़ों से छुटकाराNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 163चंद्रमा आराधना, योनि पूजा, लिंग पूजाNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 164बेडरूमHow To
औलाद की चाह 165प्रेम युक्तियों- दिलचस्प संभोग के लिए आवश्यक माहौलHow To
औलाद की चाह 166प्रेम युक्तियाँ-दिलचस्प संभोग के लिए आवश्यक -फोरप्ले, रंगीलेHow To
औलाद की चाह 167प्रेम युक्तियाँ- कामसूत्र -संभोग -फोरप्ले, रंग का प्रभावHow To
औलाद की चाह 168प्रेम युक्तियाँ- झांटो के बालHow To
औलाद की चाह 169योनि पूजा के लिए आसनHow To
औलाद की चाह 170योनि पूजा - टांगो पर बादाम और जजूबा के तेल का लेपनHow To
औलाद की चाह 171योनि पूजा- श्रृंगार और लिंग की स्थापनाHow To
औलाद की चाह 172योनि पूजा- लिंग पू जाHow To
औलाद की चाह 173योनि पूजा आँखों पर पट्टी का कारणHow To
औलाद की चाह 174योनि पूजा- अलग तरीके से दूसरी सुहागरात की शुरुआतHow To
औलाद की चाह 175योनि पूजा- दूसरी सुहागरात-आलिंगनHow To
औलाद की चाह 176योनि पूजा - दूसरी सुहागरात-आलिंगनHow To
औलाद की चाह 177दूसरी सुहागरात - चुम्बन Group Sex
औलाद की चाह 178 दूसरी सुहागरात- मंत्र दान -चुम्बन आलिंगन चुम्बन Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 179 यौनि पूजा शुरू-श्रद्धा और प्रणाम, स्वर्ग के द्वार Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 180 यौनि पूजा योनि मालिश योनि जन दर्शन Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 181 योनि पूजा मंत्र दान और कमल Group Sex
औलाद की चाह 182 योनि पूजा मंत्र दान-मेरे स्तनो और नितम्बो का मर्दन Group Sex
औलाद की चाह 183 योनि पूजा मंत्र दान- आप लिंग महाराज को प्रसन्न करेंगी Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 184 पूर्णतया अश्लील , सचमुच बहुत उत्तेजक, गर्म और अनूठा अनुभव Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 185 योनि पूजा पूर्णतया उत्तेजक अनुभव Group Sex
औलाद की चाह 186 उत्तेजक गैंगबैंग अनुभव Group Sex
औलाद की चाह 187 उत्तेजक गैंगबैंग का कारण Group Sex
औलाद की चाह 188 लिंग पूजा Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 189 योनि पूजा में लिंग पूजा NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 190 योनि पूजा लिंग पूजा NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 191 लिंग पूजा- लिंगा महाराज को समर्पण NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 192 लिंग पूजा- लिंग जागरण क्रिया NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 193 साक्षात मूसल लिंग पूजा लिंग जागरण क्रिया NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 194योनी पूजा में परिवर्तन का चरण NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 195 योनि पूजा- जादुई उंगलीNonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 196योनि पूजा अपडेट-27 स्तनपान NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 197 7.28 पांचवी रात योनि पूजा मलाई खिलाएं और भोग लगाएं NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 198 7.29 -पांचवी रात योनि पूजा योनी मालिश NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 199 7.30 योनि पूजा, जी-स्पॉट, डबल फोल्ड मालिश का प्रभाव NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 200 7.31 योनि पूजा, सुडोल, बड़े, गोल, घने और मांसल स्त NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 201 7.32 योनि पूजा, स्तनों नितम्बो और योनि से खिलवाड़ NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 202 7. 33 योनि पूजा, योनि सुगम जांच NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 203 7.34 योनि पूजा, योनि सुगम, गर्भाशय में मौजूद NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 204 7.35 योनि सुगम-गुरूजी का सेक्स ट्रीटमेंट NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 205 7.36 योनि सुगम- गुरूजी के सेक्स ट्रीटमेंट का प्रभाव NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 206 7.37 योनि सुगम- गुरूजी के चारो शिष्यों को आपसी बातचीत NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 207 7.38 योनि सुगम- गुरूजी के चारो शिष्यों के पुराने अनुभव NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 208 7.39 योनि सुगम- बहका हुआ मन NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 209 7.40 बहका हुआ मन -सपना या हकीकत Mind Control
औलाद की चाह 210 7.41 योनि पूजा, स्पष्टीकरण NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 211 7.42 योनि पूजा चार दिशाओ को योनि जन दर्शन Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 212 7.43 योनि पूजा नितम्बो पर थप्पड़ NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 213 7.44 नितम्बो पर लाल निशान का धब्बा NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 214 7.45 नितम्ब पर लाल निशान के उपाए Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 215 7.46 बदन के हिस्से को लाल करने की ज़रूरत NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 216 7.47 आश्रम का आंगन - योनि जन दर्शब Exhibitionist & Voyeur
औलाद की चाह 217 7.48 योनि पूजा अपडेट-योनि जन दर्शन NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 218 7.49 योनि पूजा अपडेट योनी पूजा के बाद विचलित मन, आराम! NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 219 CHAPTER 8- 8.1 छठा दिन मामा-जी मिलने आये Incest/Taboo
औलाद की चाह 220 8.2 मामा-जी कार में अजनबियों को लिफ्ट NonConsent/Reluctance
औलाद की चाह 221 8. 3 मामा-जी की कार में सफर NonConsent/Reluctance

https://xforum.live/threads/औलाद-की-चाह.38456/page-8
 
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औलाद की चाह

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CHAPTER 8-छठा दिन

मामा जी के राज

अपडेट-27

चलिए आश्रम लौट चलें -वापसी का सफर

मैंने अपने पूरे सात जन्मों में कभी नहीं सोचा था कि मुझे बहुत कभी भी सस्ती रंडी की तरह व्यवहार करना पड़ेगा। मैंने अपनी ब्रा खोलकर अपनी दूध की बड़ी बोतलें आज़ाद कर लीं।

मैंने अपने बालों की क्लिप खोली और उसे ज़मीन पर फेंक दिया और अपने बालों से अपनी ऊपरी जवानी को छिपाने की कोशिश की। फिर मुझे एक अच्छा विचार सूझा कि मुझे इस क्लिप को अपने लव स्पॉट में लगाना चाहिए ताकि आश्रम जाते समय कोई भी अपना लंड मेरे अंदर पूरा न डाल सके।

मैंने तुरंत क्लिप उठाई और पहले इसे अपने मुँह में डालकर गीला किया और फिर 5-6 स्ट्रोक के साथ इसे अपनी चूत में डाल दिया, जो पहले से ही इतनी गीली थी कि इसे अंदर रखने में कोई दिक्कत नहीं हुई।

मामा-जी (फुसफुसाते हुए स्वर में): रश्मि… रश्मि!

मैं: ओह… हाँ… मामाजी प्लीज मुझे थोड़ी देर आराम करने दो… प्लीज़ मामा-जी… मैं बहुत थक गई हूँ!

मामा-जी: हम्म… ठीक है, मैं समझ सकता हूँ…!

मुझे मामा-जी के बिस्तर से उठने का अहसास हो रहा था, हालाँकि मेरा अपनी आँखें खोलने का मन नहीं कर रहा था। मुझे पता था कि मैंने कुछ भी नहीं पहना है, और मैं बिलकुल नग्न हूँ , लेकिन मुझमें खुद को ढकने की ताकत नहीं थी! मैंने महसूस किया कि मामा-जी पंखे की गति बढ़ा रहे हैं और इस पंखे की हवा से मुझे वाकई बहुत आराम महसूस हो रहा था। मुझे मेरी सुडौल नग्न काया पर हवा की गति बहुत बढ़िया लग रही थी। मैं कुछ और कुछ समय तक उसी स्थिर अवस्था में आराम करती रही , जब तक कि मामा-जी फिर से वापस नहीं आ गए और मुझे हिलाकर खड़ा कर दिया।

मामा-जी: रश्मि! रश्मि! अरे…उठ जाओ ! हम पहले ही देर हो चुकी है मेरी प्यारी! हमें शाम 7 बजे तक आश्रम पहुँचना है। क्या तुम भूल गई हो? रश्मि… तुम्हें गुरु-जी के पास समय पर वापस पहुँचना चाहिए! रश्मि!

जब मैंने “आश्रम” और “गुरु-जी” शब्द सुने, तो मानो मेरे शरीर में बिजली की किरण दौड़ गई। मैं “आश्रम” के बारे में सब कुछ कैसे भूल सकती थी और सब कुछ भूल कर यहाँ इस तरह लेटी हुई थी और मैं अपने ही रिश्तेदार द्वारा चोदे जाने का मैंने कितना मज़ा लिया था !

मैं: हे भगवान!

अब मुझे अपनी आँखें खोलनी पड़ीं और हालाँकि मैं बहुत थकी हुई महसूस कर रही थी , फिर भी मुझे एहसास हुआ कि अब मुझे चलना चाहिए। सब कुछ होने के बाद भी मेरे पास गुरुजी के आदेशों का उल्लंघन करने की हिम्मत नहीं थी और मुझे याद था की उन्होंने मुझे शाम तक वापस आने का विशेष रूप से उल्लेख किया था। मैंने देखा कि मामाजी अपनी शर्ट को अपनी पतलून के अंदर डाल रहे थे और लगभग आगे बढ़ने के लिए तैयार थे। मैंने क्षण भर के लिए अपनी आँखें बंद कीं, एक गहरी साँस ली और अपनी सारी ऊर्जा इकट्ठा करके कपड़े पहन लिए।

मैं: (मैं इसे कैसे भूल गयी ! मैं कैसे चूक गयी ) ...इश! मामा जी क्या हमे बहुत देर हो चुकी हैं?

मेरे शरीर में फिर से ताकत आ गई थी और मैं जल्दी से बिस्तर से उतर गयी , एक हाथ से अपने नंगे बालों वाले चूतड़ को ढँकते हुए और अपनी गरिमा को बचाने के लिए मैंने अपने दूसरे हाथ को अपने हिलते हुए स्तनों पर रखा। जाहिर है मैं एक भयानक रूप से अभद्र रूप दिखा रही थी , लेकिन इन हालात में मेरे पास कोई विकल्प भी नहीं था।

मामाजी स्वाभाविक रूप से मुझे घूर रहे थे।

मामा जी: उम्म... रश्मी , बहुत देर नहीं हुई है, लेकिन (अपनी घड़ी की ओर देखते हुए) ... लेकिन अब हमारे पास एक मिनट भी और बर्बाद करने की फुर्सत नहीं है !

मैंने अपना ब्लाउज और पेटीकोट बिस्तर के पास से उठाया और मामा जी ने मुस्कुराते हुए मेरी अंडरवियर मेरी तरफ बढ़ा दी। बूढ़ा बदमाश!

वे लगातार मेरी नंगी जवानी को देख रहा था - जो कि स्वाभाविक था - अपनी आँखों के सामने एक परिपक्व महिला को इस तरह पूरी तरह से नग्न देखने का मौका कितनी बार मिलता उन्हें - शायद ही! जैसे ही हमारी आँखें मिलीं, मुझे स्वाभाविक शर्मिंदगी में अपनी पलकें झुकानी पड़ीं और अपनी साड़ी और पेटीकोट से अपने माथे को ढकते हुए , मुझे शौचालय की ओर भागना पड़ा।

मैंने खुद को साफ किया और रिकॉर्ड कम समय में कपड़े पहने और लौट आयी . मामा जी ने मेरी फुर्ती और जल्दी त्यार होने की खूब सराहना की। लेकिन मैं थोड़ा तनाव महसूस कर रही थी कि क्या हम निर्धारित समय में आश्रम पहुँच पाएँगे।

मामा जी: चिंता मत करो प्रिये... मैं तुम्हें आश्रम तक पहुँचा दूँगा! मेरी ड्राइविंग स्किल्स पर भरोसा रखो। तुम कार में बैठ जाओ और मैं घर को लॉक करने के बाद तुम्हें आता हूँ ।

मैं: मामा जी, मैं आप पर निर्भर हूँ…प्लीज जल्दी करियेगा!

हालाँकि मामा जी को शहर में शहर की चहल-पहल के कारण और ट्रैफिक के कारण धीरे-धीरे चलना पड़ा, लेकिन जैसे-जैसे हम देहात की ओर बढ़े, उन्होंने अपनी कार की गति बढ़ा दी। मैंने उनके ड्राइविंग कौशल की सराहना की, क्योंकि इस उम्र में भी उनके हाथ स्टीयरिंग पर काफी स्थिर थे। इसलिए, कुछ ही समय में, हमने उल्लेखनीय दूरी तय कर ली!

मेरे लिए ड्राइविंग का रास्ता कमोबेश आसान था, सिवाय इसके कि मामा जी ने सुनसान रास्तों से गुजरते हुए "फायदा" उठाने की कोशिश की। हालाँकि मैं आगे की सीट पर खिड़की से चिपक कर बैठी थी, मामा जी ने मुझे थोड़ा करीब आने के लिए मजबूर किया और चूँकि मैं उनके साथ बिस्तर साझा करने के बाद किसी भी तरह का भी विरोध करने की स्थिति में नहीं थी , इसलिए मुझे "इतना" करने की अनुमति देनी पड़ी। ईमानदारी से कहूँ तो अब मैं बहुत अनिच्छुक थी - सबसे पहले मेरी अत्यधिक थकान के कारण और दूसरी बात यह कि मैं यह महसूस कर सकती थी था कि मेरे लिए उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से स्वीकार करना बहुत आसान नहीं था, क्योंकि आखिरकार वे मेरे पति के "मामा जी" थे!

मैंने उन्हें उसकी ड्राइविंग, विपरीत दिशा से आने वाले ट्रैफ़िक और यहाँ तक कि कार की गति का हवाला देकर रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन मामाजी रास्ते में किसी ठरकी और विकृत व्यक्ति की तरह व्यवहार कर रहे थे और अपना बायाँ हाथ (उनका दायाँ हाथ स्टीयरिंग व्हील पर था) मेरी साड़ी के अंदर ऐसे स्थानों पर डालने की कोशिश कर रहे थे जो स्पष्ट रूप से मेरे लिए संवेदनशील और असुविधाजनक थे। मुझे जल्द ही एहसास हुआ कि मामा-जी से दूरी बनाए रखने और अपनी थकान को उनके सामने सही ठहराने के प्रयास में, वे वास्तव में गति कम कर रहे थे , क्योंकि वे स्वाभाविक रूप से धीमा हो रहे थे क्योंकि उन्हें मुझसे बात करनी थी।

कार धीमी होते ही मैं आश्रम में देर से पहुँचने के बारे में और अधिक चिंतित और तनावग्रस्त हो गई। इसलिए मैं आधे मन से मामा जी तरफ खिसकी और मामा-जी ने तुरंत अपना बायाँ हाथ मेरी साड़ी के ऊपर मेरी सुडौल जाँघों पर रख दिया और अपनी उंगलियों से उसकी चिकनाई महसूस करने लगे। उन्होंने अपना हाथ मेरी जाँघों पर ऊपर-नीचे किया और बीच-बीच में यहाँ-वहाँ दबाया, जिससे मैं कई बार चौंक गई।

मैंने दूसरे विषयों से जुड़ी बातों से उनका ध्यान हटाने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। और, बहुत जल्द मामा-जी ने मेरी साड़ी को मेरे पैरों पर खींचना शुरू कर दिया ताकि वे मेरे पैरों को उजागर कर सकें और उन्हें सहला सकें। मैं मानसिक और शारीरिक रूप से इतनी कमज़ोर महसूस कर रही थी कि मैं उन्हें उस अभद्र हरकत को करने से रोकने की इच्छा भी नहीं रख पा रही थी। इस तरह कुछ ही समय में मामा-जी मेरी साड़ी और पेटीकोट को मेरे घुटनों से ऊपर तक उठा पाए और उनका हाथ आगे बढ़ने के लिए तैयार था!

