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Waise bhai aapke update ki frequency kya hai matlab hafte me kitne update dete ho ya kitne din par ?UPDATE 027
उम्मीद से बड़ा था अमर का घर
जैसा चांदनी ने बताया था उसके बिल्कुल उलट
कम से कम 4000 स्क्वायर फिट में
शहर के पोस इलाके में , बड़ा गेट , चमकती टाइल्स , ओह बहनचो ऑडी ... आंखे सन्न
सामने बड़ा सा इंट्रेंस
मै अंदर गया और उसने बहुत वॉर्म वेलकम किया
फिर हम दोनो बड़े से हाल में बैठे थे
कभी चमकती टाइल्स तो कभी विदेशी गद्दे वाली सोफे के नक्काशीदार किनारे , सब कुछ वेल फर्निश...
किसी को आवाज देने की जरूरत नहीं उसने एक छोटी सी जिंगल बेल खनकाई और
तभी एक गजब की गदराई मोटे चूतड़ों वाली औरत आई हाथों में चाय की केतली लिए
आंखे देखा तो सन्न रह गया
वो औरत सेक्सी फ्रेंच हाउस मेड लिंजरी वाले आउटफिट में थी और आउटफिट भी ऐसा जिसमें उसने सिर्फ ब्लाउज और नीचे कमर पर शॉर्ट एप्रेन बांध रखा था जो बस आगे से उसके पेडू समेत चूत के हिस्सों को ढक रहा था लेकिन बगल से लंबी मोटी गदराई चिकनी जांघें साफ दिख रही थी पूरी वैक्स की हुई
वो लहराती हुई ट्रे लाकर मेरे सामने कांच के टेबल पर रखी और उसके ढीले ब्लाउज से झांकती उसकी मोटी मोटी चूचियां, मानो सरक कर बाहर ही झूल जाएंगी
फिर बिना वो मेरी ओर देखे बस पलट कर चली गई
जाते हुए उसके मोटे मोटे गद्देदार चूतड़ों की थिरकन ,बड़ी चतुराई से उसने पीछे के दरारों को छिपा रखा था उस एप्रेन के फीते से जो चलने पर भी उसके चूतड़ों को पूरी तरह से नंगा नहीं होने दे रहे थे
ओह्ह्ह्ह बहनचो अब ये क्या था
मेरा दिमाग एकदम सुन्न हो गया
बड़ी बड़ी आंखों से मै अमर को देखा जो सामने रखी ट्रे से कॉफी उठा कर मुस्कुराया
मेरी आँखें मुस्कुरा उठी
: ये सब क्या ?
: ओह रोहन तुम भी न , इतना जल्दी चौकों मत
मै शांत रहा था क्योंकि कही न कही उसके कहने का मतलब था कि चीजे अभी और भी उसे सरप्राइज़ करने वाली है
: दीदी को पता है इस बारे में ( मेरा इशारा उस हाउस मेड की ओर था )
: हा , उसे मेरे शौक के बारे में अच्छे से पता है ( वो बड़े साफ लहजे में बोला )
मै सोचने के लिए मजबूर हो गया कि आखिर कोई लड़की कैसे अपने bf को इनसब के लिए छूट दे सकती है ।
: देखो रोहन , माना कि अभी तुम्हारे हमारे रिश्ते बड़े अजीब लग रहे होंगे , लेकिन यकीन करो मेरा.. यही असल लाइफ तो हम सभी जीना चाहते है न .. पैसा हो , एक प्यार करने वाली सेक्सी gf या बीवी हो और ढेर सारा सेक्स हाहाहाहाहा
कही न कही उसकी बाते रिलेट करने वाली थी लेकिन फिर वही अहम आ जाता है कि नहीं मै ऐसा नहीं हू चाहिए मुझे भी लेकिन थोड़ा शरीफ हूं मै .. वगैरह वगैरह !!
मै बस मुस्कुराया और हल्के से सर हिलाया
: तो फिर बताओ कितनी बार ?
एकदम से अमर से सवाल दागा , शायद ये उसका अपना तरीका था
: मतलब ? ( मै थोड़ा उलझा कि बंदा जानना क्या चाहता है )
: उस रात पार्टी नाइट में .... कितनी बार
मै उसका इशारा समझ गया था कि मैने कितनी बार हिलाया , मै शर्म से मुस्कुराया । मै ऐसे सवालों का आदी भी नहीं था और शर्माना जायज था ।
: क्या यार बोलो भी
: एक ( मै बोल कर चुप हो गया एक शर्माहट भरी मुस्कुराहट से )
: बस एक ?
: हा उतना ही काफी था मेरे लिए हीही
: लेकिन तुमने कुछ पहल क्यों नहीं की , लाइक चांदनी को पकड़ लेते
: दीदी के सामने ? हीही ( मैने इस सवाल का जवाब तो उस रात से सोच रखा था )
: तो कैसा रहा एक्सपीरियंस ?
: बता नहीं सकता हाहाहा ( मै हसने लगा ) मतलब पूरी फिल्म देख ली मैने अच्छी खासी हीही
: हाहाहाहा ये सही कहा तुमने
मै मुस्कुराता रहा थोड़ी देर
: तो कैसी लगी तुम्हे ?
: कौन चांदनी ?
: ना यार बबली माय सेक्सी बूटी ( उसने शरारती मुस्कुराहट से मुझे देखा )
मेरा चेहरा सफेद पड़ने लगा , कैसा महसूस करेंगे आप जब आपकी बहन का bf आपको आपकी ही बहन के बारे में ये सवाल पूछे
: अरे यार चिल न , सोचो ही मत कि वो तुम्हारी दीदी है । अब बताओ
उसने मुझे थोड़ा सहज करने का प्रयास किया
: उम्मम गुड
: क्या यार तुम भी , तुमने उसकी हॉर्नीनेस को फिल नही किया .. उसकी गर्म सांसों को , वो जब सिसकारियां ले रही थी और मुझे आवाज दे रही थी
एक पल को आंखों के सामने वो नजारा चलने लगा जिसमें बबली दीदी अपने उत्तेजना के चरम पर थी और उनकी तेज कामुक चीखों से कमरा गूंज रहा था
मै आंखे खोल दी और मेरी धड़कने बेकाबू तरीके से आगे बढ़ रही थी , पेंट में हरकत होने लगी । मैने बेचैनी महसूस की और अमर बस मुझे देखे जा रहा था । मैने उसकी ओर देखा और वो अपने होठ सिकोड़ कर मुस्कुराया , उसने मेरी चोरी पकड़ ली थी ।
: उम्मम तो तुम्हे याद है उसकी सिसकिया
मै शांत रहा और बस मुस्कुराया , शायद यही कर भी सकता था मै
: तुम्हे पता है पहली बार जब हम मिले थे तो ... उसने मुझे थप्पड़ मारा था
: क्या ? ( मै हंसा ) दीदी ने
: हा यार , मै एयरपोर्ट पर अपने पेरेंट्स को मुंबई की फ्लाइट पकड़वाने गया था और वो उसी रोज दिल्ली से आई थी । उफ्फ क्या कमाल की चाल थी उसकी
शॉर्ट स्लीवलेस टॉप , फुल जैकेट और वो स्किन फिट योगा पैंट जैसे उसके पैंट , जिसमें उसके चूतड़ों की थिरकन ... सीईईई अब क्या बताऊं
एकदम से अमर अपनी आंखे बंद कर, भौहें सिकोड़ कर माथे पर सिकन ले आया और उसके पंजे की उंगलियां फैल कर पूरी हथेली को ऐसे शेप में ले गई मानो वो अपनी कल्पनाओं में बबली के चूतड़ों को पकड़ने के लिए छटपटा रहा हो
उसके होठ अजीब तरह से सिकुड़ रहे थे ... जैसे उसे कितनी तलब हो बबली दीदी के मुलायम चूतड़ों की ।
इतनी दीवानगी , मैने अंदर से खुद को झकझोरा
फिर वो जब हाइ हिल वाले सैंडल में चल रही थी तो उसके बड़े बड़े रसीले मटके जैसे चूतड़ आह कभी इधर कभी उधर ( वो अपने हाथों से अपनी कल्पनाओं में खोए हुए ब बली के चूतड़ों की चाल बता रहा था ) और वो उछाल ... हाय दिल ही बेकाबू हो गया ... पानी से भरा गुब्बारा जितना लचीला होता है न रोहन ...
हलक से थूक गटक कर वो मेरी ओर देखा , उसकी बातों से मेरा तो पैंट फटने जैसा हो गया था कि भाई ये बन्दा आखिर है क्या चीज । इतनी सहजता से वो बस दीदी के चूतड़ों को मेरी आंखों के सामने नचा रहा था और लंड बगावत पर
: पानी से भरे लबालब गुब्बारों में जो उछाल और छूने पर जो थिरकन आती है सेम वैसी है बबली के गाड़ की चर्बी अह्ह्ह्ह जी करता है काट खाऊं
मै उसकी हरकतों पर मुस्कुराया
: फिर हुआ क्या कि दीदी ने आपको थप्पड़ मारा
: अरे हा , वो दरअसल तेजी में थी और एकदम से मुझसे टकराई
मै भी उसके सामने से अनजाने टकराया था और उसका बोल्ड फिगर देख कर आंखे बड़ी हो गई ... लगा कि बस यही तो है जिसकी तालाश में था मैं
बस उसी पल उसे अपना मान लिया और दिल ने इतना ज्यादा उसे अपना लिया कि मुंह से भी उसके लिए बड़े अच्छे शब्द निकले
" ईजी ईजी डार्लिंग .. गिर जाओगी "
वो तेजी से अपने खुले बालों को झटकी और उसे मेरी बातों से लगा कि मैने जानबूझ पर उससे बदतमीजी की है और वो गुस्से में मुझे थप्पड़ लगा दिया : बहनचोद अंधा है क्या ?
: क्या ? ( मै शॉक्ड होकर हंसा कि दीदी ऐसा बोलेगी ) सच में दीदी ने ऐसा कहा
: अब हा यार , दिल्ली में जो चार साल रहा हो उसके मुंह से बहिनचोद गाली न निकले हाहा ... लेकिन सच कहूं तो मजा आ गया था ।
: फिर दूसरी मुलाकात कब हुई
: उसी रोज , उसके रूम की चाबी वही गिर गई थी और मैने उसका पीछा किया
वो बड़ी तेजी में निकली , उसके साथ चांदनी भी थी लेकिन वो पहले ही निकल गई थी । उसने मुझे एक बार पीछे आते देखा तो वो घबरा गई कि मै उसका पीछा कर रहा हूं
वो टैक्सी से निकली और मै अपनी गाड़ी
अपार्टमेंट तक मैने उसका पीछा किया , गाड़ी की हॉर्न दी लेकिन उसकी टैक्सी नहीं रुकी ।
कॉलोनी में गया तो एकदम से लिफ्ट में दोनों गायब .. किधर गई कुछ पता नहीं
आखिर में मैंने वहां पर वॉचमैन को वो चाबी दिखाई और वो मुझे ऊपर ले गया उनके फ्लैट के सामने दोनों मुझे मिली वही ... बड़ी हड़बड़ाहट में
बबली अपना बैग खंगाल रही थी
चांदनी ने कोहनी से मेरी ओर इशारा किया
वो डर रही थी , उसे था कि मै मेरे थप्पड़ का हिसाब करने आया हूं
: पु पुलिस को कॉल कर चंदू , जल्दीइइ
चांदनी हड़बड़ाहट कर मोबाइल निकालती है उससे पहले मै उसको रोकते हुए
: ये तो नहीं खोज रही ?
मैने उसको उसके फ्लैट की चाभी दिखाई और वो सन्न
: मै कबसे गाड़ी से हॉर्न दिया , रुकी नहीं आप लोग , लीजिए
चांदनी ने आगे बढ़ कर चाभी ली और मै मुस्कुरा कर वापस जाने लगा
फिर उसी समय बबली ने मुझे रोका
: हा फिर उसके उस आवाज पर मै उससे दूर कही गया ही नहीं , उसने थैंक्यू कहा तो मैने कहा बिना कॉफी के कैसी थैंक्यू । चांदनी के कहने पर वो मान गई । फिर न उसे समझ आया न मुझे ,कब हम इतने करीब हुए और इतना ज्यादा वाइल्ड उफ्फफ लेकिन सच कह रहा हूं रोहन जिस रोज पहली बार मैने उसके उन नरम चूतड़ों को छुआ था न अह्ह्ह्ह क्या बताऊं
: सर .. कुछ लेंगे
एकदम से वही औरत सामने आई
अभी भी वही आउटफिट , लंड पहले ही खड़ा था ।
अमर ने अंगड़ाई ली
: विस्की या स्कॉच
मै भी कहा इनकार कर सकता था , मैने भी स्कॉच के लिए हामी भर दी
फिर वो एक ट्रे में सजा कर लाई
Johnnie Walker Black lebel
एक क्लासिक प्रीमियम स्कॉच, बिना डायल्यूट किए लेने का रिस्क मै नहीं ले सकता था
उसने पैक बनाए ,
अमर ने नीट उठाया और मैने 2 स्माल आइस क्यूब के साथ
: और कुछ सर
: यस बेबी कम हियर सीट
अमर ने उस औरत को पकड़ कर अपनी गोद में बिठा लिया
ओह्ह्ह बहनचोद क्या गद्देदार मोटी गाड़ थी , अमर के पूरी जांघों पर फैल गई । मेरा लंड ये सोच कर अकड़ रहा था कि जरूर उसकी गाड़ में अमर का मोटा लंड चुभ रहा होगा
: थक गई हो न
: आपके लिए तो नहीं उम्मम .... डिनर रेडी है अह्ह्ह्ह
( अमर तो एकदम से भूल ही गया कि मै भी यहां हूं )
वो उस औरत को अपनी बाहों के लिए उसकी नंगे कमर को सहला रहा था और गालों को चूम रहा था
उसकी लंबी गदराई चिकनी जांघें देख कर लंड अकड़ रहा था
फिर एकदम से उसने अमर की जांघों में अपने चूतड़ों को आगे पीछे कर मथना शुरू किया , फिर अमर आंखे बंद कर एक लंबी गहरी आह भरने लगा
: उम्मम लग रहा है मैडम को याद कर रहे थे सर ओह्ह्ह्ह सीईईई
: यस शीला डार्लिंग उम्मन यू नो उसके अह्ह्ह्ह
: उम्मम जानती हूं सर , आपको उनके लचीली चर्बीदार चूतड़ों की बड़ी याद आती है । मै कुछ मदद करु
उसने अमर का हाथ पकड़ कर अपनी मुलायम छातियों पर रख दिया और खुद ही दबाने लगी ।
अमर ने एक नजर मुझे देखा
मै अपने हाथों में ग्लास लिए मीठी स्कॉच की सीप ले रहा था , हमारी नजरे मिली
मै मुस्कुराया और अमर भी
अगले ही पल वो औरत सरक नीचे फर्श पर घुटने के बल
अमर ने खुद का पेट पिचकाया ताकि शीला को उसके जींस की बटन खोलने के आसानी हो और फिर उसने अपने चूतड़ उठाए , शिला ने जींस खींच कर चूतड़ों से जांघों तक ले आई
अंडरवियर के उसका लंड पूरा फूला हुआ था जिसे देखते ही शीला उसको छूने लगी
: ओह्ह्ह्ह शीला डार्लिंग आराम से सीईईई ओह्ह्ह्ह
: आपका बहुत गर्म है सर , उम्ममम इसकी गंध मुझे पागल कर देती है
: ओह्ह्ह्ह शिला माय लव कम हियर उम्मम
अमर ने झुक कर शिला के रसीले होठों को चूसा
: तुम्हारी रसीली बाते मुझे बहुत पसंद है
: और मेरे होठों का क्या उम्मम ( शिला वापस सरक कर अमर के लंड को अंडरवीयर के ऊपर से चूमने लगी )
: ओह्ह्ह्ह बेबी सीई अह्ह्ह्ह
इधर मेरा लंड पूरी बगावत पर आ गया
शिला जिस तरह से बिना मेरी ओर एक नजर देखे अमर के साथ बिजी थी , मै हैरान था । उसे जरा भी हिचक नहीं थी मेरे होने की , वो बस लगी थी अपने काम में
उसने अमर की अंडरवियर की लास्टिक उंगलियों के फंसा कर नीचे खींची और उसका लंड उछल कर खड़ा हो गया , छत की ओर मुंह किए तन्मनया गुस्सा और लाल
शिला ने उसके मोटे लंड को पकड़ कर सूंघना शुरू किया
और यहां मेरी हालत खराब होने लगी
उसकी गुलाबी जीभ ने अमर के सुपाड़े की टिप को छुआ और अच्छे से सुपाड़े पर गोल नचा कर उसने अमर का सुपाड़ा मुंह में ले लिया
फिर तो मेरा लंड फुदकने लगा और पेंट में बड़ी दिक्कत थी
अमर आंखे बंद कर शीला के बालों को छू रहा था और शिला गले तक उसके लंड को उतार रही थी
आड़ को टटोलने से लेकर मुंह में चुभलाने तक , पूरी तरह से अमर का लंड उसके लाल कर दिया था जो चमक रहा था
फिर उसने अमर के सुपाड़े की गांठ को जीभ से फ्लिक करने लगी और तेजी से हाथों से उसका लंड हिलाने लगी एकदम से अमर के सुपाड़े का फब्बारा फूटा
उसने भी फुर्ती दिखाई और सूरक लिया सब कुछ
फिर उसने सब कुछ साफ कर उठी और चली गई बाथरूम की ओर
अमर खड़ा हुआ और अपना लंड अंदर रख कर
: थोड़ा टहलने चले
मै भी उसके साथ चल दिया
वो मुझे जीने से होकर टैरिस की ओर ले गया
: पूछो !!
: क्या ? ( मै थोड़ा मुस्कुरा कर बोला )
: वही जो तुम सोच रहे हो ( अमर ने जैसे मेरे मन में झांका हो )
: अह वो ( मै थोड़ा असहज हो रहा था ) मतलब मुझे ये जानना है कि आपको ये शिला मिली कैसे और मिली तो राजी कैसे हो गई ? उसे देखा मैने उसने मुझे देखा तक नहीं , फर्क नहीं पड़ा उसे मुझसे कि मै वही बगल में हूं और वो ...
: ओह्ह्ह फिर नहीं रोहन, तुम बहुत कच्चे हो यार । औरतें ऐसी ही होती है
: मतलब ( मै थोड़ा उलझा )
: पब या बार में कभी लड़की को खरीदा है एक रात के लिए
मै बस मुस्कुराया और अमर को उसका जवाब मिल गया
: तुम यार बहुत पीछे हो आगे बढ़ो , मुंबई में एक कसीनो है , उस कसीनो में लड़किया खड़ी रहती है और कस्टमर छल्ला फेक कर अपनी मनपसंद लड़की चुनते है अगर किसी लड़की को तुमने छल्ला पहनाया तो उसके लिए तुम पे करो और एक रात के लिए वो तुम्हारी । फिर वो किसी और की तरफ नहीं देखती बस उसी को ध्यान देती है जिसने उसके लिए पैसे दिए है ।
अब मुझे थोड़ा समझ आने लगा
: लेकिन ये मिली कहा आपको
: मै जब अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद यहां लखनऊ के अपनी कंपनी खोलने की जिद पापा से की तो मम्मी को बहुत फिकर थी मेरे खाने पीने का ख्याल कौन रखेगा और यहां अकेले रहना मेरे लिए सही नहीं था क्योंकि पापा का बिजनेस मुंबई में सेट था । मै अपने बदौलत कुछ करना चाहता था इसीलिए यहां मुझे शुरुआत करना सही लगा क्योंकि मेरी बेसिक पढ़ाई भी लखनऊ में हुई थी और गांव भी इसी जिले था । फिर मम्मी ने पापा से बात कर गांव से हमारे घर की देख रेख करने वाले दो लोगों को बुलाया । उसमें एक था कालीचरण और दूसरी थी शिला । कालीचरण शीला का देवर था और इनका यही अफेयर शुरू हो गया । शुरू में मैने इग्नोर किया और फिर एक रोज मैने शीला को टिकटिक पर रिल बनाते देखा । कालीचरण अक्सर चौकीदारी और सब्जियां लाने , गाड़ी चलाने का काम देखता और शीला मेरे कपड़े बिस्तर और खाने का ध्यान रखती ।
मै बड़े गौर से सुन रहा था और हम टैरिस पर आ गए थे
: रहते हुए धीरे धीरे मेरी नजर शीला की गदराई जवानी पर गई , कभी कपड़े धुलते हुए उसके गिले ब्लाउज तो कभी सफाई करती हुई उनकी गदराई जांघें । फिर एक रोज मैने उसे बिना ब्लाउज के वीडियो बनाते देखा , पहले लगा कि वो वीडियो काल पर है लेकिन फिर समझ आया कि फेम की चाह में वो भी इस ट्रैप में झांसे में फंस गई है । पारदर्शी साड़ी में झांकती छातियां ... उसी रोज मैने उसकी इंस्टा प्रोफाइल खोज निकाली और देखा तो अभी तीन साढ़े तीन हजार फॉलोवर थे , लेकिन विडियोज एक से बढ़ कर एक । कोई नहा कर तौलिए में तो कोई ब्रा और साड़ी में । समझ आ गया कि इस कलाकार के हुनर को निखराना पड़ेगा ।
अमर के शब्दों से मै मुस्कुराया
: फिर मैने उसे दिखाना शुरू किया मै उसे पीछे हूं और वो भी बचने लगी , मैने कालीचरण से कहलवाया थोड़े बहुत ड्रामे के बाद वो तैयार हुई और फिर मैने उससे साझा कि अपनी फैंटेसी , पहले तो वो मना कर दी लेकिन जब मैने उसके बच्चे की पढ़ाई और तन्खाह 2 गुना करने की बात की तो मान गई । उसके साथ में अगर मै उसके साथ फिजिकल होता हूं तो उसके अलग चार्ज मिलते है उसे ... चाहिए क्या था उसको वो मान गई । फिर थोड़ी ट्रेनिंग और भाषा पर काम किया । थोड़ी एडल्ट फिल्म दिखाई और उसकी कला निखर कर आज तुम्हारे सामने है ।
: हीही
: सच में उधर देखो
अमर ने दरवाजे की ओर दिखाया तो सामने सच में शीला खड़ी थी अपनी उसी ड्रेस में , देखते ही लंड अकड़ गया
: उम्हू बिना पैसे के सोचना भी मत ( वो बोला )
मै हस पड़ा
: अगर तुम चाहो तो आज रात के लिए मै पैड कर सकता हूं तुम्हारे लिए
मै अमर का ऑफर समझ गया था और मुस्कुराने लगा
: अरे यार मजाक कर रहा हूं , वो मना नहीं करेगी
एक पल को मेरी जीभ से लार लपकी लेकिन मै खुद को रोक लिया
तभी अमर का फोन बजा
: हाय जानू कहा हो
: बोर हो रही हूं और क्या
: तो कल सुबह आजाऊ पिक करने तुमको
: का सच में ?
