chapter 4
एक साल पहले पास्ट
अंजली उस समय 10 मे थी साहिल 9 मे था अंजली अपने मामा कुनाल के यहा आती है साहिल लेके आता है लेकिन साहिल एक दिन रहके अपने घर लौट आता है
अंजली जब पैदा हुई तब से जयदा तर अपने मामा कुनाल के यहा ही रही है बरे होने तक इस लिये अंजलि कुनाल मामा भांजी का रिस्ता बहोत दोस्ताना टाइप रहा है
यानी की साथ मे घूमने जाना मस्ती करना यहा तक अंजली कुनाल एक दूसरे के ऊपर बिस्तर पे लरते मस्ती करते इस दोरान कुनाल कई बार अंजलि के बरे चुचे बॉडी की गर्मी बुर की गर्मी बरी बरी गांड कहे तो सब कुछ फिल करके मचल जाता लेकिन भांजी है ये सोच गलत सोच को वही रोक देता
अंजली जयदा तर कुनाल के यहा बरी हुई तो जाहिर है कई दोस्त बने जिसमे एक लरका भी था जिसका नाम था अमर जो अच्छे घर का था
परोसी भी
अमर अंजली को अपने नीचे लाना चाहता था जिसके लिये अमर अंजली के पीछे परा रहता अंजली को भी ये एहसास था अमर उसके प्यार करता है
एक दिन अमर अंजली को अकेले देख परपोस् कर देता है अंजली जवान थी दोनों लम्बे समय से दोस्त थे तो अंजली के दिल मे भी अमर के लिये प्यार था बस अंजली हा कर देती है
अमर कितना कमीना था अंजली को नही पता था और ये प्यार अंजली को कहा किस दलदल मे लेके जाने वाली थी उसका भी अंजली को अंदाज़ा नही था
अंजली 4 दिन रहती है फिर अपने घर आ जाती है लेकिन फोन पे बातें होती रहती है एक महीने गुजर जाते है
और नतीजा अंजली अमर के प्यार मे दीवानी हो गई थी अमर इतना कमीना चालक था समय का इंतज़ार कर रहा था और वो आ गया था कियुंकी अब बातें खुल के होने लगी थी
रात 11 बजे
जहा सुमिता साहिल के लाइफ मे अभी तक बुरी किस्मत नही आई थी पर अंजली के आ गई थी
सुमिता साहिल सब से अंजान आराम से कमरे मे सो रहे थे वही अंजली अमर से फोन पे बातें कर रही थी
अमर - जान फिर कम आउंगी मुझे जी भर तुझे प्यार करना है
अंजली मुस्कुराते हुवे - अच्छा ही इतनी बेताबी ठीक नही है वैसे भी मेरा एक्जाम है इस महीने उसके बाद ही आ पाउंगी
अमर - अरे यार मे भी भूल ही गया था किया करू तेरे प्यार मे सब भूल जाता हु
अंजली सर्म से - झूठा
अमर मुस्कुराते हुवे - सुनो ना जान किया पहना है तुमने
अंजली - फिर सुरु हो गये
अमर - बताओ ना प्लेस
अंजली सर्म से - नाइट सूट
अमर - और अंदर मे
अंजली - छी गंदे नही बटाउगी
अमर - प्यार नही करती मुझे
अंजली - बहोत करती हु
अमर - तो बताओ ना
अंजली सर्म से धीरे से - बिकनी पैंटी अब खुश
अमर मुस्कुराते हुवे - कोन कलर की
अंजली सर्म से धीरे से - वो वो लाल
अमर - उफ बरे बरे चुचे को लाल बिकनी मे कैद करके रखा है हु
अंजली सर्म से लाल होके - छी बेसर्म गंदे
अमर हस्ते हुवे - दिखाओ ना
अंजली - ना बाबा सर्म आती है मुझे
अमर मुस्कुराते हुवे - अच्छा जी जब हमारी शादी होगी तब वो सब कैसे करोगी हा
अंजली सर्म से - तब का तब सोचेंगे
अमर - अरे यार दिखाओ ना प्लेस तुमने वादा किया था आज का