मैंने अपने दोनों हाथों से उनके हाथ को अपने पैरों से हटाकर एक कमज़ोर बाधा बनाने की कोशिश की, लेकिन मामा-जी ने, मुझे चौंकाते हुए, बस अपने दाहिने हाथ का इस्तेमाल करके मेरी साडी की स्थिति को फिर से वैसा ही कर लिया! जब उन्होंने अपना दाहिना हाथ स्टीयरिंग व्हील से हटाया तो मैं लगभग चीख पड़ी और उनके व्यवहार से काफ़ी डर गई, लेकिन जाहिर तौर पर वे स्टीयरिंग व्हील को पकड़े बिना भी कार को नियंत्रित करने के बारे में काफ़ी आश्वस्त लग रहे थे! हालाँकि वे बहुत ही शांत भाव से मुस्कुरा रहे थे, लेकिन मैं बिल्कुल भी खुश नहीं थी और मैंने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया जिससे वे कोई मूर्खतापूर्ण काम कर बैठें।

जैसे ही उसने कार की गति बढ़ाई, उसका बायाँ हाथ शालीनता की सभी सीमाओं को पार करते हुए मेरी साड़ी को ऊपर खींच रहा था और एक समय तो मुझे उसके विकृत दृष्टिकोण में सहायता करने के लिए अपने नितंबों को ऊपर उठाना पड़ा! मैं गहरी साँस ले रही थी और आश्रम पहुँचने के लिए मिनटों की गिनती कर रही थी! मैं कम से कम मामा-जी को गति के लिए दोषी नहीं ठहरा सकती थी क्योंकि वह बहुत तेज़ गाड़ी चला रहे थे । और उसका बायाँ हाथ मेरे शरीर पर काम कर रहा था! जब एक ट्रक विपरीत दिशा से हमारे पास से गुजरा, तो उसकी चमकीली पीली हेडलाइट में, मैं यह देखकर चौंक गई कि मेरे पैर लगभग पूरी तरह से खुले हुए थे और मामा-जी ने मेरी साड़ी को मेरे पैरों के ऊपर इतना ऊपर खींच दिया था कि ऐसा लग रहा था जैसे मैं माइक्रोमिनी में हूँ! मैं ईमानदारी से चाहती थी कि चीजें यहीं रुक जाएँ, लेकिन मामा-जी मेरी नंगी गर्म त्वचा को और अधिक छूने के साथ-साथ और भी अधिक जंगली होते जा रहे थे!

इस चरण के दौरान मैंने मामा-जी से कुछ जानकारी प्राप्त की जो तब तक मुझे आकर्षित कर रही थी। मामा-जी ने माना कि मैंने उनकी नाक से जो खून निकलता देखा था, वह लाल रंग के तरल पदार्थ की एक छोटी थैली से बना था, जिसे वे मेरी जानकारी के बिना चुपके से पकड़े हुए थे। और, डॉ. दिलखुश ने मामा-जी को दवा की दुकान से एक जेल ( चिकनाई का पदार्थ) लाने के लिए भेजा था, जिसे मेरी योनि में लगाया था, जबकि मैं बेहोश थी और मैं डॉक्टर के साथ लगभग 10-15 मिनट तक अकेली थी। इससे मुझे पुष्टि मिली कि डॉक्टर ने मुझे चोदने के लिए उस अवसर का उपयोग किया होगा( जो मुझे अज्ञात था)।

मैं मामा-जी के साथ आगे की सीट पर बैठी रही, अपनी साड़ी को ऊपर उठाकर अपनी मक्खन के रंग की मांसल जांघों को उजागर करते हुए, जैसे ही कार सरपट दौड़ती हुई ग्रामीण इलाकों में आगे बढ़ी। एक तीखे मोड़ पर, मामा-जी ने अपना बायाँ हाथ मेरे पैरों से हटाया और मेरे कंधे पर मेरी गर्दन के चारों ओर रख दिया। मैंने थोड़ी राहत की सांस ली ताकि उसकी हथेली मेरी नंगी टाँगों पर न लगे, लेकिन इससे पहले कि मैं अपनी साड़ी नीचे खींचने के बारे में सोच पाती, उसने मुझे अपने शरीर की ओर और खींचा और मैं लगभग उन के धड़ पर गिर पड़ी। हालाँकि उन का दाहिना हाथ स्टीयरिंग व्हील पर स्थिर था, लेकिन उन का बायाँ हाथ मेरी गर्दन को घेरे हुए मेरे उलटे स्तनों पर बहुत अजीब तरह से लटका हुआ था, बस एक या दो इंच की दूरी पर! मुझे स्वाभाविक रूप से बहुत अजीब लग रहा था जब विपरीत दिशा से गुज़रने वाले वाहन की हेडलाईटे हमारी निकटता को उजागर कर रही थी ।

मैंने बार-बार अपने उभरे हुए स्तनों से कुछ इंच की दूरी पर लटकते उनके हाथ को देखा और मैं स्पष्ट रूप से समझ सकती थी कि मामा-जी जानबूझकर मेरे स्तनों के सिरे पर अपना हाथ फिरा रहे थे। स्वाभाविक रूप से मैं कुछ हद तक उत्तेजित महसूस कर रही थी और तभी सड़क पर एक बाएं मोड़ पर जब मामा-जी ने बाईं ओर गाड़ी मोड़ी, तो वे मुझ पर झुक गए और मैं स्पष्ट रूप से महसूस कर सकती थी कि उनकी उंगलियाँ मेरे पूरे बाएं स्तन को पकड़ रही थीं और उनकी हथेली मेरी साड़ी और ब्लाउज के ऊपर के सख्त मांस पर टिकी हुई थी।

स्वाभाविक रूप से मैंने थोड़ी जोर से आह भरी और तुरंत अपने स्तन से उनका हाथ हटाने की कोशिश की। उत्तेजना के हिस्से के अलावा, मुझे बहुत शर्मिंदगी भी महसूस हुई क्योंकि जब तक वे मेरे पैरों को टटोल रहे थे, तब तक यह विपरीत दिशा से आने वाले वाहनों को दिखाई नहीं दे रहा था, लेकिन अब जब उनका बायाँ हाथ मेरी गर्दन को घेरे हुए था और मेरे स्तन को सहला रहा था, तो विपरीत दिशा से आने वाले किसी भी व्यक्ति को यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता था!

मैंने मामा-जी को यह समझाने की कोशिश की, लेकिन वे बहुत उत्तेजित थे और मेरी चिंता को हँसकर टाल गए! मैं लगभग उसके शरीर से चिपकी हुई थी जिस तरह से उसने मुझे गले लगाया था और अब वह मेरी साड़ी के ऊपर से मेरे बाएं स्तन को खुलेआम दबा रहा था। मुझे जल्द ही एहसास हुआ कि वह हर बार जब भी कोई वाहन आता देखता था, तो वह बहुत ही उद्देश्यपूर्ण तरीके से ऐसा करते थे , जिससे मुझे वास्तव में बहुत अपमानित महसूस होता था। कुछ कारें और एक लॉरी हमारे पास से गुज़री और मुझे यकीन था कि उन वाहनों के ड्राइवरों ने देखा होगा कि इस कार में क्या चल रहा था!

मैंने बाहर चारों ओर देखा; सौभाग्य से ग्रामीण रोड सुनसान थी और कोई भी हमें नहीं देख सकता था। अगले ही पल मैं पूरी तरह से चौंक गई, मैंने खुद को उनकी बगल में बिना पल्लू के बैठे पाया क्योंकि मामा जी ने मेरे पल्लू को मेरे कंधे से नीचे मेरी गोद में सरका दिया था और अब मेरे ब्लाउज और ब्रा के ऊपर से मेरे स्तनों को सहलाना शुरू कर दिया था। उसका हाथ अब मेरे स्तनों पर थे और मेरे शंकु के आकार के स्तन के टीलों के स्पर्श ने उन्हें और भी उत्तेजित कर दिया था !

इससे पहले कि मैं कुछ कर पाती या मामा-जी से विनती कर पाती, बूढ़े लोमड़ी ने अपना बायाँ हाथ सीधे मेरे ब्लाउज के अंदर डाल दिया और अपनी उंगलियाँ मेरे घने स्तनों पर घुमाना शुरू कर दिया! मैं उसके व्यवहार पर चिल्ला उठी और यह देखकर चौंक गई कि वह मेरी चीजों को नियंत्रण में रखने के लिए कितना बल लगा रहा था।

जिस तरह से उसने मेरे ब्लाउज के अंदर अपनी उंगलियाँ हिलाना और हिलाना शुरू किया, उससे मुझे अपने ब्लाउज और ब्रा के हुक के बारे में गंभीर चिंता हुई। जब उसने मेरी बाईं निप्पल को अपनी दो उँगलियों के बीच पूरी तरह से पकड़ लिया, तो वह खुशी से कराहने लगे ! साथ ही, जब मैंने अपने बढ़ते हुए निप्पल पर उसका स्पर्श महसूस किया, तो मैं भी बहुत कामुक तरीके से कराह उठी! मामा-जी ने मेरे सख्त हो रहे निप्पल को छेड़ने की कोशिश की, लेकिन मेरी ब्रा के अंदर जगह की कमी के कारण ठीक से ऐसा करने में असफल रहे! वह गाड़ी चलाते हुए और मामा जी मुझे छूते हुए खुशी से ज़ोर-ज़ोर से कराह रहे थे ।

जारी रहेगी
 

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औलाद की चाह

324

CHAPTER 8-छठा दिन

मामा जी के राज

अपडेट-28

बूढ़े बिगड़ैल मामा ससुर के साथ आश्रम की तरफ वापसी का सफर


मैंने मामा जी को यह समझाने की कोशिश की, लेकिन वे बहुत मस्ती में तेज गाडी चला रहे थे और उन्होंने मेरी चिंता को हंसी में उड़ा दिया! वे इस तरह से मुझे गले लगाये हुए थे और अब खुलेआम मेरी साड़ी के ऊपर से मेरे बाएं स्तन को दबा रहे थे, मैं उनके शरीर से चिपकी हुई थी। मुझे जल्द ही एहसास हुआ कि वे हर बार जब कोई वाहन आता हुआ देखते थे, तो वे ऐसा बहुत ही उद्देश्यपूर्ण तरीके ऐसा से करते थे, जिससे मुझे वास्तव में बहुत अपमानित महसूस होता था।

कुछ कारें और एक लॉरी हमारे पास से गुज़री और मुझे यकीन था कि उन वाहनों के ड्राइवरों ने इस कार में क्या चल रहा है, यह ज़रूर देखा होगा! मैंने बाहर चारों ओर देखा; सौभाग्य से ग्रामीण क्षेत्र की रोड सुनसान थी और कोई भी हमें नहीं देख सकता था। अगले ही पल मैं खुद को बिना पल्लू के उनके बगल में बैठी हुई पाकर चौंक गई, क्योंकि उन्होंने मेरे पल्लू को हटा कर मेरे कंधे से नीचे मेरी गोद में सरका दिया था और अब मेरे ब्लाउज और ब्रा के ऊपर से मेरे स्तनों को सहलाना शुरू कर दिया था।

अब उनका हाथ मेरे स्तनों पर बहुत ज़्यादा था और मेरी शंक्वाकार कसी हुई पहाड़ियों के टाइट स्पर्श ने उन्हें और भी उत्साहित कर दिया होगा! इससे पहले कि मैं कुछ कर पाती या मामा-जी से विनती कर पाती, उस बूढ़े लोमड़ी ने अपना बायाँ हाथ सीधे मेरे ब्लाउज के अंदर डाल दिया और अपनी उंगलियाँ मेरे घने स्तनों पर घुमाने लगा! मैं उनके इस व्यवहार पर चीख पड़ी और वह जो बल लगा रहा था उसे देखकर चौंक गई, ताकि मैं चीज़ों को अपने नियंत्रण में रख सके । जिस तरह से उसने अपनी उंगलियाँ मेरे ब्लाउज के अंदर घुमाना और हिलाना शुरू किया, उससे मुझे अपने ब्लाउज और ब्रा के हुक के बारे में गंभीर चिंता हुई। जब उसने मेरी बाईं निप्पल को अपनी दो उँगलियों के बीच पूरी तरह से पकड़ लिया, तो वह खुशी से चिल्लाने लगे ! साथ ही, जब मैंने अपने बढ़ते हुए निप्पल पर उसका स्पर्श महसूस किया, तो मैं भी बहुत कामुक तरीके से कराह उठी! मामा-जी ने मेरे सख्त हो रहे निप्पल को छेड़ने की कोशिश की, लेकिन मेरी ब्रा के अंदर जगह की कमी के कारण ठीक से ऐसा करने में असफल रहे! वह गाड़ी चलाते हुए और मुझे एक साथ छूते हुए खुशी से ज़ोर से चिल्ला रहे थे।

मेरी थकान जल्दी ही मेरी छेड़छाड़ के कारण मेरी उत्तेजित की स्थिति से दूर हो रही थी। उसकी उंगलियाँ मेरे तंग स्तनों को खूब छू रही थीं और अगले ही पल मुझे एहसास हुआ कि वह अपनी हथेली में मेरे पूरे बाएँ स्तन को पकड़ने की पूरी कोशिश कर रहा था; वास्तव में वह इसे मेरे ब्लाउज से बाहर खींचने की कोशिश कर रहा था! हे भगवान! वह क्या कर रहा था? वह गाड़ी चलाता और मैं उसके बगल में बैठी हुई थी और अगर मेरी छाती मेरी ड्रेस से बाहर निकलती तब मैं इस सस्ती रंडी ही लगती ! क्या वह पागल हो गए थे या क्या? पर अब मैं पूरी तरह सतर्क थी और उसकी हरकतों के प्रति अपनी तीव्र जलन को प्रकट करते हुए बहुत जोरदार तरीके से विरोध किया।

मामा-जी मेरे बचाव से बेपरवाह लग रहे थे, लेकिन तभी एक तेज़ ट्रक हमारे वाहन के पास से गुज़रा; यह वास्तव में बहुत नज़दीकी था क्योंकि मामा-जी मेरी आपत्ति से क्षण भर के लिए विचलित हो गए थे। शुक्र है कि इससे मामा-जी को स्टीयरिंग व्हील के साथ अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास हुआ और उन्होंने माफ़ी मांगी और आश्रम तक के शेष हिस्से के दौरान ड्राइविंग पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सहमत हुए।

हालाँकि मामा-जी ने मेरे साथ और कोई दुर्व्यवहार नहीं किया, और उन्होंने कार चलाना जारी रखा और मुझे उनसे अलग होने और आश्रम वापस जाने से पहले एक आखिरी बार मुझे छूने के बारे में सोचा। जब वह अंधेरे जंगल से गुज़र रहे थे और कभी-कभी मेरी तरफ़ देखते थे, तो वह वास्तव में उस इच्छा को संजो रहे थे जबकि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

मैं खिड़की से बाहर अंधेरे परिदृश्य को देख रही थी और आगे होने वाले महायज्ञ में भाग लेने के लिए अपनी ऊर्जा के स्तर को पुनः प्राप्त करने की कोशिश कर रही थी , जबकि खिड़की के शीशे से आ रही तेज हवा में मेरे बाल हर तरफ उड़ रहे थे। अंधेरे में आश्रम को दूर से देख पाने पर मेरा चेहरा खुशी से चमक उठा, लेकिन मेरी खुशी बहुत कम समय तक रही क्योंकि मैंने मामा-जी को कार की गति धीमी करते हुए पाया। इससे पहले कि मैं कुछ पूछ पाती , मामा-जी ने तुरंत कार को सड़क से नीचे उतारा और कुछ मीटर की दूरी पर एक झाड़ीदार झाड़ी के अंदर जाकर कार को वहीं पार्क कर दिया और हेडलाइट बंद कर दी। मामा-जी के इस कृत्य के लिए किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं थी। यह झाड़ियों के बीच एक सुनसान अंधेरा कोना था और सड़क से दूर होने के कारण राहगीरों के लिए इसे पहचानना मुश्किल था। मामा-जी ने कार का इंजन बंद कर दिया और जल्दी से आगे की सीट पर मेरी तरफ बढ़ गए। एक शब्द भी नहीं बोला, फिर भी मुझे पता था कि आगे क्या होने वाला है!