: हा ... इस बार मेरे साथ रोहन भी होगा
उसने मेरी ओर इशारे से पूछा कि चलूंगा न और मैने हा कर दी क्योंकि कल सारा दिन बोर होने से बेहतर है कि मै इन्हीं लोगों के साथ समय बिताऊं
: ओके ओके , तो रोहन अगर साथ है तो क्या शीला?
: ओह डियर, ही इज ए मैन, मेरी संगति में है सेफ
: आपके साथ है तो ही कह रही हूं ,चलो ओके इंजॉय करो आप लोग और शीला को कहना कि अपने बोनस के चक्कर में मेरे माल पर हाथ नहीं मारे समझे , सुबह मिलती हूं
: ओके डार्लिंग , सी यू बाय
: लव यू हीही बाय
फोन कट हुआ और फिर हम लोग थोड़ी बातें करते हुए नीचे आए , आगे हमारे शिला सीढ़ियों से नीच उतर रही थी ,
उसके मोटे चर्बीदार चूतड़ों की थिरकन देख कर लंड खूब फड़क रहा था ।
फिर हमने डिनर किया ... अंतिम बार के लिए अमर ने मुझसे पूछा शीला के लिए लेकिन मैने मना कर दिया । कारण था कि मै और बहकना नहीं चाहता था । मै मेरे तैयार कमरे में आ गया और अमर शीला के साथ अपने कमरे में चला गया।
उसने दरवाजा खुला छोड़ दिया था कि अगर मूड बदले तो अंदर आ सकता हूं
लेकिन मै अटल रहा
शीला की चीखे पूरे घर में गूंजती रही
मैने मेरी सोना से बात की फोन पर , कोई और दिन होता या वक्त होता तो जरूर अपनी जान से रोमांटिक होता लेकिन हालही में जो हुआ उसको सोच कर हिम्मत नहीं बनी कि सोना से कुछ रोमांटिक बात करूं या वीडियो कॉल पर कुछ दिखाने का कह सकूं और वो भी शायद मेरी दहलीज समझ रही थी ।
खैर मै वापस सो गया
अगली सुबह मै और अमर निकल गए , बबली दीदी को पिक अप करने के लिए
रास्ते में थोड़ी बातचीत रही और फिर 3 घंटे के लंबे सफर के बाद फाइनली हम लोग बबली दीदी के दिए लोकेशन पर पहुंच ही गए ।
वेन्यू के बाहर खड़े होकर गेस्ट और दूसरी औरतों लड़कियों को निहार रहे थे।
थोड़ी देर बाद वो दिखाई दी
: ओह्ह्ह्ह गॉड लुक ऐट हर सीई क्या बवाल लग रही है ... उफ्फ ये लड़की न रोहन ( अमर ने मुझे बबली दीदी दी को दिखाया , जो सामने से हमारी ओर आ रही थी , एक आरामदायद टॉप और लूज सॉफ्ट पैंट में जो उनके जांघों पर चिपकी हुई थी ।
: अकेली आ रही है ? चांदनी कहा है ? ( एकदम से मुझे ख्याल आया )
: वो तो गई ट्यूजडे को ही ( अमर ने कैजुअली बोला )
: कहा ?
: कैनेडा
: कैनेडा ? , एक मिनट लेकिन वो कैनेडा क्यों जाएगी ?
: यार उसका फ़ियांसे तो वही प्रैक्टिस करता है अपनी डॉक्ट्रेट की
: लेकिन उसने तो कुछ और ...
: ओह तेरी कही ... ( अमर आंखे बड़ी कर मुझे देखा और मुस्कराया उसे लगा कि मै चांदनी को पसंद तो नहीं कर रहा था )
: नहीं यार ... दो दिन से उसके मैसेज नहीं आए .. उसने बताया नहीं
अमर बोलने जा रहा था कि तभी
: हाय ब्वॉयज ( दीदी लहराती हुई हमारी ओर आई और फिर पहले वो अमर से गले मिली और फिर मुझसे )
सामने से उसके गुदाज मुलायम चूचे का स्पर्श मिला सीने पर , जी में आया कि कस ही लूं एकदम फ्रंट टाइट हग
: कैसी हो जान
: ओह्ह्ह पूछो मत यार ... बहुत बोरिंग उम्मम थक गई हूं बस चलो यहां से
फिर अमर ने उसकी ट्रॉली बैग गाड़ी में रखी पीछे और वो आगे बैठ गई मै पीछे चला गया । गाड़ी अमर चलाने लगा
: हम्म्म तो आज बड़े साहब को फुर्सत है उम्मम
दीदी ने मुझे ही ताना मारा था लेकिन मै बस मुस्कुराया । मेरे जहन में कुछ चीजें नाच रही थी
" चांदनी !! , उस लड़की ने मुझसे कहा कि बबली दीदी के लिए रिश्ता आया था कैनेडा से और लड़का डॉक्टर है और खुद उससे शादी करने के लिए चली गई , दिमाग उल्टा हुआ पड़ा था और फिर उसने अमर के बारे में भी कितना कुछ झूठ बोला
: क्या हुआ रोहन बाबू क्या मन उदास हो गया
: हा रोहन क्या हुआ ( दीदी बोली)
: अह कुछ भी नहीं ( फीकी मुस्कान से मै बोला )
: अरे यार हाहाहाहा ( अमर खिल कर हंसा ) बोला था मैने इसको कि बहुत शरारती लड़की है बच कर रहना हाहाहा काट गई लगता है हीही
मै फीकी मुस्कुराहट से शर्मिंदगी महसूस कर रहा था , दीदी मेरे उतरे हुए चेहरे की हकीकत समझ रही थी
: क्या तुम भी चुप रहो
: रोहन तुम ठीक हो न
: हा दीदी , बस वो एक एकदम से गायब हो गई और बोली भी नहीं मैसेज भी नहीं की , मुझे लगा कि आपके साथ होगी वो भी
फिर थोड़ी देर हमारी नॉर्मल बातें चल रही थी
फिर दीदी ने कहा कि उन्हें भूख लग रही है और किसी अच्छे रेस्तरां पर गाड़ी लगाने को कहा
हाइवे साइड पर गाड़ी लगी और हम लोग बैठ एक जगह , फिर अमर खाने का ऑर्डर देने और फ्रेश होने बाथरूम चला गया
मै मोबाइल पर सोना को हैलो हाय कर रहा था तभी दीदी ने वापस चांदनी की बात छेड़ दी
: मैने तुझे बोला था न उसके चक्कर में मत पड़ना
: अरे नहीं दीदी ( मै मुस्कुराया ) अब क्या बताऊं उसने मुझे आपके और जीजू के बारे में ऐसी बाते बताई और अब देख रहा हूं तो सब अलग
: क्या बोली थी वो ( दीदी सीरियस हुई )
: अह छोड़ो न दीदी
: बोल रोहन , बता मुझे
: अह उस रोज जब हम लोग मूवी के लिए गए थे साथ में उस दिन हम दोनो रूम पर आए थे
: फिर ?
: फिर उसने कहा कि अमर मतलब जीजू ने उससे आपको छीन लिया है, आप जीजू के उसके पीछे पागल हो और जीजू भी बहुत खराब किस्म के है ।
: किसके पीछे पागल हूं ?
दीदी की बात पर मुझे हसी आई
: बोल न !!
: वो उनके बड़े पेनिस के लिए
दीदी आंखे बंद कर झलझलाई
: फिर ? और क्या बोली वो कुत्ती
: उसने कहा कि आपके लिए इतना अच्छा कैनेडा सा डॉक्टर का रिश्ता आया है और आप उस चूती... मतलब जीजू के लिए सब छोड़ रही हो । वो बहुत घटिया है और उसके साथ सेक्स करना चाहते है और उनका सपना है कि वो आपके और चांदनी दोनों के साथ थ्रीसम करे
दीदी अपने बाल खींचले ऐसी हो गई थी
: ये बहनचोद कमिनी , शुरू से ही ये अमर के पीछे थी , छुप छुप कर देखती थी हम दोनो को वो सब करते । उसी ने कहा था कि कैनेडा जाने से पहले बस छोटी ग्रुप पार्टी रखना चाहती थी , अमर का भी मन था लेकिन मुझे सही नहीं लग रहा था और इसीलिए मैने तुझे भी बुलाया था कि तू होगा पार्टी में तो ऐसा कुछ नहीं होगा ।
दीदी ने सारी बात साफ कर दी लेकिन अब समझ नहीं आ रहा था कि उसे ऐसा करके मिला क्या
यही सवाल मैने दोहराया दीदी से और तभी पीछे से अमर आया
: मै बताता हूं ( अमर बोला )
उसके आते ही हम दोनो सतर्क हो गए
दीदी ने आंखों से इशारा कर अमर को मना किया लेकिन अमर नहीं माना
: अरे यार बताने दो , अब हम दोनो buddy है क्यों रोहन
मै बस मुस्कुराया
: याद है तुम्हे जब हम पहली बार मिले तो मैने तुमको क्या कहा था कि ये बहुत शरारती लड़की है इससे ...
: बच कर रहना ( मै बुदबुदाया)
: हां ( अमर बोला ) भाई मेरे उसे जो चाहिए था असल उसे तुझसे मिला नहीं
: क्या ? ( मै चौक कर बोला , क्योंकि मेरे दिमाग में कुछ गलत ही आ रहा था )
: ढेर सारी अटेंशन और जो तुम सोच रहे हो वो भी हीही ( अमर मस्ती में हंसता हुआ बोला और दीदी उसे घूर रही थी )
: कमान बेबी , अब मजे मत लो उसके
: हीहीही , यकीन नहीं करोगी बेबी ये बन्दा पता नहीं कैसे कंट्रोल कर जाता है । फर्क ही नहीं पड़ता... कल इसके सामने ही शीला टहल रही थी .. कोई और होता तो दबोच लेता लेकिन
: हा सब तुम्हारी तरह ठरकी नहीं होते समझे और अब बस करो ( दीदी बोली )
: सॉरी रोहन हाहाहाहाहा ( अमर हस कर बोला )
: इट्स ओके ( मै बस फीकी मुस्कुराहट से बोला )
फिर हमने खाना खाया और उस दौरान मुझे लगातार चांदनी द्वारा ठगे जाना अखरता रहा .. आखिर इस तिरिया चरित्र के कितने रूप और देखने बाकी होंगे ।
फिर मै और अमर उठ कर काउंटर की ओर गए
: देखो यार नाराज मत होना लेकिन सच में तुम इतने भोले बन का मत रहो , दुनिया बहुत कमीनी है थोड़ा तैयार करो खुद को
: हम्म्म
: वैसे ड्राइव कर लेते हो ?
: हा क्यों ?
: अह अगर थोड़ा ड्राइव कर लोगे तो ... समझ रहे हो न ( अमर मुस्कुरा कर अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरता हुआ बोला )
मै उसकी शरारती मुस्कुराहट समझ रहा था
: लेकिन दीदी मानेगी ? उम्मीद कम है !!
: डॉन्ट जज बुक बाय इट्स कवर बॉय हाहाहा , देखो साफ साफ कहूं तो मै बहुत फ़ैसिनेट किस्म का आदमी हूं और सेक्सुअल एडवेंचर मुझे बहुत पसंद है । लॉन्ग ड्राइव तो हम दोनो का फेवरेट है सीईईई तो अगर तुम्हे ऐतराज न हो तो ?
मै थोड़ी देर चुप रहा तो वो खुद ही बोल पड़ा
: ओह कमान रोहन उसे भी पता है कि तुम उस रात जाग रहे थे ,
मै मुस्कुराने लगा
: अह्ह्ह्ह फिर मुझे कोई दिक्कत नहीं ( मै मुस्कुरा कर बोला लेकिन अभी से मेरे मन में उत्तेजना ने जगह बना ली थी
: दैटश माय बॉय ( उसने मेरे कंधे थपथपाया फिर आगे बढ़ गया ) हे डार्लिंग पीछे आजाओ
: तो ड्राइविंग?
: रोहन है न ?
फिर बबली दीदी पीछे चली गई और फिर मै भी गाड़ी लेकर निकल गया एक 2 घंटे के लंबे सफर के लिए
जारी रहेगी
( पढ़ कर लाइक कमेंट जरूर करें)
Good updateUPDATE 027
उम्मीद से बड़ा था अमर का घर
जैसा चांदनी ने बताया था उसके बिल्कुल उलट
कम से कम 4000 स्क्वायर फिट में
शहर के पोस इलाके में , बड़ा गेट , चमकती टाइल्स , ओह बहनचो ऑडी ... आंखे सन्न
सामने बड़ा सा इंट्रेंस
मै अंदर गया और उसने बहुत वॉर्म वेलकम किया
फिर हम दोनो बड़े से हाल में बैठे थे
कभी चमकती टाइल्स तो कभी विदेशी गद्दे वाली सोफे के नक्काशीदार किनारे , सब कुछ वेल फर्निश...
किसी को आवाज देने की जरूरत नहीं उसने एक छोटी सी जिंगल बेल खनकाई और
तभी एक गजब की गदराई मोटे चूतड़ों वाली औरत आई हाथों में चाय की केतली लिए
आंखे देखा तो सन्न रह गया
वो औरत सेक्सी फ्रेंच हाउस मेड लिंजरी वाले आउटफिट में थी और आउटफिट भी ऐसा जिसमें उसने सिर्फ ब्लाउज और नीचे कमर पर शॉर्ट एप्रेन बांध रखा था जो बस आगे से उसके पेडू समेत चूत के हिस्सों को ढक रहा था लेकिन बगल से लंबी मोटी गदराई चिकनी जांघें साफ दिख रही थी पूरी वैक्स की हुई
वो लहराती हुई ट्रे लाकर मेरे सामने कांच के टेबल पर रखी और उसके ढीले ब्लाउज से झांकती उसकी मोटी मोटी चूचियां, मानो सरक कर बाहर ही झूल जाएंगी
फिर बिना वो मेरी ओर देखे बस पलट कर चली गई
जाते हुए उसके मोटे मोटे गद्देदार चूतड़ों की थिरकन ,बड़ी चतुराई से उसने पीछे के दरारों को छिपा रखा था उस एप्रेन के फीते से जो चलने पर भी उसके चूतड़ों को पूरी तरह से नंगा नहीं होने दे रहे थे
ओह्ह्ह्ह बहनचो अब ये क्या था
मेरा दिमाग एकदम सुन्न हो गया
बड़ी बड़ी आंखों से मै अमर को देखा जो सामने रखी ट्रे से कॉफी उठा कर मुस्कुराया
मेरी आँखें मुस्कुरा उठी
: ये सब क्या ?
: ओह रोहन तुम भी न , इतना जल्दी चौकों मत
मै शांत रहा था क्योंकि कही न कही उसके कहने का मतलब था कि चीजे अभी और भी उसे सरप्राइज़ करने वाली है
: दीदी को पता है इस बारे में ( मेरा इशारा उस हाउस मेड की ओर था )
: हा , उसे मेरे शौक के बारे में अच्छे से पता है ( वो बड़े साफ लहजे में बोला )
मै सोचने के लिए मजबूर हो गया कि आखिर कोई लड़की कैसे अपने bf को इनसब के लिए छूट दे सकती है ।
: देखो रोहन , माना कि अभी तुम्हारे हमारे रिश्ते बड़े अजीब लग रहे होंगे , लेकिन यकीन करो मेरा.. यही असल लाइफ तो हम सभी जीना चाहते है न .. पैसा हो , एक प्यार करने वाली सेक्सी gf या बीवी हो और ढेर सारा सेक्स हाहाहाहाहा
कही न कही उसकी बाते रिलेट करने वाली थी लेकिन फिर वही अहम आ जाता है कि नहीं मै ऐसा नहीं हू चाहिए मुझे भी लेकिन थोड़ा शरीफ हूं मै .. वगैरह वगैरह !!
मै बस मुस्कुराया और हल्के से सर हिलाया
: तो फिर बताओ कितनी बार ?
एकदम से अमर से सवाल दागा , शायद ये उसका अपना तरीका था
: मतलब ? ( मै थोड़ा उलझा कि बंदा जानना क्या चाहता है )
: उस रात पार्टी नाइट में .... कितनी बार
मै उसका इशारा समझ गया था कि मैने कितनी बार हिलाया , मै शर्म से मुस्कुराया । मै ऐसे सवालों का आदी भी नहीं था और शर्माना जायज था ।
: क्या यार बोलो भी
: एक ( मै बोल कर चुप हो गया एक शर्माहट भरी मुस्कुराहट से )
: बस एक ?
: हा उतना ही काफी था मेरे लिए हीही
: लेकिन तुमने कुछ पहल क्यों नहीं की , लाइक चांदनी को पकड़ लेते
: दीदी के सामने ? हीही ( मैने इस सवाल का जवाब तो उस रात से सोच रखा था )
: तो कैसा रहा एक्सपीरियंस ?
: बता नहीं सकता हाहाहा ( मै हसने लगा ) मतलब पूरी फिल्म देख ली मैने अच्छी खासी हीही
: हाहाहाहा ये सही कहा तुमने
मै मुस्कुराता रहा थोड़ी देर
: तो कैसी लगी तुम्हे ?
: कौन चांदनी ?
: ना यार बबली माय सेक्सी बूटी ( उसने शरारती मुस्कुराहट से मुझे देखा )
मेरा चेहरा सफेद पड़ने लगा , कैसा महसूस करेंगे आप जब आपकी बहन का bf आपको आपकी ही बहन के बारे में ये सवाल पूछे
: अरे यार चिल न , सोचो ही मत कि वो तुम्हारी दीदी है । अब बताओ
उसने मुझे थोड़ा सहज करने का प्रयास किया
: उम्मम गुड
: क्या यार तुम भी , तुमने उसकी हॉर्नीनेस को फिल नही किया .. उसकी गर्म सांसों को , वो जब सिसकारियां ले रही थी और मुझे आवाज दे रही थी
एक पल को आंखों के सामने वो नजारा चलने लगा जिसमें बबली दीदी अपने उत्तेजना के चरम पर थी और उनकी तेज कामुक चीखों से कमरा गूंज रहा था
मै आंखे खोल दी और मेरी धड़कने बेकाबू तरीके से आगे बढ़ रही थी , पेंट में हरकत होने लगी । मैने बेचैनी महसूस की और अमर बस मुझे देखे जा रहा था । मैने उसकी ओर देखा और वो अपने होठ सिकोड़ कर मुस्कुराया , उसने मेरी चोरी पकड़ ली थी ।
: उम्मम तो तुम्हे याद है उसकी सिसकिया
मै शांत रहा और बस मुस्कुराया , शायद यही कर भी सकता था मै
: तुम्हे पता है पहली बार जब हम मिले थे तो ... उसने मुझे थप्पड़ मारा था
: क्या ? ( मै हंसा ) दीदी ने
: हा यार , मै एयरपोर्ट पर अपने पेरेंट्स को मुंबई की फ्लाइट पकड़वाने गया था और वो उसी रोज दिल्ली से आई थी । उफ्फ क्या कमाल की चाल थी उसकी
शॉर्ट स्लीवलेस टॉप , फुल जैकेट और वो स्किन फिट योगा पैंट जैसे उसके पैंट , जिसमें उसके चूतड़ों की थिरकन ... सीईईई अब क्या बताऊं
एकदम से अमर अपनी आंखे बंद कर, भौहें सिकोड़ कर माथे पर सिकन ले आया और उसके पंजे की उंगलियां फैल कर पूरी हथेली को ऐसे शेप में ले गई मानो वो अपनी कल्पनाओं में बबली के चूतड़ों को पकड़ने के लिए छटपटा रहा हो
उसके होठ अजीब तरह से सिकुड़ रहे थे ... जैसे उसे कितनी तलब हो बबली दीदी के मुलायम चूतड़ों की ।
इतनी दीवानगी , मैने अंदर से खुद को झकझोरा
फिर वो जब हाइ हिल वाले सैंडल में चल रही थी तो उसके बड़े बड़े रसीले मटके जैसे चूतड़ आह कभी इधर कभी उधर ( वो अपने हाथों से अपनी कल्पनाओं में खोए हुए ब बली के चूतड़ों की चाल बता रहा था ) और वो उछाल ... हाय दिल ही बेकाबू हो गया ... पानी से भरा गुब्बारा जितना लचीला होता है न रोहन ...