अंजली - अच्छा अच्छा ठीक है एक
अमर - ये हुई ना बात

अंजली सर्माते नइट सूट उपर करते हुवे अपने बरे बरे चुचे जो लाल बिकनी मे कैद थे उसे अमर को दिखाने लगती है अमर जैसे ही देखता है अपना लंड जोर से हिलाने लगता है हा अमर सुरु से ही लंड निकाल हिलाने मे लगा था जो अंजली को दिखा नही रहा था
अमर - मेरी जान उफ कितने बरे टाइट है तुम्हारे चुचे दबाने मे मजा आयेगा
अंजली नाइट सूट नीचे करके अमर को देख सर्म से - छी जब देखो गंदी बातें
अमर मुस्कुराते हुवे - जब गिर्लफ्रेंड इतनी खूबसूरत हो तो किया ही करे फिर अच्छा जान मेरी सासु मा ससुर साले साहब कैसे है
अंजली - सब अच्छे है और हा अपनी कोई तुम्हारा सासु ससुर साले नही है समझ गये शादी करोगे तब बनेगे
अमर मुस्कुराते हुवे - कर लेगे वादा जो किया है
अंजली सिर्यस् होके - पक्का ना धोका नही दोगे ना
अमर - तेरी कसम जान
अंजली खुश हो जाती है
फोन कट
अमर मुस्कुराते हुवे - शादी तुमने कोन करने वाला है मे तो तेरी लेना चाहता हु हा तू बहोत खूबसूरत है लेकिन मेरी शादी की बात बहोत बरे घर की लरकी से हो रही है अमीर घर का दमाद बनुगा ना की उस गरीब घर का
अंजली प्यार के दीवानी अमर के कमीने रूप को देख ही नही पा रही थी यही तो प्यार मे जयदा तर होता है लरकी को कमीने लरके उसकी बातें सब सच लगती है उन्हें ही अच्छा सच्चा मान उनकी बातों मे गिर जाते है
लेकिन जीतने अच्छे लरके होते है उन्हें लरकिया गिरे कमीने झूठे नजर आते है
खैर महीने गुजर जाते है अंजली के एक्जाम खतम हो जाते है और अंजली फिर अपने मामा के यहा जाने के लिये रेडी थी
साम 3 बजे
सुमिता अंजली के कमरे मे अंजली को देख जो बाल बना रही थी
सुमिता - मामा मामा करती रहती है यहा मे पापा भाई है पर नही इस मैडम का मन अपने मामा के यहा लगा रहता है
अंजली पीछे सुमिता को देख - मा मामा के बरे मे कुछ मत बोलिये मेरे प्यारे मामू बहोत अच्छे है मुझे बहोत प्यार करते है आपसे भी जयदा समझ गई आपको कही जलन तो नही होती
सुमिता मुह बना के - चल चल मुझे कियु जलन होगी तेरे मामू मुझे भी बहोत प्यार करते है कियुंकी मे उनकी छोटी बहन हो हु
अंजली हस्ते हुवे - समझ गई मा वैसे साहिल रेडी हुआ या नही
साहिल अंदर आते हुवे - हम लरके है नहाने रेडी होने के लिये 30 मिनट काफी है लेकिन आप को 2 घंटे कम पर जाते है
अंजली सुमिता को देख - मा देख सुन रही है मुझे ताना मार रहा है
सुमिता मुस्कुराते हुवे साहिल को देख - वैसे सही तो कहा मेरे बेटे ने
साहिल मुस्कुराते हुवे अंजली को देख - सुना ना
अंजली सुमिता को देख - सच बताना मा आप मुझसे जयदा इस शैतान को प्यार करती है ना
सुमिता दोनों को देख - हु ये सवाल का जवाब है मा के लिये बेटी हो या बेटा दोनों के लिये प्यार बराबर होता है अब चलो जाना नही है
अंजली साहिल - हा चलो
बाहर साहिल बाइक पे बैठ जाता है अंजलि भी सुमिता दोनों को देख - अच्छे से जाना साहिल बेटे तु तो आ जायेगा ना कल
साहिल सुमिता को देख - मा आपसे दूर रहने मेरा दिल नही लगता
सुमिता साहिल के गाल पे किस करते हुवे प्यार से - मेरा बच्चा कितना प्यार करता है मुझसे मेरा ख्याल रखता है, सुमिता अंजली को देख, और एक है ये छुट्टी मिलते ही मामा के यहा भाग जाती है
अंजली सुमिता को देख - बस करो मा बस ताना मारती रहती है आप
साहिल - अच्छा मा चलते है मे कल आ जाउंगा
सुमिता - ठीक है बेटा
साहिल निकल जाता है सुमिता दोनों को जाते देख मन मे - मेरे बच्चे अब बरे हो गये है शादी के लायक पहले अंजलि के लिये कोई लरका देखना परेगा
कुनाल के घर
साहिल अंजली 4 बजे के पास पहुँच जाते है अंदर कुनाल सुनीता बैठे बातें कर रहे थे
कुनाल साहिल अंजली को देख खरा होके खुश होके - देखो सुनीता हमारे भांजे भांजी आ गये
सुनीता खरी होके साहिल अंजली को देख मुस्कुराते हुवे - सही देख रही हु
तभी अंजलि तेजी से जाके कुनाल के गले लगते हुवे - मामू
कुनाल अंजली को बाहों मे कसते हुवे - मेरी प्यारी भांजी
साहिल सुनीता के गले लगते हुवे - मेरी प्यारी मामी
सुनीता साहिल को सीने से लगाये हुवे - मेरा प्यारा भांजा
अंजली कुनाल के बीच बहोत प्यार था और सुनीता साहिल के बीच
साहिल अंजली को देख - हु मेरी प्यारी भाभी मुझसे बहोत प्यार करती है मामा से जयदा
अंजली मुह बना के - मेरे मामू मुझे जयदा प्यार करते है मामी से जयदा
सुनीता कुनाल दोनों को लरते देख हसने लगते है
सच ये ना सुनीता कुनाल साहिल अंजली दोनों को बहोत प्यार करते है जब बात ये है अंजली कुनाल के नजदिक और साहिल सुनीता के
रात 9 बजे खाना पीने होने के बाद आगन मे बैठे सब बातें कर रहे थे सुमिता कुनाल से फोन पे बातें कर रही थी
सुमिता - भैया आपकी लाडली तो आपके पास ही रहने वाली है ख्याल रखना
कुनाल हस्ते हुवे अंजली को गोद मे बैठाये - चिंता मत करो गुरिया मे अपनी भांजी का अच्छे से ख्याल रखुंगा
राघव - साले साहब आपने तो मेरी बेटी पे जादू कर दिया है यहा से जयदा आपके यहा रहती है
कुनाल हस्ते हुवे - बहनोई जी मेने जादू नही किया प्यार है प्यार
राघव - समझ गया
सुमिता - भाभी कैसी है आप
सुनीता - अच्छी हु ननद जी आप सब कैसे है
राघव - अच्छे है मस्त है चल रही है लाइफ
सुनीता हस्ते हुवे - अच्छा है
बातें होने के बाद सब अपने कमरे मे चले जाते है
इस समय ऐसा था साहिल अंजली कम बातें करते साहिल का रिस्ता अपनी मा बहन पापा से उतना गहरा नही था मेरे कहने का मतलबyey है साहिल अपने मे रहता मा बहन पापा के साथ कम समय बिताता बातें करता
अंजली बिस्तर पे लेती थी बेताब थी अमर से बात करने मिलने के लिये तभी कुनाल आता है और अंजलि को बाहों मे लेके प्यार से देखते हुवे - मेरी भांजी तु नही होती तो मेरा दिल नही लगता है
अंजली कुनाल के सीने के समाते प्यार से - मुझे भी मामू आपके मामी के साथ रहना अच्छा लगता है
कुनाल अंजली को देख - छोटी सी थी अब देखो जवान हो गई अब तो मुझे अपनी प्यारी भांजी के लिये लरका देखना परेगा