मैंने विरोध करने या लड़ने या कोई तमाशा करने की कोशिश नहीं की और न ही मेरे पास ऐसा करने की शारीरिक शक्ति थी। मामा जी जल्दी से मेरे बहुत करीब आ गए और आगे की सीट पर अपना बायाँ पैर ऊपर खींच लिया और मुझे गले लगाने की कोशिश की। हालाँकि मुझे पता था कि उनका मुख्य उद्देश्य मुझे गले लगाना नहीं बल्कि मेरे निजी अंगों को छूना था, मैंने उनके इस कदम में उनका साथ दिया। ईमानदारी से कहूँ तो मैं अब चीजों को लंबा नहीं खींचना चाहती थी क्योंकि मेरा ध्यान स्पष्ट रूप से समय पर आश्रम वापस पहुँचने पर था। पहली बार मैं बहुत यांत्रिक थी। मैंने अपने शरीर को और अधिक उनकी ओर बढ़ाया और अपने बड़े स्तनों को आगे बढ़ाया और जाहिर तौर पर इससे बूढ़ा बिगड़ैल बहुत खुश था और उसने तुरंत मेरी ड्रेस के ऊपर से मेरे स्तनों को सहलाना और सहलाना शुरू कर दिया। उसके होंठ अपने आप मेरे चेहरे पर बंद हो गए और उसने मेरे चिकने गालों को चूमना शुरू कर दिया।

मैंने अपने हाथ उनकी गर्दन की ओर बढ़ाए और उन्हें गले लगा लिया, जिससे उनके लिए मेरे वक्षस्थल तक पहुँचना और भी आसान हो गया। मामा-जी ने मेरी साड़ी का पल्लू हटा दिया और दोनों हथेलियों से मेरे बड़े और मजबूत स्तनों को सहलाने की कोशिश कर रहे थे। हालाँकि मैं पूरी तरह थक चुकी थी, लेकिन मेरे स्तनों पर पुरुष के हाथों का स्पर्श मुझे उत्तेजित कर रहा था और मैं अपने पूरे शरीर में रोंगटे खड़े होते हुए महसूस कर रही थी और मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था। मामा-जी को स्पष्ट रूप से मेरे कसे हुए स्तनों को पूरी तरह से निचोड़ने और सहलाने में मज़ा आ रहा था - वास्तव में कोई भी पुरुष ऐसा ही करेगा - एक 28 वर्षीय परिपक्व महिला को इस तरह से सहलाना - बिना किसी बाधा के!

मामा-जी अपने गीले होंठों को मेरे चेहरे पर तेज़ी से सहला रहे थे और दबा रहे थे। हालाँकि मैं बिल्कुल भी मूड में नहीं थी, लेकिन इस भारी छेड़छाड़ की वजह से, मैं निस्संदेह उत्तेजित हो रही थी! मामा-जी स्पष्ट रूप से मेरे होंठों को देख रहे थे और आखिरकार जब वे अपने होंठ मेरे होंठों पर रख पाए, तो मैं कमज़ोर पड़ने लगी। मैं पहले से ही मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुकी थी और स्वाभाविक रूप से जब मामाजी ने मेरे होंठ चूसने शुरू किए, तो मैं उनकी बाहों में खो गई। मैं सीट पर फिसल गई और मेरा सिर खिड़की के शीशे पर टिका हुआ था, जबकि वे मेरे कोमल होंठों को दबा रहे थे और चूस रहे थे। मुझे एहसास हुआ कि मामाजी बहुत तेज़ी से और काफ़ी ज़ोर से नियंत्रण कर रहे थे, क्योंकि उन्होंने अपना दाहिना हाथ मेरे ब्लाउज़ के अंदर अच्छी तरह से डाला और मेरे नग्न स्तन को थाम लिया!

मैं महसूस कर सकती थी कि जैसे-जैसे वे मुझे ज़ोर से चूमते जा रहे थे, मेरा निप्पल उनकी हथेली के अंदर बढ़ रहा था। मेरी असहाय स्थिति को देखकर, मामाजी का आत्मविश्वास बढ़ रहा था और उन्होंने अपने दोनों हाथ मेरे वक्ष से हटा लिए और जल्दी से मेरी साड़ी को मेरी गोरी टाँगों पर खींचना शुरू कर दिया। मेरी आँखें बंद थीं और मैं पूरी तरह कमज़ोर महसूस कर रही थी, लेकिन जब मैंने महसूस किया कि मेरे पैर तेज़ी से खुल रहे हैं, तो मुझे कुछ करना पड़ा!

मामाजी इस उम्र में भी एक मज़बूत आदमी थे और मेरे लिए इस अवस्था में नियंत्रण रखना बहुत मुश्किल था, जब वे मुझे नंगी करने के लिए पूरी तरह तैयार थे! मैंने अपना सिर झटका और अपने होंठ उनसे हटा लिए, लेकिन मामा जी बहुत सख्त थे और उन्होंने तुरंत मुझे अपनी ओर खींचा और अपना दाहिना हाथ मेरी कमर से नीचे मेरी टांगों की ओर सरका दिया। अगले ही पल मैंने महसूस किया कि उनकी हथेली सीधे मेरी गर्म नंगी जांघों पर थी क्योंकि मेरी साड़ी पहले से ही उस हिस्से तक ऊपर उठ चुकी थी और इससे पहले कि मैं ठीक से प्रतिक्रिया कर पाती, उन्होंने अपना हाथ मेरी साड़ी के ऊपर धकेलना शुरू कर दिया! मैं अपनी साड़ी के अंदर अपनी नंगी त्वचा पर उनकी गर्म उँगलियों को महसूस कर सकती थी और वे तब तक नहीं रुके जब तक वे मेरे नितंबों तक नहीं पहुँच गए! मैं हर पल नंगी होती जा रही थी! मुझे एहसास हो रहा था कि मुझे अब कुछ करना चाहिए, लेकिन मैं ऐसा करने में असमर्थ थी! मामा जी पूरे आत्मविश्वास के साथ मेरी साड़ी के नीचे अपने हाथ से मेरी नंगी गांड को महसूस कर रहे थे और साथ ही मेरी छोटी सी पैंटी भी! वास्तव में वे अपनी उंगलियों से मेरी पैंटी के किनारे को मेरी गांड की दरार की ओर धकेल रहे थे और अपनी खुशी के लिए मेरी भारी गांड की मांसपेशियों को और अधिक उजागर कर रहे थे। मैं अपनी आँखें बंद करके चीजों को ऐसे ही चलने नहीं दे सकती थी! मैं खुद अपने बुजुर्ग रिश्तेदार की हर गंदी हरकत से परेशान हो रही थी।

आखिरकार, अपनी पूरी ताकत और इच्छाशक्ति जुटाकर, मैंने उसे रोकना और रोकना शुरू कर दिया। यह बिल्कुल भी आसान काम नहीं था और मुझे एहसास हुआ कि मैं अपने बुजुर्ग रिश्तेदार को शारीरिक शक्ति से नहीं हरा सकती। वह मेरा बहुत ही बढ़िया शारीरिक फायदा आसानी से उठा सकने की स्थिति में था और लगभग मेरे शरीर पर सवार था। मामा-जी मेरी साड़ी और पेटीकोट को मेरी कमर तक ऊपर उठा रहे थे, जिससे मेरी सेक्सी सुडौल टाँगें पूरी तरह से उजागर हो गयी थीं; इसके अलावा मैं अपनी पैंटी के ऊपर अपने नितंबों पर कार की चमड़े की सीट की ठंडी सनसनी महसूस कर सकती थी क्योंकि वह मेरी साड़ी को मेरे कूल्हों के नीचे से पूरी तरह ऊपर उठाने में भी सफल हो गया था! मेरे स्तन भी मेरे ब्लाउज के ऊपर से बहुत ज़्यादा खुले हुए थे और जब मामा-जी मेरे बाएं स्तन को सहला रहे थे, तो उन्होंने मेरे बाएं ब्रा के स्ट्रैप को मेरे कंधे से ब्लाउज के अंदर खिसका दिया और इसलिए मेरी ब्रा का कप उस स्तन पर बुरी तरह से ढीला हो गया

इससे वह मेरे स्तन के उस विशेष ढीलेपन का भरपूर आनंद ले पा रहे थे, हालाँकि मैं ब्रा पहने हुए थी। इस समय मेरे लिए अंधेरा ही मेरी एकमात्र ढाल और आवरण था।

जारी रहेगी
 

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मामा जी के राज

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मामा ससुर के साथ आश्रम की तरफ वापसी का सफर पूरा हुआ


गाडी चलाते हुए मामा-जी का बायाँ हाथ मेरे शरीर पर काम कर रहा था! जब एक ट्रक विपरीत दिशा से हमारे पास से गुजरा, तो उसकी चमकीली पीली हेडलाइट में, मैं यह देखकर चौंक गई कि मेरे पैर लगभग पूरी तरह से खुले हुए थे और मामा-जी ने मेरी साड़ी को मेरे पैरों के ऊपर इतना ऊपर खींच दिया था कि ऐसा लग रहा था जैसे मैं माइक्रोमिनी में हूँ! मैं ईमानदारी से चाहती थी कि चीजें यहीं रुक जाएँ, लेकिन मामा-जी मेरी नंगी गर्म त्वचा को और अधिक छूने के साथ-साथ और भी अधिक जंगली होते जा रहे थे!

मेरी थकान जल्दी ही मेरे छेड़छाड़ की स्थिति से दूर हो रही थी। उनकी उंगलियाँ मेरे तंग स्तनों को खूब टटोल रही थीं और अगले ही पल मुझे एहसास हुआ कि वह अपनी हथेली में मेरे पूरे बाएँ स्तन को पकड़ने की पूरी कोशिश कर रहे थे; वास्तव में वह इसे मेरे ब्लाउज से बाहर खींचने की कोशिश कर रहे थे! हे भगवान! वह क्या कर रहा था? वह गाड़ी चला रहे थे और मैं उसके बगल में बैठी हुई थी और मेरे स्तन मेरी ड्रेस से बाहर निकल रहे थे ! क्या वह पागल हो गया था या क्या? मैं पूरी तरह से सतर्क थी और उसकी हरकतों के प्रति अपनी तीव्र जलन को प्रकट करते हुए बहुत दृढ़ता से विरोध किया। मामा जी मेरे बचाव के प्रयास से बेपरवाह लग रहे थे, लेकिन तभी एक तेज़ रफ़्तार ट्रक हमारी एम्बेसडर के पास से गुज़रा; यह वाकई बहुत नज़दीकी मुठभेड़ थी क्योंकि मामा जी मेरी आपत्ति से कुछ पल के लिए विचलित हो गए थे। शुक्र है कि इससे मामा जी को स्टीयरिंग व्हील के साथ अपनी ज़िम्मेदारी का एहसास हुआ और उन्होंने माफ़ी मांगी और आश्रम तक के बचे हुए हिस्से में गाड़ी चलाने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सहमत हो गए।

हालाँकि मामा जी ने मेरे साथ आगे कोई दुर्व्यवहार नहीं किया, लेकिन उन्होंने कार चलाना जारी रखा और सोचा कि मैं उनसे अलग होने और आश्रम वापस जाने से पहले एक बार मुझे छू लूँ। जब वे अंधेरे जंगल से गुज़र रहे थे और कभी-कभी मेरी तरफ़ देखते थे, तो वे वास्तव में उस इच्छा को संजो रहे थे जबकि मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मैं खिड़की से बाहर अंधेरे परिदृश्य को देख रही थी और महायज्ञ में भाग लेने के लिए अपनी ऊर्जा के स्तर को फिर से हासिल करने की कोशिश कर रही थी , जबकि खिड़की के शीशे से आ रही तेज़ हवा में मेरे बाल हर तरफ़ उड़ रहे थे। अंधेरे में आश्रम को दूर से देख पाने पर मेरा चेहरा खुशी से चमक उठा, लेकिन मेरी खुशी कुछ ही देर तक रही क्योंकि मैंने मामा जी को कार की गति धीमी करते हुए पाया। इससे पहले कि मैं कुछ पूछ पाता, मामा जी ने तुरंत कार को सड़क से नीचे उतार दिया और झाड़ियों के बीच कुछ मीटर की दूरी पर जाकर कार को पार्क कर दिया और हेडलाइट बंद कर दी। मामा जी के इस कृत्य के लिए किसी स्पष्टीकरण की आवश्यकता नहीं थी। यह झाड़ियों के बीच एक सुनसान अंधेरा कोना था और सड़क से दूर होने के कारण राहगीरों को भी यह दिखाई नहीं दे रहा था। मामा जी ने कार का इंजन बंद कर दिया और जल्दी से आगे की सीट पर मेरी तरफ बढ़ गए। एक शब्द भी नहीं बोला, फिर भी मुझे पता था कि आगे क्या होने वाला है! मैंने विरोध करने या लड़ने या कोई तमाशा खड़ा करने की कोशिश नहीं की और न ही मेरे पास ऐसा करने के लिए पर्याप्त शारीरिक शक्ति थी।

मैं थोड़ा तनाव महसूस कर रहा था कि क्या हम निर्धारित समय में आश्रम पहुँच पाएँगे।

मामा जी: चिंता मत करो प्रिये... मैं तुम्हें जल्द ही आश्रम पहुँचा दूँगा! मेरी ड्राइविंग स्किल्स पर भरोसा रखो।

मैं: मैं आप पर ही निर्भर हूँ मामा जी…!

मामा जी (फुसफुसाते हुए स्वर में): रश्मि… रश्मि!

मैं: ओह… हाँ… मुझे थोड़ी देर आराम करने दो… प्लीज मामा जी… मैं बहुत थक गई हूँ!

मामा जी जल्दी से मेरे बहुत करीब आ गए और आगे की सीट पर अपना बायाँ पैर ऊपर खींच लिया और मुझे गले लगाने की कोशिश की। हालाँकि मुझे पता था कि उनका मुख्य उद्देश्य मुझे गले लगाना नहीं बल्कि मेरे निजी अंगों को छूना था, मैंने उनके कदम का साथ दिया। ईमानदारी से कहूँ तो मैं चीजों को लंबा नहीं खींचना चाहती थी क्योंकि मेरा ध्यान स्पष्ट रूप से समय पर आश्रम वापस पहुँचने पर था। पहली बार मैं बहुत मशीनी थी। मैंने अपने शरीर को और अधिक उसकी ओर बढ़ाया और अपने बड़े स्तनों को आगे बढ़ाया और जाहिर तौर पर बूढ़ा बिगड़ैल बहुत खुश था और उसने तुरंत मेरी ड्रेस के ऊपर से मेरे स्तनों को सहलाना और सहलाना शुरू कर दिया। उसके होंठ अपने आप मेरे चेहरे पर बंद हो गए और उसने मेरे चिकने गालों को चूमना शुरू कर दिया।

मैंने अपने हाथ उनकी गर्दन की ओर बढ़ाए और उन्हें गले लगा लिया, जिससे उनके लिए मेरे वक्षस्थल तक पहुँचना और भी आसान हो गया। मामा-जी ने मेरी साड़ी का पल्लू हटा दिया और दोनों हथेलियों से मेरे बड़े और मजबूत स्तनों को सहलाने की कोशिश कर रहे थे। हालाँकि मैं पूरी तरह थक चुकी थी, लेकिन मेरे स्तनों पर पुरुष के हाथों का स्पर्श मुझे उत्तेजित कर रहा था और मैं अपने पूरे शरीर में रोंगटे खड़े होते हुए महसूस कर रही थी और मेरा दिल तेज़ी से धड़क रहा था। मामा-जी को स्पष्ट रूप से मेरे कसे हुए स्तनों को पूरी तरह से निचोड़ने और सहलाने में मज़ा आ रहा था - ऐसे हालात में वास्तव में कोई भी पुरुष ऐसा ही करेगा - एक 28 वर्षीय परिपक्व महिला को इस तरह से सहलाना - बिना किसी बाधा के! मामा-जी अपने गीले होंठों को मेरे चेहरे पर तेज़ी से सहला रहे थे और दबा रहे थे। हालाँकि मैं बिल्कुल भी मूड में नहीं थी, लेकिन इस भारी छेड़छाड़ की वजह से, मैं निस्संदेह उत्तेजित हो रही थी! मामा-जी स्पष्ट रूप से मेरे होंठों को देख रहे थे और आखिरकार जब वे अपने होंठ मेरे होंठों पर रख पाए, तो मैं कमज़ोर पड़ने लगी। मैं पहले से ही मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुकी थी और स्वाभाविक रूप से जब मामा-जी ने मेरे होंठ चूसने शुरू किए, तो मैं उनकी बाहों में खो गई। मैं सीट पर फिसल गई और मेरा सिर खिड़की के शीशे पर टिका हुआ था, जबकि वे मेरे कोमल होंठों को दबा रहे थे और चूस रहे थे। मुझे एहसास हुआ कि मामा-जी बहुत तेज़ी से और काफी जोरदार तरीके से नियंत्रण कर रहे थे, क्योंकि उन्होंने अपना दाहिना हाथ मेरे ब्लाउज के अंदर अच्छी तरह से डाला और मेरे नग्न स्तन को थाम लिया! मैं महसूस कर सकती थी कि जैसे-जैसे वे मुझे जोर से चूमते रहे, मेरा निप्पल उनकी हथेली के अंदर बढ़ता जा रहा था।

आखिरकार, अपनी पूरी ताकत और इच्छाशक्ति जुटाकर, मैंने उसे रोकना और रोकना शुरू कर दिया। यह बिल्कुल भी आसान काम नहीं था और मुझे एहसास हुआ कि मैं अपने बुजुर्ग रिश्तेदार को शारीरिक शक्ति से नहीं हरा सकती। वह मेरा बहुत ही बढ़िया शारीरिक फायदा आसानी से उठा सकने की स्थिति में था और लगभग मेरे शरीर पर सवार था। मामा-जी मेरी साड़ी और पेटीकोट को मेरी कमर तक ऊपर उठा रहे थे, जिससे मेरी सेक्सी सुडौल टाँगें पूरी तरह से उजागर हो गयी थीं; इसके अलावा मैं अपनी पैंटी के ऊपर अपने नितंबों पर कार की चमड़े की सीट की ठंडी सनसनी महसूस कर सकती थी क्योंकि वह मेरी साड़ी को मेरे कूल्हों के नीचे से पूरी तरह ऊपर उठाने में भी सफल हो गया था! मेरे स्तन भी मेरे ब्लाउज के ऊपर से बहुत ज़्यादा खुले हुए थे और जब मामा-जी मेरे बाएं स्तन को सहला रहे थे, तो उन्होंने मेरे बाएं ब्रा के स्ट्रैप को मेरे कंधे से ब्लाउज के अंदर खिसका दिया और इसलिए मेरी ब्रा का कप उस स्तन पर बुरी तरह से ढीला हो गया!

मेरी असहाय अवस्था को देखकर मामाजी का आत्मविश्वास बढ़ रहा था और उन्होंने अपने दोनों हाथ मेरे वक्ष से हटा लिए और जल्दी से मेरी साड़ी को मेरी गोरी टाँगों पर खींचना शुरू कर दिया। मेरी आँखें बंद थीं और मैं पूरी तरह कमज़ोर महसूस कर रही थी, लेकिन जब मैंने महसूस किया कि मेरी टाँगें तेज़ी से खुल रही हैं, तो मुझे कुछ करना ही था!

मामाजी इस उम्र में भी एक मज़बूत आदमी थे और इस अवस्था में मेरे लिए नियंत्रण रखना बहुत मुश्किल था, जब वे मुझे नंगा करने के लिए पूरी तरह तैयार थे! मैंने अपना सिर झटका और अपने होंठ उनसे हटा लिए, लेकिन मामाजी एक मज़बूत आदमी थे और उन्होंने तुरंत मुझे अपनी ओर खींचा और अपना दाहिना हाथ मेरी कमर से नीचे मेरी टाँगों की ओर सरका दिया। अगले ही पल मैंने महसूस किया कि उनकी हथेली सीधे मेरी गर्म नंगी जाँघों पर थी क्योंकि मेरी साड़ी पहले से ही उस हिस्से तक ऊपर उठ चुकी थी और इससे पहले कि मैं ठीक से प्रतिक्रिया कर पाती, उन्होंने अपना हाथ मेरी साड़ी के ऊपर धकेलना शुरू कर दिया! मैं अपनी साड़ी के अंदर अपनी नंगी त्वचा पर उनकी गर्म उँगलियों को महसूस कर सकती थी और वे तब तक नहीं रुके जब तक वे मेरे नितंबों तक नहीं पहुँच गए! मैं हर पल नंगी होती जा रही थी! मुझे एहसास हो गया था कि अब मुझे कुछ करना चाहिए, लेकिन मैं ऐसा करने में असमर्थ थी! मामा जी पूरे आत्मविश्वास के साथ मेरी साड़ी के नीचे अपने हाथ से मेरी नंगी गांड को महसूस कर रहे थे और साथ ही मेरी छोटी सी पैंटी भी! दरअसल वो अपनी उंगलियों से मेरी पैंटी के किनारे को मेरी गांड की दरार की ओर धकेल रहे थे और अपनी खुशी के लिए मेरी भारी गांड के मांस को और अधिक उजागर कर रहे थे। मैं बस अपनी आँखें बंद करके चीजों को ऐसे ही चलने नहीं दे सकती थी!

खुद को बचाने का सिर्फ़ एक ही तरीका था; मुझे पुरानी तरकीब अपनानी थी। ऐसा करने के लिए मुझे हद से ज़्यादा बेशर्म होना था, लेकिन मेरे पास हमले का यही एकमात्र रास्ता बचा था। जब मैं मामा जी के शरीर के वजन के साथ खिड़की के शीशे पर लगभग झुक गई थी, उनका एक हाथ मेरे स्तनों पर और दूसरा हाथ मेरी गांड के नीचे था, तो मैंने संघर्ष करना और वापस लड़ना शुरू कर दिया। मुझे उनका ध्यान भटकाने और उनके शरीर के वजन को कम करने के लिए कुछ करना था और मैंने उन्हें चूमने का फैसला किया। मैंने उनके गालों और होंठों के किनारों पर चूमना शुरू कर दिया और स्वाभाविक रूप से मामा-जी बहुत रोमांचित हो गए। जैसे ही उन्होंने मुझ पर अपनी पकड़ थोड़ी ढीली की, मैं जल्दी से एक बेहतर मुद्रा में आ गई और उनके ट्राउजर की ज़िप तक पहुँच गई! मैं महसूस कर सकती थी कि उनका लिंग उनके कच्छे के अंदर एक खंभे की तरह खड़ा था और एक सेकंड भी बर्बाद किए बिना मैंने ज़िप को नीचे खींचना शुरू कर दिया। मामा-जी आनंद में गुर्राए और जोर से कराहने लगे क्योंकि मैंने अपनी फुर्तीली उंगलियों का इस्तेमाल करके उनके खुले ट्राउजर की ज़िप के ज़रिए उनके लंड को उनकी चड्ढी के छेद से जल्दी से बाहर निकाला। मामा-जी दहाड़े और कांपने लगे जब मैंने उनके नग्न लंड को अपनी हथेली में पकड़ा और मेरे ब्लाउज से अपना पूरा बायाँ स्तन निचोड़कर मेरे कदम का स्वागत किया! ऐसा लग रहा था कि उनका मिशन सफल हो गया! वे लंबे समय से ऐसा करने की कोशिश कर रहे थे और आखिरकार उन्होंने मेरे ब्लाउज के ऊपर के दो हुक खोलकर मेरे पूरे बाएँ स्तन को बाहर निकाल दिया। स्वाभाविक रूप से मैं बहुत तेज़ साँस ले रही थी और मुश्किल से खुद पर नियंत्रण रख पा रही थी। मामा-जी के मुझे नंगा करने के इस भद्दे तरीके ने मुझे पूरी तरह से शर्मिंदा कर दिया था और मेरी धमनियों में खून की धारा बह रही थी, जिससे मैं खुशी से कांप रही थी। मैंने अपने दांत भींच लिए और खुद को शांत रखने की पूरी कोशिश की। मामा-जी बाघ की तरह दहाड़ रहे थे, जब मैं उनके गर्म नंगे लंड को सहला रही थी। यह अपने पूरे आकार में आ रहा था और मैंने इसे बहुत चालाकी से सहलाना शुरू कर दिया। मैंने उनके खड़े लिंग की पूरी लंबाई को दबाया और अपने अंगूठे से उसके सिर पर दबाव डाला। इसके अलावा मैंने अपने पैर को मोड़कर कार की सीट पर खींच लिया, जिससे मामा-जी सीधे मेरी पैंटी के सामने को छू सकें।

मुझे पता था कि इस तरह से बूढ़ा बदमाश सातवें आसमान पर होगा क्योंकि वह पहले से ही बहुत उत्तेजित था और अपनी मर्जी से मुझे इतनी कामुकता से सहला रहा था। मैंने उनके लंड को बहुत ईमानदारी से सहलाया और मामा-जी को मेरी नंगी हिलती हुई छाती और चूत को मेरी पैंटी के ऊपर से बहुत उदारता से सहलाने दिया और यह इतनी देर तक जारी रहा कि मामा-जी के लिए अपने रस को रोकना लगभग असंभव हो गया। परिणाम शहद की तरह मीठा था क्योंकि मैंने जल्द ही मामा-जी को खुशी और उत्साह में चिल्लाते हुए पाया क्योंकि उनका पूरा शरीर हिल रहा था और उन्होंने मुझे गले लगाने की कोशिश की जबकि उनके लिंग से गर्म सफेद तरल पदार्थ निकल रहा था और मेरी उंगलियों को ढक रहा था।

शुक्र है कि उसके बाद ज्यादा समय बर्बाद नहीं हुआ, हालांकि मुझे मामा-जी को फिर से गाड़ी चलाने से पहले थोड़ा आराम करने देना पड़ा। मामा-जी मेरे हाथों में स्खलित होने से काफी खुश थे क्योंकि वे काफी हांफ रहे थे और शायद शारीरिक रूप से थकावट महसूस कर रहे होंगे। हम दोनों कार से बाहर निकले और फिर से आगे बढ़ने से पहले खुद को साफ किया। उस जगह से आश्रम तक की ड्राइव सिर्फ 2-3 मिनट की थी और मैं आखिरकार फिर से आश्रम में आकर बहुत खुश हुई और मुझे कुछ राहत महसूस हुई ! और मैंने निर्मल को मेरी तरफ आते हुए देखा !

निर्मल: ओह! आप वापस आ गईं मैडम! गुरु-जी आपको खोज रहे थे!

जारी रहेगी
 

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CHAPTER 8-छठा दिन

आश्रम में पुनः वापसी

अपडेट-1


आश्रम में वापसी और गुरूजी से पुनः मुलाक़ात

मुझे मामा-जी को फिर से गाड़ी चलाने से पहले थोड़ा आराम करने देना पड़ा। मामा-जी मेरे हाथों में स्खलित होने से काफी खुश थे क्योंकि वे काफी हांफ रहे थे और शायद शारीरिक रूप से थकावट महसूस कर रहे होंगे। हम दोनों कार से बाहर निकले और फिर से आगे बढ़ने से पहले खुद को साफ किया। उस जगह से आश्रम तक की ड्राइव सिर्फ 2-3 मिनट की थी और मैं आखिरकार फिर से आश्रम में आकर बहुत खुश हुई और मुझे कुछ राहत महसूस हुई ! और मैंने निर्मल को मेरी तरफ आते हुए देखा !
निर्मल: ओह! मैडम आप वापस आ गई! गुरुजी आपके बारे में पूछ रहे थे!

मैं: गुरुजी मुझे खोज रहे थे ! लेकिन उन्हें पता है कि मैं दूर गयी थी...क्या मैं...क्या मैं देर से आई हूँ?

निर्मल: नहीं, नहीं मैडम...आप देर से नहीं आई हैं...दरअसल गुरुजी को अपने पैतृक स्थान पर एक जरूरी काम के लिए जाना है, इसलिए... शायद वे आपसे यज्ञ के बारे में बात करेंगे।

मैं आसानी से अनुमान लगा सकती थी कि जब निर्मल मुझसे बात कर रहे थे तो उनकी नज़र मेरे शरीर पर घूम रही थी। हालाँकि मैंने अपनी साड़ी को अपने शरीर पर ठीक से लपेटा हुआ था, फिर भी मेरी साँसें पूरी तरह से सामान्य नहीं थीं और मेरी भारी छाती मेरी साड़ी के नीचे तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी, जिसे उस बौने ने शायद देख लिया था।

मैं (थोड़ा घबराते हुए): ओह! मैं समझ गई...!

निर्मल: कृपया बैठिए और मैं आपके लिए चाय लाता हूँ।

मैंने मामाजी से आखिरी शब्द में धन्यवाद और अलबिदा कहा , जिन्हें कार में हुए उनके त्वरित स्खलन के बाद खुद को तरोताज़ा करने के लिए वास्तव में एक कप चाय की ज़रूरत होगी।

मामा-जी: ओह! धन्यवाद… हे हे… (मामा-जी सोफे पर बैठ गए). मैंने निर्मल से उन्हें एक कप चाय देने के लिए कहा और निर्मल ने उसकी व्यवसाहथा की

मैंने मामा-जी को “अलविदा” कहा और जल्दी से निर्मल के साथ फटाफट अंदर चली गई। मैं गुरु-जी के कमरे में जाने से पहले एक बार शीशे में खुद को देखने के लिए तेज़ गति से चली।

निर्मल: जल्दी मत करो मैडम… गुरु-जी रात 9 बजे जाने वाले हैं।

जल्दी में मैं निर्णल के पास से निकल गई।

मैं: ओह… रात 9 बजे… फिर… अगर आप उन्हें बता सकें कि मैं लौट आयी हूँ …

मुझे अब उससे बात करने के लिए पीछे देखना पड़ा, क्योंकि वह मेरे पीछे था और जैसे ही मैंने पीछे देखा, मैंने उसे मेरे भारी हिलते हुए नितंबों को घूरते हुए रंगे हाथों देखा। बौना शायद अपनी छोटी लंबाई का ‘फायदा’ उठा रहा होगा – जिस ऊंचाई से वह मेरी कामुक रूप से हिलती हुई गांड को देख रहा था। और, जाहिर है, मामा-जी के साथ कार में कुछ मिनट पहले मेरी अत्यधिक उत्साहित स्थिति के कारण, मेरा शरीर अभी भी "गर्म" था और मेरी मांसल नितंब स्वाभाविक रूप से मेरी पोशाक के नीचे सामान्य से अधिक झूल रहे थे। हालाँकि अब मैं होश में थी, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं था क्योंकि मैं चलते समय अपनी साड़ी के नीचे अपनी गांड के गालों को सेक्सी तरीके से हिलने से रोक नहीं पा रही थी। गलियारा काफी लंबा था और जैसे-जैसे हम चलते गए, मैं अपनी साड़ी के अंदर अपनी कमर को ऊपर-नीचे हिलाते हुए इस बौने आदमी को आकर्षक और मनमोहक दृश्य दिखाती रही, जब तक कि मैं अपने कमरे में नहीं पहुँच गई!

निर्मल: आप अपने कमरे में आराम करें मैडम... मैं गुरु-जी को बता दूँगी कि आप वापस आ गई हैं।

मैं: धन्यवाद।

मैंने अपने कमरे की ओर रुख किया और राहत की साँस ली। मैं अपने कमरे में घुसी और अपने पीछे का दरवाज़ा बंद करके उस पर झुक गई - मैंने अपनी आँखें बंद कीं और कुछ लंबी गहरी साँसें लीं। मैं बहुत थकी हुई महसूस कर रही थी और मुझे कुछ नींद की सख्त ज़रूरत थी। मैंने डॉ. दिलखुश और मामा-जी के साथ हुई मुलाकातों को अपने दिमाग से मिटाने की कोशिश की और खुद को फिर से “आश्रम” के माहौल में ढालने की कोशिश की। जाहिर है यह आसान नहीं था, लेकिन मुझे यह करना ही था क्योंकि मेरा प्राथमिक लक्ष्य महायज्ञ के माध्यम से मेरी संतान की कामना पूरी करने में सफलता प्राप्त करना था। मैंने स्नान किया लेकिन फिर भी खुद को पूरी तरह से तरोताजा नहीं कर पायी । मुझे एहसास हुआ कि मुझे भूख लगी है और मुझे थोड़ी नींद भी चाहिए।

तभी निमरल ने दरवाजा खटखटाया और मुझे शाम की चाय और नाश्ता दिया। उनकी टाइमिंग कमाल की थी! उन्होंने मुझे यह भी बताया कि गुरु-जी से रात 8 बजे मिलना है। मुझे इतनी भूख लगी थी कि मैंने तुरंत नाश्ता निगल लिया और फिर आराम से चाय के साथ खाट पर बैठ गयी क्योंकि मेरे पास अभी भी कुछ समय था। मैंने गुरु-जी के नक्शेकदम पर चलने की कोशिश की (वे हमेशा बुरे समय में हुई अच्छी चीजों पर विचार करने का उपदेश देते थे) और आश्रम में मेरे साथ हुई अच्छी चीजों के बारे में सोचने लगी ।

मुझे गुरुजी के साथ बातचीत के दौरान उनके द्वारा कहे गए उत्साहवर्धक शब्द याद आ गए, खास तौर पर महायज्ञ के दौरान मुख्य चरणों अर्थात् योनि सुगम और योनि जन दर्शन को पूरा करने के बाद उन्होंने मुझे जो प्रोत्साहन दिया था, और मैं वास्तव में अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उत्सुक थी । मैं गुरुजी की क्षमताओं और महायज्ञ पर पूरी तरह से आश्वस्त थी और लिंगा महाराज पर भरोसा करती थी कि वे वास्तव में मेरे लिए कुछ करेंगे। 8 बजने वाले थे और मुझे बिस्तर से उठना पड़ा, हालाँकि मैं बहुत थका हुआ महसूस कर रही थी और मेरा लेटने और आराम करने का मन कर रहा था। मैंने अपने बालों को कंघी किया और कुछ अनिच्छा से बाँधा और गुरुजी से मिलने के लिए खुद को ठीक से तैयार किया; पहले से ही मेरा दिल धड़कने लगा था, हालाँकि जाहिर तौर पर इसका कोई कारण नहीं था! जैसे ही मैं घबराए हुए कदमों से गुरुजी के कमरे में दाखिल हुई मैंने गुरुजी के साथ कमरे में दो अन्य महिलाओं को पाया। मैंने उन्हें पहले कभी नहीं देखा था और वे आश्रम की पोशाक में भी नहीं थीं; इसलिए मैंने निष्कर्ष निकाला कि वे आगंतुक हो सकती हैं। जब मैं कमरे में दाखिल हुआ तो वे दोनों गुरुजी के सामने बैठी थीं और उनकी पीठ मेरी ओर थी।

गुरुजी: आह! रश्मि, तुम्हें फिर से देखकर अच्छा लगा! तो तुम्हारा दिन कैसा रहा बेटी?

मैं (हँसते हुए): बढ़िया गुरुजी! बहुत तरोताज़ा!

मैं कुछ कदम आगे बढ़ी और गुरुजी को प्रणाम करने के बाद उनके सामने खड़ी हो गई। मैंने अपनी आँखों के कोने से देखा और पाया कि दोनों महिलाएँ बहुत कम उम्र की थीं, सलवार कमीज़ पहने हुए थीं और वे वास्तव में किशोरियाँ थीं!

गुरुजी: अच्छा। अच्छा। तो ये आपके लिए एक स्वागत योग्य ब्रेक था ? (गुरुजी मेरी आँखों को देखते हुए मुस्कुराए) लेकिन... लेकिन तुम बहुत थकी हुई लग रही हो रश्मि! क्यों?

जैसे ही गुरुजी ने मेरी आँखों को गौर से देखा, मेरा दिल धड़कने लगा; मैंने घबराहट में अपनी पलकें नीचे कर लीं और थोड़ा सा हिल गई।

मैं: नहीं उफ़... मेरा मतलब है हाँ गुरुजी... थोड़ा... उम्म... वास्तव में यात्रा से थक गई हूँ! (वास्तविक सच्चाई को छिपाने के लिए मेरी आवाज़ लगभग काँप उठी!)

गुरुजी: आह! सच! तुमने इतनी गर्मी में काफ़ी दूरी तय की है ।

मैं: हाँ... हाँ गुरुजी, लेकिन कोई बात नहीं, मैं इतनी थकान सहन कर सकती हूँ!

गुरुजी: यह अच्छी बात है! हम्म... दरअसल जिस कारण से मैंने तुम्हें यहाँ बुलाया था... ओह! मैं पूरी तरह से भूल गया...से, मैं तुम्हें नताशा और सुधा से मिलवाता हूँ... वे बहनें हैं... और वे भी तुम्हारी तरह आश्रम में आई हैं, लेकिन बेशक एक अलग उद्देश्य से।

मैं: ओह! मैं समझ गयी । (मैंने सिर हिलाया और जब वे मेरी तरफ़ देख रही थीं मैं उन दोनों लड़कियों की तरफ़ मुस्कुरायी , )

गुरुजी: दरअसल मैंने जो योजना बनाई है, वह यह है कि आज रात नहीं, मैं तुम्हारे लिए कल महायज्ञ का शेष भाग कर इसे समाप्त करूँगा, क्योंकि मुझे एक ज़रूरी अपरिहार्य कारण से बाहर जाना होगा।

मैं स्वाभाविक रूप से थोड़ी आशंकित थी कि अगर एक दिन का अंतराल होता तो गया तब महायज्ञ कितना प्रभावी रहेगा या नहीं । गुरुजी ने मानो मेरे मन की बात तुरंत पढ़ ली!

गुरुजी: मैं जानता हूँ रश्मि तुम क्या सोच रही हो… (मुस्कुराते हुए) अगर हम ऐसा करेंगे तो महायज्ञ की प्रभावशीलता को कोई नुकसान तो नहीं होगा। मैं तुम्हें गारंटी देता हूँ मेरी बच्ची।

मैं (यह सुनकर स्वाभाविक रूप से बहुत राहत महसूस कर रही थी ): ओह! तो यह… ठीक है गुरुजी।

गुरुजी: इस देरी से तुम्हें मिलने वाले यज्ञ के नतीजे पर कोई असर नहीं पड़ेगा। तो क्या अब तुम सहज हो?

मैं: हाँ, हाँ गुरुजी।

गुरुजी: और रश्मि, दूसरा तथ्य यह भी है कि चूँकि तुम मेरे या मेरे किसी शिष्य की संगति के बिना काफी समय तक आश्रम से बाहर रही हो, इसलिए तुम्हें “निर्मलता परीक्षा” से गुजरना होगा, जो वास्तव में नताशा और सुधा के लिए भी सही है, इससे पहले कि वे “कुमारी दीक्षा” के लिए आगे बढ़ें। तो… (उन्होंने कुछ देर रुककर कहा) मैं कल दिन में शुद्धिकरण की योजना बना रहा हूँ… जिसमें तुम दोनों भी शामिल हो (दो लड़कियों को देखते हुए) और रश्मि मैं रात को तुम्हारे लिए महायज्ञ का समापन करूँगा (मेरी ओर देखते हुए)। (थोड़ा रुककर हम तीनों की तरफ़ देखते हुए) क्या आप समझ गयी ?

मैं: हाँ गुरुजी।

नताशा और सुधा: जी गुरुजी।

गुरुजी: अच्छा! एक और बात रश्मि, मुझे पता है कि यह तुम्हें थोड़ा अजीब लग सकता है , लेकिन आश्रम के नियमों का पालन करना ज़रूरी है।

मैंने अपने चेहरे पर “ ए ?” क्या के साथ देखा!


जारी रहेगी
 
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Mr Sinister

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Annual Story Contest - XForum
Hello everyone!
We are thrilled to present the annual story contest of XForum!
"The Ultimate Story Contest" (USC).

"Win cash prizes up to Rs 8500!"


Jaisa ki aap sabko maloom hai abhi pichhle hafte hi humne USC ki announcement ki hai or abhi kuch time pehle Rules and Queries thread bhi open kiya hai or Chit Chat thread toh pehle se hi Hindi section mein khula hai.

Well iske baare mein thoda aapko bata dun ye ek short story contest hai jisme aap kisi bhi prefix ki short story post kar sakte ho, jo minimum 700 words and maximum 8000 words ke bich honi chahiye (Story ke words count karne ke liye is tool ka use kare — Characters Tool) . Isliye main aapko invitation deta hun ki aap is contest mein apne khayaalon ko shabdon kaa roop dekar isme apni stories daalein jisko poora XForum dekhega, Ye ek bahot accha kadam hoga aapke or aapki stories ke liye kyunki USC ki stories ko poore XForum ke readers read karte hain.. Aap XForum ke sarvashreshth lekhakon mein se ek hain. aur aapki kahani bhi bahut acchi chal rahi hai. Isliye hum aapse USC ke liye ek chhoti kahani likhne ka anurodh karte hain. hum jaante hain ki aapke paas samay ki kami hai lekin iske bawajood hum ye bhi jaante hain ki aapke liye kuch bhi asambhav nahi hai.

Aur jo readers likhna nahi chahte woh bhi is contest mein participate kar sakte hain "Best Readers Award" ke liye. Aapko bas karna ye hoga ki contest mein posted stories ko read karke unke upar apne views dene honge.

Winning Writer's ko well deserved Cash Awards milenge, uske alawa aapko apna thread apne section mein sticky karne ka mouka bhi milega taaki aapka thread top par rahe uss dauraan. Isliye aapsab ke liye ye ek behtareen mouka hai XForum ke sabhi readers ke upar apni chhaap chhodne ka or apni reach badhaane kaa.. Ye aap sabhi ke liye ek bahut hi sunehra avsar hai apni kalpanao ko shabdon ka raasta dikha ke yahan pesh karne ka. Isliye aage badhe aur apni kalpanao ko shabdon mein likhkar duniya ko dikha de.

Entry thread 25th March ko open ho chuka matlab aap apni story daalna shuru kar sakte hain or woh thread 25th April 2025 tak open rahega is dauraan aap apni story post kar sakte hain. Isliye aap abhi se apni Kahaani likhna shuru kardein toh aapke liye better rahega.

Aur haan! Kahani ko sirf ek hi post mein post kiya jaana chahiye. Kyunki ye ek short story contest hai jiska matlab hai ki hum kewal chhoti kahaniyon ki ummeed kar rahe hain. Isliye apni kahani ko kayi post / bhaagon mein post karne ki anumati nahi hai. Agar koi bhi issue ho toh aap kisi bhi staff member ko Message kar sakte hain.

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CHAPTER 8-छठा दिन

आश्रम में पुनः वापसी

अपडेट-2

आश्रम का नियम

गुरुजी: और रश्मि, चूँकि तुम मेरे या मेरे किसी शिष्य की संगति के बिना काफी समय तक आश्रम से बाहर रही हो, इसलिए तुम्हें “निर्मलता परीक्षा” से गुजरना होगा, जो वास्तव में नताशा और सुधा के लिए भी सही है, इससे पहले कि वे “कुमारी दीक्षा” के लिए आगे बढ़ें। तो… (उन्होंने कुछ देर रुककर कहा) मैं कल दिन में शुद्धिकरण की योजना बना रहा हूँ… जिसमें तुम दोनों भी शामिल हो (दो लड़कियों को देखते हुए) और रश्मि मैं रात को तुम्हारे लिए महायज्ञ का समापन करूँगा (मेरी ओर देखते हुए)। (थोड़ा रुककर हम तीनों की तरफ़ देखते हुए) क्या आप समझ गयी ?

मैं: हाँ गुरुजी।

नताशा और सुधा: जी गुरुजी।

गुरुजी: अच्छा! एक और बात रश्मि, मुझे पता है कि यह तुम्हें थोड़ा अजीब लग सकता है , लेकिन आश्रम के नियमों का पालन करना ज़रूरी है।

मैंने अपने चेहरे पर “ ए ?” क्या के साथ देखा!

गुरुजी:: "निर्मलता परीक्षण" के लिए , चूँकि तुम विवाहित हो, इसलिए तुम्हें योनि से एक स्वैब देना होगा, ताकि यह पुष्टि हो सके कि तुमने किसी भी तरह का यौन-संबंध नहीं बनाया है... (उन्होंने किशोर लड़कियों की ओर देखा और फिर मेरी ओर देखा) तुम समझती हो कि मेरा क्या मतलब है...!