हलक से थूक गटक कर वो मेरी ओर देखा , उसकी बातों से मेरा तो पैंट फटने जैसा हो गया था कि भाई ये बन्दा आखिर है क्या चीज । इतनी सहजता से वो बस दीदी के चूतड़ों को मेरी आंखों के सामने नचा रहा था और लंड बगावत पर
: पानी से भरे लबालब गुब्बारों में जो उछाल और छूने पर जो थिरकन आती है सेम वैसी है बबली के गाड़ की चर्बी अह्ह्ह्ह जी करता है काट खाऊं
मै उसकी हरकतों पर मुस्कुराया
: फिर हुआ क्या कि दीदी ने आपको थप्पड़ मारा
: अरे हा , वो दरअसल तेजी में थी और एकदम से मुझसे टकराई
मै भी उसके सामने से अनजाने टकराया था और उसका बोल्ड फिगर देख कर आंखे बड़ी हो गई ... लगा कि बस यही तो है जिसकी तालाश में था मैं
बस उसी पल उसे अपना मान लिया और दिल ने इतना ज्यादा उसे अपना लिया कि मुंह से भी उसके लिए बड़े अच्छे शब्द निकले
" ईजी ईजी डार्लिंग .. गिर जाओगी "
वो तेजी से अपने खुले बालों को झटकी और उसे मेरी बातों से लगा कि मैने जानबूझ पर उससे बदतमीजी की है और वो गुस्से में मुझे थप्पड़ लगा दिया : बहनचोद अंधा है क्या ?
: क्या ? ( मै शॉक्ड होकर हंसा कि दीदी ऐसा बोलेगी ) सच में दीदी ने ऐसा कहा
: अब हा यार , दिल्ली में जो चार साल रहा हो उसके मुंह से बहिनचोद गाली न निकले हाहा ... लेकिन सच कहूं तो मजा आ गया था ।
: फिर दूसरी मुलाकात कब हुई
: उसी रोज , उसके रूम की चाबी वही गिर गई थी और मैने उसका पीछा किया
वो बड़ी तेजी में निकली , उसके साथ चांदनी भी थी लेकिन वो पहले ही निकल गई थी । उसने मुझे एक बार पीछे आते देखा तो वो घबरा गई कि मै उसका पीछा कर रहा हूं
वो टैक्सी से निकली और मै अपनी गाड़ी
अपार्टमेंट तक मैने उसका पीछा किया , गाड़ी की हॉर्न दी लेकिन उसकी टैक्सी नहीं रुकी ।
कॉलोनी में गया तो एकदम से लिफ्ट में दोनों गायब .. किधर गई कुछ पता नहीं
आखिर में मैंने वहां पर वॉचमैन को वो चाबी दिखाई और वो मुझे ऊपर ले गया उनके फ्लैट के सामने दोनों मुझे मिली वही ... बड़ी हड़बड़ाहट में
बबली अपना बैग खंगाल रही थी
चांदनी ने कोहनी से मेरी ओर इशारा किया
वो डर रही थी , उसे था कि मै मेरे थप्पड़ का हिसाब करने आया हूं
: पु पुलिस को कॉल कर चंदू , जल्दीइइ
चांदनी हड़बड़ाहट कर मोबाइल निकालती है उससे पहले मै उसको रोकते हुए
: ये तो नहीं खोज रही ?
मैने उसको उसके फ्लैट की चाभी दिखाई और वो सन्न
: मै कबसे गाड़ी से हॉर्न दिया , रुकी नहीं आप लोग , लीजिए
चांदनी ने आगे बढ़ कर चाभी ली और मै मुस्कुरा कर वापस जाने लगा
फिर उसी समय बबली ने मुझे रोका
: हा फिर उसके उस आवाज पर मै उससे दूर कही गया ही नहीं , उसने थैंक्यू कहा तो मैने कहा बिना कॉफी के कैसी थैंक्यू । चांदनी के कहने पर वो मान गई । फिर न उसे समझ आया न मुझे ,कब हम इतने करीब हुए और इतना ज्यादा वाइल्ड उफ्फफ लेकिन सच कह रहा हूं रोहन जिस रोज पहली बार मैने उसके उन नरम चूतड़ों को छुआ था न अह्ह्ह्ह क्या बताऊं
: सर .. कुछ लेंगे
एकदम से वही औरत सामने आई
अभी भी वही आउटफिट , लंड पहले ही खड़ा था ।
अमर ने अंगड़ाई ली
: विस्की या स्कॉच
मै भी कहा इनकार कर सकता था , मैने भी स्कॉच के लिए हामी भर दी
फिर वो एक ट्रे में सजा कर लाई
Johnnie Walker Black lebel
एक क्लासिक प्रीमियम स्कॉच, बिना डायल्यूट किए लेने का रिस्क मै नहीं ले सकता था
उसने पैक बनाए ,
अमर ने नीट उठाया और मैने 2 स्माल आइस क्यूब के साथ
: और कुछ सर
: यस बेबी कम हियर सीट
अमर ने उस औरत को पकड़ कर अपनी गोद में बिठा लिया
ओह्ह्ह बहनचोद क्या गद्देदार मोटी गाड़ थी , अमर के पूरी जांघों पर फैल गई । मेरा लंड ये सोच कर अकड़ रहा था कि जरूर उसकी गाड़ में अमर का मोटा लंड चुभ रहा होगा
: थक गई हो न
: आपके लिए तो नहीं उम्मम .... डिनर रेडी है अह्ह्ह्ह
( अमर तो एकदम से भूल ही गया कि मै भी यहां हूं )
वो उस औरत को अपनी बाहों के लिए उसकी नंगे कमर को सहला रहा था और गालों को चूम रहा था
उसकी लंबी गदराई चिकनी जांघें देख कर लंड अकड़ रहा था
फिर एकदम से उसने अमर की जांघों में अपने चूतड़ों को आगे पीछे कर मथना शुरू किया , फिर अमर आंखे बंद कर एक लंबी गहरी आह भरने लगा
: उम्मम लग रहा है मैडम को याद कर रहे थे सर ओह्ह्ह्ह सीईईई
: यस शीला डार्लिंग उम्मन यू नो उसके अह्ह्ह्ह
: उम्मम जानती हूं सर , आपको उनके लचीली चर्बीदार चूतड़ों की बड़ी याद आती है । मै कुछ मदद करु
उसने अमर का हाथ पकड़ कर अपनी मुलायम छातियों पर रख दिया और खुद ही दबाने लगी ।
अमर ने एक नजर मुझे देखा
मै अपने हाथों में ग्लास लिए मीठी स्कॉच की सीप ले रहा था , हमारी नजरे मिली
मै मुस्कुराया और अमर भी
अगले ही पल वो औरत सरक नीचे फर्श पर घुटने के बल
अमर ने खुद का पेट पिचकाया ताकि शीला को उसके जींस की बटन खोलने के आसानी हो और फिर उसने अपने चूतड़ उठाए , शिला ने जींस खींच कर चूतड़ों से जांघों तक ले आई
अंडरवियर के उसका लंड पूरा फूला हुआ था जिसे देखते ही शीला उसको छूने लगी
: ओह्ह्ह्ह शीला डार्लिंग आराम से सीईईई ओह्ह्ह्ह
: आपका बहुत गर्म है सर , उम्ममम इसकी गंध मुझे पागल कर देती है
: ओह्ह्ह्ह शिला माय लव कम हियर उम्मम
अमर ने झुक कर शिला के रसीले होठों को चूसा
: तुम्हारी रसीली बाते मुझे बहुत पसंद है
: और मेरे होठों का क्या उम्मम ( शिला वापस सरक कर अमर के लंड को अंडरवीयर के ऊपर से चूमने लगी )
: ओह्ह्ह्ह बेबी सीई अह्ह्ह्ह
इधर मेरा लंड पूरी बगावत पर आ गया
शिला जिस तरह से बिना मेरी ओर एक नजर देखे अमर के साथ बिजी थी , मै हैरान था । उसे जरा भी हिचक नहीं थी मेरे होने की , वो बस लगी थी अपने काम में
उसने अमर की अंडरवियर की लास्टिक उंगलियों के फंसा कर नीचे खींची और उसका लंड उछल कर खड़ा हो गया , छत की ओर मुंह किए तन्मनया गुस्सा और लाल
शिला ने उसके मोटे लंड को पकड़ कर सूंघना शुरू किया
और यहां मेरी हालत खराब होने लगी
उसकी गुलाबी जीभ ने अमर के सुपाड़े की टिप को छुआ और अच्छे से सुपाड़े पर गोल नचा कर उसने अमर का सुपाड़ा मुंह में ले लिया
फिर तो मेरा लंड फुदकने लगा और पेंट में बड़ी दिक्कत थी
अमर आंखे बंद कर शीला के बालों को छू रहा था और शिला गले तक उसके लंड को उतार रही थी
आड़ को टटोलने से लेकर मुंह में चुभलाने तक , पूरी तरह से अमर का लंड उसके लाल कर दिया था जो चमक रहा था
फिर उसने अमर के सुपाड़े की गांठ को जीभ से फ्लिक करने लगी और तेजी से हाथों से उसका लंड हिलाने लगी एकदम से अमर के सुपाड़े का फब्बारा फूटा
उसने भी फुर्ती दिखाई और सूरक लिया सब कुछ
फिर उसने सब कुछ साफ कर उठी और चली गई बाथरूम की ओर
अमर खड़ा हुआ और अपना लंड अंदर रख कर
: थोड़ा टहलने चले
मै भी उसके साथ चल दिया
वो मुझे जीने से होकर टैरिस की ओर ले गया
: पूछो !!
: क्या ? ( मै थोड़ा मुस्कुरा कर बोला )
: वही जो तुम सोच रहे हो ( अमर ने जैसे मेरे मन में झांका हो )
: अह वो ( मै थोड़ा असहज हो रहा था ) मतलब मुझे ये जानना है कि आपको ये शिला मिली कैसे और मिली तो राजी कैसे हो गई ? उसे देखा मैने उसने मुझे देखा तक नहीं , फर्क नहीं पड़ा उसे मुझसे कि मै वही बगल में हूं और वो ...
: ओह्ह्ह फिर नहीं रोहन, तुम बहुत कच्चे हो यार । औरतें ऐसी ही होती है
: मतलब ( मै थोड़ा उलझा )
: पब या बार में कभी लड़की को खरीदा है एक रात के लिए
मै बस मुस्कुराया और अमर को उसका जवाब मिल गया
: तुम यार बहुत पीछे हो आगे बढ़ो , मुंबई में एक कसीनो है , उस कसीनो में लड़किया खड़ी रहती है और कस्टमर छल्ला फेक कर अपनी मनपसंद लड़की चुनते है अगर किसी लड़की को तुमने छल्ला पहनाया तो उसके लिए तुम पे करो और एक रात के लिए वो तुम्हारी । फिर वो किसी और की तरफ नहीं देखती बस उसी को ध्यान देती है जिसने उसके लिए पैसे दिए है ।
अब मुझे थोड़ा समझ आने लगा
: लेकिन ये मिली कहा आपको
: मै जब अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद यहां लखनऊ के अपनी कंपनी खोलने की जिद पापा से की तो मम्मी को बहुत फिकर थी मेरे खाने पीने का ख्याल कौन रखेगा और यहां अकेले रहना मेरे लिए सही नहीं था क्योंकि पापा का बिजनेस मुंबई में सेट था । मै अपने बदौलत कुछ करना चाहता था इसीलिए यहां मुझे शुरुआत करना सही लगा क्योंकि मेरी बेसिक पढ़ाई भी लखनऊ में हुई थी और गांव भी इसी जिले था । फिर मम्मी ने पापा से बात कर गांव से हमारे घर की देख रेख करने वाले दो लोगों को बुलाया । उसमें एक था कालीचरण और दूसरी थी शिला । कालीचरण शीला का देवर था और इनका यही अफेयर शुरू हो गया । शुरू में मैने इग्नोर किया और फिर एक रोज मैने शीला को टिकटिक पर रिल बनाते देखा । कालीचरण अक्सर चौकीदारी और सब्जियां लाने , गाड़ी चलाने का काम देखता और शीला मेरे कपड़े बिस्तर और खाने का ध्यान रखती ।
मै बड़े गौर से सुन रहा था और हम टैरिस पर आ गए थे
: रहते हुए धीरे धीरे मेरी नजर शीला की गदराई जवानी पर गई , कभी कपड़े धुलते हुए उसके गिले ब्लाउज तो कभी सफाई करती हुई उनकी गदराई जांघें । फिर एक रोज मैने उसे बिना ब्लाउज के वीडियो बनाते देखा , पहले लगा कि वो वीडियो काल पर है लेकिन फिर समझ आया कि फेम की चाह में वो भी इस ट्रैप में झांसे में फंस गई है । पारदर्शी साड़ी में झांकती छातियां ... उसी रोज मैने उसकी इंस्टा प्रोफाइल खोज निकाली और देखा तो अभी तीन साढ़े तीन हजार फॉलोवर थे , लेकिन विडियोज एक से बढ़ कर एक । कोई नहा कर तौलिए में तो कोई ब्रा और साड़ी में । समझ आ गया कि इस कलाकार के हुनर को निखराना पड़ेगा ।
अमर के शब्दों से मै मुस्कुराया
: फिर मैने उसे दिखाना शुरू किया मै उसे पीछे हूं और वो भी बचने लगी , मैने कालीचरण से कहलवाया थोड़े बहुत ड्रामे के बाद वो तैयार हुई और फिर मैने उससे साझा कि अपनी फैंटेसी , पहले तो वो मना कर दी लेकिन जब मैने उसके बच्चे की पढ़ाई और तन्खाह 2 गुना करने की बात की तो मान गई । उसके साथ में अगर मै उसके साथ फिजिकल होता हूं तो उसके अलग चार्ज मिलते है उसे ... चाहिए क्या था उसको वो मान गई । फिर थोड़ी ट्रेनिंग और भाषा पर काम किया । थोड़ी एडल्ट फिल्म दिखाई और उसकी कला निखर कर आज तुम्हारे सामने है ।
: हीही
: सच में उधर देखो
अमर ने दरवाजे की ओर दिखाया तो सामने सच में शीला खड़ी थी अपनी उसी ड्रेस में , देखते ही लंड अकड़ गया
: उम्हू बिना पैसे के सोचना भी मत ( वो बोला )
मै हस पड़ा
: अगर तुम चाहो तो आज रात के लिए मै पैड कर सकता हूं तुम्हारे लिए
मै अमर का ऑफर समझ गया था और मुस्कुराने लगा
: अरे यार मजाक कर रहा हूं , वो मना नहीं करेगी
एक पल को मेरी जीभ से लार लपकी लेकिन मै खुद को रोक लिया
तभी अमर का फोन बजा
: हाय जानू कहा हो
: बोर हो रही हूं और क्या
: तो कल सुबह आजाऊ पिक करने तुमको
: का सच में ?
: हा ... इस बार मेरे साथ रोहन भी होगा
उसने मेरी ओर इशारे से पूछा कि चलूंगा न और मैने हा कर दी क्योंकि कल सारा दिन बोर होने से बेहतर है कि मै इन्हीं लोगों के साथ समय बिताऊं
: ओके ओके , तो रोहन अगर साथ है तो क्या शीला?
: ओह डियर, ही इज ए मैन, मेरी संगति में है सेफ
: आपके साथ है तो ही कह रही हूं ,चलो ओके इंजॉय करो आप लोग और शीला को कहना कि अपने बोनस के चक्कर में मेरे माल पर हाथ नहीं मारे समझे , सुबह मिलती हूं
: ओके डार्लिंग , सी यू बाय
: लव यू हीही बाय
फोन कट हुआ और फिर हम लोग थोड़ी बातें करते हुए नीचे आए , आगे हमारे शिला सीढ़ियों से नीच उतर रही थी ,
उसके मोटे चर्बीदार चूतड़ों की थिरकन देख कर लंड खूब फड़क रहा था ।
फिर हमने डिनर किया ... अंतिम बार के लिए अमर ने मुझसे पूछा शीला के लिए लेकिन मैने मना कर दिया । कारण था कि मै और बहकना नहीं चाहता था । मै मेरे तैयार कमरे में आ गया और अमर शीला के साथ अपने कमरे में चला गया।
उसने दरवाजा खुला छोड़ दिया था कि अगर मूड बदले तो अंदर आ सकता हूं
लेकिन मै अटल रहा
शीला की चीखे पूरे घर में गूंजती रही
मैने मेरी सोना से बात की फोन पर , कोई और दिन होता या वक्त होता तो जरूर अपनी जान से रोमांटिक होता लेकिन हालही में जो हुआ उसको सोच कर हिम्मत नहीं बनी कि सोना से कुछ रोमांटिक बात करूं या वीडियो कॉल पर कुछ दिखाने का कह सकूं और वो भी शायद मेरी दहलीज समझ रही थी ।
खैर मै वापस सो गया
अगली सुबह मै और अमर निकल गए , बबली दीदी को पिक अप करने के लिए
रास्ते में थोड़ी बातचीत रही और फिर 3 घंटे के लंबे सफर के बाद फाइनली हम लोग बबली दीदी के दिए लोकेशन पर पहुंच ही गए ।
वेन्यू के बाहर खड़े होकर गेस्ट और दूसरी औरतों लड़कियों को निहार रहे थे।
थोड़ी देर बाद वो दिखाई दी
: ओह्ह्ह्ह गॉड लुक ऐट हर सीई क्या बवाल लग रही है ... उफ्फ ये लड़की न रोहन ( अमर ने मुझे बबली दीदी दी को दिखाया , जो सामने से हमारी ओर आ रही थी , एक आरामदायद टॉप और लूज सॉफ्ट पैंट में जो उनके जांघों पर चिपकी हुई थी ।
: अकेली आ रही है ? चांदनी कहा है ? ( एकदम से मुझे ख्याल आया )
: वो तो गई ट्यूजडे को ही ( अमर ने कैजुअली बोला )
: कहा ?
: कैनेडा
: कैनेडा ? , एक मिनट लेकिन वो कैनेडा क्यों जाएगी ?
: यार उसका फ़ियांसे तो वही प्रैक्टिस करता है अपनी डॉक्ट्रेट की
: लेकिन उसने तो कुछ और ...
: ओह तेरी कही ... ( अमर आंखे बड़ी कर मुझे देखा और मुस्कराया उसे लगा कि मै चांदनी को पसंद तो नहीं कर रहा था )
: नहीं यार ... दो दिन से उसके मैसेज नहीं आए .. उसने बताया नहीं
अमर बोलने जा रहा था कि तभी
: हाय ब्वॉयज ( दीदी लहराती हुई हमारी ओर आई और फिर पहले वो अमर से गले मिली और फिर मुझसे )
सामने से उसके गुदाज मुलायम चूचे का स्पर्श मिला सीने पर , जी में आया कि कस ही लूं एकदम फ्रंट टाइट हग
: कैसी हो जान
: ओह्ह्ह पूछो मत यार ... बहुत बोरिंग उम्मम थक गई हूं बस चलो यहां से
फिर अमर ने उसकी ट्रॉली बैग गाड़ी में रखी पीछे और वो आगे बैठ गई मै पीछे चला गया । गाड़ी अमर चलाने लगा
: हम्म्म तो आज बड़े साहब को फुर्सत है उम्मम
दीदी ने मुझे ही ताना मारा था लेकिन मै बस मुस्कुराया । मेरे जहन में कुछ चीजें नाच रही थी
" चांदनी !! , उस लड़की ने मुझसे कहा कि बबली दीदी के लिए रिश्ता आया था कैनेडा से और लड़का डॉक्टर है और खुद उससे शादी करने के लिए चली गई , दिमाग उल्टा हुआ पड़ा था और फिर उसने अमर के बारे में भी कितना कुछ झूठ बोला
: क्या हुआ रोहन बाबू क्या मन उदास हो गया
: हा रोहन क्या हुआ ( दीदी बोली)
: अह कुछ भी नहीं ( फीकी मुस्कान से मै बोला )
: अरे यार हाहाहाहा ( अमर खिल कर हंसा ) बोला था मैने इसको कि बहुत शरारती लड़की है बच कर रहना हाहाहा काट गई लगता है हीही
मै फीकी मुस्कुराहट से शर्मिंदगी महसूस कर रहा था , दीदी मेरे उतरे हुए चेहरे की हकीकत समझ रही थी
: क्या तुम भी चुप रहो
: रोहन तुम ठीक हो न
: हा दीदी , बस वो एक एकदम से गायब हो गई और बोली भी नहीं मैसेज भी नहीं की , मुझे लगा कि आपके साथ होगी वो भी
फिर थोड़ी देर हमारी नॉर्मल बातें चल रही थी
फिर दीदी ने कहा कि उन्हें भूख लग रही है और किसी अच्छे रेस्तरां पर गाड़ी लगाने को कहा
हाइवे साइड पर गाड़ी लगी और हम लोग बैठ एक जगह , फिर अमर खाने का ऑर्डर देने और फ्रेश होने बाथरूम चला गया
मै मोबाइल पर सोना को हैलो हाय कर रहा था तभी दीदी ने वापस चांदनी की बात छेड़ दी
: मैने तुझे बोला था न उसके चक्कर में मत पड़ना
: अरे नहीं दीदी ( मै मुस्कुराया ) अब क्या बताऊं उसने मुझे आपके और जीजू के बारे में ऐसी बाते बताई और अब देख रहा हूं तो सब अलग
: क्या बोली थी वो ( दीदी सीरियस हुई )
: अह छोड़ो न दीदी
: बोल रोहन , बता मुझे
: अह उस रोज जब हम लोग मूवी के लिए गए थे साथ में उस दिन हम दोनो रूम पर आए थे
: फिर ?
: फिर उसने कहा कि अमर मतलब जीजू ने उससे आपको छीन लिया है, आप जीजू के उसके पीछे पागल हो और जीजू भी बहुत खराब किस्म के है ।
: किसके पीछे पागल हूं ?
दीदी की बात पर मुझे हसी आई
: बोल न !!