अंजली सर्म से लाल होते हुवे - आप भी ना मामू
कुनाल हस्ते हुवे - सही तो कहा
कुनाल अंजली के होठों पे हल्का किस करते हुवे - गुड नाइट मेरी गुरिया
अंजली - गुड नाइट मामू
अंजली के होठो पे किस करना दोनों के बीच नॉर्मल है कुनाल के अंदर अभी तक अंजली को लेके कोई गंदा विचार नही था
कुनाल अपने कमरे मे आता है सुनीता कुनाल को देख - आ गये अपनी भांजी को आप बहोत प्यार करते है
कुनाल सुनीता के ऊपर आते हुवे सुनीता को देख - तुमसे भी तो करता हु अपनी बेटी को भी
सुनीता मुस्कुराते हुवे - अच्छा जी तो करो ना प्यार
कुनाल मुस्कुराते हुवे सुनीता को नँगा कर देता है सुनीता सिर्फ ब्लाउस मे थी - कर ही तो रहा हु जान

कुनाल खुद फिर नँगा हो जाता है और सुनीता के टाँगे फैलाये लेती थी कुनाल एक हाथ से बुर के फाके दूसरे हाथो से बुर मे लंड घुसा के के सुनीता के दोनों टैंगो को पकरे चुदाई करने लगता है सुनीता दर्द मजे मे - आह उफ एक बेटी हुई अब वो भी ससुराल चली गई आह उपर वाले ने मुझे दूसरा बच्चा कियु नही दिया आह

कुनाल चुदाई करते हुवे सुनीता को देख - फिर तुम इस टाइम इमोसनल बातें करने लग गई जो किस्मत मे वही मिलेगा ना हमने पूरी कोसिस की करते रहे नही हुआ तो अब हम कर भी किया सकते है
सुनीता दर्द मजे मे थोरा दुखी आवाज मे - उफ आह आप ने सही कहा
वही साहिल के घर सुमिता का बरा मन था चुदाई का लेकिन राघव सो गया था सुमिता नइटी उठा के बुर मे उंगली करते हुवे मन मे दुखी होके - पता नही आह उफ अब पति जी जयदा नही करते किया अब उमर के साथ उनका दिल नही करता
उंगली सुमिता के बुर के अंदर से पानी निकलने मे लगी थी उफ फूली मोती चमरे वाली काले बालों से ढकी बुर मे सुमिता उंगली करते जा रही थी सुनीता आह उफ करते तेजी से उंगली करते हुवे झर जाती है
सुमिता फिर आखे बंद करते हुवे मन मे - सायद अब चुदाई का सुख मिलेगा नही
कुनाल के घर साहिल के लाइफ मे राधिमा अभी नही आई थी इस लिये साहिल मस्त सोया हुआ था नींद ले रहा था वही कुनाल सुनीता की चुदाई करने के बाद मस्त सो गये थे
लेकिन अंजली अमर से बातें करने मे लगी हुई थी
अमर - मेरी जान आखिर तुम आ ही गई मुझे तुमसे मिलना है तुझे बाहों मे लेना है मे आता हु तुमसे मिलने
अंजली डरते हुवे - नही नही अमर कोई देख लेगा तो गजब हो जायेगा मुझे भी तुमसे मिलना है लेकिन कल अभी रिस्क है
अमर - रिस्क मे ही तो इस्क है मे आता हु दरवाजा खुला रखना मिलुगा जल्दी चला जाउंगा
अंजली डरते हुवे - लेकिन
अमर - उफ जान इतना भी मत डरो
अंजली - ठीक है जैसा तुम कहो
फोन कट
अंजली डरते हुवे मन मे - डर लग रहा है सब के होने के बाद भी अगर हम पकरे गये तो बवाल हो जायेगा भाई भी है
10 मिनट बाद कमरे मे अमर आता है जिसे देख अंजली खुश हो जाती है अमर अंजली को बाहों मे लेके - बहोत मिस किया जान
अंजली अमर की बाहों मे समाते हुवे - मेने भी जान

अमर अंजली के चेहरे को पकरता है और किस करने लगता है अंजली पहला किस पाके फिल करके मदहोस होने लगती है अमर किस करते हुवे मन मे - अब साली जल मे फस गई है मे जो कहुंगा करेगी
किस करने के बाद

अमर अंजली के गले गर्दन पे किस करने लगता है चूमने लगता है अंजली गर्म होके आह सिसकिया लेने लगती है अब तक अमर ने गंदी चुदाई की बातें करते हुवे अंजली के अंदर की प्यास को जगा दिया था
अंजली जोर जोर से सिसकिया लेके तरप् मचल रही थी

अमर जोस मे पागल होके अंजली के चूचे दबाने लगता है अंजली और जयदा जोर मे होस खोने लगती है जोर से सिसकिया लेते हुवे - उफ मा अमर मेरी जान अच्छा लग रहा है बताओ मेरे चुचे को उफ मा
अमर मन मे मुस्कुराते चुचे दबाते हुवे - हा मेरी रंडि इतनी मेहनत इस लिये तो किया था इस मोक्के को बनाने के लिये
अंजली जो पूरी गर्म होके सब भूल के मजे मे खोई थी तभी अंजली को एहसास होता है ये टाइम जगह सही नही है
अंजली अमर को दूर करके तेज ससे लेते हुवे - अमर ये जगह टाइम सही नही उफ बस बहोत कर लिया हमने अब तुम जाओ
अमर अंजली को देखते हुवे - ठीक है जान लेकिन वादा करो कल तुम मेरे घर आओगी और मेरे लंड को मुह मे लोगी देखो तुम ने ही कहा था करोगी अब मुकर नही सकती
अंजली सर्म से - अच्छा बाबा लुगी अब जाओ
अमर अंजली को किस करके - अच्छा जान गुड नाइट
अंजली मुस्कुराते हुवे - हु गुड नाइट जान
अमर चुपके से बाहर आके घर की तरफ जाते मुस्कुराते हुवे - साली जल मे पूरी तरफ फस ही गई अब मे जो कहुंगा करेगी पूरी दीवानी हो गई है मेरे प्यार मे
वही अंजली बिस्तर पे लेती अभी जो मजा हुआ जो एहसास मजा फिल किया उसी मे खोई थी
अंजली बुर पे हाथ रखते हुवे - उफ गीली हो गई है आह
अंजली नीचे से नंगी होके धीरे से बुर मे बीच वाली उगली अपनी सील पैक बुर मे अंदर घुसा के धीरे धीरे उंगली करते हुवे एक हाथ से अपने एक चुचे दबाते हुवे सिसकिया लेते - आह उफ अमर मेरी जानु तुमने मुझे उफ आह मा दीवाना बना दिया है उफ
अंजली की ये प्यास अमर का आना सब अंजली को एक दलदल मे ले जाने वाला था जिसका अंदाज़ा अंजली को नही था
सुबह 10 बजे
साहिल रेडी था जाने को सुनीता - मेरे बच्चे बाइक ध्यान से चला के जाना
साहिल सुनीता को गले लग - ठीक है मेरी प्यारी मामी
सुनीता मुस्कुराते हुवे साहिल के होठो के छोटा किस करते हुवे - हु
अंजली कुनाल को देख - मामू मुझे भी ऐसे ही किस करते है समझ गया
साहिल अंजली को देख - तो किया दीदी फ़िर लरना है किया मुझसे
कुनाल बीच मे हस्ते हुवे - बस बस जब देखो तब लरने लगते हो साहिल बेटा अच्छे से जाना तु गुरिया का लाडला है वो तेरे बिना एक दिन बहोत मुश्किल से रह पति है
साहिल मुस्कुराते हुवे - ये बात तो अपने सही कही मामू अच्छा मे चलता हु
साहिल घर के लिये निकल परता है
साहिल अपने गाव के पास वाले गाव से होते हुवे आ रहा था तो साहिल देखता है पेर के नीचे ठंडे वाली जगह पे एक लरकी साइकिल लेके खरी है और साहिल की तरफ ही देख रही थी

साहिल समझते हुवे मामला किया हो सकता है लरकी के पास अपनी बाइक रोक लरकी को जब देखता है तो साहिल देखता ही रह जाता है लरकी बहोत खूबसूरत थी काले कजराले नासिलि आखे गोरा चेहरा गुलाबी होठ हवा से लहराते काले बाल साहिल तो मानो अलग ही दुनिया मे हो दिल धक धक करने लगता है अंदर एक अलग एहसास चाहत अलग फीलिंग को साहिल पहली बार फिल करता है
लरकी साहिल को घुर के देखते हुवे - किया आप मेरी मदद करेगे
साहिल आवाज सुन होस मे आते हुवे जल्दी से बाइक से उतर - जी जी कियु नही इसी लिये तो रुका हु अभी करता हु
साहिल बिना लरकी के फिर देखे साइकिल का फसा चैन निकाल सही करके खरा होके लरकी को एक नजर देख - हो गया मे चलता हु
साहिल फिर सीधा बाइक तेजी से दोरा देता है और लरकी बस हैरान देखती रह जाती है
साहिल एक हाथ दिल पे रख - ये कैसी फीलिंग एहसास है उस लरकी को देखते ही मेरा दिल इतनी तेज कियु धरक् रहा था कई लरकिया देखी लेकिन इस लरकी को देखते ही पता नही मे उफ यार जाने दो
अलग मे साहिल लरकी के मामले मे अब तक नही परा इस लिये दूसरी साहिल लरकी से बात करने मे अच्छा नही है लरकी से साहिल दूर ही रहता है केह सकते है सर्माता भी है
लरकी साहिल को जाते देख मन मे - अजीब है पहले तो मुझे घूर घूर के एकटक देखे जा रहा था उसके बाद पता नही कियु उफ जाने तो मुझे किया लेकिन वो लरका बहोत हैंडसम था उसका मासूम चेहरा उसे देख मेरा दिल
लरकी अपने सर झटकते हुवे - अरे राधिमा तु किया सोचने लगी चल घर चलते है
बता हु राधिमा का कोई नही है लेकिन जब राधिमा छोटी थी यानी 6 साल की तक एक परिवार ने राधिमा को गोद ले लिया बहोत खूबसूरत अच्छी थी इस लिये
राधिमा जब घर आती है अंदर जाती है तो एक औरत राधिमा को गुस्से से देखते हुवे - कियु इतना लेत हुआ हा बोल कहा थी अब तक
राधिमा औरत को देख डरते हुवे - मा वो साइकिल का चैन उतर गया था तो देर हो गई
औरत राधिमा के गाल मे चाटा मारते हुवे गुस्से से - झुठ बोलती है अरे मेरी फूटी किस्मत जो तुझे लेके आई लरका लेके आती तो अच्छा था तेरी कम से कम सहारा तो बनता मेरे पति कि सब गलती है पता नही तुझे देख लेके आ गये अब मुझे सेहना परता है सब
राधिमा आसु लिये गाल मे हाथ रख नजरे नीचे किये खरी थी
कुनाल के घर
अंजली रेडी होके मस्त एक घर के बाहर खरी थी और वो घर पक्के मकान था दो मंजिला
अंजली घर को देखते हुवे मन मे - किया अमर के पापा मम्मी मुझ जैसे गरीब लरकी से अमर की शादी करायेंगे
जब अंजली सोचने मे लगी थी तब किस्मत का खेल देखो कुनाल साइकिल से घर जा रहा था तो उसकी नजर अंजली पे पर जाती है अमर का घर रोड साइड गाव से थोरा हट के खेतो मे था
कुनाल साइकिल दूर रोक अंजली को देखते हुवे मन मे - ये अंजली अमर के घर के बाहर कियु खरी है
तभी कुनाल देखता है अंजली अंदर जा रही है ये देख कुनाल मन मे - अमर तो हमारे घर आता ही रहता है दोनों अच्छे दोस्त है जनता हु लेकिन कुछ फिर भी अंजली बिना बताये कभी कही नही जाती है