मैं समझ गई कि गुरुजी उन युवा लड़कियों की उपस्थिति में "सेक्स" या "संभोग" शब्द का उपयोग करने से बचना चाहते थे। इसलिए मैंने तुरंत सिर हिला दिया।

मैं: हाँ गुरुजी। मैं आपकी बात समझ गई!

गुरुजी: ठीक है... मैं जानता हूँ कि यह तुम्हारे लिए बेकार की कवायद है, क्योंकि तुम अपने ही रिश्तेदार के साथ बाहर गई थी, लेकिन... तुम जानती हो बेटी... निर्मलता परीक्षण महायज्ञ से पहले यह एक प्रथागत उपाय है। मेरा मतलब है... कृपया मुझे इसके लिए माफ़ कर दो बेटी...!

मैं: (स्वाभाविक रूप से मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई, गुरुजी मुझसे माफ़ मांग रहे थे ): अरे गुरुजी आप माफ़ी क्यों मांग रहे हैं... कृपया माफ़ी मत मांगो! जैसा कि आपने शुरू में कहा था, हमे नियम और रीति-रिवाजों का पालन करना होगा।

गुरुजी (मुस्कुराते हुए और सिर हिलाते हुए): ठीक है बेटी! दरअसल, कुछ गृहिणियों के साथ पहले भी ऐसे मामले हुए हैं…!

गुरुजी ने शायद दो नई प्रवेशिकाओं, युवा नताशा और सुधा की मौजूदगी के कारण विस्तार से नहीं बताया।

मैं: एरर… मेरा मतलब है कि ठीक है गुरुजी। कोई समस्या नहीं है।

मैंने आत्मविश्वास से भरे रहने की पूरी कोशिश की, लेकिन जब तक मैंने योनि स्वाब के बारे में सुना, तब से मेरी हृदय गति काफी तेज हो गई थी! मैं अपने माथे पर पसीने की बूंदें महसूस कर सकती थी और मेरी हथेलियाँ और तलवे बर्फ की तरह ठंडे हो चले थे! मैंने अपनी जीभ से अपने पहले से ही सूखे होंठों को धीरे से चाटा साथ साथ गुरुजी के सामने शांत रहने की कोशिश की। मेरे दिमाग में आश्रम में आने और मामाजी जी के साथ जाने और लौटने तक का पूरा प्रकरण तेजी से घूम गया , मैं पहले भी आश्रम से बाहर गयी थी पर तब मेरे साथ गुरूजी का कोई न कोई शिष्य था और आश्रम से बाहर मेरे पिछले प्रवासो के दौरान भी मेरे कुछ अनूठे यौन अनुभव थे और तब चुकी मेरे साथ गुरूजी का कोई न कोई अनुयायी था इसलिए मेरा कोई निर्मलता परीक्षण नहीं किया गया , परन्तु अब ये निर्मलता परीक्षण का नियम ?


गुरुजी: बढ़िया! आज मुझे बस इतना ही कहना था। रश्मि, तुम वापस जाकर अपने कमरे में आराम कर सकती हो। मीनाक्षी तुम्हारे पास आएगी और स्वाब लेगी। आराम करो और अच्छी और गहरी नींद लो बेटी। जय लिंग महाराज!

मैं: जी गुरुजी। जय लिंग महाराज!

गुरुजी: नताशा, सुधा... तुम भी अपने कमरे में वापस जाओ। मेरा शिष्य तुम्हें आश्रम के अन्य पहलुओं के बारे में बताएगा। लेकिन जाने से पहले तुम्हें कुछ और बातें याद रखनी होंगी...!

मैं गुरुजी के कमरे से बाहर निकली तो मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा था! स्वाभाविक रूप से मैं पूरी तरह से खाली और सुन्न थी और बहुत घबराई हुई थी। अगर मेरा योनि स्वाब लिया जाता है तो यह निश्चित रूप से साबित हो जाएगा कि मैंने आश्रम से बाहर रहने के दौरान सेक्स किया था। मेरे लिए यह कितनी शर्मनाक स्थिति होगी! जैसे ही मैंने अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया, मुझे लगा कि मैं रो रही हूँ क्योंकि मैं जल्दी से इस स्तिथि से बचने का कोई रास्ता नहीं ढूँढ पा रही थी। मैं ये सोच कर भी परेशान थी की इसके बाद मैं गुरुजी का सामना कैसे करूँगी? इसका उन पर क्या प्रभाव पड़ेगा? वे आसानी से यह निष्कर्ष निकाल लेंगे कि मैंने अपने बुजुर्ग रिश्तेदार के साथ सेक्स किया है! कितनी शर्म की बात है!

जब मैं बिस्तर पर बैठी तो मेरा पूरा शरीर काँप रहा था और स्वाभाविक रूप से मैं पूरी तरह से घबराहट में थी। उन्होंने पहले ही उल्लेख किया था कि उनके पहले दो महिलाओं के साथ कड़वे अनुभव हुए हैं। उन्होंने भी मेरे जैसे ही आश्रम के बाहर अपने उपचार के दौरान संभोग किया होगा! मैं क्या करूँ? हे भगवान! मुझे कोई रास्ता दिखाओ! मैं गुरुजी के क्रोध का सामना कैसे करूँ?

मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी अंधी गली में चल रही हूँ और मुझे इस बात का बिलकुल भी अहसास नहीं था कि कितना समय बीत गया और मैं इस स्थिति से बाहर निकलने का रास्ता ढूँढ़ने में लगी रही ।

दस्तक! दस्तक!

कोई दरवाजे पर था!

मैं: मीनाक्षी ही होगी! हे लिंगा महाराज मेरे लिए कोई रास्ता निकालो! मुझे क्या करना चाहिए?

जब मैं दरवाजे की ओर बढ़ी तो अचानक मेरे दिमाग में एक विचार आया - क्या होगा अगर मैं मीनाक्षी से इस स्थिति में मेरी मदद करने के लिए कहूँ? लेकिन... लेकिन वह अचानक मेरी मदद क्यों करेगी और आश्रम के नियमों के खिलाफ क्यों जाएगी?

मैं: मुझे उसे मनाना होगा। मुझे उसे मनाना होगा। मुझे मनाना होगा... कोई और रास्ता नहीं है! मेरे पास .गुरुजी के सामने सकारात्मक स्वाब परिणाम के साथ सामना करने की हिम्मत ही नहीं है।

मीनाक्षी: शुभ संध्या मैडम! आपकी सैर कैसी रही?

मैंने बस जोर से मुस्कुरायी और उसे अंदर आने दिया। मीनाक्षी अपनी भारी लहराती गांड के साथ कमरे के अंदर मेरे पास से गुज़री। इस स्थिति में भी मैं उसकी लहराती मोटी गोल गांड से नज़र नहीं हटा पायी - उसकी साड़ी उसके नितंबों पर कसकर बंधी हुई थी और उसके नितंब बहुत आकर्षक लग रहे थे - यहाँ तक कि मुझे भी! मीनाक्षी बिस्तर पर बैठी थी; उसके हाथ में एक छोटा पैकेट था, मुझे लगा कि उसमें स्वाब के लिए उपकरण होगा।

मीनाक्षी: क्या बात है मैडम? आप काफ़ी पीली दिख रही हैं! मैडम... मुझे उम्मीद है कि आपके घर पर सब ठीक होगा?

मैंने फ़र्श की ओर देखा और बेचैनी में काँप रही थी ।

मीनाक्षी: मैडम... क्या हुआ? अरे... आप बहुत बेचैन लग रही हैं! कृपया मुझे बताइए मैडम कि क्या मैं आपकी कुछ मदद कर सकती हूँ?

मैं: मीनाक्षी... आप मेरी मदद कर सकती हैं... सिर्फ़ आप... सिर्फ़ आप ही मेरी मदद कर सकती हैं!

मैंने काँपती आवाज़ में धीरे से बुदबुदायी ।

मीनाक्षी (स्पष्ट रूप से काफी हैरान दिखी और खड़ी हो गई): मैडम, मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है? सच में….!

मैं अपना रहस्य बताने से इतना घबरा रही थी कि मैं रोने लगी। उसने जल्दी से मेरी बाँहें पकड़ीं और मेरा चेहरा ऊपर उठाया।

मीनाक्षी: मैडम… आप हमारे आश्रम में मेहमान हैं और हम अपने मेहमान की आँखों में आँसू नहीं देख सकते! कृपया मुझे बताइए मैडम क्या हुआ है? आप क्यों रो रही हैं?

मैं: मीनाक्षी… मैंने… मैंने एक अपराध किया है… मुझे पता है… मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था… मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी जाँच होगी….!

मीनाक्षी: मैडम, मैं बिल्कुल हैरान हूँ… कौन सा अपराध? आप किस परीक्षण की बात कर रही हैं?

वह मेरे पास आकर बैठ गई और मुझे अपनी कोहनी से मजबूती से पकड़ लिया। उसके बड़े आकार के स्तन मेरे कसे हुए स्तनों से टकरा रहे थे।

मैं: मैं इस परिस्थिति का शिकार बन गयी मीनाक्षी… मेरा विश्वास करो!

मीनाक्षी: मैडम… मैडम… सुनो! पहले शांत हो जाओ और मुझे साफ-साफ बताओ। यह सब मेरे लिए पहेली है… यहाँ बैठ जाओ।

उसने मुझे खाट पर बिठाया और मेरी आँखें पोंछी और मेरे बहुत करीब बैठ गई और लगभग मुझे गले लगा लिया! मैं उसके रवैये से भावुक हो गयी ।

मीनाक्षी: हाँ, अब बताओ मैडम… तुम इतनी चिंतित क्यों हो? क्या हुआ?

मैं: कृपया मेरी मदद करो मीनाक्षी… मैं गुरुजी का सामना नहीं कर सकती … मुझे बहुत डर लग रहा है… कृपया… (फिर से रोने लगी )!

मीनाक्षी: ओहो मैडम! कोई विनती नहीं और कोई रोना नहीं… कृपया! मत रोईए (उसने फिर से मेरी आँखें पोंछी) अब बस सामान्य रहो और मुझे बताओ कि क्या हुआ… और भगवान के लिए घबराओ मत!

मैं: (मैंने खुद को नियंत्रित किया) मीनाक्षी, मैं तुम्हें कैसे बताउन … यह बहुत शर्मनाक घटना है…!

मीनाक्षी: अगर तुम मुझे नहीं बताओगी, तो मैं तुम्हारी मदद कैसे कर सकती हूँ?


जारी रहेगी
 
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CHAPTER 8-छठा दिन

आश्रम में पुनः वापसी

अपडेट-3

निर्मलता परिक्षण में सहायता की गुहार
मीनाक्षी ने मुझे खाट पर बिठाया और मेरी आँखें पोंछी और मेरे बहुत करीब बैठ गई और लगभग मुझे गले लगा लिया! मैं उसके रवैये से भावुक हो गयी।

मीनाक्षी: हाँ, अब बताओ मैडम... तुम इतनी चिंतित क्यों हो? क्या हुआ?

मैं: कृपया मेरी मदद करो मीनाक्षी... मैं गुरुजी का सामना नहीं कर सकती ... मुझे बहुत डर लग रहा है... कृपया... (फिर से रोने लगी) !

मीनाक्षी: ओहो मैडम! आप विनती मत करिये और रोइये नहीं... कृपया! मत रोईए (उसने फिर से मेरी आँखें पोंछी) अब बस सामान्य रहो और मुझे बताओ कि क्या हुआ... और भगवान के लिए मैडम आप घबराओ मत!

मैं: (मैंने ख़ुद को नियंत्रित किया) मीनाक्षी, मैं तुम्हें कैसे बताउन ... यह बहुत शर्मनाक घटना है...!

मीनाक्षी: अगर तुम मुझे नहीं बताओगी, तो मैं तुम्हारी मदद कैसे कर सकती हूँ?

मैं: उम्म... दरअसल मुझे आश्रम के नियम के बारे में नहीं पता था कि आश्रम से बाहर होने पर मुझे सेक्स करने की अनुमति नहीं है। (मैं फिर से रोने लगी!)

मीनाक्षी: ओह! (वह स्पष्ट रूप से काफ़ी हैरान थी) लेकिन मैडम आप मामाँ के घर गई थीं, मुझे लगता है... क्या आपका... मेरा मतलब है कि आपके पति वहाँ मौजूद थे?

मुझे तुरंत ही जैसे कोई सुराग मिल गया! मैं अपने मन में बहुत शर्मिंदा थी कि मीनाक्षी को यह तथ्य कैसे बताऊँ कि मैंने मामा-जी के साथ सेक्स किया था! लेकिन जब उसने मेरे पति के बारे में बताया, तो मैंने इशारा पकड़ लिया।

मैं: हाँ... हाँ मीनाक्षी! अनिल वहाँ था... मेरा पति वहीँ था ... और... और तुम जानती हो कि उसने मुझे जाने नहीं दिया... बिना... (मैं यक़ीन दिलाने के लिए बनावटी ढंग से शरमा गई!)

मीनाक्षी: मैं समझ गई!

मैं: मीनाक्षी मेरी बात पर यक़ीन करो... मैंने उससे कहा कि मैंने अभी भी महायज्ञ पूरा नहीं किया है... लेकिन वह बहुत इच्छुक था... मेरा मतलब है...!

मीनाक्षी: सेक्स किया?

मैंने सिर हिलाया। मेरा सिर नीचे था। मैं फिर से धीरे से मेरे आंसू पोंछ रही थी। मैंने उसकी सहानुभूति पाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ अभिनय करने की कोशिश की।

मीनाक्षी: लेकिन फिर क्या तुमने गुरुजी को यह बताया है?

मैं: तुम क्या कह रही हो! (मैं लगभग चिल्ला पड़ी!)

मीनाक्षी: हम्म... अब मैं समझ सकती हूँ... जैसे ही मैं तुम्हारी योनि से स्वाब निकालूँगी, तुम रंगे हाथों पकड़ी जाओगी! यह वास्तव में गंभीर स्थिति है मैडम! गुरुजी बहुत नाराज होंगे अगर उन्हें पता चलेगा कि तुम अपने रास्ते से भटक गई हो।

जब मैंने मीनाक्षी की ओर देखा तो मैंने पाया कि वह बहुत उदास थी। उसके चेहरे से ख़ुशी गायब हो गई थी।

मैं: इसीलिए मीनाक्षी... इसीलिए... मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। कृपया मुझे इस स्थिति से बचाओ।

मीनाक्षी: लेकिन... लेकिन मैडम मैं आपकी क्या मदद कर सकती हूँ!

मैं: कृपया कुछ करो... कृपया गुरुजी को यह परिणाम मत बताना... कृपया मुझ पर दया करो।

मीनाक्षी (तुरंत खड़ी हो गई) नहीं! मैं ऐसा नहीं कर सकती! तुमने विश्वासघात किया है और तुम्हें इसकी क़ीमत चुकानी होगी।

मैं उसकी प्रतिक्रिया से चौंक गई और इस बार मैं वास्तव में बहुत घबरा गई। मैं चिंतित हो गई क्योंकि मेरा अंतिम लक्ष्य अचानक धुंधला दिखाई देने लगा!