: वो उनके बड़े पेनिस के लिए
दीदी आंखे बंद कर झलझलाई
: फिर ? और क्या बोली वो कुत्ती
: उसने कहा कि आपके लिए इतना अच्छा कैनेडा सा डॉक्टर का रिश्ता आया है और आप उस चूती... मतलब जीजू के लिए सब छोड़ रही हो । वो बहुत घटिया है और उसके साथ सेक्स करना चाहते है और उनका सपना है कि वो आपके और चांदनी दोनों के साथ थ्रीसम करे
दीदी अपने बाल खींचले ऐसी हो गई थी
: ये बहनचोद कमिनी , शुरू से ही ये अमर के पीछे थी , छुप छुप कर देखती थी हम दोनो को वो सब करते । उसी ने कहा था कि कैनेडा जाने से पहले बस छोटी ग्रुप पार्टी रखना चाहती थी , अमर का भी मन था लेकिन मुझे सही नहीं लग रहा था और इसीलिए मैने तुझे भी बुलाया था कि तू होगा पार्टी में तो ऐसा कुछ नहीं होगा ।
दीदी ने सारी बात साफ कर दी लेकिन अब समझ नहीं आ रहा था कि उसे ऐसा करके मिला क्या
यही सवाल मैने दोहराया दीदी से और तभी पीछे से अमर आया
: मै बताता हूं ( अमर बोला )
उसके आते ही हम दोनो सतर्क हो गए
दीदी ने आंखों से इशारा कर अमर को मना किया लेकिन अमर नहीं माना
: अरे यार बताने दो , अब हम दोनो buddy है क्यों रोहन
मै बस मुस्कुराया
: याद है तुम्हे जब हम पहली बार मिले तो मैने तुमको क्या कहा था कि ये बहुत शरारती लड़की है इससे ...
: बच कर रहना ( मै बुदबुदाया)
: हां ( अमर बोला ) भाई मेरे उसे जो चाहिए था असल उसे तुझसे मिला नहीं
: क्या ? ( मै चौक कर बोला , क्योंकि मेरे दिमाग में कुछ गलत ही आ रहा था )
: ढेर सारी अटेंशन और जो तुम सोच रहे हो वो भी हीही ( अमर मस्ती में हंसता हुआ बोला और दीदी उसे घूर रही थी )
: कमान बेबी , अब मजे मत लो उसके
: हीहीही , यकीन नहीं करोगी बेबी ये बन्दा पता नहीं कैसे कंट्रोल कर जाता है । फर्क ही नहीं पड़ता... कल इसके सामने ही शीला टहल रही थी .. कोई और होता तो दबोच लेता लेकिन
: हा सब तुम्हारी तरह ठरकी नहीं होते समझे और अब बस करो ( दीदी बोली )
: सॉरी रोहन हाहाहाहाहा ( अमर हस कर बोला )
: इट्स ओके ( मै बस फीकी मुस्कुराहट से बोला )
फिर हमने खाना खाया और उस दौरान मुझे लगातार चांदनी द्वारा ठगे जाना अखरता रहा .. आखिर इस तिरिया चरित्र के कितने रूप और देखने बाकी होंगे ।
फिर मै और अमर उठ कर काउंटर की ओर गए
: देखो यार नाराज मत होना लेकिन सच में तुम इतने भोले बन का मत रहो , दुनिया बहुत कमीनी है थोड़ा तैयार करो खुद को
: हम्म्म
: वैसे ड्राइव कर लेते हो ?
: हा क्यों ?
: अह अगर थोड़ा ड्राइव कर लोगे तो ... समझ रहे हो न ( अमर मुस्कुरा कर अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरता हुआ बोला )
मै उसकी शरारती मुस्कुराहट समझ रहा था
: लेकिन दीदी मानेगी ? उम्मीद कम है !!
: डॉन्ट जज बुक बाय इट्स कवर बॉय हाहाहा , देखो साफ साफ कहूं तो मै बहुत फ़ैसिनेट किस्म का आदमी हूं और सेक्सुअल एडवेंचर मुझे बहुत पसंद है । लॉन्ग ड्राइव तो हम दोनो का फेवरेट है सीईईई तो अगर तुम्हे ऐतराज न हो तो ?
मै थोड़ी देर चुप रहा तो वो खुद ही बोल पड़ा
: ओह कमान रोहन उसे भी पता है कि तुम उस रात जाग रहे थे ,
मै मुस्कुराने लगा
: अह्ह्ह्ह फिर मुझे कोई दिक्कत नहीं ( मै मुस्कुरा कर बोला लेकिन अभी से मेरे मन में उत्तेजना ने जगह बना ली थी
: दैटश माय बॉय ( उसने मेरे कंधे थपथपाया फिर आगे बढ़ गया ) हे डार्लिंग पीछे आजाओ
: तो ड्राइविंग?
: रोहन है न ?
फिर बबली दीदी पीछे चली गई और फिर मै भी गाड़ी लेकर निकल गया एक 2 घंटे के लंबे सफर के लिए
जारी रहेगी
( पढ़ कर लाइक कमेंट जरूर करें)
बहुत बहुत धन्यवाद
इस chutiya का chutiyapa फिर काट गयी चांदनी.....UPDATE 027
उम्मीद से बड़ा था अमर का घर
जैसा चांदनी ने बताया था उसके बिल्कुल उलट
कम से कम 4000 स्क्वायर फिट में
शहर के पोस इलाके में , बड़ा गेट , चमकती टाइल्स , ओह बहनचो ऑडी ... आंखे सन्न
सामने बड़ा सा इंट्रेंस
मै अंदर गया और उसने बहुत वॉर्म वेलकम किया
फिर हम दोनो बड़े से हाल में बैठे थे
कभी चमकती टाइल्स तो कभी विदेशी गद्दे वाली सोफे के नक्काशीदार किनारे , सब कुछ वेल फर्निश...
किसी को आवाज देने की जरूरत नहीं उसने एक छोटी सी जिंगल बेल खनकाई और
तभी एक गजब की गदराई मोटे चूतड़ों वाली औरत आई हाथों में चाय की केतली लिए
आंखे देखा तो सन्न रह गया
वो औरत सेक्सी फ्रेंच हाउस मेड लिंजरी वाले आउटफिट में थी और आउटफिट भी ऐसा जिसमें उसने सिर्फ ब्लाउज और नीचे कमर पर शॉर्ट एप्रेन बांध रखा था जो बस आगे से उसके पेडू समेत चूत के हिस्सों को ढक रहा था लेकिन बगल से लंबी मोटी गदराई चिकनी जांघें साफ दिख रही थी पूरी वैक्स की हुई
वो लहराती हुई ट्रे लाकर मेरे सामने कांच के टेबल पर रखी और उसके ढीले ब्लाउज से झांकती उसकी मोटी मोटी चूचियां, मानो सरक कर बाहर ही झूल जाएंगी
फिर बिना वो मेरी ओर देखे बस पलट कर चली गई
जाते हुए उसके मोटे मोटे गद्देदार चूतड़ों की थिरकन ,बड़ी चतुराई से उसने पीछे के दरारों को छिपा रखा था उस एप्रेन के फीते से जो चलने पर भी उसके चूतड़ों को पूरी तरह से नंगा नहीं होने दे रहे थे
ओह्ह्ह्ह बहनचो अब ये क्या था
मेरा दिमाग एकदम सुन्न हो गया
बड़ी बड़ी आंखों से मै अमर को देखा जो सामने रखी ट्रे से कॉफी उठा कर मुस्कुराया
मेरी आँखें मुस्कुरा उठी
: ये सब क्या ?
: ओह रोहन तुम भी न , इतना जल्दी चौकों मत
मै शांत रहा था क्योंकि कही न कही उसके कहने का मतलब था कि चीजे अभी और भी उसे सरप्राइज़ करने वाली है
: दीदी को पता है इस बारे में ( मेरा इशारा उस हाउस मेड की ओर था )
: हा , उसे मेरे शौक के बारे में अच्छे से पता है ( वो बड़े साफ लहजे में बोला )
मै सोचने के लिए मजबूर हो गया कि आखिर कोई लड़की कैसे अपने bf को इनसब के लिए छूट दे सकती है ।
: देखो रोहन , माना कि अभी तुम्हारे हमारे रिश्ते बड़े अजीब लग रहे होंगे , लेकिन यकीन करो मेरा.. यही असल लाइफ तो हम सभी जीना चाहते है न .. पैसा हो , एक प्यार करने वाली सेक्सी gf या बीवी हो और ढेर सारा सेक्स हाहाहाहाहा
कही न कही उसकी बाते रिलेट करने वाली थी लेकिन फिर वही अहम आ जाता है कि नहीं मै ऐसा नहीं हू चाहिए मुझे भी लेकिन थोड़ा शरीफ हूं मै .. वगैरह वगैरह !!
मै बस मुस्कुराया और हल्के से सर हिलाया
: तो फिर बताओ कितनी बार ?
एकदम से अमर से सवाल दागा , शायद ये उसका अपना तरीका था
: मतलब ? ( मै थोड़ा उलझा कि बंदा जानना क्या चाहता है )
: उस रात पार्टी नाइट में .... कितनी बार
मै उसका इशारा समझ गया था कि मैने कितनी बार हिलाया , मै शर्म से मुस्कुराया । मै ऐसे सवालों का आदी भी नहीं था और शर्माना जायज था ।
: क्या यार बोलो भी
: एक ( मै बोल कर चुप हो गया एक शर्माहट भरी मुस्कुराहट से )
: बस एक ?
: हा उतना ही काफी था मेरे लिए हीही
: लेकिन तुमने कुछ पहल क्यों नहीं की , लाइक चांदनी को पकड़ लेते
: दीदी के सामने ? हीही ( मैने इस सवाल का जवाब तो उस रात से सोच रखा था )
: तो कैसा रहा एक्सपीरियंस ?
: बता नहीं सकता हाहाहा ( मै हसने लगा ) मतलब पूरी फिल्म देख ली मैने अच्छी खासी हीही
: हाहाहाहा ये सही कहा तुमने
मै मुस्कुराता रहा थोड़ी देर
: तो कैसी लगी तुम्हे ?
: कौन चांदनी ?
: ना यार बबली माय सेक्सी बूटी ( उसने शरारती मुस्कुराहट से मुझे देखा )
मेरा चेहरा सफेद पड़ने लगा , कैसा महसूस करेंगे आप जब आपकी बहन का bf आपको आपकी ही बहन के बारे में ये सवाल पूछे
: अरे यार चिल न , सोचो ही मत कि वो तुम्हारी दीदी है । अब बताओ
उसने मुझे थोड़ा सहज करने का प्रयास किया
: उम्मम गुड
: क्या यार तुम भी , तुमने उसकी हॉर्नीनेस को फिल नही किया .. उसकी गर्म सांसों को , वो जब सिसकारियां ले रही थी और मुझे आवाज दे रही थी
एक पल को आंखों के सामने वो नजारा चलने लगा जिसमें बबली दीदी अपने उत्तेजना के चरम पर थी और उनकी तेज कामुक चीखों से कमरा गूंज रहा था
मै आंखे खोल दी और मेरी धड़कने बेकाबू तरीके से आगे बढ़ रही थी , पेंट में हरकत होने लगी । मैने बेचैनी महसूस की और अमर बस मुझे देखे जा रहा था । मैने उसकी ओर देखा और वो अपने होठ सिकोड़ कर मुस्कुराया , उसने मेरी चोरी पकड़ ली थी ।
: उम्मम तो तुम्हे याद है उसकी सिसकिया
मै शांत रहा और बस मुस्कुराया , शायद यही कर भी सकता था मै
: तुम्हे पता है पहली बार जब हम मिले थे तो ... उसने मुझे थप्पड़ मारा था
: क्या ? ( मै हंसा ) दीदी ने
: हा यार , मै एयरपोर्ट पर अपने पेरेंट्स को मुंबई की फ्लाइट पकड़वाने गया था और वो उसी रोज दिल्ली से आई थी । उफ्फ क्या कमाल की चाल थी उसकी
शॉर्ट स्लीवलेस टॉप , फुल जैकेट और वो स्किन फिट योगा पैंट जैसे उसके पैंट , जिसमें उसके चूतड़ों की थिरकन ... सीईईई अब क्या बताऊं
एकदम से अमर अपनी आंखे बंद कर, भौहें सिकोड़ कर माथे पर सिकन ले आया और उसके पंजे की उंगलियां फैल कर पूरी हथेली को ऐसे शेप में ले गई मानो वो अपनी कल्पनाओं में बबली के चूतड़ों को पकड़ने के लिए छटपटा रहा हो
उसके होठ अजीब तरह से सिकुड़ रहे थे ... जैसे उसे कितनी तलब हो बबली दीदी के मुलायम चूतड़ों की ।
इतनी दीवानगी , मैने अंदर से खुद को झकझोरा
फिर वो जब हाइ हिल वाले सैंडल में चल रही थी तो उसके बड़े बड़े रसीले मटके जैसे चूतड़ आह कभी इधर कभी उधर ( वो अपने हाथों से अपनी कल्पनाओं में खोए हुए ब बली के चूतड़ों की चाल बता रहा था ) और वो उछाल ... हाय दिल ही बेकाबू हो गया ... पानी से भरा गुब्बारा जितना लचीला होता है न रोहन ...
हलक से थूक गटक कर वो मेरी ओर देखा , उसकी बातों से मेरा तो पैंट फटने जैसा हो गया था कि भाई ये बन्दा आखिर है क्या चीज । इतनी सहजता से वो बस दीदी के चूतड़ों को मेरी आंखों के सामने नचा रहा था और लंड बगावत पर
: पानी से भरे लबालब गुब्बारों में जो उछाल और छूने पर जो थिरकन आती है सेम वैसी है बबली के गाड़ की चर्बी अह्ह्ह्ह जी करता है काट खाऊं
मै उसकी हरकतों पर मुस्कुराया
: फिर हुआ क्या कि दीदी ने आपको थप्पड़ मारा
: अरे हा , वो दरअसल तेजी में थी और एकदम से मुझसे टकराई
मै भी उसके सामने से अनजाने टकराया था और उसका बोल्ड फिगर देख कर आंखे बड़ी हो गई ... लगा कि बस यही तो है जिसकी तालाश में था मैं
बस उसी पल उसे अपना मान लिया और दिल ने इतना ज्यादा उसे अपना लिया कि मुंह से भी उसके लिए बड़े अच्छे शब्द निकले
" ईजी ईजी डार्लिंग .. गिर जाओगी "
वो तेजी से अपने खुले बालों को झटकी और उसे मेरी बातों से लगा कि मैने जानबूझ पर उससे बदतमीजी की है और वो गुस्से में मुझे थप्पड़ लगा दिया : बहनचोद अंधा है क्या ?
: क्या ? ( मै शॉक्ड होकर हंसा कि दीदी ऐसा बोलेगी ) सच में दीदी ने ऐसा कहा
: अब हा यार , दिल्ली में जो चार साल रहा हो उसके मुंह से बहिनचोद गाली न निकले हाहा ... लेकिन सच कहूं तो मजा आ गया था ।
: फिर दूसरी मुलाकात कब हुई
: उसी रोज , उसके रूम की चाबी वही गिर गई थी और मैने उसका पीछा किया
वो बड़ी तेजी में निकली , उसके साथ चांदनी भी थी लेकिन वो पहले ही निकल गई थी । उसने मुझे एक बार पीछे आते देखा तो वो घबरा गई कि मै उसका पीछा कर रहा हूं
वो टैक्सी से निकली और मै अपनी गाड़ी
अपार्टमेंट तक मैने उसका पीछा किया , गाड़ी की हॉर्न दी लेकिन उसकी टैक्सी नहीं रुकी ।
कॉलोनी में गया तो एकदम से लिफ्ट में दोनों गायब .. किधर गई कुछ पता नहीं
आखिर में मैंने वहां पर वॉचमैन को वो चाबी दिखाई और वो मुझे ऊपर ले गया उनके फ्लैट के सामने दोनों मुझे मिली वही ... बड़ी हड़बड़ाहट में
बबली अपना बैग खंगाल रही थी
चांदनी ने कोहनी से मेरी ओर इशारा किया
वो डर रही थी , उसे था कि मै मेरे थप्पड़ का हिसाब करने आया हूं
: पु पुलिस को कॉल कर चंदू , जल्दीइइ
चांदनी हड़बड़ाहट कर मोबाइल निकालती है उससे पहले मै उसको रोकते हुए
: ये तो नहीं खोज रही ?
मैने उसको उसके फ्लैट की चाभी दिखाई और वो सन्न
: मै कबसे गाड़ी से हॉर्न दिया , रुकी नहीं आप लोग , लीजिए
चांदनी ने आगे बढ़ कर चाभी ली और मै मुस्कुरा कर वापस जाने लगा
फिर उसी समय बबली ने मुझे रोका
: हा फिर उसके उस आवाज पर मै उससे दूर कही गया ही नहीं , उसने थैंक्यू कहा तो मैने कहा बिना कॉफी के कैसी थैंक्यू । चांदनी के कहने पर वो मान गई । फिर न उसे समझ आया न मुझे ,कब हम इतने करीब हुए और इतना ज्यादा वाइल्ड उफ्फफ लेकिन सच कह रहा हूं रोहन जिस रोज पहली बार मैने उसके उन नरम चूतड़ों को छुआ था न अह्ह्ह्ह क्या बताऊं
: सर .. कुछ लेंगे
एकदम से वही औरत सामने आई
अभी भी वही आउटफिट , लंड पहले ही खड़ा था ।
अमर ने अंगड़ाई ली
: विस्की या स्कॉच
मै भी कहा इनकार कर सकता था , मैने भी स्कॉच के लिए हामी भर दी
फिर वो एक ट्रे में सजा कर लाई
Johnnie Walker Black lebel
एक क्लासिक प्रीमियम स्कॉच, बिना डायल्यूट किए लेने का रिस्क मै नहीं ले सकता था
उसने पैक बनाए ,
अमर ने नीट उठाया और मैने 2 स्माल आइस क्यूब के साथ
: और कुछ सर
: यस बेबी कम हियर सीट
अमर ने उस औरत को पकड़ कर अपनी गोद में बिठा लिया
ओह्ह्ह बहनचोद क्या गद्देदार मोटी गाड़ थी , अमर के पूरी जांघों पर फैल गई । मेरा लंड ये सोच कर अकड़ रहा था कि जरूर उसकी गाड़ में अमर का मोटा लंड चुभ रहा होगा
: थक गई हो न
: आपके लिए तो नहीं उम्मम .... डिनर रेडी है अह्ह्ह्ह
( अमर तो एकदम से भूल ही गया कि मै भी यहां हूं )
वो उस औरत को अपनी बाहों के लिए उसकी नंगे कमर को सहला रहा था और गालों को चूम रहा था
उसकी लंबी गदराई चिकनी जांघें देख कर लंड अकड़ रहा था
फिर एकदम से उसने अमर की जांघों में अपने चूतड़ों को आगे पीछे कर मथना शुरू किया , फिर अमर आंखे बंद कर एक लंबी गहरी आह भरने लगा
: उम्मम लग रहा है मैडम को याद कर रहे थे सर ओह्ह्ह्ह सीईईई
: यस शीला डार्लिंग उम्मन यू नो उसके अह्ह्ह्ह
: उम्मम जानती हूं सर , आपको उनके लचीली चर्बीदार चूतड़ों की बड़ी याद आती है । मै कुछ मदद करु
उसने अमर का हाथ पकड़ कर अपनी मुलायम छातियों पर रख दिया और खुद ही दबाने लगी ।
अमर ने एक नजर मुझे देखा
मै अपने हाथों में ग्लास लिए मीठी स्कॉच की सीप ले रहा था , हमारी नजरे मिली
मै मुस्कुराया और अमर भी
अगले ही पल वो औरत सरक नीचे फर्श पर घुटने के बल
अमर ने खुद का पेट पिचकाया ताकि शीला को उसके जींस की बटन खोलने के आसानी हो और फिर उसने अपने चूतड़ उठाए , शिला ने जींस खींच कर चूतड़ों से जांघों तक ले आई
अंडरवियर के उसका लंड पूरा फूला हुआ था जिसे देखते ही शीला उसको छूने लगी
: ओह्ह्ह्ह शीला डार्लिंग आराम से सीईईई ओह्ह्ह्ह
: आपका बहुत गर्म है सर , उम्ममम इसकी गंध मुझे पागल कर देती है
: ओह्ह्ह्ह शिला माय लव कम हियर उम्मम
अमर ने झुक कर शिला के रसीले होठों को चूसा
: तुम्हारी रसीली बाते मुझे बहुत पसंद है
: और मेरे होठों का क्या उम्मम ( शिला वापस सरक कर अमर के लंड को अंडरवीयर के ऊपर से चूमने लगी )
: ओह्ह्ह्ह बेबी सीई अह्ह्ह्ह
इधर मेरा लंड पूरी बगावत पर आ गया
शिला जिस तरह से बिना मेरी ओर एक नजर देखे अमर के साथ बिजी थी , मै हैरान था । उसे जरा भी हिचक नहीं थी मेरे होने की , वो बस लगी थी अपने काम में
उसने अमर की अंडरवियर की लास्टिक उंगलियों के फंसा कर नीचे खींची और उसका लंड उछल कर खड़ा हो गया , छत की ओर मुंह किए तन्मनया गुस्सा और लाल
शिला ने उसके मोटे लंड को पकड़ कर सूंघना शुरू किया
और यहां मेरी हालत खराब होने लगी
उसकी गुलाबी जीभ ने अमर के सुपाड़े की टिप को छुआ और अच्छे से सुपाड़े पर गोल नचा कर उसने अमर का सुपाड़ा मुंह में ले लिया
फिर तो मेरा लंड फुदकने लगा और पेंट में बड़ी दिक्कत थी
अमर आंखे बंद कर शीला के बालों को छू रहा था और शिला गले तक उसके लंड को उतार रही थी
आड़ को टटोलने से लेकर मुंह में चुभलाने तक , पूरी तरह से अमर का लंड उसके लाल कर दिया था जो चमक रहा था
फिर उसने अमर के सुपाड़े की गांठ को जीभ से फ्लिक करने लगी और तेजी से हाथों से उसका लंड हिलाने लगी एकदम से अमर के सुपाड़े का फब्बारा फूटा
उसने भी फुर्ती दिखाई और सूरक लिया सब कुछ
फिर उसने सब कुछ साफ कर उठी और चली गई बाथरूम की ओर
अमर खड़ा हुआ और अपना लंड अंदर रख कर
: थोड़ा टहलने चले
मै भी उसके साथ चल दिया
वो मुझे जीने से होकर टैरिस की ओर ले गया
: पूछो !!
