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Incest आह..तनी धीरे से.....दुखाता.

Lovely Anand

Love is life
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आह ....तनी धीरे से ...दुखाता
(Exclysively for Xforum)
यह उपन्यास एक ग्रामीण युवती सुगना के जीवन के बारे में है जोअपने परिवार में पनप रहे कामुक संबंधों को रोकना तो दूर उसमें शामिल होती गई। नियति के रचे इस खेल में सुगना अपने परिवार में ही कामुक और अनुचित संबंधों को बढ़ावा देती रही, उसकी क्या मजबूरी थी? क्या उसके कदम अनुचित थे? क्या वह गलत थी? यह प्रश्न पाठक उपन्यास को पढ़कर ही बता सकते हैं। उपन्यास की शुरुआत में तत्कालीन पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सेक्स को प्रधानता दी गई है जो समय के साथ न्यायोचित तरीके से कथानक की मांग के अनुसार दर्शाया गया है।

इस उपन्यास में इंसेस्ट एक संयोग है।
अनुक्रमणिका
भाग 126 (मध्यांतर)
भाग 127 भाग 128 भाग 129 भाग 130 भाग 131 भाग 132
भाग 133 भाग 134 भाग 135 भाग 136 भाग 137 भाग 138
भाग 139 भाग 140 भाग141 भाग 142 भाग 143 भाग 144 भाग 145 भाग 146 भाग 147 भाग 148 भाग 149 भाग 150 भाग 151 भाग 152 भाग 153 भाग 154
 
Last edited:

yenjvoy

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सही बातें–

क्लिटोरिस मुख्य ऑर्गैज़्म का सोर्स है
हाँ, ये बिल्कुल सही है क्लिटोरिस में 10,000+ नर्व एंडिंग्स होती हैं और ज्यादातर महिलाओं लगभग 70-80% या उससे ज्यादा को ऑर्गैज़्म के लिए क्लिटोरल स्टिमुलेशन की ज़रूरत होती है। योनि से अकेले ऑर्गैज़्म सिर्फ 20-30% महिलाओं को होता है बाकी को क्लिटोरिस की मदद चाहिए।

फोरप्ले ज़रूरी है
हाँ, ज्यादातर महिलाओं को उत्तेजित होने में समय लगता है औसतन 10-15 मिनट या ज्यादा। बिना फोरप्ले के पेनेट्रेशन से ऑर्गैज़्म बहुत कम होता है अच्छा फोरप्ले किसिंग, टचिंग, ओरल आदि से ऑर्गैज़्म चांस बढ़ता है।

पुरुष का एवरेज इजैकुलेशन टाइम कम होता है
औसतन 3–5 मिनट, कई स्टडी में 5-10 मिनट के बीच, जबकि महिलाओं को ऑर्गैज़्म में औसतन 15 मिनट लग सकते हैं, ये असमानता सही है।

महिला का पूरा शरीर सेक्सुअली सेंसिटिव एरिया हो सकता है
रिसर्च दिखाती है कि महिलाओं में सेक्सुअली सेंसिटिव एरिया पुरुषों से थोड़े ज्यादा स्प्रेड हो सकते हैं जैसे गर्दन, कंधे, ब्रेस्ट्स आदि लेकिन पुरुषों का भी पूरा शरीर सेक्सुअली सेंसिटिव एरिया हो सकता है।

महिला ऊपर (woman on top) बेहतर हो सकती है
हाँ, कई स्टडी में ये पोजीशन महिलाओं के लिए बेहतर बताई गई है क्योंकि वो कंट्रोल कर सकती हैं एंगल, स्पीड, क्लिटोरिस पर फ्रिक्शन, इससे ऑर्गैज़्म चांस बढ़ता है

सेक्स सिर्फ प्रजनन नहीं, आनंद भी है
ये बिल्कुल सही फिलॉसॉफिकल और एक्सपीरियंस्ड बात है।

गलत बातें–

स्त्री का ऑर्गैज़्म योनि से कोई संबंध नहीं रखता
ये पूरी तरह गलत है। योनि से ऑर्गैज़्म होता है वेजाइनल ऑर्गैज़्म और क्लिटोरिस का इंटरनल पार्ट योनि के अंदर स्टिमुलेट होता है, बहुत सी महिलाएँ "ब्लेंडेड" ऑर्गैज़्म (क्लिटोरल + वेजाइनल) एक्सपीरियंस करती हैं योनि से इंडिपेंडेंट नहीं लेकिन रिलेटेड है।

क्लिटोरिस पुरुष के संभोग के मार्ग में नहीं आता
गलत, पेनेट्रेशन के दौरान क्लिटोरिस (खासकर इंटरनल पार्ट) स्टिमुलेट होता है और कई पोजीशन में एक्सटर्नल क्लिटोरिस भी रब होता है।

पुरुष का पूरा शरीर यौन-संवेदनशील नहीं होता; सिर्फ यौन अंग
ये मिथ है, रिसर्च (जैसे erogenous zone maps) दिखाती है कि पुरुषों और महिलाओं के एरोजेनस ज़ोन काफी समान है दोनों में गर्दन, कान, निप्पल्स, इनर थाइज़ आदि सेंसिटिव होते हैं महिलाओं में थोड़ा ज्यादा स्प्रेड हो सकता है।

ईसाइयों ने मिशनरी पोजीशन को प्रचलन में लाया, सुंदरता नीचे और जानवर ऊपर
ये भी मिथ है। मिशनरी पोजीशन बहुत पुरानी है प्राचीन ग्रीक, रोमन, इंडियन, चाइनीज़ आर्ट में मिलती है।

सम्मानित स्त्री कराहे नहीं, मुर्दगी रहे
ये कल्चरल/सोशल प्रेशर की बात है जो कई सोसाइटी में होती है लेकिन वैज्ञानिक/फिजियोलॉजिकल नहीं, ये ओवर-जनरलाइज्ड है। यहां आप अपनी आइडियोलॉजी थोप रहे हैं जिसपर मैं कोई कमेंट नहीं करना चाहता।
मैं सहमत हूं. स्त्रियों को आवाज नहीं करनी, सेक्स करते समय पाप वाली अनुभूति वगैरह ईसाई मिशनरियों के कारण नहीं है. हमारे यहां ज्वाइंट फैमिली में एक घर में सब रहते हैं और छुप कर करना होता है, बिना आवाज के. पर्दा वगैरह भी बाधक है.
ऑर्गेज्म भी clitoral और vaginal दोनों हो सकता है. Clitoris सिर्फ योनि के बाहर होता है ये भी गलत है और मेडिकल सायंस ने इसे साबित कर दिया है.
मुझे कई बार लगता है कि भारतीय सेक्स स्टोरी writers को सेक्स का ज्ञान नहीं होता, पोर्न और सुनी सुनाई बातों से अर्जित की हुई आधी जानकारी होती है. इसी लिये इंडियन पोर्न stories में महिलाएं फव्वारे समान इजैकुलेट करती हैं, उन्हें ass to vagina सेक्स करने से कभी UTI नहीं होता, lube का कोई कॉन्सेप्ट ही नहीं होता, etc
 
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