कुनाल को कुछ गर्बर् का एहसास होता है इस लिये कुनाल घर के बाहर साइकिल लगाके दरवाजे के पास जाके खोलता है तो दरवाजा खुल जाता है कुनाल होल मे था
अमर के पापा और कुनाल की दोस्ती थी इतनी भी अच्छी नही पर कुनाल कुछ बार आ चुका था और अमर के पापा को अच्छे से पता था उसका बेटा अमर अंजली दोस्त है
कुनाल चारों तरफ देखता ही कोई दिखाई नही देता कुनाल नीचे सारे कमरे चेक करता है कुछ खुले कुछ बंद थे लेकिन अंजली अमर नही दिखे
कुनाल उपर वाले कमरे मे जाता है चार कमरे मे कुनाल जब बीच वाले कमरे मे जाता है तो दरवाजा बंद था कुनाल पास वाली खिरकी के पास जाता है जो खुला था किस्मत से
तभी कुनाल को अंदर से आवाजे अमर अंजली की आने लगती है कुनाल हैरान शोक मे अंदर देखता है तो कुनाल की आखे फैल जाती है पूरा शोक मे हिल जाता है

अंजली के ऊपर अमर लेता किस होठो पे गर्दन पे किये जा रहा था और अंजली तरप् मचल के जोर जोर से सिसकिया लिये जा रही थी
अमर किस करते हुवे - जान मेरी बीवी बनके रहोगी या मेरी रंडि
अंजली गर्म होके मदहोस मे - आह मेरे बाबू तुम जैसे रखोगे मे रहूगी

अमर गर्दन के किस करते हुवे - मे तुझे रंडि की तरह चोदुगा तेरी बुर से कई बच्चे निकालूँगा बोलो मेरी रंडि बनोगी
अंजलि प्यार मे अंधी होके जिस्म की आग मे पागल होके सिसकिया लेते हुवे - उफ बाबू हा मे तेरी रंडि हु जितना चोदना है मुझे चोद के बच्चो की मा बना दो आह अमर मेरी जान उफ मे तरप् रही हु
अमर अंजली को देख - बहोत आग ही तेरे अंदर
अंजली नासिलि आखो से देख - बहोत है तूने ही जगाया है
अमर मुस्कुराते हुवे - पहले अपने मस्त चुचे दिखाओ फिर लंड चुसना है मेरी रंडि
अंजली बैठ के अमर को देखते हुवे पागल जोस मे - हा मे तेरी रंडि लुगी अपना लंड मुह मे उफ
अमर मुस्कुराते हुवे मन मे - साली देखो तो कितनी गर्म हो गई है आज तभी सिल तोर ही दूँगा
अमर मुस्कुराते हुवे - तो दिखाओ ना अपने चुचे rha नही जाता
अंजली सर्म जोर मदहोस होके अपने टिसर्ट उपर उठा देती है और बस अंजली के बरे बरे गोरे काले निपल वाले चुचे नंगे अमर के समाने थे जिसे दो लोग अमर कुनाल देख पागल हो जाते है

कुनाल खिरकी से अंजली अपनी भांजी के बरे गोरे काले निपल वाले इतनी टाइट मस्त चुचे देख पागल होके - उफ कितने मस्त चुचे है मेरी भांजी के बिकनी पहन के नही आई ही इस लिये टिसर्ट उठाते ही दोनों चुचे नंगे बाहर आ गये एक मिनट कई बार मेने अंजलि को जब बाहों मे लेता था तू फिल होता था मुझे अंदर बिकनी नही है जब भी अंजली आती है रोज मे इसी मस्त चुचे को सीने पे फिल करता था अब देख रहा हु ये खजाना मन गये भांजी तु तो मस्त है
तभी कुनाल मन मे - मे ये किया सोच रहा हु ये गलत है
दूसरा मन - गलत नही है कुनाल तेरी भांजी जवान है उसके अंदर बहोत आग ही देख कैसे अपनी आग बुझाने अपनी सिल तोरवाने आई है तू तो अच्छे से अपनी भांजी के चुचे बुर की गर्मी कई बार फिल करके तेरे मन में भी कई बार गंदे विचार आये थे देख अब मोक्का है ये मोक्का तेरे किस्मत मे दिया है जाने मत दे फायेदा उठा इस कमीने को रोक और तु सिल तोर अपनी भांजी की बुर का
पहला मन - नही कुनाल ऐसा मत कर ये तेरी गुरिया की बेटी है जिसे तूने अपनी बेटी की तरह पाला प्यार दिया है उसके बरे मे गलत मच सोच बस जाके बचा रोक इतना ही
कुनाल अपना सर पकर अदिति के मस्त चुचे को देख मन मे - हा कई बार जब मे अंजली को बाहों मे लेता हु बिस्तर पे उसके उपर होता हु तो उसकी टाइट गर्म बुर की गर्मी सीने पे ये बरे चुचे फिल करके कई बार मे पागल होके सोचे बगैर नही रह पता था लेकिन अब जब मे अपनी भांजी का ये रूप गंदी बातें उसके नंगे चुचे देख रहा हु तो अब रुलना मुश्किल है मुझे मोक्का मिला है जो किस्मत ने मुझे दिया है ऐसे ही जाने नही दुगा हा मे ही सिल तोऊगा अपनी भांजी की
कुनाल मन बना चुका था असल में कुनाल के अंदर तो पहले से ही अंजली की जवानी देख गलत विचार आते रहते थे जाहिर है इतना चिपक के लेतेगे बातें करेगे तो होगा ही लेकिन भांजी है सोच मन झटका देता लेकिन अब मोक्का था और कोई भी इंसान को जाने नही देता
कुनाल जल्दी से जाके दरवाजा कटखटाटा है अंदर अमर अंजली हैरान शोक डर जाते है
अंजली जल्दी से टिसर्ट पहन अमर को देख डरते हुवे - तुमने तो कहा था कोई नही है अंकल ऑन्टी साम को आयेगे
अमर डरते हुवे - सही कहा था एक काम करो बेड के पीछे छुप जाओ मे देखता हु
अंजलि बेड के पीछे छुपते हुवे - ठीक है
अंजली मन मे डरते हुवे - कहा फस गई प्लेस पकरी ना जाऊ
अमर दरवाजा जाके खोलता है सामने कुनाल को देख अमर की फट जाती है अमर कपते हुवे - चाचा आप
अंजली जैसे ही देखती है अंदर आने वाला उसका मामा ही तो डर के कापने लगती है
कुनाल अमर के गले को पकर गुस्से से - तेरी ये हिम्मत तु मेरी भांजी के साथ गलत करे
अंजली समझ जाती है उसके मामू ने सब देख लिया है लेकिन देखती है कुनाल अमर के गले को पकरी h तो जल्दी से बीच मे आके डरते हुवे - मामू प्लेस अमर को मत मारो इसमें मे अमर से प्यार करती हु
अमर की हालत खराब हो रही थी कुनाल अमर के गले को छोर अंजली को देखता है अंजली डरते नजरे नीचे कर लेती है
कुनाल अंजली को देख - मेरी बेटी जैसी है मेरी गुरिया की बेटी मेरी गुरिया जैसी लेकिन खैर मे तेरी बात सुनिगा फिर देखेंगे चलो मेरे साथ
कुनाल रास्ते मे अंजली से - मामी को पता ना चले तु मेरी बेटी जैसी है बहोत प्यार से पाला बरा किया है इस लिये रात आराम से बात करेगे
अगर तेरा प्यार सच्चा है अमर भी तुझसे बहोत प्यार करता है तो मे सोचुगा
कुनाल कि बात सुन अंजली हैरान के साथ खुश होके - सच मामू
कुनाल मुस्कुराते हुवे - हा

pic gif बिना update देना मुझे खुद अच्छा नही लगता लेकिन तभी मे लागता हु जब असली कहानी चल रही होती है तो समझ गये होगे जैसे अब लगेगी हर वो सीन पे जहा pic gif लगाना चाहिये
मिलते है