: क्या ? ( मै थोड़ा मुस्कुरा कर बोला )
: वही जो तुम सोच रहे हो ( अमर ने जैसे मेरे मन में झांका हो )
: अह वो ( मै थोड़ा असहज हो रहा था ) मतलब मुझे ये जानना है कि आपको ये शिला मिली कैसे और मिली तो राजी कैसे हो गई ? उसे देखा मैने उसने मुझे देखा तक नहीं , फर्क नहीं पड़ा उसे मुझसे कि मै वही बगल में हूं और वो ...
: ओह्ह्ह फिर नहीं रोहन, तुम बहुत कच्चे हो यार । औरतें ऐसी ही होती है
: मतलब ( मै थोड़ा उलझा )
: पब या बार में कभी लड़की को खरीदा है एक रात के लिए
मै बस मुस्कुराया और अमर को उसका जवाब मिल गया
: तुम यार बहुत पीछे हो आगे बढ़ो , मुंबई में एक कसीनो है , उस कसीनो में लड़किया खड़ी रहती है और कस्टमर छल्ला फेक कर अपनी मनपसंद लड़की चुनते है अगर किसी लड़की को तुमने छल्ला पहनाया तो उसके लिए तुम पे करो और एक रात के लिए वो तुम्हारी । फिर वो किसी और की तरफ नहीं देखती बस उसी को ध्यान देती है जिसने उसके लिए पैसे दिए है ।
अब मुझे थोड़ा समझ आने लगा
: लेकिन ये मिली कहा आपको
: मै जब अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद यहां लखनऊ के अपनी कंपनी खोलने की जिद पापा से की तो मम्मी को बहुत फिकर थी मेरे खाने पीने का ख्याल कौन रखेगा और यहां अकेले रहना मेरे लिए सही नहीं था क्योंकि पापा का बिजनेस मुंबई में सेट था । मै अपने बदौलत कुछ करना चाहता था इसीलिए यहां मुझे शुरुआत करना सही लगा क्योंकि मेरी बेसिक पढ़ाई भी लखनऊ में हुई थी और गांव भी इसी जिले था । फिर मम्मी ने पापा से बात कर गांव से हमारे घर की देख रेख करने वाले दो लोगों को बुलाया । उसमें एक था कालीचरण और दूसरी थी शिला । कालीचरण शीला का देवर था और इनका यही अफेयर शुरू हो गया । शुरू में मैने इग्नोर किया और फिर एक रोज मैने शीला को टिकटिक पर रिल बनाते देखा । कालीचरण अक्सर चौकीदारी और सब्जियां लाने , गाड़ी चलाने का काम देखता और शीला मेरे कपड़े बिस्तर और खाने का ध्यान रखती ।
मै बड़े गौर से सुन रहा था और हम टैरिस पर आ गए थे
: रहते हुए धीरे धीरे मेरी नजर शीला की गदराई जवानी पर गई , कभी कपड़े धुलते हुए उसके गिले ब्लाउज तो कभी सफाई करती हुई उनकी गदराई जांघें । फिर एक रोज मैने उसे बिना ब्लाउज के वीडियो बनाते देखा , पहले लगा कि वो वीडियो काल पर है लेकिन फिर समझ आया कि फेम की चाह में वो भी इस ट्रैप में झांसे में फंस गई है । पारदर्शी साड़ी में झांकती छातियां ... उसी रोज मैने उसकी इंस्टा प्रोफाइल खोज निकाली और देखा तो अभी तीन साढ़े तीन हजार फॉलोवर थे , लेकिन विडियोज एक से बढ़ कर एक । कोई नहा कर तौलिए में तो कोई ब्रा और साड़ी में । समझ आ गया कि इस कलाकार के हुनर को निखराना पड़ेगा ।
अमर के शब्दों से मै मुस्कुराया
: फिर मैने उसे दिखाना शुरू किया मै उसे पीछे हूं और वो भी बचने लगी , मैने कालीचरण से कहलवाया थोड़े बहुत ड्रामे के बाद वो तैयार हुई और फिर मैने उससे साझा कि अपनी फैंटेसी , पहले तो वो मना कर दी लेकिन जब मैने उसके बच्चे की पढ़ाई और तन्खाह 2 गुना करने की बात की तो मान गई । उसके साथ में अगर मै उसके साथ फिजिकल होता हूं तो उसके अलग चार्ज मिलते है उसे ... चाहिए क्या था उसको वो मान गई । फिर थोड़ी ट्रेनिंग और भाषा पर काम किया । थोड़ी एडल्ट फिल्म दिखाई और उसकी कला निखर कर आज तुम्हारे सामने है ।
: हीही
: सच में उधर देखो
अमर ने दरवाजे की ओर दिखाया तो सामने सच में शीला खड़ी थी अपनी उसी ड्रेस में , देखते ही लंड अकड़ गया
: उम्हू बिना पैसे के सोचना भी मत ( वो बोला )
मै हस पड़ा
: अगर तुम चाहो तो आज रात के लिए मै पैड कर सकता हूं तुम्हारे लिए
मै अमर का ऑफर समझ गया था और मुस्कुराने लगा
: अरे यार मजाक कर रहा हूं , वो मना नहीं करेगी
एक पल को मेरी जीभ से लार लपकी लेकिन मै खुद को रोक लिया
तभी अमर का फोन बजा
: हाय जानू कहा हो
: बोर हो रही हूं और क्या
: तो कल सुबह आजाऊ पिक करने तुमको
: का सच में ?
: हा ... इस बार मेरे साथ रोहन भी होगा
उसने मेरी ओर इशारे से पूछा कि चलूंगा न और मैने हा कर दी क्योंकि कल सारा दिन बोर होने से बेहतर है कि मै इन्हीं लोगों के साथ समय बिताऊं
: ओके ओके , तो रोहन अगर साथ है तो क्या शीला?
: ओह डियर, ही इज ए मैन, मेरी संगति में है सेफ
: आपके साथ है तो ही कह रही हूं ,चलो ओके इंजॉय करो आप लोग और शीला को कहना कि अपने बोनस के चक्कर में मेरे माल पर हाथ नहीं मारे समझे , सुबह मिलती हूं
: ओके डार्लिंग , सी यू बाय
: लव यू हीही बाय
फोन कट हुआ और फिर हम लोग थोड़ी बातें करते हुए नीचे आए , आगे हमारे शिला सीढ़ियों से नीच उतर रही थी ,
उसके मोटे चर्बीदार चूतड़ों की थिरकन देख कर लंड खूब फड़क रहा था ।
फिर हमने डिनर किया ... अंतिम बार के लिए अमर ने मुझसे पूछा शीला के लिए लेकिन मैने मना कर दिया । कारण था कि मै और बहकना नहीं चाहता था । मै मेरे तैयार कमरे में आ गया और अमर शीला के साथ अपने कमरे में चला गया।
उसने दरवाजा खुला छोड़ दिया था कि अगर मूड बदले तो अंदर आ सकता हूं
लेकिन मै अटल रहा
शीला की चीखे पूरे घर में गूंजती रही
मैने मेरी सोना से बात की फोन पर , कोई और दिन होता या वक्त होता तो जरूर अपनी जान से रोमांटिक होता लेकिन हालही में जो हुआ उसको सोच कर हिम्मत नहीं बनी कि सोना से कुछ रोमांटिक बात करूं या वीडियो कॉल पर कुछ दिखाने का कह सकूं और वो भी शायद मेरी दहलीज समझ रही थी ।
खैर मै वापस सो गया
अगली सुबह मै और अमर निकल गए , बबली दीदी को पिक अप करने के लिए
रास्ते में थोड़ी बातचीत रही और फिर 3 घंटे के लंबे सफर के बाद फाइनली हम लोग बबली दीदी के दिए लोकेशन पर पहुंच ही गए ।
वेन्यू के बाहर खड़े होकर गेस्ट और दूसरी औरतों लड़कियों को निहार रहे थे।
थोड़ी देर बाद वो दिखाई दी
: ओह्ह्ह्ह गॉड लुक ऐट हर सीई क्या बवाल लग रही है ... उफ्फ ये लड़की न रोहन ( अमर ने मुझे बबली दीदी दी को दिखाया , जो सामने से हमारी ओर आ रही थी , एक आरामदायद टॉप और लूज सॉफ्ट पैंट में जो उनके जांघों पर चिपकी हुई थी ।
: अकेली आ रही है ? चांदनी कहा है ? ( एकदम से मुझे ख्याल आया )
: वो तो गई ट्यूजडे को ही ( अमर ने कैजुअली बोला )
: कहा ?
: कैनेडा
: कैनेडा ? , एक मिनट लेकिन वो कैनेडा क्यों जाएगी ?
: यार उसका फ़ियांसे तो वही प्रैक्टिस करता है अपनी डॉक्ट्रेट की
: लेकिन उसने तो कुछ और ...
: ओह तेरी कही ... ( अमर आंखे बड़ी कर मुझे देखा और मुस्कराया उसे लगा कि मै चांदनी को पसंद तो नहीं कर रहा था )
: नहीं यार ... दो दिन से उसके मैसेज नहीं आए .. उसने बताया नहीं
अमर बोलने जा रहा था कि तभी
: हाय ब्वॉयज ( दीदी लहराती हुई हमारी ओर आई और फिर पहले वो अमर से गले मिली और फिर मुझसे )
सामने से उसके गुदाज मुलायम चूचे का स्पर्श मिला सीने पर , जी में आया कि कस ही लूं एकदम फ्रंट टाइट हग
: कैसी हो जान
: ओह्ह्ह पूछो मत यार ... बहुत बोरिंग उम्मम थक गई हूं बस चलो यहां से
फिर अमर ने उसकी ट्रॉली बैग गाड़ी में रखी पीछे और वो आगे बैठ गई मै पीछे चला गया । गाड़ी अमर चलाने लगा
: हम्म्म तो आज बड़े साहब को फुर्सत है उम्मम
दीदी ने मुझे ही ताना मारा था लेकिन मै बस मुस्कुराया । मेरे जहन में कुछ चीजें नाच रही थी
" चांदनी !! , उस लड़की ने मुझसे कहा कि बबली दीदी के लिए रिश्ता आया था कैनेडा से और लड़का डॉक्टर है और खुद उससे शादी करने के लिए चली गई , दिमाग उल्टा हुआ पड़ा था और फिर उसने अमर के बारे में भी कितना कुछ झूठ बोला
: क्या हुआ रोहन बाबू क्या मन उदास हो गया
: हा रोहन क्या हुआ ( दीदी बोली)
: अह कुछ भी नहीं ( फीकी मुस्कान से मै बोला )
: अरे यार हाहाहाहा ( अमर खिल कर हंसा ) बोला था मैने इसको कि बहुत शरारती लड़की है बच कर रहना हाहाहा काट गई लगता है हीही
मै फीकी मुस्कुराहट से शर्मिंदगी महसूस कर रहा था , दीदी मेरे उतरे हुए चेहरे की हकीकत समझ रही थी
: क्या तुम भी चुप रहो
: रोहन तुम ठीक हो न
: हा दीदी , बस वो एक एकदम से गायब हो गई और बोली भी नहीं मैसेज भी नहीं की , मुझे लगा कि आपके साथ होगी वो भी
फिर थोड़ी देर हमारी नॉर्मल बातें चल रही थी
फिर दीदी ने कहा कि उन्हें भूख लग रही है और किसी अच्छे रेस्तरां पर गाड़ी लगाने को कहा
हाइवे साइड पर गाड़ी लगी और हम लोग बैठ एक जगह , फिर अमर खाने का ऑर्डर देने और फ्रेश होने बाथरूम चला गया
मै मोबाइल पर सोना को हैलो हाय कर रहा था तभी दीदी ने वापस चांदनी की बात छेड़ दी
: मैने तुझे बोला था न उसके चक्कर में मत पड़ना
: अरे नहीं दीदी ( मै मुस्कुराया ) अब क्या बताऊं उसने मुझे आपके और जीजू के बारे में ऐसी बाते बताई और अब देख रहा हूं तो सब अलग
: क्या बोली थी वो ( दीदी सीरियस हुई )
: अह छोड़ो न दीदी
: बोल रोहन , बता मुझे
: अह उस रोज जब हम लोग मूवी के लिए गए थे साथ में उस दिन हम दोनो रूम पर आए थे
: फिर ?
: फिर उसने कहा कि अमर मतलब जीजू ने उससे आपको छीन लिया है, आप जीजू के उसके पीछे पागल हो और जीजू भी बहुत खराब किस्म के है ।
: किसके पीछे पागल हूं ?
दीदी की बात पर मुझे हसी आई
: बोल न !!
: वो उनके बड़े पेनिस के लिए
दीदी आंखे बंद कर झलझलाई
: फिर ? और क्या बोली वो कुत्ती
: उसने कहा कि आपके लिए इतना अच्छा कैनेडा सा डॉक्टर का रिश्ता आया है और आप उस चूती... मतलब जीजू के लिए सब छोड़ रही हो । वो बहुत घटिया है और उसके साथ सेक्स करना चाहते है और उनका सपना है कि वो आपके और चांदनी दोनों के साथ थ्रीसम करे
दीदी अपने बाल खींचले ऐसी हो गई थी
: ये बहनचोद कमिनी , शुरू से ही ये अमर के पीछे थी , छुप छुप कर देखती थी हम दोनो को वो सब करते । उसी ने कहा था कि कैनेडा जाने से पहले बस छोटी ग्रुप पार्टी रखना चाहती थी , अमर का भी मन था लेकिन मुझे सही नहीं लग रहा था और इसीलिए मैने तुझे भी बुलाया था कि तू होगा पार्टी में तो ऐसा कुछ नहीं होगा ।
दीदी ने सारी बात साफ कर दी लेकिन अब समझ नहीं आ रहा था कि उसे ऐसा करके मिला क्या
यही सवाल मैने दोहराया दीदी से और तभी पीछे से अमर आया
: मै बताता हूं ( अमर बोला )
उसके आते ही हम दोनो सतर्क हो गए
दीदी ने आंखों से इशारा कर अमर को मना किया लेकिन अमर नहीं माना
: अरे यार बताने दो , अब हम दोनो buddy है क्यों रोहन
मै बस मुस्कुराया
: याद है तुम्हे जब हम पहली बार मिले तो मैने तुमको क्या कहा था कि ये बहुत शरारती लड़की है इससे ...
: बच कर रहना ( मै बुदबुदाया)
: हां ( अमर बोला ) भाई मेरे उसे जो चाहिए था असल उसे तुझसे मिला नहीं
: क्या ? ( मै चौक कर बोला , क्योंकि मेरे दिमाग में कुछ गलत ही आ रहा था )
: ढेर सारी अटेंशन और जो तुम सोच रहे हो वो भी हीही ( अमर मस्ती में हंसता हुआ बोला और दीदी उसे घूर रही थी )
: कमान बेबी , अब मजे मत लो उसके
: हीहीही , यकीन नहीं करोगी बेबी ये बन्दा पता नहीं कैसे कंट्रोल कर जाता है । फर्क ही नहीं पड़ता... कल इसके सामने ही शीला टहल रही थी .. कोई और होता तो दबोच लेता लेकिन
: हा सब तुम्हारी तरह ठरकी नहीं होते समझे और अब बस करो ( दीदी बोली )
: सॉरी रोहन हाहाहाहाहा ( अमर हस कर बोला )
: इट्स ओके ( मै बस फीकी मुस्कुराहट से बोला )
फिर हमने खाना खाया और उस दौरान मुझे लगातार चांदनी द्वारा ठगे जाना अखरता रहा .. आखिर इस तिरिया चरित्र के कितने रूप और देखने बाकी होंगे ।
फिर मै और अमर उठ कर काउंटर की ओर गए
: देखो यार नाराज मत होना लेकिन सच में तुम इतने भोले बन का मत रहो , दुनिया बहुत कमीनी है थोड़ा तैयार करो खुद को
: हम्म्म
: वैसे ड्राइव कर लेते हो ?
: हा क्यों ?
: अह अगर थोड़ा ड्राइव कर लोगे तो ... समझ रहे हो न ( अमर मुस्कुरा कर अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरता हुआ बोला )
मै उसकी शरारती मुस्कुराहट समझ रहा था
: लेकिन दीदी मानेगी ? उम्मीद कम है !!
: डॉन्ट जज बुक बाय इट्स कवर बॉय हाहाहा , देखो साफ साफ कहूं तो मै बहुत फ़ैसिनेट किस्म का आदमी हूं और सेक्सुअल एडवेंचर मुझे बहुत पसंद है । लॉन्ग ड्राइव तो हम दोनो का फेवरेट है सीईईई तो अगर तुम्हे ऐतराज न हो तो ?
मै थोड़ी देर चुप रहा तो वो खुद ही बोल पड़ा
: ओह कमान रोहन उसे भी पता है कि तुम उस रात जाग रहे थे ,
मै मुस्कुराने लगा
: अह्ह्ह्ह फिर मुझे कोई दिक्कत नहीं ( मै मुस्कुरा कर बोला लेकिन अभी से मेरे मन में उत्तेजना ने जगह बना ली थी
: दैटश माय बॉय ( उसने मेरे कंधे थपथपाया फिर आगे बढ़ गया ) हे डार्लिंग पीछे आजाओ
: तो ड्राइविंग?
: रोहन है न ?
फिर बबली दीदी पीछे चली गई और फिर मै भी गाड़ी लेकर निकल गया एक 2 घंटे के लंबे सफर के लिए
जारी रहेगी
( पढ़ कर लाइक कमेंट जरूर करें)
Chandni to chandu bana gayi Rohan ko, bhola ban kar bechara rah gaya isse acha kuch kar leta to badhiya tha par koi nahi thokar kha kar hi seekhta hai insaan, kul milakar umda update aage ke liye sahi plot ban Raha hai. Keep it up.UPDATE 027
उम्मीद से बड़ा था अमर का घर
जैसा चांदनी ने बताया था उसके बिल्कुल उलट
कम से कम 4000 स्क्वायर फिट में
शहर के पोस इलाके में , बड़ा गेट , चमकती टाइल्स , ओह बहनचो ऑडी ... आंखे सन्न
सामने बड़ा सा इंट्रेंस
मै अंदर गया और उसने बहुत वॉर्म वेलकम किया
फिर हम दोनो बड़े से हाल में बैठे थे
कभी चमकती टाइल्स तो कभी विदेशी गद्दे वाली सोफे के नक्काशीदार किनारे , सब कुछ वेल फर्निश...
किसी को आवाज देने की जरूरत नहीं उसने एक छोटी सी जिंगल बेल खनकाई और
तभी एक गजब की गदराई मोटे चूतड़ों वाली औरत आई हाथों में चाय की केतली लिए
आंखे देखा तो सन्न रह गया
वो औरत सेक्सी फ्रेंच हाउस मेड लिंजरी वाले आउटफिट में थी और आउटफिट भी ऐसा जिसमें उसने सिर्फ ब्लाउज और नीचे कमर पर शॉर्ट एप्रेन बांध रखा था जो बस आगे से उसके पेडू समेत चूत के हिस्सों को ढक रहा था लेकिन बगल से लंबी मोटी गदराई चिकनी जांघें साफ दिख रही थी पूरी वैक्स की हुई
वो लहराती हुई ट्रे लाकर मेरे सामने कांच के टेबल पर रखी और उसके ढीले ब्लाउज से झांकती उसकी मोटी मोटी चूचियां, मानो सरक कर बाहर ही झूल जाएंगी
फिर बिना वो मेरी ओर देखे बस पलट कर चली गई
जाते हुए उसके मोटे मोटे गद्देदार चूतड़ों की थिरकन ,बड़ी चतुराई से उसने पीछे के दरारों को छिपा रखा था उस एप्रेन के फीते से जो चलने पर भी उसके चूतड़ों को पूरी तरह से नंगा नहीं होने दे रहे थे
ओह्ह्ह्ह बहनचो अब ये क्या था
मेरा दिमाग एकदम सुन्न हो गया
बड़ी बड़ी आंखों से मै अमर को देखा जो सामने रखी ट्रे से कॉफी उठा कर मुस्कुराया
मेरी आँखें मुस्कुरा उठी
: ये सब क्या ?
: ओह रोहन तुम भी न , इतना जल्दी चौकों मत
मै शांत रहा था क्योंकि कही न कही उसके कहने का मतलब था कि चीजे अभी और भी उसे सरप्राइज़ करने वाली है
: दीदी को पता है इस बारे में ( मेरा इशारा उस हाउस मेड की ओर था )
: हा , उसे मेरे शौक के बारे में अच्छे से पता है ( वो बड़े साफ लहजे में बोला )
मै सोचने के लिए मजबूर हो गया कि आखिर कोई लड़की कैसे अपने bf को इनसब के लिए छूट दे सकती है ।
: देखो रोहन , माना कि अभी तुम्हारे हमारे रिश्ते बड़े अजीब लग रहे होंगे , लेकिन यकीन करो मेरा.. यही असल लाइफ तो हम सभी जीना चाहते है न .. पैसा हो , एक प्यार करने वाली सेक्सी gf या बीवी हो और ढेर सारा सेक्स हाहाहाहाहा
कही न कही उसकी बाते रिलेट करने वाली थी लेकिन फिर वही अहम आ जाता है कि नहीं मै ऐसा नहीं हू चाहिए मुझे भी लेकिन थोड़ा शरीफ हूं मै .. वगैरह वगैरह !!
मै बस मुस्कुराया और हल्के से सर हिलाया
: तो फिर बताओ कितनी बार ?
एकदम से अमर से सवाल दागा , शायद ये उसका अपना तरीका था
: मतलब ? ( मै थोड़ा उलझा कि बंदा जानना क्या चाहता है )
: उस रात पार्टी नाइट में .... कितनी बार
मै उसका इशारा समझ गया था कि मैने कितनी बार हिलाया , मै शर्म से मुस्कुराया । मै ऐसे सवालों का आदी भी नहीं था और शर्माना जायज था ।
: क्या यार बोलो भी
: एक ( मै बोल कर चुप हो गया एक शर्माहट भरी मुस्कुराहट से )
: बस एक ?