मैं: मीनाक्षी... कृपया... मुझ पर कुछ दया करो! कृपया मुझे इस तरह अकेला मत छोड़ो! मेरी मदद करो... मैंने बहुत कुछ सहा है... कृपया मेरा दर्द समझो... मैं माँ बनना चाहती हूँ मीनाक्षी... मैं माँ बनना चाहती हूँ... उसके लिए... !

आँसू मेरे गालों पर लुढ़क रहे थे और मैं लगभग टूट गई। मीनाक्षी ने मेरी ओर देखा और एक मिनट के लिए सोचा और फिर पीछे हट गई।

मीनाक्षी: मैडम, अगर मैं इसमें आपकी मदद करने की कोशिश करूँगी तो यह गुरुजी के अधीन मेरी नौकरी को जोखिम में डालने जैसा होगा...!

मैं: प्लीज मीनाक्षी... गुरुजी को अगर यह पता चल गया तो वे मुझे छोड़ देंगे... क्या तुम मुझे यज्ञ पूरा करने और अंत में माँ बनने में मदद नहीं कर सकती! मैं हमेशा तुम्हारा आभारी रहूँगी ... हमेशा!

मुझे नहीं पता कि मीनाक्षी के चेहरे पर क्या नरमी आई, शायद मेरे गिड़गिड़ाते चेहरे की वज़ह से, लेकिन वह वापस आकर मेरे पास बैठ गई।

मीनाक्षी: लेकिन मैडम यह बहुत जोखिम भरा काम है...!

मैं: मीनाक्षी... प्लीज प्रिय! मेरे लिए यह करो!

वह फिर से सोच में पड़ गई और फिर मेरी आँखों में ग़ौर से देखने लगी। मैं थोड़ा अनिश्चित थी कि वह मेरी आँखों में क्या जानने की कोशिश कर रही थी!

मीनाक्षी: मैडम, मैं जोखिम उठा सकती हूँ, लेकिन मुझे पहले...!

मैं (मैंने ख़ुशी में उसे गले लगा लिया) : हे मीनाक्षी, तुम बहुत प्यारी हो! तुमने मेरी जान बचाई!

खुशी मानो मेरे अंदर से फूट पड़ी और मेरा चेहरा ख़ुशी से चमक उठा।

मीनाक्षी: मैडम रुको...पहले मुझे कोई ऐसा व्यक्ति ढूँढना है जिसने पिछले 24 घंटों में सेक्स न किया हो।

मैं: क्यों? तुम?

मीनाक्षी: हुह! अगर समाधान इतना आसान होता तो तुम्हें रोने और गिड़गिड़ाने की ज़रूरत नहीं होती! मैं क्या कहूँ मैडम... मुझे अपने बारे में बात करते हुए बहुत ज़्यादा तनाव हो रहा है! खैर, इसे एक तरफ़ रखिए और मुझे सोचने दीजिए कि ये कौन हो सकता है... ठीक है! सही है! शायद तुम बच गई हो मैडम!

मैं: कैसे? कृपया मुझे बताओ।

मीनाक्षी: मुझे दो नए प्रवेशकों में से किसी एक का स्वाब लेना होगा; वे किशोर हैं और अगर मैं ऐसा करूँगी तो तुम सुरक्षित रहोगी, हालाँकि यह पूरी तरह से गुप्त रूप से करना होगा। अगर कोई पुरुष शिष्य इस तथ्य को जान लेता तो मैं निश्चित रूप से मृत्युशैया पर पहुँच जाउंगी!

मैं: मैं तुम्हारी मदद करूँगी... चिंता मत करो... चिंता मत करो!

मीनाक्षी: ठीक है मैडम...!

मैं: लेकिन आप कुछ तनाव के बारे में कह रहे थे... क्या है? मुझे बताओ ना! अगर आप आश्रम में अपनी स्थिति को खतरे में डालकर मेरी मदद कर रहे हैं, तो क्या मैं आपके लिए कुछ नहीं कर सकती?

मीनाक्षी फिर से मेरी तरफ़ देख रही थी, मेरी आँखों में गहराई से! उसकी आँखों से ऐसा लग रहा था कि उसे किसी मदद की ज़रूरत है, लेकिन वह मुझे कुछ नहीं बता पा रही थी।

मैं: संकोच मत करो मीनाक्षी! मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करूँगी ... तुमने मेरी जान बचाई है! मैं...!

मीनाक्षी: मैडम... मेरी मदद करने के लिए आपको बहुत हिम्मत रखनी होगी!

मैं: मुझ पर भरोसा रखो! मैं तुम्हारे साथ रहूँगी!

मीनाक्षी: धन्यवाद मैडम। चलो अब समय बर्बाद न करें और पहले अपना काम करें... आप बस इतना जानती हैं कि मुझे एक गंदे बदमाश द्वारा ठगा और ब्लैकमेल किया जा रही हूँ। लेकिन मुझे लगता है कि आपकी पूरी मदद से मैं... मैं उससे छुटकारा पा सकता हूँ।

मैं: ज़रूर तुम कर सकती हो मीनाक्षी... मैं वादा करती हूँ... चिंता मत करो!

जाहिर है कि मैं इतनी खुश थी कि अंधी गली में एक दरार या, रौशनी की किरण देख कर, मैं अनजाने में ही वादे कर रही थी!

मीनाक्षी: मैडम, अब हमें जल्दी से काम करना चाहिए और दूसरों को शक नहीं होना चाहिए। मैं उन लड़कियों के कमरे में जाऊँगी... उनके नाम क्या हैं? ठीक है... नताशा और सुधा... मैं आपको एक भेजूँगी और कहूँगी कि आपको लगता है कि आपने उसे पहले देखा है... आप उससे बातचीत शुरू करें और मैं वापस आ जाऊँगी।

मैं: ठीक है मीनाक्षी... उह! मुझे फिर से घबराहट हो रही है... मेरा दिल फिर से धड़कने लगा है... देखो!

मीनाक्षी ने अपनी दाहिनी हथेली मेरी साड़ी के पल्लू के ऊपर मेरी छाती के ऊपरी हिस्से पर रखी। वह मेरे उभरे हुए स्तनों को देखकर मुस्कुराई।

मीनाक्षी: मैडम, आप बस अपना चेहरा धो लें और सामान्य दिखें, जबकि मैं बड़ी लड़की नताशा, को यहाँ भेजती हूँ। आप ये दरवाज़ा खुला रहने दें मैडम।

जारी रहेगी
 
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CHAPTER 8-छठा दिन

आश्रम में पुनः वापसी

अपडेट-4

निर्मलता परिक्षण में सहायता
मीनाक्षी: मैडम, अब हमें जल्दी से काम करना चाहिए और दूसरों को शक नहीं होना चाहिए। मैं उन लड़कियों के कमरे में जाऊँगी... उनके नाम क्या हैं? ठीक है... नताशा और सुधा... मैं आपको एक भेजूँगी और कहूँगी कि आपको लगता है कि आपने उसे पहले देखा है... आप उससे बातचीत शुरू करें और मैं वापस आ जाऊँगी।

मैं: ठीक है मीनाक्षी... उह! मुझे फिर से घबराहट हो रही है... मेरा दिल फिर से तेजी से धड़कने लगा है... देखो!

मीनाक्षी ने अपनी दाहिनी हथेली मेरी साड़ी के पल्लू के ऊपर मेरी छाती के ऊपरी हिस्से पर रखी। वह मेरे उभरे हुए स्तनों को देखकर मुस्कुराई।

मीनाक्षी: मैडम, आप बस अपना चेहरा धो लें और सामान्य दिखें, जबकि मैं बड़ी लड़की नताशा, को यहाँ भेजती हूँ। आप ये दरवाज़ा खुला रहने दें मैडम।

मैं: ठीक है…

जब मीनाक्षी बाहर गई तो मैं जल्दी से शौचालय में गयी । मैंने जल्दी से अपना चेहरा धोया और अपने बालों को कंघी किया ताकि मैं सामान्य दिखूँ। कुछ ही मिनटों के भीतर नताशा ने मेरे दरवाजे पर दस्तक दी।

मैं: तुम नताशा हो? है न? आ जाओ !

युवा लड़की ने मुस्कुराते हुए सिर हिलाया और मेरे कमरे में दाखिल हुई। मैंने धीरे से दरवाजा बंद किया, लेकिन मीनाक्षी के आने के लिए उसे बंद नहीं किया। हालाँकि मैंने नताशा को पहले भी देखा था, लेकिन गुरुजी की मौजूदगी के कारण मैं उसे ठीक से नहीं देख पायी थी , लेकिन इस बार मैंने उसे ध्यान से देखा।

मैं: कृपया बैठ जाएँ…

मैंने उस किशोरी लड़की को ध्यान से देखा। नताशा औसत से ज़्यादा लंबी, गोरी और थोड़ी मोटी थी। उसका चेहरा प्यारा था और उसके कंधे तक बाल कटे हुए थे। उसने एक फिटिंग सलवार-कमीज़ पहना हुआ था और उसके स्तन उसमें से काफी भरे हुए दिख रहे थे क्योंकि उसका दुपट्टा उसकी गर्दन की दिशा में ऊपर की ओर खिसका हुआ था। जैसे ही मैंने उसके शरीर को नीचे देखा, मेरी नज़र उसकी गांड पर टिक गई!

वाह! मैं खुद से बड़बड़ाना बंद नहीं कर सकी !

नताशा की गांड की गोलाइयाँ उसकी ड्रेस से बहुत ही उत्तेजक तरीके से बाहर निकली हुई थीं। यह एक खास विशेषता है जो केवल कुछ महिलाओं में ही होती है और मुझे तुरंत दीपशिखा की याद आ गई, जो एक विवाहित महिला थी, जो हमारी पड़ोसी थी, और उसकी भी गांड ऐसी ही थी! सामान्य स्थिति में, कमर गांड की गोलाइयों में आसानी से मुड़ जाती है, लेकिन नताशा (और दीपशिखा की भी) के मामले में, कमर शरीर के तल से एकदम बाहर की ओर मुड़ी हुई थी और मांसल नितंब काफी आकर्षक तरीके से बाहर की ओर निकले हुए थे। यह निश्चित रूप से एक लड़की की बहुत आम विशेषता नहीं है और इसलिए मैं नताशा को घूरने की हकदार थी! इसके अलावा, उसने चश्मा पहना हुआ था जो उसके चेहरे से भी काफी मेल खा रहा था। कुल मिलाकर मेरे दिमाग में इस युवा किशोरी की पहली छाप एक आकर्षक चित्रण थी।

नताशा: तुमने कहा कि तुमने मुझे कही देखा है... मीनाक्षी आंटी कह रही थीं...

मैं: ओह! हाँ, हाँ... लगता है मैंने तुम्हें किसी शादी समारोह में देखा है! दरअसल मैं गुरुजी के सामने आपसे बात नहीं कर पायी , आप जानती हैं…

नताशा: हाँ, हाँ…

मैं: वैसे, क्या आप यूपी से हैं?

नताशा: नहीं भई… उफ़… आंटी… मेरा मतलब है…

मैं: आप मुझे भाबी कह सकती हैं…

नताशा: (मुस्कुराते हुए, उसकी मुस्कान भी अच्छी थी!) ठीक है भाबी… नहीं, असल में मैं दिल्ली से हूँ।

मैं: ओह! तो मैं गलत हो गयी हूँ। आप बहुत हद तक उस लड़की से मिलती-जुलती हैं… जब मैंने आपको गुरुजी के कमरे में देखा तो मैं वाकई उलझन में पड़ गयी थी ।

नताशा शर्म से मुस्कुराई। मैं इस युवा सुंदरी से काफी प्रभावित थी और सोच रही थी कि वह यहाँ आश्रम में क्यों आई है!

मैं: वैसे भी, यह हमें कम से कम बातचीत करने का अवसर मिलता है… यहाँ मीनाक्षी के अलावा बातचीत करने वाला कोई नहीं है।

नताशा: हाँ और सच बताऊँ (उसने अपनी आवाज़ कम कर ली) मुझे यहाँ काफी डर लग रहा है… सभी पुरुष हैं और गुरुजी के सर्वोच्च व्यक्तित्व के सामने तो और भी ज़्यादा झिझक महसूस होती है !

मैं: हाँ, मैं भी शुरू में बहुत झिझक रही थी... मीनाक्षी को छोड़कर गुरुजी के सभी शिष्य पुरुष हैं।

नताशा: मैं समझ गई।

तभी, दरवाजे पर दस्तक हुई और मुझे पता थे कि मीनाक्षी है।

मैं: कृपया अंदर आइए!

मीनाक्षी कमरे में दाखिल हुई और धीरे से दरवाजा बंद किया, इस बार उसने कुंडी लगाई।

मीनाक्षी: तो क्या आपको अपने बीच कोई पुराना संबंध मिल गया?

मैं: नहीं! मैं गलत थी, लेकिन वह मेरी दूर की रिश्तेदार की तरह दिखती है।

मीनाक्षी: ठीक है... वैसे भी मैं जिस कारण से आई थी। नताशा, अगर आप अनुमति दें तो मुझे एक छोटा सा प्रारंभिक आश्रम नियम पूरा करना होगा।

नताशा: उफ्फ! यहाँ बहुत सारे नियम हैं आंटी! संजीव जी आए और उन्होंने हमारे सारे कपड़े पहले ही ले लिए।

मैं: (मैं मुस्कुराना बंद नहीं कर सकी): मैं उस दौर से गुज़र चुकी हूँ नताशा।

नताशा: सच में भाबी! (उसने अपनी आवाज़ कम कर ली) किसी अनजान पुरुष को अपने अंडरवियर... उह... ब्रा और पैंटी सौंपना कितना शर्मनाक है। क्या आप को ऐसा नहीं लगता?

मैं: उम्म... हाँ! लेकिन गुरुजी पुरुष और महिला शिष्यों में कोई अंतर नहीं करते... तुम्हें यह तो पता ही होगा।

नताशा: ओ! मैं समझ गयी ।

मैं: लेकिन क्या संजीव ने तुम्हें आश्रम की पोशाक नहीं दी?

नताशा: दरअसल... उह... मेरी माँ ने गुरुजी से अनुरोध किया था कि वे हमें साड़ी न पहनाएँ क्योंकि हम उसे गंदा कर देगी (वह हँसी), लेकिन चूँकि आश्रम की पोशाक के रूप में सलवार-कमीज़ की अनुमति नहीं है, इसलिए गुरुजी ने कहा कि वे आश्रम के दर्जी के ज़रिए इसका ध्यान रखेंगे। उनकी बहुत दया है... संजीवजी ने कहा कि हमे सोने से पहले अपने आश्रम के कपड़े मिल जाएंगे ।

मैं: (मुस्कुराते हुए) मैं समझ गयी ।

मीनाक्षी (अपने साथ लाए पैकेट से ट्यूब और स्केबंगर निकालते हुए): नताशा, मुझे तुम्हारे... (उसने अपनी आँखों से इशारा किया) से एक सैंपल लेना है क्योंकि आश्रम के नियमों के अनुसार कुछ जाँच के लिए उसे हम क्लिनिकल लैब में ले जा रहे है

नताशा: मेरी योनि से? (उसने आखिरी शब्द फुसफुसाए)

वह स्वाभाविक रूप से थोड़ी हैरान थी।

मीनाक्षी: चिंता मत करो! बस नियमित लैब टेस्ट के लिए। गुरुजी का दृष्टिकोण बहुत वैज्ञानिक है, मेरी बच्ची।

नताशा (खड़े होकर) ओ! ठीक है, लेकिन... कैसे आंटी?

मीनाक्षी: तुम बस अपना पायजामा थोड़ा नीचे करो और मैं स्वैब ले लूँगी।

नताशा: ठीक है आंटी।

नताशा काफी सहज थी क्योंकि कमरे में सिर्फ़ हम महिलाएँ ही मौजूद थीं और उसने अपनी कमीज़ उठाई और पायजामा की गाँठ खोलना शुरू कर दिया। मैंने देखा कि उसका पेट बिल्कुल सपाट था और उसकी कमर ईर्ष्या के लिए पतली थी क्योंकि उसने जल्दी से अपना पायजामा अपनी जाँघों से नीचे कर दिया और अपनी लाल पैंटी दिखाई। मीनाक्षी उसके पास गई और उसके सामने बैठ गई ताकि उपकरण के माध्यम से स्वैब ले सके। नताशा स्पष्ट रूप से अपनी पैंटी पूरी तरह से उजागर करके खड़ी होने पर काफी अभद्र लग रही थी।

मीनाक्षी ने अपनी पैंटी को थोड़ा नीचे खींचा ताकि उसकी योनि दिखाई दे, जिस पर पतले बाल थे। नताशा हमारे सामने स्पष्ट रूप से शरमा रही थी। मीनाक्षी ने अपनी उंगलियों से अपनी योनि की दरार को खोला और पहले योनि मार्ग को चिकना करने के लिए एक जेल अंदर डाला। मीनाक्षी द्वारा उसके सबसे संवेदनशील अंग को छूने पर नताशा स्वाभाविक रूप से धीमी फुसफुसाती हुई कराहने लगी।

मीनाक्षी: उम्म… अच्छी छोटी सी बात तुम्हें बालों को अधिक बार ट्रिम करना चाहिए नताशा… इससे यह अधिक आकर्षक लगेगा।

मीनाक्षी ने ऊपर देखा और उसे देखकर मुस्कुराई और नताशा ने भी शर्म से उसका जवाब दिया और फिर उसने धीरे से स्वैब टूल को उसकी योनि में धकेल दिया। मीनाक्षी खुद भी उस मुद्रा में बहुत सेक्सी लग रही थी; उसकी बड़ी गोल साड़ी से ढकी हुई गांड बहुत ही आकर्षक लग रही थी क्योंकि वह बैठी हुई थी।

नताशा: शशशशश….. उउउउउउउउउउउउइइइइइइ… धीरे से आंटी… आह्ह…

जाहिर है कि मीनाक्षी ने जब ट्यूब को अपनी जेल वाली नताशा की योनि में डाला तो वह बहुत, बहुत असहज थी। हम शादीशुदा औरतें बहुत तंग हो जाती हैं और वह तो बस एक छोटी किशोरी थी!

मीनाक्षी: संभल जाओ मेरी प्यारी… आराम से ! तुम बहुत ज़्यादा हिल रही हो… आह्ह… ठीक है, यह… हो गया।

मीनाक्षी ट्यूब लेकर खड़ी हुई और ध्यान से उसे बंद बीकर जैसे उपकरण में रख दिया।

मीनाक्षी: नताशा… एक बात। तुम्हें इस बारे में किसी और शिष्य से बात करने की ज़रूरत नहीं है… तुम्हें पता है… क्योंकि यह पूरी तरह से एक स्त्री प्रक्रिया है और तुम्हें भी इस बारे में बात करना अजीब लगेगा… इसलिए इसे अपने तक ही रखो।

जारी रहेगी
 
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औलाद की चाह

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CHAPTER 8-छठा दिन

आश्रम में पुनः वापसी

अपडेट-5

मीनाक्षी की समस्या

मीनाक्षी ने ऊपर देखा और उसे देखकर मुस्कुराई और नताशा ने भी शर्म से उसका जवाब दिया और फिर उसने धीरे से स्वाब टूल को अपनी योनि में धकेल दिया। मीनाक्षी खुद भी उस मुद्रा में बहुत सेक्सी लग रही थी; उसकी बड़ी गोल साड़ी से ढकी हुई गांड बहुत ही आकर्षक लग रही थी क्योंकि वह बैठी हुई थी।

नताशा: श्ह ... क्योंकि यह पूरी तरह से एक स्त्री प्रक्रिया है और आपको भी अजीब लगेगा... इसलिए इसे अपने तक ही सीमित रखें।

नताशा: जाहिर है आंटी! मैं इसे एक पुरुष को ये कैसे बता सकती हूँ... बिल्कुल नहीं!

कुछ और अनौपचारिक बातचीत के बाद नताशा अपने कमरे में चली गई क्योंकि उसकी बहन सुधा वहाँ अकेली थी।

मीनाक्षी: मैडम, आपका काम हो गया!

मैं: उह्ह! मीनाक्षी... बहुत-बहुत धन्यवाद! मेरे पास आभार व्यक्त करने के लिए शब्द नहीं हैं!

मीनाक्षी: मैडम, जब तक गुरुजी आपकी रिपोर्ट देख आपको अगली क्रिया के लिए अनुमति नहीं देते , मुझे इन्तजार करना होगा ... मुझे बहुत सावधान रहना चाहिए!

मैं: ठीक है, ठीक है! लेकिन... लेकिन आप कुछ ब्लैकमेल के बारे में बता रही थीं।

मीनाक्षी: हाँ मैडम। अब जब काम हो गया है, तो मैं आपके साथ साझा कर सकती हूँ। दरअसल कुछ महीने पहले यह आदमी, जो मुझे ब्लैकमेल कर रहा है, कुंडली और कुछ अन्य उद्देश्यों के लिए गुरुजी के पास आया था। वह अक्सर आता था और गुरुजी उससे बात करना पसंद करते थे। इस दौरान जब भी उसे मौका मिलता तो वह मुझसे बातें भी करता और… और असल में मुझे भी शुरू में वह पसंद आया। वह एक अच्छा कद-काठी वाला युवक था और मैडम, हालांकि मैं गुरुजी का भक्त हूँ… आप जानती हैं… कई बार… बढ़ती उम्र के साथ युवा पुरुषों के प्रति आकर्षण अपने आप बढ़ जाता है। मैं खुद को रोक नहीं पायी …!

मैं: मैं समझ सकती हूँ, मीनाक्षी।

मीनाक्षी ने फर्श की ओर देखा और सिर हिलाया। मैंने आगे बढ़कर उसके कंधे पर हाथ रखा।

मैं: फिर?

मीनाक्षी: उसने मुझे आश्रम के बाहर मिलने के लिए बुलाया। सच कहूँ तो मैं आश्रम के सख्त नियमों से कुछ हद तक निराश थी और… और मैंने खुद को इस बात के लिए प्रतिबद्ध कर लिया, बिना यह जाने कि यह ठग…!

उसने अपने होंठ भींच लिए और जोर-जोर से सिर हिला रही थी। उसकी आँखों में आँसू भी थे।

मैं: मीनाक्षी… मैं इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए तुम्हारे साथ दूंगी … चिंता मत करो! कृपया जारी रखो…!

मीनाक्षी: धन्यवाद मैडम। मैं आपके मौखिक समर्थन से पहले से ही बेहतर महसूस कर रही हूँ। (वह थोड़ी देर के लिए रुकी) हुह! हम आश्रम में किसी की जानकारी के बिना शायद हफ़्ते में एक बार बाहर मिलने लगे और मैडम, आश्चर्य की बात नहीं कि जब तक मैं उसके साथ थी, तब तक मैं तरोताज़ा हो रही थी…

मैं: हम्म. उसका नाम क्या है?

मीनाक्षी: महेश!

मैं: उम्म. मीनाक्षी और महेश?

मीनाक्षी: अब वह मेरे लिए सिर्फ़ एक गंदा बदमाश है मैडम… बस एक गंदा गुंडा!

मैं: फिर क्या हुआ?

मीनाक्षी: फिर समय के साथ उसने मुझे… (जोर से सिर हिलाते हुए) मुझे एक पल के लिए भी एहसास नहीं हुआ कि उसके पास ऐसी गंदी योजनाएँ थीं! आप जानती हैं मैडम, मैं शुरू में बहुत खुश थी कि वह मेरे शरीर को उन भूखी निगाहों से नहीं देखता था और जब भी उसे मौका मिलता था, तो वह मुझे छूने के लिए कोई खास उत्सुकता भी नहीं दिखाता था। इससे मेरी आस्था और भी बढ़ गई। हम गाँव के बाहर एक फिल्म देखने गए और मेरे लिए यह बहुत मज़ेदार था! मैं उसके साथ वाकई तरोताजा महसूस कर रही थी, लेकिन... लेकिन (मीनाक्षी ने फिर जोर से सिर हिलाना शुरू कर दिया)... यह सब पहले से तय था! हुह!

मैंने धीरे से उसका हाथ पकड़ा और उसे सहारा देने की कोशिश की।

मीनाक्षी: फिर उसे योजना बनाई! एक दिन उसने मुझे शहर में एक बड़े मेले में जाने का प्रस्ताव दिया। यह एक जाल था। मुझे कभी एहसास नहीं हुआ।

मैं: जाल? कैसे?

मीनाक्षी: मैंने आश्रम से एक दिन की छुट्टी ली और उसके साथ चली गई। हम पूरे मेले में पैदल चलकर बहुत थक गए थे और उसने सड़क किनारे एक छोटी सी धर्मशाला में आराम करने का प्रस्ताव रखा, जहाँ हम नहाकर तरोताजा हो सकते थे।

मीनाक्षी की ठुड्डी झुक गई और उसके चेहरे पर लालिमा छा गई क्योंकि वह अपनी कहानी के चरमोत्कर्ष को छूने वाली थी।

मीनाक्षी: यह एक सिंगल रूम था और सेटिंग ऐसी थी मैडम…

मैं: हम्म… मैं समझ सकती हूँ… लेकिन यह स्वाभाविक भी है मीनाक्षी… तुम दोनों एक दूसरे को पसंद करते थे…

मीनाक्षी: हाँ उस समय मैं अंधी थी… हुह! उसने जाल बिछाया गया था और मैं उसमे फस गयी …

पहली बार मुझे मीनाक्षी की आँखों में आँसू के निशान दिखाई दिए। स्वाभाविक रूप से मैं यह जानने के लिए उत्सुक थी कि उसके साथ वास्तव में क्या हुआ।

मीनाक्षी: मैडम उस कमीने ने वहाँ एक स्वचालित कैमरा लगा रखा था और मेरे साथ उसके सभी अंतरंग क्षणों को कैद कर लिया… साथ ही मुझे बिना कपड़ों या लगभग बिना कपड़ों की हालत में!

मैं: क्या?

मीनाक्षी: हाँ मैडम, अब वह गुरुजी और गाँव वालों को भी यह सब बताने की धमकी दे रहा है!

मैं: हे भगवान! कितना गंदा बदमाश है! लेकिन… लेकिन तुम्हें यह एहसास नहीं हुआ…

मीनाक्षी: मैडम… मैं इतनी मग्न थी… शायद आप समझ सकती हो…

मैं: हम्म… मैं समझ सकती हूँ!

मीनाक्षी: मैं कभी भी उसके इरादों का अंदाजा नहीं लगा पाई…

मैं: वह क्या चाहता है?

मीनाक्षी: आनंद… और क्या!

मैं: उफ्फ! ये मर्द… और तुम उसे मना नहीं कर सकती क्योंकि…!

मीनाक्षी: बिल्कुल मैडम… वो उन तस्वीरों के आधार पर ब्लैकमेल कर रहा है और मेरा शारीरिक शोषण कर रहा है और… और मैं बिल्कुल असहाय हूँ…! (उसने अपनी ठुड्डी नीचे कर ली और फर्श की ओर देखने लगी; वह वाकई रो रही थी)

मैं: मैं इस स्थिति से बाहर निकलने में तुम्हारी मदद करना चाहूँगी… लेकिन कैसे? कैसे मीनाक्षी?

मीनाक्षी: मैडम, जब तुमने कहा कि तुम मेरी मदद करोगी तो मैंने तुरंत उस बदमाश को पकड़ने की योजना बना ली है ।

मैं : कैसे ?

मीनाक्षी: मैडम, मुझे इसकी योजना थोड़ी और ठोस तरीके से बनानी पड़ेगी क्योंकि मुझे उसके गंदे चंगुल से निकलना ही है। मैं तुम्हें सब कुछ बता दूँगी, लेकिन अभी नहीं। मुझे गुरुजी के पास जाने में देर हो रही है, लेकिन निश्चिंत रहो कि ब्लैकमेलर तुम्हें किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुँचा पाएगा।

मैं: ठीक है, ठीक है… तो जल्दी से गुरुजी के पास जाओ… यह सबसे महत्वपूर्ण है।

मीनाक्षी: ठीक है मैडम! यह कहते हुए मीनाक्षी नताशा की योनि से लिया गया जांच का नमूना लेकर कमरे से बाहर चली गई। मैंने थोड़ी देर आराम किया और जल्दी से खाना खाकर बिस्तर पर चली गई। मैं वाकई बहुत थकी हुई थी और मीनाक्षी को परेशान कर रहे उस ब्लैकमेलर को कैसे फंसाऊं, यह सोचते-सोचते मैं सो गई।

अगले दिन जब मैं उठी तो काफी देर हो चुकी थी और जब मैंने घड़ी देखी तो सुबह के 09:00 बज रहे थे! मैं जल्दी से बिस्तर से उठी और शौचालय गई। गहरी नींद के बाद मैं बहुत तरोताजा महसूस कर रही थी और जैसे ही मैंने अपना चेहरा धोया, मैं बहुत खुश और ऊर्जा से भरी हुई महसूस कर रही थी। मुझे पहले ही बता दिया गया था कि मुझे सुबह 11 बजे तक गुरुजी के पास जाना है और मुझे नहाना नहीं चाहिए क्योंकि मुझे "निर्मलता परीक्षण" के दौरान नहाना होगा। मुझे स्वाभाविक रूप से बहुत भूख लगी थी और इसलिए मैंने जल्दी से अपना नाश्ता कर लिया और आश्रम के चारों ओर टहलने चली गई ताकि गुरुजी के पास जाने से पहले मैं पूरी तरह तरोताजा हो जाऊं। साथ ही मैं मीनाक्षी से यह भी जानना था कि सब ठीक है या नहीं?

“गुड मॉर्निंग भाबी!”

मैं रुकी और पीछे मुड़ी । यह नताशा थी; उसकी बहन सुधा भी उसके साथ थी।

मैं: अरे तुम! गुड मॉर्निंग!”

यह देखकर अच्छा लगा कि वे दोनों भी आश्रम के रंग के कपड़े पहने हुए थीं, हालाँकि साड़ी नहीं, बल्कि अच्छी दिखने वाली घाघरा-चोली। जैसे ही मैं दोनों लड़कियों के करीब पहुँची , मुझे लगा कि नताशा को चुनरी/दुपट्टा पहनना चाहिए था क्योंकि उसकी टाइट चोली में उसके दो सीधे स्तनों का शंक्वाकार आकार काफी आकर्षक था!

नताशा: सुबह की सैर पर जा रही हो भाबी?

मैं: हाँ, कुछ हद तक। तो आश्रम में आपकी पहली रात कैसी रही? क्या आपको अच्छी नींद आई? और… और आपका क्या हाल है? (मैंने सुधा की ओर इशारा कर पूछा ?)

जारी रहेगी
 
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