- 196
- 283
- 79
विशाल के हाथ कड़क कठोर उन्नत यूरोजो पर कसे हुए थे. .. और शरारती आंखे सिर्फ उस दरार का दीदार कर रही थी . . जो दोनों पहाड़ों के बीच में था . . .
विशाल चाहता तो अभी के अभी संजाना रानी को वापस पटक के उस पर हावी हो सकता था . .लेकिन उसे भी मजा आ रहा था एक खूबसूरत औरत के नीचे पड़े रहना और औरत भी ऐसी वैसी नहीं बल्कि उसके माँ की उम्र की और ऑफिस की बॉस . . .
उधर संजाना पूर जोर कोशिश कर रही थी अपने हाथ, के बंधन खोलने को . लेकिन कामयाबी कहा मिलने वाली थी . . मजा उसे भी आने लगा था इस खेल का आखिर खेल था ही इतना मजेदार.
और मजेदार हो भी क्यूँ ना एक तरह उसके जैसी 40 साल की नौसिखिया खिलाड़ी और दुसरी तरफ एक 23 साल का युवा और अनुभव से भरपूर खिलाड़ी . .
ये बात तो संजाना जान चुकी थी कि जितनी बार उसने Life के 40 सालों मे Sex किया होगा . . उनकी ल़डकियों को चोद चुका होगा ये चौदू विशाल साला जैसा नाम वैसा ही शरीर और वैसा ही हथियार . . एक दम विशाल
. . .
लेकिन कहते है ना स्त्री कहाः हार मानतीं है . . और संजना ने भी गर्दन छोड़ कर होंठो जे तरह रुख किया और मोटे मोटे होंठो से विशाल के होंठो पर प्रहार किया और निचले होंठ को जकड़ लिया . और चूसने लगी . .
उम्म उम्म .. आह तेरे होंठ तो ल़डकियों से भी मीठे है . रे
उम्म .. कहें तुम टेस्ट करती रहती हो क्या ल़डकियों के होंठ .. . . संजू रानी तुमसे ये उम्मीद नहीं थी . . . तुम लेस्बियन भी हो आह . .
तेरी तरह छिनाल नहीं हू समझा . . . ये सब काम तू ही करते रहता है .. उम्मा आह काच्च्आ, और चुसते चुसते संजना ने विशाल के होंठ काट लिए हल्के से और विशाल के चीख निकलने से पहले ही फिर से उसके दोनों होंठ पर संजना ने अपने होंठ जमा दिए . .
क्यूँ मेरे बाबु मजा आ रहा है ना, संजू रानी के होंठो का . . उम्म्व्ह अम्मह्म्म, बहुत बोल रहा था ना आप के होंठ रसगुल्ला है मैडम अब ले रस . . उम्म्व्म आम्ह्म्म काच्च्आ . . . .
आअ..हा काटो जिन रानी . . . आह ..
तू है ही इतना रसीला मेरी जान की तुम्हें तो मैं चबा डालूंगी . . . काच्च्य उम्मा . होंठ बचे तो गालों का नंबर लग गया . . .
आह मेरी रानी आराम से . . . तुम तो चूमने चाटने के बाद काटने भी लगी शैतान बिल्ली की तरह . . और जो चाटने वाली चीज है आह ह .. ईइइइइहह्ह माअइईई .. उसको कुछ कर ही नहीं हो . . उसके ऊपर तो बैठी हुयी हो .. ..
संजना भी मस्ती से नितंबों को हिला हिला कर जींस में कैद उस शैतान घोड़े को उतावला कर रही थी .. क्यूँ सीधे सीधे बोल ना कहा बैठी हू . . . . .. इतने में ही अम्मा याद आ गयी .. तू जो रात भार कर्ता है अपनी अम्मा की उम्र की औरत के साथ उसका क्या .
विशाल अपने हाथ को यूरोजो से हटा कर एक हाथ संजना के नितंब पर रखता है और दूसरे हाथ से साया के भीतर डाल कर अपने लंड को एडजस्ट करने लगता है और एक जोरदार Thappad ज़द देता है संजना के gaand पर . . .
संजना के मुँह से एक चीख निकलती है .निकले भी क्यूँ ना। मजबूत बॉडी बिल्डर के हाथ का प्यार भ भरा थप्पड भी काफी होता है रुलाने के लिए और इस बार तो जान बूझ कर लगाया लगाया गया था शरारत वस . . .