: हा उतना ही काफी था मेरे लिए हीही
: लेकिन तुमने कुछ पहल क्यों नहीं की , लाइक चांदनी को पकड़ लेते
: दीदी के सामने ? हीही ( मैने इस सवाल का जवाब तो उस रात से सोच रखा था )
: तो कैसा रहा एक्सपीरियंस ?
: बता नहीं सकता हाहाहा ( मै हसने लगा ) मतलब पूरी फिल्म देख ली मैने अच्छी खासी हीही
: हाहाहाहा ये सही कहा तुमने
मै मुस्कुराता रहा थोड़ी देर
: तो कैसी लगी तुम्हे ?
: कौन चांदनी ?
: ना यार बबली माय सेक्सी बूटी ( उसने शरारती मुस्कुराहट से मुझे देखा )
मेरा चेहरा सफेद पड़ने लगा , कैसा महसूस करेंगे आप जब आपकी बहन का bf आपको आपकी ही बहन के बारे में ये सवाल पूछे
: अरे यार चिल न , सोचो ही मत कि वो तुम्हारी दीदी है । अब बताओ
उसने मुझे थोड़ा सहज करने का प्रयास किया
: उम्मम गुड
: क्या यार तुम भी , तुमने उसकी हॉर्नीनेस को फिल नही किया .. उसकी गर्म सांसों को , वो जब सिसकारियां ले रही थी और मुझे आवाज दे रही थी
एक पल को आंखों के सामने वो नजारा चलने लगा जिसमें बबली दीदी अपने उत्तेजना के चरम पर थी और उनकी तेज कामुक चीखों से कमरा गूंज रहा था
मै आंखे खोल दी और मेरी धड़कने बेकाबू तरीके से आगे बढ़ रही थी , पेंट में हरकत होने लगी । मैने बेचैनी महसूस की और अमर बस मुझे देखे जा रहा था । मैने उसकी ओर देखा और वो अपने होठ सिकोड़ कर मुस्कुराया , उसने मेरी चोरी पकड़ ली थी ।
: उम्मम तो तुम्हे याद है उसकी सिसकिया
मै शांत रहा और बस मुस्कुराया , शायद यही कर भी सकता था मै
: तुम्हे पता है पहली बार जब हम मिले थे तो ... उसने मुझे थप्पड़ मारा था
: क्या ? ( मै हंसा ) दीदी ने
: हा यार , मै एयरपोर्ट पर अपने पेरेंट्स को मुंबई की फ्लाइट पकड़वाने गया था और वो उसी रोज दिल्ली से आई थी । उफ्फ क्या कमाल की चाल थी उसकी
शॉर्ट स्लीवलेस टॉप , फुल जैकेट और वो स्किन फिट योगा पैंट जैसे उसके पैंट , जिसमें उसके चूतड़ों की थिरकन ... सीईईई अब क्या बताऊं
एकदम से अमर अपनी आंखे बंद कर, भौहें सिकोड़ कर माथे पर सिकन ले आया और उसके पंजे की उंगलियां फैल कर पूरी हथेली को ऐसे शेप में ले गई मानो वो अपनी कल्पनाओं में बबली के चूतड़ों को पकड़ने के लिए छटपटा रहा हो
उसके होठ अजीब तरह से सिकुड़ रहे थे ... जैसे उसे कितनी तलब हो बबली दीदी के मुलायम चूतड़ों की ।
इतनी दीवानगी , मैने अंदर से खुद को झकझोरा
फिर वो जब हाइ हिल वाले सैंडल में चल रही थी तो उसके बड़े बड़े रसीले मटके जैसे चूतड़ आह कभी इधर कभी उधर ( वो अपने हाथों से अपनी कल्पनाओं में खोए हुए ब बली के चूतड़ों की चाल बता रहा था ) और वो उछाल ... हाय दिल ही बेकाबू हो गया ... पानी से भरा गुब्बारा जितना लचीला होता है न रोहन ...
हलक से थूक गटक कर वो मेरी ओर देखा , उसकी बातों से मेरा तो पैंट फटने जैसा हो गया था कि भाई ये बन्दा आखिर है क्या चीज । इतनी सहजता से वो बस दीदी के चूतड़ों को मेरी आंखों के सामने नचा रहा था और लंड बगावत पर
: पानी से भरे लबालब गुब्बारों में जो उछाल और छूने पर जो थिरकन आती है सेम वैसी है बबली के गाड़ की चर्बी अह्ह्ह्ह जी करता है काट खाऊं
मै उसकी हरकतों पर मुस्कुराया
: फिर हुआ क्या कि दीदी ने आपको थप्पड़ मारा
: अरे हा , वो दरअसल तेजी में थी और एकदम से मुझसे टकराई
मै भी उसके सामने से अनजाने टकराया था और उसका बोल्ड फिगर देख कर आंखे बड़ी हो गई ... लगा कि बस यही तो है जिसकी तालाश में था मैं
बस उसी पल उसे अपना मान लिया और दिल ने इतना ज्यादा उसे अपना लिया कि मुंह से भी उसके लिए बड़े अच्छे शब्द निकले
" ईजी ईजी डार्लिंग .. गिर जाओगी "
वो तेजी से अपने खुले बालों को झटकी और उसे मेरी बातों से लगा कि मैने जानबूझ पर उससे बदतमीजी की है और वो गुस्से में मुझे थप्पड़ लगा दिया : बहनचोद अंधा है क्या ?
: क्या ? ( मै शॉक्ड होकर हंसा कि दीदी ऐसा बोलेगी ) सच में दीदी ने ऐसा कहा
: अब हा यार , दिल्ली में जो चार साल रहा हो उसके मुंह से बहिनचोद गाली न निकले हाहा ... लेकिन सच कहूं तो मजा आ गया था ।
: फिर दूसरी मुलाकात कब हुई
: उसी रोज , उसके रूम की चाबी वही गिर गई थी और मैने उसका पीछा किया
वो बड़ी तेजी में निकली , उसके साथ चांदनी भी थी लेकिन वो पहले ही निकल गई थी । उसने मुझे एक बार पीछे आते देखा तो वो घबरा गई कि मै उसका पीछा कर रहा हूं
वो टैक्सी से निकली और मै अपनी गाड़ी
अपार्टमेंट तक मैने उसका पीछा किया , गाड़ी की हॉर्न दी लेकिन उसकी टैक्सी नहीं रुकी ।
कॉलोनी में गया तो एकदम से लिफ्ट में दोनों गायब .. किधर गई कुछ पता नहीं
आखिर में मैंने वहां पर वॉचमैन को वो चाबी दिखाई और वो मुझे ऊपर ले गया उनके फ्लैट के सामने दोनों मुझे मिली वही ... बड़ी हड़बड़ाहट में
बबली अपना बैग खंगाल रही थी
चांदनी ने कोहनी से मेरी ओर इशारा किया
वो डर रही थी , उसे था कि मै मेरे थप्पड़ का हिसाब करने आया हूं
: पु पुलिस को कॉल कर चंदू , जल्दीइइ
चांदनी हड़बड़ाहट कर मोबाइल निकालती है उससे पहले मै उसको रोकते हुए
: ये तो नहीं खोज रही ?
मैने उसको उसके फ्लैट की चाभी दिखाई और वो सन्न
: मै कबसे गाड़ी से हॉर्न दिया , रुकी नहीं आप लोग , लीजिए
चांदनी ने आगे बढ़ कर चाभी ली और मै मुस्कुरा कर वापस जाने लगा
फिर उसी समय बबली ने मुझे रोका
: हा फिर उसके उस आवाज पर मै उससे दूर कही गया ही नहीं , उसने थैंक्यू कहा तो मैने कहा बिना कॉफी के कैसी थैंक्यू । चांदनी के कहने पर वो मान गई । फिर न उसे समझ आया न मुझे ,कब हम इतने करीब हुए और इतना ज्यादा वाइल्ड उफ्फफ लेकिन सच कह रहा हूं रोहन जिस रोज पहली बार मैने उसके उन नरम चूतड़ों को छुआ था न अह्ह्ह्ह क्या बताऊं
: सर .. कुछ लेंगे
एकदम से वही औरत सामने आई
अभी भी वही आउटफिट , लंड पहले ही खड़ा था ।
अमर ने अंगड़ाई ली
: विस्की या स्कॉच
मै भी कहा इनकार कर सकता था , मैने भी स्कॉच के लिए हामी भर दी
फिर वो एक ट्रे में सजा कर लाई
Johnnie Walker Black lebel
एक क्लासिक प्रीमियम स्कॉच, बिना डायल्यूट किए लेने का रिस्क मै नहीं ले सकता था
उसने पैक बनाए ,
अमर ने नीट उठाया और मैने 2 स्माल आइस क्यूब के साथ
: और कुछ सर
: यस बेबी कम हियर सीट
अमर ने उस औरत को पकड़ कर अपनी गोद में बिठा लिया
ओह्ह्ह बहनचोद क्या गद्देदार मोटी गाड़ थी , अमर के पूरी जांघों पर फैल गई । मेरा लंड ये सोच कर अकड़ रहा था कि जरूर उसकी गाड़ में अमर का मोटा लंड चुभ रहा होगा
: थक गई हो न
: आपके लिए तो नहीं उम्मम .... डिनर रेडी है अह्ह्ह्ह
( अमर तो एकदम से भूल ही गया कि मै भी यहां हूं )
वो उस औरत को अपनी बाहों के लिए उसकी नंगे कमर को सहला रहा था और गालों को चूम रहा था
उसकी लंबी गदराई चिकनी जांघें देख कर लंड अकड़ रहा था
फिर एकदम से उसने अमर की जांघों में अपने चूतड़ों को आगे पीछे कर मथना शुरू किया , फिर अमर आंखे बंद कर एक लंबी गहरी आह भरने लगा
: उम्मम लग रहा है मैडम को याद कर रहे थे सर ओह्ह्ह्ह सीईईई
: यस शीला डार्लिंग उम्मन यू नो उसके अह्ह्ह्ह
: उम्मम जानती हूं सर , आपको उनके लचीली चर्बीदार चूतड़ों की बड़ी याद आती है । मै कुछ मदद करु
उसने अमर का हाथ पकड़ कर अपनी मुलायम छातियों पर रख दिया और खुद ही दबाने लगी ।
अमर ने एक नजर मुझे देखा
मै अपने हाथों में ग्लास लिए मीठी स्कॉच की सीप ले रहा था , हमारी नजरे मिली
मै मुस्कुराया और अमर भी
अगले ही पल वो औरत सरक नीचे फर्श पर घुटने के बल
अमर ने खुद का पेट पिचकाया ताकि शीला को उसके जींस की बटन खोलने के आसानी हो और फिर उसने अपने चूतड़ उठाए , शिला ने जींस खींच कर चूतड़ों से जांघों तक ले आई
अंडरवियर के उसका लंड पूरा फूला हुआ था जिसे देखते ही शीला उसको छूने लगी
: ओह्ह्ह्ह शीला डार्लिंग आराम से सीईईई ओह्ह्ह्ह
: आपका बहुत गर्म है सर , उम्ममम इसकी गंध मुझे पागल कर देती है
: ओह्ह्ह्ह शिला माय लव कम हियर उम्मम
अमर ने झुक कर शिला के रसीले होठों को चूसा
: तुम्हारी रसीली बाते मुझे बहुत पसंद है
: और मेरे होठों का क्या उम्मम ( शिला वापस सरक कर अमर के लंड को अंडरवीयर के ऊपर से चूमने लगी )
: ओह्ह्ह्ह बेबी सीई अह्ह्ह्ह
इधर मेरा लंड पूरी बगावत पर आ गया
शिला जिस तरह से बिना मेरी ओर एक नजर देखे अमर के साथ बिजी थी , मै हैरान था । उसे जरा भी हिचक नहीं थी मेरे होने की , वो बस लगी थी अपने काम में
उसने अमर की अंडरवियर की लास्टिक उंगलियों के फंसा कर नीचे खींची और उसका लंड उछल कर खड़ा हो गया , छत की ओर मुंह किए तन्मनया गुस्सा और लाल
शिला ने उसके मोटे लंड को पकड़ कर सूंघना शुरू किया
और यहां मेरी हालत खराब होने लगी
उसकी गुलाबी जीभ ने अमर के सुपाड़े की टिप को छुआ और अच्छे से सुपाड़े पर गोल नचा कर उसने अमर का सुपाड़ा मुंह में ले लिया
फिर तो मेरा लंड फुदकने लगा और पेंट में बड़ी दिक्कत थी
अमर आंखे बंद कर शीला के बालों को छू रहा था और शिला गले तक उसके लंड को उतार रही थी
आड़ को टटोलने से लेकर मुंह में चुभलाने तक , पूरी तरह से अमर का लंड उसके लाल कर दिया था जो चमक रहा था
फिर उसने अमर के सुपाड़े की गांठ को जीभ से फ्लिक करने लगी और तेजी से हाथों से उसका लंड हिलाने लगी एकदम से अमर के सुपाड़े का फब्बारा फूटा
उसने भी फुर्ती दिखाई और सूरक लिया सब कुछ
फिर उसने सब कुछ साफ कर उठी और चली गई बाथरूम की ओर
अमर खड़ा हुआ और अपना लंड अंदर रख कर
: थोड़ा टहलने चले
मै भी उसके साथ चल दिया
वो मुझे जीने से होकर टैरिस की ओर ले गया
: पूछो !!
: क्या ? ( मै थोड़ा मुस्कुरा कर बोला )
: वही जो तुम सोच रहे हो ( अमर ने जैसे मेरे मन में झांका हो )
: अह वो ( मै थोड़ा असहज हो रहा था ) मतलब मुझे ये जानना है कि आपको ये शिला मिली कैसे और मिली तो राजी कैसे हो गई ? उसे देखा मैने उसने मुझे देखा तक नहीं , फर्क नहीं पड़ा उसे मुझसे कि मै वही बगल में हूं और वो ...
: ओह्ह्ह फिर नहीं रोहन, तुम बहुत कच्चे हो यार । औरतें ऐसी ही होती है
: मतलब ( मै थोड़ा उलझा )
: पब या बार में कभी लड़की को खरीदा है एक रात के लिए
मै बस मुस्कुराया और अमर को उसका जवाब मिल गया
: तुम यार बहुत पीछे हो आगे बढ़ो , मुंबई में एक कसीनो है , उस कसीनो में लड़किया खड़ी रहती है और कस्टमर छल्ला फेक कर अपनी मनपसंद लड़की चुनते है अगर किसी लड़की को तुमने छल्ला पहनाया तो उसके लिए तुम पे करो और एक रात के लिए वो तुम्हारी । फिर वो किसी और की तरफ नहीं देखती बस उसी को ध्यान देती है जिसने उसके लिए पैसे दिए है ।
अब मुझे थोड़ा समझ आने लगा
: लेकिन ये मिली कहा आपको
: मै जब अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद यहां लखनऊ के अपनी कंपनी खोलने की जिद पापा से की तो मम्मी को बहुत फिकर थी मेरे खाने पीने का ख्याल कौन रखेगा और यहां अकेले रहना मेरे लिए सही नहीं था क्योंकि पापा का बिजनेस मुंबई में सेट था । मै अपने बदौलत कुछ करना चाहता था इसीलिए यहां मुझे शुरुआत करना सही लगा क्योंकि मेरी बेसिक पढ़ाई भी लखनऊ में हुई थी और गांव भी इसी जिले था । फिर मम्मी ने पापा से बात कर गांव से हमारे घर की देख रेख करने वाले दो लोगों को बुलाया । उसमें एक था कालीचरण और दूसरी थी शिला । कालीचरण शीला का देवर था और इनका यही अफेयर शुरू हो गया । शुरू में मैने इग्नोर किया और फिर एक रोज मैने शीला को टिकटिक पर रिल बनाते देखा । कालीचरण अक्सर चौकीदारी और सब्जियां लाने , गाड़ी चलाने का काम देखता और शीला मेरे कपड़े बिस्तर और खाने का ध्यान रखती ।
मै बड़े गौर से सुन रहा था और हम टैरिस पर आ गए थे
: रहते हुए धीरे धीरे मेरी नजर शीला की गदराई जवानी पर गई , कभी कपड़े धुलते हुए उसके गिले ब्लाउज तो कभी सफाई करती हुई उनकी गदराई जांघें । फिर एक रोज मैने उसे बिना ब्लाउज के वीडियो बनाते देखा , पहले लगा कि वो वीडियो काल पर है लेकिन फिर समझ आया कि फेम की चाह में वो भी इस ट्रैप में झांसे में फंस गई है । पारदर्शी साड़ी में झांकती छातियां ... उसी रोज मैने उसकी इंस्टा प्रोफाइल खोज निकाली और देखा तो अभी तीन साढ़े तीन हजार फॉलोवर थे , लेकिन विडियोज एक से बढ़ कर एक । कोई नहा कर तौलिए में तो कोई ब्रा और साड़ी में । समझ आ गया कि इस कलाकार के हुनर को निखराना पड़ेगा ।
अमर के शब्दों से मै मुस्कुराया
: फिर मैने उसे दिखाना शुरू किया मै उसे पीछे हूं और वो भी बचने लगी , मैने कालीचरण से कहलवाया थोड़े बहुत ड्रामे के बाद वो तैयार हुई और फिर मैने उससे साझा कि अपनी फैंटेसी , पहले तो वो मना कर दी लेकिन जब मैने उसके बच्चे की पढ़ाई और तन्खाह 2 गुना करने की बात की तो मान गई । उसके साथ में अगर मै उसके साथ फिजिकल होता हूं तो उसके अलग चार्ज मिलते है उसे ... चाहिए क्या था उसको वो मान गई । फिर थोड़ी ट्रेनिंग और भाषा पर काम किया । थोड़ी एडल्ट फिल्म दिखाई और उसकी कला निखर कर आज तुम्हारे सामने है ।
: हीही
: सच में उधर देखो
अमर ने दरवाजे की ओर दिखाया तो सामने सच में शीला खड़ी थी अपनी उसी ड्रेस में , देखते ही लंड अकड़ गया
: उम्हू बिना पैसे के सोचना भी मत ( वो बोला )
मै हस पड़ा
: अगर तुम चाहो तो आज रात के लिए मै पैड कर सकता हूं तुम्हारे लिए
मै अमर का ऑफर समझ गया था और मुस्कुराने लगा
: अरे यार मजाक कर रहा हूं , वो मना नहीं करेगी
एक पल को मेरी जीभ से लार लपकी लेकिन मै खुद को रोक लिया
तभी अमर का फोन बजा
: हाय जानू कहा हो
: बोर हो रही हूं और क्या
: तो कल सुबह आजाऊ पिक करने तुमको
: का सच में ?
: हा ... इस बार मेरे साथ रोहन भी होगा
उसने मेरी ओर इशारे से पूछा कि चलूंगा न और मैने हा कर दी क्योंकि कल सारा दिन बोर होने से बेहतर है कि मै इन्हीं लोगों के साथ समय बिताऊं
: ओके ओके , तो रोहन अगर साथ है तो क्या शीला?
: ओह डियर, ही इज ए मैन, मेरी संगति में है सेफ
: आपके साथ है तो ही कह रही हूं ,चलो ओके इंजॉय करो आप लोग और शीला को कहना कि अपने बोनस के चक्कर में मेरे माल पर हाथ नहीं मारे समझे , सुबह मिलती हूं
: ओके डार्लिंग , सी यू बाय
: लव यू हीही बाय
फोन कट हुआ और फिर हम लोग थोड़ी बातें करते हुए नीचे आए , आगे हमारे शिला सीढ़ियों से नीच उतर रही थी ,
उसके मोटे चर्बीदार चूतड़ों की थिरकन देख कर लंड खूब फड़क रहा था ।
फिर हमने डिनर किया ... अंतिम बार के लिए अमर ने मुझसे पूछा शीला के लिए लेकिन मैने मना कर दिया । कारण था कि मै और बहकना नहीं चाहता था । मै मेरे तैयार कमरे में आ गया और अमर शीला के साथ अपने कमरे में चला गया।
उसने दरवाजा खुला छोड़ दिया था कि अगर मूड बदले तो अंदर आ सकता हूं
लेकिन मै अटल रहा
शीला की चीखे पूरे घर में गूंजती रही
मैने मेरी सोना से बात की फोन पर , कोई और दिन होता या वक्त होता तो जरूर अपनी जान से रोमांटिक होता लेकिन हालही में जो हुआ उसको सोच कर हिम्मत नहीं बनी कि सोना से कुछ रोमांटिक बात करूं या वीडियो कॉल पर कुछ दिखाने का कह सकूं और वो भी शायद मेरी दहलीज समझ रही थी ।
खैर मै वापस सो गया
अगली सुबह मै और अमर निकल गए , बबली दीदी को पिक अप करने के लिए
रास्ते में थोड़ी बातचीत रही और फिर 3 घंटे के लंबे सफर के बाद फाइनली हम लोग बबली दीदी के दिए लोकेशन पर पहुंच ही गए ।
वेन्यू के बाहर खड़े होकर गेस्ट और दूसरी औरतों लड़कियों को निहार रहे थे।
थोड़ी देर बाद वो दिखाई दी
: ओह्ह्ह्ह गॉड लुक ऐट हर सीई क्या बवाल लग रही है ... उफ्फ ये लड़की न रोहन ( अमर ने मुझे बबली दीदी दी को दिखाया , जो सामने से हमारी ओर आ रही थी , एक आरामदायद टॉप और लूज सॉफ्ट पैंट में जो उनके जांघों पर चिपकी हुई थी ।
: अकेली आ रही है ? चांदनी कहा है ? ( एकदम से मुझे ख्याल आया )
: वो तो गई ट्यूजडे को ही ( अमर ने कैजुअली बोला )
: कहा ?
: कैनेडा
: कैनेडा ? , एक मिनट लेकिन वो कैनेडा क्यों जाएगी ?
: यार उसका फ़ियांसे तो वही प्रैक्टिस करता है अपनी डॉक्ट्रेट की
: लेकिन उसने तो कुछ और ...
: ओह तेरी कही ... ( अमर आंखे बड़ी कर मुझे देखा और मुस्कराया उसे लगा कि मै चांदनी को पसंद तो नहीं कर रहा था )
: नहीं यार ... दो दिन से उसके मैसेज नहीं आए .. उसने बताया नहीं
अमर बोलने जा रहा था कि तभी
: हाय ब्वॉयज ( दीदी लहराती हुई हमारी ओर आई और फिर पहले वो अमर से गले मिली और फिर मुझसे )
सामने से उसके गुदाज मुलायम चूचे का स्पर्श मिला सीने पर , जी में आया कि कस ही लूं एकदम फ्रंट टाइट हग
: कैसी हो जान
: ओह्ह्ह पूछो मत यार ... बहुत बोरिंग उम्मम थक गई हूं बस चलो यहां से
फिर अमर ने उसकी ट्रॉली बैग गाड़ी में रखी पीछे और वो आगे बैठ गई मै पीछे चला गया । गाड़ी अमर चलाने लगा
: हम्म्म तो आज बड़े साहब को फुर्सत है उम्मम
दीदी ने मुझे ही ताना मारा था लेकिन मै बस मुस्कुराया । मेरे जहन में कुछ चीजें नाच रही थी
" चांदनी !! , उस लड़की ने मुझसे कहा कि बबली दीदी के लिए रिश्ता आया था कैनेडा से और लड़का डॉक्टर है और खुद उससे शादी करने के लिए चली गई , दिमाग उल्टा हुआ पड़ा था और फिर उसने अमर के बारे में भी कितना कुछ झूठ बोला
: क्या हुआ रोहन बाबू क्या मन उदास हो गया
: हा रोहन क्या हुआ ( दीदी बोली)
: अह कुछ भी नहीं ( फीकी मुस्कान से मै बोला )
: अरे यार हाहाहाहा ( अमर खिल कर हंसा ) बोला था मैने इसको कि बहुत शरारती लड़की है बच कर रहना हाहाहा काट गई लगता है हीही
मै फीकी मुस्कुराहट से शर्मिंदगी महसूस कर रहा था , दीदी मेरे उतरे हुए चेहरे की हकीकत समझ रही थी
: क्या तुम भी चुप रहो
: रोहन तुम ठीक हो न
: हा दीदी , बस वो एक एकदम से गायब हो गई और बोली भी नहीं मैसेज भी नहीं की , मुझे लगा कि आपके साथ होगी वो भी
फिर थोड़ी देर हमारी नॉर्मल बातें चल रही थी
फिर दीदी ने कहा कि उन्हें भूख लग रही है और किसी अच्छे रेस्तरां पर गाड़ी लगाने को कहा
हाइवे साइड पर गाड़ी लगी और हम लोग बैठ एक जगह , फिर अमर खाने का ऑर्डर देने और फ्रेश होने बाथरूम चला गया
मै मोबाइल पर सोना को हैलो हाय कर रहा था तभी दीदी ने वापस चांदनी की बात छेड़ दी
: मैने तुझे बोला था न उसके चक्कर में मत पड़ना
: अरे नहीं दीदी ( मै मुस्कुराया ) अब क्या बताऊं उसने मुझे आपके और जीजू के बारे में ऐसी बाते बताई और अब देख रहा हूं तो सब अलग
: क्या बोली थी वो ( दीदी सीरियस हुई )
: अह छोड़ो न दीदी
: बोल रोहन , बता मुझे
: अह उस रोज जब हम लोग मूवी के लिए गए थे साथ में उस दिन हम दोनो रूम पर आए थे
: फिर ?
: फिर उसने कहा कि अमर मतलब जीजू ने उससे आपको छीन लिया है, आप जीजू के उसके पीछे पागल हो और जीजू भी बहुत खराब किस्म के है ।
: किसके पीछे पागल हूं ?
दीदी की बात पर मुझे हसी आई
: बोल न !!
: वो उनके बड़े पेनिस के लिए
दीदी आंखे बंद कर झलझलाई
: फिर ? और क्या बोली वो कुत्ती
: उसने कहा कि आपके लिए इतना अच्छा कैनेडा सा डॉक्टर का रिश्ता आया है और आप उस चूती... मतलब जीजू के लिए सब छोड़ रही हो । वो बहुत घटिया है और उसके साथ सेक्स करना चाहते है और उनका सपना है कि वो आपके और चांदनी दोनों के साथ थ्रीसम करे
दीदी अपने बाल खींचले ऐसी हो गई थी
: ये बहनचोद कमिनी , शुरू से ही ये अमर के पीछे थी , छुप छुप कर देखती थी हम दोनो को वो सब करते । उसी ने कहा था कि कैनेडा जाने से पहले बस छोटी ग्रुप पार्टी रखना चाहती थी , अमर का भी मन था लेकिन मुझे सही नहीं लग रहा था और इसीलिए मैने तुझे भी बुलाया था कि तू होगा पार्टी में तो ऐसा कुछ नहीं होगा ।
दीदी ने सारी बात साफ कर दी लेकिन अब समझ नहीं आ रहा था कि उसे ऐसा करके मिला क्या
यही सवाल मैने दोहराया दीदी से और तभी पीछे से अमर आया
: मै बताता हूं ( अमर बोला )
उसके आते ही हम दोनो सतर्क हो गए
दीदी ने आंखों से इशारा कर अमर को मना किया लेकिन अमर नहीं माना
: अरे यार बताने दो , अब हम दोनो buddy है क्यों रोहन
मै बस मुस्कुराया
: याद है तुम्हे जब हम पहली बार मिले तो मैने तुमको क्या कहा था कि ये बहुत शरारती लड़की है इससे ...
: बच कर रहना ( मै बुदबुदाया)
: हां ( अमर बोला ) भाई मेरे उसे जो चाहिए था असल उसे तुझसे मिला नहीं
: क्या ? ( मै चौक कर बोला , क्योंकि मेरे दिमाग में कुछ गलत ही आ रहा था )
: ढेर सारी अटेंशन और जो तुम सोच रहे हो वो भी हीही ( अमर मस्ती में हंसता हुआ बोला और दीदी उसे घूर रही थी )
: कमान बेबी , अब मजे मत लो उसके
: हीहीही , यकीन नहीं करोगी बेबी ये बन्दा पता नहीं कैसे कंट्रोल कर जाता है । फर्क ही नहीं पड़ता... कल इसके सामने ही शीला टहल रही थी .. कोई और होता तो दबोच लेता लेकिन
: हा सब तुम्हारी तरह ठरकी नहीं होते समझे और अब बस करो ( दीदी बोली )
: सॉरी रोहन हाहाहाहाहा ( अमर हस कर बोला )
: इट्स ओके ( मै बस फीकी मुस्कुराहट से बोला )
फिर हमने खाना खाया और उस दौरान मुझे लगातार चांदनी द्वारा ठगे जाना अखरता रहा .. आखिर इस तिरिया चरित्र के कितने रूप और देखने बाकी होंगे ।
फिर मै और अमर उठ कर काउंटर की ओर गए
: देखो यार नाराज मत होना लेकिन सच में तुम इतने भोले बन का मत रहो , दुनिया बहुत कमीनी है थोड़ा तैयार करो खुद को
: हम्म्म
: वैसे ड्राइव कर लेते हो ?
: हा क्यों ?
: अह अगर थोड़ा ड्राइव कर लोगे तो ... समझ रहे हो न ( अमर मुस्कुरा कर अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरता हुआ बोला )
मै उसकी शरारती मुस्कुराहट समझ रहा था
: लेकिन दीदी मानेगी ? उम्मीद कम है !!
: डॉन्ट जज बुक बाय इट्स कवर बॉय हाहाहा , देखो साफ साफ कहूं तो मै बहुत फ़ैसिनेट किस्म का आदमी हूं और सेक्सुअल एडवेंचर मुझे बहुत पसंद है । लॉन्ग ड्राइव तो हम दोनो का फेवरेट है सीईईई तो अगर तुम्हे ऐतराज न हो तो ?
मै थोड़ी देर चुप रहा तो वो खुद ही बोल पड़ा
: ओह कमान रोहन उसे भी पता है कि तुम उस रात जाग रहे थे ,
मै मुस्कुराने लगा
: अह्ह्ह्ह फिर मुझे कोई दिक्कत नहीं ( मै मुस्कुरा कर बोला लेकिन अभी से मेरे मन में उत्तेजना ने जगह बना ली थी
: दैटश माय बॉय ( उसने मेरे कंधे थपथपाया फिर आगे बढ़ गया ) हे डार्लिंग पीछे आजाओ
: तो ड्राइविंग?
: रोहन है न ?
फिर बबली दीदी पीछे चली गई और फिर मै भी गाड़ी लेकर निकल गया एक 2 घंटे के लंबे सफर के लिए
जारी रहेगी
( पढ़ कर लाइक कमेंट जरूर करें)
Super update BhaiUPDATE 027
उम्मीद से बड़ा था अमर का घर
जैसा चांदनी ने बताया था उसके बिल्कुल उलट
कम से कम 4000 स्क्वायर फिट में
शहर के पोस इलाके में , बड़ा गेट , चमकती टाइल्स , ओह बहनचो ऑडी ... आंखे सन्न
सामने बड़ा सा इंट्रेंस
मै अंदर गया और उसने बहुत वॉर्म वेलकम किया
फिर हम दोनो बड़े से हाल में बैठे थे
कभी चमकती टाइल्स तो कभी विदेशी गद्दे वाली सोफे के नक्काशीदार किनारे , सब कुछ वेल फर्निश...
किसी को आवाज देने की जरूरत नहीं उसने एक छोटी सी जिंगल बेल खनकाई और
तभी एक गजब की गदराई मोटे चूतड़ों वाली औरत आई हाथों में चाय की केतली लिए
आंखे देखा तो सन्न रह गया
वो औरत सेक्सी फ्रेंच हाउस मेड लिंजरी वाले आउटफिट में थी और आउटफिट भी ऐसा जिसमें उसने सिर्फ ब्लाउज और नीचे कमर पर शॉर्ट एप्रेन बांध रखा था जो बस आगे से उसके पेडू समेत चूत के हिस्सों को ढक रहा था लेकिन बगल से लंबी मोटी गदराई चिकनी जांघें साफ दिख रही थी पूरी वैक्स की हुई
वो लहराती हुई ट्रे लाकर मेरे सामने कांच के टेबल पर रखी और उसके ढीले ब्लाउज से झांकती उसकी मोटी मोटी चूचियां, मानो सरक कर बाहर ही झूल जाएंगी
फिर बिना वो मेरी ओर देखे बस पलट कर चली गई
जाते हुए उसके मोटे मोटे गद्देदार चूतड़ों की थिरकन ,बड़ी चतुराई से उसने पीछे के दरारों को छिपा रखा था उस एप्रेन के फीते से जो चलने पर भी उसके चूतड़ों को पूरी तरह से नंगा नहीं होने दे रहे थे
ओह्ह्ह्ह बहनचो अब ये क्या था
मेरा दिमाग एकदम सुन्न हो गया
बड़ी बड़ी आंखों से मै अमर को देखा जो सामने रखी ट्रे से कॉफी उठा कर मुस्कुराया
मेरी आँखें मुस्कुरा उठी
: ये सब क्या ?
: ओह रोहन तुम भी न , इतना जल्दी चौकों मत
मै शांत रहा था क्योंकि कही न कही उसके कहने का मतलब था कि चीजे अभी और भी उसे सरप्राइज़ करने वाली है
: दीदी को पता है इस बारे में ( मेरा इशारा उस हाउस मेड की ओर था )
: हा , उसे मेरे शौक के बारे में अच्छे से पता है ( वो बड़े साफ लहजे में बोला )
मै सोचने के लिए मजबूर हो गया कि आखिर कोई लड़की कैसे अपने bf को इनसब के लिए छूट दे सकती है ।
: देखो रोहन , माना कि अभी तुम्हारे हमारे रिश्ते बड़े अजीब लग रहे होंगे , लेकिन यकीन करो मेरा.. यही असल लाइफ तो हम सभी जीना चाहते है न .. पैसा हो , एक प्यार करने वाली सेक्सी gf या बीवी हो और ढेर सारा सेक्स हाहाहाहाहा
कही न कही उसकी बाते रिलेट करने वाली थी लेकिन फिर वही अहम आ जाता है कि नहीं मै ऐसा नहीं हू चाहिए मुझे भी लेकिन थोड़ा शरीफ हूं मै .. वगैरह वगैरह !!
मै बस मुस्कुराया और हल्के से सर हिलाया
: तो फिर बताओ कितनी बार ?
एकदम से अमर से सवाल दागा , शायद ये उसका अपना तरीका था
: मतलब ? ( मै थोड़ा उलझा कि बंदा जानना क्या चाहता है )
: उस रात पार्टी नाइट में .... कितनी बार
मै उसका इशारा समझ गया था कि मैने कितनी बार हिलाया , मै शर्म से मुस्कुराया । मै ऐसे सवालों का आदी भी नहीं था और शर्माना जायज था ।
: क्या यार बोलो भी
: एक ( मै बोल कर चुप हो गया एक शर्माहट भरी मुस्कुराहट से )
: बस एक ?
: हा उतना ही काफी था मेरे लिए हीही
: लेकिन तुमने कुछ पहल क्यों नहीं की , लाइक चांदनी को पकड़ लेते
: दीदी के सामने ? हीही ( मैने इस सवाल का जवाब तो उस रात से सोच रखा था )
: तो कैसा रहा एक्सपीरियंस ?
: बता नहीं सकता हाहाहा ( मै हसने लगा ) मतलब पूरी फिल्म देख ली मैने अच्छी खासी हीही
: हाहाहाहा ये सही कहा तुमने
मै मुस्कुराता रहा थोड़ी देर
: तो कैसी लगी तुम्हे ?
: कौन चांदनी ?
: ना यार बबली माय सेक्सी बूटी ( उसने शरारती मुस्कुराहट से मुझे देखा )
मेरा चेहरा सफेद पड़ने लगा , कैसा महसूस करेंगे आप जब आपकी बहन का bf आपको आपकी ही बहन के बारे में ये सवाल पूछे
: अरे यार चिल न , सोचो ही मत कि वो तुम्हारी दीदी है । अब बताओ
उसने मुझे थोड़ा सहज करने का प्रयास किया
: उम्मम गुड
: क्या यार तुम भी , तुमने उसकी हॉर्नीनेस को फिल नही किया .. उसकी गर्म सांसों को , वो जब सिसकारियां ले रही थी और मुझे आवाज दे रही थी
एक पल को आंखों के सामने वो नजारा चलने लगा जिसमें बबली दीदी अपने उत्तेजना के चरम पर थी और उनकी तेज कामुक चीखों से कमरा गूंज रहा था
मै आंखे खोल दी और मेरी धड़कने बेकाबू तरीके से आगे बढ़ रही थी , पेंट में हरकत होने लगी । मैने बेचैनी महसूस की और अमर बस मुझे देखे जा रहा था । मैने उसकी ओर देखा और वो अपने होठ सिकोड़ कर मुस्कुराया , उसने मेरी चोरी पकड़ ली थी ।
: उम्मम तो तुम्हे याद है उसकी सिसकिया
मै शांत रहा और बस मुस्कुराया , शायद यही कर भी सकता था मै
: तुम्हे पता है पहली बार जब हम मिले थे तो ... उसने मुझे थप्पड़ मारा था
: क्या ? ( मै हंसा ) दीदी ने
: हा यार , मै एयरपोर्ट पर अपने पेरेंट्स को मुंबई की फ्लाइट पकड़वाने गया था और वो उसी रोज दिल्ली से आई थी । उफ्फ क्या कमाल की चाल थी उसकी
शॉर्ट स्लीवलेस टॉप , फुल जैकेट और वो स्किन फिट योगा पैंट जैसे उसके पैंट , जिसमें उसके चूतड़ों की थिरकन ... सीईईई अब क्या बताऊं
एकदम से अमर अपनी आंखे बंद कर, भौहें सिकोड़ कर माथे पर सिकन ले आया और उसके पंजे की उंगलियां फैल कर पूरी हथेली को ऐसे शेप में ले गई मानो वो अपनी कल्पनाओं में बबली के चूतड़ों को पकड़ने के लिए छटपटा रहा हो
उसके होठ अजीब तरह से सिकुड़ रहे थे ... जैसे उसे कितनी तलब हो बबली दीदी के मुलायम चूतड़ों की ।
इतनी दीवानगी , मैने अंदर से खुद को झकझोरा
फिर वो जब हाइ हिल वाले सैंडल में चल रही थी तो उसके बड़े बड़े रसीले मटके जैसे चूतड़ आह कभी इधर कभी उधर ( वो अपने हाथों से अपनी कल्पनाओं में खोए हुए ब बली के चूतड़ों की चाल बता रहा था ) और वो उछाल ... हाय दिल ही बेकाबू हो गया ... पानी से भरा गुब्बारा जितना लचीला होता है न रोहन ...
हलक से थूक गटक कर वो मेरी ओर देखा , उसकी बातों से मेरा तो पैंट फटने जैसा हो गया था कि भाई ये बन्दा आखिर है क्या चीज । इतनी सहजता से वो बस दीदी के चूतड़ों को मेरी आंखों के सामने नचा रहा था और लंड बगावत पर
: पानी से भरे लबालब गुब्बारों में जो उछाल और छूने पर जो थिरकन आती है सेम वैसी है बबली के गाड़ की चर्बी अह्ह्ह्ह जी करता है काट खाऊं
मै उसकी हरकतों पर मुस्कुराया
: फिर हुआ क्या कि दीदी ने आपको थप्पड़ मारा
: अरे हा , वो दरअसल तेजी में थी और एकदम से मुझसे टकराई
मै भी उसके सामने से अनजाने टकराया था और उसका बोल्ड फिगर देख कर आंखे बड़ी हो गई ... लगा कि बस यही तो है जिसकी तालाश में था मैं
बस उसी पल उसे अपना मान लिया और दिल ने इतना ज्यादा उसे अपना लिया कि मुंह से भी उसके लिए बड़े अच्छे शब्द निकले
" ईजी ईजी डार्लिंग .. गिर जाओगी "
वो तेजी से अपने खुले बालों को झटकी और उसे मेरी बातों से लगा कि मैने जानबूझ पर उससे बदतमीजी की है और वो गुस्से में मुझे थप्पड़ लगा दिया : बहनचोद अंधा है क्या ?
: क्या ? ( मै शॉक्ड होकर हंसा कि दीदी ऐसा बोलेगी ) सच में दीदी ने ऐसा कहा
: अब हा यार , दिल्ली में जो चार साल रहा हो उसके मुंह से बहिनचोद गाली न निकले हाहा ... लेकिन सच कहूं तो मजा आ गया था ।
: फिर दूसरी मुलाकात कब हुई
: उसी रोज , उसके रूम की चाबी वही गिर गई थी और मैने उसका पीछा किया
वो बड़ी तेजी में निकली , उसके साथ चांदनी भी थी लेकिन वो पहले ही निकल गई थी । उसने मुझे एक बार पीछे आते देखा तो वो घबरा गई कि मै उसका पीछा कर रहा हूं
वो टैक्सी से निकली और मै अपनी गाड़ी
अपार्टमेंट तक मैने उसका पीछा किया , गाड़ी की हॉर्न दी लेकिन उसकी टैक्सी नहीं रुकी ।
कॉलोनी में गया तो एकदम से लिफ्ट में दोनों गायब .. किधर गई कुछ पता नहीं
आखिर में मैंने वहां पर वॉचमैन को वो चाबी दिखाई और वो मुझे ऊपर ले गया उनके फ्लैट के सामने दोनों मुझे मिली वही ... बड़ी हड़बड़ाहट में
बबली अपना बैग खंगाल रही थी
चांदनी ने कोहनी से मेरी ओर इशारा किया
वो डर रही थी , उसे था कि मै मेरे थप्पड़ का हिसाब करने आया हूं
: पु पुलिस को कॉल कर चंदू , जल्दीइइ
चांदनी हड़बड़ाहट कर मोबाइल निकालती है उससे पहले मै उसको रोकते हुए
: ये तो नहीं खोज रही ?
मैने उसको उसके फ्लैट की चाभी दिखाई और वो सन्न
: मै कबसे गाड़ी से हॉर्न दिया , रुकी नहीं आप लोग , लीजिए
चांदनी ने आगे बढ़ कर चाभी ली और मै मुस्कुरा कर वापस जाने लगा
फिर उसी समय बबली ने मुझे रोका
: हा फिर उसके उस आवाज पर मै उससे दूर कही गया ही नहीं , उसने थैंक्यू कहा तो मैने कहा बिना कॉफी के कैसी थैंक्यू । चांदनी के कहने पर वो मान गई । फिर न उसे समझ आया न मुझे ,कब हम इतने करीब हुए और इतना ज्यादा वाइल्ड उफ्फफ लेकिन सच कह रहा हूं रोहन जिस रोज पहली बार मैने उसके उन नरम चूतड़ों को छुआ था न अह्ह्ह्ह क्या बताऊं
: सर .. कुछ लेंगे
एकदम से वही औरत सामने आई
अभी भी वही आउटफिट , लंड पहले ही खड़ा था ।
अमर ने अंगड़ाई ली
: विस्की या स्कॉच
मै भी कहा इनकार कर सकता था , मैने भी स्कॉच के लिए हामी भर दी
फिर वो एक ट्रे में सजा कर लाई
Johnnie Walker Black lebel
एक क्लासिक प्रीमियम स्कॉच, बिना डायल्यूट किए लेने का रिस्क मै नहीं ले सकता था
उसने पैक बनाए ,
अमर ने नीट उठाया और मैने 2 स्माल आइस क्यूब के साथ
: और कुछ सर
: यस बेबी कम हियर सीट
अमर ने उस औरत को पकड़ कर अपनी गोद में बिठा लिया
ओह्ह्ह बहनचोद क्या गद्देदार मोटी गाड़ थी , अमर के पूरी जांघों पर फैल गई । मेरा लंड ये सोच कर अकड़ रहा था कि जरूर उसकी गाड़ में अमर का मोटा लंड चुभ रहा होगा
: थक गई हो न
: आपके लिए तो नहीं उम्मम .... डिनर रेडी है अह्ह्ह्ह
( अमर तो एकदम से भूल ही गया कि मै भी यहां हूं )
वो उस औरत को अपनी बाहों के लिए उसकी नंगे कमर को सहला रहा था और गालों को चूम रहा था
उसकी लंबी गदराई चिकनी जांघें देख कर लंड अकड़ रहा था
फिर एकदम से उसने अमर की जांघों में अपने चूतड़ों को आगे पीछे कर मथना शुरू किया , फिर अमर आंखे बंद कर एक लंबी गहरी आह भरने लगा
: उम्मम लग रहा है मैडम को याद कर रहे थे सर ओह्ह्ह्ह सीईईई
: यस शीला डार्लिंग उम्मन यू नो उसके अह्ह्ह्ह
: उम्मम जानती हूं सर , आपको उनके लचीली चर्बीदार चूतड़ों की बड़ी याद आती है । मै कुछ मदद करु
उसने अमर का हाथ पकड़ कर अपनी मुलायम छातियों पर रख दिया और खुद ही दबाने लगी ।
अमर ने एक नजर मुझे देखा
मै अपने हाथों में ग्लास लिए मीठी स्कॉच की सीप ले रहा था , हमारी नजरे मिली
मै मुस्कुराया और अमर भी
अगले ही पल वो औरत सरक नीचे फर्श पर घुटने के बल
अमर ने खुद का पेट पिचकाया ताकि शीला को उसके जींस की बटन खोलने के आसानी हो और फिर उसने अपने चूतड़ उठाए , शिला ने जींस खींच कर चूतड़ों से जांघों तक ले आई
अंडरवियर के उसका लंड पूरा फूला हुआ था जिसे देखते ही शीला उसको छूने लगी
: ओह्ह्ह्ह शीला डार्लिंग आराम से सीईईई ओह्ह्ह्ह
: आपका बहुत गर्म है सर , उम्ममम इसकी गंध मुझे पागल कर देती है
: ओह्ह्ह्ह शिला माय लव कम हियर उम्मम
अमर ने झुक कर शिला के रसीले होठों को चूसा
: तुम्हारी रसीली बाते मुझे बहुत पसंद है
: और मेरे होठों का क्या उम्मम ( शिला वापस सरक कर अमर के लंड को अंडरवीयर के ऊपर से चूमने लगी )
: ओह्ह्ह्ह बेबी सीई अह्ह्ह्ह
इधर मेरा लंड पूरी बगावत पर आ गया
शिला जिस तरह से बिना मेरी ओर एक नजर देखे अमर के साथ बिजी थी , मै हैरान था । उसे जरा भी हिचक नहीं थी मेरे होने की , वो बस लगी थी अपने काम में
उसने अमर की अंडरवियर की लास्टिक उंगलियों के फंसा कर नीचे खींची और उसका लंड उछल कर खड़ा हो गया , छत की ओर मुंह किए तन्मनया गुस्सा और लाल
शिला ने उसके मोटे लंड को पकड़ कर सूंघना शुरू किया
और यहां मेरी हालत खराब होने लगी
उसकी गुलाबी जीभ ने अमर के सुपाड़े की टिप को छुआ और अच्छे से सुपाड़े पर गोल नचा कर उसने अमर का सुपाड़ा मुंह में ले लिया
फिर तो मेरा लंड फुदकने लगा और पेंट में बड़ी दिक्कत थी
अमर आंखे बंद कर शीला के बालों को छू रहा था और शिला गले तक उसके लंड को उतार रही थी
आड़ को टटोलने से लेकर मुंह में चुभलाने तक , पूरी तरह से अमर का लंड उसके लाल कर दिया था जो चमक रहा था
फिर उसने अमर के सुपाड़े की गांठ को जीभ से फ्लिक करने लगी और तेजी से हाथों से उसका लंड हिलाने लगी एकदम से अमर के सुपाड़े का फब्बारा फूटा
उसने भी फुर्ती दिखाई और सूरक लिया सब कुछ
फिर उसने सब कुछ साफ कर उठी और चली गई बाथरूम की ओर
अमर खड़ा हुआ और अपना लंड अंदर रख कर
: थोड़ा टहलने चले
मै भी उसके साथ चल दिया
वो मुझे जीने से होकर टैरिस की ओर ले गया
: पूछो !!
: क्या ? ( मै थोड़ा मुस्कुरा कर बोला )
: वही जो तुम सोच रहे हो ( अमर ने जैसे मेरे मन में झांका हो )
: अह वो ( मै थोड़ा असहज हो रहा था ) मतलब मुझे ये जानना है कि आपको ये शिला मिली कैसे और मिली तो राजी कैसे हो गई ? उसे देखा मैने उसने मुझे देखा तक नहीं , फर्क नहीं पड़ा उसे मुझसे कि मै वही बगल में हूं और वो ...
: ओह्ह्ह फिर नहीं रोहन, तुम बहुत कच्चे हो यार । औरतें ऐसी ही होती है
: मतलब ( मै थोड़ा उलझा )
: पब या बार में कभी लड़की को खरीदा है एक रात के लिए
मै बस मुस्कुराया और अमर को उसका जवाब मिल गया
: तुम यार बहुत पीछे हो आगे बढ़ो , मुंबई में एक कसीनो है , उस कसीनो में लड़किया खड़ी रहती है और कस्टमर छल्ला फेक कर अपनी मनपसंद लड़की चुनते है अगर किसी लड़की को तुमने छल्ला पहनाया तो उसके लिए तुम पे करो और एक रात के लिए वो तुम्हारी । फिर वो किसी और की तरफ नहीं देखती बस उसी को ध्यान देती है जिसने उसके लिए पैसे दिए है ।
अब मुझे थोड़ा समझ आने लगा
: लेकिन ये मिली कहा आपको
: मै जब अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद यहां लखनऊ के अपनी कंपनी खोलने की जिद पापा से की तो मम्मी को बहुत फिकर थी मेरे खाने पीने का ख्याल कौन रखेगा और यहां अकेले रहना मेरे लिए सही नहीं था क्योंकि पापा का बिजनेस मुंबई में सेट था । मै अपने बदौलत कुछ करना चाहता था इसीलिए यहां मुझे शुरुआत करना सही लगा क्योंकि मेरी बेसिक पढ़ाई भी लखनऊ में हुई थी और गांव भी इसी जिले था । फिर मम्मी ने पापा से बात कर गांव से हमारे घर की देख रेख करने वाले दो लोगों को बुलाया । उसमें एक था कालीचरण और दूसरी थी शिला । कालीचरण शीला का देवर था और इनका यही अफेयर शुरू हो गया । शुरू में मैने इग्नोर किया और फिर एक रोज मैने शीला को टिकटिक पर रिल बनाते देखा । कालीचरण अक्सर चौकीदारी और सब्जियां लाने , गाड़ी चलाने का काम देखता और शीला मेरे कपड़े बिस्तर और खाने का ध्यान रखती ।
मै बड़े गौर से सुन रहा था और हम टैरिस पर आ गए थे
: रहते हुए धीरे धीरे मेरी नजर शीला की गदराई जवानी पर गई , कभी कपड़े धुलते हुए उसके गिले ब्लाउज तो कभी सफाई करती हुई उनकी गदराई जांघें । फिर एक रोज मैने उसे बिना ब्लाउज के वीडियो बनाते देखा , पहले लगा कि वो वीडियो काल पर है लेकिन फिर समझ आया कि फेम की चाह में वो भी इस ट्रैप में झांसे में फंस गई है । पारदर्शी साड़ी में झांकती छातियां ... उसी रोज मैने उसकी इंस्टा प्रोफाइल खोज निकाली और देखा तो अभी तीन साढ़े तीन हजार फॉलोवर थे , लेकिन विडियोज एक से बढ़ कर एक । कोई नहा कर तौलिए में तो कोई ब्रा और साड़ी में । समझ आ गया कि इस कलाकार के हुनर को निखराना पड़ेगा ।
अमर के शब्दों से मै मुस्कुराया
: फिर मैने उसे दिखाना शुरू किया मै उसे पीछे हूं और वो भी बचने लगी , मैने कालीचरण से कहलवाया थोड़े बहुत ड्रामे के बाद वो तैयार हुई और फिर मैने उससे साझा कि अपनी फैंटेसी , पहले तो वो मना कर दी लेकिन जब मैने उसके बच्चे की पढ़ाई और तन्खाह 2 गुना करने की बात की तो मान गई । उसके साथ में अगर मै उसके साथ फिजिकल होता हूं तो उसके अलग चार्ज मिलते है उसे ... चाहिए क्या था उसको वो मान गई । फिर थोड़ी ट्रेनिंग और भाषा पर काम किया । थोड़ी एडल्ट फिल्म दिखाई और उसकी कला निखर कर आज तुम्हारे सामने है ।
: हीही
: सच में उधर देखो
अमर ने दरवाजे की ओर दिखाया तो सामने सच में शीला खड़ी थी अपनी उसी ड्रेस में , देखते ही लंड अकड़ गया
: उम्हू बिना पैसे के सोचना भी मत ( वो बोला )
मै हस पड़ा
: अगर तुम चाहो तो आज रात के लिए मै पैड कर सकता हूं तुम्हारे लिए
मै अमर का ऑफर समझ गया था और मुस्कुराने लगा
: अरे यार मजाक कर रहा हूं , वो मना नहीं करेगी
एक पल को मेरी जीभ से लार लपकी लेकिन मै खुद को रोक लिया
तभी अमर का फोन बजा
: हाय जानू कहा हो
: बोर हो रही हूं और क्या
: तो कल सुबह आजाऊ पिक करने तुमको
: का सच में ?
: हा ... इस बार मेरे साथ रोहन भी होगा
उसने मेरी ओर इशारे से पूछा कि चलूंगा न और मैने हा कर दी क्योंकि कल सारा दिन बोर होने से बेहतर है कि मै इन्हीं लोगों के साथ समय बिताऊं
: ओके ओके , तो रोहन अगर साथ है तो क्या शीला?
: ओह डियर, ही इज ए मैन, मेरी संगति में है सेफ
: आपके साथ है तो ही कह रही हूं ,चलो ओके इंजॉय करो आप लोग और शीला को कहना कि अपने बोनस के चक्कर में मेरे माल पर हाथ नहीं मारे समझे , सुबह मिलती हूं
: ओके डार्लिंग , सी यू बाय
: लव यू हीही बाय
फोन कट हुआ और फिर हम लोग थोड़ी बातें करते हुए नीचे आए , आगे हमारे शिला सीढ़ियों से नीच उतर रही थी ,
उसके मोटे चर्बीदार चूतड़ों की थिरकन देख कर लंड खूब फड़क रहा था ।
फिर हमने डिनर किया ... अंतिम बार के लिए अमर ने मुझसे पूछा शीला के लिए लेकिन मैने मना कर दिया । कारण था कि मै और बहकना नहीं चाहता था । मै मेरे तैयार कमरे में आ गया और अमर शीला के साथ अपने कमरे में चला गया।
उसने दरवाजा खुला छोड़ दिया था कि अगर मूड बदले तो अंदर आ सकता हूं
लेकिन मै अटल रहा
शीला की चीखे पूरे घर में गूंजती रही
मैने मेरी सोना से बात की फोन पर , कोई और दिन होता या वक्त होता तो जरूर अपनी जान से रोमांटिक होता लेकिन हालही में जो हुआ उसको सोच कर हिम्मत नहीं बनी कि सोना से कुछ रोमांटिक बात करूं या वीडियो कॉल पर कुछ दिखाने का कह सकूं और वो भी शायद मेरी दहलीज समझ रही थी ।
खैर मै वापस सो गया
अगली सुबह मै और अमर निकल गए , बबली दीदी को पिक अप करने के लिए
रास्ते में थोड़ी बातचीत रही और फिर 3 घंटे के लंबे सफर के बाद फाइनली हम लोग बबली दीदी के दिए लोकेशन पर पहुंच ही गए ।
वेन्यू के बाहर खड़े होकर गेस्ट और दूसरी औरतों लड़कियों को निहार रहे थे।
थोड़ी देर बाद वो दिखाई दी
: ओह्ह्ह्ह गॉड लुक ऐट हर सीई क्या बवाल लग रही है ... उफ्फ ये लड़की न रोहन ( अमर ने मुझे बबली दीदी दी को दिखाया , जो सामने से हमारी ओर आ रही थी , एक आरामदायद टॉप और लूज सॉफ्ट पैंट में जो उनके जांघों पर चिपकी हुई थी ।
: अकेली आ रही है ? चांदनी कहा है ? ( एकदम से मुझे ख्याल आया )
: वो तो गई ट्यूजडे को ही ( अमर ने कैजुअली बोला )
: कहा ?
: कैनेडा
: कैनेडा ? , एक मिनट लेकिन वो कैनेडा क्यों जाएगी ?
: यार उसका फ़ियांसे तो वही प्रैक्टिस करता है अपनी डॉक्ट्रेट की
: लेकिन उसने तो कुछ और ...
: ओह तेरी कही ... ( अमर आंखे बड़ी कर मुझे देखा और मुस्कराया उसे लगा कि मै चांदनी को पसंद तो नहीं कर रहा था )
: नहीं यार ... दो दिन से उसके मैसेज नहीं आए .. उसने बताया नहीं
अमर बोलने जा रहा था कि तभी
: हाय ब्वॉयज ( दीदी लहराती हुई हमारी ओर आई और फिर पहले वो अमर से गले मिली और फिर मुझसे )
सामने से उसके गुदाज मुलायम चूचे का स्पर्श मिला सीने पर , जी में आया कि कस ही लूं एकदम फ्रंट टाइट हग
: कैसी हो जान
: ओह्ह्ह पूछो मत यार ... बहुत बोरिंग उम्मम थक गई हूं बस चलो यहां से
फिर अमर ने उसकी ट्रॉली बैग गाड़ी में रखी पीछे और वो आगे बैठ गई मै पीछे चला गया । गाड़ी अमर चलाने लगा
: हम्म्म तो आज बड़े साहब को फुर्सत है उम्मम
दीदी ने मुझे ही ताना मारा था लेकिन मै बस मुस्कुराया । मेरे जहन में कुछ चीजें नाच रही थी
" चांदनी !! , उस लड़की ने मुझसे कहा कि बबली दीदी के लिए रिश्ता आया था कैनेडा से और लड़का डॉक्टर है और खुद उससे शादी करने के लिए चली गई , दिमाग उल्टा हुआ पड़ा था और फिर उसने अमर के बारे में भी कितना कुछ झूठ बोला
: क्या हुआ रोहन बाबू क्या मन उदास हो गया
: हा रोहन क्या हुआ ( दीदी बोली)
: अह कुछ भी नहीं ( फीकी मुस्कान से मै बोला )
: अरे यार हाहाहाहा ( अमर खिल कर हंसा ) बोला था मैने इसको कि बहुत शरारती लड़की है बच कर रहना हाहाहा काट गई लगता है हीही
मै फीकी मुस्कुराहट से शर्मिंदगी महसूस कर रहा था , दीदी मेरे उतरे हुए चेहरे की हकीकत समझ रही थी
: क्या तुम भी चुप रहो
: रोहन तुम ठीक हो न
: हा दीदी , बस वो एक एकदम से गायब हो गई और बोली भी नहीं मैसेज भी नहीं की , मुझे लगा कि आपके साथ होगी वो भी
फिर थोड़ी देर हमारी नॉर्मल बातें चल रही थी
फिर दीदी ने कहा कि उन्हें भूख लग रही है और किसी अच्छे रेस्तरां पर गाड़ी लगाने को कहा
हाइवे साइड पर गाड़ी लगी और हम लोग बैठ एक जगह , फिर अमर खाने का ऑर्डर देने और फ्रेश होने बाथरूम चला गया
मै मोबाइल पर सोना को हैलो हाय कर रहा था तभी दीदी ने वापस चांदनी की बात छेड़ दी
: मैने तुझे बोला था न उसके चक्कर में मत पड़ना
: अरे नहीं दीदी ( मै मुस्कुराया ) अब क्या बताऊं उसने मुझे आपके और जीजू के बारे में ऐसी बाते बताई और अब देख रहा हूं तो सब अलग
: क्या बोली थी वो ( दीदी सीरियस हुई )
: अह छोड़ो न दीदी
: बोल रोहन , बता मुझे
: अह उस रोज जब हम लोग मूवी के लिए गए थे साथ में उस दिन हम दोनो रूम पर आए थे
: फिर ?
: फिर उसने कहा कि अमर मतलब जीजू ने उससे आपको छीन लिया है, आप जीजू के उसके पीछे पागल हो और जीजू भी बहुत खराब किस्म के है ।
: किसके पीछे पागल हूं ?
दीदी की बात पर मुझे हसी आई
: बोल न !!
: वो उनके बड़े पेनिस के लिए
दीदी आंखे बंद कर झलझलाई
: फिर ? और क्या बोली वो कुत्ती
: उसने कहा कि आपके लिए इतना अच्छा कैनेडा सा डॉक्टर का रिश्ता आया है और आप उस चूती... मतलब जीजू के लिए सब छोड़ रही हो । वो बहुत घटिया है और उसके साथ सेक्स करना चाहते है और उनका सपना है कि वो आपके और चांदनी दोनों के साथ थ्रीसम करे
दीदी अपने बाल खींचले ऐसी हो गई थी
: ये बहनचोद कमिनी , शुरू से ही ये अमर के पीछे थी , छुप छुप कर देखती थी हम दोनो को वो सब करते । उसी ने कहा था कि कैनेडा जाने से पहले बस छोटी ग्रुप पार्टी रखना चाहती थी , अमर का भी मन था लेकिन मुझे सही नहीं लग रहा था और इसीलिए मैने तुझे भी बुलाया था कि तू होगा पार्टी में तो ऐसा कुछ नहीं होगा ।
दीदी ने सारी बात साफ कर दी लेकिन अब समझ नहीं आ रहा था कि उसे ऐसा करके मिला क्या
यही सवाल मैने दोहराया दीदी से और तभी पीछे से अमर आया
: मै बताता हूं ( अमर बोला )
उसके आते ही हम दोनो सतर्क हो गए
दीदी ने आंखों से इशारा कर अमर को मना किया लेकिन अमर नहीं माना
: अरे यार बताने दो , अब हम दोनो buddy है क्यों रोहन
मै बस मुस्कुराया
: याद है तुम्हे जब हम पहली बार मिले तो मैने तुमको क्या कहा था कि ये बहुत शरारती लड़की है इससे ...
: बच कर रहना ( मै बुदबुदाया)
: हां ( अमर बोला ) भाई मेरे उसे जो चाहिए था असल उसे तुझसे मिला नहीं
: क्या ? ( मै चौक कर बोला , क्योंकि मेरे दिमाग में कुछ गलत ही आ रहा था )
: ढेर सारी अटेंशन और जो तुम सोच रहे हो वो भी हीही ( अमर मस्ती में हंसता हुआ बोला और दीदी उसे घूर रही थी )
: कमान बेबी , अब मजे मत लो उसके
: हीहीही , यकीन नहीं करोगी बेबी ये बन्दा पता नहीं कैसे कंट्रोल कर जाता है । फर्क ही नहीं पड़ता... कल इसके सामने ही शीला टहल रही थी .. कोई और होता तो दबोच लेता लेकिन
: हा सब तुम्हारी तरह ठरकी नहीं होते समझे और अब बस करो ( दीदी बोली )
: सॉरी रोहन हाहाहाहाहा ( अमर हस कर बोला )
: इट्स ओके ( मै बस फीकी मुस्कुराहट से बोला )
फिर हमने खाना खाया और उस दौरान मुझे लगातार चांदनी द्वारा ठगे जाना अखरता रहा .. आखिर इस तिरिया चरित्र के कितने रूप और देखने बाकी होंगे ।
फिर मै और अमर उठ कर काउंटर की ओर गए
: देखो यार नाराज मत होना लेकिन सच में तुम इतने भोले बन का मत रहो , दुनिया बहुत कमीनी है थोड़ा तैयार करो खुद को
: हम्म्म
: वैसे ड्राइव कर लेते हो ?
: हा क्यों ?
: अह अगर थोड़ा ड्राइव कर लोगे तो ... समझ रहे हो न ( अमर मुस्कुरा कर अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरता हुआ बोला )
मै उसकी शरारती मुस्कुराहट समझ रहा था
: लेकिन दीदी मानेगी ? उम्मीद कम है !!
: डॉन्ट जज बुक बाय इट्स कवर बॉय हाहाहा , देखो साफ साफ कहूं तो मै बहुत फ़ैसिनेट किस्म का आदमी हूं और सेक्सुअल एडवेंचर मुझे बहुत पसंद है । लॉन्ग ड्राइव तो हम दोनो का फेवरेट है सीईईई तो अगर तुम्हे ऐतराज न हो तो ?
मै थोड़ी देर चुप रहा तो वो खुद ही बोल पड़ा
: ओह कमान रोहन उसे भी पता है कि तुम उस रात जाग रहे थे ,
मै मुस्कुराने लगा
: अह्ह्ह्ह फिर मुझे कोई दिक्कत नहीं ( मै मुस्कुरा कर बोला लेकिन अभी से मेरे मन में उत्तेजना ने जगह बना ली थी
: दैटश माय बॉय ( उसने मेरे कंधे थपथपाया फिर आगे बढ़ गया ) हे डार्लिंग पीछे आजाओ
: तो ड्राइविंग?
: रोहन है न ?
फिर बबली दीदी पीछे चली गई और फिर मै भी गाड़ी लेकर निकल गया एक 2 घंटे के लंबे सफर के लिए
जारी रहेगी
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