विशाल चाहता तो अभी के अभी संजाना रानी को वापस पटक के उस पर हावी हो सकता था . .लेकिन उसे भी मजा आ रहा था एक खूबसूरत औरत के नीचे पड़े रहना और औरत भी ऐसी वैसी नहीं बल्कि उसके माँ की उम्र की और ऑफिस की बॉस . . .
उधर संजाना पूर जोर कोशिश कर रही थी अपने हाथ, के बंधन खोलने को . लेकिन कामयाबी कहा मिलने वाली थी . . मजा उसे भी आने लगा था इस खेल का आखिर खेल था ही इतना मजेदार.
और मजेदार हो भी क्यूँ ना एक तरह उसके जैसी 40 साल की नौसिखिया खिलाड़ी और दुसरी तरफ एक 23 साल का युवा और अनुभव से भरपूर खिलाड़ी . .
ये बात तो संजाना जान चुकी थी कि जितनी बार उसने Life के 40 सालों मे Sex किया होगा . . उनकी ल़डकियों को चोद चुका होगा ये चौदू विशाल साला जैसा नाम वैसा ही शरीर और वैसा ही हथियार . . एक दम विशाल
. . .
लेकिन कहते है ना स्त्री कहाः हार मानतीं है . . और संजना ने भी गर्दन छोड़ कर होंठो जे तरह रुख किया और मोटे मोटे होंठो से विशाल के होंठो पर प्रहार किया और निचले होंठ को जकड़ लिया . और चूसने लगी . .
उम्म उम्म .. आह तेरे होंठ तो ल़डकियों से भी मीठे है . रे
उम्म .. कहें तुम टेस्ट करती रहती हो क्या ल़डकियों के होंठ .. . . संजू रानी तुमसे ये उम्मीद नहीं थी . . . तुम लेस्बियन भी हो आह . .
तेरी तरह छिनाल नहीं हू समझा . . . ये सब काम तू ही करते रहता है .. उम्मा आह काच्च्आ, और चुसते चुसते संजना ने विशाल के होंठ काट लिए हल्के से और विशाल के चीख निकलने से पहले ही फिर से उसके दोनों होंठ पर संजना ने अपने होंठ जमा दिए . .
क्यूँ मेरे बाबु मजा आ रहा है ना, संजू रानी के होंठो का . . उम्म्व्ह अम्मह्म्म, बहुत बोल रहा था ना आप के होंठ रसगुल्ला है मैडम अब ले रस . . उम्म्व्म आम्ह्म्म काच्च्आ . . . .
आअ..हा काटो जिन रानी . . . आह ..
तू है ही इतना रसीला मेरी जान की तुम्हें तो मैं चबा डालूंगी . . . काच्च्य उम्मा . होंठ बचे तो गालों का नंबर लग गया . . .
आह मेरी रानी आराम से . . . तुम तो चूमने चाटने के बाद काटने भी लगी शैतान बिल्ली की तरह . . और जो चाटने वाली चीज है आह ह .. ईइइइइहह्ह माअइईई .. उसको कुछ कर ही नहीं हो . . उसके ऊपर तो बैठी हुयी हो .. ..
संजना भी मस्ती से नितंबों को हिला हिला कर जींस में कैद उस शैतान घोड़े को उतावला कर रही थी .. क्यूँ सीधे सीधे बोल ना कहा बैठी हू . . . . .. इतने में ही अम्मा याद आ गयी .. तू जो रात भार कर्ता है अपनी अम्मा की उम्र की औरत के साथ उसका क्या .
विशाल अपने हाथ को यूरोजो से हटा कर एक हाथ संजना के नितंब पर रखता है और दूसरे हाथ से साया के भीतर डाल कर अपने लंड को एडजस्ट करने लगता है और एक जोरदार Thappad ज़द देता है संजना के gaand पर . . .
संजना के मुँह से एक चीख निकलती है .निकले भी क्यूँ ना। मजबूत बॉडी बिल्डर के हाथ का प्यार भ भरा थप्पड भी काफी होता है रुलाने के लिए और इस बार तो जान बूझ कर लगाया लगाया गया था शरारत वस . . .
Last edited: