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Incest Old At One Place

meenashah6162

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मेरे गाँव की नदी (Completed)





अरे कल्लु कहा चल दिया सूरज सर पर है और तू है की बार बार नदी की तरफ जा रहा है सुबह से तीन दफ़ा जा चूका है।
आज क्या तेरा पेट ख़राब है।
मेरे बाबा ने मुझे खेत से नदी की और जाते हुए देख कर कहा।
मैंने कहा हाँ बाबा आज तो सुबह से पेट गड़बड़ हो रहा है क्या करू बार बार लग रही है।
बाबा ने हँसते हुए कहा जा जल्दी करके आ जा और जरा सोच समझ कर खाया कर फिर तो जब खाने को मिलता है तो तबियत से पेल लेता है और आगा पीछा कुछ नहीं सोचता।
मेरी गाण्ड फ़टी जा रही थी और बाबा था की लैक्चर मार रहा था मै जल्दी से नदी के पास पंहुचा और निचे उतरने लगा।
दरअसल हमारे खेत के पास की नदी गर्मियो में सुख जाती थी और उसमे इतना ही पानी बचता था की लोग अपनी गाण्ड धो सके, मै झाड़ियो के बीच जाकर अपनी धोती खोल कर बैठ गया तभी मुझे कुछ आवाज सी सुनाइ दी।

आवाज किसी औरत की थी, लेकिन आह बीरजु
क्या कर रहा है बेटा की आवाज सुनते ही मेरी तो टट्टी बंद हो गई मैंने जल्दी से अपनी गाण्ड धोइ और चुपके से झाड़ियो के पीछे जहा से आवाज आ रही थी उस तरफ बैठे बैठे ही आगे बढ़ने लगा।
मेरे रोंगटे तो बिरजु शब्द सुनते ही खड़े हो गये थे क्यों की मै उस औरत की आवाज पहचान चूका था वह मेरी चाची संतोष की आवाज थी और मेरे चचेरे भाई का नाम बिरजु था।
बीरजु से मेरी बिलकुल नहीं बनती थी वह मुझसे एक साल छोटा था, लेकिन था मेरा भाई ही पर उसका बाप शहर में पंचायत में नौकर था तो दोनों माँ बेटो के भाव कुछ ज्यादा ही था, घमण्ड सर चढ़ कर बोलता था, लेकिन वही मेरी माँ और चाची में काफी जमती थी, वैसे भी सुना जाता है की पहले माँ बहुत सीधी साधी थी लेकिन जब से चाची से मिली तब से काफी तेज तरार हो गई थी।
अब मै जरा अपने बारे में बता दू फिर कहानी की ओर चलते है।

मेरा नाम कल्लु है मै 20 साल का हु मेरे दादा जी मेरे लिए काफी जमीन छोड़ कर गए जिसमें हम बाप बेटे खेती करते है।
हल चलाते है, खेती किसानी के काम के चलते मेरा शरीर काफी बलिश्त और लम्बा है, मेरे पिता जी की दूसरी शादी हुई है पहली के मरने के बाद मेरे पिता जी ने मेरी माँ निर्मला से शादी कर ली, मेरे पिता जी 50 पार कर चुके है जबकि मेरी माँ उनसे बहुत छोटी केवल 38 साल की है याने मुझसे सिर्फ 18 साल ही बड़ी है, गांव में लड़कियो की शादी कम उम्र में ही हो जाया करती है इसलिए कम उम्र में ही माँ की शादी हो गई और 18 की उम्र में मै पैदा हो गया, मेरी माँ बहुत खूबसूरत और सेक्सी नजर आती है, मेरी एक छोटी बहन भी है 18 साल की जिसका नाम गीतिका है लेकिन प्यार से हम सब उसे गुड़िया भी कहते है, मेरे बाबा का बड़ा मन था उसे डॉक्टर बनाने का इस्लिये उनहोने उसे शहर भेज दिया था पढने के लिये, वह काफी सुन्दर और बिलकुल मेरी माँ के जैसी गदराई हुई और सेक्सी है।
वह पढने में बड़ी तेज है शहर में हॉस्टल में रह कर पढाई करती है और एक महिने में एक बार गांव जरुर आती है।


लेकिन अभी मेरी माँ की तो यह हालत है की उसको देख कर हर किसी का मन उसे चोदने का होता है यह बात मैंने गांव के लोगो की जो नजर मेरी माँ पर
पडती है उससे मैंने जाना। माँ बहुत गदरा गई है और उसके बदन पर चर्बी भी बढ़ गई है जिसके कारन उसका पेट काफी उभरा हुआ नजर आता है वह घाघरा भी नाभि के निचे ही पहनती है, हमारे यहाँ घाघरा और चोली पहनने का ही चलन है माँ का घाघरा घुटनो तक और बहुत घेरे वाला होता है, उनके चुचे और उनकी गाण्ड बहुत उठि हुई और मोटी है, उनकी गाण्ड देखते ही लौंडा खड़ा हो जाये इस बात की ग्यारंटी है, वह भी हमारे साथ खेतो में काम करती है।

हाँ तो जब मैंने देखा की आवाज पास की झाड़ियो के पीछे से आ रही है तब मै झाड़ियो के पास जाकर पीछे देखने लगा, लेकिन खोदा पहाड और निकली चुहिया वाली बात थी, संतोष चाची के पैर में कान्टा लगा हुआ था और उसका बेटा बिरजु उसके पैरो से काँटे
को निकाल रहा था संतोष चाची अपने दोनों हांथो को जमीन पर पीछे टेके हुए अपनी एक टाँग उठा कर अपने बेटे के मुह की ओर देख रही थी।
लेकिन मैंने देखा बिरजु का ध्यान काँटा निकालने की बजाय अपनी माँ के घाघरे के अंदर उसकी जांघो की जोडो की ओर देख रहा था।

संतोष : क्या हुआ मुये कितनी देर लगाएगा तुझसे एक कांटा भी नहीं निकाला जाता है, जल्दी कर मेरा पैर उठाये उठाये दर्द करने लगा है।
बीरजु : अरे माँ काँटा भी तो देखो कितनी बीच में घुसा है जरा चुप चाप बैठो निकाल रहा हु और अपने पैर न हिलाओ।
संतोष चाची आँखे बंद किये हुए अपने चहरे पर सारा दर्द समेटे आह ओहः कर रही थी और बिरजु था की अपनी माँ की बुर देखने की कोशिश कर रहा था, तभी बिरजु ने अपनी माँ की टाँगो को थोड़ा चौड़ा कर दिया और बिरजु तो बिरजू, संतोष चाची की चुत की फटी हुई फाँक

मुझे भी साफ नजर आ गई, वह दोनों नहीं जानते थे की मै बिरजू के जस्ट पीछे वाली झाडी के पीछे बेठा था, अब संतोष चाची की फुली हुई बड़ी बडी फांको वाली बुर साफ नजर आ रही थी, कुछ देर बाद बिरजु ने कहा ले माँ निकल गया तेरा काँटा और फिर संतोष चाची उठ गई और लंगड़ाते लंगडाते चलने लगी।
बिरजु उसके पीछे पीछे जाने लगा और मै चाची की घाघरे में उठि लहराती गाण्ड को देख कर मस्त हो रहा था, यह पहली दफ़ा था जब मैंने चाची की गुदाज
गाँड पर ध्यान दिया था।
चाची के जाने के बाद मै वहाँ से अपने खेतो में आ गया और अपने बाबा के साथ खेत के कामो में हाथ बटाने लगा।

बाबा : कल तो बेटा गीतिका आएगी तू बस स्टैंड जाकर उसे ले आना, मैंने कहा ठीक है बाबा, कुछ देर हमने काम किया उसके बाद दुर से हमें माँ आती हुई दिखाई दी।
मा खाना बना कर हमारे लिए लेकर रोज दोपहर तक आ जाती है, उसके बाद बाबा खाना खा कर फिर से खेती में लग जाता है और मुझे एक दो घंटे अपने खेत की झोपडी में आराम करने को कह देता है, माँ एक दो घंटे काम करती है और फिर वह भी झोपडी में आकर लेट जाती है, शाम को मै और माँ घर आ जाते है और अगले दिन फिर वही खेत किसानी का काम बस हमारी लाइफ ऐसे ही चल रही थी, अभी तक मेरा ध्यान औरतो पर कम ही रहता था लेकिन एक तो संतोष चाची की चुत जबसे मैंने देखा तब से मेरा लंड बहुत परेशान करने लगा था यही वजह थी की आज जब खेत से मै और माँ लौट रहे थे तो अनायास ही मेरी नजर अपनी माँ के बड़े बड़े मटकते गदराए चुतडो पर चलि गई जो की घाघरे में बहुत उछल रहे थे और समा नहीं रहे थे, सच बताऊ माँ को चलते हुए उसके मटकते भारी भरकम चूतडो को देखने पर चलते चलते ही मेरा लंड खड़ा हो गया था।

आज मुझे महसूस हुआ था की मेरी माँ को लोग गांव में क्यों घुरते रहते है और जब वह उनके सामने से अपनी भारी गाँड मटकाते हुए गुज़रती है तब लोग अपने लंड को क्यों मसलने लगते थे।

मा का घाघरा इतना छोटा था की उसके घुटने साफ नजर आते थे और अगर वह बैठती थी तो कई बार
उसकी मोटी मोटी गुदाज जाँघे भी नजर आ जाती थी, उस रात मै ठीक से सोया नहीं मुझे कही चाची की फुली हुई चुत और कभी माँ के लहराते हुए मोटे मोटे चूतड़ नजर आ जाते थे, मै यह भी सोचने लगा था की जब चाची की चुत इतनी फुली और बड़ी नजर आ रही थी तो माँ तो चाची से कई गुणा ज्यादा सुन्दर और तगडे बदन की है फिर उसकी चुत कितनी फुली हुई होगी, मेरे विचार अभी पनपे ही थे जिनमे किसी चिंगारी लगने के बाद उठते धुएं को आग देने का काम मेरी बहन गीतिका ने पूरा कर दिया और मै अपनी चाची माँ और बहन को चोदने के लिए तडपने लगा।

मै बस स्टैंड पर खड़ा शहर से आने वाली बस का इंतजार कर रहा था, तभी बस स्टैंड पर एक किताब बेचने वाला आया और मेरे पास आकर कहने लगा बाबू जी मेहँदी की बच्चो की और गानो की शायरी की बताइये कौन सी बुक लेना पसंद करेंगे, मैंने कहा कहानियो की बुक है, उसने कहा है बाबू जी अकबर बीरबल के चुटकुली, पुराणी दंतक कथाए,

पंचतन्त्र बोलो कौन सी दूँ, मैंने उससे धीरे से कहा चुदाई की कहानियो की किताब है क्या, तब उसने भी धीरे से कहा बाबूजी २० रु की आएगी, मैंने कहा कहानी मस्त है न उसने कहा बाबू जी एक बार पढोगे तो बार बार मुझसे लेकर जाओगे, मैंने उससे वह किताब ले ली और इतने में सामने से बस आ गई और मैंने वह किताब अपनी धोती में कमर पर खोस ली, तभी गीतिका बस से उतरी, मै तो उसे देखता ही रह गया, सच बताऊ गीतिका को ऊपर से निचे तक देखने भर से मेरा लंड खड़ा हो गया था, गीतिका तो बहुत मॉडर्न हो गई थी, उसके खुले हुए बाल होठो पर लिप्स्टीक, एक रेड कलर की टीशर्ट और टाइट जीन्स है क्या लग रही थी,
जब उसने अपनी गुदाज गाण्ड मेरी ओर की तो मै तो उसके जीन्स में न समा सकने वाले चौड़े सी भारी चूतडो को देख कर पागल हो गया और सच पुछो तो मेरे मन में उस समय यह आया की गीतिका की इतनी चौड़ी गाण्ड जीन्स में इतनी मस्त नजर आ रही है तो अगर यह जीन्स मेरी माँ पहने तो उसके चौड़े चूतड़ तो और भी बडे बड़े है जीन्स में माँ की मोटी गाण्ड कैसे नजर आएगी, मै अभी कुछ सोच ही रहा था की मुझे दुसरा झटका तब लगा जब गीतिका, एक दम से भैया कहती हुई मेरे सिने से लग गई मुझे और कुछ एह्सास तो नहीं हुआ पर मेरे सिने से जब उसकी एक झीनी सी टीशर्ट में कसे हुए मोटे मोटे दूध जब दबे तो ऐसा लगा जैसे मेंरा लंड पानी छोड़ देगा।

कल्लु : अरे गुड़िया इतना कह कर मैंने भी उसकी पीठ को और कस कर अपने सिने की ओर दबोचा और उसके मोटे मोटे मस्त दूध के मस्त एह्सास का खूब मजा लिया।
गीतिका अभी भी मुझसे चिपकी हुई थी इसलिए मैंने धीरे से उसकी मस्त गुदाज मोटी गाण्ड पर जीन्स के ऊपर से हाथ फेरा और क्या बताऊ उसके चूतडो के नरम माँस के उठाव ने मुझे पागल कर दिया दिल कर रहा था की अपनी बहन गीतिका के भारी चूतडो और उसके मोटे मोटे दूध को यही खूब कस कस कर दबा डालूं।
कुछ देर बाद गीतिका ने मुझे छोड़ा और कहने लगी अब चलिये भी या यही खड़े रहेगे।

कल्लु : अरे गुड़िया तू तो हर एक दो महिने में बढ़ने लगी है अभी पिछ्ली बार देखा था तो तो काफी छोटी थी और अब एक दम से जवान लड़की के जैसे लगने लगी है,
अगर तू साड़ी पहन कर आती तो मै तो तुझे पहचान ही नहीं पाता।
गीतिका : मुसकुराकर मुझे देखति हुई, भैया मै तो उतनी ही बड़ी हूँ, पर मुझे इस बार ऐसा लग रहा है जैसे आपका अपनी बहन को देखने का नजरिया बदल गया है।तभी तो आपको अपनी बहन बड़ी नजर आ रही है

कल्लु : पता नहीं गुड़िया पर तूने यह कैसे कपडे पहने है भला अपने गांव मै लड़किया ऐसे पेंट शर्ट में कहा रहती है, गांव के लोग कैसी कैसी बाते करने लगते है
गीतिका : मै जानती हु भैया तुम फिकर न करो चलो हम पहले उस सामने वाले काम्प्लेक्स में चलते है वहां मै ड्रेस चेंज कर लेती हु।
कालू : मै अपनी बहन की गुदाज जवानी को देखते हुए कहने लगा, वैसे गुड़िया तू मुझे तो इन कपडो मै अच्छी लग रही है, पर मै सोचता हु गांव घर में कोइ तूझसे कुछ कहे न इसलिए मै कह रहा था।

गीतिका : भैया आप नहीं भी कहते तो भी मै यह ड्रेस चेंज करके गांव जाती क्योंकि मै जानती हु गांव के लोगो को उन्हें बात का बतंगड बनाते देर नहीं लगती है,
पर मुझे यह जान कर अच्छा लगा की आपको मेरी यह ड्रेस अछि लगी है
कालू : अरे पगली तेरी ड्रेस तो ठीक है तू तो कुछ भी पहन लेगी तो अच्छी लगेगी, आखिर मेरी गुड़िया परी है जो इतनी खुबसुरत।
गीतिका : मुस्कुराते हुए चलिये अब इतना भी झूठ मत बोलिये।
कालू : नहीं गुड़िया मै सच कह रहा ह, मैंने तुझसे सुन्दर लड़की आज तक नहीं देखी।
गीतिका : अरे क्या भैया, आप कभी शहर में नहीं रहे हो न इसलिए ऐसी बाते करते हो कभी शहर की लड़कियो को देखते तो पागल हो जाते।

कल्लु : क्यों शहर में तुझसे भी सुन्दर लड़कियाँ रहती है।
गीतिका : लड़किया तो ठीक है भैया पर उनकी ड्रेस जब आप देख लोगे तो आपका तो बस।।।।।।।।।।यह कह कर गीतिका जोर जोर से हॅसने लगी।
कालू : क्या गोल मोल बाते कर रही है, साफ साफ बता ना।
गीतिका : मंद मंद मुस्कुराते हुये, बाद मै बताऊँगी अब चलो भी, उसके बाद गीतिका ने काम्प्लेक्स में जाकर कपडे बदले और अब वह एक येलो सलवार कमीज मे नजर आ रही थी।

गीतिका : मुस्कुराते हुये, अब कैसी लग रही हु भैया,
कालू : अच्छी लग रही हो।
गीतिका : अच्छा भैया मै आपको पहले ज्यादा अच्छी लग रही थी या अब।
कालू : मुस्कुराते हुए सच कहु तो तू जीन्स और टॉप में मुझे ज्यादा सुन्दर लग रही थी।
गीतिका : मै जानती हु भैया और गीतिका फिर मुस्कुराने लगी, कुछ भी कहो गीतिका इस बार और बार की अपेक्षा कुछ बदली हुई लग रही थी।
गीतिका : भैया अब तो यह खटारा साइकिल बेच दो और कोई बाइक का जुगाड़ करो।

कल्लु : अरे वह तो ठीक है पर यहाँ गाड़ी चलाना आती किसे है।
गीतिका : वह तो मै आपको सीखा दूंगी।

मैने साईकल के पीछे गुड़िया का बैग बांध दिया और फिर साईकल पर चढ़ कर उसे साईकल का डंडा दिखाते हुए कहा, आजा गुड़िया डण्डे पर बैठ जा
गीतिका मेरी बात सुन कर खिलखिला कर हँस पड़ी इस बार तो मै भी उसकी हँसी का मतलब समझ गया था, गीतिका का चेहरा कुछ लाल हो रहा था और वह साईकल के आंगे के डण्डे पर बैठ गई जब वह बेठी तो उसके मोटे मोटे चूतडो से मेरा लंड जो की खड़ा हो गया था टकराने लगा और मै एक दम से सिहर गया,
उपर से गीतिका के बदन से बहुत ही मस्त खुशबु आ रही थी, मै धीरे धीरे साइकिल चलाने लगा और गुड़िया से बात करने लगा।

कल्लु : गुड़िया इस बार कितने दिनों की छुट्टी पर आई है
गीतिका : भैया ८-१० दिन तो रहुँगी।
कालू : तेरी पढाई का क्या पुछु वह तो अच्छी ही चल रही होगी, आखिर तू इतनी होशियार तो है।
गीतिका : आखिर बहन किसकी हूँ।
कालू : अरे इसमें तेरे भैया का क्या बड़प्पन हुआ यह तो सब तेरी मेहनत का नतीजा है, पर यह तो मर्दो जैसे कपडे कब से पहनने लगी, क्या वह सब ऐसे ही कपडे
पहनती है।
गीतिका : भैया आज कल ऐसा ही जमाना है, सब या तो मिनी स्कर्ट या फिर जीन्स पहनती है।
कालू : मिनी स्कर्ट मतलब।
गीतिका : भैया जो स्कर्ट घटनो से भी ऊपर रहती है। उसे मिनी स्कर्ट कहते है।
कालू : तो क्या बड़ी उम्र की औरते भी जीन्स या वह मिनी स्कर्ट पहनती है।
गीतिका : हाँ भैया तुम देख लो तो कहोगे की कैसे यह औरते अपने भारी शरीर पर जीन्स पहन कर निकलती है।

कल्लु : क्या हमारी माँ जैसी औरते भी जीन्स या स्कर्ट पहनती है।
गीतिका : हाँ भइया, आज कल सब औरते ऐसे ही कपडे पहनती है।
कालू : तो गुड़िया उन्हें शर्म नहीं आती होगी, ऐसे कपडो में तो बड़ी उम्र की औरते न जाने कैसी दिखती होगी।
गीतिका : क्यों मै जीन्स में आपको अच्छी नहीं लग रही थी।
कालू : नहीं तू तो बहुत अच्छी लग रही थी।
गीतिका : तो फिर अब यह बताओ अगर वह जीन्स माँ पहनेगी तो क्या अच्छी नहीं लगेगी।

कल्लु : पता नही।
गीतिका : पता नहीं क्या अगर तुम माँ को जीन्स और टीशर्ट में देख लो तो तुम तो उन पर मर मिटोगे।
कालू : मतलब।
गीतिका : ओह भैया आप भी न बहुत भोले हो यही नुकसान है गांव में रहने के, अरे बाबा माँ जब यह कपडे पहनेगी तो बहुत सेक्सी नजर आएगी।
अच्छे अच्छे पागल हो जाएगे उन्हें देख कर।
कालू : ये सेक्सी का क्या मतलब होता है गुडिया, मै जानता था लेकिन गीतिका मुझे कुछ ज्यादा ही भोला समझती थी लेकिन वह यह नहीं जानती थी की मेरा भी
एक दोस्त है गोपी जो शहर में रहता था और
वह मुझे नई नई बाते बताता रहता था, सेक्स की बाते भी उसने मुझे बताइ थी इसलिए मुझे उसका मतलब पता था, मै यह तो समझ गया था की गीतिका
जितनी दिखाई दे रही है वह उससे कही ज्यादा सेक्सी है पर इस बार उसमे कुछ ज्यादा ही बदलाव दिखाई दे रहा था।

गीतिका : मुस्कुराते हुये, भैया अब मै आपको सेक्स का मतलब कैसे बताऊ।
कालू : अरे बोलने वाली चीज न हो तो कर के दिखा दे मै समझ जाऊँगा
मेरी बात सुन कर गीतिका ठहाके लगा कर हॅसने लगी और कहने लगी भैया आप बहुत बुद्दू हो, आपको तो सच में कुछ भी नहीं पता, अगर यह बात
आप शहर में मेरे दोस्तों के सामने बोलते तो लोग आपका मजाक उड़ा उड़ा कर इतना हँसते की उनका पेट् दुखने लगता।
कालू : अरे हमने ऐसा क्या कह दिया, हमको अब उसका मतलब पता नहीं है तो हम क्या करे।

गीतिका : सच भैया आप भी ना।
कालू : अब हँसती ही रहोगी या हमें उसका मतलब भी बतायेगी।
गीतिका : हस्ते हुए भैया मै आपको बाद में उसका मतलब बताऊँगी, मै पगडण्डी से होता हुआ गांव के रास्ते पर पहुच गया। वहाँ आम का बगीचा था और पके हुए आम नजर आ रहे थे, तभी गीतिका ने इशारा करते हुए कहा भैया वो देखो कितना मस्त पका हुआ आम है प्लीज उसे तोड़ो ना।

कल्लु : मैंने साईकल रोकी और फिर गीतिका अपने भारी चूतडो को डण्डे से हटा कर उतर गई, मैंने साईकल खड़ी कर दी और उचक कर उस पके आम को तोड़ने लगा लेकिन वह मेरे हाथ से थोड़ा ऊपर था, मै बार बार ऊपर उचक कर उस आम को तोड़ने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह मेरे हाथ से टच होकर रह जाता था।
तभी गुड़िया ने कहा भैया ऐसे नहीं टूटेगा आप एक काम करो मुझे अपनी गोद में उठाओ मै तोड़ती ह, मैंने गीतिका की बात सुन कर उसे अपनी गोद में उठाया, गुड़िया की सलवार इतनी पतले कपडे की थी की मुझे तो ऐसा लगा जैसे मै गुड़िया को नंगी करके उठा रहा हूँ।

मैने गुड़िया की मोटी जांघो पर दोनों हाथो का
घेरा डाल कर उसे ऊपर उठाया, गुड़िया काफी हेल्दी हो गई थी 55 के जी के लगभग वजन होगा मेरे हाथ उसकी जांघो से गुजरते हुए जब गुड़िया के भारी चूतडो
पर पहुचे तो गुड़िया की जांघो और भारी चूतडो के गर्म मांस के एह्सास ने मुझे पागल कर दिया था मै गुड़िया को उठाये हुए उसके मोटे मोटे चूतडो को खूब कस कर दबोचे हुए था और मेरे लंड महराज धोती में टनटना चुके थे, मै गुड़िया के चूतडो को दबाये ऊपर देखने लगा तभी गुड़िया ने मुझे हँसते हुए देखा उसके हाथ में पका हुआ आम था और वह कहने लगी अब उतारो भी आम तो मैंने तोड़ लिया, मैंने धीरे से गुड़िया को छोडना चालु किया।
आउर गुड़िया मेरे बदन से रगड ख़ाति हुई निचे आई और मेरा लैंड गीतिका के चुत वाले हिस्से से रगड खाता गया, गुड़िया ने आम की ख़ुश्बू लेते हुए कह
वाह भैया क्या मस्त पका है।

गीतिका : आओ न भैया थोड़ी देर इस आम की छाया में बेठते है फिर चलते है, मै वही बैठ गया और गीतिका भी बैठ गई और आम के ऊपर के हिस्से को अपने
दान्तो से थोड़ा सा काट कर उसने आम को दबाया और उसका रस चुसते हुए कहने लगी।

गीतिका : वह भैया कितना रसीला और मीठा आम है, मेरी नजर गीतिका के रसीले होठो पर चलि गई और मै उसके रस भरे होठो को हसरत भरी निगाहॉ
से देखने लगा।
गीतिका : लो भैया तुम भी चुसो बड़ा मस्त टेस्ट है इसका।
मै आम चुसना तो नहीं चाहता था लेकिन गीतिका के रसिले होठो और उसकी गुलाबी जीभ को देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैंने सोचा गीतिका का
जूठा आम चुसने का मेरा मन हो गया और मैंने भी गीतिका से आम लेकर चुसने लगा, गीतिका ने कहा भैया चीटिंग नहीं एक बार आप चुसो एक बार मैं।
बस फिर बारी बारी से गुड़िया और मै आम को चुसने लगे।
गीतिका : भैया गांव का माहौल बड़ा अच्छा लगता है यहाँ कितनी शांति है ऐसे में तो कोई कुछ भी करे कोई देखने वाला नहीं है।
कालू : मतलब।
गीतिका : मुस्कुराते हुये, मतलब की मुझे और आम चुसना है और तोड़ो न भैया और फिर गीतिका खड़ी होकर इधर उधर देखने लगी और फिर उसने उछलते
हये एक आम दिखाया और उसे तोड़ने के लिए कहने लगी।

वाह आम भी ऊँचाई पर था और गीतिका ने मेरी ओर देखा और बड़ी स्टाइल में अपने हाथ ऊपर कर दिए की आओ और मुझे गोदी में उठाओ, मेरा लंड तो खड़ा ही था।
इस बार गुड़िया को मैंने पीछे से उठाया, लेकिन आम थोड़ा ऊपर था तब गुड़िया कहने लगी भैया थोड़ा और ऊपर उठाओ न, आप भी न इतने बालिश्त शरीर है आपका और आप अपनी कमसीन और नाजुक बहन को अपनी गोद में नहीं उठा पा रहे है।

मेरा इतना सुनना था की मैंने गुड़िया को ऊपर किया इस बार गुड़िया की मोटी गाँड बिलकुल मेरे मुह पर दबी थी और मै अपने मुह से गुड़िया के भारी चूतडो को महसूस कर रहा था, इतने में गुड़िया ने कहा भैया बस थोड़ा और उपर, गुडिया का इतना कहना था की मैंने गुड़िया की गाण्ड में हाथ भर कर उसे और ऊपर उठा दिया, मेरा लंड झटके मारने लगा मेरा हाथ गुड़िया की मस्त उभरी हुई चूत और गाण्ड की जडो में फसा हुआ था।

उसकी भरी गदराई जवानी ऐसी थी मनो मैंने किसी बड़ी औरत को ऊपर उठा रखा हो, कुल मिला कर यह था की गीतिका एक मस्त पका हुआ माल हो चुकी थी जिसे अब चुसना बहुत जरुरी हो गया था, मैंने गीतिका के चूतडो और चुत को इस दौरान अपने हाथो से दबा कर देख लिया था, तभी गीतिका ने आम तोड़ लिया और मैं उसे धीरे से निचे उतारने लगा लेकिन वह एक दम से निचे सरक गई और मेरे दोनों हाथो में गुड़िया के सुडौल खूब मोटे मोटे और कसे हुये
मस्त दूध दब गए और तब मुझे एह्सास हुआ की गीतिका के मस्त बड़े बड़े आम खूब मोटे मोटे और खूब कसे हुए है जब मेरा हाथ अपनी बहन के पके
आमो पर पड़ा तो मुझे एक अजीब सा आननद आया और गीतिका मजे से आम चुसने लगी।

वह बीच बीच में मुझे भी आम चुस्ने को दे देति थी।
कुछ देर हम वही आम खाते रहे और फिर गुड़िया को मैंने साईकल पर बैठा लिया और गांव की ओर चल दिया।

हम जब घर पहुचे तो गुड़िया माँ से लिपट गई और फिर मै वहाँ से खेतो में चला गया कुछ देर बाबा के साथ काम किया।
उसके बाद मैं झोपड़ी में चला गया और बाबा खेतो में काम में लगे रहे वहाँ जाकर मैंने अपनी धोती से किताब निकाल कर पढना शुरू किया।
जब मैंने पहली कहानी पढ़ी तो पहली कहानी ही अपनी सगी बहन को चोदने की थी जिसे पढ़ कर मै मस्त हो रहा था, लेकिन किताबे तो मै बहुत बार पढ चूका था पर इस बार मुझे बार बार गुड़िया ही याद आ रही थी गुड़िया की गदराई जवानी रह रह कर मेरे लंड को खड़ा कर रही थी।
कहानी पढने के बाद मै थोड़ी देर लेट गया
शाम को घर पर जब मै पंहुचा अभी मै दरवाजे के बाहर ही था दरवाजे से एक रास्ता घर के अंदर और दुसरा पास के बाथरूम में जाता था।
बाथरूम ऐसा था की उसमे दरवाजा नहीं था और वह तीन तरफ लकड़ी के पटिये लगा कर बनाया गया था।

निर्माला : अरे गीतिका जल्दी नहा ले खाना बन गया है।
गीतिका : बस माँ आती हूँ।

मै समझ गया की गुड़िया बाथरूम में नहा रही है, मेरे मन में गीतिका को नंगी देखने का ख़याल आ गया, जबकि इससे पहले भी उस बाथरूम में माँ या गीतिका
नहाती रही है पर पहले ऐसा ख़याल नहीं आया, मै धीरे से बाथरूम के पीछे की तरफ चला गया और जैसे ही मैंने लकड़ी के गैप से झाँका ।
क्या बताऊ सीधे मेरी आँखों के सामने गुडिया के मोटे मोटे गोरे गोरे चूतड़ थे और क्या उठे हुए और क्या मस्त गांड थी उसकी गाण्ड की दरार में मेरा लंड तो पूरी तबियत से खड़ा हो गया।
मैने अपने लंड को धोती से बाहर निकाल कर मसलते हुए गीतिका को देखना शुरू किया गीतिका जब भी थोड़ा झुकती तो उसकी फुली चुत की फाँके पीछे से नजर आ जाती और मेरा लंड उसकी फांको
को और फाडने के लिये मचलने लगता था तभी गीतिका मेरी और मुह करके घुम गई और जब मैंने उसके मस्त बड़े बड़े कलमी आमो को देखा तो ऐसा लगा की यह कठोर आम मुझे निचोडने के लिए मिल जाये तो मजा आ जाए, फिर गुड़िया जल्दी जल्दी अपने नंगे बदन पर पानी ड़ालने लगी, उसकी चुत के ऊपर हलके हलके बाल नजर आ रहे थे और चुत का उभार मुझे बहुत उत्तेजित कर रहा था।



कुछ देर में गीतिका ने एक लाल रंग की पेंटी पहन ली और ऊपर उसने ब्रा नहीं पहनी बल्कि एक ब्लू कलर की टी शर्ट पहन लिया और निचे एक टाइट लेगी पहन ली।
उसकी मोटी मोटी जाँघे लेगी में बड़ी मुश्किल से समां रही थी और उसके चुतड़ तो लेगी में और भी चोदने लायक नजर आ रहे थे, गीतिका ने अपनी उत्तरी हुई ब्रा और पेंटी वही छोड़ कर बाथरूम से बाहर आई और घर के अंदर घुस गई।
मै कुछ देर बाद घर के अंदर गया तब माँ खाना बना रही थी और गीतिका बैठ कर खा रही थी, मुझे देखते ही माँ ने कहा कल्लु आजा तू भी हाथ मुह धो कर खा ले।

मैने भी खाना खा लिया उसके बाद बाबा आ गए और माँ उन्हें खाना देने लगी ।
गर्मी ज्यादा थी मै बहार खटिया डाल कर लेता हुआ था और गीतिका माँ और बाबा के पास बेठी थी, मै आँखे बंद किये लेटा था तभी पायल की आवाज सुनाइ दी छन छन छ्न छ्न।
मैंने धीरे से आँखे खोल कर देखा। माँ बाथरूम की तरफ जा रही थी।

मेरा लंड माँ के भारी उठे हुए चूतडो की मतवाली थिरकन देख कर खड़ा हो गया और मै चुपके से बाथरूम के पीछे चला गया, माँ के भरे चूतङ मेरी तरफ थे तभी माँ ने अपने घाघरे को ऊपर चढ़ाया और जब मैंने माँ के चौड़े चौड़े मस्त चूतडो को देखा तो लगा पानी निकल जाएगा।
आज पहली बार मैंने माँ के गोरे गोरे चौड़े चौड़े चूतडो के दर्शन किये थे, माँ वही मुतने बैठ गई और रात के सन्नाटे में मुतने की तेज आवाज ने मुझे पागल कर दिया, माँ काफी देर तक मुतती रही फिर खड़ी होकर अपने घाघरे से चुत पोछती हुई बाहर आ गई।

मै वापस खटिया पर जाकर लेट गया, थोड़ी देर बाद गीतिका मेरे बगल में आकर बैठ गई और उसकी गुदाज गाण्ड मेरे कमर से टच होने लगी।
गीतिका : क्या भैया सो गए क्या।
कालू : अरे नहीं अभी कहा नींद आएगी, और बता तुझे तो शहर में अच्छा लगता होगा।
गीतिका : हाँ भैया बड़ा मजा आता है काश आप भी मेरे कॉलेज में होते तो मस्त मजा आता।

कल्लु : हाँ मजा तो आता लेकिन गांव में खेती का काम भी तो सम्भालना पड़ता है। इसीलिए तो मै पढने नहीं गया।
गीतिका : भैया रात को आप बाहर यही खटिया पर ही सोते हो क्या।
कालू : हाँ गर्मी में बाहर ठण्डी हवा में सोने का मजा ही कुछ और है।
गीतिका : भैया मै भी यही सो जाउ।
कालू : नहीं तू अंदर ही सो बाबा ग़ुस्सा होंगे, तभी गीतिका के मोबाइल पर कोई फ़ोन आया और वह बातें करने लगी और मै उसकी बात सुनने लगा।



गीतिका : हेलो
मोनिका : क्यों राजकुमारी पहुच गई अपने गाँव।
गेटिका : हाँ यार बड़ा मस्त माहौल है गांव में बड़ी सुहानी हवा चल रही है।
मोनिका : क्या यार तू वहाँ चलि गई यहाँ अब मुझे अकेले ही टाइम पास करना पड़ रहा है, आज एक मस्त डीवीडी ले कर आई हूँ, एक निग्रो एक गोरी को मस्त चोद रहा है।
उस निग्रो का लंड तो बड़ा मस्त है।
गीतिका : अरे यार अभी नहीं बाद में बात करते है।
मोनिका : क्यों क्या हुआ।
गीतिका : मै भैया के पास बेठी हूँ।
मोनिका : मुस्कुराते हुये, भैया के पास बेठी है या भैया की गोद में बेठी है।
गीतिका : चुप कर जो मुह में आया बक देति है।
मोनिका : सच कह रही हु रानी, एक बार अपने भैया की गोद में बैठ कर देख ले तेरे जवान चौड़े चूतडो के वजन से तेरे भैया का लंड न डगमगा जाए तो कहना।
गीतिका : मंद मंद मुस्कुराते हुये, मै फ़ोन रख रही हु।
मोनिका : अच्छा मेरी बात तो सुन।
गीतिका :क्या।
मोनिका : अच्छा तो कुछ मत बोल मै तुझे मूवी का लाइव शो बताती हूँ।
गीतिका : चल तेरे पास ज्यादा बैलेंस है तू बोल मै तो चुपचाप यही बेठी हु।
मोनिका : वो गोरी उस निग्रो के काले काले मस्त मोटे लंड को लोलीपोप की तरह चूस रही है, तू देखति तो तेरा भी मन चुसने का होने लगता।
गीतिका : और वह निगरो।
मोनिका : वह निग्रो उस गोरी की चुत की तरफ मुह करके लेटा हुआ है और अपनी लम्बी जीभ निकाल कर उस गोरी की मस्त चुत को चाट रहा है दोनों ६९ की पोजीशन में एक दूसरे के लंड और चुत को खूब कस कस कर चूस चाट रहे है।
गीतिका : बस कर मोनिका मै अब फ़ोन रख रही हूँ। तुझसे बाद में बात करती हूँ।
मोनिका : अच्छा चल जब फ्री हो तो मिस कॉल कर देना।

कल्लु : तेरी दोस्त थी क्या गुडिया।
गीतिका : हाँ भैया मेरी सबसे पक्की सहेली है
मै केवल धोती पहने हुए था और गीतिका की नजरे मेरे चौड़े सिने की तरफ बार बार चलि जाती थी लेकिन मै कुछ समझ नहीं पाया फिर रात को सब सो गए और
सूबह वही दिनचर्या।

सूबह सुबह गीतिका मस्त घाघरा चोली पहन कर नजर आई मै तो उसकी गोरी गोरी टाँगो को देखता ही रह गया।
जीतिका : भैया मै भी आपके साथ खेतो में चल रही हु।
कालू : ठीक है चल पर खेत दुर है तू थक जायेगी तो।
गीतिका : निकालो न अपनी खटारा साईकल उसी पर बैठ कर चलते है।
कालू : ठीक है चल और मैंने अपनी साईकल निकाली और गीतिका को फिर से कहा चल बैठ डण्डे के उपर, मेरे इतना कहने पर गीतिका मुस्कुराते हुए डण्डे पर
बैठ गई और कहने लगी, भैया आराम से चलाना आपका डंडा मुझे बहुत चुभता है।
गीतिका की बात सुन कर मेरा लंड अकडने लगा था, पर मजा भी बहुत आ रहा था।
कालू : तू क्यों तैयार हो गई सुबह।
गीतिका : भैया कल के रसीले आमो ने बड़ा मजा दिया, आज फिर मुझे ऐसे ही रसीले आम खाना है।
कालू : हाँ हाँ क्यों नहीं अपने खेतो के पास तो बहुत बड़ा बगीचा है वैसे तुझे आम खाता देख मेरा भी मन आम चुसने का होने लगा था नहीं तो मैं
वेसे आम चुसता नहीं हूँ।

गीतिका ; मुस्कुराते हुये, भैया जब आपको अच्छे मस्त रसीले आम चुसने को मिलेँगे तो आप भी नहीं छोडोगे।
कालू : गांव में आम तो बहुत है पर चुसने का समय कहा मिलता है।
गीतिका : फिकर न करो भैया मै आ गई हु न अब मस्त आम चुसाउंगी आपको।





कालू : तू तो दो चार दिन रहेगी और फिर चलि जाएगी, अगली बार कुछ ज्यादा दिनों की छुटटी लेकर आ तो मजा आएगा तब तक शायद बारिश भी हो जाये तो नदी में पानी भी आ जायेगा और फिर मस्त नदी में नहाने का मजा ही अलग होगा।
जीतिका : भैया आपको तैरना आता है।
कालू : हाँ मै तो एक साँस में इस छोर से उस छोर तक तैर कर जा सकता हूँ।
गीतिका : भैया मुझे भी तैरना सीखा दोगे क्या।
कालू : क्यों नहीं पर पहले नदी में पानी तो आने दे।
गीतिका : अगली बार जब आउंगी तब तक बारिश हो ही जायेगी।
कालू : हाँ वह तो है।

जब हम खेतो में पहुच गए तो कुछ देर मैंने काम किया और फिर गीतिका ने रट लगा दी की चलो भैया आम के बगीचे में।
उधर बाबा उसकी रट सुन रहे थे और फिर मुझसे कहने लगे अरे बेटा कल्लु दो दिनों के लिए बिटिया आई है जाता क्यों नहीं उसे मस्त मीठे आमो का रस तो चखा दे।
मै वहाँ से गीतिका को लेकर पास के बगीचे में चल दिया और फिर गीतिका आम देखने लगी तभी वह चिल्लाइ वाह भैया क्या मस्त बड़ा सा पका हुआ आम लगा है।
उसको तोड़ो न, मैंने कहा गुड़िया वह तो बहुत ऊपर है।
गीतिका : तो मुझे उठाओ न अपनी गोद में, मैंने गीतिका के पीछे आकर उसकी कमर पकड़ कर उसे उठाया और जब उसके गुदाज चोदने लायक चूतडो का स्पर्श मेरे लंड से हुआ तो वह गीतिका के घाघरे में घूसने को तैयार हो गया, लेकिन गीतिका को ऊपर उठाने पर भी आम उसके हाथो से थोड़ी दुर ही रह गया और मैंने गीतिका को थक कर निचे उतार दिया।

कल्लु : गुड़िया वह बहुत ऊपर है कोई दुसरा देख ले
गीतिका : पैर पटकते हुए नहीं भैया मुझे तो वही वाला चहिये, आप कैसे उठा रहे हो मुझे आपको तो सचमुच कुछ नहीं आता।
कालू : तो तू ही बता कैसे उठाऊ तुझे।
गीतिका : मेरे सामने आकर खड़ी हो गई और मेरे नंगे चौड़े सिने को और मेरी बाजुओ को हाथ लगा कर कहने लगी, मेरा भाई इतना बलिश्त है और अपनी कमसिन सी बहन को अपनी गोद में नहीं उठा पा रहा है।

मैने गीतिका के खूब मोटे मोटे कसे हुए दूध पर नजर डालते हुए अपनी नज़रो को निचे फिसलाया और गीतिका के भारी चूतडो और मोटी मोटी गदराई जांघो को देखते हुए कहा ।अब तू कमसीन कहा रही अब तो भरपूर जवान हो गई है 55 के जी तो वजन होगा तेरा फिर कैसे मै तुझे आसानी से उठा लु।
गीतिका : क्या भैया आपके बराबर मरद तो बड़ी बड़ी औरतो को उठा लेते है मै तो फिर भी लड़की हूँ।
कालू : अच्छा बता कैसे उठाऊ तुझे।
गीतिका मेरे सामने आकर मेरे हाथो को पकड़ कर अपनी कमर में रखते हुए कहने लगी पहले झुक कर मेरी जांघो पर अपने हाथ का घेरा डालो और मुझे
उपर उठाओ।
मैने गीतिका की मोटी जांघो को अपनी बांहो में भर कर उसे ऊपर उठाया अब उसके मोटे मोटे चोली में कसे दूध मेरे मुह से टकराने लगे और मै अपने आपको रोक न सका और मैंने अपने मुह को गीतिका के मोटे मोटे बोबो में दबा दिया और उसकी मस्त सुगंध लेने लगा, हाय क्या मतवाली मस्त महक थी मेंरा
लंड तो ऐसा लग रहा था की धोती फाड कर बाहर आ जाएगा।

गीतिका ने अपनी बांहे मेरी गर्दन पर डाले हुए एक हाथ ऊपर बढ़ाया लेकिन आम उसकी पहुच से दुर था,
गीतिका : भैया ऐसे ही उठाये रहना उतारना मत, बस थोड़ा सा और ऊपर उठाओ, अब की बार मैंने अपने हाथो से गीतिका के चौड़े चौड़े मोटे चूतडो को
दबोचते हुए अपने पंजो को उसकी मस्त गुदाज गाण्ड में भर कर और भी ऊपर उठाया।लकिन गीतिका का हाथ आम तक नहीं पहुच रहा था, गीतिका भैया बस
थोड़ा सा और ऊपर करो न, गीतिका का घाघरा ऊपर हो गया और मेरे हाथ गीतिका की नंगी जांघो से होते हुये, जैसे ही उसकी गाण्ड की दरार में पहुचे मै चौक गया और मेरा लंड झटके देने लगा।

गीतिका घाघरे के अंदर पूरी नंगी थी जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी, मै तो एक दम से मस्त हो गया और न जाने कहा से मेरे हांथो में इतनी ताकत आ गई की मैंने गीतिका को और ऊपर करते हुए उठा दिया और गीतिका की चुत वाला हिस्सा मेरे मुह के सामने आ गया।
मैने अपनी आँखे बंद कर ली और गीतिका की चुत को अपने मुह पर दबाने लगा, लेकिन घाघरे का अगला हिस्सा चुत को ढके हुए था और मै गीतिका की बुर को
सूँघने की कोशिश कर रहा था, और फिर अचानक मैंने अपने मुह को गीतिका की चुत के ऊपर दबाते हुए उसकी फुली चुत को घाघरे के ऊपर से ही पप्पी लेनी
शुरु कर दी, तभी गीतिका के मुह से आवाज निकली यस और मैंने जब ऊपर देखा तो उसके हाथ में आम आ चूका था।

गीतिका : भैया अब उतारो भी लेकिन आराम से मैंने गीतिका पर पकड़ ढिली की और वह धीरे धीरे निचे की तरफ फ़िसलने लगी, जब वह निचे फ़िसलने लगी तो पहले उसका नंगा पेट मेरे मुह के सामने आया और मैंने भरपूर उसके नंगे पेट पर अपने होठो को फेरा और फिर जब वह और निचे सरकी तो उसके मोटे मोटे दूध मेरे
मुह के सामने आ गये।

लेकिन मुझे यह ध्यान नहीं था की गीतिका जब और निचे सरकेगी तो मेरा खड़ा लंड उसकी चुत को रोक लेगा और जैसे ही गीतिका की चुत मेरे लंड के पास पहुची लंड से उसकी बुर घिस गई और मेरे डण्डे की वजह से शायद गीतिका की फाँके एक बार खुल कर बंद हो गई या फिर उसके भग्नाशे से मेरे लंड
का घर्षण हो गया और गीतिका के मुह से आह जैसे शब्द निकल पड़े और गीतिका अब जमीन पर खड़ी थी।

उसकी नजर मेरी नज़रो से बच कर मेरे खड़े लंड
पर जा रही थी जो धोती के अंदर से तम्बू बनाये खड़ा था और गीतिका के चेहरे पर मंद मंद मुस्कान फैल गई थी लेकिन उसका चेहरा कुछ लाल हो गया था और
सच कहु तो गीतिका मुझे बहुत चुदासी चुत नजर आ रही थी उसका चेहरा देख कर ही लग रहा था की उसकी बुर जरुर लंड के लिए पानी छोड़ रही होगी, फिर भी मै जानना चाहता था और ऊपर से वह अपनी चड्डी भी पहन कर नहीं आई थी मतलब उसके अंदर कुछ चल जरुर रहा था, गीतिका ने उस आम को चुसना शुरू कर दिया और मै उसके रसीले होठो को देखने लगा फिर जब उसने मेरी ओर नजरे उठा कर देखि तो उसकी नशीली आँखे ऐसी लग रही थी जैसे कह रही हो की भइया अपनी बहन की कुंवारी चुत में अपना मस्त लंड पेल दोगे क्या।

कल्लु : गुड़िया तू आम चूस तब तक मै और दूसरे आम देखता ह, गुड़िया पेड़ के निचे बैठ गई और मै इधर उधर के पेडो पर आम देखने लगा तभी गुड़िया ने आवाज देकर मुझे बुलाया और एक दुसरा आम दीखाते हुए कहने लगी भैया वो वाला तोड़ो देखो कितना मस्त पका है, मै गुड़िया की बात सुन कर उसके मोटे मोटे चोली में कसे उरोजो को देखने लगा, फिर मैंने कहा गुड़िया वह भी बहुत ऊपर है, तब गुड़िया ने झट से अपना हाथ मेरी ओर लम्बा करते हुए कहा तो फिर उठाओ अपनी बहन को अपनी गोद में।

गुडिया की बात सुन कर मेरे लंड की नशे और भी तन गई और गुड़िया जैसे ही मेरे पास आई उसकी मादक ख़ुश्बू ने अलग पागल कर दिया मै झुका और गुड़िया के भारी भरकम चूतडो को अपनी बांहो में कस कर
उसे ऊपर उठा दिया, जब गुड़िया का चिकना पेट मेरे मुह के पास पहुच गया तब गुड़िया ने मेरे सर को पकड़ते हुए कहा भैया और ऊपर करो न अभी तो आम
बहुत दुर है।
मैने गुड़िया की मोटी जांघो को पकड़ा और दुसरा हाथ गुड़िया की गुदाज चौड़ी गाण्ड के निचे लगा दिया, मुझे ऐसा लग रहा था की मेरा लंड फट जाएग, गुड़िया क
गुदाज चूतडो के नरम नरम माँस को दबोचने में बड़ा मजा आ रहा था, तभी मेरी ऊँगली गुड़िया की गाण्ड के जडो में घुस गई और मै तब चौक गया जब गुड़िया की गाण्ड के गैप में उसका घघरा गीला हो रहा था, मै समझ गया की गुड़िया की रसीली बुर खूब पानी छोड़ रही है, मै बिना घबराये गुड़िया की दोनों जांघो की जडो में अपने हाथ को भर कर गुडिया को और ऊपर उठाने लगा।

मेरे हाथ का पूरा जोर गुड़िया की जांघो की जडो में यानि उसकी फुली हुई बुर और गाण्ड के छेद पर लगा हुआ था, जहा से मैंने गुड़िया को दबा रखा था वही उसका घाघरा काफी गीला लग रहा था, अब मुझे गुड़िया की नीयत पर शक होने लगा था, क्या गुड़िया जानबूझ कर चड्ढी पहन कर नहीं आई थी, क्या गुड़िया भी लंड लेने के लिये तडपने लगी है, पर मै तो उसका भाई हु फिर वह.
मैं सोच में डूबा हुआ था तभी गुड़िया ने कहा भैया अब उतारो भी और मैंने फिर से उसे नीचे उतारा और इस बार फिर उसका गुदाज रसीला बदन मेरे बदन से रगड खाता हुआ निचे आया और फिर से गुड़िया की चुत में मेरे खड़े लंड का एह्सास हुआ, गुड़िया के चेहरे पर मंद मंद मुस्कान
थी। जिसे वह दबाते हुए कहने लगी वाह भैया क्या मस्त आम है, उसके बाद एक दो आम और तोड़ने के बाद मैं और गुड़िया खेत में आ गये, गुड़िया खाट पर बैठ कर आम चुस्ने लगी और मै बाबा के साथ काम में
लग गया, मै दुर से गुड़िया को देख रहा था लेकिन वह मोबाइल में न जाने क्या कर रही थी, तभी मुझे ध्यान आया की मैं किताब झोपड़ी में ही मै भूल गया था
जाकर उसे कही छुपा देता हु नहीं तो गुड़िया के हाथ न लग जाए, जब मै गुड़िया की ओर जाने लगा तब गुड़िया को मैंने फ़ोन पर यह कहते सुना की चल रंडी मै तुझसे बाद में फ़ोन करती हूँ।।

गुडिया : मुस्कुराते हुए क्या हुआ भैया काम में मन नहीं लग रहा क्या या फिर भूख लगी है, अगर भूख लगी हो तो आम चूस लो काफी पके और बड़े बड़े है,
मैने गुड़िया के तने हुए आमो को देखते हुए कहा
हाँ भुख तो लगी है पर तू अपने आम मुझे कहा चुसने देगी।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, तुम मुझसे कहते ही नहीं।
नहीं तो मै क्या अपने भाई को अपने आम न चुसा दूँ।
कालू : चल ठीक है जब मुझे चुसना होगा मै तुझसे कह दुँगा।, इतना कह कर मै झोपड़ी के अंदर गया लेकिन जहा मैंने किताब रखी थी वह वहाँ नहीं थी, अब तो
मै पक्का समझ गया की किताब गुड़िया ने ली है, तभी आज वह पूरी रंडी की तरह मेरे ऊपर चढ़ चढ़ कर मजे ले रही थी, जरुर उसने भाई और बहन की चुदाई वाली कहानी पढ ली थी इसीलिए आज उसकी चुत इतनी गरमा रही है।

मै बाहर आया और गुड़िया की ओर देखा तो वह मुसकुराकर मुझे देखते हुए पहले आम को दबा कर उसका रस बाहर निकाली और फिर मुझे देखते हुए अपनी रसीली जीभ बाहर निकाल कर उसे चाटने लगी, मेरा मन तो किया की अपनी रंडी बहना को वही नंगी करके खूब कस कस कर उसकी मस्त फुली चुत में लंड पेल दू लेकिन मै मन मार कर रह गया और गुड़िया कहने लगी, आओ भइया बैठो।

कल्लु : नहीं गुड़िया बाबा अकेले काम कर रहे है मुझे भी उनकी मदद करना होगा।
गुडिया : माँ कब आएगी खाना खाने का टाइम तो हो गया बड़ी भुख लगी है।
कालू : बस आती ही होगी थोड़ी देर और राह देख ले और फिर मै बाबा के साथ काम में लग गया, कुछ देर बाद माँ नजर आई, और फिर मै और बाबा हाथ मुह धोकर पेड़ की छाँव मै बैठ गए सामने गुड़िया और माँ बैठी थी और उनके सामने मै और बाबा, हमने खाना खाया और फिर बाबा कहने लगे की भाई मेरी तो आज तबियत ठीक नहीं लग रही है इसलिए मै तो घर जाकर आराम करुँगा।

निर्मला तु और कल्लु वो सामने की घास बची है उसे मिल कर काट लेना और उधर गट्ठर बना कर रख देना।

बाबा के जाने के बाद वह बिरजु आ गया और माँ के पैर छुता हुआ कहने लगा पाय लागूं बड़ी माँ।
निर्माला : क्यों रे बिरजु आज कल तो तू इधर का रास्ता ही भूल गया, कहा है तेरी माँ।
बीरजु : बड़ी माँ वहाँ खेत में है, संतोष चाची का खेत नदी के उस पार था और चूँकि नदी में पानी न के बराबर था इसलिए माँ ने गुड़िया से कहा चल गुडिया
तूझे चाची के खेत दिखा कर लाती हु और फिर माँ ने मेरी ओर देखते हुये कहा कल्लु मै अभी एक घंटे में आती हु तब तक तू वहाँ की घास काटना शुरू कर दे फिर मै भी आकर कटवाती हु और माँ गुड़िया के साथ जाने लगी।,
बीरजु बराबर गुड़िया के बोबो को देख रहा था और जब गुड़िया जाने लगी तो वह उसके चूतडो को घुरने लगा, मैंने बिरजु को देखा और जब मैंने गुड़िया के चूतडो
को देखा तो वह बहुत मटक रहे थे, लेकिन तभी मेरी नजर माँ के चूतडो पर पडी तो मुझे मजा आ गया माँ के चूतड़ गुड़िया से काफी बड़े और हैवी नजर आ रहे थे, जिन्हे देखते ही लंड अकड गया था।

कल्लु : क्यों रे आज कल दिन भर अपने खेतो में ही घुसा रहता है गांव में भी कम नजर आता है।
बीरजु : तुझे क्या करना है दादा मै घर में रहु या बाहर।
कालू : अच्छा बिरजु मैंने सुना है तू चुदाई की कहानी की किताब पढता है।
बीरजु : सकपकाते हुये, तुम ।।।।तुमसे किसने कह दिया, मै ऐसे काम नहीं करता हूँ।
कालू : झूठ न बोल मुझे सुख लाल ने सब बता दिया है जब तुम दोनों शहर गए थे और वह तुमने किताब ख़रीदी थी
बीरजु : अरे दादा तुम उसकी बात कहा मान गए वह तो पक्का मादरचोद है।
कालू : अच्छा सुख लाल तो तेरा दोस्त है ना।
बीरजु : अरे दोस्त तो है दादा लेकिन है पक्का मादरचोद।
कालू : वह भला क्यो।
बीरजु : अरे दादा एक दिन मै उसके घर गया तो उसकी माँ ऑंगन में नंगी होकर नहा रही थी और सुख लाल छूप कर अपनी माँ को पूरी नंगी देख रहा था और अपना लंड मुठिया रहा था।
कालू : इस हिसाब से तो तू भी पक्का मादरचोद है।
बीरजु : मुझे देख कर सकपकाते हुये, मै क्यों मादरचोद होने लगा।
कालू : अच्छा कल तो नदी के अंदर झाड़ियो के पास चाची के साथ क्या कर रहा था।

मेरी बात सुन कर बिरजु का गला सूखने लगा और वह हकलाने लगा और कहने लगा वो तो ।।।। वो तो दादा माँ के पांव में काँटा लगा था मै उसे ही निकाल रहा था।
कालू : झूठ न बोल तू समझता है मै कुछ जानता नही, मैंने सब देखा था की तो काँटा निकालने के बहाने क्या देख रहा था।
बीरजु : अपने माथे का पसीना पोछते हुये, नहीं तुम्हे धोखा हुआ है दादा मै कुछ नहीं देख रहा था मै तो बस माँ के पैर में लगे काँटे को निकाल रहा था।

कल्लु : अबे भोसडी के मुझसे नखरे न चोद, नहीं तो समझ लो मै कहा कहा ढिंढोरा पिटूंगा।
बीरजु : तुम गलत सोच रहे हो दादा।
कालू : ज्यादा होशियारी नहीं बेटा, खा जा अपनी माँ की कसम की तू चाची की मस्त फुली हुई चुत नहीं देख रहा था।
बीरजु : बिना कुछ बोले अपने मुह को निचे झुकाये खड़ा था।
कालू : अब क्यों बोलति बंद हो गई।
बीरजु : दादा मुझे माफ कर दो आगे से ऐसा नहीं करुँगा।
कालू : मुस्कुराते हुये, एक शर्त पर माफ़ कर सकता हूँ।
बीरजु : वह क्या।
कालू : तो मुझे वचन दे की आज से मै जो कहुंगा मेरी हर बात मानेगा।
बीरजु : मेरे पांव पकड़ते हुये, दादा तुम तो वैसे भी बड़े भाई हो, आज से यह बिरजु तुम्हरा दास हो गया पर दादा तुम यह बात किसी को नहीं बताओगे ना।
कालू : नहीं बताउंगा, लेकिन तुझे मेरा एक काम करवाना पडेगा।
बीरजु : कौन सा काम।
कालू : मुझे भी चाची की फुली हुई चुत देखना है।
बीरजु : लेकिन दादा यह सब मुझसे कैसे होगा वो तो उस दिन इतफ़ाक़ से मुझे माँ की चुत के दर्शन हो गये, नहीं तो माँ तो मुझे छोटा बच्चा ही समझती है।
और बापु तो शहर में नौकरी करता है और महिने भर में आता है और माँ अपनी चुत कभी कभी खुद ही रगड लेती है।

कल्लु : अच्चा यह बता तेरा मन भी होता है न अपनी माँ संतोष को नंगी करके चोदने का।
बीरजु : मुस्कुराते हुये, अरे दादा मन होने से माँ चोदने को थोड़े ही मिल जयेगी ।
कालू : अगर तू मेरी मदद कर दे तो मै तुझे तेरी माँ को चोदने की व्यवश्था कर सकता हूँ।
बीरजु : लेकिन कैसे।
कालू : कल दोपहर को मै तेरे खेतो में आउंगा तब वही बात करेगे लेकिन यह बात हम दोनों के बीच ही रहनी चाहिये।
बीरजु : ठीक है दादा लेकिन तुम भी वह नदी वाली बात किसी से न कहना।
कालू : हाँ ठीक है चल अब तो यहाँ से कट ले कल मिलेगे उसके जाने के बाद मै खेतो में जमी घास काटने लगा और उधर माँ और गीतिका चाची के खेतो की ओर पहुच गई थी।

संतोष चाची : और सुनाओ दीदी तुम्हे तो आजकल मेरे पास बेठने की भी फुर्सत नहीं है।
निर्माला : नहीं रे ऐसी बात नहीं है, बस काम में ही लगी रहती हूँ।
संतोष : गीतिका को सामने टहलते हुए उसके मोटे मोटे लहराते चूतडो को देख कर, क्यों दीदी अब तो गीतिका भी बड़ी हो गई है, इसकी शादी वादी के बारे मे
सोचा है की नही।
निर्माला : अरे अभी तो वह और आगे पढना चाहती है कहती है अभी तो मै छोटी हूँ।
सन्तोष : अरे कहा छोटी है उसके चूतडो का उठाव तो देख, इसकी उम्र में तुम और मै तो बच्चे जन चुकी थी और वह कहती है की छोटी है, अच्छा तुम ही
बाताओ अभी बुढों के सामने नंगी करके खड़ी कर दो तो उनका लंड खड़ा हो जाए।
निर्माला : चुप कर रंडी, अभी वो सुन लेगी तो क्या सोचेगी।
संतोष : अरे दीदी सुन लेगी तो कुछ न सोचेगी, आज कल तो लड़किया आपस में यही सब बाते करती ही है, और सुनाओ जब से भैया ने तुम्हे चोदना बंद किया है तब से तुम कुछ ज्यादा ही गदरा गई हो, अब तो चलने पर भी तुम्हारे चूतड़ खूब मटकने लगे है।
निर्मला : तू भी तो लंड के लिए तरसती रहती है, तेरा आदमी भी तो शहर में ही पड़ा रहता है, इसीलिए तुझे दिन रात यह सब बाते ही सूझती है।
संतोष: अरे दीदी, सुबह से घाघरे से चुत का पानी पोछना शुरू करती हु तो घाघरा पूरा गीला हो जाता है, कई बार तो बिरजु भी कहने लगता है, माँ तेरा घघरा
कहा से गीला हो गया।
निर्माला : लो तो अब हालत इतनी ख़राब है की बेटा खुद माँ को बता रहा है की तेरे चुत से रस बह बह कर तेरे घाघरे को गीला कर रहा है, कही तेरे घाघरे की
गंध सूँघ कर तेरा बेटा समझ न जाये की यह पानी तो उसकी अपनी माँ की फुली चुत से रह रह कर रिस रहा है।

संतोष : अरे दीदी आज कल के लोंडो का कोई भरोषा नहीं हम उन्हें बच्चा समझते है और वह हमें नंगी करके चोदने का सोचने लगते है।
निर्माला : ऐसा क्या हो गया।
संतोष : अरे क्या बताऊ दीदी कल नदी पार करते हुए मेरे पेरो में काँटा लग गया तब मैंने बिरजु से कहा बेटा देख जरा काँटा कहा लगा है तो उसने मेरी टाँगो
को उठा कर देखना शुरू किया और फिर मैंने उसे ध्यान से देखा तो मुआ मेरे घाघरे के अंदर से मेरी चुत देखने की कोशिश कर रहा था।
निरमला : तूने कुछ कहा नही।
संतोष : मैंने कहा क्या कर रहा है जल्दी निकाल, तो कहने लगा माँ निकाल तो रहा हु बहुत गहरा लगा है थोड़ा पैर और ऊपर उठाओ, मुझे तो लगता है उसने मेरी पुरी फटी हुई चुत को खूब अच्छे से देखा है।
निर्माला : वह तो मस्त हो गया होगा तेरी फुली चुत देख कर।
संतोष : हाँ दीदी वह तो मेरा पैर छोड़ ही नहीं रहा था और मेरी टांगो को कस कर पकडे हुए ऊपर उठा रहा था।
निर्माला : तेरा बेटा अब जवान हो गया है उसे भी चोदने का मन करता होगा अब उसके लिए लुगाई का बंदोबस्त कर ले नहीं तो वह कही तुझे ही न छोड़ दे,
यह कहते हुए निर्मला हँस पडी।
संतोष : हसो मत दीदी, जिसके घर खुद शीशे के होते है उसे दूसरो के घरो में पथ्थर नहीं फ़ेकना चहिये।
निर्माला : क्या मतलब।
संतोष : मतलब की केवल मेरे ही घर जवान बेटा नहीं है, तुम्हारे भी एक जवान बेटा है और वह तो और भी मुस्टंडा हो गया है, कही ऐसा न हो की तुम मुझ पर हसो और वह तुम्हे ही चोद दे।
निर्माला : नहीं मेरा बेटा बड़ा भोला है वह ऐसी नजरे मुझ पर डाल ही नहीं सकता।
संतोष : अरे दीदी ऐसे भोले ही तो ज्यादा खुराफ़ाती होते है, कभी गौर करना अपने बेटे की नज़रो पर, जरुर तुम्हारे चूतडो को घूरता होगा।





निर्माला : चुप कर गीतिका आ रही है।
गीतिका : कहो चाची कैसी हो।
संतोष : मै तो ठीक हु गीतिका तू बता जब से शहर पढने गई है अपनी चाची को तो भूल ही गई।
गीतिका : अरे चची भूली होती तो माँ को ले कर यहाँ क्यों आती, अब तो कभी आप आ जाओ तो आपको शहर घुमा देति हूँ।
सन्तोष : अरे बिटिया अपने ऐसे भाग्य कहा, तेरे चाचा रहते तो है पर मुझे ले जाने की उनको फुर्सत कहा है।
गीतिका : अरे वो नहीं ले जाते तो क्या हुआ आप ही चलो मेरे साथ।
संतोष : देख कभी मोका लगा तो जरुर चलुंगि।
निर्माला : चल संतोष अब मै चलती हु बड़ा काम पड़ा है और कल्लु अकेले लगा होगा आज तो उसके बाबा की भी तबियत ठीक नहीं लग रही थी तो वह भी घर
चले गए है।

थोड़ी देर बाद माँ वहाँ से वापस आ गई और फिर गुड़िया आराम से खटिया पर लेट गई और माँ अपनी गुदाज मोटी गाण्ड मेरे मुह की ओर करके निचे बेठी और घास काटने लगी।
थोड़ी देर बाद घास काटते काटते हम दोनों एक दूसरे के सामने आ गए तभी मेरी नजर माँ की दोनों जांघो की गैप में पड़ी तो मेरी आँखे खुली रह गई, मेरी माँ की मस्त फुली हुई चिकनी चुत अपनी फांके
फैलाये मेरी और देख रही थी, माँ की भोसडी पर एक भी बाल नहीं था और बहुत चिकनी लग रही थी, उसकी चुत की फाँके बहुत फुली हुई नजर आ रही थी, और माँ का ध्यान जमीन पर घास काटने में लगा हुआ था।

मा की मस्त बुर देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया था और धोती में बड़ा भारी तम्बू बनाये हुए था, मै टक टकी लगा कर माँ की मस्त चुत देख रहा था, घास
काटते हुए माँ जब बैठे बैठे आगे बढ़ती तो उसकी फुली चुत की फाँके और भी खुल जाती और माँ की चुत का गुलाबी रसीला छेद भी नजर आ रहा था, तभी माँ ने मुझे अपनी मस्त चूत को घुरते हुए देख लिया और पहले तो माँ ने ध्यान नहीं दिया फिर जब उसे मेरे लंड का तम्बू नजर आया तो उसकी नजरे मेरी नज़रो से मिली और मा मंद मंद मुस्कुराते हुए दूसरी ओर घुम गई और घास काटने लगी, मेरा लंड अकड़ा जा रहा था और मैंने अपने लंड को धोती के ऊपर से मसलते हुए माँ की चूत की कल्पना करने लगा।





निर्माला : मन ही मन में मुस्कुराते हुए अपनी गर्दन झुका कर अपनी फटी चुत और उसकी फुली फाँको को देखति हुई, सोचने लागि, बाप रे कल्लु का लंड कितना मोटा और बडा लग रहा है, कैसे मेरी भोस को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था, उसका लंड मेरी भोस को देख कर कैसे किसी डण्डे की तरह खड़ा हो गया था, संतोष सच ही कहती है आज कल के लड़को का कोई भरोषा नहीं है।

पर मेरी बुर क्यों फूल रही है, और निर्मला ने अपनी बुर को हाथ लगा कर देखा तो उसके हाथ में पानी आ गया, उसके अपनी बुर को रगडा और फिर कुछ सोच कर, खड़ी हो गई और कल्लो की ओर देख, और उसकी नजर कल्लु के तने हुए लंड पर पडी, तो वह सोचने लगी हाय राम यह तो और भी बड़ा हो गया, कितना मस्त लंड है कल्लु का।

निर्माला : बेटे मै वहा का गठ्ठर इसमें मिला देती हु तू यही बैठ कर बांध लेना और निर्मला अपने भारी चूतडो को मटकाते हुए जाने लगी, उसकी घुटनो तक के घाघरे में उसकी गोरी पिण्डलिया और मोटी जांघो की झलक दिखाई दे रही थी, और वह यह देखना चाहती थी की कल्लु उसके भारी चौड़े चौड़े चूतडो को देखता है की नही, जब उसने पीछे मुड कर देखा
तो कल्लु अपनी माँ की मोटी लहराती गाण्ड को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था, और निर्मला की साँसे तेज चलने लगी, निर्मला गठ्ठर लेकर वापस कल्लु की ओर आने लगी और उसकी निगाहें कल्लु के मोटे लोडे पर ही थी।

निर्माला को तभी संतोष की काँटा लगने वाली बात याद आ गई और निर्मला को यह भी याद आया की कैसे संतोष का बेटा काँटा निकालने के बहाने अपनी माँ की
गुलाबी रसीली बुर को खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था, क्या सोच रहा होगा बिरजु अपनी गदराई माँ की मस्त चुत देख कर, जरुर उसका मन अपनी माँ की चुत में मुह डाल कर चुस्ने का कर रहा होगा।
या फिर वह अपनी माँ की फुली हुई चुत देख कर अपने मोटे लंड को ड़ालने के बारे में सोच रहा होग, पर यह सब मै क्यों सोच रही ह, मेरी चुत इतनी क्यों मस्त हो रही है।

मै भी बिलकुल ध्यान नहीं रखती हु कैसे मैंने अपने ही बेटे को अपनी मस्त गदराई चुत दिखा दी, पूरी खुल के फ़ैली हुई थी मेरे बेटे ने तो मेरा गुलाबी छेद भी देख लिया होगा।
पर मेरा मन ऐसा क्यों कर रहा है की मै उसे फिर से अपनी भोस दिखा दूँ, तभी मेरे पैरो में कुछ थोड़ा सा चुभा और न जाने क्यों मैंने जोर से कहा आह राम काँटा लग गया।
और मै वही अपनी मोटी जांघे फैला कर जमीन पर बैठ गई।

कल्लु : क्या हुआ माँ।
निर्माला : देख तो बेटा मेरे तलवो में काँटा घुस गया है और फिर मैंने अपनी टांगे उसके मुह की ओर उठा दी।हाय क्या टांगे थी माँ की बहुत चिकनी गोरी और गदराई लग रही थी मैंने उसकी गुदाज पिण्डलियों को
पकड़ कर काँटा देखते हुए कहा, कहा लगा है माँ मुझे तो दिखाई नहीं दे रहा, माँ ने अपनी जांघो को और फ़ैलाते हुए कहा जरा झुक कर अच्छे से देख बेटे, मैंने जैसे ही झुक कर माँ की टांगो को और ऊपर किया। उसकी मस्त फुल्ली चुत अपनी फाँके फ़ैलाये मुझे देख रही थी और उसकी चुत का गुलाबी छेद पूरा पानी से भरा नजर आ रहा था, क्या मस्त भोस थी माँ की।

निर्माला : कल्लु की ओर देखते हुए सोचने लगी कैसे किसी प्यासे सांड़ की तरह देख रहा है अपनी माँ की चुत को ऐसा लगता है मुह डाल कर मेरी चुत को खा जाएगा।
उसका लंड कितना बड़ा है, पूरा काला और खूब मोटा होग, मेरी चुत को तो पूरी फाड् कर रख देगा, हे भगवन मै यह सब क्या सोच रही हु और अपने बेटे को अपनी चुत खोल कर दीखाते हुये मेरी चुत इतना मस्ता क्यों रही है, कितना पानी रिस रहा है बुर से।

निर्माला : दिखा बेटे।
कालू : माँ की भोस को ताड़ते हुये, हाँ माँ नजर तो आ गया है पर तू पीछे हाथ टीका कर आराम से बैठ जा मै अभी निकालता ह, माँ मुझे देखति हुई पीछे अपने हाथ टीका कर बैठ गई और उसकी जाँघे अपने आप और
भी खुल कर चौड़ी हो गई अब माँ की भोस की फाँके पूरी खुली हुई थी और मै उसकी एक टाँग पकडे बस उसके तलवे सहला रहा था, कुछ देर तक माँ की मस्त चुत घुरने के बाद मैने देखा माँ भी कनखियों से मेरे लंड के उठाव को देख रही है, पर माँ की बुर कितनी मस्त और रसीली है, कल बिरजु भी चाची की यानि अपनी माँ की बुर को ऐसे ही देख देख कर मजे ले रहा था।

लागता है बिरजु अपनी माँ को खूब चोदना चाहता है, पर मेरी माँ की गुदाज चुत है कितनी चौड़ी और फटी हुई चुत है माँ की इसमें मेरा लोडा पूरा समां जाय तो कितना मजा आयेगा।
निर्माला : निकला बेटे, मेरे पैर ऊपर उठाये उठाये दर्द करने लगे है।
कालू : बस माँ निकलने वाला है तू अपने पैर को ऊपर ही उठाये रहना बस अभी तेरे अंदर घुसा काँटा निकल जाएगा।
कुछ देर तक मै माँ की चुत घूरता रहा फिर मैंने पैर निचे रखते हुए कहा माँ काँटा निकल गया है।

निर्माला : आह बड़ा दर्द हुआ रे।
कालू : ज्यादा मोटा था ना।
निर्माला : मंद मंद मुस्कुराते हुये, हाय रे बहुत ही मोटा था क्या।

उस दिन पूरा दिन मेरे सामने माँ के मोटे मोटे चूतड़ और मस्त फुली चुत ही घूमते रहा, अगले दिन गुड़िया जाने को तैयार हो गई।
कालू : गुड़िया अब कब आयेगि।
गीतिका : भैया अब तो जल्दी ही आउंगी और कुछ दिनों की छुटटी लेकर आउंगी, मैंने गीतिका को साईकल पर बेठा लिया और उसकी गुदाज गाण्ड मेरे लंड से सट गई फिर साईकल चलाते हुये मै उससे बाते करने लगा, और फिर बस स्टैंड आ गया और गुड़िया एक दम से मेरे सिने से लग गई, आज पहली बार मुझे गीतिका के मोटे मोटे कसे हुए दूध का मस्त सा
एहसास हुआ क्योंकि गीतिका ने अपनी छातिया बहुत जोरो से मेरे सिने से चिपका ली थी, मैंने भी गुड़िया के गालो को चुमते हुए एक बार उसके भारी चूतडो में हाथ फेर दिया।
गुडिया : भैया मुझे आपकी सबसे ज्यादा याद आती है, मै आपको बहुत मिस करुँगी।
कालू : मुझे भी तेरे बिना अच्छा नहीं लगता तो जल्दी से एक लम्बी छुटटी लेकर आजा फिर हम खूब मजे करेगे।
गुड़िया : रोते हुए ओके भेया।
कालू : जरा एक बार मुसकुराकर कर बोल।
गुडिया : मुस्कुराते हुए बाय भैया आई लव यु, उसके बाद बस चल दी और कल्लु बुझे बुझे मन से वापस गांव की और साईकल मोड़ देता है।

होस्टल में मोनिका टी वी देख रही थी और फिर गीतिका आ गई गीतिका को देख कर मोनिका उससे चिपक गई।
मोनिका : क्यों परी क्या विचार है, अपना रसीला जूस पिलाओगी।
गीतिका : रुक जा पहले मुझे चेंज तो कर लेने दे।
मोनिका : गीतिका का हाथ पकड़ कर बेड पर खीचते हुये, मेरी जान तू तो मुझे नंगी ही अछि लगती है।
गीतिका : पहले मुझे वो निग्रो वाली मूवी तो दिखा।
मोनिका : लगता है तो भी बड़ी चुदासी है अपने गांव में किसी का तगड़ा लंड ले लेती ना।
गीतिका : यार मोका ही नहीं लगा नहीं तो लंड तो बहुत है।
मोनिका : वो देख उस निग्रो के मोटे और काला लंड की बात कर रही थी मैं।
गीतिका : हाय क्या मस्त लंड है, कितना मोटा है।
मोनिका : क्या बात है आज तेरी चुत पहले से ही पानी छोड़ रही है।
गीतिका : अरे मेरी चुत तो 4 दिन पहले से ही पानी छोड़ रही है।
मोनिका : क्यों ऐसा क्या हो गया।
गीतिका : अरे इस बार गांव में आम खाने में बड़ा मजा आया, मै अपने भैया के ऊपर चढ़ कर आम तोड़ रही थी और भैया मुझे अपनी गोद में उठाये खड़े थे।
मोनिका : क्या बात कर रही है, फिर तो तेरे भैया ने तुझे खूब मसला और दबोचा होगा।
गीतिका : हाँ पर मै भी जानबूझ कर घाघरे के निचे पेंटी पहन कर नहीं गई थी मै पहले से ही भैया के साथ घाघरे के निचे नंगी जाने को रेड्डी हो गई।
मोनिका : ऐसा क्योँ।
गीतिका : मैंने भैया की एक किताब देखी जिस्मे भाई और बहन की चुदाई की कहानिया लिखी थी बस मैंने वह पढ़ी और मुझे भैया की नीयत का अन्दाजा हो गया।
मोनिका : तेरा मतलब यह है की तुझे ऐसा लगता है जैसे तेरे भैया तुझे चोदना चाहते हो।
गीतिका : हाँ और फिर जब मै उनके ऊपर चढ़ी तो कई बात तो मैंने अपनी चुत भी उनके मुह से रगड दी।

मोनिका : तो तूने अपनी चुत मरवाया क्यों नही, वही आम के बगीचे में खूब तबियत से चुद लेती किसी को पता भी नहीं चलता।
जीतिका : नहीं यार भैया भाई बहन की चुदाई की किताबे पढ़ते है इससे यह पक्का तो नहीं होता न की वह मुझे अपनी बहन को ही चोदना चाहते है।
मोनिका : गीतिका के मोटे मोटे दूध दबाते हुये, अच्छा तो अगर मैडम के भैया उनको पूरी नंगी करके चोदना चाहे तो क्या आप चुद्वाओगि।
गीतिका : मुस्कुराते हुये, मै कैसे चुदवाऊंगी, भला कोई अपने सगे भाई से अपनी चुत मारवाता है क्या।,
मोनिका : अरे रंडी परी आज कल तो लोग अपने बाप से चुदवा लेते है वह तो फिर भी भाई है, और देखना जब तेरे भैया का लंड तेरी बुर में घुसेगा तो तुझे सबसे ज्यादा मजा आएगा।,
गीतिका : आह थोड़ा दाने को सहला न, कितना कस कस कर चोद रहा है वह काला।
मोनिका : अच्छा तूने लंड देखा है तेरे भैया का।
गीतिका : कपडे के उपर से देखा है बहुत बड़ा और मोटा नजर आता है, बिलकुल काला होगा।
मोनिका : मुस्कुरा कर यह कैसे कह सकती है।
गीतिका : मुस्कुराकार, उनके नाम पर गया होगा।
मोनिका : यार तू भी न इतना अच्छा मोका था तुझे चुद ही लेना था, बोल कब चुदेगी अपने भैया से।
गीतिका : तू ही बता यार मुझे तो कुछ समझ में नहीं आ रहा।
मोनिका : अरे इसमें समझना क्या है कॉलेज से छुटटी मार और पहुच जा अपने गांव, घर में तबियत ख़राब का बहाना कर लेना और आराम से एक महिने खूब कस कर चुत मरवा लेना अपने भैया से।

गीतिका : नहीं यार अभी जाऊंगी तो ठीक नहीं रहेगा। कुछ समय बाद जॉउगी, ले अब तो चूस कर मुझे थोड़ी राहत तो दे, उसके बाद दोनों एक दूसरे की मस्त रसीली बुर को चुस्ती हुई सो गई।
करीब 2 महिने बीत चुके थे, और फिर बारिश शुरू हो गई और इस बार गीतिका एक लम्बी छुटटी लेकर चली वह अब मस्ती के मूड में थी, और फिर गीतिका बस से उतरी और सामने कल्लु को खड़ा देखा।
मुस्कराते हुए उसके सिने से लग गई, कल्लु ने भी अपनी बहन की गुदाज जवानी को अपनी बांहो में भर लिया और फिर गीतिका को साईकल पर बेठा कर गांव की ओर चल दिया।





कल्लु : गुड़िया इस बार तो जीन्स पहन कर नहीं आई।
गीतिका : मुस्कुरा कर क्यों आपको मै जीन्स में ज्यादा अच्छी लगती हु क्या।
कालू : हाँ वो तो है, वैसे तो सभी कपडो में मस्त दिखती है।
गीतिका : पर आपने पहले से सोच रखा होगा की गीतिका जीन्स पहन कर बस से उतरेगी।
कालू : मुस्कुराते हुये, हाँ पहले तुझे जीन्स में देखा था न बस इसिलिये।

धीरे धीरे हम गांव पहुच गए और फिर अगले दिन गीतिका भी मेरे साथ खेतो में चल दी, गीतिका मेरे साथ चल रही थी और उसने आज फिर घाघरा चोली पहना हुआ था, मै उसके गले में हाथ डाल कर चल रहा था और बीच बीच मै उसके मस्त उभरे हुए चूतडो को भी सहला देता था, खेत में पहुंचने के बाद गीतिका काफी खुश होते हुये कहने लगी भैया बारिश के बाद गांव में कितनी हरियाली हो जाती है, अब तो कही भी नरम नरम घास में बैठ जाओ।

गीतिका : भैया आम का मौसम इतनी जल्दी क्यों ख़तम हो गया।
कालू : अरे तो क्या साल भर आम लगे रहेगे।
गीतिका : भैया मुझे तो बोरियत हो रही है।
कालू : चल तुझे नदी की तरफ घुमा कर लाता हूँ।
गीतिका : खुश होते हुए हाँ भैया चलो आप मुझे तैरना सीखाने वाले थे ना।
कालू : अरे ऐसे घाघरा चोली में तुझसे तैरते नहीं बनेगा कल दूसरे कपडे पहन कर आना फिर तुझे तैरना सीखा दुँगा।


गीतिका : अच्छा ठीक है, मै खुद भी घबरा रही थी की कही भैया अभी मुझे घाघरा उतार कर तैरने के लिए न कहने लगे नहीं तो उनसे क्या कहूँगी की मै अंदर चडडी
पहन कर नहीं आई हूँ।

तभी सामने से बिरजु आ गया और
बीरजु : अरे गीतिका दीदी तुम्हे मेरी माँ बुला रही है, वह नदी किनारे कपडे धो रही है जाओ चली जाओ।
उसकी बात सुन कर गीतिका मेरी ओर देखने लगी तब मैंने कहा गुड़िया जा चलि जा मै थोड़ी देर में आता हूँ। मेरे कहने पर गुड़िया वहाँ से जाने लगी और उसके चूतडो को बिरजु घुरते हये उसके पीछे पीछे जाने लगा।
कालू : ये बिरजु रुक तू कहा जा रहा है।
बीरजु : अरे दादा हमें भी नहाना है नदी किनारे माँ कपडे धो रही है हम तो सिर्फ गीतिका दीदी को बुलाने आये थे माँ पूछ रही थी।
कालू : अरे नहा लेना पहले तू मेरी बात तो सुन आ बैठ यहॉ, बिरजु मेरे बगल मै बैठ गया और मैंने उसके काँधे पर हाथ फेरते हुए कहा, अच्छा बिरजु यह बता कभी तूने चाची को मुतते हुए देखा है या नहि।
बीरजु : देखा है भेया।
कालू : कैसी है तेरी माँ की चूत, बड़ी मोटी धार के साथ मुतति होगि।
बीरजु : अरे भैया माँ की चुत तो बहुत मस्त और बिलकुल चौड़ी और गुलाबी है जब मुतती है तो बड़ी मोटी धार निकलती है लेकिन भैया।
कालू : अबे लेकिन क्या बे।
बीरजु : दादा माँ से भी ज्यादा बड़ी और मस्त फुल्ली हुई चुत है बड़ी माँ की और जब वह मुतती है तो उनकी चुत से पेशाब की धार इतनी मोटी निकलती है की क्या बताऊ।
कालू : अबे हरामि तूने कब देख ली मेरी माँ की चूत।
बीरजु : वो दादा जब बड़ी माँ और माँ दोनों खेत में बैठ कर बाते करती है तब उन्हें पेशाब लगती है तो झोपडी के पीछे जाकर मुतती है और बस मै झोपडी के अंदर से छूप कर उनकी मस्त चुत के दर्शन कर लेता हु।
कालू : तू तो बड़ा हरामि है साले, फिर क्या करता है चुत देख कर।
बीरजु : दादा वाही खड़ा होकर मुट्ठ मार लेता हु बड़ा मजा आता है।
कालू : यार मुझे भी अपनी माँ की चुत के दर्शन करवा दे।
बीरजु : क्यों बड़ी माँ की चुत नहीं देखना चाहोगे, बड़ी माँ तो और भी ज्यादा मस्त माल है, मैंने तो बड़ी माँ और माँ के मोटे मोटे चूतडो को भी पूरा नंगा देखा है, सच दादा अगर तुम बड़ी माँ को नंगी देख लो
तो तुम्हारा लंड पानी छोड़ देगा।

कल्लु : तूने मेरी माँ और चाची के चूतडो को कब देखा है।
बीरजु : अरे दादा नदी के किनारे के पेड़ के ऊपर चढ़ कर जब माँ और बड़ी माँ नहाने आती है, तब कई बार दोनों नंगी होकर ही नदी में नहा लेती है, दादा मै तो जब बड़ी माँ के मोटे मोटे चूतडो को घाघरे के उपर से मटकते देखता हु तो मुझे उनकी गाण्ड मारने का बड़ा मन करता है।
कालू : और क्या क्या देखा तूने जरा खुल के बता ना।
बीरजु : दादा मैंने तो दोनों को गन्दी बाते करते हुए भी सुना है और तो और अपनी माँ को मैंने अपनी चुत में ऊँगली पेल कर मुट्ठ मारते हुए भी देखा है।
कालू : कहा वही झोपडी के पीछे जाकर मुट्ठ मारती है क्या।
बीरजु : हाँ।

कल्लु : तूने मेरी माँ को मुट्ठ मारते हुए नहीं देखा।
बीरजु : नहीं पर एक बार बड़ी माँ को मैंने ऐसी हालत में देखा की क्या बताऊ मै तो मस्त हो गया था, जानते हो बड़ी माँ एक बार झोपडी के पीछे मुतने गई और खड़े खड़े ही अपनी चुत से मोटी धार मारने लगी
सच दादा बड़ी माँ को खड़ी खड़ी मुतते देखने पर ही मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया था।
कालू : साले तू तो बड़े मजे मार रहा है, अब मेरा भी कुछ करवा दे।
बीरजु : दादा मै क्या करवा सकता हु तुम अपने हिसाब से देख लो और वैसे भी कौन सा तुम्हारी या मेरी माँ हमसे चुदवा लेगी।
कालू : साले तू तो कोशिश कर रहा है न अपनी माँ को पटाने की।
बीरजु : अरे तुम क्या जानते नहीं मेरी माँ को वह मुझसे क्या पटेगी, उलटे मैंने कोई हरकत की तो मारेंगी अलग।
कालू : अच्छा एक बार चाची की मस्त चुत के दर्शन तो करवा दे, देख तूने तो काँटा निकालने के बहाने अपनी माँ की चुत को खूब फैला फैला कर देखा है एक बार हमें ही दिखा दे।
बीरजु : चलो कुछ मोका लगा तो बताऊँगा अभी तो मै जाता हु।
कालू : सुन माँ और गीतिका को भेज देना।

थोड़ी देर बाद माँ और गीतिका आ रही थी और मै खेतो के काम में लग गया, तभी माँ मेरे पास आकर बैठ गई और घास काटने लगी उसका मुह मेरी ओर था और उकडू बैठ कर घास काटते हुए जब वह थोड़ी आगे बढ़ी तो उसकी जाँघो में फसा घाघरा निचे सरक गया और माँ की मस्त फुली हुई बड़ी बड़ी फाँको वाली चुत एक दम से खुल कर मेरे सामने आ गई, बिलकुल गुलाबी और उसकी चुत का बड़ा सा दाना ऐसे तना हुआ था की दिल कर रहा था की उसकी पूरी चुत को
मुह में भर कर चूस लु और खूब कस कस कर नंगी करके चोदूं अपनी माँ को।


मा का चेहरा लाल हो रहा था और उसकी नजर मेरे धोती में छूपे हुए मस्त काला लंड पर थी, पर मै उस समय बहुत उत्तेजित हो गया जब मैंने गौर से देखा की
मा की चुत से हलके हलके पानी रिस रहा है, मेरा लंड धोती फाड कर बाहर आने को उतावला हो रहा था।

निर्माला : कल्लु तुझे चाची ने शाम को बुलाया है उसे कुछ काम था।
कालू :क्या काम था।
निर्माला : मुस्कुरा कर अब यह तो खुद ही पूछ लेना, न जाने उसे तुझसे क्या काम है दो तीन दिन से रोज तेरे बारे में पूछती है।
कालू : होगा कुछ बोझा उठाने का काम।
निर्माला : अब तेरे चाचा तो यहाँ रहते नहीं और बिरजु भी अभी छोटा ही है, हो सकता है चाची के पास तेरे लायक कोई काम हो, यह कह कर माँ मुस्कुरा दी
मेरा लंड माँ की बातो से और भी खड़ा हो रहा था, खेर माँ कोई भी काम हो करना तो पड़ेगा ही आखिर मेरी सागी चाची जो है।
निर्माला : कभी अपनी माँ का भी ख़याल आता है तुझे अपनी माँ का भी काम कर दिया कर।
कालू : माँ की मस्त फुल्ली चुत देखते हुये, तू बोल तो सही तेरे तो सारे काम सबसे पहले करुँगा।
निर्माला : कल्लु के लंड को देखते हुये, जा पहले चाची का काम तो कर दे फिर मेरा भी कर देना, उस दिन शम को मै चाची के खेतो में चला गया और सामने चाची
झोपडी के बाहर बैठ कर एक ट्यूबवेल के पानी से अपने घाघरे को जांघो तक चढ़ाये हुए अपनी गोरी गोरी जांघो और पिण्डलियों को धो रही थी, मेरा लंड चाची की गदराई जाँघो को देख कर मस्त खड़ा हो गया, चाची की जाँघे बिलकुल मेरी माँ की तरह ही खूब मोटी और गदराई हुई थी और उनकी जंघे और पिण्डलिया बिलकुल मेरी माँ की मदमस्त जांघो के जैसी गोरी और खूब चिकनी थी, हलाकि माँ की जाँघे और भी ज्यादा मोटी थी लेकिन चाची पूरी मस्ती में अपनी जांघो को रगड रगड कर धो रही थी, उसे बिलकुल भी मेरा ध्यान नहीं था।
और मै भी चाची की गदराई मोटी जांघो को देख कर पागल हो रहा था मेरा लंड धोती में बड़ा सा तम्बू बनाये खड़ा हो गया था और मै अपने लंड को हलके हलके मसल रहा था तभी चाची ने एक दम मेरी ओर देखा और उनकी नजर मेरे मस्त फौलादी लंड पर पड़ गई, चाची को देख हम दोनों की नजरे मिली और फिर मैंने लंड पर से हाथ हटा लिया लेकिन चाची ने अपने घाघरे को निचे नहीं किया और मेरी और मुसकुराकर देखति हुई बोलि, आ कल्लु क्या बात है आज कल तो तू अपनी चाची से बात भी नहीं करता है मेरे पास आना तो दुर की बात है.

कल्लु : नहीं ऐसी बात नहीं है, मेरी निगाहें चाची की मोटी चिकनी जांघो से हट ही नहीं रही थी और चाची मेरी नज़रो को ताड गई थी
चाची : आ बैठ मेरे पास मै जरा हाथ पैर धो लु बड़ी जलन हो रही थी पेरो में और फिर चाची ने अपनी जांघो को सहलाते हुए पानी डालना शुरू किया।
चाची : पानी बड़ा मस्त है कल्लु पियेगा, चाची ने मेरी ओर कातिल निगाहें मारते हुए कहा।
कालू : चाची की जवानी को ऊपर से निचे तक घुरते हुये, हाँ चाची प्यास तो मुझे भी लगी है पीला दो पानी।

चाची एक पत्थर पर बैठी थी और उसके सामने एक गड्ढ़ा था जिस्मे पानी इकठ्ठा होता था। चाची ने पानी की नली पकड़ कर मुझे सामने आने को कहा और उस पत्थर पर ऐसे बैठ गई जैसे मुतने बेठती है।
जब मै सामने आकर बेठा और अपने मुह को झुका कर पानी पिने लगा तब चाची की जांघो की जडो में मेरी नजर गई और मेरी साँसे वही थम गई चाची का मस्त फुला हुआ भोस देख कर मेरा लंड झटके देने लगा मेरी पानी पिने की रफ़्तार धीमी हो गई और मै चाची की फुल्ली हुई फाँके और फ़ाँको के बीच के गहरे कटाव को देख कर मस्त हो गया।

चाची : मुस्कुराते हुए कहने लगी तू तो बड़ा प्यासा है कालू, लगता है सारा पानी पी जाएगा।
कालू : क्या करू चची गर्मी भी तो इतनी है।
चेची : आराम से पी ले कल्लु तेरी चाची की टूबवेल का पानी बड़ा मीठा है।
पानी पिने के बाद मै वही बैठा रहा और चाची की मस्त चुत को देखता रहा।
चाची : और बता मैंने सुना है आज कल तो दिन भर गीतिका तेरे ही आगे पीछे घुमति रहती है।
कालू : हाँ वो तो है आखिर इतने दिनों बाद जो मिलति है मेरी गुडिया।
चेची : लगता है बहुत चाहता है अपनी बहना परी को लेकिन जब वह शादी करके चलि जायेगी तब क्या करेंगा।
कालू : अरे चाची अभी तो वह छोटी है कहा अभी से उसकी शादी कर रही हो।
चाची : अरे क्या बात करता है बेटा, इतनी भरी पूरी जवान तो हो गई है, साल भर पहले ब्याहि होती तो अभी उसकी गोद में बच्चा खेल रहा होता, कभी गौर से देखा नहीं क्या अपनी बहन को।
पुरी तेरी माँ पर गई है, तेरी माँ से कम न पडेगी।

कल्लु : लेकिन चाची माँ तो बहुत मोटी और भारी है, और गुड़िया तो कमसीन लड़की है।
चाची : अरे तेरी माँ शादी के बाद इतनी फैल गई है, अभी गीतिका को देखना जब वह अपने पति के पास से होकर आएगी तो उसका भी अंग अंग खूब फ़ैल जाएगा।

चाची की बाते सुन कर मेरा लंड खूब मस्त हो रहा था और चाची अपनी मस्त चुत फ़ैलाये मुझसे बाते कर रही थी।
चाची : वैसे पिछ्ली बार जब गुड़िया आई थी तब तूने उसे आम चुसाये थे की नहीं या फिर गुड़िया तुझसे केला खाने की जिद कर रही थी, यह बात बोल कर चाची हॅसने लगी, मै भी उनके साथ मुस्कुरा दिया।
कालू : नहीं चाची मैंने उसे खूब आम चुसाये थे, केला तो मैंने पूछा ही नहीं की उसे पसंद है की नही।
चाची : वैसे केला तेरी माँ को बहुत पसंद है, गुड़िया को भी केला खिलायेगा तो उसे भी पसंद आएगा, हर लड़की को केला बहुत पसंद होता है।
कालू : आपको भी केला बहुत पसंद है क्या।
चेची : हाँ रे केला खाने का बड़ा मन करता है लेकिन अब मुझे कौन केला खिलायेंगा।
कालू : मै हु न चाची मुझसे कहो मै केला खिलाऊँगा आपको।
चाची : अपनी जांघो को हिलाते हुये, अरे बेटा कल्लु मै तो तुझसे केला खाने के लिए कब से बेठी हूँ, पर तू अपनी चाची को क्यों खिलायेगा, तू तो लगता है बस अपनी माँ और बहन को ही केला खिलायेंगा।
कालू : अरे चाची मै आपको भी खिलाउंगा, किसी दिन मेरे साथ बाजार तक चलो।
चाची : तो ले चलेगा मुझे अपनी साईकल पर बेठा कर।
कालू : क्यों नहीं जब कहो तब चल देता हूँ। चाची मै जरा पेशाब करके आता हूँ।
चाची : कल्लु : वहाँ झोपडी के पीछे जा कर कर ले।

चाची ने झोपडी के पीछे जाकर मुझे मुतने को कहा तो मुझे कुछ अजीब लगा फिर मै झोपडी के पीछे चला गया और मुझे झोपडी के अंदर से परछाइ नजर आई तो मै समझ गया की चाची छूप कर मेरा लंड देखने वाली है।
मैने अपने लंड को धोती से बाहर निकाला वह पूरी तरह खड़ा था और खूब मोटा और काला नजर आ रहा था, उधर चाची ने जैसे ही मेरे खड़े लंड को और उसकी मोटाई और लम्बाई को देखा तो वह अपनी चुत को रगडते हुये गहरी साँसे लेने लगी, यह वही जगह थी जहा से बिरजु अपनी माँ और मेरी माँ को मुतते हुए देखता था, मै अपने लंड को खूब सहलाते हुए रगड रहा था और चाची अपनी चुत सहलाते हुए मेरे लंड को खा जाने वाली नज़रो से देख रही थी।

जब मै मूत कर वापस आया तो चाची जल्दी से वापस बहार आ चुकी थी मेरे मुतने के बाद चाची ने कहा मै भी पेशाब करके आती हु कल्लु और फिर चाची अपनी घाघरे में से मटकती गाण्ड को हिलाती हुई जाने लगी और मैंने देखा चाची अपनी गाण्ड मेरे
सामने ही खुजलाती हुई जा रही थी, चाची जैसे ही पीछे गई मै झोपडी में घुस गया और जब मैंने बाहर झाँका तो चाची अपने दोनों हांथो से अपने घाघरे को ऊपर चढा चुकी थी रंडी अंदर से पूरी नंगी बड़ी मस्त लग रही थी उसकी चुत का उभार मुझे पागल कर रहा था।
चाची खड़ी खड़ी अपनी बुर सहलाती जा रही थी और फिर सामने बैठ कर अपनी मस्त भोस में दो उंगलिया पेलने के बाद अंदर बाहर करने लगी, उसके मुह को देख कर लग रहा था की वह मेरे मस्त लंड को सोच सोच कर अपनी बुर सहला रही है।

उसकी भोस बहुत मस्त लग रही थी, ऐसी रसीली चुत देख कर मै भी पागल हुआ जा रहा था, अब तो मेरा मन कर रहा था की चाची को खूब कस कस कर चोदुं। लेकिन मै अभी जल्दीबाज़ी करना नहीं चाहता था।
कुछ देर बाद चाची वापस आ गई और फिर अपने घाघरे से मुझे मुसकुराकर देखते हुए अपनी चुत पोछते हुए कहने लगी, कल तू पक्का मुझे अपनी साईकल पर बेठा कर बाजार ले चलेगा ना।
कालू : हाँ पक्का चाची।

मै वहाँ से खेत में आ गया गीतिका खाट पर लेटी कोई किताब पढ़ रही थी, खेत में माँ और बाबा काम में लगे हुए थे, गीतिका ने एक फ्राक पहनी हुई थी जो उसकी गोरी जांघो को भी दिखा रही थी, गुड़िया ने मुझे देखा नहीं और मै धीरे से उसके पास पहुच गया।
गडिया को बिलकुल भी ध्यान नहीं था और वह एक नंगे फोटो की किताब थी जिस्मे एक औरत एक आदमी के लंड के ऊपर चढ़ कर बेठी थी, गीतिका बड़े गौर से उसके काले लंड और उसकी खुली हुई गुलाबी चुत देख रही थी, गीतिका का एक हाथ उसकी पेंटी के अंदर था और वह अपनी चुत को खूब दबा दबा कर उस रंगीन फोटो को देख रही थी, लेकिन जैसे ही गीतिका की नजर मुझ पर पड़ी वह एक दम से हडबडा
कर उठ बेठी उसे यह समझ नहीं आया की किताब सम्भाले या अपनी चुत से अपने हाथ को बाहर निकाले।
फिर भी मैंने अन्जान बनते हुए न किताब की ओर ध्यान दिया और न ही उसकी चुत की ओर और कहने लगा गुड़िया माँ और बाबा काम में लगे है चल तुझे तैरना सीखना था न, चल इस समय नदी में कोई नहीं होगा बढ़िया मस्त तरीके से तुझे तैरना सीखा दुँगा।

गुडिया खुश होते हुए मानो उसे मन की मुराद मिल गई हो वह मेरे पीछे पीछे चल दी और किसी को फ़ोन लगाने लगी, मै थोड़ा आगे आगे चल रहा था और गुड़िया अपनी सहेली से दबी आवाज में बात कर रही थी।
गुडिया : हाय रंडी खुद चुद रही है या अपनी मम्मी को चुदवा रही है।
मोनिका : अरे मै तो अपनी माँ की चुत में बड़े बड़े लंड खुद पकड़ पकड़ कर पेल रही हु और पिलवा रही ह, पर तू क्यों आज गरम नजर आ रही है।
गुडिया : हाँ गुड न्यूज़ है।
मोनिका : क्या।
गुडिया : नदी में नहाने जा रही ह, आज भैया मुझे तैरना सिखाएगे।
मोनिका : हाय रंडी परी तेरे तो खूब मजे है अपने भैया के मोटे लंङे पर चढ़ चढ़ कर तैरना, और सुन बार बार डुबने का बहाना करके अपने भैया के नंगे बदन से पूरी तरह चिपक जाना, देखना तेरे भैया का मोटा लंड जब तेरी मस्त पाव रोटी की तरह फुली चुत में जब घुसेगा
तो तुझे बड़ा मजा मिलेगा, अपने भैया के मोटे लँड को खूब अपनी चुत से दबा दबा कर चुदवाना, वैसे भी तेरे भैया तेरे जैसी रसीली बहन की चुत तो पहले से ही मारने के बारे में सोचते होगे।

गुडिया : पता नहीं पर उनका कसरती बदन देखते ही मुझे उनके मोटे लंड की कल्पना होने लगती है मेरी भोस खूब मराने के लिए तडपने लगती है।
मोनिका : मेरी रंडी परी आज मोका अच्छा है खूब मरा ले अपने भैया से अपनी चूत, एक बार तबियत से चुद गई तो फिर तेरे मजे हो जाएगे फिर तो दिन भर खेतो में अपने भैया के सामने नंगी ही घुमना बड़ा मजा आएगा, जब तू झुक कर अपने भैया को अपनी मोटी गाण्ड और मस्त उभरी हुई पाव रोटी जैसी चुत दिखाएगी तो तेरे भैया खड़े खड़े ही तेरी चुत में लंड पेल देंगे।
गुडिया : चल अब रख नदी आ गई है।
मोनिका : बेस्ट ऑफ़ लक।
गुडिया : थैंक्स बिच।

नदी में कोई नहीं था और मेरे बदन पर सिर्फ धोती थी, मैंने गुड़िया की तरफ देखा बहुत मस्त लग रही थी एक छोटी सी फ्राक मे।
गुडिया : भैया मुझे तो डर लग रहा है।
कालू : मुस्कुराते हुये, अरे डरती क्यों है तेरा भैया है न तेरे पास।
गुडिया : पर भैया मैंने तो फ्राक पहना है मुझसे तैरते बन जाएगा।
कालू : बन तो जाएगा, वेसे तुझे दिक्कत हो रही है तो अपनी फ्राक उतार दे, निचे तूने चड्ढी तो पहनी होगी ना.

मुझे भैया की बात सुन कर हसी आ गई और मैंने शरमाते हुए मुह निचे करके कहा। भैया मै आपके सामने कैसे फ्राक उतार सकती हूँ।
कालू : क्यों मेरे सामने क्या दिक्कत है।
गुडिया : भैया मुझे आपके सामने शर्म आएगी मैंने अंदर ब्रा नहीं पहनी है।
कालू : अरे पागल यह गांव है माँ और चाची भी जब यहाँ नहाने आती है तो अपने ब्लाउज को पूरा उतार कर ही नहाती है, तूने देखा है ना।
मा तो घर पर भी जब नहाती है तो अपना पूरा ब्लाउज उतार लेती है।

गुडिया : पर भैया इतना कहते ही मेरी नजर भैया के धोती मै खड़े लंड पर पड़ गई और मैंने मन में सोचा भैया मुझे नंगी देखने के लिये मरे जा रहे है तभी उनका लंड इतना बड़ा हो रहा है, मुझे तो समझ नहीं आ रहा था की भैया नाटक कर रहे है जैसे की कुछ नहीं जानते ही नहीं या सचमुच भैया बहुत भोले है, वैसे तो भैया ने कभी ऐसी वैसी कोई हरकत कभी की नहीं पर उनका लंड क्यों इतना खड़ा हो रहा है खेर जो भी हो
मै तो खुद भी अपने बड़े भाई को अपनी मादक नंगी जवानी दिखाने के लिए तड़प रही थी।
वैसे भी भैया मेरे कसे हुए बड़े बड़े दूध को बड़े प्यार से देख रहे थे।

मेरे देखते देखते भैया पानी में उतर गए और मुझसे कहने लगे आजा गीतिका इस गर्मी में नदी में नहाने का मजा ही कुछ और है।
गीतिका : भैया क्या मै सचमुच फ्राक उतार दू कोई आ गया तो।
कालू : अरे पागल इस घाट पर मेरे और चाची के परिवार के अलावा कोई नहीं आता है बाकि गांव के दूसरे तरफ वाले घाट पर जाते है।
अब जल्दी से आ जा, मैंने भैया की बाते सुन कर कहा भैया मै पानी में घूसने के बाद उतार दूंगी।
कालू : तेरी जैसी मरजी अब जल्दी से आजा, गीतिका धीरे धीरे पानी में उतरने लगी उसकी मोटी मोटी छातिया खूब ऊपर निचे सांसो के साथ हो रही थी, जब वह कमर तक पानी में आ गई तो मुझसे कहने लगी भइया मुझे डर लग रहा है आप आओ न ईधर, गुड़िया की आवाज सुन कर मै उसकी ओर गया और उसका हाथ पकड़ कर गहरे पानी की ओर जाने लगा और गुड़िया बस भैया और गहरे में नहीं ओह भैया रुको न।

गीतिका बड़ी मुश्किल से आगे बढ़ रही थी की उसका पैर एक दम से गहराई में गया और वह मुझसे एक दम से चिपक गई और दोनों पेरो को मेरी कमर में लपेट कर मेरे ऊपर चढ़ गई।
गुडिया : भैया प्लीज निचे मत उतारो मै डूब जॉउंगी, मैंने अपने दोनों हांथो से उसकी गुदाज मोटी गाण्ड को दबोच रखा था, उसकी फ्राक तो न जाने कब की ऊपर हो गई थी और मेरी गदराई बहन पेंटी पहने मेरी कमर में अपनी गुदाज मोटी जाँघे लपेटे हुए मुझसे चिपकी हुई थी।
उसकी मोटी छतियो के नुकीले चुचे मुझे चुभ रहे थे, मेरा मन गुड़िया के मोटे मोटे खरबूजों को खूब कस कर मसलने का कर रहा था।
कालू : गुड़िया तू धीरे से पानी में उतर कर तैर और हाथ और पैर ऐसे चला।



गुडिया : नहीं भैया मुझसे नहीं होगा।
कालू : अरे पागल मै तेरे कमर और पेट को अपने हांथो से सहारा देकर तुझे धीरे धीरे तैरना सिखाउंगा और तू डुबेगी भी नही।
और फिर गुड़िया को धीरे से मैंने उतारा और उसके मुलायम गुदाज पेट को पकड़ कर एक हाथ से उसकी गुदाज मोटी गाण्ड को थामे उसे धीरे धीरे हाथ पैर हिलाने के लिए कहने लगा लेकिन गुड़िया बार बार डुबने लग जाती और जब उसकी सांसे भर गई तो कहने लगी नहीं भैया बस अब मै डूब जॉंउगी।
कालू : अरे तो एक काम कर इस फ्राक के कारन तू फ्री होकर नहीं तैर पा रही है इसे उतार दे।
गुड़ीया : नहीं भैया मै डूब जॉऊंगी।
कालू : अरे मै तुझे ऐसे ही पकडे रहूँगा तो आराम से उतार ले मै तुझे अपनी गोद में उठाये रहुंगा, गुड़िया ने मेरी ओर देखा उसके गुलाबी होंठ पानी में भीग कर और भी सेक्सी लग रहे थे फिर गुड़िया को मैंने पीछे से पकड़ लिया अब गुड़िया ने फ्राक उतारना शुरू किया।

गुड़िया जब फ्राक उतार रही थी तो भैया ने उसे पीछे से पकड़ रखा था और उसके नंगे पेट को धीरे से सहलाते जा रहे थे, उनका लंड तो गुड़िया की पेंटी के ऊपर से उसकी गाण्ड में घुसा जा रहा था, और गुड़िया उनके मस्त मोटे डण्डे का एह्सास साफ साफ अपनी गाण्ड और चुत में महसूस कर रही थी।
तभी गुड़िया ने फ्राक उतार दी और भैया ने उसकी नंगी पीठ को चुमते हुए उसे अपनी ओर घुमा लिया इस बार गुड़िया खुद अपने भैया के नंगे चौड़े सिने को देख कर अपनी दोनों टांगो को फैला कर भैया की कमर से चिपक गई और उसके मोटे मोटे कठोर दूध भैया के सिने से दब गये।
भैया ने गुड़िया को कस कर अपनी बांहो में भर लिया और उसे अपनी गोद में लिए उसकी मोटी जांघो को सहलाते हुए कहने लगे गुड़िया अब तू धीरे से जमीन पर पैर रख पानी तेरे गले तक ही आएगा, गुड़िया ने धीरे से निचे कदम रखा और अचानक उसका पैर एक पत्थर पर पड़ कर फिसल गया।
और गुड़िया ने मेरे हाथ को पकडने की कोशिश की तभी उसके हाथ में मेरा खड़ा लंड आ गया और फिर जल्दी से मैंने गुड़िया को पकड़ कर ऊपर उठाया और जब मैंने उसे अपनी ओर खिंचा तो गुड़िया के तरबुज मेरे हाथो से दब गये, हाय क्या ठोस चूचिया थी मै अपनी बहन के मोटे मोटे दूध के मस्त एह्सास से रोमांचित हो गया और मैंने गुड़िया के गालो को चुमते हुए कहा।
इतनी बड़ी हो गई है लेकिन किसी छोटे से बच्चे की तरह अपने भैया की गोद में चढ़ी है।
गुडिया : हाँ आप से तो छोटी ही हूँ, तो क्या आप अपनी बहन को अपनी गोदी में भी नहीं उठा सकते।
कालू : अच्छा उठा लुँगा पहले तू अच्छे से तैरना तो सीख।
गुडिया : मुझे नहीं सीखना तैरना आप तो मुझे अपनी गोद में उठाये हुए ही नहला दो।

कल्लु : अपने भैया के हाथ से नहा लेगी तु।
गुडीया : क्यों नहीं पहले जब मै छोटी थी तब भी आप मुझे नहलाते थे की नही।
कालू : गुड़िया के दूध को देखता हुआ गुड़िया की गुदाज जांघो को अपनी हंथेली में भर कर मसलता हुआ कहता है, अब तो तू पूरी जवान हो गई है।
अब भला मै तुझे कैसे नहला सकता हूँ।
गडिया : क्यों कभी कभी आप माँ को नहीं नहलाते हो। तो क्या माँ जवान नहीं है, वह तो और भी ज्यादा जवान है।
कालू : अरे कहा मै तो सिर्फ कभी कभी उनकी पीठ रगड देता हु बस।
गुडिया : भले ही पीठ रगडते हो पर माँ है तो मुझसे भी ज्यादा जवान और बड़ी है, गुड़िया ने महसूस किया की भैया से जब वह माँ की बात कर रही थी
तो वह अपने लंड को खूब तेजी से उसकी गाण्ड की दरार में दबा देते थे ऐसा लग रहा था जैसे अपनी बहन की गाण्ड चुत सब फाड देंगे।

कल्लु : अच्छा तू कहती है तो चल तेरी भी पीठ रगड देता हूँ। मै गुड़िया की नंगी पीठ को सहलाने लगा और जब मै उसकी बगल में पहुचता तो वह जान बूझ कर अपने हाथो को ऊपर कर देती और मै उसकी काँख को सहलाने लगता उसकी बगल में बारीक़ बारीक़ बाल उगे हुए थे।
गुडिया : भैया क्या माँ को भी तैरना आता है।
कालू : नहीं लेकिन थोड़ा बहुत तैर लेती है।
गुडिया : आपने माँ को क्यों नहीं सिखाया।
कालू : पहले कई बार सिखाया है।
गुडिया : क्या माँ को सीखने का मन नहीं करता था।
कालू : करता था मुझसे कहती भी थी लेकिन मै कभी उसके साथ नदी आता और कभी नहीं आता।

गुड़िया को भैया की बातो से भोंदुपने की झलक नजर आ रही थी, वैसे भी भैया की गोद में गुड़िया जैसा गरम माल थी। लेकिन वह ज्यादा कुछ कर नहीं रहे थे, पर यह तो था की लंड उनका यह सब समझ रहा था इसीलिए तबियत से तना हुआ था।
गुडिया : भैया अब पीठ ही रगडते रहोगे या यहाँ वह भी रगडोगे, लो मेरे सिने पर रगड़ो बहुत मैल हो गया है। और गुड़िया ने भी अन्जान बनते हुए अपने मोटे मोटे दूध भैया के मुह के सामने रख दिए, भैया काँपते हाथो से गुड़िया के दूध को छु रहे थे तभी गुड़िया ने उनके हाथ को अपने दूध पर दबा कर कहा भैया जरा रोज से रगड़ो नहीं तो मैंल कहा से निकलेगा।

गुड़िया का कहना था की भैया अब थोड़ा जोर से उसके मोटे मोटे थनो को रगडते हुए सहलाने लगा, पर फिर भी उनके हाथ में वह मर्दाना पकड़ नजर नहीं आ रही थी जो उसे चाहिये थी वह तो चाहती थी की भैया उसके मोटे मोटे आमो को खूब दबा दबा कर चुसे और खूब मसले, तभी उसने भैया से कहा भैया तुम माँ को तो बड़ी जोर जोर से रगडते हो फिर आज क्या हुआ है
जरा तेज रगडो।
कालू : गुड़िया तेरे दूध में मेल है ही कहा जो उन्हें रगड कर निकालूं।
भैया की बाते सुन कर गुड़िया को हसी आ गई और उसने कहा दूध के ऊपर का मेल नजर नहीं आता है जब रगडोगे तभी निकलेगा और यह रगडने से जब लाल हो जाएगे तो समझ लेना की इनका मैंल निकल गया है।
कालू भैया अब गीतिका के मोटे मोटे दूध को अब कस कस कर दबा रहे थे और कहने लगे गुड़िया वैसे मैंने माँ के दूध को कभी नहीं रगडा है मै तो सिर्फ उनकी पीठ कभी कभी रगड देता हु बस ।
गुडिया : आह हाय भैया अब तुम सही रगड रहे हो देखना कुछ देर में यह पूरे लाल हो जाएगे और इनका सारा मैल निकल जायेगा पर आप जरा अपने दोनों हांथो से रगडो, उसकी बात सुन कर कल्लु भैया उसके दूध को अब तबियत से मसलने लगा था।
 

meenashah6162

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कल्लु : गुड़िया एक बात बोलु।
गुडिया : आह सी वह क्या भैया।
कालू :तेरे दूध है तो माँ से छोटे लेकिन माँ के दूध से कितने ठोस और कठोर है।
गुडिया : माँ के दूध आपने दबा कर देखे है।
कालू : हाँ जब एक बार माँ को तैरना सीखा रहा था तब मैंने उनके दूध पकडे थे।
गुडिया : भैया माँ के दूध तो मुझसे भी खूब बड़े और मोटे मोटे है तुमने अच्छे से दबा कर नहीं देखा होगा। और कसावट भी बिलकुल मेरे दूध की तरह है उनके दूध तो देख कर ऐसा नहीं लगता की बाबा ने कभी उन्हें दबाया होगा।

कल्लु : क्या मतलब।
गुडिया : मुस्कुरा कर कुछ नहीं भइया, तुम्हे मेरे दूध ज्यादा अच्छे लगते है या माँ के।
कालू : मुझे तो तेरे ही दूध ज्यादा अच्छे लगते है।

भैया लगतार गुड़िया की गाण्ड में लंड दबाये जा रहे थे और अब उन्होंने उसके मोटे मोटे दूध को खूब कस कस कर खूब खींच खींच कर मसलना और दबाना शुरू कर दिया था उसकी चुत की फाँके अपने आप खुल गई थी और उसकी बुर पानी के अंदर ही पानी पानी हो रही थी।
गुड़िया: आह भैया कितने जोर जोर से दबा रहे हो।
कालू : मै इन्हे अच्छे से दबा कर इनका सारा मैंल निकाल दुँगा।
गुडिया : भैया इनका मैंल तो आह सी ओह भैया धीरे दबाओ इनका मैल तो निकल गया है।
कालू : तूने ही तो कहा था की जब तक खूब अच्छे से तेरे दूध लाल नहीं हो जाते इन्हे दबाते रहना है।
गुडिया : आह हाँ दबाओ लेकिन थोड़ा धीरे मसलो आप तो मेरे दूध पूरे नोच डाल रहे हो, अच्छा भैया और क्या अच्छा लगता है आपको मुझ मे।
कालू : तू जब जीन्स पहनती है तो मुझे बहुत अच्छी लगती है।
गुडिया ने अपनी गाण्ड भैया के लंड में इस बार कस कर दबाते हुए कहा मै सब जानती हु आपको मै जीन्स में अछि क्यों लगती हूँ।
कालू : क्योँ।

गुडिया : आह सी भैया मै जानती हु जब मै जीन्स पहनती हु तो मेरे चूतड़ बहुत बड़े बड़े नजर आते है और इसीलिए आपको मै अछि लगती ह, मेरी बात सुनते ही भैया ने एक हाथ से मेरी गुदाज जांघो को दबोचते हुए कहा।
तूझे कैसे पता की मुझे तेरे चूतड़ बहुत अच्छे लगते है
गुडिया : इसलिए की आप बार बार अपनी बहन के चूतडो को ही देख रहे थे।
कालू : दूध दबाते हुए हाँ यह तो तूने ठीक कहा वैसे गुड़िया सचमुच तेरे चूतड़ बहुत बड़े बड़े हो गए है दो चार महिने पहले तेरे चूतड़ इतने मोटे मोटे और चौड़े नहीं थे।
गुडिया : भैया लड़किया जैसे ही जवान होती है उनके चूतड़ सबसे पहले मोटे हो जाते है, माँ के चूतड़ तो और भी ज्यादा बड़े और चौड़े है, तुमने कभी माँ के चूतडो को नहीं देखा क्या।

कल्लु : गुड़िया की मोटी गाण्ड में लंड दबाते हुये, नहीं बस ऐसे ही घाघरे के ऊपर से ही देखा है।
गुडिया : अरे भैया माँ के चूतड़ तो बहुत बड़े है मेरे चूतडो से भी बहुत अच्छे और भारी दीखते है।
कालू : क्या तूने माँ के चूतडो को देखा है।
गुडिया : हाँ मैंने तो माँ को पूरी नंगी भी देखा है।
कालू : अच्छा तूने कब माँ को नंगी देख लिया।
गुडिया : मैंने तो माँ को कई बार नंगी देखा है वह तो नहाते समय या कपडे बदलते समय कई बार मेरे सामने नंगी हो चुकी है।
कालू : क्या बहुत मोटे मोटे चूतड़ है माँ के।
गुडिया : सच भैया तुम देख लोगे तो देखते ही रह जाओगे।
कालू : अब मै कैसे देखुंगा, माँ मुझे दिखा थोड़ी देगी।
गुडिया : मै तुम्हे दिखा सकती हु माँ के मोटे मोटे चूतडो को।
कालू भैया ने गुड़िया की गाण्ड में लंड दबाते हुए कहने लगे कैसे।

गुड़िया: भैया मै मोबाइल से फोटो खींच कर आपको दिखा सकती हूँ।
कालू : ठीक है लेकिन कब दिखायेगी।
गुडिया : कल ही दिखा दूंगी लेकिन तुम्हे मेरी भी एक बात माननी होगी।
कालू : वह क्या।
गुडिया : मुझे रात को तुम्हारे साथ बाहर खटिया पर सोना है।
कालू : माँ नहीं मानेगी।
गुडिया : माँ को मै मना लुंगी।
कालू : ठीक है।
गुडिया : अब देखो मेरे दूध कितने लाल कर दिए आपने अब चलो मुझे अपनी पेट से चिपका कर अब मेरी कमर का मैल भी निकाल दो।

आगे कहानी गुड़िया के शब्दों में-

मै घुम कर अपन दोनों जांघो को फैला कर जैसे ही भैया के कमर पर चढ़ कर उनसे चिपकी भैया का मोटा लंड सीधे मेरे चुत के तने हुए दाने से भीड़ गया और मै सीसियते हुए अपने भैया की बांहो में चिपक गई, जाँघे फ़ैलाने से मेरी चूत की फाँके खुल गई थी और पेंटी के ऊपर से भैया का लंड मेरी चुत से भिड़ा हुआ था और अब भैया मेरी नंगी पीठ सहलाते हुए धीरे धीरे अपने हाथ को निचे ले गए और मेरी कमर को सहलाने लगे और जब उनका हाथ पेंटी के इलास्टिक पर पंहुचा तो उनका हाथ मेरी पेंटी के ऊपर से मेरी गाण्ड को हलके हलके दबाने लगा।

गुडिया : भैया पेंटी में हाथ डाल कर कमर का मैल निकालो ना।
भैया ने पेंटी के अंदर हाथ डाल कर जैसे ही मेरे मोटे मोटे चूतडो को दबोचा मै अपनी चुत भैया के मोटे लंड से रगडने लगी, भैया ने अपने हाथ को मेरी पेंटी के अंदर तक डाल कर जैसे ही मेरी गाण्ड को थोड़ा फैला कर मेरी गाण्ड के मोटे छेद को अपनी उंगलियो से सहलाया तो मै तो पागलो की तरह भैया को चुमने लगी
भैया : के गालो और होठो को जब मै चुमने लगी तो भईया की बीच की मोटी वाली ऊँगली की पकड़ मेरी गाण्ड के छेद में और ज्यादा हो गई और भैया की ऊँगली मेरी गुदा के छेद में उतरने लगी, भैया को मै जितना चुमती वह मेरी गाण्ड में और ज्यादा अपनी ऊँगली पेलने लगते, मै आह सी ओह भाईया करते हुए उनके सिने से अपने दूध को खूब दबाते हुए उन्हें चुम रही थी और भैया अपनी ऊँगली को मेरी मस्त गुदा में ठुश ठुश कर दबा रहे थे। मेरी गाण्ड के सुराख़ में ऊँगली पेल पेल कर भैया ने मेरी गाण्ड खूब मारी और इस तरह आधा घण्टा बीत गया, अब मैं पानी में भैया के ऊपर चढ़े चढ़े खूब चुदासी हो गई थी।
मेरी मस्त बुर में अब अपने भैया का मोटा लंड चाहिए था लेकिन भैया को देख कर ऐसा नहीं लग रहा था की वह इस जनम में मुझे चोद पायेगे, मैंने सोचा मुझे ही कोई तरक़ीब भिड़ानी पड़ेगी और मेरे दिमाग मै एक ख़याल आया।

बस फिर क्या था मै एक दम से पानी में कुद पड़ी और हलके से चिल्लाने लगी ओह भैया आह सी ओह
कालू : अरे क्या हुआ गुडिया।
मैने अपनी हथेली से अपनी चुत को दबाते हुए कहा ओह भईया यहाँ बहुत जलन हो रही है लगता है कुछ काट रहा है।
कालू : चल अच्छा पहले पानी से बाहर चल और भैया ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया, मै लगभग पूरी नंगी ही थी, मेरी पेंटी भी मेरे चूतडो से आधि उतरी हुई थी, भैया ने मेरी जांघो को अपने हाथो में भर रखा था और मेरी नंगी गाण्ड और मेरे चूतडो के दोनों पट खुल कर मेरी मस्त गुदा का नजारा दिखा रहे थे, मै लगतार अपनी चुत को भैया के सामने ही पेंटी के ऊपर से खुजला रही थी और सीसिया रही थी।

भैया ने मुझे नदी से बाहर निकाल कर जमीन पर बैठा दिया और कहने लगे कहा जलन हो रही है कोई कीड़ा तो नहीं काट रहा है, मैंने भैया को अपनी जाँघे फैला कर दिखाते हुए अपनी फुल्ली चुत को पेंटी के ऊपर से सहलाते हुए कहा भैया लगता है मेरी सुसु में कुछ घुस गया है और काट रहा है।
कालू : बड़े गौर से मेरी फुल्ली चुत को देखते हुए कहने लगे तू गुड़िया पेंटी साइड में करके देख न कही कोई कीड़ा न काट रहा हो।


मैने भैया की ओर देखा और एक नजर उनके धोती में खड़े लंड पर डाली मेरी चुत की नसें पूरी फुलने लगी और मैंने अपनी पेंटी साइड से पहले सरका कर अपनी मस्त चिकनी गुलाबी भोस अपने भैया को दिखाई और भैया मेरी मस्त गुलाबी भोस को आँखे फाड फाड देखने लगे, फिर मैंने अपनी गर्दन झुका कर अपनी चुत को देखा वह क्या मस्त फुल कर कुप्पा हो रही थी और फाँके पूरी खुल कर मेरे रसीले गुलाबी छेद को दिखा रही थी, मैंने अपनी चुत की फांको को भैया के सामने और खोल कर अंदर देखा लेकिन कुछ था तो नहीं पर मै जलन का नाटक करते हुए ओह भैया कुछ दिख नहीं रहा है मुझे लेकिन बहुत जलन हो रही है, आप देखिये न और मैंने अपने दोनों हांथो को पीछे जमीन पर टीका कर अपनी दोनों जांघो को खूब फैला कर अपनी मस्त चुत को ऊपर की ओर उभार लिया।
भैया पागलो की तरह कभी मेरे मोटे मोटे दूध कभी मेरा चिकना पेट और कभी मेरी पेंटी में से झाँकती रसीली चुत को देख रहे थे।

गुडिया : भैया देख क्या रहे हो पेंटी सरका कर देखो न क्या घुसा है मेरी चुत में बहुत जलन हो रही है।
मेरे इतना कहते ही भैया ने मेरी पेंटी को पकड़ कर साइड किया और फिर मेरी मस्त चुत की फांको को भैया ने फैला कर अपने मुह को मेरी मस्त भोस के पास ले जाकर देखने लगे मेरी बुर तो भैया के मोटे लंड को लेने के लिए बहुत तड़प रही थी, मैंने अपनी जांघो को खूब फैला दिया था तकि भैया को मेरी मस्त चुत पूरी तरह से खुल कर नजर आए, जब कुछ देर तक भैया मेरी भोस को फैला कर देख चुके तो उन्हें कुछ नजर नहीं आया, फिर भी वह अपनी नज़रो को मेरी बुर के अंदर घुसाए दे रहे थे।
गुडिया : भैया कुछ दिखा क्या।
कालू : नहीं गुड़िया मुझे तो कुछ दिखाई नहीं दे रहा है
गुडिया : मैंने अपनी चुत को भैया के सामने रगड कर कहा पहले देखो अच्छे से लाल दिख रही है की नही, भैया ने मुझे देखा तो मैंने अपने चेहरे पर दर्द समेट लिया और भैया ने मेरी चुत की फांको को फैला कर देखते हुए कहा है गुड़िया अंदर से काफी लाल नजर आ रही है।
गुडिया : भैया हाथ लगा कर बताओ न कहा पर लाल पड़ गई है मेरी चूत।
मेरे इतना कहने पर भैया ने मेरी चुत की फांको को फ़ैलाते हुए चुत के खड़े दाने से लेकर ऊँगली को जैसे ही चुत के छेद में डाला तो मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी बुर से पानी छूट पडेगा, मैंने भैया की ऊँगली को चूत के रसीले गुलाबी छेद में रखे देखा और भैया की ओर देखा तो कहने लगे गुड़िया ये यहाँ ज्यादा लाल हो गई है तेरी ए।

गुडिया : ऊँगली दबा कर देखो कही अंदर तक लाल तो नहीं है, मेरे कहने पर भैया ने मेरी चुत के रसीले गुलाबी छेद में अपनी ऊँगली थोड़ी अंदर तक सरका दी और मै मारे उत्तेजना के पागल हो रही थी ओह भैया आह सी है भैया यही दर्द हो रहा है आह सी।

भैया का हाथ पकड़ कर मैंने हटा दिया और कहा भैया कुछ करो बहुत जलन हो रही है।
कालू : गुड़िया मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है।
मेरी नजरे भैया के लंड पर थी जो की पूरी तरह तम्बू बनाये खड़ा था, मेरी चुत बहुत फुदक रही थी और मुझे पेशाब भी लगी थी, मैंने भैया से कहा भैया एक बार सुसु करके देखु शायद ठीक हो जाए।
कालू : हाँ हाँ यह तू ठीक कह रही है।
मैने भैया के सामने खड़ी होकर अपनी पेंटी उतार दी अब मै पूरी नंगी हो गई थी और मेरा गदराया बदन भैया की आँखों के सामने था। मै भैया के सामने ही उकडू बैठ गई और अचानक प्रेस्सर के साथ मुतने लगी, मेरी चुत से निकलता मूत देख कर भैया अपना थूक गटकने लगे और मेरी चुत को आखे फाड फाड देखने लगे, कुछ देर तक मै मुतती रही और फिर भैया से कहा भैया अब जरा मेरी चुत फैला कर देखो क्या अब भी उतनी ही लाल दिखाई दे रही है।
भैया सरक कर बैठ मेरे पास आए और मैंने अब अपनी जांघो को खूब फैला दिया और अपनी मस्त फुल्ली चुत उचकाते हुए भैया के मुह के पास ले आई अब मेरी चुत के साथ भैया को मेरी गाण्ड का छेद भी साफ नजर आ रहा था, भैया किसी बन्दर की तरह जैसे बन्दर सर के जुये देखता है बस उसी तरह भैया मेरी रसीली चुत की फांको को खूब फैला फैला कर देखने लगे और फिर उनहोने मेरी चुत की फांको को खूब खोलते हुए चुत के कटाव में ऊँगली फेरी और मै मस्त हो गई, भैया ने मेरी चुत के छेद में ऊँगली रख कर दबा दी और उनकी ऊँगली आधि से ज्यादा चुत के अंदर उतर गई और मै सीसीयाने लगी आह ओह भईया आह।

कल्लु : गुड़िया लगता है तेरी बेचारी छेद में कुछ है। इसीलिए यहाँ इतना लाल पड़ा हुआ है,।
गुडिया : आह भैया कुछ करो न ऐसा पहले भी एक बार मेरी चुत में खूब जलन मची हुई थी तब मेरी सहेली मोनिका मेरे साथ थी।
कालू : फिर उसने क्या किया था।
गुडिया : भैया उसने तो अपनी जीभ से जब मेरी चुत की फांको को और इस गुलाबी छेद को चाटा तब जाकर इसकी जलन कम हुई, लेकिन तुम थोड़े ही ऐसा करोगे।
कालू : क्यों नहीं करुँगा, मेरी बहन को इतनी तकलीफ है तो क्या मै तेरी इसको चाट भी नहीं सकता, मै भी चाट कर ठीक कर देता हूँ।

गुड़िया : क्या चाट कर ठीक कर दोगे।
कालू : तेरी इसको।
भैया ने ऊँगली रख कर मेरी चुत की ओर इशारा किया।
गुडिया : इसका नाम क्या है भइया, तुम गांव में इसको क्या बोलते हो।
कालू : मुस्कुराते हुये, तू बहुत बदमाश हो गई है जैसे तुझे पता न हो।
गुडिया : बताओ न भैया क्या बोलते हो तुम इसको।
कालू : गांव में तो इसको बुर कहते है।
गुडिया : अच्छा लेकिन मेरी सहेली तो इसे चुत कहती है।
कालू : हाँ गांव में कुछ लोग इसे चुत भी कहते है कई औरते भी जब गाली देति है तो इसे चुत कहती है।
गुडिया : कौन औरत गाली देते हुए इसको चुत कहती है।
कालू : सभी औरत, कई बार तो मैंने माँ और चाची को भी गाली देते हुए इसका नाम लेते हुए सुना है।
गुडिया : क्या गाली देते सुना है भईया।
कालू : अब मै तेरे सामने कैसे गाली दूँ।
गुडिया : मुसकुराकर दे दिजिये भइया, मै थोड़ी किसी को बताऊँगी की आपने मेरे सामने गाली दी।

कल्लु : अरे माँ और चाची कई बार ऐसी गली देती है जैसे चुत मरानी, रंडी चुदैल छिनाल इस तरह की गाली देती है।
मै भैया की बाते सुन कर पानी पानी हो रही थी और भैया मेरी चुत को अपने हाथो से सहलाते हुए उसे देख देख कर मुझसे बाते कर रहे थे।
गुडिया : और बताओ न भैया और क्या गाली देते है गांव में।
कालू : बहुत सारी गालिया है, अब तेरे सामने मै दूंगा तो क्या अच्छा लगेगा।
गुडिया : ऑफ हो भैया मै थोड़े किसी से कहूँगी की आप ने मेरे सामने गन्दी गन्दी गालिया दी और वैसे भी आप कौन सा मुझे गालिया दे रहे है आप तो मुझे भी गालिया देंगे तब भी मै किसी को नहीं कहुँगी, अब बताइए ना।
कालू : अरे गुड़िया गांव में तो बहुत गन्दी गालिया देते है।
गुडिया : कौन कौन सी।
कालू : यही मादरचोद बहनचोद।

भैया की गाली सुन कर मेरी चुत बहुत पनिया चुकी थी।
गुडिया : भैया एक बार मुझे गाली देकर बताइये ना।
कालू : बताया तो।
गुडिया : नहीं भैया मुझे गाली देकर बताइये ना।
कालू : तुझे मै कैसे गाली दे सकता हु तू तो मेरी बहन है।
गुडिया : आपने अभी तो एक बहन वाली गाली बताइ है।
कालू : वो तो दूसरे को कहते है।
गुडिया : क्यों अपनी बहन को नहीं कह सकता, एक बार मुझसे कहिये न प्लीज।
कालू : अच्छा बाबा कहता हु और फिर भैया ने मुझसे कहा बहनचोद।

भैया के मुह से अपने लिए गाली सुन कर मै चुत मराने के लिए तडपने लगी।
गुडिया : और भैया दूसरी वाली गाली भी दो ना।
कालू : मादरचोद।
गुडिया : भैया कब चाटोगे आप मेरी चुत बहुत जल रही है, मेरा इतना कहना था की भैया ने मेरी चुत की फांको को फैला कर चौड़ी करके मेरी चुत में अपनी लम्बी जीभ डाल कर मेरी रसीली चुत को चुसना शुरू कर दिया।

मै तो मारे मस्ती के पागल हुई जा रही थी, हाय क्या चाट रहे थे भैया अपनी बहन की चुत सच में वह तो मोनिका से भी ज्यादा मजा दे रहे थे, पहले तो वह धीरे धीरे मेरी रसीली बुर को चाटते रहे और फिर उन्होंने मेरी चुत को खूब फैला कर खूब लम्बी लम्बी जीभ निकाल कर चुस्ने चाटने लगे और मै आह आह ओह भैया बहुत अच्छा लग रहा है तुमने तो सारा दर्द मिटा दिया और चाटिये और चूसिये ओह भैया मै मर जाऊंगी आह आह ओह ओह सी और फिर अचानक मेरे मुह से मस्ती के मारे गालिया निकलने लगी और मै अपने बड़े भैया को आह ओह करते हुए आह भैया तुम बहुत मादरर्चोद हो तुम बहनचोद हो ओह भाईया।
कितना अच्छा चाटते हो और चाटो खूब चुसो अपनी बहन की चूत, भैया पागलो की तरह मेरी रसीली बुर को चाटते जा रहे थे लेकिन उस समय मै बहुत उत्तेजित हो गई जब भैया ने मेरी रसीली चूत चाटते हुए मेरी गाण्ड के छेद को भी चाटना शुरू कर दिया मै तो मस्ती में पागल हुई जा रही थी, मेरी चुत खूब रस छोडती जा रही थी और भैया मेरे चुत के रस को पिते जा रहे थे, और मै पागलो की तरह भैया को अपनी जाँघे और फैला फैला कर अपनी चुत चटाये जा रही थी, भैया तब तक मेरी रसीली चुत को चाटते रहे जब तक की मेरी चुत ने ढेर सारा पानी भैया के मुह में छोड़ दिया और भैया मेरी पूरी चुत को मुह में भर कर खा जाने वाले अन्दाज में चुसते चाटते रहे ।मै अपनी चुत खूब उठा उठा कर भैया के मुह से घिस रही थी और भैया ने अपने दोनों हांथो से मेरे मोटे मोटे चूतडो को थामे हुए मेरी चुत पिए जा रहे थे
जब मै झड कर पस्त हो गई और मेरी चुत से ढेर सारा रस निकल कर भैया के मुह में चला गया तब भैया ने अपना मुह पोछते हुए मुझसे कहा।

कल्लु : गुड़िया अब कैसा है तेरा दर्द।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, भैया अब कुछ ठीक लग रहा है दर्द काफी काम हो गया है।
कालू : एक बात कहु गुडिया।
गडिया : क्या।
कालू : तेरी चुत बहुत अच्छी है, बहुत अच्छा लगता है जब इसे चाटते है।
गुडिया : मुसकुराकर और इसकी ख़ुश्बू कैसी है।
कालू : कुछ सोच कर ख़ुश्बू पर तो मैंने गौर ही नहीं किया ।
गडिया : मुसकुराकर तो अब सूँघ कर देख लो।
मैने जब यह कहा तो भैया ने मेरी चुत को पास से सूँघा और कहने लगे गुड़िया इसकी ख़ुश्बू भी बहुत प्यारी है, लेकिन गुड़िया इसको चाटने में बहुत अच्छा लगता है।
भैया काफी खुल चुके थे, मैंने भैया की ओर नशीली नज़रो से देखा और कहा और चाटोगे, तब भैया ने हाँ में अपनी गर्दन हिला दी तब मैंने मुस्कुराते हुए उनकी ओर अपनी चुत उठा दी और उनसे कहा लो और चाट लो, आपको बहुत पसंद है न खूब जी भर कर चाटो, बस फिर क्या था भैया फिर से मेरी चुत को खूब फैला फैला कर चाटने लगे और मै फिर अपनी जांघो को खूब खोल कर उन्हें अपनी चुत पिलाने लगी, भैया मेरी चुत को इस बार बड़ी बेरहमी से खूब जीभ दबा दबा कर चूस रहे थे, उन्होंने मेरी चुत को खूब चाट चाट कर और खूब चूस चूस कर लाल कर दिया था बीच मै उन्होंने अपना मुह उठा कर मेरी ओर देखते हुए कहा।
गडिया तेरी चुत बहुत मस्त है, मै भैया की आँखों में जवानी के लाल डोरे देख रही थी वह किसी भूखे भेड़िये की तरह मेरी चुत को देख देख कर खा रहे थे। अब मुझे फिर से खूब मजा मिलने लगा और मै पूरी ताकत से अपनी मस्त चुत भैया के मुह पर रगडने लगी और थोड़ी देर में ही मेरे भैया ने मेरी चुत का रस खींच खींच कर सारा रस बाहर निकाल दिया, मै पस्त होकर वही लेट गई और भैया हाँफ्ते हुए मेरी गुदाज जवानी को देख रहे थे, अभी मै आगे के बारे में कुछ सोचती उससे पहले ही मेरी नजर चाची के खेतो की तरफ से चाची को चले आते हुए देखा, मै एक दम से घबरा गई और जल्दी से अपनी पेंटी पहनी और भैया को चाची के बारे में बताया, भैया ने भी अपनी धोती में बने तम्बू को छुपाते हुए ठीक किया और फिर मैंने फ्राक पहन ली और हम दोनों वहाँ से चल दिए ।



रास्ते में चाची मिली और हमें देख कर मंद मंद मुस्कुराते हुए पुछने लगी कहा से आ रहे हो, मैंने बताया हम नदी में नहाने आये थे, तब चाची मुसकुराकर यह कह कर चल दी की दोनों भाई बहन एक साथ नहा रहे थे क्या हम चाची की बात का कोई जवाब नहीं दे पाये और मै भैया से चिपक कर चलने लगी और भैया ने भी मेरे गले में हाथ डाल दिया, हम दोनों के चेहरे पर सन्तुष्टि के भाव नजर आ रहे थे लेकिन जब हमारी नजरे मिलती तो और भी कुछ हमारी नजरे एक दूसरे से कह रही थी।

कल दिन में कल्लु भैया के साथ खेतो में गई और फिर वहाँ से चाची के खेतो में चली गई।
चाची : मुस्कुराते हुये, आ गीतिका बड़े सही टाइम पर आई है अभी घास काट के बस फुर्सत हुई हूँ।
गीतिका : चाची चाचा तो महिने में एक बार ही आते होंगे ना।
चाची : मुह बनाते हुये, उन्हें मेरा ख़याल ही कहा रहता है जो वह रोज रोज घर आए, खैर उनको मार गोली और एक बात तो बता।
गुडिया : क्या।

चाची : कल तू कल्लु के साथ नहाने गई थी ना।
गडिया : झेपते हुए हाँ गई थी आप मिली तो थी रास्ते में।
चाची : इसीलिए तो पूछ रही हु, सच सच बता तू नंगी होकर अपने भाई के साथ नहा रही थी ना।
जूडिया : एक दम शरमाते हुये। मंद मंद मुसकुराकर कहने लगी नहीं चाची मैंने कपडे पहने थे।
चाची : झूठ न बोल मैंने जब तुझे दुर से देखा था तब तो नंगी खड़ी थी और कल्लु तेरे सामने खड़ा हुआ था, अब मुझसे न छुपा मै किसी से कहूँगी थोड़े ही।

गुडिया : शरमाते हुए मुसकुराकर कहने लगी चाची तुम बहुत गन्दी हो कोई दूसरी बात करो।
चाची : कस कर गीतिका के मोटे मोटे दूध को पकड़ कर मसलते हुये, मुसकुराकर कहने लगी अच्छा गुड़िया परी तू खुद अपने भाई के सामने नंगी रहो और गंदी
मुझे कह रही है, कही अपने भैया का मोटा तगड़ा लंड तो नहीं ले लिया अपनी चूत में।

गुडिया : मुस्कुराकर चाची कुछ तो शर्म करो, मै आपकी बेटी जैसी हूँ।
चाची : बड़ी आई बेटी बनने वाली, इतनी बड़ी घोड़ी तो हो गई है अभी तबियत से तेरे चूतडो को दबा दबा कर तुझे अगर कोई चोद दे तो माँ बनने में देर नहीं लगेगी।
गुडिया : चाची अब चुप भी करो और यह सब बाते माँ से न कह देना।

चाची : अरे तू माँ की फिकर क्यों करती है और तेरी माँ भी कोई काम चुदासी नहीं है, उसके मोटे मोटे चूतडो को देखा है, उसके चूतडो को देख देख कर गाँव
के न जाने कितने मरद अपने लंड को मसलने लगते है।
गुडिया : यह तो तुम सच कह रही हो चाची माँ के चूतड़ तो वाक़ई बहुत बड़े बड़े है, मैंने भी कई बार गांव के बुढों तक को माँ की मोटी गाण्ड देख कर
अपने लंड को सहलाते हुए देखा है।
चाची : अरे बुढ्ढे तो बुढ्ढे जवान लोंडे भी तेरी माँ के चूतडो को फैला कर सूँघने के लिए मरे जा रहे है, तेरा भाई कल्लु भी इस मामले में कम नहीं है।





गुडिया : ये क्या बोल रही हो चाची भैया तो बहुत भोले है उन्हें देख कर लगता ही नहीं है की वह कुछ जानते भी होंगे।
चाची : अरे गुड़िया तू तो पागल है मैंने तो कल्लु को जब भी देखा है वह तेरी माँ की गाण्ड या चुत को ही देखने के जुगाड़ में रहता है कभी जब तेरी माँ खेतो में
काम करती है तब देखना तेरा भाई तेरी माँ के मोटे मोटे चूतडो और उसकी गुदाज गोरी गोरी मोटी जांघो को ही घूरता रहता है।

उस दिन चाची ने मेरी चुत में गन्दी बाते करके इतनी खुजलि पैदा कर दी की मै बैचैन होने लगी रत को खाना खाने के बाद मैंने माँ से बाहर कल्लु भैया के साथ
सोने की जिद की तो माँ ने कहा ठीक है सो जा लेकिन सुबह जल्दी उठ कर अंदर आ जाना, जवान भाई बहन एक ही खटिया में सो जाओगे तो गांव के लोग उल्टा सीधा कहने लगेगे।

मै माँ की बात समझ गई और खाना खा कर बाहर आ गई और कल्लु भैया के बगल मै बैठ गई, जब मैंने कल्लु भैया की नज़रो पर गौर किया तो पता चला वह मेरे कसे हुए मोटे मोटे आमो को ही देख रहे थे, लग रहा था जैसे वह अपनी बहन के मोटे मोटे आमो को अपने हांथो में भर कर खूब कस कस कर दबाना चाहते हो और अपनी बहन के रसीले आमो को चुसना चाहते है, मै यह सोच कर गरम हो गई और मेरी चुत में कुलबुलाहट होने लगी।

कल्लु : गुड़िया आज तेरे साथ नदी में नहाने में बड़ा मजा आया था।
गुडिया : हाय भैया मुझे भी बड़ा मजा आया।
कालू : अच्छा अब तेरे वहाँ दर्द तो नहीं है, भैया ने मेरी फुली हुई चुत की ओर इशारा करते हुए कहा।
गुडिया : अपने चेहरे पर बनावटी दर्द समेटते हुये, भैया सुबह जितना तो नहीं है पर थोड़ा दर्द अभी बाकि है।

कल्लु : तो फिर कैसे जायेगा तेरा दर्द।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, लगता है आपको सुबह की तरह एक बार और अपनी बहन की चुत को चाटना पडेगा।
कालू : लेकिन गुड़िया यहाँ कोई देख लेगा तो अच्छा नहीं लगेंगा।

गुडिया : अभी थोड़ी देर रुक जाओ जब सब सो जाएगे तब अच्छे से चाट लेना।
कालू : पर माँ तो तुझे अंदर सोने को कहेगी तब।
गुड़िया : मैंने माँ से कह दिया है की मै कल्लु भैया के साथ सो जाती हु और वह मान गई है।
कालू : यह तूने ठीक किया, तभी माँ घर के बाहर आकर बाथरूम की ओर मुतने के लिए जाने लगी और उसके घाघरे से मटकती उसकी मस्त मोटी गाण्ड देख कर मैंने कल्लु भैया की ओर देखा जो माँ के चूतडो को खा जाने वाली नज़रो से घुर रहे थे।

मै मंद मंद मुस्कुराते हुए उन्हें देख रही थी
गीतिका : भैया कल नदी में नहाने में कितना मजा आया ना।

कल्लु : हाँ वो तो है। तू कोशिश करेगी तो जल्दी तैरना सीख जायेगी।

फिर से कहानी कल्लू के शब्दों में-

गीतिका मेरे बगल में लेट गई और मैंने जब करवट ली तो गुड़िया की मोटी गाण्ड मेरे लंड से सट गई मेरा लंड तो गुड़िया की गुदाज जवानी और मोटे मोटे दूध देख कर ही खड़ा हो गया था तभी माँ अपने घाघरे के ऊपर से अपनी चुत पोछते हुए बाथरूम से निकली और हम दोनों ने आंखे बन्द कर ली माँ थोड़ी देर बाद एक चादर ले कर आई और हम दोनों के ऊपर डाल कर अंदर चलि गई।
मैने धीरे से कहा गुडिया।
गूडिया : क्या भइया, गुड़िया ने मेरी ओर मुह कर लिया और मुझे देखने लगी।
कालू : गुड़िया कल फिर चलेगी मेरे साथ नदी में नहाने।
गुडिया : हाँ चलूँगी लेकिन मै आपकी गोद में चढ़ कर पानी में उतरूँगी मुझे बड़ा डर लगता है।
कालू : तू फिकर न कर मै अपनी प्यारी बहना को अपनी गोद में उठा कर नहलाउंगा, इतना कह कर मैंने गुड़िया की मोटी गाण्ड पर हाथ रख दिया।
उसकी स्कर्ट पहले से ही ऊपर चढ़ी हुई थी और मेरा हाथ उसकी नंगी गाण्ड पर चला गया, मेरा लंड यह जान कर पूरी तरह अकड गया की गुडिया ने पेंटी नहीं पहनी हुई थी, मेरी उंगलियो से उसकी गाण्ड की दरार बस एक इंच की दूरी पर थी लेकिन मै हाथ आगे नहीं बढा पा रहा था।
गुडिया : भैया आप मुझसे बहुत प्यार करते हो ना।
कालू : यह भी कोई पुछने की बाद है, गुड़िया ने इतना सुना और अपने मुह से मेरे होठो को चुम लिया और मेरा हाथ अपने आप मेरी बहन गुडिया की मोटी गाण्ड की गहरी दरार में चला गया, मेरे हाथ गुड़िया की गुदा को जैसे ही सहलाने लगे गुड़िया कस कर मुझसे चिपक गई।



अब मै बेतहाशा गुड़िया के रसीले होठो को चुसने लगा और उसकी मोटी गाण्ड की गहरी दरार में हाथ फेरने लगा।
गुडिया : भैया एक बात कहूँ।
कालू : क्या।
गुडिया : भैया आप बहुत अच्छा चाटते हो, इतना कह कर गुड़िया मुस्कुराने लगी, मैंने गुड़िया की छाती पर धीरे से हाथ रखा तभी गुड़िया ने मेरे हाथ के ऊपर हाथ रख कर अपने दूध को दबाने का इशारा किया।
कालू : क्या कह रही थी तु।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, क्या।

कल्लु : क्या चाटने की बात कह रही थी।
गुडिया : शर्मा कर अपने मुह को मेरे सिने में छुपाते हुए कहने लगी कुछ नही।
कालू : मैंने धीरे से गुड़िया की गुदा सहलाते हुए उसकी चुत की फांको को उंगलियो से सहलाया और फिर कहा बता न गुड़िया मै क्या बहुत अच्छा चाटता हूँ।
गुडिया : धीरे से मेरे कान के पास मुह लगा कर कहने लगी, भैया आप चाटते थोड़े ही हो, आप तो चुसते हो और पीते हो।
कालू : गुड़िया के मोटे मोटे दूध को दबाते हुये, बता न क्या पीता हूँ।


गुडिया : अपनी बहन की चुत और क्या।
कालू : भला कोई भाई अपनी बहन की चुत पीता है क्या इतना कह कर मैंने अपनी जीभ गुड़िया के मुह में डाल दिया और वह मेरी जीभ चूस कर कहने लगी।


भैया आज कल तो सब सबसे पहले अपनी बहन की ही चुत पीना पसंद करते है।
कालू : तुझे कैसे पता है यह सब।
गुडिया : मैंने क़िताबों में पढ़ा है।
कालू : क्या लिखा था उसमे।
गुडिया : मुझे शर्म आती है।
कालू : अच्छा मै तेरी चुत चाटूंगा फिर तो बतायेगि।
गुड़िया : मुस्कुराते हुए ठीक है लेकिन कोई देख लेगा तो।
कालू : एक काम करते है में तेरे पैरो की तरफ सर कर लेता हु और चादर ढक कर लेट जाते है फिर मैंने अपना सर गुड़िया के पैरों की तरफ कर लिया, गुड़िया ने अपनी मोटी भरी हुई जांघो को फैला दिया और मै उसकी रसीली चुत की मादक गंध सूँघते ही पागल हो गया और अपनी बहन की रसीली चुत को अपनी जीभ से चाटने लाग, लेकिन तभी मुझे जोर का झटका लगा जब गुड़िया ने मेरे काले लंड को धोती के ऊपर से अपने हाथ में भर कर दबोच लिया, मै उस एह्सास से पागल होने लगा और गुड़िया की मस्त चुत को अपने हांथो से फैला फैला कर चाटने लगा। इतने में गुड़िया ने मेरे लंड को धोती से बाहर निकाला और मेरे लँड को चुसने लगी ।मैं तो चकित हो गया की गुड़िया किसी एक्सपर्ट की तरह मेरे मस्त लंड को चूस रही थी,गीतिका ने 10 मिनट तक मेरे लंड को अच्छी तरह से चाटा और चूसा मेरे लंड पूरा रॉड बन गया था।मैंने भी गुड़िया की चूत को फैला फैलाकर चाटा।

कुछ देर बाद गीतिका ने कहा भैया इधर आओ न, मै उठ कर उसकी तरफ चला गया और उसे देखा तो उसने मेरे हाथ पकड़ कर अपने मोटे मोटे दूध पर रख दिए और मै अपनी बहन के कसे हुए ठोस दूध को कस कस कर दबाने लगा, रात के १२ बज चुके थे गांव में सन्नाटा था और गीतिका अपने दूध दबवाते हुए मेरे लंड को खूब दबा दबा कर देख रही थी।

मै गुड़िया के रसीले होठो को चूस रहा था।

कल्लु : गुड़िया बता न तूने किताब में क्या पढ़ा था।
गुडिया : मुझसे चिपकते हुये, भैया उसमे बहुत गन्दी गन्दी कहानिया थी।
कालू : कैसी कहानिया बता ना।
गुडिया : भैया मुझे शर्म आती है।
कालू : अब अपने भैया से क्या शर्मा रही है बता न।

गुडिया : भैया उस कहानी में लिखा था की एक भाई की दो बहने थी और वह अपनी दोनों बहनो को पूरी नंगी करके खूब कस कस कर चोदता है।
कालू : अरे गुड़िया वो तो कहानी में ऐसे ही लिख देते होंगे वर्ना कोई भाई अपनी बहन को थोड़े ही चोदेगा।
गडिया : ऐसा नहीं है भैया आज कल तो लोग सबसे पहले अपनी बहन को ही नंगी करके चोदना चाहते है
कालू : तूने कही सुना है ऐसा।

गुडिया : हाँ मेरी सहेली बता रही थी की उसके भैया उसको पिछले 4 सालो से खूब तबियत से रात रात भर नंगी करके चोदते है।
कालू : क्यों उसके घर में भाई बहन के अलावा और कोई नहीं है क्या।
गुडिया : नहीं उसकी माँ है ना।
कालू : तो फिर वह रात भर अपनी बहन को नंगी करके चोदता है तो उसकी माँ को पता नहीं चलता है।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, हो सकता है भैया बहन को चोदने के बाद वह अपनी माँ को भी रात भर नंगी करके चोदता हो।
कालू : मुस्कुराते हुए अपनी बहन के रसीले आमो को दबा दबा कर चुसते हुये, अरे गुड़िया कोई अपनी माँ को पूरी नंगी करके कैसे चोद सकता है।
गुडिया : मेरे लंड को दबाते हुये, अरे भैया आजकल तो लोगो को सबसे ज्यादा अपनी माँ बहन के दूध और चूतड़ ही सबसे ज्यादा अच्छे लगते है।
मैने तो कई लड़को को अपनी खुद की माँ के भारी चूतडो को घुरते हुए देखा है और कहानियो में भी माँ को चोदने की बहुत कहानिया लिखी है लोगो ने।
तूम भी तो माँ के चूतडो को खा जाने वाली नज़रो से देख रहे थे।
कालू : नहीं नहीं वो तो मै ऐसे ही देख रहा था।
गुडिया : झूठ मत बोलो देखो माँ के मोटे मोटे चूतडो की बात करने से आपका लंड कितना बड़ा और मोटा हो गया है, सच सच बताओ भैया आपको माँ के चुतडों को देखना अच्छा लगता है ना।
कालू : चुत में ऊँगली पेलते हुये, मुझे तो तेरे और माँ दोनों के चूतड़ बहुत अच्छे लगते है।
गुडिया : तो क्या आज रात भर आप अपनी बहन को पूरी नंगी करके चोदोगे।
कालू : क्या तू अपने भैया का मोटा तगड़ा लंड अपनी चुत में नहीं डलवाना चाहती है।
गुडिया : मै तो कब से अपने भैया के मोटे तगडे लंड से चुदने के लिए तड़प रही हूँ, भैया अपनी बहन के ऊपर चढो ना।
कालू : कही माँ आ गई तो।

गुडिया : ओफ हो आप बहुत ड़रते हो माँ आ गई तो माँ को भी चोद लेना पर पहले अपनी बहन को तो चोद लो
गुडिया की बात सुन कर मैंने उसकी मोटी जांघो को फैला कर अपने मस्ताने लंड को उसकी चुत के मुहाने पर रख कर उसके दूध को दबोचते हुये एक कस कर धक्का दिया और मेरा मोटा लंड मेरी बहन की कुँवारी रसीली चूत को फाड़ता हुए एक ही बार में आधा घुस गया।गुड़िया जोर से चिल्लाई लेकिन मैंने पहले ही उसके रसीले होंठो को अपने होंठो में कस लिया था। अब गुड़िया मुझसे कस कर चिपक गई।

गुडिया : ओह भैया आह सी सी बहुत मोटा और लम्बा है मेरी चुत फटी जा रही है आह सी सीईई ओह भईया,
कालू :आह ओह गुड़िया कितनी कसी हुई टाइट चुत है तेरी पर तेरे दूध बड़े मस्त है गुड़िया बस थोड़ा सा लंड और बचा है।
गुडिया : धीरे धीरे पेलो भैया यह सी स ओह मर गई भइया।


मैने गुड़िया की चूत में धीरे धीरे गहरे धक्के मारने शुरू कर दिए और गुड़िया भी धीरे धीरे अपनी कमर उचकाने लगी।
आह भैया थोड़ा और तेज करो न बहुत मजा आ रहा है, मैंने गुड़िया के मोटे मोटे चूतडो के निचे अपने हाथ लगा कर खूब कस कर कर गुडिया की चुत में अपने काले मुसल को पेलने लगा और गुड़िया मुझसे खूब चिपक चिपक कर अपनी चुत मरवाने लगी, ओह गुड़िया जब से मैने तेरे मोटे मोटे चूतडो को देखा है तब से मै तुझे पूरी नंगी करके चोदने के लिए तड़प रहा था, जब मैंने देखा की मेरी प्यारी बहन इतनी खुबसुरत हो गई है और उसके दूध और चूतड़ बड़ी बड़ी औरतो की तरह दिखने लगे है तब से मै अपनी प्यारी बहन की गदराई जवानी को पुरी नंगी करके चोदने के लिए तड़प रहा था।


गुडिया : तगडे धक्के अपनी चुत में लेते हुए आह ओह ओह भैया मै सब जानती हूँ, पहले दिन ही तुम्हारी नजरे जब मेरी मोटी गाण्ड पर पड़ी थी तो मै समझ गई थी की मेरा अपना भाई मुझे पूरी नंगी करके मुझे चोदना चाहता है पर जब मुझे यह पता चला की तुम माँ को भी पुरी नंगी करके उसे चोदना चाहते हो तो बड़ा अजीब लगा फिर जब मैंने अपनी सहेली से पूछा तब उसने मुझे बताया की आज कल तो कई माँ अपने बेटे से भी चुदवा लेती है, आज कल बड़ी उम्र की औरतो को भी जवान और तगडे लंड की चाह होती है, हो सकता है माँ भी अपनी चुत रगडते हुये तुम्हारे लंड के बारे में सोचती हो या तुमसे चुदने की कल्पना करके अपनी चुत रगड़ती हो।

कल्लु : कस कस कर लंड अपनी बहन गीतिका की मस्त भोस में पेलते हुये, गुड़िया क्या माँ भी अपनी चुत रगड रगड कर पानी निकालती होगी।
गुडिया : क्यों नहीं भैया आह ओह हर औरत जब अकेली होती है तो अपनी चुत जरुर रगड़ती होगी, मुझे तो लगता है माँ तुम्हारे लंड को सोच सोच कर मुठ्ठ मारती होगी तुमने अभी तक माँ को अपना लंड दिखाया है की नही।

कल्लु : अरे कहा दिखाया है हाँ धोती के ऊपर से माँ ने जरुर देखा है।
गीतिका : भैया एक बार अपने लंड को धोती से बाहर निकाल कर माँ को दिखा दो तो वह तुम्हारे खड़े लंड को देख कर पागल हो जायेगी और अपनी मस्त चूत में आपका लंड लेने के लिए तड़प जाएगी, आपका लंड ही इतना मोटा तगड़ा है की किसी की बुर भी पानी छोड़ सकती है।


कल्लु : अरे गुड़िया मै तो खुद माँ को पूरी नंगी करके उसकी मस्त चुत मारना चाहता हु पर अभी तक तो मैंने माँ को पूरी नंगी भी नहीं देखा है।
गीतिका : भैया अब खूब तेज तेज चोदो बड़ा मजा आ रहा है, खूब चुत मारो अपनी गुड़िया परी कि, वैसे भी किसी का भी लंड सबसे ज्यादा अपनी बहन
और माँ की नंगी जवानी देख कर ही खड़ा होता है। आज रात भर खूब चोदिये भैया अपनी छोटी बहन को।

कल्लु : हाँ गुड़िया ले अपने भैया का मस्त लंड तेरी चुत भी बिलकुल माँ पर गई है और तेरे चूतड़ भी माँ की तरह ही मोटे मोटे होते जा रहे है।
गुडिया : आह आह ओह भैया तुमने क्या माँ की चुत देखी है।
कालू : हाँ जब वह खेतो में बैठ कर घास काटती है तब लगभग रोज ही मुझे माँ का मस्त भोस नजर आ जाता है।
गुडिया : कैसी है माँ की चुत क्या खूब बड़ी और फुल्ली हुई है।
कल्लु : अरे मेरी परी माँ की मस्त चुत देखते ही मेरे मुह में पानी भर आता है ऐसा लगता है माँ की मस्त फटी चुत में वही बैठे बैठे ही लंड पेल दू और पूरे खेत में नंगी दौड़ा दौड़ा कर चोदुं।
गुडिया : भैया माँ को चुत फैला कर मुतते हुए देखा है आपने।
कालू : देखा है बहुत मोटी धार निकलती है माँ की मस्त भोस से।
गुड़िया : भैया एक बात कहूँ।
कालू : क्या।
गुडिया : मै चाहती हु की आप माँ को मेरे सामने नंगी करके खूब कस कस कर चोदो, मै चाहती हु की मै छूप जाऊ और आपको और माँ को छुप कर चोदते हुए देखु, मै देखना चाहती हु की माँ आपके मस्त काला लंड को कैसे चुसती है और फिर आप माँ को झुका कर कैसे उसकी मस्त चुत को खूब हुमच हुमच कर चोदते हो, मै चाहती हु आप माँ को खड़ी करके उसकी मस्त चुत के दाने को रगडते जाओ और माँ खड़ी खड़ी मुतती जाए,
जब वह मुतना रोक दे तो आप उसकी मस्त चुत के दाने को अपने मुह में भर कर चुसना शुरू कर दो और माँ फिर से आपके मुह में मुतना शुरू कर दे।

कल्लु : तू फिकर न कर जब भी मै माँ को पूरी नंगी करके चोदूँगा तुझे जरुर बताऊंगा,और दिखाऊँगा। लेकिन मै माँ को चोदने के लिए पटाउं कैसे।
गुडिया : भैया एक काम करो अगर आपने चाची को पटा कर चोद दिया तो माँ भी चुदवा लेगी क्यों की माँ और चाची की बड़ी बनती है।
कालू : लेकिन चाची मुझसे क्यों चुदवाएगी।

गुडिया : अरे चाची भी बड़ी चुदासी रंडी है वह तो जब भी मिलती है आपके कसरती बदन की ही बात करती है और उसने तो आपके लंड के साइज की कल्पना भी की हुई है।मुझसे बता रही थी की मै आपके साथ नंगी होकर नहा रही थी
कालू : क्या उसने तुझे और मुझे नहाते हुए देखा है।

गुडिया : हाँ मुझसे कह रही थी की तू खूब आजकल अपने भैया के साथ नंगी होकर नहाती है, मैंने कहा की मै तेरना सिख रही थी तो कहने लगी मुझे भी अपने भैया से कह कर तैरना सीखा दे, तुम कहो तो कल चाची को भी नदी में नहाने के लिए बुला लेती हु फिर जिस तरह तुमने मुझे तैरना सिखाया है और मेरे रसीले आमो को चुस चूस कर जैसे मेरी मस्त चुत चाटी थी बस उसी तरह चाची को भी नंगी करके तैरना सीखा देना। इतनी बड़ी घोड़ी को जब आप पूरी नंगी करके तैरना सिखाओगे तो आपका लंड पानी छोड़ देगा।


कल्लु : अरे बहना यह लंड तो पानी तब छोडेगा जब तेरी मस्त चुत को रात भर चोद चोद कर लाल नहीं कर देगा।
गुडिया : अच्छा भैया तुम्हारा मन माँ को चोदने का ज्यादा करता है या चाची को।
कालू : मै तो अपनी कल्पना में दिन रात अपनी माँ को ही नंगी करके खूब कस कस कर चोदता हूँ, मुझे सबसे ज्यादा माँ के मोटे मोटे मटकते चूतड़ अच्छे लगते है।
गुडिया : कभी माँ की मोटी गाण्ड को अपने हांथो से सहलाये हो।


कल्लु : गुड़िया की चुत में जड़ तक लंड पेलते हुये, हाँ गुड़िया ठण्ड के मौसम में जब मै अंदर सोता था तब रात को माँ भी मेरे बगल मे सोती थी तब मैंने माँ के मोटे मोटे गुदाज नरम नरम चूतडो को खूब सहलाया लेकिन गुड़िया मेरा मन माँ के चूतडो को खूब दबा दबा कर
दबोचने का होता है और उसकी मोटी गाण्ड की गहरी दरार में अपने मुह को भर कर चाटने और मुह से माँ की गुदाज गाण्ड दबाने का होता है।
गुडिया : तो जब माँ रात भर तुम्हारे साथ सोइ थी तो माँ के मस्त मोटे चूतडो को उनका घाघरा उठा कर खूब दबोच दबोच कर मसल लेते न।मा की नींद तो वैसे भी बहुत पक्की है फिर भी तुम्हे अगर डर लगता है तो मै तुम्हे कल ऐसी व्यवश्था कर दूंगी की तुम मेरे सामने ही रात भर माँ के गुदाज नंगे जिस्म को खूब दबोच दबोच कर सहलाना और जहा मन चाहे वहाँ माँ के बदन को चाटना चुसना, लेकिन अगर माँ को पुरी नंगी करके चोदना है तो चाची को भी नंगी करके तैरना सीखाना पडेगा।

कल्लु : ठीक है मेरी परी बहना जैसा तू कहेगी वैसा ही करुँगा अब जरा अपनी जाँघे थोड़ा और फैला कर उठा ले ताकि तेरे भैया का मोटा लंड अपनी बहन की चूत की जम कर ठुकाई कर सके और फिर मैंने गुड़िया को खूब कस कस कर चोदना शुरू कर दिया और गुड़िया हाय भैया हाय मेरे राजा भैया चोदो मुझे।
खुब कस कर चोदो आज फाड दो अपनी बहन की रसीली चुत और चोदो आह आह यह ओह सीई सीई ओह भईया मै मर जाऊंगी बस फिर क्या था मैंने गुड़िया की गाण्ड को अपनी हथेली में उठा कर ताबड तोड़ धक्के उसकी चुत में मारना शुरू कर दिया और फिर मेरा सारा रस गुड़िया की रसीली बुर में निकल गया और हम दोनों हाफ्ते हुये चिपक गये।
उस दिन गुड़िया को मैंने रात भर खूब जम जम कर चोदा हर चुदाई के कुछ देर बाद गुड़िया मेरा लंड चूस चूसकर खड़ा करती और फिर हम मस्त सेक्स की बाते करके चुदाई करते। गुड़िया और मै सुबह ४ बजे सोये।

सूबह सुबह हम अपने खेतो की और चल दिए आगे आगे गुड़िया और बाबा चल रहे थे और पीछे पीछे मै चल रहा था, गुड़िया बार बार मुझे पीछे मुड कर देखती और मुस्कुरा देती, मै जब उसके चूतडो को देखने लगता तब वह चलते चलते अपने घाघरे के ऊपर से अपनी गाण्ड खुजलाने लगती और मुझे देख कर ऐसी मादक निगाहो से देखते हुए स्माइल देती की मेरा दिल करता की रंडी का घाघरा उठा कर यही खड़े खड़े खूब कस कस कर लंड अपनी बहन की गाण्ड में पेल दूँ।,
खेतो में पहुंचने के बाद बाबा अपने काम में लग गए और गीतिका मेरी ओर देख कर मुस्कुराते हुए कहने लगी भैया मै चाची के पास जा रही हु और
1 बजे तक हम नदी में नहाने चलेंगे और हाँ मै चाची को भी साथ लेकर आ रही हु तब तुम चाची के सामने शरमाना नही।
कालू : लेकिन तू चाची से कहेगी क्या।
गुडिया : वह सब मेरे ऊपर छोड़ दो और यह बताओ की चाची को चोदोगे ना।
कालू : मुस्कुराते हुए तू जैसा कहेगी मै वैसा करुँगा।
गडिया : मुस्कुराते हुए तो फिर ठीक है थोड़ी देर में मै चाची के साथ नदी की तरफ जाऊंगी तुम भी पीछे पीछे चले आना।

इसके बाद गुड़िया चाची के पास पहुच गई और उससे बाते करने लगी।
चाची : क्यों गुड़िया कैसी है आज तो बड़ी खिली खिली लग रही है कही रात को कल्लु के साथ तो नहीं सोइ थी।
गुडिया : मुस्कुराते हुए अरे नहीं चाची लेकिन हाँ भैया से मैंने तुम्हे भी तैरना सीखने की बात कर ली है तो आज चलो हम साथ में नदी में नहायेंगे और तैरेंगे भी।
चाची : न बाबा न मै नहीं जाती तेरे साथ तू तो बिलकुल रंडी बन गई है तुझे शर्म नहीं आती पूरी नंगी होकर अपने भाई के खड़े लंड पर चढ़ जाती है।
गुडिया : इसीलिए तो कह रही हु एक बार तुम भी पूरी नंगी होकर भैया के लंड पर चढ़ जाओगी तो फिर तुम्हारा मन उनके खड़े लंड से निचे उतरने का नहीं होगा।

चाची : नहीं गुड़िया मुझे तो शर्म आएगी, इतने बड़े जवान मरद के सामने मै कैसे नंगी हो कर पानी में जॉंऊंगी।
गुडिया : तुम भी न चाची तुम्हारी मस्ती भरी जवानी देख कर तो मैंने भैया को पटाया है की तुम्हे भी तैरना सीखा दे और तुम हो की अब नई नवेली दुल्हन की तरह
नखरे कर रही हो।
चाची : कुछ सोच कर मुस्कुराते हुये, क्या कल्लु राजी हो गया है मुझे तैरना सीखाने के लिए सच सच बता।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, अच्छा पहले तुम मुझे एक बात सच सच बताओ।
चाची : क्या।
गुडिया : चाचा जब 2 महिने में एक बार आते है तब तुम इतने दिनों तक क्या करती हो।
चाची : मुस्कुराते हुये, अरे अब क्या करुँगी गुड़िया जब बहुत चुदवाने का मन करता है तो ऊँगली से सहला लेती हूँ।
गडिया : तुमने कभी कल्लु भैया का लंड देखा है।
चाची : हाँ एक बार उसे मुतते हुए देखा था बहुत मोटा और काला लंड है तेरे भैया का, लेकिन मुझे लगता है तूने भी अपने भैया के मोटे लंड के दर्शन कर लिये
है इसीलिए मुझसे पूछ रही है, सच सच बता नदी में नहाते समय तूने अपने भैया का मोटा लंड देखा है ना।
गुडिया : मुसकुराकर शरमाते हुये, हाँ देखा है।
चाची : एक दम से उत्साहित होते हुए कहने लगी उसने खुद तुझे दिखाया था क्या।
गुडिया : अरे नहीं चाची पर जब मै नंगी हो गई थी तब उनका लंड खड़ा हो गया था और धोती से बाहर निकल आया था तब मेरी नजर भैया के मोटे तगडे लंड
पर पड़ गई थी।

चाची : तुझे नंगी देख कर तो वह पगला गया होगा, तेरे दूध भी खूब दबाये होंगे ना।
गुडिया : नहीं वह ड़रते बहुत है इसलिए बस मुझे पकड़ने के बहाने मेरे दूध और गाण्ड को अपने हाथ से सहला भर देते है।
चाची : तुझे मालूम है कल्लु का लंड बहुत मोटा और तगड़ा है मुझे यह बात सबसे पहले तेरी माँ ने बताइ थी।
गुडिया : तो क्या माँ ने भैया का लंड देखा है।
चाची : हाँ वह बता रही थी की उसके बेटे कल्लु का लंड बहुत मोटा और लम्बा है, कहने लगी एक बार को तो उसकी चुत ने भी अपने बेटे के ऐसे मस्त लंड को देख कर पानी छोड़ दिया था।

गुडिया : इसीलिए तो कह रही हु भैया बहुत भोले है और मै अकेली कुछ मजा नहीं मार पा रही ह, तुम साथ रहोगी तो दोनों मिल कर मजा लेंगे।
चाची : तू तो ऐसी बाते करने लगी है की मेरी बुर अभी से पानी छोड़ रही है, कही तू अपने भैया के मोटे लंड से चुदना तो नहीं चाहती है।
गुडिया : हाँ जब से भैया का मोटा लंड देखा है तब से मेरी चुत में बहुत मीठी मीठी खुजलि हो रही है, भैया का मोटा लंड अपनी चुत में घूसवाने का बड़ा मन कर रहा है, लेकिन पहले तुम भैया से अपनी चुत मरवा लो उसके बाद ही मै भैया से चुदुँगी।

चाची : अच्छा तो मुझे चुदते देख कर पहले तू अपना डर दुर करना चाहती है की कही तेरे भैया का मोटा लंड तेरी चुत फाड न दे।
गुडिया : हाँ पहली बार मरवाने पर मैंने सुना है बड़ा दर्द होता है और फिर भैया का लंड तो खूब मोटा और तगड़ा है इसलिए मै चाहती हु की पहले मै देखु
की कैसे आपकी मस्त चुत को मेरे भैया का लंड फाड फाड कर चोदता है।
चेची : लेकिन अगर कोई आ गया नदी में तब।
गुड़िया : अरे जब तक तुम भैया से चुदोगी तब तक मै इधर उधर आने वाले का ध्यान रखूँगी फिर जब भैया मुझे पूरी नंगी करके चोदेगे तब तुम ध्यान रखना और वैसे भी जिस घाट पर तुम और हम जाते है वहाँ तो और कोई आता ही नहीं है तो डर किस बात का।

चाची : कुछ सोचते हुए अच्छा ठीक है लेकिन।
गुडिया : अब लेकिन वेकिन कुछ नहीं अब तुम जल्दी से मेरे साथ चलो हमें सीधे नदी की ओर जाना है भैया हमें देख कर आ जाएगे।
चाची : अरे जरा रुक तो सही एक दम से उठा नहीं जाता है कमर में दर्द होने लगता है।

गुडिया : चाची की मोटी गाण्ड की दरार को घाघरे के ऊपर से सहला कर दबाते हुए कहने लगी इसीलिए तो चाची कह रही हु एक बार भैया का मोटा लंड जब तुम्हारी गाँड में घुस कर चोदेगा तो तुम्हारे कमर के सारे दर्द दुर हो जाएगे और फिर चाची मुझसे मुसकुराकर बोली: रंडी कही की शहर जाकर तो बहुत चुदासी हो गई है चल आज लगता है कल्लु का मस्ताना लंड मेरी चुत की खूब चुदाई करने वाला है।

आगे कहानी गुड़िया के शब्दों में-

मैं चाची को ले कर नदी की ओर चल पड़ी और कुछ देर बाद भैया आता हुआ दिखाई दिया चाची कपडे धोने लगी और मैं अपनी गोरी गोरी पिण्डलियों को नदी के पानी में डाल कर अपने पैर हिला रही थी और मेरी चुत मस्ती के मारे फूल रही थी, चाची की गदराई जवानी उसकी चिकनी कमर और उठी हुई गुदाज गाण्ड अलग ही कहर ढा रही थी, कुछ देर बाद कल्लु भैया आ गए और।

गीतिका : भैया आज तो आपको चाची को भी तैरना सीखाना पडेगा।
कालू : चाची को तो तैरना आता होगा क्यों चाची।

चाचि : अरे कहा रे कल्लु कभी ऐसी जरुरत ही नहीं पड़ी अब यह गुड़िया जिद करने लगी की भैया बहुत अच्छे से तैरना सीखाते है और मुझे भी पकड़ लाई, चाची की नजर कभी भैया के चौड़े सिने में और कभी उसकी धोती में कसे लंड की ओर जा रही थी।

कल्लु : अच्छा हुआ चाची आप आ गई आपको भी तैरना सीखा देता हु और फिर कल्लु भैया पानी में कमर तक उतर गए और मुझसे कहने लगे आजा गुडिया,
मैने अपने कपडे की तरफ इशारा किया तो भैया ने कपडे उतारने का इशारा कर दिया, मैंने पहले अपनी चोली उतार दी और मेरे बड़े बड़े रसीले आम पूरे नंगे हो गये।
मेरे आमो को देखते ही कल्लु भैया अपने लंड को धोती के ऊपर से सहलाने लगे
कालू : गुड़िया घाघरा भी उतार कर जल्दी से आ जा।
गडिया : भैया पहले चाची को सिख़ाओ उसके बाद मै आउंगी, मैंने चाची को कहा चाची जल्दी से नंगी हो जाओ भैया देखो कैसे तुम्हारे पके हुए आमो को खा जाने वाली नज़रो से देख रहे है। चाची ने शरमाते हुए अपनी चोली खोलना शुरू की और जब उसने चोली उतार दी तब उसके मुझसे भी डबल मोटे मोटे रसीले आमो को देख कर कल्लु भैया की
आंख में जवानी के लाल डोरे तैरने लगे।

चाची : घाघरे का नाडा पकडे मुसकुराकर कहने लगी गुड़िया मुझे शर्म आ रही है, मै घाघरा पहने पहने ही तैरना सीख लेती हूँ।
गडिया : अरे चाची घाघरा बार बार पैर में फसेगा तो कैसे तैरोगी, चलो जल्दी से उतार दो, लो मै भी तुम्हारे साथ ही नंगी हो जाती हु तब तो तुम्हे शर्म नहीं लगेगी
ओर फिर मैंने अपने घाघरे का नाडा खींच दिया और मै पूरी मादरजात नंगी हो कर खड़ी हो गई।

कल्लु भैया मेरी नंगी रसीली जवानी को घुर रहे थे तभी मैंने चाची के नाडे को पकड़ कर खींच दिया और जब चाची पूरी नंगी हुई तो कल्लु भैया भी उसकी गुदाज भरी हुई जवानी उठा हुआ माँसल पेट और बड़े बड़े दूध और मस्त फुली हुई चुत को देख कर मस्त हो गये, अब कल्लु भैया को मैंने कहा भइया थोड़ा इधर आओ नहीं तो हम डूब जाएगे और फिर कल्लु भैया हमारी तरफ आने लगे और मैंने चाची का हाथ पकड़ कर उन्हें पानी में उतार दिया।

चाची का चेहरा पूरा लाल हो रहा था और रंडी के चूतड़ बहुत भरी भरकम और गोरे थे अभी कल्लु भैया को चाची के मतवाले चूतडो के दर्शन नहीं हुए थे।
कालू भैया एक दम आ गए और चाची का हाथ पकड़ कर गहराई की ओर जाने लगे चाची डर रही थी और धीरे धीरे आगे कदम बढा रही थी और मै चाची की
चीकनी कमर पकडे उसके पीछे पीछे पानी में जा रही थी।

तभी कोई मछली निचे आई और फिर क्या था चाची किसी लोंड़िया की तरह भैया के कमर के इर्द गिर्द अपनी मोटी जांघो को लपेट कर भैया के सिने से चिपक गई, हाय मेरे भइया को तो जैसे जन्नत का सुख मिल गया भैया का दोनों हाँथ सीधे चाची के भारी भरकम गोरे गोरे चूतडो पर चले गए और भैया ने चाची के चूतडो को ऐसे थम लिया जैसे चाची को अपने लंड पर चढा कर चोद रहे हो, उस समय चाची का भारी भरकम 70 किलो का जिस्म पानी के अंदर भैया को किसी फूल के सामान लग रहा था।

अब भैया और बीच में जाने लगे और मै भी भैया के पीछे से अपनी जांघो को खोल कर भैया की कमर में टांगे लपेट कर लिपट गई पीछे से मैं अपने मोटे मोटे रसीले आमो का दबाव भइया की पीठ पर दे रही थी और चाची भैया के सिने से अपने मोटे मोटे तन्दुरुस्त रसीले आमो को दबा रही थी, भैया पागलो की तरह चाची को अपने सिने से चिपकाये हुये उनके सुडौल बड़े बड़े चूतडो को अपने हांथो में भरे हुए दबा रहे थे।

कल्लु : गुड़िया और बीच में ले कर चलु।
गुडिया : हाँ भैया बहुत मजा आ रहा है लेकिन डूबा मत देना, चाची आपको डर तो नहीं लग रहा है।
चाची : गुड़िया इधर बहुत गहरा है कल्लु ज्यादा बीच में मत जा।


मै कुछ कहता इससे पहले गुड़िया ने पानी के अंदर हाथ डाल कर मेरी धोती खोल दी और मेरा फनफनाता काला और मोटा लंड सीधे चाची की मस्त फुली हुई भोस में रगड खाने लगा।
और फिर गुड़िया ने मेरे एक हाथ को पकड़ कर चाची की फुली चुत पर रख कर दबा दिया और पहली बार मैंने अपनी चाची की मस्त फुली हुई चूत को पकड़ कर सहलाया, तभी गुडिया न हाथ आगे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ कर उसकी खाल पीछे की और आगे से चाची के हाथ को पकड़ कर मेरे लंड को चाची के हाथ में दे दिया।

अब हम तीनो कुछ नहीं बोल रहे थे गुड़िया एक हाथ से मेरे लंड को और दूसरे हाथ से मेरे आंडो को दबा दबा कर सहला रही थी और चाची ने भी मेरे सिने में मुह छुपाये हुये मेरे लंड के टोपे पर हाथ फेर रही थी।
मै एक हाथ से चाची की गाण्ड की गहरी दरार सहला रहा था और दूसरे हाथ से मैंने चाची के मोटे मोटे रसीले आमो को खूब कस कस कर मसलना शुरू कर दिया था और चाची आह ओह कल्लु धीरे दबा रे कहने लगी और गुड़िया मेरे लंड को पकड़ कर बार बार चाची की मस्त चुत में रगड रही थी, तभी चाची ने अपनी गाण्ड उठा कर मेरे लंड को गुड़िया के हाथ से छीन कर सीधे अपनी फुली चुत के लपलपाते छेद में रखा और अपनी कमर का धक्का मेरी ओर दिया और मेरा लंड सट से चाची की चुत मे घुस गया और मै फिर अपने आप को रोक नहीं पाया और मैंने चाची की मोटी गाण्ड को अपने हांथो मे भर कर एक करारा धक्का मारा और
मेरा पूरा लंड सटाक से चची की मस्त चुत मे जड तक उतर गया और चाची के मुह से आह सी ओह कल्लु जैसे शब्द निकल पड़े मैंने एक हाथ से चाची की गाण्ड की दरार को सहलाते हुए दूसरे हाथ से चाची के मोटे मोटे आमो को खूब कस कस कर मसलते हुए अपने मोटे लंड के धक्के चाची की भोस मे तबियत से मारना शुरू कर दिये और चाची मेरे होठो को चुस्ने लगी।


उधर गुड़िया ने जब मेरे लंड को पकड़ने की कोशिश की तब उसे एह्सास हुआ की मेरा लंड चाची की चुत में पूरा घुसा हुआ है।
तब गुड़िया ने मुस्कुराते हुए मेरे गालो को चुमा और मेरे आंड को अपनी हथेली में भर भर कर सहलाने लगी।

चाची को चोदते चोदते भैया थोड़ा किनारे की ओर आ गया अब चाची के पैर जमीन पर टीक गए और भैया और गुड़िया ने चाची को वही झुका दिया एक हाथ से मै अपनी बहन गुडिया की चुत सहला रहा था और पीछे से चाची को झुका कर उसकी चुत में सटा सट लंड पेलने लगा और गुड़िया और चाची दोनों किसी रंडी की तरह खूब सीसियते हुए अपनी चुत का पानी निकालने लगी।
जब चाची की गाण्ड को दबोच दबोच कर भैया ने चाची की चुत को चोद चोद कर सुजा दिया तब चाची कहने लगी कल्लु अब मुझसे नहीं रहा जा रहा है।
भैया ने चाची को नंगी ही अपनी गोद मे उठा लिया और नदी के बाहर आने लगे और मै पूरी नंगी अपने भैया के पीछे पीछे बाहर आ गई अब भैया ने वही हरी हरी घास पर चाची को लिटा दिया और उनकी मोती जांघो को फैला कर अपने काले मुसल को चाची की मस्त चुत की फांको को फैला कर उनकी भोस मे पेल दिया और चाची की जांघो को दबोचते हुए सटा सट लंड चाची की चुत मे मारने लगे और मै भैया के पीछे बैठ कर उनके आंड को दुलारने और सहलाने लगी।

कूछ देर बाद चाची को खड़ी करके भैया लेट गए और चाची उनके मोटे लंड पर चुत फैला कर चढ कर बैठ गई और अपनी गाण्ड उठा उठा कर भैया का लंड अपनी मस्तानी बुर में लेने लगी तभी भैया ने मुझे इशारा करके अपने मुह पर बैठने को कहा।
और मै नंगी चुत फ़ैलाये अपने भैया के मुह पर अपनी चुत खोल कर बैठ गई अब भैया निचे अपनी कमर उठा उठा कर चाची को चोदने लगे और मेरी चुत को दोनों हांथो से फैला फैला कर चाटने लगे, भैया ने चाची को लंड मार मार कर मस्त कर दिया और चाची भैया के ऊपर ही पसर गई और मेरी गाण्ड के छेद को जीभ से चाटने लगी, कभी कभी भैया मेरी चुत चाटते हुए और चाची मेरी गाण्ड के छेद को चाटते हुए आगे बढ़्ते और फिर उन दोनों की जीभ मिलती और वह पागलो की तरह एक दूसरे की जीभ चुसते हुए एक साथ कभी मेरी गाण्ड के छेद को और कभी मेरी मस्त चुत के छेद को चाटने लगते। और साथ ही चाची की चुत में लंड पेलते जाते।

लगभग आधे घंटे तक चाची की खूब तबियत से अपने मोटे लंड से चुदाई करने के बाद जब चाची फिर से झड़ गई तो भैया ने मुझे कुतिया बना के चोदना शुरू किया और फिर मुझे भी भैया ने खूब तबियत से चोदा , हमारी चुदाई देख कर चाची भी गरम हो गई और इस बार चाची ने अपनी चुत खोल कर भैया के मुह पर रख दी और भैया ने मुझे चोदते हुए चाची की बुर को खूब चूसा और चाची की गांड में थूक लगा लगा के उसे अपनी ऊँगली लगा के ऊँगली से चाची की गांड भी मारते रहे। कुछ देर और चोदने के बाद मैं फिर से झड़ गई तब भैया ने चाची को फिर से कुतिया बना दिया और फिर
अपने लंड को मुझे चूसने का इशारा किया।मैंने भैया के लंड को अपने थूक से पूरा गिला कर दिया।जब भैया ने चाची की गांड के छेद पर थूका तब मुझे मालूम हुवा की भैया चाची की गांड मारने वाले है।
भइया ने अपने मोटे लंड को चाची के गांड के छेद पर रखकर एक जोर का धक्का मारा जिससे भैया का थूक से गिला गांड सटाक से चाची की टाइट गाण्ड में आधा घुस गया।चाची जोर से चिल्लै और चाची भैया को गाली देने लगी।

चाची:बहनचोद चूत में पेलने को बोला तो अपना डंडा मेरी गांड में पेल दिया।गांड मारनी है तो अपनी माँ की मार ना कमीने।
कल्लू:चुप साली कितनी मस्त गांड है तेरी।मज़ा आ गया।
गुड़िया:भैया गांड में ज्यादा मज़ा आ रहा है क्या।चाची की गांड भी माँ की तरह ही मस्त है।मारो भैया जोर जोर से पेलो।
चाची:चुप साली रंडी।ज्यादा आग लगी है तो अपनी गांड मरा ना तब मालूम चलेगा ।गांड मराने में कितना दर्द होता है।

गुड़िया:मैं तो अपने भैया से गांड भी मरवाउंगी।चाहे कितना भी दर्द क्यों ना हो।

अब कल्लू जोर जोर से चाची की गांड मार रहा था किसी कुतिया की तरह।साथ में चाची के चूतडो पर थप्पड़ भी मार रहा था।और गुड़िया को अपने पास बुलाकर उसके होंठो का रस चूस रहा था।अब कल्लू तेज स्पीड में चाची की गांड मारने लगा।चाची दर्द और मजे से चिल्ला रही थी।कल्लू ने आखिरी शॉट मारा और अपना लंड निकालकर दोनों रंडियों को अपने आगे बैठाके अपना लंड चुसवाने लगा।दोनों अपनी अपनी जीभ से कल्लू का लंड चाटने लगी।कल्लू ने जल्दी ही दोनों के मुह पर अपना वीर्य गिराने लगा।दोनों का चेहरा कल्लू के वीर्य से भर गया।जिसे दोनों ने चाट चाट के साफ कर दिया।फिर साफ सफाई करके हम लोग जल्दी से कपडे पहन कर अपने खेतो की ओर चल दिए।

आज सुबह से ही बारिश का मौसम हो रहा था और बाबा खेतो की ओर जा चुके थे गीतिका ने मुझसे
कहा भैया हम थोड़ी देर से चले तो, मैंने कहा ठीक है उसके बाद मै गुड़िया के साथ खेतो की ओर चल दिया गुड़िया मुझसे काफी खुल चुकी थी और मै उसके भारी चूतडो को दबाता हुआ उसके साथ चल रहा था।

कभी कभी मै उसे चलते हुये उसके दूध दबा कर उसके होठो को भी चुम लेता था, गुड़िया लगता था की गरम हो गई है उसके गाल लाल हो रहे थे और वह बार बार मेरे धोती में खड़े लंड की ओर देख कर मुस्कुरा रही थी,
जब हम गांव से बाहर थोड़ी सुनसान जगह पर आ गए तो गीतिका का सब्र का बांध टूट गया और वह कहने लगी भैया लगता है आपके लंड को चुत का पानी लग गया है अब यह बार बार चुत में घूसने को तड़प रहा है।


कल्लु : हाँ लेकिन यह असली झटके तो तब देता है जब इसे तेरे मोटे मोटे चूतडो में घूसाने के बारे में सोचता हूँ।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, अच्छा तो आपको अपनी बहन के नंगे चूतडो को देखना है तो ठीक है।
आप मेरे पीछे पीछे चलो मै अपनी मोटी गाण्ड खोल कर अपने भैया को अपने मटकते लहराते
चूतडों की थिरकन दिखाती हु और गुड़िया ने अपना घाघरा उठा दिया और अपनी गुदाज मोटी गाँड
मटकाते हुए मेरे आगे आगे चलने लगी हाय क्या कातिल जवानी थी मेरी बहन की ऊपर से रंडी
चलते हुए अपनी गाण्ड की फॉको को फैला कर अपनी गुदा दिखा दिखा कर सहला रही थी मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपनी उंगलियो को उसकी गुदा में पेल कर उसकी गाण्ड सहलाते हुए उसके साथ
साथ चलने लगा।


गुडिया : भैया लगता है आपको औरतो की गाण्ड बहुत अछि लगती है।
कालू : हाँ मुझे बड़े बड़े चूतडो को दबाने और चोदने का बड़ा मन करता है।
गुडिया : अच्छा सबसे पहले आपने किसके मोटे मोटे चूतडो को देखा था।
कालू : माँ का।
गुडिया : हाय दैया आपको शर्म नहीं आई अपनी माँ के चूतडो को आपने नंगा देखा है।
कालू : अरे इसमें शर्म की क्या बात है मैंने तो माँ की मस्त फुली हुई चुत को भी खूब देखा है।
गुडिया : अच्छा लेकिन कब।
कालू : अरे वही खेत में घास काटते हुए माँ का घाघरा ऊपर उठ गया और उसकी मस्त फटी हुई फांके
खुल कर मेरे सामने आ गई क्या मस्त चुत है माँ की।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, कभी माँ की फुली चुत को हाथ से छु कर या दबा कर देखा है आपने।
कालू : हाय गुड़िया मेरी ऐसी किस्मत कहा मुझे तो बहन की चुत भी बड़ी मुश्किल से चोदने और
दबाने को मिली है, पर तेरी शादी हो जायेगी तब तेरी मस्त चुत भी मुझसे दुर हो जाएगी।

गुडिया : फिकर न करो भैया जब भी मै ससुराल से आउंगी तो फिर अपने भैया को दिन रात अपनी
चुत चटा चटा कर मस्त करुँगी और अब तो मै हमेशा ही अपने भैया के मोटे लंड से चुदूंगी।
और आपको तो मै अपने ससुराल बुला कर वही अपने पति के बिस्तर में ही अपने भैया से खूब चुत मरवाउंगी।



कल्लु : और तेरे पति का क्या होगा।
गुडिया : अरे वह काम धाम करने जायेगा और मै अपने पति के बिस्तर में अपने भैया के साथ पुरी नंगी होकर रात भर चुदुँगी।

कल्लु : अच्छा वह सब ठीक है अब खेत आने वाला है और वहाँ बाबा होंगे इसलिए चल जरा किसी कुतिया की तरह झुक जा गुडिया अब मेरे लंड से नहीं रहा जा रहा है एक बार तेरी गदराई चुत में घूसने का बड़ा मन कर रहा है।
गुडिया : मुसकुराकर हाँ तो डालो न मेरी तो खुद की चुत से पानी बह बह कर जांघो तक आ गया है और गुड़िया वही झुक कर अपनी मस्त चुत और गाण्ड दिखाने लगी।

कल्लु ने एक बार गुड़िया की भारी गाण्ड को थपथपाया और फिर अपने सुपाडे को गुड़िया की रसीली बुर में रख कर धक्का मारा की लंड सट से गुड़िया की चुत में उतर गया।





कल्लु : ओह माँ कितनी गरम बुर है तेरी बहना।
गुडिया : आह सी सी ओह भैया तुम्हारा लौड़ा भी तो किसी गरम रोड की तरह तप रहा है, कल्लु ने सटासट अपनी बहन की चुत में लंड पेलना शुरू कर दिया, गुड़िया आँखे बंद किये हुए सटासट लंड अपनी चुत में खा रही थी और कल्लु खूब हुमच हुमच कर अपनी बहना की कोरी गाण्ड को सहलाते हुए लंड पेल रहा था और फिर कल्लु ने लम्बे लम्बे झटके अपनी बहन की मस्त बुर में मारना शुरू कर दिया और गुड़िया मजे से कराहते हुए कहने लगी चोदो भैया और कस के चुत मारो अपनी बहन की चूत आह आह ओह ओह ओह भैया खूब सटा सट लंड पेलो अपनी बहन की बुर में खूब नंगी करके चोदो भैया ।
कल्लू:आह गुड़िया क्या मस्त चूत है तेरी।कितनी टाइट है मेरा लंड कितना कसा कसा जा रहा है।दिल करता है दिन रात अपना लंड तेरी चूत में घुसाये रहू।क्या मस्त माल है तू।
गुड़िया:ओह भइया मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है।तुमको जितना मन करे,जब मन करे,जहाँ मन करे चोदो।मैं मना थोड़े करुँगी।

कल्लू:हाय गुड़िया तू कितनी मस्त है।
और कल्लू जोर जोर से गुड़िया को कुतिया बनाये पेलता रहता है।साथ में अपनी एक ऊँगली में थूक लगाकर धीरे धीरे गुड़िया की गांड में पेल देता है।अब गुड़िया के दोनों छेदों की चुदाई हो रही है।
कल्लू:हाय मेरी गुडियआआआआआ।कितनी टाइट गांड है तेरी।इसमें तो एक ऊँगली कितनी मुश्किल से जा रही है।मेरा लंड कैसे जाएगा।

गुड़िया:अभी चूत पर ही ध्यान दो भइया देखो कितनी पानी छोड़ रही है।मैं अपनी गांड भी सबसे पहले अपने भैया को ही दूंगी।
कल्लू:हाय गुड़िया कितनी मस्त बातें करती है तू।जी चाहता है।तुझे दिन भर खेतो में नंगी करके पुरे दिन चोदूँ।हर तरीके से चोदूँ।कभी खड़ा करके कभी बैठा के कभी कुतिया बना के कभी गोद में उठाके तो कभी अपने लंड पर चढ़ा के।
गुड़िया:हाँ भइया मैं भी तुमसे दिनभर नंगी हो के चुदवाना चाहती हूँ।पुरे दिन चोदना मुझे खुले आसमान के निचे वो भी दिन में।
और गुड़िया अपनी गाँड पीछे करके तेज तेज धक्का मारने लगती है।कल्लू भी गुड़िया की चूत को धक्के मार मार कर फाड़ने लगता है।दोनों की स्पीड बढ़ती जाती है कुछ ही देर में गुड़िया की चुत ने पानी छोड़ दिया और कल्लु ने भी खूब गाढा गाढा रस अपनी बहन की चुत में भर दिया।दोनों साफ़ सफाई करके अपने खेत में जाते है।

खेत में जाने के बाद कल्लु बाबा के साथ काम में लग गया कुछ देर बाद निर्मला आई और गुड़िया से पुछने लगी की चाची उसके खेतो में है या नहीं तब गुड़िया ने बताया की उसे भी नहीं पता है वह तो सुबह से चाची के पास गई ही नही।


निर्माला : मंद मंद मुस्कुरा कर यह कहती हुई चाची के खेतो की ओर जाने लगी की दिन रात आज कल तू अपने भैया से ही लगी रहती है जरा ध्यान रखना कुछ उल्टा सीधा न कर लेना, गुड़िया अपनी माँ की बात सुन कर कुछ सोच में पड़ गई फिर अचानक उसके दिमाग में कोई बात आई और वह कुछ देर ठहर कर चुपके से चाची के खेतो की ओर अपनी माँ के पीछे चल दि।
जब वह चाची के खेतो में बनी झोपडी के पीछे पहुची तो उसे चाची की और माँ की आवाज सुनाइ देने लगी और उसने वही छूप कर उनकी बातो को सुनने लगी।



निरमला : अरे मै इसलिए कह रही हु की कुछ दिनों से गुड़िया के हाव भाव ठीक नहीं दिख रहे है उसकी चाल भी बदली बदली नजर आ रही है।
चाची : मुस्कुराते हुये, अरे गुड़िया की चाल तो उसी दिन बदल गई थी जब तूने उसे शहर भेजा था।
निरमला : तो क्या वह शहर से ही मुह काला करके आई है, अब तू ही कुछ बता मुझे तो बड़ी चिंता हो रही है और ऊपर से मै कुछ दिनों से देख रही हु दिन भर कल्लु के पीछे लगी रहती है, कही ऊँच नीच हो गई तो हम क्या मुह दिखाएगे।
चाची : अरे आज कल सब समझदार हो गए है गोलिया खा खा कर आज कल की लड़किया खूब तबियत से लंड लेती है। तू बेकार में मरी जा रही है उसे मौज़ करने दे और तू अपनी ढलती जवानी का उपाय कर तेरे चूतडो को देख देख कर आज भी गांव के मरद अपने लंड मसलने लगते है अब गुड़िया की उम्र भी तो देख अब इस उम्र में तो जब तुझे ही तगडे लंड की जरुरत पड़ रही है तो फिर तेरी बेटी को तो लंड चाहिए ही।
निर्माला : अरे अब मेरी किस्मत में लंड काहे का
बाबा तो अब ढल चुके अब मै क्या गांव भर के लोगो के सामने नंगी हो जाउ।

चाची : अरे तो कह तो सही तेरे लिए मस्त लंड का इन्तजाम करवा सकती हूँ।
निरमला : भला वो कैसे।
चाची : अब गुड़िया को ही देख तेरे घर में ही रोज रात को तबियत से चुदती है और तुझे पता भी नहीं लगता है।
निर्माला : क्या कह रही है किससे चुदती है।
चाची : तेरे बेटे कल्लु से और किससे।
निर्माला : मुझे इस बात का ही तो शक था इसी लिए तो तुझसे पुछने आई थी, क्या गुड़िया ने तुझे बताया है।
 

meenashah6162

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चाची : अरे पगली तेरे बेटे कल्लु का लंड ही इतना मस्त है की तेरी चुत भी पानी छोड़ दे।
निर्माला : तू सच कह रही है, मेरी चुत तो आज सुबह से ही पानी पानी हो रही है, मै खेतो की ओर आ रही थी तब एक गदहा अपना मोटा लम्बा लंड गदही की चुत में डाल कर चोद रहा था बस तब से ही मेरी बुर आज रुक्ने का नाम ही नहीं ले रही है देख इसका क्या हाल हो रहा है और फिर निर्मला ने अपना घाघरा ऊपर करके चाची को दिखाया और चाची ने हस्ते हुए पानी के छीटे निर्मला की बुर पर मारते हुए कहा मुझे तो लगता है तेरी चुत अपने बेटे कल्लु के लंड के लिए प्यासी है सच सच बता कही तूने आज कल्लु का लंड तो नहीं देख लिया।

निर्माला : नहीं रे मुझे शर्म आएगी मै भला उसे कैसे कहूँगी की तो मेरे साथ संडास चल और मुझे वही चोदना।
चाची : तो फिर एक काम कर अपने बेटे के साथ नदी में अपने घाट पर चली जा और उससे कह दे की वह तुझे भी तैरना सीखा दे, बस न तुझे शरम आएगी और वह भी तुझे तैरना सीखाने के बहाने तेरी गदराई जवानी और इन मोटे मोटे पके रसीले आमो का मजा ले लेगा और जब उसका लंड तेरे भरे चूतडो से भिड़ेगा तो वह खुद ब खुद तेरी मस्त चुत का रास्ता ढूढ़ लेगा यही सबसे सही तरीका है अपने बेटे का लंड लेने का।

निर्माला : लेकिन मै उससे कहु कैसे की वह मुझे नदी में ले जाकर तैरना सीखा दे, वह कहेगा नहीं की माँ तुम क्या करोगी तैरना सिख कर।
चाची : एक काम कर गुड़िया से कह दे की तू तैरना सीखना चाहती है बाकि का काम गुड़िया खुद कर देगी।
निर्माला : तो क्या तू गुड़िया से कहेगी की मै कल्लु के मोटे मुसल जैसे लंड से चुदना चाहती हूँ।

चाची : नहीं रे लेकिन कल्लु ने तो गुड़िया से कहा है न की वो तेरे चूतडो को देख कर मस्त हो जाता है और उसे तेरे चूतड़ सबसे अच्छे लगते है।

निर्माला : क्या तू सच कह रही है, कल्लु सच में मुझे चोदना चाहता है।
चाची : तू नहीं जानती वह तेरे सुडौल भारी भरकम चूतडो को सोच सोच कर खूब मुट्ठ मारता है, जब उसे पता चलेगा की तो उससे तैरना सीखना चाहती है तो उसका इस बात को सुनने भर से ही लंड खड़ा हो जाएगा, अब तू जा और गुड़िया को यह बात बता दे की तू तैरना सीखना चाहती है फिर देख गुड़िया तुझे खुद ही रास्ता दिखा देगी।

उनकी बाते खतम होते ही गुड़िया उलटे पैर अपने खेतो की ओर आ गई उनकी बाते सुन कर गुड़िया की चुदासी बुर फिर से पानी पानी हो गई थी और यह सोच सोच कर उसकी चुत और भी पनिया रही थी की उसकी अपनी माँ उसके अपने भाई के मोटे लंड से चुदने के लिए कितना तड़प रही है और यह सोच कर की कैसे उसके भाई कल्लु का लंड उसकी माँ की गदराई चुत में घुसेगा गुड़िया ने पानी छोड़ दिया था ।
वह सीधे खाट पर जकर बैठ गई और ऐसी सुरत बना ली जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो तभी सामने से निर्मला उसे आती हुई दिखाई दी, गुड़िया अपने होठो पर आती मुस्कुराहत को पूरी कोशिश के साथ दबाती हुई करवट लेकर लेट गई वही सामने उसका भाई और उसके बाबा खेतो में काम कर रहे थे, अरे माँ आ गई तुम क्या हुआ मिली चाची।
निर्माला : मुस्कुरा कर हाँ मिल गई।
गुड़िया : क्या कह रही थी चाची।
निर्माला : मुस्कुराकार, बता रही थी की कल्लु ने तुझे बहुत अच्छे से तैरना सीखा दिया है और तू नदी में बहुत भीतर तक तैर लेती है।
गुडिया : मादक मुस्कान के साथ हा वो तो है भैया बहुत अच्छा तैरना सीखाते है, उनके सीखाने का तरीका ऐसा है की कोई भी बहुत जल्दी सिख जाए।


निर्मला : मुह बनाते हुये, रहने दे मुझे तो तेरे बाबा ने इतनी बार तैरना सिखाया लेकिन मै आज तक नहीं सिख पाई।
गुडिया अपनी माँ की मनोदशा जनते हुए मुसकुराकर कहने लगी अरे माँ वही तो फ़र्क़ है बाबा और भैया के सीखाने में, भैया जब सिखाते है तो उनसे सीखने में मजा ही कुछ और है उन्हें पता है की जिसको सिखाया जाय उसे हाथ कैसे रखना चाहिए पैर कैसे चलना चाहिये, और भैया इस तरह से पकडे रहते है की हम डूबते भी नहीं है और भैया हमें अपने हाथो से थामे हुए धीरे धीरे बीच में ले जाते है और फिर खूब बीच में लेजाकर हमें थामे हुए पीछे से हमें पकडे हुए धीरे धीरे आगे की ओर धकलते है तब हमारे पैर अपने आप खुल कर चौड़े हो जाते है और पानी मै चलने लगते है।


निर्मला : तो क्या कल्लु एक दिन में ही सब सीखा देगा।
गुडिया : मुस्कुराते हुये, सीखा तो एक दिन में सकते है लेकिन तुम्हारा शरीर थोड़ा भारी है तो तुम्हे 5-6 दिन तक भैया के साथ प्रैक्टिस करनी पड़ेगी तभी तुम अच्छे से सिख पाओगी, इसलिए तुम रोज भैया के साथ जाकर तैरने की प्रैक्टिस करना, तभी वहाँ कल्लु आ जाता है और गुड़िया तपाक से अपनी माँ के सामने ही कहती है भैया माँ तुमसे तैरना सीखना चाहती है तुम माँ को भी तैरना सीखा दो, जाओ माँ कब से तैयार बेठी है अभी माँ के साथ नदी में चले जाओ मै बाबा के पास रहती हु और गुड़िया ने कल्लु की ओर देख कर आँख मार दी।

कालू : मुसकुराकर अपनी माँ के गदराये बदन पर निगाह मारते हुए कहने लगा माँ को सीखने में काफी मेहनत करना पड़ेगी माँ का शरीर काफी मोटा हो गया है इसलिए कई दिनों तक मुझे माँ को पानी में पकड़ कर तैरना सीखना होगा।

गुडिया : भैया माँ ने इस बार पक्का निर्णय कर लिया है और कह रही है बाबा के सीखने पर वह नहीं सिख पाई है इसलिए अब कई दिनों तक तुम्हारे साथ पानी में उतर कर तैरने की प्रैक्टिस करेगी और फिर गुड़िया ने माँ की ओर देखते हुए कहा क्यों माँ मै ठीक कह रही हु ना।

निर्मला ; मुसकुराकर कल्लु की धोती में दिख रहे लंड के उभार को एक पल देखती हुई कहने लगती है बेटे इस बार तो मै अपने बेटे से तैरना सीखूँगी और सिख कर ही रहुंगी।

कल्लु : तो फिर चलो माँ आज से ही तुम्हे तैरना सीखाना शुरू कर देता हु और कल्लु की ओर निर्मला ने देखा और फिर खड़ी होकर नदी की ओर चलने लगी कल्लु ने गुड़िया के मुस्कुराते गालो को खीचते हुए आँख मारी और वह भी अपनी माँ के मोटे तरबूजो की तरह गदराये बलखाते मोटे मोटे चूतडो की मतवाली थिरकन को देखते हुए चलने लगा।

निर्मला आगे आगे चलने लगी और कल्लु उसके पीछे पीछे कल्लु की नजर अपनी माँ के उभरे हुए मटकते चूतडो पर पड़ी और उसका लंड अपनी माँ के गुदाज भरे हुए चूतडो को देख कर फनफना गया वह अपने लंड को मसलते हुए अपनी माँ के पीछे पीछे चलने लगा तभी निर्मला ने एक बार पीछे मुड कर देखा और अपने बेटे को अपनी गुदाज मोटी गाण्ड को घुरते हुए देखा और तभी कल्लु की नजरे अपनी माँ से मिली और निर्मला ने एक मादक स्माइल कल्लु की ओर दे दी और फिर से आगे देख कर चलने लगी।



अब थोड़ी हवा उसी दिशा की ओर चलती जिस दिशा में वह दोनों जा रहे थे तब निर्मला का घाघरा पूरा उसके भारी चूतडो से चिपक जाता था और कल्लु अपनी माँ के भारी सुडौल चूतडो को देख कर पागल हो रहा था, उसकी माँ की गाण्ड आज कुछ ज्यादा ही मटक रही थी या यह कह ले की निर्मला जान बूझ कर अपने चूतडो को मटका मटका कर अपने बेटे को दिखा रही थि।

कुछ ही देर में दोनों नदी के किनारे पहुच चुके थे कल्लु पूरे जोश में था उसने नदी के पास जाते ही अपनी धोती उतार दी और उसका लंड उसके कच्छे में टनटनाया हुआ था निर्मला ने एक नजर कल्लु के विकराल लोडे पर मारी। तब उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया लेकिन उसकी मस्त चुत फूल कर कुप्पा हो गई उसकी बुर तो पहले से ही चिपचिपा पानी छोड़ रही थी अपने बेटे के मस्त मोटे लम्बे लंड को देख कर उसकी चुत की नशो में खून पूरी रफ़्तार से बहने लगा था और कल्लु देखते देखते पानी के अंदर उतर गया वह कमर तक की गहराई में गया और वहाँ से पलट कर बोला आ जा माँ तू भी पानी में उतर आ।



निर्मला : कल्लु मुझे तो डर लग रहा है उसकी माँ ने हस्ते हुए कहा।
कालू : अरे मेरे पास आ जा तेरा सारा डर दुर कर दूंगा अब जल्दी कर।
निर्मला कल्लु की बात सुन कर पानी में उतरने लगी तभी कल्लु ने कहा अरे माँ अपनी चोली तो उतार दे इसे पहन कर तुझसे तैरा नहीं जाएगा, निर्मला ने कल्लु की बात सुन कर मुस्कुराते हुए लाल चोली की डोर खोल दी और उसके मोटे मोटे पके हुए रसीले आम उसके बेटे की नज़रो के सामने आ गए कल्लु का लंड अपनी माँ के मोटे पके हुए रसीले आमो को देख कर झटके मारने लगा और निर्मला धीरे धीरे पानी में उतरने लगी वह जैसे जैसे पानी में उतर रही थी उसका घाघरा पानी में ऊपर तैरता हुआ ऊपर उठने लगा था, उसका गुदाज पेट और गहरी नाभि को देख देख कर कल्लु का लंड खूब तगडे झटके मार रहा था।


जैसे ही निर्मला कल्लु के पास पहुची कल्लु ने अपनी माँ का हाथ पकड़ कर उसे और बीच में ले जाना शुरू किया निर्मला ड़रते ड़रते पानी में जाने लगी लेकिन अचानक थोड़ा ज्यादा गहराई वाली जगह आते ही निर्मला का पैर फिसला और कल्लु ने उसे अपने बांहो में थाम लिया अब पानी निर्मला के रसीले मोटे मोटे आमो तक आ चूका था और कल्लु ने अपनी माँ की कमर को थामते हुए कहा माँ तू उधर मुह कर ले मै तुझे पीछे से पकडे रहुगा और तू अपने हाथो से पानी को पीछे धकलते हुए तैरने की कोशिश करना बस फिर क्या था निर्मला दूसरी ओर घुम गई और कल्लु ने अपनी माँ के गुदाज उठे हुए मुलायम पेट को अपने हांथो में भर कर उसकी गहरी नाभि को सहलाते हुए कहा माँ तू झुक कर पानी में तैरने की कोशिश कर मैंने तुझे पीछे से पकड़ा हुआ है तू डुबेगी नहीं और फिर कल्लु ने अपने खड़े लंड को अपनी माँ के मोटे मोटे चूतडो से सटा दिया, उसका लंड जैसे ही अपनी माँ के मुलायम चूतडो की जडो में घुसा उसके मोटे तगडे लंड के एह्सास से निर्मला आनंद से दोहरी हो गई।

वह पानी में हाथ चला कर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगी और कल्लु उसकी गाण्ड में लंड लगाए हुए उसे ताकत से आगे की ओर दबाने लगा, कल्लु का हाथ बार बार अपनी माँ के मोटे मोटे रसीले आमो को छु रहा था और फिर कल्लु ने अपनी माँ के पके आमो को एक बारगी तो अपने हांथो में भर कर थाम लिया और निर्मला की चुत से पानी बह निकला, कुछ देर तक कल्लु अपने लंड को अपनी माँ की गुदाज गाण्ड में दबाये हुए उसके मोटे मोटे दूध को सहलाता हुआ उसे दबाता रहा फिर उसने अपनी माँ से कहा माँ मै तेरी कमर पकड़ लेता हु तू तैरने की कोशिश कर और अपने हाथ पैर चला और फिर कल्लु ने अपनी माँ के मोटे मोटे गुदाज चूतडो को जब अपने हांथो में भर कर दबाया तो उसके आनंद की सीमा न रही उसने पहली बार इतने मुलायम भरे भरे चूतडो को दबोचा था उसका लंड तो ऐसा लग रहा था जैसे पानी छोड़ देगा उसे आज पहली बार एह्सास हुआ था की उसकी माँ के चूतडो को मसलने में कितना मजा आ रहा था।


वाह पागलो की तरह अपनी माँ के चूतडो को दबा दबा कर सहला रहा था तभी उसकी माँ का घाघरा थोड़ा ऊपर हो गया और कल्लु के हाथ में अपनी माँ की मस्त मोटी मोटी तन्दुरुस्त जाँघे आ गई और वह अपनी माँ की जांघो की चिकनाहट और मोटाई को महसूस करके मस्त हो रहा था, कल्लु से रहा नहीं गया और उसने अपने हाथो से अपनी माँ के नंगे चूतडो को थाम लिया और इस बार कल्लु का लंड अपनी माँ की नंगे चूतडो की गहरी दरार में जाकर धंस गया और निर्मला के मुह से आह निकल गई।


कल्लु : क्या हुआ माँ तुझसे तैरते बन रहा है ना।
निर्मला आह हाँ बेटे बन रहा है पर तू मेरी कमर को और कस के थाम ले कही मै डूब न जाउ, निर्मला का इतना कहना था की कल्लु ने अपनी माँ के गुदाज पेट को दोनों हाथो में भर कर अपने लंड को और ज्यादा ताकत से अपनी माँ की मोटी गाण्ड की दरारो में पेल दिया और निर्मला सिहर उठी।
कालू : अब ठीक है माँ मैंने तुझे अच्छे से जकड लिया है।



निर्मला: सीसियते हुये, हाँ कल्लु जरा और कस के मुझे पकड़ ले कही मै डूब न जाऊ इस बार कल्लु ने अपने हांथो में अपनी माँ के रसीले पके हुए आमो को थाम लिया और अपने लंड को खूब कस कर अपनी माँ की गाण्ड में दबा दिया जिससे उसका लंड गाण्ड के छेद से रगड़ता हुआ निर्मला की चुत की फांको के बीच जाकर फंस गया। ठन्डे पानी में भी कल्लु को अपनी माँ की गरम चुत का एह्सास हो रहा था और वह अपनी माँ के मोटे मोटे दूध को मसलता हुआ अपने लंड को बराबर अपनी माँ की गाण्ड की दरार में दबाये जा रहा था। निर्मला पागलो की तरह पानी में हाथ चला रही थी तभी कल्लु ने अपनी माँ की कमर को थाम लिया और अपने पैरो को और पीछे गहराई में ले जाने लाग, उसके ऐसा करने से निर्मला घबराने लगी और कहने लगी बेटा ज्यादा बीच में न जा कही मै डूब न जाऊँ।

कल्लु ने कहा माँ तू मेरी तरफ मुह कर ले थोड़ा बीच में तुझे जल्दी तैरना आ जायेगा अभी तेरे पैर जमीन पर टीक जाते है इसलिए तू तैर नहीं पा रही है, निर्मला ने अपने बेटे की तरफ मुह किया और उसका लाल तमतमाये चेहरा देख कर कल्लु ने उसे अपने सिने से चिपकाते हुए कहा माँ मुझे कस के पकड़ ले और कल्लु और गहराइ में जाने लगा जैसे ही पानी निर्मला के मुह तक पंहुचा उसने दोनों पैरो को उठा कर किसी बंदरिया की तरह अपने बेटे की कमर पर लपेट दिया और कल्लु इसी पल के इंतजार में था उसने भी अपनी माँ के दोनों चूतडो को अपने हांथो में भर कर अपनी माँ को अपने लंड पर टाँग लिया अब कल्लु का खड़ा लंड सीधे अपनी माँ की चूत में घुसा हुआ था बस कल्लु ने अगर कच्छा न पहना होता तो लंड कब का उसकी माँ की मस्त चुत में घुस चूका होता।


कल्लु ने अपने मुह को अपनी माँ के मोटे मोटे दूध में दबाया हुआ था और अपनी माँ के रसीले मोटे आमो को अपने मुह से दबा दबा कर मजे ले रहा था इधर निर्मला अपनी जांघो को फ़ैलाये हुएअपने बेटे के खड़े लंड पर दबाब दे रही थी और सीसिया रही थी, लेकिन जैसे ही कल्लु ने अपने मुह को खोल कर अपनी माँ के मोटे दूध के निप्पल को अपने होठो में दबा कर चूसा।निर्मला ने कल्लु को कस कर जकड लिया और उसके खड़े लंड पर अपनी चुत को रगडने लगी, निर्मला के मुह से आह आह जैसे शब्द निकलने लगे, कल्लु पागलो की तरह अपनी माँ की मोटी मख़मली जांघो और भारी भरकम चूतडो को अपने हांथो में भर भर कर मसल रहा था और सोच रहा था की इतना मजा तो गुड़िया और चाची की गाण्ड और जांघो को मसलने में भी नहीं आया। सच में उसकी माँ बहुत ही रसीली और गदराया हुआ माल है।

माँ को तो खूब तबियत से रगड रगड कर चोदना होगा यह तो खूब तबियत से मेरे लंड से चुदेगी, कल्लु यह सोचते सोचते अपने हाथो को अपनी माँ की मोटी गाण्ड को सहलाते हुए अचानक उसकी उंगलिया अपनी माँ की मोटी गाण्ड की गुदा पर चलि गई और कल्लु ने जैसे ही अपनी उंगलियो को थोड़ा दबाया उसकी बीच की ऊँगली थोड़ी सी उसकी माँ की गुदाज गाण्ड के छेद में उतर गई और निर्मला सीसिया पडी।

कल्लु : क्या हुआ माँ और बीच में जाऊँ।
निर्मला : आह ज्यादा बीच में डूब जायेगा बेटे।
कालू : नहीं माँ मुझे तैरना आता है तू कहे तो थोड़ा और बीच में जाऊ और कल्लु की दूसरी ऊँगली उसकी माँ की मस्त चुत के रसीले छेद में घुस गई।
निर्मला : ठीक है बेटे बीच में जा लेकिन डुबना नही।
कालू ने माँ की बात सुनते ही अपनी ऊँगली का दबाव अपनी माँ की गाण्ड और चुत में और भी बढा दिया। और उसकी दोनों उंगलिया गाण्ड और चुत की छेद में और भी ज्यादा उतर गई और निर्मला के मुह से एक सिसकी निकल गई, कल्लु ने अपनी उंगलियो को अपनी माँ की गाण्ड और चुत में कस कर दबाते हुए कहा माँ यहाँ बहुत गहरा है लगता है पूरा गहराई में उतर जाऊँ।

निर्मला: आह सी बेटे तू तो कुछ ज्यादा ही बीच में घुस रहा है देखना कही डूब न जाये और निर्मला के हाथ कल्लु के मोटे खुंखार काले लंड तक पहुच गया और जैसे ही उसने अपने बेटे के काले लंड को अपने हाथो से पकड़ा कल्लु पागलो की तरह अपनी माँ के रसीले होठो को चुमते हुए उसके बोबो को कस कस कर चुसने लगा। निर्मला उसकी इस हरकत से पानी पानी हो गई और उसने कल्लु के कच्छे को खोल कर अपने बेटे के विकराल काले मोटे लंड को अपने हाथो में पूरी तरह थाम लिया अपने बेटे के लंड की लम्बाई और मोटाई देख कर वह पागल हो गई और कहने लगी बेटे पूरी तरह बीच में उतर जा आह आह सी सीई ओह।


कल्लु ने अपनी ऊँगली जो चुत में घुसी थी को बाहर निकाल लिया और गाण्ड में घुसि ऊँगली को गहराई में अपनी माँ की मोटी गाण्ड की गुदा में पूरा जड़ तक पेल दिया और दूसरे हाथ से अपनी माँ के मोटे दूध को दबोचने लगा उधर निर्मला अपने बेटे के काले मोटे लंड को खूब दबा दबा कर महसूस करने लगी और जब उसके हाथ में अपने बेटे के भारी भरकम अंडकोष आये तो उसने उन्हें मुट्ठी में भर भर कर दबोचना शुरू कर दिया कभी वह उसके आंड को दबोचती तो कभी अपने बेटे के लंड के फुले हुए सुपाडे को दबोचती उधर कल्लु ने अपनी लम्बी ऊँगली को अपनी माँ की गाण्ड में जड़ तक घुसा रखा था और एक हाथ से उसके दोनों आमो को बारी बारी से मसल रहा था, तभी कल्लु ने जब अपनी माँ के एक निप्पल को मुह में भर कर काटा तभी निर्मला ने अपने बेटे के काले मोटे लंड को अपनी चुत के छेद में लगा दिया और मारे उत्तेजना के उसने जैसे ही लंड अपनी चुत के छेद में लगाया कल्लु ने कस कर एक धक्का ऊपर की ओर दिया और उसका मोटा तगड़ा लंड अपनी माँ की चुत में आधे से ज्यादा अंदर समा गया और उसकी माँ की चीख़ निकल गई।


निर्मला: कल्लु मार दिया रे कितना मोटा खूँटा है तेरा अपनी माँ की चुत फाड देगा क्या, हरामि क्या तुझे मैंने इसी दिन के लिए अपनी इस चुत से निकाला था की बाद में तू इसी चुत को फिर से अपने मुसल से फाडे आह आह जरा धीरे धीरे चोद हरामी कितना बड़ा लंड है तेरा आह आह सीई सीई अहह सीई ओह माँ मर गई। कल्लु तो अपनी माँ को अपने लंड पर चढ़ाये सारा दबाब अपने लंड की ओर दे रहा था और निर्मला अपने बेटे के खड़े लंड से अपनी चुत फाडे बेठी हुई थी, कुछ देर ऐसे ही झटके देने से दोनों माँ बेटे का पानी छूट गया और दोनों हाफ्ते हुए किनारे पर आकर सुस्ताने लगे।

थोड़ी देर बाद जब दोनों की साँसे नार्मल हुई तब निर्मला ने मुस्कुराते हुए कल्लु की ओर देखा और उसके मोटे लंड को देख कर कहने लगी तूने इसी तरह गुड़िया को भी तैरना सिखाया है न।





कल्लु : मुस्कुराते हुए अपने लंड का सुपाडा अपनी माँ को खोल कर दिखाते हुए कहने लगा गुड़िया खुद ही तैरना सीखने के लिए मरी जा रही थी तो मै क्या करता।
निर्मला : मुसकुराकर अच्छा तो तू नहीं मरा जा रहा था अपनी बहन के लिये।
कालू : अपने लंड को मसलते हुए कहने लगा माँ मुझे तो गुड़िया से ज्यादा तुझे तैरना सीखाने का मन होता था।
निर्मला मुस्कुराते हुये, अच्छा तभी दिन भर खेतो में मेरे पीछे ही रहता था, और वैसे भी तेरा यह मुसल तेरी बहन के लायक नहीं बल्कि बड़ी बड़ी गदराई औरतो के लायक है।


कल्लु : मुस्कुराकर अपनी माँ की मोटी नंगी जांघो को सहलाते हुए कहने लगा तू भी तो खूब तबियत से गदराई हुई है,तेरी यह चूत और गांड तो पूरा लेने लायक है।

निर्मला कल्लु के मोटे काले लंड को अपने हाथो से सहलाती हुई, अच्छा तो क्या अपनी माँ पर चढेगा।


कल्लु : अपनी माँ की मोटी गुदाज जांघो को दबोचते हुये, क्यों जब तू अपने बेटे पर चढ़ सकती है तो मै तेरे ऊपर नहीं चढ़ूगा क्या।
निर्मला : मुसकुराकर कहने लगी बस चढेगा ही या कुछ करेगा भी।
कालू : अपनी माँ की मस्त चुत को अपनी हथेली में भर कर कहने लगा चढूँगा भी और तेरी इस मस्त चुत को फाड़ूंगा भी।


निर्मला : मुसकुराकर और कितना फाड़ेगा तेरे निकलने से ही तो सबसे ज्यादा फटी है।
कालू : अपनी माँ की चुत को सहलाकर कहने लगा इसे तो खूब तबियत से फाड़ूंगा ही और अभी इसे भी तो फाडना बाकि है और कल्लु ने अपनी ऊँगली अपंनी माँ की गाण्ड में पेल दी और निर्मला फिर से सिसिया कर कल्लु के सिने से चिपक गई।
कालू : बोल फड़वाएगी अपने बेटे से अपनी मोटी गाँड।
निर्मला : इतने मोटे लंड को अपनी गाण्ड में घुसवाउंगी तो मेरी गाण्ड तो पूरी फट जाएगी।


कल्लु : अरे तू इतना मदमस्त तगड़ा माल है की ऐसे दो दो काले लंड तेरी गाण्ड में घुस जाएगे।
निर्मला: नहीं रे अभी तो तू मेरी चुत ही फाड ले कल तेल लेकर आउंगी तब फिर अपनी माँ की गाण्ड भी खूब कस कर मार लेना मुझे पता है तू अपना काला मुसल पूरा अपनी माँ की मोटी गाण्ड में पेलना चाहता है, और वैसे भी गुड़िया ने कहा था की मुझे कम से कम 8-10 दिन तक तुझसे तैरना सीखना पड़ेगा तभी मै अच्छे से तैर पाउँगी।

कल्लु ने बैठे बैठे ही आसन जमा कर अपने खड़े लंड को अपनी माँ की चुत में एक झटके में पेल दिया और निर्मला ने अपनी जांघो को फैला कर अपने हाथ पीछे जमीन पर लगा दिए और कहने लगी अब 8-10 दिन नहीं मै तो रोज तुझे तैरना सिखाउंगा और अपने लंड पर चढा चढा कर तुझे तैराउन्गा।

निर्मला : आह मुये कितना मोटा और विकराल लंड हो गया है तेरा तू तो मेरा मरद बनने के लायक है आह अहह सी सी ओइ माँ और कस के पेल बेटा।

कल्लु : हुमच हुमच कर उकडू बैठे बैठे अपने लंड को अपनी माँ की चुत में पेलते हुए कहने लगा मुझे भी तेरे जैसी ही औरत चाहिये, तेरा गदराया बदन मोटी मोटी जांघे भारी भरकम चूतड़ और मस्त भोसडा मारने में ही मुझे मजा मिलता है आज से तो मेरी औरत तू ही है। आज से मै तुझे रोज नंगी करके खूब कस कस के चोदूँगा।


निर्मला खूब सिसिया रही थी और उसका बेटा दनादन उसकी मस्त चुत में लंड पेल रहा था, कल्लु का लंड और भी विकराल हो गया था और निर्मला की चुत से पानी की धारा बह निकली अब उसने अपनी माँ के मोटे मोटे चूतडो को अपनी तरफ खींच कर दबोच लिया और खूब कस कस कर अपनी माँ की चुत की गहराई में धक्के मारने लगा।

कुछ देर अपनी माँ की रसीली चूत चोदने के बाद कल्लू ने अपना मोटा लंड अपनी माँ की चूत से निकाल लिया और अपनी माँ को अपना लंड चूसने का इशारा किया।
निर्मला ने कल्लू के लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी।

कल्लू:आह माँ क्या मस्त गरम मुँह है तेरा।बहुत मज़ा आ रहा है। लग रहा है मेरा लंड किसी चूत में जा रहा है।तू तो लंड चूसने में भी एक्सपर्ट है।चूस साली और अंदर ले ।पूरा अंदर ले के चूस।

फिर कल्लू अपनी माँ को कुतिया बना देता है और अपना मोटा लंड अपनी माँ की रसीली चूत के छेद पर रखकर एक ही धक्के में पूरा लंड अपनी माँ की चूत में पेल देता है।फिर फचा फच जोर जोर से पेलने लगता है।
कल्लू:आह कितना मज़ा आ रहा है।कितनी टाइट चूत है तेरी माँ।लगता है बहुत दिन से चुदी नहीं है।

निर्मला:हां मेरे लाल चोद अपनी माँ को ।बहुत दिन से प्यासी हूँ चोद चोद के फाड़ दे मेरी चूत को।ये मुझे बहुत परेसान करती है।
कल्लू:आज से रोज तुझे चोदुन्गा माँ।आज से तू मेरी रंडी है।साली अब तेरी चूत और गांड रोज फ़ाड़ूंगा।
इसी तरह कुतिया बना के तेरी गांड मारूँगा साली रंडी।बहुत तरसाया है तूने अपनी मोटी मोटी गांड दिखा के।

निर्मला:चोद मादरचोद चोद।आज से मैं तेरी रंडी हूँ।चोद फाड़ दे मेरी चूत को।

कल्लू पूरी ताकत से अपनी माँ को चोदने लगता है गन्दी गन्दी गाली देते हुए।
लगभग सैकड़ो धक्के मार मार कर उसने अपनी माँ की चुत को पूरा लाल कर दिया और अपनी माँ को चोद चोद कर खूब पानी निकाला और अपना पूरा माल अपनी माँ के चूत में निकाल देता है।उस सुनसान जगह पर दोनों की सिसियाने की आवाज और चुत में लंड की पड़ती थाप ही गूंजती रही थी।

उस चुदाई के बाद दोनों माँ बेटे घर की ओर चल दिए। और निर्मला ने अगले दिन तेल की शीशी साथ में लेकर आने वाली बात कल्लु से की और कल्लु अपनी माँ की गुदा को सहलाते हुए कहने लगा माँ कल जब तेरी गुदाज गण्ड में तेल से सना हुआ मेरा काला लंड घुसेगा तो मजा आ जायेगा तब निर्मला कहने लगी अब तो मै भी तेरे इस मोटे मुसल से अपनी मोटी गाण्ड मरवाने के लिए तड़प रही हूँ।


कल सबेरा होते ही हम यहाँ आ जाएगे फिर तू अपनी माँ की कोरी गाण्ड को अपने मुसल पर तेल लगा कर कस कर ठुकाई करना बस यही बाते करते हुए दोनों अपने खेत की ओर चल पडे।

दूसरे दिन बाबा को थोडा सा बुखार था।इसलिए वो खेतो में काम करने नहीं गए।कल्लू बैध जी से दवा लाया और बाबा को खिला दिया था।अब बुखार ठीक था।लेकिन कल्लू और निर्मला ने उनको आराम करने को कहकर खेतों की तरफ चल दिए।निर्मला के हाथों में तेल की शीशी देखकर कल्लू का लंड अपनी माँ की मोटी मोटी गांड को फाड़ने के लिए फ़ुफ़कारने लगा।

गुड़िया की सहेली का बर्थ डे था इसलिए वो कुछ देर बाद बगल के गाँव में अपनी सहेली के घर जा रही थी।

आगे आगे निर्मला अपनी मोटी मोटी गांड मटकाती चल रही थी आज निर्मला ने साड़ी पहन रखी थी।जिसे देखकर कल्लू का लंड पूरा रॉड बन गया था।गाँव से दूर आ जाने पर कल्लू अब अपना हाथ कभी कभी अपनी माँ की गांड पर फेर रहा था।खेत में पहुंचकर दोनों झोपडी के पास बैठ गए।निर्मला भी पूरी गरम हो चुकी थी।

कल्लू के होंठ जब अपने माँ निर्मला के होठो के इतने करीब थे, की दोनों की साँसें एक दूसरे से टकरा रही थी।
कल्लू अपने माँ से एक सवाल पूछता है।
क्या तुम मुझसे आज अपना गांड मरवाओगी माँ ।और निर्मला उसे जवाब नहीं देती बस उससे अपने होठो से लगा लेती है,और दोनों के होंठ एक दूसरे से चिपक जाते है।
यूं तो इससे पहले भी ये एक दूसरे से मिले थे मगर आज जो जज़्बा दोनों के अंदर था वो इससे पहले कभी नहीं महसूस हुआ था।
कल्लू अपने ज़ुबान को बाहर निकाल कर निर्मला के मुह में डालने लगता है और निर्मला भी उसका साथ देते हुए अपना मुह खोल कर कल्लू की जीभ को चुसने लगती है। ओ इस अंदाज़ में कल्लू की जीभ चूस रही थी जैसे उसके मुह में कल्लू का लंड हो।चटखारे मारते हुए अपने मुह का थूक कल्लू के मुह में उंडेलती हुई।

कल्लू का बदन गरम हो चूका था जिस्म पर मौजूद कपडा भी उसे बोझ लग रहा था वो निकाल कर उसे फेंक देता है और निर्मला को मसलते हुए उसके ऊपर चढ जाता है उसका खड़ा लंड निर्मला के साडी के ऊपर से चूत से जा टकराता है।वो चुभन पहली नहीं थी।मगर आज उस चुभन को अंदर महसूस करना चाहती थी निर्मला।

निर्मला;आ ह ह ह मुझे नंगी कर दो पूरी तरह।
कल्लू;मुस्कुराते हुए बैठ जाता है और एक झटके में उसका ब्लाउज निकाल देता है।साडी को कमर से खींच कर अलग कर देता है और पेंटी को नीचे उतार देता है।फूलों से महकती हुए निर्मला अपने पुरे शबाब के साथ कल्लू के सामने नंगी हो जाती है।
कल्लू;माँ आज मै तुझे मर्द का एहसास कराना चाहता हूँ। तेरे मर्द का, तेरे कल्लू का ,तेरे बेटे के लंड से ,तेरी तडपती हुई चूत को गीला करना चाहता हुं। बोल माँ मुझसे चुदाएगी ना लेंगी न मेरा लंड अपनी चूत में।

निर्मला;आह ह ह ह ह मेरी चूत अब मेरी नहीं रही कल्लू ये तुम्हारी हो गई है तुम मालिक हो अब इसके जो चाहें वो कर सकते हो इसके साथ।आह मसलो मेरी चूत के दाने को।बहुत तडपाती है ये तुम्हारी माँ को मेरे लाल।

कल्लू;अपने माँ के ब्रैस्ट पर टूट पड़ता है। ओ बड़े बड़े खरबूज़ की तरह ब्रैस्ट को अपने मुह में भर लेता है और चूसने लगता है।

निर्मला की चूत भी चीखने लगती है।मिलन का वो वक़्त करीब आ गया था। कल्लू का हाथ नीचे बढ़ कर निर्मला के चुत को सहलाने लगता है और निर्मला भी अपने नाज़ुक से हाथों में कल्लू का मोटा लंड दबोच लेती है।
और उसे पकड़ कर हिलाने लगती है जिससे उसकी चूडियाँ खनकने लगती है जिसकी आवाज से कल्लू का लंड झटके मारने लगता है। अबदोनो की साँसें फूल चुकी थी दोनों एक दूसरे के अंदर जाने के लिए बेताब थे।

मगर ये हसीन वक़्त कल्लू को बड़े मुद्दतों के बाद नसीब हुआ था वो कोई जल्द बाज़ी नहीं करना चाहता था।वो नीचे निप्पल्स को हलके हलके काटने लगता है और उसे खिंचते हुए एक ऊँगली उसके बाद दूसरी ऊँगली भी निर्मला के चूत में डाल देता है।
निर्मला -आहह मार डालेगा आज तू मुझे आह
आह ह ह ह।
कल्लू;अभी नहीं जाने मन।
वो नीचे सरकते हुए पेट से होते हुए चूत तक पहुँच जाता है और अपने माँ की चूत के महक में जैसे खो जाता है। एक दिलकश जगह वो जगह जो हर किसी को नसीब नहीं होती। बस कल्लू जैसे किस्मत वाले उस मुक़ाम तक पहुँच पाते है।

निर्मला अपने दोनों पैरों को और खोल देती है। देख जब तू इस चूत से निकल रहा था तब भी मेरे पैर ऐसे ही खुले हुए थे और आज जब तू इस में जायेंगा तब भी ऐसे ही हैं। आजा अपने माँ की चूत में कल्लू।आह अह्ह्ह।
कल्लू अपने ज़ुबान को निर्मला की चूत पर रख कर गाण्ड के सुराख़ से लेकर चूत के दरार तक चाटने लगता है ।

उसकी चूत इतनी पनिया गई थी की ज़ुबान जितने अंदर जाता निर्मला अपने कमर को उतना ऊपर उठा लेती।
इस एहसास में की कल्लू उसे चोद रहा है मगर वो कहाँ जानती थी के असली एहसास अभी बाकी है।

कल्लू अपने एक ऊँगली को निर्मला के गाण्ड में डाल कर उसे अंदर बाहर करने लगता है। निर्मला का मुह खुलता चला जाता है। हलक सुखने लगता है मुह से एक शब्द भी नहीं निकल पाता। ऐसा लगने लगता है निर्मला को जैसे की उसकी जान उसकी चूत से खीच रहा है। निर्मला अपने दोनों हाथों से कल्लू के सर को अपने चूत पर दबाने लगती है।

कल्लू के ज़ुबान अपना काम कर गई थी।निर्मला के चूत का उस दिन का पहला पानी बाहर बह निकला था।जिसे कल्लू बड़े चाव से चाटता चला जाता है।
जब निर्मला की साँसें थोड़े धीमी होती है तो वो कल्लू के तरफ देखने लगती है।कल्लू का मुँह पूरी तरह निर्मला के चूत के पानी से गीला था।निर्मला के आँखों में खून उमड़ आया था।वो कल्लू के तरफ लपकती है और उसके मुह को चाटने लगती है।

निर्मला:गलप्प मेरी चूत का पानी है ना ये गल्प
मेरे जान के मुँह को मै साफ़ कर देती हु इसे गलप्प
गलप गलप्प। ओ दीवानी हो गई थी चूत की आग आज सर में चढ़ गई थी।
कल्लू अपने ज़ुबान को भी बाहर निकाल देता है।और निर्मला उसे भी चाटने लगती है।मगर जैसे ही वो कल्लू से और चिपकती है। एक नोकीला मोटा चीज़ उसके पेट से टकरा जाती है।
निर्मला नीचे देखती है।वो कल्लू का खड़ा लंड था जो झटके पर झटके मार रहा था।

कल्लू -माँ तू पेशाब को कैसे बैठती है।
निर्मला नीचे ज़मीन पर बैठ जाती है
निर्मला:ऐसे पेशाब करती है तेरी माँ।
पैर खुले हुए चूत ,चौडे गांड पीछे की तरफ निकले हुए,
ब्रेस्ट सामने की तरफ लटके हुए।।।बहुत हसीन लग रही थी निर्मला।
कल्लू अपने लंड से निर्मला के गाल सहलाने लगता है।
निर्मला- मेरा गला सूख रहा है।मै पानी पीकर आती हूँ।

कल्लू-पानी तो यही है। चल मुँह खोल।
निर्मला कल्लू के आँखों में देखते हुए जैसे ही मुह खोलती है कल्लू उसके मुह में अपना लंड डाल कर उसका सर पीछे से पकड़ लेता है। निर्मला को समझ नहीं आता की कल्लू क्या कर रहा है।
मगर अगले ही पल उसे तब एहसास होता है जब कल्लू का पेशाब उसके हलक में गिरने लगता है।
पेशाब की महक निर्मला को और मदहोश कर देती है और वो कल्लू के लंड से निकला पिशाब पीने लगती है
निर्मला अपने हाथ में कल्लू के आंडो को पकड़ कर उसे दबाने लगती है। जिससे कल्लू का लंड और मोटा होता चला जाता है।
पेशाब पीने के बाद निर्मला का बदन ऐंठने लगता है
उसे लंड चाहीये था अपने चुत में मगर कल्लू उसका मुह मीठा किये बिना उसे ये देना नहीं चाहता था।
कल्लू इशारे से निर्मला को अपने लंड को फिर से मुह में लेने के लिए कहता है।
और गरम दीवानी निर्मला अपने कल्लू के लंड को अपने मुह में लेकर उसे सर से लेकर जड़ तक चाटने लगती है।गप गप आह गल्प गल्प।
कल्लू:मेरा लंड मेरे मुह में कितन अच्छा लगता है माँ गल्प गप।चूस इसे पूरा मुँह में लेके।
निर्मला:मेरे बेटे का लंड मै रोज चूसूंगी गप गप।
कल्लू;आह माँ धीरे धीरे चूस ना दर्द हो रहा है आह
निर्मला;करने दो ना बेटे।और चूसने दे।
कल्लू;अपनी माँ के लिए बरसों का प्यासा था।
 

meenashah6162

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आज जब कुआँ खुद चल कर प्यासे के पास आया था तो कल्लू एक बूंद भी गँवाना नहीं चाहता था वो अपने माँ को दिन भर पेलना चाहता था। उसे दिन भर अपने लंड के नीचे लेटाकर चोदना चाहता था।
कल्लू;अपने माँ को गोद में उठा लेता है और उसे खेत में लेटा देता है और झट से उसके ऊपर चढ़ जाता है।
अपने दोनों हाथों में निर्मला की बड़ी बड़ी चूचियों को पकड़ कर वो निर्मला को चुमते हुए अपने लंड को निर्मला के चूत पर घीसने लगता है।
कल्लू:माँ तेरी चूत मुझे चाहिए।
निर्मला:-हाँ हाँ ले ले मेरी चूत बेटा आह आह।चोद डाल अपनी माँ को बना ले तेरे लंड की रानी आह अब और मत तडपा मुझे पेल न अंदर आह।
कल्लू ;कहाँ डालूँ मा।
निर्मला;नीचे हाथ डाल कर कल्लू के लंड को अपने हाथ में पकड़ लेती है और उसे अपने चूत के मुहाने पर लगा देती है। यहाँ मेरे बच्चे यहाँ।
निर्मला;अब तो मना नहीं करेगी ना माँ।
निर्मला;नहीं नहीं अब मना नहीं करुँगी जब जहाँ जैसे चाहेगा वहाँ चुदायेंगी तेरी माँ तुझसे बस डाल दे मेरे अंदर।घुसा दे अपना पूरा लंड अपनी माँ की चूत में।
कल्लू ;अपने कमर को ऊपर के तरफ उठाता है और दन से उसे निर्मला के चूत पर दबा देता है।
एक बेटे का लंड सारे बंधन तोड कर सारी कस्मे भूल कर अपने माँ की रसीली चूत में घुस जाता है।
निर्मला चीख पडती है।हाय बेटे दर्द हो रहा है।
कल्लू;आज वो दिन नहीं है जब एक बेटे अपने माँ के दर्द को सुनकर रुक जाए।वो दूसरा धक्का देता है और ये वाला धक्के से लंड निर्मला के बच्चेदानी तक जा रहा है।निर्मला की कमर ऊपर की तरफ उठ जाती है और निर्मला के दोनों पैर कल्लू के कमर से लिपट जाते है ।वो लम्बी लम्बी साँसें लेने लगती है।
कल्लू;कुछ पल उस एहसास को महसूस करता है और फिर अपने माँ के दोनों ब्रैस्ट को दबाते हुए लंड को आगे पीछे करता चला जाता है।
निर्मला;हाय रे बेटा मेरा आहह मेरी चूत है ना वो अहह
मेरे बेटा धीरे से कर ना आह।पहले पहले धक्के तो सभी को भी दर्द देते है।
निर्मला तो दो बच्चों की माँ थी उसे ज़्यादा वक़्त नहीं लगता सँभालने में ।जब चूत की चिकनाहट लंड को सहलाने लगती है और जब चूत की दिवारें पूरी तरह खुल जाते है तो निर्मला भी पागल सी हो जाती है।
अपने एकलौते बेटे के नीचे टाँगें खोल कर चुदाना उसे दिवानी बना देता है और वो अपने बेटे के चेहरे को पकड़ कर उसके होठो को अपने मुह में लेकर नीचे से दना दन दना दन हर धक्के का साथ देते हुए कमर को ऊपर उठाने लगती है।
निर्मला:आह।और जोर से बेटा और जोर से
आह खूब डाल मुझे अंदर तक हर उस जगह पहुँच जा जहाँ तेरे बापु भी नहीं पहुँच पाये आह।
मेरी चूत सिर्फ तेरी है मेरे लाल आहह
चोद अपनी माँ को जोर जोर से चोद मुझे आह।
निर्मला वो औरत थी जो कल्लू के धक्कों को बड़ी आसानी से सह रही थी और मस्ती में उससे और ज़ोर से पेलने के लिए कह रही थी।सच कहा है किसी ने ग़ुरू ग़ुरू होता है और चेला चेला।गुड़िया तो कल्लू के पेलने पर चीखने लगती थी। यहाँ वो औरत थी जिस ने इस सांड को पैदा की थी। भला वो उस लंड से कैसे पनाह माँगती। आज कल्लू को अपने माँ की ताकत का एहसास हुआ था।
कल्लू ;जितने ज़ोर से लण्ड को चूत में घुसाता
निर्मला उतने ही ताकत से अपने कमर को ऊपर उठा कर उसे और अंदर ले लेती है।
निर्मला पागल हो गई थी अपने दोनों हाथों के नाखुनो से वो कल्लू के पीठ को कुरेदते हुए उसे और ज़ोर से चोदने के लिए पुकार रही थी।
जब माँ पुकारती है तो बेटे को आना पड़ता है और कल्लू वही कर रहा था वो निर्मला को जबरदस्त धक्के के साथ पेल रहा था और निर्मला अपने बेटे को इतनी आसानी से रुकने देने वालों में से न थी।
खेत में पच पच की आवाज़ें गूंज रही थी।कल्लू अपने लंड को पूरा निकलता है घच से फिर अपनी माँ की गीली चूत में पूरा लंड जड़ तक पेल देता।
निर्मला के बीच बीच में चीखने की आवाजे।
जब कल्लू का लण्ड उसके बेच्चेदानी से टकरा जाता।
कल्लू पसीने में नहा चूका था और उसके नीचे लेती हुए निर्मला भी दमा दम हो गई थी मगर दोनों के कमर लगातार हील रही थी। कल्लू की पकड़ अपने माँ के ब्रैस्ट पर और मज़बूत होती चली जाती है।
और निर्मला की चूत से पानी टिप टिप करके रिसने लगता है।वो जोश दिन भर कम नहीं होने वाला था ये दोनों अच्छी तरह से जानते थे।
दोनो पिछले 30 मिनट से जोरदार चुदाई में लगे हुए थे
और लण्ड की मार चूत पर जारी थी।
निर्मला अपना मुह खोल देती है और उसका ज़ुबान बाहर की तरफ निकल आता है उसे साँस लेने में दिक्कत हो रही थी। कल्लू के धक्कों से उसे सँभलने का मौका नहीं मिल रहा था।
निर्मला -चोद मुझे बेटा चोद अपनी माँ को।अपनी माँ को चोद रहा है ना तु। मेरी चूत में अपना लंड डाल कर जहाँ से मैंने तुझे निकाली थी वहीँ अपना मोटा लण्ड डाल के आह।कैसी है तेरी माँ की चूत मेरे लाल
आह और जोर से चोद आह।
कल्लू;माँ तेरी चूत मुझे पहले मिल गई होती तो कसम से कहीं भी नहीं जाता दिन रात इसी में पडा रहता। आह।
निर्मला;आज से इसी में रखूँगी तुझे दिन रात मुझे चोदेगा ना अपनी माँ को जब दिल कहेंगा मेरा आ ह ।
कल्लू;हां माँ आज से बस तुझे ही चोदुँगा मैं हर जगह।
निर्मला;कहाँ कहाँ चोदेगा मुझे आह।
कल्लू;हर जगह माँ हर जगह।
जब तक तेरे तीनो सुराख़ में नहीं पेल देता तब तक नहीं रुकुंगा आज मैं।
निर्मला;तीनो सुराखों में बेटा।
कल्लू;हाँ माँ तेरी चूत और मुह तो ले चुके है मेरा लण्ड बस तेरी गाण्ड बाकी है आहह उसे भी चोद लूँ एक बार तभी रुकेगा तेरा बेटा आह ह।
निर्मला;मैं भी तुझे रुकने नहीं दूंगी बेटा।
हर जगह लूँगी तेरा लंड।
खेत में।नदी में तो ले चुकी हूँ।
नहाते हुए
पेशाब करते हुए
किचन में
खाना खाते हुए
हर जगह मुझे चोदना मेरी बेटी की चूत चाटते हुए भी चोदना। मेरी बहु के सामने नंगी करके चोदना मुझे बेटा।
कल्लू;हाँ माँ मैं चोदुंगा तुझे अपनी बहन गुड़िया की चूत पर झुका कर।
जब मेरी शादी होगी तो तेरी बहु के सामने भी तुझे चोदुँगा तुझे आहः ले साली।
दोनो एक दूसरे से चिपक जाते है और लम्बी लम्बी साँसें लेते हुए कल्लू अपना सारा पानी अपनी माँ निर्मला के चूत में निकालने लगता है
उसके साथ साथ निर्मला भी झड़ते चली जाती है।
दोनो एक दूसरे को चुमते हुए अपने साँसें धीमी करने लगते है।
कुछ देर बाद फिर से निर्मला कल्लू के लण्ड को चूस चूस कर खड़ा कर चुकी थी। दोबारा उसे अपने अंदर लेने की चाह उसे बेचैन कर रही थी।
कल्लू;अपने पास में पड़ी हुए तेल की बोतल उठा लेता है और उसे अपने लण्ड पर उंडेल कर लंड चिकना कर देता है।निर्मला को समझते हुए देर नहीं लगती की कल्लू ऐसा क्यूँ कर रहा है।फिर वह तेल को निर्मला के गांड के छेद पर भी खूब प्यार से लगाता है और साथ ही साथ उसमे अपनी ऊँगली भी पेलता रहता है।
लण्ड और गांड पर तेल लगाने के बाद कल्लू निर्मला को एक कुतिया के पोज में कर देता है।
बडी सी चमकती हुए गाण्ड कल्लू के सामने आ जाती है। इस गाण्ड को तो देख देख कितने बार कल्लू अपने लंड को खड़ा करके गुड़िया और चाची की चूत में घुसाया करता था।और आज यही गाण्ड कल्लू के सामने झुकी हुई थी।
कल्लू;एक थप्पड निर्मला के गाण्ड पर जड़ देता है।
निर्मला:आह। क्या करते हो माँ हूँ मै तुम्हारी।
देवा;उसे सहलाते हुए।रांड भी तो है।
इतने सालों से तडपा जो रही है इस गांड के लिए। एक गाण्ड पर थपड क्या मारा चीख पड़ी साली रंडी।
निर्मला;आहह दर्द होता है ना।
कल्लू ;असली दर्द अब होंगा मेरी जान को।
कल्लू अपने लंड को हाथ में पकड़ कर उसे निर्मला के गाण्ड के सुराख़ पर घिसता है। निर्मला अपनी ऑंखें बंद कर लेती है।वो जानती थी दर्द भी होंगा मगर मीठा मीठा और वही होता है कल्लू के लंड का सुपाडा निर्मला की कुँवारी गाण्ड में अटक जाता है।
निर्मला ;आहह गया क्क्या.........
वह पीछे मुड़ कर देखती है।
सिर्फ सामने का हिस्सा गया था और निर्मला की आँखों में ऑंसू आ गये थे। कल्लू उसे पूरी तरह सीधा कर देता है और निर्मला अपने कमर को ऊपर के तरफ उठा लेती है।और अपने दोनों हाथो को पीछे करके अपनी गांड के छेद को फैला देती है।
कल्लू;दोनों हाथों में अपनी माँ के काँधे को पकड़ कर लंड को धीरे धीरे अपनी माँ निर्मला के गांड में उतारता चला जाता है।
निर्मला अपनी चीखें छूपाने के लिए पेंटी अपने मुह में ठूँस लेती है। मगर गुं गुं हूं की आवाज़ें फिर भी उसके मुह से निकल रही थी
कल्लू;तब तक नहीं रुकता जब तक पूरा का पूरा लंड गाण्ड में नहीं चला जाता। जब कल्लू लण्ड को खिचता है तो थोड़ा सा खून भी उसके लंड से लग जाता है।
जो निर्मला के गाण्ड से निकल रहा था।
कल्लू ;तुझे दर्द हो रहा था तो मुझे रुकने के लिए बोली क्यूँ नही माँ।
निर्मला;मुड कर कल्लू के आँखों में देखने लगती है।
बहुत तड़पाया हैं मैंने तुझे ।जो तड़प का दर्द तूने सहा है मेरी वजह से उस दर्द के सामने ये दर्द तो कुछ भी नहीं है। रुक मत खोल दे आज अपने माँ के हर सुराख़ को।
और कल्लू अपने माँ की आज्ञा का पालन करते हुए तेल से सना हुवा लंड गप की आवाज़ के साथ अपनी माँ निर्मला की गांड में उतार देता है।
निर्मला ;आह बेटे आह। और ज़ोर से।जालिम और ज़ुल्म कर अपने माँ पर ।तेरा हर ज़ुल्म सहना चाहती हूँ मै आज से हर दिन हर रात हर सुबह हर घडी ही चोद मुझे आह।
कल्लू;गप गप अपनी माँ की गाण्ड मारने लगता है
हलांकी दोनों को दर्द भी हो रहा था मगर वो मोहब्बत ही क्या जिस में दर्द न हो। सच्ची मोहब्बत में दर्द भी होता है और उस दर्द का मजा भी खूब होता है।
कल्लू अब अपनी पूरी ताकत से निर्मला की गांड मारने लगता है।वह गांड में लंड पेलने के साथ ही कभी कभी निर्मला के गांड पर थप्पड़ भी मार रहा था जिससे निर्मला के गोरे गोरे चूतड़ लाल हो गए थे।1 घंटे तक जबरदस्त धक्को के साथ चुदाई के बाद कल्लू अपना पूरा माल अपनी माँ की गांड में ही भर देता है।इतनी देर में निर्मला 2 बार झड़ चुकी थी।
दोनों कुछ देर शांत हो जाते है।फिर कल्लू अपनी माँ की गांड को साफ करता है।और अपनी माँ की चूत और चूचों से खेलने लगता है।जिससे कुछ ही देर बाद उसका लंड खड़ा होने लगता है जिसे वह निर्मला को चूसने का इशारा करता है।जिसे निर्मला अपने मुँह में ले लेती है।
पाँच मिनट चूसने पर ही कल्लू का लंड फ़ुफ़कारने लगता है।
अब कल्लू अपनी माँ की चूत पर झुक जाता है।
कल्लू अपनी मा की चूत की फांको को दोनो हाथो से फैलाकर उसकी चूत के दाने से रिस्ते पानी को अपनी जीभ से दबा-दबा कर जैसे-जैसे चूस्ता है निर्मला उह आ ओ बेटे करने लगती है,कल्लू उसकी एक टांग को उठा कर अपने कंधे पर रख लेता है और फिर अपनी मा की पूरी चूत को सूंघते हुए अपनी जीभ चूत के छेद मे भर-भर कर उसका रस चूसने लगता है।
निर्मला अपने हाथो से अपनी चूत को और फैला देती है और कल्लू बड़े आराम से अपनी मा की चूत को चूस्ते हुए अपनी मा की गुदाज गान्ड को दबाता हुआ उसके छेद मे उंगली डाल-डाल कर सहलाता रहता है
कल्लू अपनी मा की चूत चूस-चूस कर उसे लाल कर देता है और निर्मला की टाँगे काँपने लगती है वह सीधे ज़मीन पर लेट जाती है और कल्लू को अपने उपर खीच लेती है।
कल्लू अब ज़रा भी देर नही करता है और अपनी मा की मोटी जाँघो को फैला कर जब अपनी मा की फूली हुई गुदाज चूत देखता है तो पागल हो जाता है और अपनी माँ की चूत की फांको को खूब फैला-फैला कर चाटना शुरू कर देता है, निर्मला अपनी मोटी गान्ड उचका-उचका कर अपने बेटे का मुँह अपनी चूत पर दबाने लगती है।
कल्लू अपने मुँह मे अपनी मा की चूत पूरी भर कर खूब कस-कस कर चूसने लगता है और निर्मला अपनी चूत उसके मुँह पर रगड़ते हुए पानी छोड देती है, कल्लू सारा पानी चाटने के बाद अपनी मा की चूत को उपर अच्छे से उभार कर अपना मोटा लंड अपनी मा की चूत के छेद मे लगा कर एक कस कर धक्का मारता है और उसका लंड उसकी मा की चूत मे पूरा एक ही बार मे समा जाता है।
कल्लू अपनी माँ के उपर चढ़ कर उसके दूध दबोचते हुए उसकी चूत को कस-कस कर चोदने लगता है, निर्मला आह बेटे आह करती हुई नीचे से अपनी गान्ड उठा-उठा कर अपने बेटे के मोटे लंड पर मारने लगती है, कल्लू अपनी माँ पर चढ़ कर खूब कस-कस कर उसकी चूत कूटना शुरू कर देता है निर्मला अपनी दोनो टाँगो को उठाए अपनी चूत मे अपने बेटे का लंड खूब कस-कस कर लेने लगती है।
थोड़ी देर बाद कल्लू अपनी मा को घोड़ी बना देता है और जब उसकी मोटी गान्ड को देखता है तो सीधे अपना मुँह अपनी मा की गान्ड से लगा कर चाटने लगता है वह कभी अपनी मा की गान्ड को चाट्ता है और कभी थोड़ा नीचे मुँह लेजा कर उसकी फूली हुई चूत के छेद को पीने लगता है।
निर्मला अपने बेटे द्वारा इस तरह अपनी गान्ड और चूत चाटने से मस्त हो जाती है तभी कल्लू अपना लंड पकड़ कर अपनी मा की चूत मे पीछे से कस कर पेल देता है और निर्मला आह हाय बेटे बड़ा मस्त लंड है तेरा चोद और चोद अपनी मा को खूब कस-कस कर चोद आज फाड़ दे अपनी मा की मस्तानी चूत को खूब तेज ठोकर मार अपने लंड की फाड़ दे बेटे फाड़ दे अपनी मा की चूत को आह आह आहह।
कल्लू अपनी मा की चूत मार-मार कर मस्त लाल कर देता है और फिर कल्लू अपने लंड को बाहर निकाल कर बड़े प्यार से अपनी मा की चूत को चाटने लगता है वह निर्मला को पूरी तरह मुँह के बल ज़मीन से सटा कर उसकी गुदाज मोटी गान्ड को उपर उठा कर अपनी मा की गान्ड के छेद मे थूक लगा-लगा कर पहले अपनी एक उंगली डाल कर चूत चाटने लगता है
फिर कल्लू अपनी दो उंगलिया अपनी मा की गान्ड मे डाल कर उसकी चूत के गुलाबी और रसीले छेद को चूसने लगता है।
निर्मला मस्ती मे झुकी हुई अपने भारी चूतड़ मटकाती रहती है और सीसियती रहती है।
तभी कल्लू पास मे रखी तेल की शीशी से तेल डाल कर अपनी मा की गुदा मे उंगली से अंदर तक ठुसने लगता है वह अपनी मा की गान्ड के छेद को अपनी उंगलियो से तेल लगा-लगा कर खूब चिकना कर देता है
फिर कल्लू अपने मोटे लंड को पूरा तेल मे भिगो कर अपने लंड के टोपे को अपनी मा की तेल मे सनी हुई गुदा से सटा कर अपनी मा के चुतड़ों को अपने हाथो मे कस कर थाम लेता है और फिर कचकचा कर एक तगड़ा धक्का अपनी मा की गान्ड मे मार देता है और उसका आधे से ज़्यादा लंड फिसलता हुआ उसकी माँ की गान्ड मे समा जाता है।
निर्मला अपने बेटे के द्वारा ऐसा तगड़ा धक्का अपनी गान्ड मे खाने के बाद एक दम से हाय मर गई रे आह कल्लू बहुत मोटा लंड है बेटे तेरा आह आह आ।
कल्लू अपनी मा की बात सुन कर अपना लंड थोड़ा सा बाहर खींच कर एक जबरदस्त शॉट अपनी मा की गान्ड मे मार देता है और उसका पूरा लंड उसकी मा की गान्ड मे उतर जाता है और निर्मला का बदन ऐंठ जाता है, अब कल्लू धीरे-धीरे अपने लंड को अपनी मा की गान्ड मे आगे पीछे करने लगता है, धीरे-धीरे निर्मला भी अपने चुतड़ों को पीछे की ओर धकेलने लगती है, आह बेटे आह कल्लू बहुत अच्छा लग रहा है।
कल्लू अब अपने लंड की रफ़्तार को थोडा बढ़ा कर सटासट अपनी मा की गान्ड मे अपने मोटे लंड को पेलने लगता है, कल्लू अपनी मा की मोटी-मोटी जाँघो को सहलाते हुए उसकी गान्ड को खूब कस-कस कर ठोकने लगता है।कल्लू इतनी जोर से अपनी माँ निर्मला की गांड मारने लगता है की वह मूतने लगती है।जिसे देखकर कल्लू और उतेजित हो जाता है और अपनी माँ की कसी गांड को फाड़ने लगता है।निर्मला मज़े से सिसियति रहती है।
अब कल्लू अपने पैरो के पंजो के बल बैठ कर अपनी मा निर्मला की गान्ड की मस्त ठुकाई चालू कर देता है और निर्मला आह आ करती हुई कल्लू का लंड अपनी गान्ड मे लेने लगती है।
जब निर्मला से रहा नही जाता है तो वह एक दम से ज़मीन पर पसर जाती है कल्लू सीधे अपनी मा की गान्ड पर लेट जाता है और नीचे हाथ लेजा कर अपनी मा की फूली हुई चूत को अपनी हथेली मे भर कर दबोच लेता है और फिर से अपनी मा की गान्ड मे अपने लंड को खूब गहराई तक पेलने लगता है, कल्लू लगभग आधे घंटे तक अपनी मा की मोटी गान्ड मार-मार कर लाल कर देता है और फिर उसका पानी उसकी मा की मोटी गान्ड मे छूट जाता है।
निर्मला उठ कर कल्लू के लंड को किसी कुतिया की भाँति सूंघते हुए चूसने लगती है और कल्लू अपनी मा को पूरी नंगी करके उसके मोटे-मोटे दूध उसके गुदाज पेट और उसकी चूत मे खूब सारा तेल लगा कर उसे खूब चिकनी कर देता है उसके बाद कल्लू निर्मला को अपने सीने से चिपका कर उसकी चूत मे अपना लंड फिर से पेल देता है और अपनी मा के होंठो को पीते हुए उसके दूध दबा-दबा कर उसकी चूत को खूब कस-कस कर चोदने लगता है।
निर्मला अपने पेरो को हवा मे उठा कर मोड़ लेती है और कल्लू के लंड को अपनी चूत पर खूब दबोचने लगती है, कल्लू अपनी मा की गान्ड के नीचे हाथ डाल कर उसके भारी चुतड़ों को अपने हाथो मे भर कर ज़ोर से दबोचते हुए अपनी मा की चूत मे सटासट लंड डाल-डाल कर ठोकने लगता है, कल्लू निर्मला की चूत ठोक-ठोक के पूरी सूजा देता है और मस्त लाल चूत को चोद्ते हुए अपना पानी अपनी मा की चूत मे भर देता है।
निर्मला की चूत अपने बेटे के तगड़े लंड को पाकर मस्त हो जाती है, उस दिन पूरा दिन कल्लू अपनी माँ निर्मला को तरह-तरह के आसनो मे खूब कस कर चोद्ता है उसके बाद शाम को कल्लू अपनी माँ के साथ अपने घर वापस आता है।
रात को गुड़िया सहेली के बर्थडे में थोडा लेट से आती है।वह दिनभर के भागदौड़ में थक गई थी।इसलिए अपनी माँ के पास सो जाती है।कल्लू भी दिनभर अपनी माँ की चुदाई करके थका हुवा था।वह भी जल्दी ही सो जाता है।
सुबह बाबा बताते है की वह गुड़िया की माँ के साथ शहर जा रहे है।कुछ बैंक का काम था।वह कल्लू से बोलते है की गुड़िया के साथ खेतों में चले जाना।हमलोग शाम तक आएंगे।
कल्लू गुड़िया की तरफ देखकर मुस्कुराता है की आज दिनभर खेतों में मज़ा आएगा।गुड़िया भी अपनी चूत सहला कर इशारा करती है।
जब बाबा और माँ शहर चले जाते है तो कल्लू गुड़िया को बाँहों में भर लेता है और उसके रसीलें होठों को चूसने चाटने लगता है।फिर गुड़िया के कोमल हाथ को पकड़कर अपने लंड पर रख देता है जिसे गुड़िया सहलाने लगती है।और अपने भइया के मुह में अपनी जीभ डाल देती है।
कल्लू:गुड़िया चल जल्दी से खेतों में आज तुझे खेतों में पूरी नंगी करके चोदने का मन कर रहा है।कितना मज़ा आएगा जब तू खेतो में पूरी नंगी होगी और मैं तुझे अपने लंड पर चढ़ा लूंगा।
गुड़िया :चलो भइया।मैं क्या पहन लूँ।
कल्लू:अपनी टॉप और स्कर्ट पहन ले बिना ब्रा पेंटी के।और थोडा मेरा लौड़ा चूस दे अभी।मैं तेरी मस्त गांड देखते हुए खेतो तक चलूँगा।
गुड़िया अपने भइया का लंड धोती से निकालती है और जीभ से चाटने लगती है।कल्लू का लंड फ़ुफ़कारने लगता है।
कल्लू:अब चल मेरी जान।नहीं तो यही पेलना शुरू कर दूंगा।
दोनों खेतो की और चल देते है।रास्ते भर गुड़िया स्कर्ट हटा कर अपनी मोटी मोटी गाँड दिखाकर कल्लू को पागल बना देती है।कल्लू जब उसकी गांड में ऊँगली करना चाहता है तो भाग जाती है।
कल्लू मन ही मन :आज तो खेतो में नंगी करके कुतिया बना के तेरी गांड नहीं मारी तो मेरा नाम कल्लू नहीं।साली मेरे सामने गाँड मटकाती है।
फिर दोनों खेत में बनी झोपडी में जाते है।फिर गुड़िया खटिया के निचे बिस्तर लगा देती है।और दोनों बाते करने लगते है।
गुड़िया- ओके भइया. अब सिर्फ बातें ही करोगे या मेरी जवानी का मज़ा भी लोगे।
कल्लू- अरे तेरी जवानी तो ऐसी है.. कि लंड अपने आप इसे सलामी देने लगता है। पहली बार रात में तो सब जल्दबाज़ी में हुआ तो ठीक से मैं तुम्हारे इन रसीले होंठों का मज़ा नहीं ले पाया। इन कच्चे अनारों का जूस नहीं पी पाया.. अब सुकून से इनको चूस कर मज़ा लूँगा, तेरी महकती चूत को चाट कर उसकी सूजन कम करूँगा।
कल्लू की बातों से गुड़िया उत्तेज़ित होने लगी थी। वो कल्लू की जाँघों पर सर रख कर लेट गई और उसके लौड़े को सहलाने लगी।
कल्लू- आह गुड़िया तुम्हारे हाथ भी बहुत मुलायम हैं.. लंड पर लगते ही करंट पैदा हो जाता है।
गुड़िया कुछ बोली नहीं और लौड़े पर जीभ फेरने लगी.. वो बहुत ज़्यादा मस्ती में आ गई थी। उसकी चूत लौड़े के लिए तैयार हो गई थी।
कल्लू- आह..गुड़िया उफ़.. तेरे ये रसीले होंठ आह.. मेरे लौड़े को पागल बना रहे हैं.. तुम मुझे पागल बना रही हो आह..
गुड़िया- भइया आप देखते जाओ.. इतने सालों से मैं शरीफ बनके जी रही थी.. मगर मुझे अब पता चला जो मज़ा चुदाई में है.. वो पढाई में नहीं.. उफ़.. आपका ये गर्म लौड़ा मुझे चूसने में बहुत मज़ा आ रहा है। आपकी बहन अब पूरी आपकी है.. आ जाओ नोंच डालो मेरे जिस्म को.. कर दो मुझे अपने इस लौड़े से ठंडी.. आह.. अब मेरा बदन जलने लगा है।
गुड़िया सीधी होकर बाँहें फैलाए खटिया के निचे लेट गई..कल्लू समझ गया कि अब उसको क्या करना है।कल्लू ने गुड़िया का टॉप निकाल दिया।गुड़िया टॉप ने निचे कुछ नहीं पहनी थी।उसके ठोस चुचिया तनी हुई थी।कल्लू उसके पास लेट गया और उसके एक निप्पल को दबाने लगा.. उसके होंठों को चूसने लगा। अब दोनों एक-दूसरे को चूमने और चाटने में बिज़ी हो गए थे।
कल्लू अब ज़ोर-ज़ोर से उसके मम्मों को दबाने और चूसने लग गया।
गुड़िया- आह.. भइया उफ़.. आराम से आह.. चूसो.. आह.. सारा रस पी जाओ.. आह.. मज़ा आ रहा है भाई.. आह.. आह..काट डालो इन निप्पलों को बहुत परेसान करते है।
दस मिनट तक इनकी मस्ती चलती रही। अब दोनों ही वासना की आग में जलने लगे थे। कल्लू का लौड़ा टपकने लगा।
गुड़िया- आह.. भइया.. उफ़फ्फ़.. मेरी चूत जल रही है . आह.. आपके गर्म होंठों से इ..ससस्स.. इसकी मालिश कर दो न..
कल्लू- अभी लो मेरी गुड़िया रानी..अभी तो तेरी चूत की ओपनिंग हुई है.. उसकी मालिश ऐसे करूँगा कि लाइफ टाइम याद रखोगी.. अपने प्यारे भइया के लंड को..
कल्लू ने गुड़िया के पैर मोड़े और टाँगों के बीच लेट गया। फिर कल्लू ने गुड़िया का स्कर्ट भी उतार दिया अब गुड़िया पूरी नंगी थी।गुड़िया बिना पेंटी पहने ही घर से आई थी।गुड़िया की डबल रोटी जैसी फूली हुई चूत पर उसने धीरे से अपनी जीभ रख दी।
गुड़िया- सस्सस्स आह.. भाई.. अब रहा नहीं जा रहा है आह.. प्यार से चाटना.. आह.. आपकी बहन हूँ आह.. उफफ्फ़..
कल्लू- पता है मेरी जान.. तू आँख बन्द करके मज़ा ले.. मैं प्यार से ही तेरी बुर की चुदाई करूँगा..
कल्लू अब बड़े प्यार से चूत को चाटने लगा था। अपनी जीभ की नोक धीरे-धीरे अन्दर घुसा रहा था.. जिससे गुड़िया की उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी, वो बस आनन्द की दुनिया में कहीं गोते लगा रही थी।
गुड़िया- आह.. उहह.. भइया मज़ा आ रहा है.. इससस्स.. आह.. खूब चूसो.. आह.. और दबा के.. ससस्स चूसो.. आह.. मज़ा आ गया।
कल्लू अब आइस्क्रीम की तरह चूत को चाट रहा था.. गुड़िया की चूत से रस टपकना शुरू हो गया था.. वो अब तड़पने लग गई थी।
गुड़िया- आह..ससस्स.. भाई.. आह.. मेरी चूत की आग बहुत बढ़ गई है.. आह.. अब उफफफ्फ़.. सस्सस्स.. भाई आह.. लौड़ा घुसा दो.. आह.. मुझे कुछ हो रहा है.. आह.. प्लीज़ भाई.. आह..पेल दो अपने मोटे लौड़ें को मेरी रसीली चूत में आह. आह…
कल्लू भी अब बहुत ज़्यादा उत्तेज़ित हो गया था। उसके लौड़े से भी रस की बूँदें टपकने लगी थीं.. वो बैठ गया और लौड़े को चूत पर टिका कर धीरे से दबाने लगा।
गुड़िया- आह.. पेलो मेरे राजा भइया.. आह.. उई घुसा दो आह.. पूरा डालो.. आह.. मेरी चूत को फाड़ दो आज.. आह.. आईई..।
कल्लू ने धीरे-धीरे अब कमर को हिलाना शुरू कर दिया था। हर झटके के साथ वो लौड़े को थोड़ा आगे सरका देता और गुड़िया की आह.. निकल जाती। कुछ ही देर में उसने पूरा लौड़ा चूत में घुसा दिया और गुड़िया के ऊपर लेटकर उसके निप्पल को चूसने लगा।
गुड़िया- आह..भइया अब चुदाई शुरू कर दो.. मुझे दर्द नहीं हो रहा है.. आह.. करो न.. आह.. चोद दो मुझे.. आह.. आज मेरी निगोड़ी चूत की सारी गर्मी निकाल दो आह..
कल्लू जोर जोर से लौड़े को अन्दर-बाहर करने लगा। गुड़िया भी गाण्ड उठा कर उसका साथ देने लगी। चुदाई जोरों से शुरू हो गई..दोनों का तापमान बढ़ने लगा।
खच..चच . फच..फच.. आह.. उहह.. इससस्स.. आह.. उहह.. उहह..’ की आवाजें झोपडी में गूंजने लगीं।
गुड़िया- आह पेलो भइया. चोद डालो अपनी छोटी बहन को अपनी गुड़िया को।. आह.. आईईइ।
कल्लू- ले गुड़िया.. आह.. आज तेरे भाई का आह.. पॉवर देख.. आह.. तेरी चूत का आह भोसड़ा बना दूँगा मैं.. आह.. आज के बाद तू जब भी उहह.. चूत को देखेगी.. आह.. मेरी याद आएगी तुझे..दिन भर आज खेतो में दौड़ा दौड़ा के पेलूँगा तुझे।
दस मिनट तक कल्लू पूरी ताकत से गुड़िया को चोदता रहा। अब कल्लू तो पक्का चोदू बन चूका था।अब कहाँ वो जल्दी झड़ने वाला था। अब तो उसका टाइम और अनुभव बढ़ गया था। मगर गुड़िया की चूत लौड़े की चोट ज़्यादा देर सह ना पाई और उसके रस की धारा बहने को व्याकुल हो गई।
गुड़िया- आई आई.. आह.. भाई और जोर से पेलो.मैं झड़ने वाली हूँ। आह.. गई.. आह.. भाई.. ज़ोर से पेलो.. आहह.. उहह आह..।
कल्लू ने और तेज़ी से लौड़े को अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। गुड़िया का बाँध टूट गया.. वो झड़ने लगी। कुछ देर बाद वो शान्त पड़ गई.. मगर कल्लू का अभी बाकी था.. वो धीरे-धीरे कमर को हिला रहा था।
गुड़िया अब शान्त लेट गई थी.. उसका सारा जोश ठंडा हो गया था। कल्लू ने अचानक लौड़ा बाहर निकाला और गुड़िया के पेट पर बैठ गया। उसके मम्मों के बीच लौड़े को रख कर कमर हिलाने लगा।
गुड़िया समझ गई कि कल्लू उसके मम्मों को चोदना चाहता है। उसने दोनों हाथों से अपने मम्मों को कस कर दबा लिए जिससे लौड़ा मम्मों के बीच अब टाइट होकर अन्दर-बाहर हो रहा था।
कुछ देर तक ये चलता रहा.. उसके बाद कल्लू ने आसान बदल दिया। वो घुटनों के बल झोपडी में खड़ा हो गया.. जिसे देख कर गुड़िया मुस्कुराई।
गुड़िया- क्या हुआ भइया.. मज़ा आ रहा था.. खड़े क्यों हो गए?
कल्लू- मेरी जान लंड को थोड़ा चूस कर चिकना कर दे.. उसके बाद तुझे घोड़ी बना कर चोदूँगा.. तेरी चूत की गर्मी तो निकल गई.. अभी मेरा रस निकलना बाकी है।
गुड़िया हँसती हुई अपने भइया के मोटे लौड़े को चूसने लगी.. अपने मुँह में पूरा लौड़ा लेकर अच्छी तरह उसको थूक से तर कर दिया।
कल्लू- आह्ह.. आह्ह.. बस गुड़िया.. अब बन जा घोड़ी.. आज तेरी सवारी करूँगा.. आह्ह.. अब बर्दास्त नहीं होता आह्ह.. आह्ह।
गुड़िया घुटनों के बल अच्छी तरह पैर फैला कर घोड़ी बन गई.. वैसे तो ये उसका पहली बार था.. मगर जिस तरह वो घोड़ी बनी थी.. कल्लू। को बहुत अच्छा लगा कि उसकी बहन एकदम मस्त घोड़ी बनी है।
कल्लू- वाह.. मेरी गुड़िया क्या जबरदस्त घोड़ी बनी है तू.. अब ठुकाई का मज़ा आएगा.. तेरी चूत कैसे फूली हुई है.. उफ़फ्फ़ साली ऐसी रसीली चूत देख कर लौड़े की भूख ज़्यादा बढ़ जाती है।
कल्लू ने लौड़े को चूत पर टिकाया और पूरा एक साथ अन्दर धकेल दिया।
गुड़िया- आईईइ.. भइया आराम से.. आह्ह.. एक बार में पूरा घुसा दिया.. आह्ह.. आज तो आराम से करो.. जितनी बार चाहो चोद लेना..
कल्लू- अरे मेरी प्यारी गुड़िया. तेरी चूत देख कर बहक गया था.. अब आराम से करूँगा।
कल्लू अब गुड़िया की कमर पकड़ कर चोदने लगा.. उसके हाथ गुड़िया की मुलायम गाण्ड को भी सहला रहे थे। बीच-बीच में वो गुड़िया की गाण्ड के छेद में उंगली भी घुमा रहा था।
थोड़ी देर की मस्ती के बाद गुड़िया फिर से गरम हो गई और गाण्ड को पीछे धकेल कर कल्लू के मज़े को दुगुना बनाने लगी।
गुड़िया- आह.. आह.. पेलो भाई.. आह्ह.. आज के दिन हर तरीके से मुझे चोदो.. आह.. आह.. जोर से पेलो.. और तेज भाई आह्ह.. मज़ा आ रहा है।
कल्लू अब तेज़ी से चोदने लगा। उसका लौड़ा अब फूलने लगा था। चूत की गर्मी से पिघल कर आख़िर कर कल्लू के लौड़े ने रस की धारा चूत में मारनी शुरू कर दी। उसका अहसास पाकर गुड़िया की चूत भी झड़ गई। दो नदियों के मिलन के जैसे उनके कामरस का मिलन हो गया।
अब दोनों ही शान्त पड़ गए.. गुड़िया की कमर में दर्द होने लगा था। जैसे ही कल्लू ने लौड़ा बाहर निकाला.. वो बिस्तर पर कमर के बल लेट गई और लंबी साँसें लेने लगी। कल्लू भी उसके पास ही लेट गया।
गुड़िया- उफ़फ्फ़ भाई.. इस बार तो आपने बहुत लंबी चुदाई की.. आह्ह.. आपने तो मेरी चूत की हालत बिगाड़ दी।
कल्लू- तुम्हें ही चुदवाने का चस्का लगा था.. अब लौड़े के लिए तड़फी हो.. तो पूरा मज़ा लो।
गुड़िया- मज़ा ही तो ले रही हूँ..आज तो चुदवाने ने बहुत मज़ा आया। मगर आप ये मेरी गाण्ड में उंगली क्यों डाल रहे थे?
कल्लू- गुड़िया सच कहूँ.. तेरी गाण्ड देख कर मन बेचैन हो गया है.. ऐसी मटकती गाण्ड.. उफ़फ्फ़ इसमें लौड़ा जाएगा.. तो मज़ा आ जाएगा.. बस यही देख रहा था कि अबकी बार मैं तेरी गाण्ड ही मारूँगा.
गुड़िया-नहीं भइया.. आज शुरूआत में ही सारे मज़े लूट लोगे क्या..अभी का मेरा हो गया.. अब बाद में देखते हैं.. आप चूत मारते हो या गाण्ड..
कल्लू- अरे अभी कहाँ थक गई यार.. अभी तो बहुत पोज़ बाकी हैं.. तुम्हें आज अलग-अलग तरीके से चोदूँगा और प्लीज़ गुड़िया तुम्हारी मुलायम गाण्ड मारने दो ना.. प्लीज़..
गुड़िया- नो नो भाई.बहुत दर्द होगा।तुमने पहले बताया नहीं ।नहीं तो मैं तेल लेकर आती।
कल्लू-अरे गुड़िया।मेरे पास सारा इंतज़ाम है।मैंने तेल की शीशी भी रखी है।
गुड़िया-ठीक है भइया ।गांड बाद में मार लेना।कल्लू- ठीक है जानेमन.. जैसा तुम कहो.. मगर एक बार और तेरी चूत मारूँगा.. कसम से मन भरता ही.. नहीं तेरी चूत से..।
गुड़िया- हा हा हा हा.. आप तो मेरी चूत का आज भोसड़ा बना के दम लोगे.. ठीक है भइया.. अब आपको मना नहीं करूँगी.. पर थोड़ा रेस्ट लेने के बाद आप आराम से चुदाई कर लेना..
कल्लू- वाहह.. ये हुई ना बात.. अच्छा अपनी हॉस्टल लाइफ के बारे में कुछ बताओ न.. तुम्हारे अन्दर ये बदलाव कैसे आया.. ये भी बताओ..
गुड़िया ऐसे ही हॉस्टल की बातें करने लगी और कल्लू बस उसको सुनता रहा। आधे घंटे तक दोनों बातें करते रहे.. उसके बाद कल्लू का मन दोबारा चुदाई का हो गया।
कल्लू धीरे-धीरे गुड़िया के जिस्म को सहलाने लगा।उसके रसीले होंठो को चूसने लगा। ऐसी कच्ची कली को जल्दी ही उसने फिर से गरम कर दिया..।
इस बार वो सीधा लेट गया और गुड़िया को ऊपर लेटा कर नीचे से अपना लंड गुड़िया की रसीली चूत में फंसाकर एक झटका दिया, लंड कच से घुसता चला गया।गुड़िया भी मस्ती में आकर लौड़े पर कूदने लगी।
इस बार गुड़िया कल्लू को चोद रही थी।
लंबी चुदाई के बाद दोनों झर गए और नंगे ही एक-दूसरे से लिपट कर सुकून की नींद में सो गए।
कुछ देर बाद कल्लू का लंड खड़ा हो जाता है।वह गुड़िया की गांड पर रगड़ने लगता है।
गुड़िया- अरे भइया, ये आपके लौड़े को क्या हो गया.. कैसे झटके खा रहा है.. लगता है इसको घुसने की बड़ी जल्दी है।
कल्लू- अरे इसको पता है.. आज मुलायम कुँवारी गाण्ड का मज़ा मिलने वाला है।
गुड़िया- हाँ मिलेगा.. लेकिन उसके पहले मेरे प्यारे रसीले होंठ इसको मज़ा देंगे.. फिर ये मेरी चूत की आग मिटाएगा.. उसके बाद लास्ट में गाण्ड का मज़ा मिलेगा.. समझे इतनी आसानी से नहीं.कुँवारी गांड नहीं मिलेगी।
कल्लू- अरे यार ये क्या बात हुई.. पहले गाण्ड मारने दो ना प्लीज़..
गुड़िया- नही भैया। आपने तो लगता है पॉवर वाली गोली खा रखी है… शुरू में गाण्ड मारोगे तो पता नहीं कितना दर्द होगा.. पहले मुझे ठंडी कर दो.. और साथ में मेरी गांड के छेद को आयल लगाकर चिकना भी कर दो।फिर आराम से गाँड मारते रहना।
कल्लू ने ज़्यादा ज़िद नहीं की और मान गया। उसके बाद दोनों चूमा-चाटी में लग गए। दोनों 69 के पोज़ में आ गए और एक-दूसरे के चूत और लण्ड को चूसकर मज़ा लेने लगे।कुछ देर बाद गुड़िया ने कहा- अब बस बर्दाश्त नहीं होता.. घुसा दो लौड़ा चूत में.. और बुझा दो इसकी प्यास!
कल्लू ने गुड़िया के पैर कंधे पर डाले और लौड़े को चूत पर सैट करके जोरदार झटका मारा.. पूरा लौड़ा एक ही बार में अन्दर चला गया।
गुड़िया- आआह्ह.. आईईइ.. मर गई रे.. आह्ह.. भाई क्या हो गया है आपको आह्ह..
कल्लू- ये तेरी साली चूत बहुत प्यासी है ना.. इसकी वजह से मैं गाण्ड बाद में मारूँगा। अब देख इसका क्या हाल करता हूँ.. आह्ह.. ले उहह उहह उहह..
गुड़िया- आ आह्ह.. चोदो आह्ह.. मेरे भाई.. मज़ा आ गया..पेलो जोर जोर से.. आह्ह.. भाई फाड़ दो मेरी चूत को.. आह्ह.... आह्ह.. आइ..।
कल्लू और स्पीड से पेलने लगा.. गुड़िया से ऐसे तगड़े झटके बर्दास्त नहीं हुए वो झड़ने के करीब आ गई।
गुड़िया- आह्ह.. भाई तेज.. मेरी चूत आह्ह.. गई.. गई.. आह्ह.. आइ आइ..
गुड़िया कमर हिलाकर झड़ने लगी उसकी साँसें तेज हो गईं.. मगर कल्लू का अभी बाकी था.. वो ‘घपा-घाप’ लौड़ा पेल रहा था।
गुड़िया- आ आह्ह.. भाई आह्ह.. अब निकाल लो.. आह्ह.. मेरी चूत में आह्ह.. जलन हो रही है.. आह्ह.. उफ्फ.. उफ़फ्फ़..
कल्लू ने झटके से लौड़ा बाहर निकाल लिया.. तो गुड़िया तड़प सी गई..- आह्ह.. आज तो बड़े जोश में हो भइया.. लगता है आज मेरी खैर नहीं..
कल्लू- तेरा तो पता नहीं.. मगर आज तेरी गाण्ड की खैर नहीं है.. बहुत तड़पाती है मुझे.. आज उसको फाड़ के रख दूँगा मैं..
गुड़िया- भाई जोश में होश ना खो देना.. आज फाड़ दोगे.. तो दोबारा नहीं करना क्या आपको?
कल्लू ने गुड़िया के मुँह पर लौड़ा लगा दिया और हाथ से उसके बाल पकड़ कर लौड़ा उसके गालों पर घुमाने लगा।
गुड़िया- उफ्फ.. भाई क्या कर रहे हो.. बाल क्यों पकड़े हो मेरे.. दु:खता है ना..
कल्लू- अरे अभी कहाँ दु:खा है.. जब तेरी गाण्ड मारूँगा.. तब होगा असली दर्द तो.. मेरी जान ले चूस..
गुड़िया- भाई आपके इरादे ठीक नहीं लग रहे.. मुझे तो डर लग रहा है आपसे.. पता नहीं आज मेरी गाण्ड का क्या हाल करोगे..
कल्लू- डर मत मेरी जान.. तेरी गाण्ड इतनी प्यारी है.. इसको तो बड़े प्यार से खोलूँगा.. चल अब देर मत कर बन जा मेरी घोड़ी.. ताकि मेरे लौड़े को भी सुकून आ जाए..
गुड़िया- प्लीज भइया.. प्लीज़ दर्द मत करना.. आराम से डालना और प्लीज़ ऐसे सूखा मत डालो.. कोई आयिल लगा लो.. ताकि दर्द कम हो.. वो सामने देखो वहाँ से ले लो..
कल्लू खड़ा हुआ और आयिल की बोतल ले आया.. तब तक गुड़िया भी दोनों पैर फैला कर ज़बरदस्त कुतिया बन गई थी.. उसको देख के कल्लू खुश हो गया।
कल्लू- वाह्ह.. मेरी जान क्या पोज़ में आई हो.. पैर भी फैला दिए.. ताकि गाण्ड थोड़ी और खुल जाए.. तू डर मत.. अभी बस थोड़ी देर की बात है.. उसके बाद गांड की छेद पूरी खोल दूँगा..
इतना कहकर कल्लू खटिया के निचे लगे बिस्तर पर आ गया और कुतिया बनी गुड़िया की गाण्ड को सहलाने लगा।
गुड़िया- उफ्फ.. भाई आपका हाथ लगाते ही अजीब सा महसूस हो रहा है।
कल्लू ने आयिल गुड़िया की गाण्ड के छेद पर डाला और उंगली से उसके छेद में लगाने लगा। कुछ आयिल लौड़े की टोपी पर भी लगा लिया ताकि आराम से घुस जाए।
कल्लू उंगली को गाण्ड के अन्दर घुसा कर तेल लगाने लगा.. तो गुड़िया को थोड़ा दर्द हुआ.. मगर वो दाँत भींच कर चुप रही।
कल्लू बड़े प्यार से उंगली थोड़ी अन्दर डालकर गाण्ड में तेल लगा रहा था और गुड़िया बस आने वाले पल के बारे में सोच कर डर रही थी।
कल्लू- मेरी रानी अब तेरी गाण्ड को चिकना बना दिया है.. अब बस लौड़ा पेल रहा हूँ.. थोड़ा सा दर्द बर्दाश्त कर लेना.. उसके बाद मज़े ही मज़े हैं.. तूम खुद कहेगी कि रोज गाण्ड मरवाऊँगी.तूम जानती नहीं गांड मराने में चूत से भी ज्यादा मज़ा आता है।
गुड़िया- भाई प्लीज़ आराम से डालना.. मैं आपकी छोटी बहन हूँ.. ये बात भूलना मत..
कल्लू ने लौड़े को गाण्ड पर टिकाया और प्यार से छेद पर लौड़ा रगड़ने लगा।
कल्लू- अरे जान.. डर मत.. जानता हूँ तू मेरी प्यारी सी छोटी बहन है.. तुझे दर्द होगा तो मुझे भी तकलीफ़ होगी.. तू बस देखती जा.. बड़े प्यार से करूँगा।
कल्लू ने दोनों हाथों से गाण्ड को फैलाया और टोपे को छेद में फँसा कर हल्का सा झटका मारा.. तो लौड़ा फिसल कर ऊपर निकल गया।
उसने 3 बार कोशिश की.. मगर लौड़ा अन्दर नहीं गया.. तो कल्लू ने एक हाथ से लौड़े को पकड़ा और छेद पर रख कर दबाव बनाया.. अबकी बार लौड़ा का टोपा गाण्ड में घुस गया और एक दर्द की लहर गुड़िया की गाण्ड में होने लगी।
गुड़िया- ऐइ.. आईईइ.. आह… भइया.. बहुत दर्द हो रहा है.. आह्ह.. आराम से करना.. नहीं मेरी चीख निकल जाएगी.. उई.. माँ आज नहीं बचूँगी..
कल्लू- मेरी जान.. अभी तो टोपी घुसी है.. थोड़ा सा बर्दास्त कर ले.. बस उसके बाद दर्द नहीं होगा।
गुड़िया- आह्ह.. कर तो रही हूँ.. आप बस झटके से मत पेल देना.. धीरे-धीरे अन्दर डालो.. मैं दाँत भींच लेती हूँ.. आह्ह.. आह..
कल्लू हाथ से दबाव बनाता गया। एक इंच और अन्दर गया और वो रुक गया.. फिर दबाया तो और अन्दर गया.. वैसे कल्लू बड़े प्यार से लौड़ा अन्दर पेल रहा था.. मगर गुड़िया की गाण्ड बहुत टाइट थी। उसकी तो जान निकाल रही थी.. वो बस धीरे-धीरे कराह रही थी।
कुछ देर तक कल्लू धीरे-धीरे लौड़े को अन्दर करता रहा। उसका आधा लण्ड अब गाण्ड में जगह बना चुका था। अब वो आधे लण्ड को ही अन्दर-बाहर करने लगा।
गुड़िया- आह्ह.. आइ.. आह्ह.. अब दर्द कम है.. आह्ह.. चोदो भइया आह्ह.. मज़ा आ रहा है.. भइया सच्ची गाण्ड में मज़ा आ रहा है.. आह्ह.. उहह..
कल्लू अब स्पीड से लौड़े को अन्दर-बाहर कर रहा था और हर धक्के के साथ लौड़ा थोड़ा और अन्दर घुसा देता। उसका लौड़ा एकदम टाइट जा रहा था.. ये तो आयिल का कमाल था.. नहीं तो उसका लौड़ा छिल जाता। थोड़ी देर बाद कल्लू ने लौड़ा पूरा बाहर निकाल लिया।
गुड़िया-आह.. क्या हुआ भाई.. निकाल क्यों लिया.. थक गए क्या?
कल्लू- अरे नहीं मेरी जान.. जितना आयल लगाया था.. वो तेरी गाण्ड पी गई.. अब थोड़ा और लगा के डालूँगा..
गुड़िया- उफ्फ.. भाई जल्दी से पेल दो आप मेरी गाण्ड मार रहे हो और मेरी चूत में खुजली शुरू हो गई है।
कल्लू- सबर कर मेरी गुड़िया.. आज तेरी सारी खुजली मिटा दूँगा मैं..
इतना कहकर कल्लू ने पूरे लौड़े पर अच्छे से तेल लगाया। उसके बाद गुड़िया की गाण्ड को हाथ से खोलकर उसमे तेल पेल दिया.. ताकि पूरा लौड़ा आराम से अन्दर चला जाए।
तेल की बोतल साइड में रख कर कल्लू ने लौड़ा गाण्ड में घुसा दिया और धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा, गुड़िया मस्ती में गाण्ड पीछे धकेल कर चुदने लगी।
तभी कल्लू ने जोश में ज़ोर का झटका मार दिया और पूरा लौड़ा जड़ तक गाण्ड में समा गया और इसी झटके के साथ गुड़िया बिस्तर पर गिर गई, उसके साथ-साथ कल्लू भी उसके ऊपर गिर गया।
पूरा लौड़ा जब गाण्ड में गया तो गुड़िया के मुँह से ज़ोर की चीख निकल गई.. मगर जल्दी ही उसने बिस्तर में मुँह छुपा कर अपनी चीख को दबा लिया.. उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
कल्लू को भी ये अहसास हो गया कि गुड़िया को कितना दर्द हुआ होगा.. क्योंकि शुरू में तो वो प्यार से लौड़ा घुसा रहा था.. मगर अचानक ही पूरा लौड़ा एक साथ गाण्ड में चला गया तो दर्द होना लाजिमी है।
कल्लू कुछ देर वैसे ही गुड़िया के ऊपर लेटा रहा.. जब उसका दर्द कम हुआ।
गुड़िया- आ आह्ह.. भइया.. मेरी जान निकाल दी आपने.. आह्ह.. अब उठो भी.. पूरा वजन मेरे ऊपर पेल रखा है..
कल्लू अपने हाथों और घुटनों पर ज़ोर देकर थोड़ा ऊपर हुआ और धीरे-धीरे लौड़ा अन्दर-बाहर करने लगा।
गुड़िया- आह्ह.. भाई.. बहुत दर्द हो रहा है.. प्लीज़ अब बस भी करो.. आह्ह.. निकाल लो ना.. आह्ह.. मैं मर जाऊँगी..
कल्लू- अरे अब तो पूरा अन्दर घुस गया.. अब कैसा दर्द.. बस मुझे थोड़े झटके मार कर गाण्ड को खोलने दे.. उसके बाद मज़े ही मज़े..
गुड़िया- आह्ह.. ठीक है.. आह्ह.. जो करना है आह्ह.. जल्दी करो.. मुझे ज़ोर की सूसू आई है.. आह्ह.. जल्दी करो..
कल्लू अब स्पीड से गुड़िया की गाण्ड मारने लगा। वो सिसकारियाँ लेती रही.. कुछ देर बाद लौड़ा ‘पक-पक’ की आवाज़ के साथ स्पीड से अन्दर-बाहर होने लगा।
अब गुड़िया को दर्द भी कम महसूस हो रहा था। वो झटकों के साथ उत्तेजित होने लगी थी.. उसकी चूत रस टपकना शुरू हो गई थी.. वो जोश में आ गई।
गुड़िया- आ आह्ह.. भाई.. अब दर्द कम है.. आह्ह.. अब ज़ोर से करो.. आह्ह.. जल्दी मेरी चूत की आ..आग भी आपको मिटानी है आह्ह.. जोर जोर से मेरी गांड मारो आह्ह.. फास्ट..
गुड़िया को अब मज़ा आने लगा था। वो हाथों पर ज़ोर देकर फिर से पूरी घोड़ी बन गई थी और कल्लू अब उसके कूल्हे पकड़ कर ‘दे दनादन..’ लौड़ा पेल रहा था। कुछ देर बाद कल्लू ने गुड़िया की गाण्ड में पिचकारी मारनी शुरू की.. तो गर्म-गर्म वीर्य से उसको बड़ा सुकून मिला।
गुड़िया की गाण्ड को भर कर ‘पक्क’ की आवाज़ के साथ लौड़ा बाहर निकाला और कल्लू बिस्तर पर लेट कर लंबी साँसें लेने लग गया।
गुड़िया की गाण्ड से वीर्य टपक कर बाहर आने लगा.. वो भी कल्लू के बराबर में लेट गई।
गुड़िया- क्या भाई.. आज तो आपने हद ही कर दी.. मेरी जान लेने का इरादा था क्या.. कितनी ज़ोर से गाँड में लौड़ा घुसाया.. मेरी जान निकाल दी आपने।
कल्लू- अरे यार वो ग़लती से हो गया था.. नहीं मैं तो प्यार से ही कर रहा था। वैसे तेरी गाण्ड बहुत टाइट है.. मज़ा आ गया आज तो..
गुड़िया- आपको तो मज़ा आ गया.. मेरी तो हालत खराब हो गई ना.. अभी भी ऐसा लग रहा है जैसे गाण्ड में लौड़ा घुसा हुआ है.. और दर्द भी बहुत हो रहा है। देखो बिस्तर पर ठीक से गाण्ड टिक भी नहीं रही.. इसी लिए करवट लेकर लेटी हुई हूँ।
कल्लू- हा हा हा.. मेरी प्यारी गुड़िया. पहली बार में ऐसा होता है.. अब रोज मरवाओगी.. तो आदत पड़ जाएगी.. उसके बाद दर्द नहीं मज़ा मिलेगा।
गुड़िया- अच्छा अच्छा.. ठीक है.. अब जल्दी से उठो.. मेरी चूत में खुजली हो रही है.. इसमें डालो अब अपना मोटा लौड़ा..
कल्लू- थोड़ा दम लेने दे मेरी जान.... अभी 5 मिनट में लौड़ा खड़ा हो जाएगा। उसके बाद ना कहना कि बस करो मैं थक गई हूँ.. तेरी चूत की प्यास मिटा कर दोबारा गाण्ड मारूँगा तेरी..
गुड़िया- हाँ मार लेना.. मगर रस मेरी चूत में ही डालना.. बड़ा सुकून मिलता है.. जब चूत में गर्म रस अन्दर जाता है।
कल्लू- अब तेरा सूसू नहीं आ रहा क्या.. गाण्ड मारने के वक्त तो बहुत चिल्ला रही थी तू?
गुड़िया- उस वक्त आया था.. अब नहीं आ रहा है।
कल्लू- जाओ कर लो.. नहीं लौड़ा अन्दर जाएगा तो दोबारा बोलोगी.. तब तक मैं थोड़ा रेस्ट कर लूँ।
गुड़िया- हाँ सही कहा आपने.. चुदाई के वक्त फिर से आ गया तो हमारा मज़ा खराब हो जाएगा।
गुड़िया जब उठी तो उसको गाण्ड में दर्द महसूस हुआ.. वो जब चलने लगी तो उसकी चाल बदल गई दर्द की वजह से.. वो कूल्हे उठा कर चल रही थी। गुड़िया गाण्ड को मटकाती हुई सीधी झोपडी के पीछे की तरफ़ चली गई।
कल्लू आराम से लेटा हुआ था तभी उसके दिमाग़ में कोई बात आई और वो उठकर सीधा झोपडी के पीछे की तरफ़ भागा तो देखा गुड़िया पेशाब करने बैठी ही थी कि कल्लू को देख कर खड़ी हो गई और चौंकती हुई बोली- ओह्ह.. भइया. ये क्या है मैं तो डर गई.. आप ऐसे अचानक आ गए?
कल्लू- अच्छा हुआ तूने सूसू नहीं किया.. मेरा भी सूसू आया है चल दोनों साथ में करेंगे.. मज़ा आएगा..
गुड़िया- हा हा हा भाई.. कुछ भी सूसू साथ में करने में क्या मज़ा?
कल्लू- तू देख तो सही.. मैं क्या करता हूँ.. मज़ा ना आए तो कहना..
गुड़िया- जो करना है जल्दी करो.. अब मुझसे रुका नहीं जा रहा.. बड़े ज़ोर का सूसू आया है।
कल्लू निचे बैठ गया और गुड़िया को करीब खींच कर अपनी जाँघों पर बिठा कर उसके मम्मों को चूसने लगा। उसका लौड़ा एकदम कड़क हो गया.. तो उसने गुड़िया की चूत पर लौड़ा टिका दिया और हल्का सा अन्दर पेल दिया।
गुड़िया- आह्ह.. भाई क्या कर रहे हो.. पहले सूसू तो करने दो.. आप बाद में आराम से चोद लेना।
कल्लू- मेरी जान.. मैं चोद नहीं रहा हूँ.. अब तू ज़ोर लगा के सूसू कर.. देख कितना मज़ा आता है..
गुड़िया को बात समझ आ गई.. तो वो मुस्कुराने लगी और अपने भइया के गले में हाथ डालकर एक किस कर दिया।
कल्लू- अब सूसू करो.. मैं धीरे-धीरे तुम्हारी चूत में लौड़ा डालूँगा.. बहुत मज़ा आएगा।
गुड़िया ने सूसू करना शुरू कर दिया उसकी चूत से सीटी की आवाज़ निकलने लगी.. उसकी गर्म-गर्म सूसू कल्लू की जाँघों पर लगी.. तो उसको बहुत मज़ा आया और उसी पल कल्लू ने भी सूसू की धार गुड़िया की चूत में मार दी। गुड़िया एकदम से चिहुँक सी गई.. उसको चूत में अजीब सा अहसास होने लगा।
जब दोनों सूसू कर चुके तो एक-दूसरे को देख कर हँसने लगे।
गुड़िया- हा हा हा भाई आपकी सूसू कितना गर्म थी.. मेरी चूत की सिकाई हो गई.. थोड़ा सा गाण्ड में भी कर देते तो मज़ा आ जाता।
कल्लू- तेरी चूत से कौन सी कोल्ड ड्रिंक बाहर आई है.. वो भी गर्म ही थी और तेरी गाण्ड वाली इच्छा भी दोबारा में पूरी कर दूँगा।
गुड़िया- भइया आपकी पूरी जाँघें और पेट सूसू से सन गया है.. पहले नहा लें.. उसके बाद झोपडी में जाएँगे.. नहीं तो पूरा बिस्तर खराब हो जाएगा और बदबू भी आएगी..
कल्लू- ठीक है मेरी जान.. लेकिन ऐसा मत कहो कि बदबू आएगी.. ये तो अमृत है.. मेरा तो दिल करता है तेरी चूत से निकला इसका एक-एक कतरा पी जाऊँ।
गुड़िया- छी: छी: कितने गंदे हो आप.. सूसू पीने की बात कर रहे हो..
कल्लू- अरे मजाक कर रहा हूँ मेरी जान।
गुड़िया- अच्छा अब बातें बंद..।पहले मेरी चूत की खुजली मिटाओ भइया।
कल्लू:ठीक है गुड़िया।लेकिन एक शर्त पर मैं जैसे जैसे कहूँगा।तुम करोगी।देखता हु इस चुदाई में तुम जीतती हो या मैं।
कल्लू:गुड़िया आ थोडा मेरा लंड चूस दे मैं तुझे गोद में उठाकर चोदना चाहता हूँ।
गुड़िया कल्लू के आगे बैठ जाती है और उसके लंड को पहले जीभ से चाटने लगती है।फिर वह लंड को पूरा मुँह में लेकर चूसने लगती है।
कल्लू:गुड़िया अब तो तू लंड चूसने में पूरी एक्सपर्ट हो गई है।आ मेरी गोद में और अपनी चूत मेरे लंड पर रखकर बैठ जा।गुड़िया अपने भैया की गोद में चढ़कर अपने कोमल हाँथो से कल्लू भइया के लंड को अपनी रसीली चूत में सेट करती है और उसपर बैठ जाती है।कल्लू का लंड गुड़िया की गीली चूत में जड़ तक घुस जाता है।
अब कल्लू गुड़िया को गोद में उठाकर खेत में घुमा घुमा कर चोदने लगता है।कुछ ही देर की चुदाई में गुड़िया पूरा गरम हो जाती है और गोद में ही अपने भइया के लंड पर कूदने लगती है।
फिर कुछ देर बाद कल्लू गुड़िया को गोद से उतारकर कुतिया बना देता है।पीछे से अपना मोटा लंड अपनी छोटी बहन की चूत में पेल देता है।फिर वह गुड़िया के दोनों पैर को ऊपर उठा देता है और गुड़िया को हाथों के बल आगे चलने को कहता है।गुड़िया कुतिया बनी अपने दोनों हाथों के बल आगे चलने लगती है।और कल्लू पीछे से अपना लंड पेलता जाता है।
अब गुड़िया को पुरे खेत में कुतिया बना कर दौड़ा दौड़ा के पेलता है।आधे घंटे की जबरदस्त चुदाई के बाद गुड़िया झर जातो है तब कल्लू अपना लंड गुड़िया की चूत से निकालकर उसे सामने बिठा देता है और पूरा वीर्य गुड़िया के पुरे शरीर पर गिरा देता है।गुड़िया का बदन कल्लू के वीर्य से भीग जाता है।
गुड़िया:भइया देखो तुमने मुझे पूरा गन्दा कर दिया।चलो अब नदी में नहाकर आते है।मेरा पूरा बदन गन्दा हो गया है।
कल्लू:ठीक है गुड़िया चलो।लेकिन पहने कपडे तो पहन लो।गुड़िया अपना टॉप और स्कर्ट पहन लेती है और दोनों नदी के तरफ चल देते है।
गुड़िया:अरे भइया मई तो भूल ही गई थी की जब तुम माँ को तैरना सिखाने लाये थे तो क्या क्या किया।माँ के मोटे मोटे गांड का मज़ा लिया की नहीं।
कल्लू:अरे गुड़िया ।बहुत मज़ा आया माँ के साथ।जब माँ को नंगा करके तैरना सीखा रहा था।तो गहराई में जाने पर जब माँ मेरे लंड पर चढ़ गई थी तो मैंने धीरे से अपना लंड माँ की गदराई चूत में घुसा दिया था।फिर तो माँ इतनी गरम हो गई थी की मेरे गोद में चढ़कर एक घंटे तक अपनी चूत चुदवाती रही।
गुड़िया:सच भइया माँ बहुत चुद्दकड़ है।अब तो तुम्हारे मज़े ही मज़े है।जब मैं शहर चली जाउंगी तब माँ को खेतो में नंगा करके चोदते रहना।
कल्लू:हाँ मेरी गुड़िया।माँ की बात करके तूने फिर से मेरा लंड खड़ा कर दिया।चल अब नदी आ गई है।हमदोनो नंगे नहाते है।तू मेरी गोद में चढ़ जा।आज तुझे भी माँ की तरह चोद दूँ।
गुड़िया अपने कपडे उतार कर पूरी नंगी हो जाती है।कल्लू भी नंगा हो जाता है और गुड़िया को गोद में उठा लेता है।फिर अपना लंड गुड़िया की चूत में पेल देता है और दोनों गर्दन भर पानी में चले जाते है।कल्लू अपनी बहन के रसीले होठो को चाटने चूसने लगता है।और निचे से लंड को धीरे धीरे गुड़िया की चूत में पेलने लगता है।
गुड़िया भी अपने भइया के चेहरे को चाटने चूसने लगती है।अपने चूंचियों को अपने भैया को चुसाने लगती है।दोनों को कितना मज़ा आ रहा है।
आधा घंटा पानी में मस्ती करने के बाद दोनों की उत्तेजना बढ़ गई और वहीं कम पानी में लाकर कल्लू ने गुड़िया को हाथ के सहारे घोड़ी बनाया और उसकी चूत में लौड़ा घुसा दिया और स्पीड से चोदने लगता है।
गुड़िया- आ आह्ह..पेलो भइया.. आह्ह.. आह्ह.. जोर जोर से.. आइ.. आह्. आह्ह.. उई.. मजा आ रहा है।
गुड़िया की बातों से कल्लू को और जोश आ गया, वो उसकी कमर पकड़ कर ज़ोर से चोदने लगा।
दस मिनट में गुड़िया की रसधार बह गई.. मगर कल्लू तो अभी बाकी था.. वो कहाँ रुकने वाला था। वो ‘दे दना दन’ चोदता रहा पेलता रहा।
गुड़िया- आ आह्ह.. भाई.. आह्ह.. चूत ही आ आह्ह.. मारते रहोगे क्या.. आ आह्ह.. दर्द होने लगा है.. अब तो गाण्ड भी खुल गई है.. तो उसमें पेल दो न..
कल्लू- हाँ मेरी रानी.. मन तो मेरा भी तेरी गाण्ड मारने का ही है.. मगर मैं तुम्हारे कहने का वेट कर रहा था।
इतना कहकर कल्लू ने लौड़ा चूत से निकाला और गुड़िया के गांड पर थूक लगा दिया और ‘ठप’ से पूरा लंड एक साथ गाण्ड में घुसा दिया।
गुड़िया- ऐइ.. मर गई रे.. आह्ह.. भाई आराम से डालो ना.. आह्ह.. आज ही तो गाण्ड की ओपनिंग हुई है.. आह्ह..
कल्लू- क्या करूँ जान.. तुम्हारी टाइट गाण्ड को जल्दी से खोलना चाहता हूँ मैं ताकि फिर तुम्हें तकलीफ़ ना हो।
कल्लू स्पीड से गुड़िया की गाण्ड मारने लगा।
करीब 20 मिनट बाद गुड़िया दोबारा गर्म हो गई.. उसकी चूत फिर से रिसने लगी और कल्लू का लौड़ा भी अब आग उगलने को बेताब था.. तो उसने लौड़ा गाण्ड से निकाल कर चूत में घुसा दिया।अब तो कल्लू कभी अपना लंड अपनी बहन की चूत में घुसाता तो कभी गाण्ड में घुसा के पेलने लगता।गुड़िया भी किसी रंडी की तरह गरम हो गई थी ।
वह भी अपनी गांड और चूत दोनों मस्ती में चुदवा रही थी कुतिया बनके।कल्लू ने तेज तेज धक्के मार मार के गुड़िया के गांड और चूत के छेद को पूरा फैला दिया था। जल्दी ही उसका लावा फूट गया.. उसके साथ साथ गुड़िया भी झड़ गई।
गुड़िया- आह्ह.. उफ़फ्फ़.. मज़ा आ गया भाई.. आपके रस से चूत को सुकून मिलता है.. आह्ह.. आज तो मज़ा आ गया।
कल्लू- उफ्फ.. मज़ा तो मुझे आ रहा है तेरी चूत और गाण्ड इतनी टाइट है कि क्या बताऊ हमेशा चोदने का दिल करता है।।
गुड़िया- हाँ भाई.. जितना चोदना हो.. चोद लेना।
कल्लू- हाँ सही कहा.. चल अब तेरी एक इच्छा और पूरी कर देता हूँ.. बड़े ज़ोर का सूसू आई है.. तेरी गाण्ड में गर्म सूसू करके तुझे मज़ा देता हूँ.. तू भी क्या याद करेगी अपने भाई को.. चल घोड़ी बन जा जल्दी से..
गुड़िया घोड़ी बन गई.. कल्लू का लौड़ा पूरा तो कड़क नहीं था.. मगर उसने दोनों हाथों से गुड़िया की गाण्ड को फैला कर लौड़े का सुपारा गाण्ड में फँसा दिया और ज़ोर लगा कर सूसू करने लगा।
गुड़िया- आह्ह.. भाई.. कितना गर्म है.. मज़ा आ गया आह्ह..।
फिर दोनों एक दूसरे को नहलाते है।फिर दोनों शाम को घर आ जाते है।
अब कल्लू बहुत खुश था।उसकी बर्षो की इच्छा पूरी हो गई थी।उसके गाँव की नदी के कारण ही उसे उसकी माँ बहन और चाची की मस्त चूत और गांड मिली थी।
समाप्त समाप्त
समाप्त
समाप्त
समाप्त समाप्त
समाप्त
 

meenashah6162

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Ab hum bacchhe bhi toh nahi rahe...







Mera naam Veena hai. Meri Kanpur mein shaadi hui aur main do saal se wahin apne pati aur saas sasur ke saath reh rahi hoon.

Mere pati America mein job kartein hain aur in dino main apne ghar aayi hoon. Meri sasural ki baatein bhi aage aayengi, par iss samay main aapko apne ghar ke baare mein bataati hoon.



Mere ghar mein mere pitaji aur maa, Deepak aur Devika hain. Dono honge 48 ke. Unke alaawa mera ek chhota aur ek bada bhai hai. Chhote ka naam Prem hai aur bade ka naam Pulkit hai. Pulkit ki shaadi ho gayi hai aur uski patni ka naam Priya hai.



Maa aur pitaji mere aane ka intezaar kar rahe thhe, abhi bacchha nahi hua thha. Ghar mein acchhe acchhe pakwaan bane thhe. Pakwaan toh Priya aur Sushila hi banaati, Sushila hamaari naukraani. Woh vidhwa hai, tees ki.



Maa aur pitaji ne aav bhagat kiya, Prem bhi mujhe dekhke bahut khush thha, Pulkit aur Priyanka bhi khush thhe. Ghar bada thha aur sab ke kamre alag thhe.



Par shaadi tak main aur Prem ek saath hi sote thhe. Dosti thhi hum mein, ek hi saal ka farak thha dono mein. Raat ko ghanton baat kiya karte thhe.


Raat ka khaana khaake Prem aur main jhatt se apne kamre mein chale gaye, Priyanka ne bahut zid ki ke main aaj raat unke saath soun, par Prem se bahut saari baatein karni thhi.



dono room mein jaate hi bistar pe baitth gaye, aamne saamne, Prem toh bahut zyaada hi uttejit thha mujhe updates dene aur lene ke liye. Hum dono ki baat hi kuch alag thhi.


Prem: Didi..Tumne vaada kiya thha jaldi aaogi..Iss baar chhe mahine ke baad aayi ho..
Main: Woh sab chhod, Komal kaisi hai..?
Prem: Komal ko maaro goli..Vivek kaisa hai..Contact hai tum dono ka..?
Main: Paagal hai kya..Woh sab shaadi se pehle thha..Ab toh uski bhi shaadi ho gayi hai..Aur Shekhar uski yaad nahin aane deta hai..
Prem: Acchha toh jijaji ke rang mein rang gayi ho tum..
Main: Aur nahin toh kya, aur Komal ko goli kyun maaroon, kya hua..?
Prem: Arre kuch nahin..Mass communications padhne Mumbai gayi hai..Long distance ho gaya hai..Maine keh diya koi pasand aa gaya toh tension nahin lena..Main bhi apna raasta naap loonga..
Hum dono hans baitthhe, woh abhi bhi aisa hi thha, tension free, na leta thha na deta thha. Agar mera bhai nahin hota toh usi se shaadi karti.
Main: Toh aaj kal kar kya rahe ho..?
Prem: Arre..Graduation kar raha hoon aur kya..
Main: Arre buddhu, Komal nahin hai yahaan, toh..
Prem: Toh..Oh Oh samjha..Didi tum bhi na..Kya karoon bolo..Apne haath mein thodi thha..
Main zoron se hans padi.
Prem: Arre kya hua..
Main: Tumhaare hi toh haath mein hai..Ab usi se kaam chalaao..
Prem: Didi..Double meaning toh koi tumse seekhe..
Main: Acchha sun, yeh saadi se nikalti hoon aur apni aukaat mein aati hoon..Shorts aur T-Shirt..Aur tu kya yeh old fashioned pyjama kab se pehenne laga..
Prem: Jaa tu change kar, meri tension mat le..
Main utthke washroom chali gayi, paanch minute mein baahar aayi toh Prem andar jaane ko utaawala thha.
Main: Arre..Tujhe lagi hai kya..
Prem: Aur nahin toh kya..? Kitna time laga liya..?
Main darwaaze se hati aur use andar jaane diya, woh kuch second baad hi darwaaza khola, main wahin khadi thhi, main use dekhke muskuraayi.
Main: Kya hua..Ho gaya..
Prem: Didi..Chhed mat..De na..
Main: Moot le..Phir baahar aa, mere saamne hi kar joh itne saal karta thha..
Prem: Didi hum yeh baat kar chuke hain teri shaadi se pehle naa..
Main: Jaa na..Aur jaldi aa..Phir joh tu bol..
Woh andar jaake lauta, main bistar pe baitthi thhi, maandi daal ke, woh ek naaraaz bacchhe ki tarah mere saamne aake baitth gaya, maine apni chaddi, joh mere haath mein chhupi thhi, use de di, usne nahin liya.
Main: Arre le na..Soongh le..Tu isi ke liye andar bhaaga thha na..
Prem: Didi..Itna obvious karne ki zaroorat nahin thhi..Jab tujhe sab pata hai toh..
Main jhatt se palatke uske god mein baitth gayi aur apni chaddi uski naak pe laga li.
Main: Le soongh le..Naaraaz mat ho..Mazaak nahin kar sakti kya terese..
Prem: Ab chaddi soongha rahi ho aur god mein bhi baitthi ho..Utthna..
Main: Kyun..Neeche tambu ban raha hai kya..
Prem: Banega na didi..Shaadi ke baad badal gayi ho..
Main: Acchha woh kaise..
Prem: Yaad hai tumne mujhe tumhaari chaddi soonghte huey pakda thha..Tum bahut naaraaz thhi..Baat nahin kiya mujhse na jaane kitne din..Phir jab baat shuru hui toh kitna daanta..
Main: Us samay nahin pata thha ke tu bada ho raha hai..Sexual feelings aa rahein hain tere mein..Hum dono sirf baarah ya teraah ke toh thhe..Par jab samajh aayi ke tu aisa kyun karta hai toh change hui na main..tujhe baad mein kabhi sawaal kiya..
Prem: Nahi..Nahin kiya..Par ab toh god mein se utro..
Main: Sharmaata hai mere se..
Prem: Tere se hi toh nahin sharmaata..
Main: Toh baitthne de na..Acchha lagta hai..
Prem: Kyun jijaji sek nahin rahein hain kya..
Main: Saale woh yahaan hain kya..Sekne ke liye..Aur sekna sekna kya lagaaya hai..Ab toh tu bhi bada ho gaya hai..Seedhe baat kar na..
Maine apna haath uski gardan mein baandh liya.
Prem: Unka kitna lamba hai..
Main: Chhe inch hai..Aur tera..
Prem: Saadhe saath..
Main: Pata hai..
Prem: Kaise..
Main: Gadhe..Bhool gaya..Jab tu aur Komal college bunk kar ke yahaan aaye thhe..Komal ke moonh mein kya thha..
Prem: Toh tu ne darwaaze se naapliya kya..
Main: Nahin baba usne bataaya..Hum un dino Vivek aur tera compare karte thhe..
Prem: Kitne bure thhe na tum dono..
Main: Bure toh thhe..Acchha yeh bata, bhabhi aur Bhaiyya ka kaise chal raha hai..
Prem: Main kya dekhne jaaunga un dono ko..
Main: Acchha..Bada acchha ban raha hai..Tu meri chaddi soonghta hai, toh bhabhi ki nahin soonghega..Bata..Un dono ko dekha hai kabhi..
Prem: Tub hi naa..Haan dekha hoon..
Main: Aur..Kaise lagi..
Prem: Mast hai..
Main: Ab aaya na utth pahaad ke neeche..
Prem: Merautth toh tere pahaad ke neeche dabb raha hai, use toh aazaad kar..
Main phir hans padi.
Main: Acchha bata na..Uski chaddi soongha..
Prem: Soongha..
Main: Bas pakde mat jaana..
Prem: Pakda gaya..
Main: Kya..Phir..Kya hua,..Bhaiyya ko pata chala..
Prem: Nahi..Bhabhi ne sambhaal liya..
Main: Bata na kya kaha..
Prem: Bhabhi bahut acchhi hai yaar..Samajhdaar hai tere jaisi..
Main: Toh tujhe ab roz soonghne deti hai..
Prem: Nahin roz nahin..Jab bhi dil karta hai..
Main: Teri toh nikal padi yaar..Kaise lagta hai uski chaddi soonghke..Mere jaisi..
Prem: Hmmm..
Main: Kya hmmmm saale..Daba dungi neeche..
Prem: Daba toh rahi hai..Aur kitna dabaayegi..
Main: Tujhe bhi toh acchha lag raha hai na..
Prem: Haan baitthe reh..Mera kya jaata hai..
Main: Bata na..
Prem: Mast hai, tere jaise hi..
Main: Blue film hai koi phone mein..Ya laptop mein..
Prem: Hai..Nayi bahut download ki thhi..Par chhod na..Ab maza nahi raha unmein..
Main: Kyun ab asli cheez ka taste aa gaya hai kya..?
Prem: Aisa kuch bhi nahin hai didi..Par ab bas, maza nahin raha..
Main: Theek hai..Acchha, hum kahaan thhe, Bhabhi pe..
Prem: Main bhabhi pe kabhi nahin thha..
Hum dono hans pade.
Main: Acchha..Ab samajh mein aaya tu blue film ab kyun nahin dekhta..Ab asli film dekhta hai na..Bhaiyya aur bhabhi ki..
Prem: Aur bhi bahut kuch hai yahaan dekhne ko didi..
Main: Matlab..Aur kaun..Maa Pitaji..? Woh abhi bhi active hain kya..?
Prem: Pehle se bhi zyaada..Bhaiyya se active toh Pitaji hain..
Main: Aur unka kitna lamba hai..
Prem: Saat tak hoga..Bhaiyya ka bhi utna hi hai..
Main: Toh iska matlab hai tu sabse lamba hai..
Prem: Tu bhi na..Lamba..Lamba kar rahi hai kab se..
Main: Acchha sun..Jab agli baar bhaiyya bhabhi ya maa Pitaji ka scene chale, toh mujhe bhi bataana..
Prem: Arre tu kya mere jaisi hai..Teri toh shaadi ho gayi hai na..Toh tujhe in sab mein kyun interest hai..
Main: Buddhhu..Mera pati hai door mujhse..Dialogue yaad hai na..Sher ke moonh mein khoon lagna..Toh bas yehi samajh..
Prem: Chal ab utthh..
Main utth ke koni ke bal let gayi, Prem utthne se sharma raha thha.
Main: Arre utth ke yahaan aa, aise let ke baatein karenge..
Prem: Aar aha hoon..Jaldi kya hai baba..
Main: Aankhein bund kar loon..?
Prem: Dekh toh sab liya hai na..Ab kyun aankhein bund karegi..
Main: Toh phir sharma kyun raha hai..Aa jaa..Let mere paas..
Prem apna latakta tambu utthaake meri tarah mere saamne let gaya, apni koni pe, main jaan boojh kar aura age aa gayi, woh thoda peecchhe sarka, maine sharaarti muskuraahat di use.
Prem: Yahaan kya sataane aayi ho mujhe..
Main: Arre nahin baba..Tu ek kaam kar, bathroom jaa aur kaam khatam kar le, phir baatein kartein hain..
Prem: Nahi rehne de..Baad mein kar lunga..
Main: Acchha sun, tu ne bhaiyya bhabhi ko kya kya karte dekha hai..
Prem: Wohi joh tu ne mujhe aur Komal ko karte dekha..
Main: Matlab full on..Oral sex aur sab kuch..
Prem: Aur nahin toh kya..Tujhe kya lagta hai apne maa pitaji peecchhe hain iss kaam mein..
Main: Matlab..Maa pitaji bhi..Kya bol raha hai tu..
Prem: Maine toh pehle hi kaha, woh dono zyaada active hain..
Main: Toh tu kisko dekhna zyaada pasand karta hai..
Prem: Joh pehle kaam pe laga, uski dekh leta hoon..
Main: Bhaiyya bhabhi ko khush nahin karte kya..
Prem: Main kya jaake poocchhoon unse kal..Tu bhi na kaise sawaal karti hai..Mujhe kaise maaloom hoga..
Main: Arre buddhhu samajh mein aata hai..Bhabhi tujhe apni chaddi soonghne deti hai..Matlab..
Prem: Matlab kya..?
Main: Matlab, yehi ke, woh khul gayi hai tujhse..Agar woh bhaiyya se khush hoti toh aisa nahin karti..
Prem: Arre baba tu apne andaaze mat laga..Mujhe un dono ke beech nahin padhna..
Main: Toh tu kya sach mein Komal ka intezaar kar raha hai..
Prem: Jab tak koi acchhi nahin lagti tab tak..
Main: Aur tujhe kya lagta hai, woh rukegi tere liye..
Prem: Dekh didi..Main uski marzi ka maalik nahin hoon, woh khud hai..Na woh meri marzi ki..Joh hoga dekha jaayega..Abhi se soch ke tension kyun le..
Main: Kaash tu mera bhai nahin hota re..
Prem: Toh kya karti..
Main: Shaadi aur kya..Pata leti tujhe..
Prem: Maa pitaji ne tera yeh plan fail kar diya..Sorry..
Maine uske gaal ko kheench liya, dono ki thodi masti mein haatha paayi hui, phir hum seedhe ho gaye, uska tambu bhi ab normal ho gaya thha.
Main: Tu par ghar ke sex scenes dekhta kaise hai..
Woh ek dum se muskuraane laga, maine uska chehra padhne ki koshish ki.
Main: Bata na..Bhaav kyun khaa raha hai..Darwaaze se ya koi khidki se..
Prem: Apne kamre se..
Main: Matlab..
Prem: Matlab..Hmmmm..
Maine ab uske gaal pe zordaar chumti kaati aur ek dum uske badan se satt gayi, mere honth uske honthon ke bilkul kareeb thhe, usne bhi meri kamar pe haath rakh diya thha, hamaare badan ek dusre ke badan ko chhu rahe thhe.
Main: Bataana..Kaise dekhta hai yahaan se tu..
Prem: Bataata hoon..Par kisiko bataana nahin, samjhi..
Main: Acchha, ab mere pe bharosa nahin hai kya..
Prem: Ruk leke aata hoon..
Woh bistar se utthaa aur apna laptop le aaya, khola aur maandi daalke baitth gaya, main uske na chaahne par bhi uski god mein baitth gayi, seedhe uske lund pe, usne moonh banaaya par aur kuch nahin kaha. Main gaur se dekhne lagi, woh kuch kar raha thha, phir ek button dabaaya aur screen pe bhaiyya bhabhi ka room aa gaya. Main hairaan ho gayi.
Main: Tu ne camera fit kiya hai sab ke room mein..
Prem: Haan..Par ye baat tere mere beech mein hai, samjhi na..
Main: Arre haan baba..Volume nahin hai kya..
Prem: Hai..
Usne volume badhaaya, bhaiyya aur bhabhi bistar pe baitthe thhe, pair lambe kiye huey, bhaiyya apne laptop mein kuch kaam kar rahe thhe. Aur bhabhi apna nail polish utaar rahi thhi, bistar pe baitthe huey, Prem ka chehra mere kandhe pe thha, aur uska seena meri peeth se chipka hua, aur uska baanya haath meri jaangh pe thha. Main gaur se screen dekh rahi thhi.
Main: Yahaan toh koi action hi nahin ho raha hai..Maa pitaji ke kamre mein bata na..
Usne ek button dabaaya, kamra khaali thha.
Prem: Woh dono shaayad aangan mein honge ya neeche hall mein T.V. dekh rahe honge..Tera bad luch hai..
Main: Shee yaar..Itna acchha mood thha..
Prem: Waise tension mat le, bhaiyya bhabhi ki baatein sun, badi interesting rehti hain, unke sex se bhi acchhi..
Main: Acchha..Toh suna..

Bhabhi: Suno..Kal office aate aate kuch farsan le aana..Veena ko namkeen bahut pasand hai..
Main: How sweet bhabhi..
Prem: Aage sun na..
Bhaiyya: Theek hai..Aur kuch..
Bhabhi: Kal late aane ka plan hai kya..?
Bhaiyya: Kyun..?
Bhabhi: Nahi.Woh tum pitaji ko bata rahe thhe ke tumhaari koi meeting hai late shaam ko..Office se baahar..
Bhaiyya: Woh confirm nahin hui hai..Ho jaayegi toh tumhein phone karke inform kar dunga..
Bhabhi: Jaane dijiye..Inform kar ke bhi toh late hi aayenge na..
Bhaiyya: Arre..Saaf saaf bol kya kehna chaahti hai..
Bhabhi: Sunita..
Bhaiyya: Arre yaar teri sui wahin atki hai abhi tak..
Bhabhi: Tumhaari bhi sui wahin atki hai na..
Bhaiyya: Aisa kuch bhi nahin hai..Mera phone check kar le Priya..Office phone kar le..Agar kuch mila toh mujhe bhi bata dena..
Main: Kuch problem chal raha hai kya in dono ke beech..Yeh Sunita kaun hai..
Prem: Koi nahin..Ek din bhaiyya bhabhi kisi shaadi mein gaye huey thhe..Bechaare bhaiyya ki kismat futi thhi joh unke college ki koi dost unse baat karne lagi..Woh toh bechaari phir kabhi nahi dikhi, par bhabhi ne bhaiyya ko chhedna shuru kiya..
Main: Par woh aisa..
Prem: Aage dekh na..Aaj bhabhi mood mein hai..Aage dekh..
Bhaiyya: Problem kya hai tera..
Bhabhi: Ke woh bahut khoobsoorat hai..
Bhaiyya: Arre toh khoobsoorat ladkiyaan banaana bund kar dega kya upar wala..Aur woh..Woh kaun se angle se acchhi lagi tujhe..
Bhabhi: Tum toh ghoore jaa rahe thhe uski chhaati ko..
Bhaiyya: Carrom board thha..Flat ek dum..
Bhabhi: Matlab tumne note kiya..
Bhaiyya: Arre meri maa, tu chaahti kya hai..Itni buri bhi choice nahin hai meri..Agar affair karna hoga na, toh koi acchhi se karoonga..Par milna mushkil hai..
Bhabhi: Kyun..Upar waale ne banaana bund kar di hai kya..
Bhaiyya: Tu last thhi naa..
Main: Maa kasam Prem..Bhaiyya toh ek dum romantic types hai yaar..
Prem: Bas dua kar ab light on rakhke kaam shuru ho..
Maine dekha ke bhaiyya ne laptop side mein rakh diya aur bhabhi ko peechhe se pakad ke apne upar kheench liya aur unke chuchiyaan dabaane lage, bhabhi chhatpataane lagi. Bhaiyya ne use apne neeche kiya aur side pe rakkhe huey night lamp ko bund kar diya.
Main: Beda gark..Yeh kya kar diya bhaiyya ne..
Prem: Yeh problem ka hul nahi hai mere paas..
Main: Dekh maa pitaji ka kya haal hai..
Prem ne button dabaaya, pitaji kamre mein aa chuke thhe, maa pitaji ke maathe ko chhu rahi thhi.
Maa: Maatha garam hai aapka, ek goli khaa lijiye..Aaraam milega..
Pitaji: De de..Saara badan bhi toot raha hai..
Maine dekha ki maa almaari ki taraf jaake dawai ka box nikaal li aur paani le aayi.
Main: Yahaan toh medical issue hai aur wahaan technical issue thha..
Prem: Apni apni kismat..Ab blue film toh hai nahi ke lagaaya aur shuru ho gaye..Ab tu kal toh nahin jaa rahi hai na..Dikhega..Sab dikhega..
Main: Theek hai..Tu bolta hai toh..
Usne laptop bund kar diya, hum dono apni apni jagah let gaye. Dono chit, khamosh kuch samay ke liye.
Prem: Seriously Vivek ki yaad nahin aati..
Main: Aur tujhe Komal ki..
Prem: Agar mujhe aati hai, toh iska matlab yeh samjhoon ki tujhe aati hai..
Main: Samajh joh samajhna hai Prem..Par ab baat badal toh nahin sakti na..
Prem: Shekhar ko tu ne pasand kiya..Vivek ko chhod ke..Kyun..Aaj ek baar sach bata de..
Main: Life mein calculation kar liya maine..
Prem: Matlab..
Main: Jaise tu ne kiya..
Prem ek dum se utthke mere upar aa gaya, apne dono haath mere daayein baayein rakhke mera chehra dekhne laga.
Prem: Gol gol mat ghuma didi..Seedhe bol na..
Main: Vivek ambitious nahin thha..Jahaan thha, wahaan khush thha..Pyaar bahut deta, par shaadi ke baad toh aur bahut kuch ki zaroorat padhti hai na..
Prem: God didi..Dhokha kiya uske saath..Maine toh..
Main: Maine toh kya..Tu ne samjha ke hum dono mein jhagda hua thha..Yahi na..
Prem: Shit didi, tumne uska dil toda..
Main: Use samjhaane ki bahut koshish ki..IAS ke exam’s seriously leta nahin thha..Classes bunk karta thha..Apne pita se jhagda karke bike li thhi usne, unhi ke paise se..Uske phone bills main chukaati thhi..Jab Shekhar ka rishta aaya, maine shaadi ek saal ke liye taal di..Woh teesri baar bhi fail hua..I had no choice..
Prem: Aur tum yeh sab se mera connection..
Main: (Smiling): Tu mere jaisa hi hai buddhu..Calculation tu ne bhi kiya..Komal ne F.Y.B.Com mein hi padhaai chhod di..Phir koi catering college join kar li..Phir use chhod ke fashion designing, aur ab Mass communication..Apne pita ko nanga kar diya apni padhaai ke chakkar mein usne..Aur jab usne force kiya tujhe shaadi karke Mumbai jaane ke liye, tu ne calculation kar li..Ab nange hone ki baari teri thhi..Hua na calculation..Pyaar acchha hota hai..Par pyaar aur pet mein kabhi confusion nahin hona chaahiye..Shukar hai tu mera bhai nikla..
Prem mujhe dekhke muskuraaya aur apna sar mere kandhe pe jhuka diya, main uske paas khisak gayi aur apne baayein haath se uske baal sehlaane lagi, usne apna sar uthaaya aur apni daanyi jaangh mere pair pe rakh di aur apni baanyi koni pe ho gaya, maine adjust karke apni chut uske ghutne se bhida di, usne peecche le liya apna ghutna.
Main: Rakh na..Acchha lagta hai..
Usne ghutna rakh diya, maine thoda daba diya, apni jaangh pe uska tan ta hua lund mehsoos kar rahi thhi.
Prem: Shekhar ya Vivek..
Main: Kya Shekhar ya Vivek..
Prem: Bistar mein..Aur kya..
Main: Komal ya tera daanya haath..
Hum dono hans diye. Phir maine uska gaal sehlaaya.
Main: Sach kahoon toh Shekhar..Vivek nahin..
Prem: Seriously..?
Main: Seriously..Shekhar khayaal rakhta hai..He makes me feel special..Vivek mujhe for granted leta thha..Kiss me..
Prem: Kya? Kya kaha..
Main: Kiss karne kaha..
Prem: Par kyun..
Main: Dil kar raha hai..Yaar..Kar na..Dekhna hai tu kiss kaise karta hai..Kuch aata bhi hai ya nahin tujhe..
Prem: Irritate mat kar di..
Woh hatt gaya aur apne takiye pe let gaya, ab main uspe bilkul usi ki tarah let gayi, apna ghutna uski jaangh pe Chadha di, mera ghutna uske tane huey lund ko chhu raha thha, woh thoda bichak gaya, maine phir uska lund apne ghutne se chhua.
Prem: Didi..
Main: Acchha chal nahi chhedti..Par ek baat sach sach bataayega..
Prem: Bataaunga..
Main: Meri chaddi soonghke kis ke baare mein fantasize karta hai tu..Aur sach bata..
Uski haalat kharaab ho gayi, maine aaj tak use yeh baat nahi poocchhi thhi. Soonghne bhi diya thha, par poocchha kabhi nahin thha. Woh soch mein thha, agar kisi aur ka naam leta, toh phas jaata, woh muskura diya.
Prem: Tere baare mein..
Main: Acchha..Chal abhi yeh bata ke kya fantasize karta thha..
Prem: Didi, so ne de na..Kal baat karein..
Main ek dum se uske upar aa gayi, meri chut ke dabaav se uska lund aur tan gaya.
Prem: Didi..Kya kar rahi ho..
Main: Main ab tab hi utroongi, jab tu bataaye ke tu kya fantasize karta hai mere baare mein..
Prem: Didi utthna..Dard ho raha hai..
Maine apni chut aur daba di uske lund pe.
Main: Bataayega toh hatungi..
Prem: Acchha Acchha bataata hoon..Tu side mein aa..

Main side mein aa gayi aur apna ghutna phir uske lund se chhoo liya. Meri baanyi hatheli uske gaal pe thhi, aur maine uska chehra mere chehre ke saamne kar diya thha, taaki woh meri aankhon mein dekhke mujhe sab bataaye.
Main: Chal ab bata..
Prem: Hmmmm..Bola toh..Tere baare mein fantasize karta hoon..
Main phir chadh gayi uspe, aur zabardasti uska chehra pakadke use kiss karne lagi, usne apne honth hata diye, maine uska chehra seedha kiya aur kiss karne lagi, ab usne saath diya, hum dono ab ek dusre ke honthon ko choosne lage.
Main: Zabaan de na teri..
Usne apni zabaan di, maine use ek lund ki tarah choosa, phir apni zabaan uske moonh mein daal di, hum dono French kiss karne lage, kuch second baad hamaare honth alag huey, main uske chehre ko ghoorne lagi, aur mere chehre ko.
Main: Komal paagal hai..Chal ab bataayega, ya so jaayega..
Prem: Sach bataaunga..
Main: Utar jaaun..?
Prem: Nahin..Aise hi reh..
Main: Acchha..Kyun? Maza aa raha hai..
Usne muskura diya, main ek kadam aage badhi, uspe aise adjust hui ke uska supaada ab mere daane pe lag raha thha.
Prem: Didi..Pyjame mein hi baarish ho jaayegi..
Main: Meri chaddi pehenega..
Prem: Kya..? Paagal ho gayi hai kya..
Main: Pehen na..Pyjame mein maza nahin aa raha hai..
Prem: Tu serious hai..
Main: Tujhe kya lag raha hai, main mazaak kar rahi hoon..Kaun aayega yahaan dekhne..
Prem: De nikaal ke..
Main: Maine short ke neeche nahin pehni hai, soonghne ke baad tu ne kahaan rakkhi..
Prem: Shaayad bistar ke neeche hogi..Giri hui..
Main us pe se hatt gayi, ek second ke liye uske tane huey lund ko dekha, hamaari nazrein mili, phir maine apne ghutnon pe palatke bistar ke neeche dekhne lagi, meri gaand uske nazron ke saamne thhi, lehraati hui, shorts mein se usko kaafi kuch dikh gaya hoga, main chaddi utthaayi aur uske paas aayi.
Main: Chal pehen le..
 

meenashah6162

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Woh uttha aur bistar se utar ne laga.
Main: Kahaan jaa raha hai..Yahin pehen..
Prem: Arre mootna hai..Aur kya tere saamne pehnu..
Main: Cheating karta hai mere saath..
Prem: Matlab..
Main: Matlab ke jab main chaddi utthaani palti thhi toh tu ne toh sair kar li na..Ab mere saamne nanga hone se sharmaata hai..
Prem: Arre..Toh kya maine jhukne kaha thha..
Main ek dum se uske daanye baanye apne pair Chadha di aur uske tane huey lund ke supaade ko apni chut pe daba di aur uske honth choosne lagi, hum dono phir se French kiss karne lage, uska daanya haath meri chuchi pe chala gaya.
Main: Daba na..Zor se..
Hum kiss karte rahe, aur woh ab meri chuchi mere T-shirt ke upar se daba raha thha, aur main apni chut uske mote supaade pe ghas rahi thhi. Woh ab bhi baittha hua hi thha aur main uspe, usne apna baanya haath meri jaangh pe rakh diya, maine apna daanya haath neeche le jaake uska lund pyjama ke upar se pakad liya, woh meri aankhon mein dekh muskura raha thha, aur main uski.
Main: Jab chance mila toh soongha kyun nahin..
Prem: Kya..
Main: Peecchhe se soongh leta..Chaddi ki zaroorat hi nahin padhti kal se..
Prem: Aaj se lagta hai soonghne ki zaroorat hi nahin padegi..Hai na..
Main: Tu ne hamesha isi ke baare mein fantasize kiya hai na..
Prem: Yeh fantasy se bhi zyaada mast hai..
Main: Pyjama utaar na Prem..Tujhe dekhna hai..
Prem: Tera haath neeche hai, khol de tu hi..
Maine uska pyjama khol diya, ab main uske ghutne pe thhi, uska pyjama utaar rahi thhi aahista aahista, jaise hi uske lund se upar jaake uska pyjama neeche utra, uska tana hua lund meri aankhon ke saamne thha. Ek dum se usne apne honthon pe ungli rakhte huey mera dhyaan darwaaze ki or kiya, main palti. Hall ki roshni darwaaze ke neeche se ek saaya saaf dikha rahi thhi. Hum dono ek dusre ko dekhe, uska lund meri mutthi mein hi thha aur hum dono ne uss saaye ko hat te dekhha.
Main: Kaun ho sakta hai..
Prem: Utar main dekhta hoon..
Main: Arre paagal..
Prem: Arre laptopm mein..Joh apne kamre mein nahin hoga..Wahi hamaare darwaaze ke baahar thha..Hatt jaldi se..
Main hati, woh bistar se utar ke laptop jaldi se khola aur Maa pitaji ke room mein dekhne laga, uska lund tana hua thha, maine uska lund mutthi mein bhar liya.
Prem: Kya kar rahi hai..
Main: Rehne de na..Tu apna kaam kar..Dekh kaun thha..
Maa Pitaji toh so rahe thhe, usne ab bhaiyya bhabhi ke room mein switch kiya. Hum dono ki nazrein dang reh gayi, bhabhi apne kamre mein enter kar rahi thhi. Bhabhi hi hamaare kamre ke baahar thhi.
Main: Tere aur bhabhi ke beech mein koi scene toh nahin hai na..
Prem: Nahin paagal..Kuch nahin hai..
Main: Toh iska kya kaam thha hamaare room ke baahar..
Prem: Kuch suna toh nahin..
Main: Kya farak padhta hai..
Main ab bhi uska lund mutthiya rahi thhi, usne laptop bund kiya aur side table pe rakh diya, aur meri taraf palta.

Prem: Tujhe kya lagta hai, bhabhi yahaan kyun..
Main: Use yeh chaahiye..
Prem: Kya? Paagal hai kya..?
Main: Kal maaloom padh jaayega..
Maine apna T-shirt utaar diya, meri chattees ki chuchiyaan aur bhure rang ke kadak huey nipple uski aankhon ke saamne thhe, usne jhatt se meri ek nipple apni do ungli mein leke meesne laga, maine apni shorts utaar di.
Main: Light off karoon..
Prem: Nahin rehne de..
Main ab palat ke uske god mein nangi baitth gayi, usne meri chuchiyaan kass ke apni dono mutthiyon mein bhar liye, maine apna haath utthhaa ke uske sar ke peecche le jaake uske baal pakad liye.
Main: Prem..
Usne mere honthon pe ek halki si pappi li.
Prem: Hmmm..
Main: Bhabhi agar..
Prem: Kya agar..Bol..Aur kal kaise pata chalega..
Main: Tu dekhte jaa..Jaise main kahoon karega toh do do milenge..
Prem: Do do..
Main: Chut..
Prem: Tu mere se..
Main: Fantasy mein toh chodta hi hain na mujhe..
Prem: Didi..Tujhe aisa kyun lagta hai ke bhabhi bhi mujhe degi..
Main: Apni chaddi soonghne deti hai..Toh chut bhi degi..
Prem ne apna ek haath meri chut pe le gaya aur uske honthon pe bade pyaar se pher raha thha.
Main: Tu uski soonghne uske kamre mein jaata hai..
Prem: Haan..
Main: Detail mein bata na kya hota hai..
Prem: Dopahar ke khaane ke time pe main unse nazrein milaata hoon, woh haan ya na mein sar hila deti hai, agar haan karti hai toh main khaana khaake uske bathroom mein jaake bistar par rakhi chaddi apne room mein laata hoon..Phir shaam ko ya agli subah lauta deta hoon..
Main: Not bad..Aur kuch try kiya hai tu ne..
Prem: Nahin..Bas yahin tak..Par kya tujhe lagta bhaiyya unhein khush nahin kar paate kya..
Main: Nahin yaar..Shekhar bhi toh mujhe khush rakhta hai..Thoda extra mile toh kya problem hai..
Prem: Mujhe bhi lagta hai woh kuch zyaada hi hot hai..
Main: Acchha sun..Usko kal nipat lenge..Ab tu yeh bata, jab tu mere baare mein fantasize karta hai toh sabse acchha kya karte huey fantasize karta hai..
Prem: Waise toh bahut kuch hai..Par..Sabse zyaada ek hi cheez se jhadd jaata hoon..
Main: Bol Na..
Prem: Ke tu bistar pe pet ke bal leti hai, aur teri taangein phaili hui hain, aur main tere peecche leta hua hoon apne pet ke bal, aur..
Main: Aur kya..Bol Na..
Prem: Mera moonh teri gaand ki daraar ke andar hai, aur main tujhe peeche se chaat aur soongh raha hoon..
Main: Chal..Acchha hai..Ab ek ek karke teri har fantasy poori kartein hain..Phir meri..
Main apne pet ke bal let ke apni taangein poori tarah se phaila di, Prem mere pairon ke beech let gaya, maine apni gaand thodi utthaa di aur Prem ne apna moonh meri chhattees ki gaand ke daraar mein ghusaake apni zabaan chalaane laga. Maine yeh toh Vivek aur Shekhar ke saath bhi nahin kiya thha, khush thhi ke mera bhai mere jaisa thha, bindaas aur ganda. Woh chaat te chaat te apni zabaan mere chut ke andar bhi ghusa raha thha, main bhi apni gaand uske moonh pe daba daba ke chuswa aur chatwa rahi thhi. Kuch der maze lene ke baad hum dono ek dusre ke saamne baitthke kiss karne lage, mera haath uske kadak lund pe thha aur uska ek haath meri chut pe aur ek haath meri chuchiyon ko dabaane mein laga thha.
Prem: Didi kya yeh sahi hai..?
Main: Kabhi kabhi sahi mein maza nahin aata..Ismein aa raha hai..Toh yehi sahi hai..
Prem: Sahi mein yaar, maza toh isi mein hai..Tu kitne din rahegi..
Main muskuraayi.
Main: Jab tak tera dil nahin bharta tab tak..
Maine ab use chit lita diya aur uske pairon ke beech chali gayi, uska tana hua lund mutthiyaane lagi aur apni zabaan uske supaade pe phiraane lagi. Usne apni aankhein bund kar li, maine aahista aahista uska lund apne moonh mein utaar liya, aur aahista aahista baahar nikaala, woh masti mein jhool gaya, phir ek baar maine use moonh mein bhar ke zoron se ab choosne lagi. Uski gotiyon ko daba ke use maze de rahi thhi, Prem ne apni taangein phaila di aur neeche se mere moonh ko chodne laga, jaise mujhe laga ke Prem ab jhad ne waala hai, maine choosna rok diya, aur uske upar aa gayi.
Main: Kaise chodna chaahta hai tu apni behen ko..

Prem: Baitth jaa didi mere lund pe..
Maine uski baat turant poori kar di, uske lund pe baitth ke uska supaada dheere dheere andar kiya, poora ghusaane ke baad main uspe jhuk gayi, mere baal uske sar ko cover kar chuke thhe, aur mere honth uske honthon ke kareeb thhe. Main apni gaand ko upar neeche karke ghas rahi thhi apni chut ko uske lund se.
Main: Maza aa raha hai..?
Prem: Yeh kaisa sawaal hai..Itna maza toh Komal aur apne haath se bhi nahin mila..
Hum dono chodte chodte hans pade.
Main: Mere boobs daba Prem..
Prem ne meri dono chuchiyaan kass ke pakad li aur baari baari dono nipples pe apni zabaan phira raha thha.
Main: Mere upar aaja Prem..
Prem mujhe apni mazboot baahon mein jakad kar bistar pe gira diya, ab meri gaand ke neeche apna takiya lagaakar meri chut pe apne lund ka supaada ghas raha thha.
Main: Yeh sab kahaan se seekha..Komal se..
Prem: Thoda usse thoda apne aap se..Thoda tu seekha rahi hai..
Main: Daal de andar..Pel de..
Prem ne mere kehne pe apna lund andar tak pel diya aur dhakke lagaana shuru kar diye, main neeche se apni gaand utthaake uska saath de rahi thhi. Beech beech mein woh mere nipples kaat leta aur main uske. Dono jhadne ke bilkul kareeb thhe. Prem ne apne dhakke badha diye aur ab uska rukna mushkil thha, main bhi jhadd chuki thhi. Prem ab mere andar hi jhadne laga, phir use kuch ehsaas hua aur usne apna lund baahar kheenchke mere pet pe baaki ka paani gira diya.
Prem: Sorry yaar..Tere andar hi,..
Main: Koi Nahin..
Prem: Arre kya koi nahin..Agar bacchha..
Main: Theherne de..Pehla bacchha waise bhi apne mama pe jaata hai..
Hum dono phirse hansne lage. Jhaddke woh mere upar gir gaya. Main uske ghane baalon mein apni ungliyaan pherne lagi.

Subah main jab utthi toh dekha ke Prem college chala gaya thha, usne ek note mere liye chhoda thha ke college chhootne ke baad woh apne friends ke saath movie dekhne jaayega, darwaaze pe khatkhataahat sunaayi di, maine khola, Sushila thhi.
Sushila: Bibiji koi gande kapde ho toh de dijiye..
Main: Maa kahaan hain..
Sushila: Maaji pados mein ek shaadi hai, wahin din bhar rahengi..Bhaiyya kaam peg aye huey hain aur chhote baba college..
Main: Kapde baad mein de dungi..Papa kahaan hain..
Sushila: Apne kamre mein hain..
Main: Acchha theek hai..Main nahaati hoon, uske baad kapde de dungi..Tu jaa..
Main nahaane chali gayi Prem ke bathroom mein, towel mein nikli aur kapde pehen liye, wahi shorts aur t shirt. Achanak mere mann mein ek khayaal aaya, maine Prem ka laptop khola aur jaise usne kiya thha waise kiya, maa aur pitaji ka kamra meri aankhon ke saamne thha, Bhabhi papa ke kamre mein chai laayi thhi, papa bistar par lete huey thhe. Bhabhi ek patli si maxi mein thhi. Bhabhi ne chai bistar ke side table par rakh diya, Papa ne koi harkat ki nahin aur bhabhi palat ke chali gayi, aur Papa bhabhi ko jaate huey ghoor rahe thhe. Uske picchhwaade ko. Maine mann hi mann socha, “Waah, Papa aap sach much ab bhi active ho”.
Maine lap top bund kiya aur socha, kyun na bhabhi se mila jaaye, dekhein toh sahi hamaari bhabhi kaisi hai, kya hai. Par ek aur khayaal aaya, aaj papa ki harkat pe sochne pe majboor ho gayi ke agar papa bhabhi ke picchhwaade ko itni gaur se dekh rahe thhe, kya woh mere saath bhi aisa karte, try karne mein kya jaata hai. Yahaan recording mein toh check kar hi sakti hoon. Main utth gayi, par phir apne aap ko dekha, T-shirt pehna hua thha, aur cleavage acchha khaasa dikh raha thha, shorts mein jaanghein upar tak khuli thhi, kya papa naaraaz hote. Pata nahi. Maine risk lene ka faisla kar hi liya, main utri papa ke kamre ki taraf.
Halka sa khatkhataayi darwaaze ko aur darwaaza thoda sa khol diya, Papa ne mujhe dekha.
Papa: Aa..Mujhe laga tu so rahi hogi..
Main andar aayi aur papa ki nazron ko dekh rahi thhi, papa ghoor rahe thhe, main ruk gayi.
Main: Main change karke aati hoon papa, yeh kuch zyaada hi..
Papa: Ab aa gayi hai toh aaja..Teri maa aane se pehle change kar lena..Aa baitth..
Main jhatt se aake bistar pe baitth gayi, papa maandi daalke mere saamne baitthe, main eek dum se apne ghutnon pe hoke papa se gale mili, papa thoda chaunke, par phir unke haath mere peethh pe padh hi gaye.
Papa: Sab theek..
Main: I missed you papa..
Hum dono alag huey, main baitth gayi.
Main: Sab theek..Aur aap..
Papa: Maze mein..Shekhar kaisa hai, aur tere saas sasur..
Main: Acchhe hain papa..Shekhar bhi phone karte rehta hai..
Papa: Dekh, tu hamaare ghar se door gayi hai, hamaare dil se nahi..Hum hamesha tere saath hain, aur Shekhar ke bhi..
Main: I know papa..
Main dekh rahi thhi ke papa mere cleavage ki taraf dekh rahe thhe, aur meri jaanghon pe bhi unki nazar jaa rahi thhi. Main thoda aur free hoke baitth gayi, apne haath apne jaanghon pe rakkhke thoda jhukke baitth gayi.
Papa: Acchha hua yaad aaya..Teri aur Pulkit ki toh ho gayi, ab Prem baaki hai..Woh, kya naam thha uska..Woh ladki..
Main: Komal..
Papa: Haan Komal..Kahaan hain woh..Aur Prem ne kuch bataaya, uske contact mein hai woh..
Main: Nahin papa..Par woh Mumbai gayi hai..Contact mein hai ya nahin, bataaya nahin..
Papa: Uski fikar hai nahin waise bhi..Suljha hua hai..Apna kuch na kuch kar hi lega woh..
Papa ki aankhein halki si geeli ho gayi, main unke kareeb gayi aur unse nazrein milaayi.
Main: Kya baat hai Papa..
Papa: Khushi ke hain..Mere teeno bacchhe acchhe hi nikle..Aur Pulkit ki patni bhi gharelu nikli..Shaayad koi acchha kaam kar hi diya thha maine apni life mein..
Itne mein papa ke kamre ke darwaaze pe kisine khatkhataaya, darwaaza khula toh bhabhi andar aayi, ek tray thha unke haathon mein, chai ka cup aur kuch toast, woh seedha muskuraate huey hamaare paas aake, tray papa aur mere beech rakh diya.
Bhabhi: Tere kamre mein gayi thhi toh Sushila ne kaha tu yahaan hai..Naashta karne ka iraada hai ya nahin..
Maine jhattse bhabhi ki kalaai pakad li.
Main: You are too good bhabhi..Chai ki itni talab thhi ke kya bataaun..
Maine toast uttha liye aur ek bite le liya.
Bhabhi: Ab apni bhaiyya bhabhi ko bhi time dogi ya bas Prem aur babuji ka haq banta hai..Hamaara nahin..
Main: Arre bhabhi..Aapke pati hai na merese chaar saal bade hain..Thoda formal rehna padhta hai unke saath..Prem apna jigri hai..Hamaare beech sab kuch chalta hai..Aap aaj raat hamaare paas aa jaao..Bade bhaiyya ek raat toh aapke bagair..
Ek dum se bhabhi aur maine papa ki taraf dekha, woh muskura ke yahaan wahaan dekhne lage. Hamaari muskuraahat chhoot gayi, Bhabhi ne mujhe jhoote gusse se dekha.
Bhabhi: Tu naashta kar le, maa ji ne tere pasand ke khaane ki lambi list di hai..Bahut kaam hai..Free ho jaaungi toh baitth tein hai, khoob saari baatein karna hai tere se..
Main: Main toh yeh naashta karke hi aapke paas aa jaati hoon rasoi mein, milke dhamaal kartein hain..
Bhabhi muskura ke chali gayi, papa mujhe khaate dekh rahe thhe, main ek chai ka sip liya, unki nazrein mere cleavage pe baar baar padh rahi thhi. Hum dono khamosh thhe, main chai pee rahi thhi, chai khatam karke main papa ke ghutne pe apni hatheli rakkh di.
Main: Papa..Vivek…Mere jaane ke baad, usne aap logon ko pareshaan toh nahin..
Papa ne sar naa mein hila diya.
Papa: Kabhi nahin..Acchha ladka thha woh..Kya kabhi usne tujhe..
Maine naa mein sar hila diya. Papa ne apni hatheli meri hatheli pe rakh di.
Papa: Kuch din ruk ke jaayegi naa, Ya..
Main: Jab tak aap bhagaaye nahin..
 

meenashah6162

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Hum dono hans pade. Maine chai ka tray utthaaya aur rasoi ki taraf chal di. Bhabhi sabziyaan saaf kar rahi thhi table pe baitth ke, pressure cooker apna kaam kar raha thha, aur rasoi ka haal dekhke aisa lag raha thha ke meri bhabhi is department mein expert hai.
Bhabhi: Aur kuch legi Veena..Maine socha khaane mein zyaada samay hai nahin, bhaari naashta deke pet bhar jaayega..
Main: Perfect thha sister in law..
Main uske saamne baitth ke matar chheelne lagi. Woh mere cleavage ko dekh rahi thhi.
Main: Kya..?
Bhabhi: Kuch nahin..
Main: Zyaada hai..
Bhabhi: Agar kisi ko problem nahin hai toh theek hai..
Main: Aapko problem hai kya..
Bhabhi: (Muskuraate huey)Mera bas chalta toh main bhi aise hi ghoomti..Apne ghar mein toh aise hi..
Main muskuraayi unka saath dete huey.
Main: Aapke mister ko problem nahin hai toh jab maa babuji nahin hote ghar mein, tab toh aap pehen hi sakte ho naa..
Bhabhi: Hmmm..Tab toh pehenti hoon..Chori chhupe..
Hum dono hans pade.
Main: Yeh shaadi vaadi ke baad na ladki ko kitne sacrifices dene padhtein hain na bhabhi..
Bhabhi: Haan..Par yeh ghar toh waise gharon jaisa nahin hai..Free hai..Babuji aur maa dono open minded hain..Meri ek saheli ki toh life hi kharaab ho gayi thhi..
Main: Really?
Bhabhi: Shaadi se pehle woh hum jaisi thhi..Aise hi kapde pehenti thhi..Shaadi aise conservative ghar mein hui ke pehle din se hi pallo lena padhta thha use..Do baar toh gir hi gayi woh saadi mein pair phasaake..Shaadi se pehle saadi kis chidiya ka naam hai use pata hi nahin thha..
Hum dono pooraani saheliyon jaise hans pade.
Main: Aur tumhaare mister..Woh kaise hain..
Maine yeh sawaal jaan boojh ke kiya thha, Prem aur bhabhi ki chaddi waali baat dhyaan mein rakhke, unse kuch jaan na chaahti thhi main.
Bhabhi: Joru ke gulam..
Hum dono phir hans pade.
Bhabhi: Mazaak kar rahi hoon..Cool hain woh..
Main: Bhai aur cool..Waah..Yeh toh aaj maaloom padh raha hai..
Bhabhi: Arre baba sach..Tera zyaada dhyaan Prem pe rehta hai na..isiliye tu unhein jaan hi nahi saki..
Bhabhi ne mere sawaal pe apna hi ek teer chala diya, ab unhein yeh jaan na thha ke mere aur Prem ke beech kya chal raha thha, unhein shak toh zaroor thha, aur shaayad isiliye woh hamaare kamre ke baahar raat ko aayi thhi.
Main: Woh toh hai..Hamaari umar mein zyaada farak nahi hai na bhabhi..Tuition mein saath jaate thhe, hamaare friends same thhe, isiliye hum bhai behen se zyaada dost hi ban ke reh gaye..
Bhabhi: Hmmm..Maa ne toh mujhe hi Prem ke liye ladki dhoondhne ka kaam diya hai..Ab tu aayi hai toh mujhe bacha dena..
Main: Prem shaadi laayak ho gaya hai kya..?
Yeh lo aur ek teer meri taraf se. Par yakeen thha ke bhabhi bhi taiyyaar thhi iske liye.
Bhabhi: Ab kamra toh tum dono share karte ho, tumhi jaano..
Maine sahi socha thha, bhabhi kum nahin thhi, teer pe teer.
Main: Haan par ab toh mera aana jaana kum hi rehta hai, saath toh aap dono ka mujhse zyaada hai..Aakhir bhabhi aur chhote devar ka rishta special hi hota hai..
Bhabhi ne bhaanp liya thha ke main bhi unse kum nahin hoon, woh muskuraayi. Chaddi waali baat ki wajah aur unka Pulkit bhaiyya se raaz chhupaana, mere liye ek task ban gaya thha, aur unhein yeh pata lagaana thha ke Prem aur mere beech kya hai, urgent mein. Na woh pehel karne waali thhi, na main. Khel toh ab shuru hua thha.

Matar ka kaam tamaam ho chukka thha, bhabhi ne pressure cooker utaar diya, kate huey pyaaz fry karne lagi, aur salad banaane ke liye, fridge se saamaan nikaala, aur table pe aa gayi.
Bhabhi: Ho hi gaya samjho..Sushila rotiyaan bana degi..Salad baaki hai, aur dal ko baghaar dena..Khaane ke baad baitthtein hain phirse..Gupshup ladaane..
Main: Bhaga rahi ho bhabhi..
Bhabhi: Haan..(Muskuraate huey)..Tere bhaiyya ka paanch minute mein phone aane waala hai..Roz saadhe baarah ka time hai..Tu bor ho jaayegi..
Main: Oh oh oh…Din mein romance aur raat mein..I’m..I’m Sorry..
Maine sorry kaha kyunki maine kuch zyaada bol diya thha, bhabhi muskuraayi aur mere paas aayi aur mere gaal pe haath rakkha.
Bhabhi: Ab samajh mein aaya tumhaare bhaiyya ke baare mein tumhaare khayaal kitne galat hain..Bade romantic hain tumhaare bade bhaiyya..Na din mein chain, aur na raat ko..
Main bhabhi ka chehra dekhte reh gayi, aakhir mein woh khul hi rahi thhi, meri baat ka woh bura nahi maani na bura maan ne ki acting ki. Acchha thha, meri bhabhi se baat karne mein kaafi maza aayega. Khaane ke baad.
Main Prem ke room mein chali aayi aur cupboard khola, upar ke drawer mein kuch album rakkhi thhi, hamaari bachpan ki yaadein. Main unhi ko dhoondh rahi thhi. Jaisa maine socha thha, Prem ne unhein waise hi sambhaal ke rakkha thha. Maine dono album nikaali, aur bistar pe aake pet ke bal let gayi, album dekhte, pooraani yaadein taaza karte. Darwaaze pe khatkhataahat hui, Papa andar aaye, main utth ke baitth gayi, unke haath mein bhi ek album thhi.
Papa: Yaad hai mere paas ek pooraana Yashica ka camera hua karta thha..
Main: Haan Papa..How can I forget, aur aap ajeeb ajeeb situations mein hamaari photos nikaalte thhe..Woh school mein mere open day ki tasveer, jab main ro rahi thhi aur maa daant rahi thhi, aapne mujhe smile karne ko kaha..
Papa: Aur tumne smile bhi kiya rote rote..
Hum dono zor se hans pade.
Papa: Aur ghar aane ke baad joh tumhaari maa ne hum dono ki haalat ki thhi..Yaad hai na..
Papa mere paas aake baitth gaye, album kholte huey.
Papa: Jab bhi aati hai album khol ke baitth jaati hai, tu inhe saath kyun nahin le jaati..
Main: Nahin Papa..In tasveeron ko yahaan aake dekhne ka ek alag hi maza hai..
Main kuch der khamosh rahi. Papa mujhe dekh rahe thhe.
Main: Papa..Har cheez badal kyun jaati hai..Bade ho jaane pe..
Papa: Niyam hai beta..Zindagi ka..Badlaav..Zaroori hota hai..Hum badhti umar ke saath alag alag kirdaar nibhaatein hain..Life goes on beta..Change is important..
Main: Haan par..Kuch cheezein hum se hamesha hamesha ke liye chhin jaati hai yeh change ke chakkar mein..
Papa: Jaise ke..?
Main: Yaad hai papa, jab hum teeno chhote thhe..Shaayad main 1st mein thhi, hum dadaji ke farmhouse pe gaye thhe..Unke taalaav pe hum teeno jaane ki zidd karne lage..Aap aur dadajee beer pee rahe thhe tab..
Papa: Haan toh..Tujhe beer peena hai..
Main: Papa aap bhi na..Kahaan se kahaan pahunch gaye..
Papa ki muskuraahat se main samajh gayi thhi ke Papa samajh gaye thhe main kya kehne waali hoon.
Main: Aap humein taalaav pe le gaye..Wahaan Pulkit bhaiyya zidd karne lage tairne ke liye, aur maa ne strict warning di thhi ke no swimming..Aapne Pulkit ko kaha ke agar uske kapde geele ho gaye toh maa ko samajh mein aa jaayega..
Papa: Toh Pulkit nanga hi kood gaya thha, aur phir tum dono bhi..
Main: Aur aap bhi..
Papa: Beer ke wajah se..
Hum dono zor zor se hansne lage. Phir main thoda serious ho gayi.
Main: Woh din toh jaise chhin hi gaye na Papa..
Papa ne mere gaal pe haath rakkha, unki koni meri chuchi ko chhu rahi thhi, main unke kareeb aayi aur unke seene se lag gayi, Papa ne mujhe apni baahon mein le liya, unke haath meri chuchiyon ko chhu rahe thhe, par na unko fikar thhi na mujhe. Unki jakad mazboot thhi aur main bhi unko pakde rahi.
Papa ne mera chehra utthaaya aur meri aankhon mein dekha, main jaanti thhi ke meri chuchiyon ka aadhe se zyaada nazaara unko mil raha hai.
Papa: (Mazaak mein): Main toh aaj bhi utar jaaun waise hi..Par tere dono bhaiyyon ko manaana padega..
Main hans padi unki baat se, unhonein apni baahein dheeli kar di, maine unhein jakad liya.
Main: Rehne dijiye na Papa..Kuch der aur..
Papa ne apni baahein tight kar li, main sarak ke unke jaangh pe baitth gayi, meri saansein unki gardan pe padh rahi thhi, meri nazar unke pyjama pe gayi. Wahaan hulchul ho gayi thhi. Maine apni gardan utthaake unki taraf dekha.
Main: Papa..Mere aise kapde pehenne se aap naaraaz toh nahin huey naa..
Papa: Meri chhod, teri maa ki fikar hai mujhe..Mujhe in sab cheezon se farak nahin padhta..
Main: Papa..Kya hum dadaji ke taalaav pe nahin jaa sakte..Phirse..
Papa: Kya hua hai tujhe..Itna sentimental kyun ho rahi hai..Koi baat hai kya..
Maine unke seene mein sar rakkhke naa mein sar hilaa diya. Unhonein mujhe aur kareeb kheench liya mujhe, unke ek haath ab meri chuchi ke neeche se uspe dabaav de raha thha. Mera cleavage uss dabaav se baahar nikal raha thha, unke chehre ke bilkul saamne.
Papa: Toh kya baat hai..Bachpan ki yaadein taaza karni hai kya..
Maine haan mein sar hila diya.
Papa: Tujhe nahin lagta, agar ab hum chaaron, nange uss taalaav mein utre, toh..
Main: Toh kya papa..
Papa: Arre tu toh serious ho gayi..Main mazaak kar raha thha..
Main: Yahi toh baat hai na Papa..Kuch cheezein chaahne par bhi hum nahi dohra sakte..
Papa aur meri nazrein ab ek dusre ki nazron mein doobi hui thhi, ek second ke liye unhone meri chuchiyon ko bhi dekha.
Main: Agar Prem aur Pulkit ne mana kar diya..Toh kya aap taiyyaar ho jaayenge mere bachpan ka ek din lautaane ke liye..
Papa meri nazron ko dekh rahe thhe.
Papa: Pata nahin..
Main unhein ghoorti rahi, aur ek dum se meri hansi chhoot gayi, unki toh jaise jaan mein jaan aa gayi ke unhein mere sawaal ka jawaab nahin dena pada. Unhonein lambi saans lete huey muskura diye.
Papa: Tu sudhregi nahin naa..Main toh..
Main hansti rahi, woh mujhe ghoorte rahe, aur unke jawaab na dene se bhi mujhe apna jawaab mil gaya thha. Papa mujhe mere bachpan ka woh din zaroor lautaate. Aur iss mein mera bhai Prem bhi saath deta. Pulkit ka pata nahin. Itne mein bhabhi ke pukaarne ki aawaaz aa gayi. Khaana taiyyaar thha.

Khaane pe sirf bhabhi, Papa aur main hi thhe. Khaane ke baad Papa utth ke chale gaye, maine aur bhabhi ne table clear kiya.
Bhabhi: Tu chal, main thodi der mein aati hoon..Aaraam toh nahi karna hai na tujhe..
Main: Na bhabhi..Late utthi..Ab kya neend aayegi..Aa jaao..Main wait karti hoon..
Main chali gayi, kuch hi der baad bhabhi aa gayi. Hum dono aamne saamne baitth gaye bistar pe.
Bhabhi: Chal bata..Kal khaane mein kya kya chaahiye..
Main: Bhabhi..Ab aap maa ki tarah baat kar rahe ho..Bahut boring..
Bhabhi: Toh tu bata..Kaise chal raha hai ghar pe sab..
Main: Maha boring..Shekhar America mein hai, babuji aur maaji satiate nahin hain, aur bas..Boring..
Bhabhi: Tu Shekhar ke saath kyun nahin gayi America..
Main: Jaaungi..Par abhi nahin..Maa thodi beemaar rehti hai..Shekhar ne toh kaha nurse rakhtein hain, par maine mana kar diya..
Bhabhi: Toh teri saas toh fida hogi tujhpe..
Main: Haan yaar..Koi aur nahin, saas hi sahi..
Bhabhi: Matlab..
Main: Arre mazaak kar rahi hoon bhabhi chill..
Bhabhi: Par..Shekhar ke bagair..Ab saal toh ho raha hoga na use jaake..
Main: Ek saal ko bees din baaki hain..
Bhabhi: Toh phir..Kaise..
Main: Bhabhi..Get to the point..Zaroori nahin hum nanad bhabhi ban ke rahein..Saheliyaan bhi toh ho saktein hain..
Bhabhi sarak ke aur aage aa gayi.
Bhabhi: Shaadi ke baad saheliyon ke saath mazaak, chhedna kitna miss hota hai na..
Main: Seriously..Main bhi bahut miss karti hoon woh sab..
Bhabhi: Aur kuch miss nahin karti..?
Maine bhabhi ka chehra dekha, bhabhi ke chehre pe ek masti bhari muskaan thhi, main bhi muskuraayi.
Main: Pata hai bhabhi, jab main school mein thhi, hum saheliyon ki ek aadat hti thhi..Hum naye dost banaate bade darr darr ke..Darr rehta ke nayi dost bharose ke kaabil hai ya nahin..Uske pet mein hamaare raaz safe hai ya nahin..
Bhabhi: Acchha..Toh kya karti tum..
Main: Hum ek game khelte..Judge karne ke liye..
Bhabhi: Kaisa game..
Main: Arre woh tab ki baat thhi..
Bhabhi: Bataana..
Main: Acchha chalo..Ab hum dono teen ki ginti pe ek naam lenge..
Bhabhi: Kiska naam..?
Main: Arre sunoh toh..Ek naam, uss vyakti ka, joh iss samay aap aur meri zindagi ko affect kar raha hai..Bahut saari cheezon se..
Bhabhi: Main samjhi nahin..
Main: Acchha example deti hoon..Samjho aapko Maa pareshaan kar rahi hai, taane de rahi hai wagairaah wagairaah..Toh aapke dhyaan mein hamesha ma aka khayaal rahega right..
Bhabhi ne haan mein sar hilaaya.
Main: Aur iska matlab hai ke woh vyakti aapko sabse zyaada affect kar raha ho..Toh aap uska naam lengi..Sahi..Woh acchha, bura, kaise bhi..Bas aapki zindagi ko iss samay affect kar raha ho..Uska naam lena theek..Aur main bhi waisa hi karoongi..
Bhabhi: Aur isse kya saabit hoga..
Main: Sach..Main samajh jaaungi aur tum bhi..Try karke dekh lo..Ginna shuru karoon..
Bhabhi: Kar..Try kartein hain..
Main: Teen pe woh naam turant bolna padega..
Bhabhi: Haan baba bol dungi..
Main: Sach sach..
Bhabhi: Sach sach..
Main: Ek..Do..Teen..
Main/Bhabhi: Prem..
Ek dum se hum dono hakka bakka reh gaye. Ek dusre ka chehra ghoorte rahe, phir dono muskuraaye.
Main: Pehle tum..
Bhabhi: Kya pehle main..
Main: Arre..Woh kaise affect karta hai tumhe..Yeh bataao..
Bhabhi: Maine bataaya thha na, ke maa ne mujhe ek kaam diya thha Prem ke liye ladki dhoondhne ka..Bas usi wajah se..
Main: Jhooth bhabhi..Naam sahi liya, par affect tumhe dusri tarah se ho raha hai..
Bhabhi: Maine toh keh diya..Ab tu bata, tu ne Prem ka naam kyun liya..
Main: Isi wajah se..Ke woh apne liye ek acchhi si ladki talaash kar le..
Bhabhi: Jhooth..
Main: Dekha na bhabhi..Game kaam karta hai..Jhooth toh tumne bhi bola..Aur maine bhi..Ek baar sach bol ke dekh lo..Shaayad hum sach mein acchhi saheliyaan ban jaayein..Nahin toh..
Bhabhi mera chehra dekh rahi thhi, aur main uska padhne ki koshish kar rahi thhi, main thoda aura age sarki, aur unki hatheli apni haathon mein le li.
Main: Bhabhi, do saheliyaan ek dusre se kuch nahin chhupaati..Hum saheliyaan ban saktein hain, baaki aapki marzi..
Bhabhi: Aur agar maine sach bataaya toh, kya tu bhi..
Main: Poora sach bataaungi..
Bhabhi soch mein padh gayi, main use dekh muskuraayi, Bhabhi pareshaan lag rahi thhi, bolun ya nahin bolun.
Main: Bhabhi..Jaldi nahin hai..Soch ke bataiyye, ya phir bataane ki bhi zaroorat nahin hai..Rishta toh rahega na hamaare beech mein..
Bhabhi: Par shaayad dosti ka nahin..Hai na..
Maine kuch nahin kaha, par use uska jawaab mil gaya.
Bhabhi: Maine ek din Prem ko meri panty soonghte pakad liya..
Bhabhi yeh kehke apna sar jhuka di, maine unhein gaur se dekha, usne apna sar utthaaya.
Bhabhi: Aur maine yeh baat kisi ko nahin kahi..Tumhaare bhaiyya se bhi nahin..
Main: Use nahin daanta..
Bhabhi: Pata nahin, maine use kyun nahin daanta..Par nahin daanta..
Main: Woh aisa karta thha toh use rokne ka dil nahin kiya..
Bhabhi ne ab mera haath apne haath mein liya.
Bhabhi: Veena..Tum yeh baat..
Maine jhatt se uske honthon pe apni ungli rakh di. Woh thoda comfortable ho gayi, halka sa muskuraayi.
Main: Bhabhi..Main ek baat sach sach pocchoon, tum jawaab dogi..
Bhabhi: Poochh le..Ab kya chhupaaungi..
Main: Tumhein Pulkit bhaiyya se satisfaction nahi milti kya..
Bhabhi: Yeh kya keh rahi hai..Pulkit mujhe poori tarah se satisfy karta hai..
Main: Toh phir..
Bhabhi: Toh phir kuch nahin..Bas aise hi..
Main: Aise hi kuch nahin hota bhabhi..Hum shaadi ke baad, poori tarah se satisfied hone ke bawajood bhi dusron ko dekhtein hain na..Aur hamaare pati bhi dekhtein honge na..
Bhabhi ne haan mein sar hilaaya.
Main: Toh jab itna keh diya, toh yeh kyun nahin keh paa rahi ho ke tum Prem se attract hoti ho..
Bhabhi ne mera chehra dekha, kuch nahin keh paayi, shaayad yeh baat woh khud se bhi chhupa rahi thhi, aaj meri wajah se woh sach ka saamna kar rahi thhi.
Main: It’s normal bhabhi..Very normal..Aur tum mera sunogi toh behosh hi ho jaaogi..
Bhabhi: Tumhaara..?
Main: Maine bhi toh Prem ka hi naam liya na..
Bhabhi: Toh kya tum apne bhai se..
Main: I know normal nahin hai..Par kya karoon..
Bhabhi aur main ab phir se chup ho gaye, uske chehre ka rang udd gaya thha, aur main soch rahi thhi key eh aage sunn bhi paayegi ya nahin. Hum kuch pal aur chup rahe, shaayad apna agla sawaal ya jawaab sochte rahe.
Bhabhi: Toh kal raat..
Main: Toh kal raat tum hamaare kamre ke baahar thhi..
Bhabhi ne aahista se haan mein sar hilaaya.
Main: Kuch dekha..
Bhabhi ki aankhein hi badi ho gayi.
Bhabhi: Dekhna chaahiye thha..
Main: Agar dekh leti toh shaayad aaj ghar mein itni shaanti nahin rehti..Hai naa..
Dono ki hansi ek dum se chhoot gayi, par yakeen toh ab bhi nahin ho raha thha use.
Bhabhi: Sach keh rahi ho..?
Maine haan mein sar hilaaya.
Bhabhi: Mujhe yakeen nahin hota..
Main: Uska lund saadhe saat inch ka hai..
Bhabhi ka toh moonh khula ka khula hi reh gaya.
Main: Saheliyaan toh aise hi baat karti hai na..
Bhabhi haan bhi kehna chaah rahi thhi aur mere baat pe dang bhi reh gayi thhi.
Main utthi bistar se aur jaake darwaaze lock kar di aur aake bhabhi ki ek taraf let gayi apni koni pe aur apne paas pade dusre takiye pe letne ko bhabhi ko ishaara kiya. Bhabhi aahista aahista meri tarah, mere saamne aadha let gayi.
Main: Tumhein acchha lagta hai jab Prem tumhaari chaddi soonghta hai na bhabhi..
Bhabhi muskuraayi, main bhi muskuraayi.
Main: Ek saal se Shekhar baahar hai..Frustrate ho gayi thhi..Socha baahar jaake pakdi gayi toh badnaami hogi dono gharon ki..Sabse acchha thha ghar ka ilaaj..
Bhabhi: Pulkit se door hi rehna..(Aur woh hans padi, thoda main bhi)..
Bhabhi: Mazaak kar rahi thhi..
Main: Acchha mazaak kar rahi thhi toh uspe bhi haath saaf kar loon..
Bhabhi: Baap re..Tu karne kya waali hai Veena..
Main: Ab main mazaak kar rahi hoon..Prem hai na..Aur main use share bhi kar sakti hoon..
Bhabhi phir dang reh gayi.
Main: Try karogi..?
Bhabhi: Arre nahin nahin..Bas utne tak hi theek hai..
Main: Chaddi soonghne tak..
Bhabhi: Haan..
Maine bhabhi ke gaal pe apna haath rakh diya, woh thoda hichkichaayi, maine apni hatheli nahin hataayi.
Main: Toh main chalungi..
Bhabhi: Matlab..
Main apne honth uske honthon ke kareeb le gayi, usne apna chehra thoda peecchhe kiya, main ruki, phir khud peecchhe ho gayi.
Main: Maine jab Prem ke saath kuch karne ka faisla kiya, toh bahut socha..Prem ko mujhse behtar koi nahin jaanta..Woh suljha hua hai..Aaj woh college chala gaya..Late aayega..Normal thha woh..Agar aaj raat ya aaj ke baad main use haath nahin lagaane doon, woh bura nahin maanega, hum pehle jaise ho jaayenge..It was safe..
Bhabhi: And enjoyable..
Main: Bahut enjoyable..Maza aa gaya bhabhi..
Bhabhi: Mere toh haath ke baal khade ho gaye..
Main: Aur mere neeche ke..
Hum dono phir hans pade, iss baar main phir bhabhi ke honthon ke kareeb gayi, iss baar woh peecche nahi hati, main muskuraayi, woh bhi muskuraayi, hamaare honth mile. Kuch der bas aise hi, halke se, bina dabaav ke, hamaare honth lage rahe. Phir main peecchhe hati.
Bhabhi: Kya aaj raat phir tum aur woh..
Main: Pata nahin..Mood ke upar depend hai..Dekhtein hain..
Maine ek chhota takiya apne pairon ke beech daba diya, Bhabhi ne dekha, muskuraayi aur dusra takiya usne daba diya apne pairon ke beech.

Main: Shaadi se pehle kabhi tumne..Mera matlab koi boyfriend..
Bhabhi: Boyfriend toh nahin..Friend hi thha..
Main: Toh uske saath kabhi kuch nahin..
Bhabhi: Bas upar upar se..Kissing wagairaah..
 

meenashah6162

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Main: Oral..
Bhabhi: Nahi..Jab tak gaadi aage badhti..Tumhaare bhaiyya ka rishta aa gaya..Aur tum..
Main: Ek thha..Vivek naam thha uska..
Bhabhi: Aur..
Main: Aur kya..Sab kuch..Shaadi se pehle taiyyaar ho gayi thhi..
Bhabhi: Aur jab Prem ki shaadi ho jaayegi toh..
Main: Tumhaara pati hai na..
Bhabhi thoda soch rahi thhi, maine sawaaliya nazron se use dekha.
Bhabhi: Mujhe koi aitraaz nahin hai..
Ab meri baari thhi dang rehne ki, mera moonh khula ka khula reh gaya.
Bhabhi: Kya farak padhta hai..Tum meri saheli ho..Kya main itna bhi nahin kar sakti..
Pata nahin mere pe kya sawaar ho gaya, maine uske honthon ko choom liya, apna haath uske sar ke peecche le jaake uske honth apne honthon se dabaaye rakkha aur aahista se apni zabaan se uske bund honth kholne lagi, usne iss baar mera saath diya, uski zabaan mere moonh mein thhi aur meri zabaan uske moonh mein, maine apna haath uske sar ke peechhe se hata ke uski daanyi chuchi pe rakh diya, usne kuch nahin kiya, hum aise hi kiss karte rahe. Ab maine uski chuchi pe halka sa dabaav daala toh uski siski nikal gayi, moonh khul gaya, maine use takiye pe lita ke uski jaangh pe apne ek pair rakh diya aur uski chuchi pe dabaav badha diya, hum ab bhi kiss kar rahe thhe. Ab usne apna daanya haath meri peeth pe phera aur mujhe apne aur kareeb le liya. Maine apne honth uske honth se hataaye aur uski aankhon mein dekha, woh bhi dekhe jaa rahi thhi.
Main: Prem kal raat ko mujhe chodte chodte tumhaari baatein kar raha thha..
Bhabhi: Kya..Kya keh raha thha..
Main: Yahi ke woh jab tumhaari chaddi soongh ke tumhaare baare mein sochke hilaata hai toh, woh jald hi jhadd jaata hai..
Maine bhabhi ke honthon pe phir apne honth rakh diye aur ek haath neeche le jaake uska maxi upar utthaana shuru kar diya, usne apna ek haath mere shorts mein ghusaane ki koshish ki, maine apne honth alag kiye.
Main: Nange ho jaayein..
Bhabhi ne haan mein sar hila diya, main utth baitthi aur apni T-shirt utaar phenki aur bistar pe khadi ho gayi, bhabhi tab tak apna maxi utaar di aur apni bra utaar rahi thhi, maine shorts utaar ke phenk diye, bhabhi ab apni chaddi utaar ke alag kar rahi thhi, main turant baitth gayi aur use lita diya, hamaari chuchi touch ho rahi thhi, main ek pair phir uski jaangh pe Chadha diya, iss baar apna ghutna uski chut pe sataake.
Bhabhi: Agar Prem college se aa gaya toh..
Main: Toh kya..Humein join karega..
Bhabhi ne kuch nahin kaha, maine phir use kiss kiya, aur apna ek haath uski chut pe le gayi aur uspe pherne lagi. Bhabhi ki chuchiyaan bhi badi thhi, par merese ek inch chhoti.
Main: Kabhi kisi ladki ke saath kuch kiya hai bhabhi..
Bhabhi: Socha bhi nahin hai..
Main: Par aisa lagta nahin hai..
Bhabhi: Beh rahi hoon..Bas..
Main: Pulkit tumhaari chut chaat ta hai..
Bhabhi: Mahine ke paanch din chhod ke..
Hum dono muskuraaye.
Main: Par woh toh tumhein paanch din ki chhutti nahin deta hoga na..
Bhabhi: Main maangti bhi nahi..
Hum phir muskuraaye aur kiss kiye. Ab maine uske chuchi ko soonghne lagi, uske kadak ho gaye nipple pe apni naak ragadne lagi, phir uska chehra dekha.
Bhabhi: Karo na..
Main phir se uske nipple ko chaat ke soonghne lagi, do teen baar aisa kar ke uske upar aa gayi aur uske dono haath uttha diye, uske bagal shaayad kal hi saaf huey thhe, maine apni naak pehle ek mein chalaayi, phir dusre mein, ab thoda neeche utri aur uske gardan pe halka sa apne daanton se kaata, usne siski li, aur main neeche utar ne lagi, uske pet pe apni zabaan pherne lagi, phir naabhi ke suraag mein apni zabaan ghumaane lagi, uska badan kaanpne laga thha, aur meri haalat bhi kharaab ho rahi thhi. Main neeche utarti gayi, ab main uske pairon ke beech mein thhi. Uski chut mere aankhon ke saamne thhi, saaf aur phuli hui, jaise ki taiyyaar ho. Usne apne pair khud hi phaila diye. Main ab uski chut ko ek inch ki doori se dekh rahi thhi. Yeh waakeyi mein andar se tight hogi. Maine apni zabaan uske honthon pe aahista se phera, uska badan kaanp uttha. Usne mere baal pakad liye aur mere honthon ko apni chut pe daba diye. Maine apni zabaan ko uski chut ke honthon ke andar uske daane ko dhoondhte huey phiraane lagi. Jaise hi maine uske daane ko chhua, uske pair upar lehra gaye, woh bistar se apni gaand utthaake machalne lagi, maine apni zabaan uske daane pe pheri, phir tezi se chalaane lagi, woh chhatpataane lagi, bekaabu, maine uske pairon ko jakde rakkha aur apni zabaan chalaaye rakkhi. Uspe yeh prahaar bhaari thha, paani paani ho gayi thhi, pasine mein lathpath uska badan bistar ko bhigaane lagaane thha. Ab manzil door nahin thhi, uske badan ke kaanpne se saaf lag raha thha ke woh kuch second hi door thhi jhaddne se. Maine chhoda nahin, dabaaye rakkha aur chalaaye rakkha apni zabaan ko. Ek dum se mere chehre pe ek garam dhaar maar gayi, maine apna chehra peechhe kiya aur uski hilti kamar ko aazaad kar diya, woh kuch second chhatpataati rahi aur uska badan jaise jhatke khaata raha. Phir woh shaant padh gayi, usne apni aankhein bund kar li aur maine apna chehra uski jaangh pe rakh diya. Kuch minute baad woh utth ke baitth gayi aur mere baalon mein haath phera, maine use dekh ke muskuraaya.
Bhabhi: Sorry..
Maine use sawaaliya nazron se dekha..
Bhabhi: Woh tumhaare moonh pe hi..
Main muskuraayi aur apna chehre upar kar diya, usne apne honth mere honth se jod diye aur choosne lagi, apne dono hathelyon se mere gaal pakde aur paagalon ki tarah mere chehre ko chaatne lagi, jaise ki apna hi paani saaf kar rahi ho, main bhi utth ke baitth gayi aur uski taangon ko phaila ke uske taangon ke beech apni taangein rakhke apni chut uski chut se sata di, woh samajh gayi aur apne haathon ke sahaare peechhe ho gayi, maine bhi waisa hi kiya aur ab dono apni chuton ghasna shuru kar diya. Bistar poora hilne laga thha.
Main: Aaaaahhhh..Bhabhiiiiiii….Prem ka soch keg has meri chut..
Bhabhi: Usi ka toh jab se soch rahi hoooooooonnn…Aaaahhhhh..Dusri baar..
Main: Ab ginnaaaaa..Bund kar…Jhaddddddte reh…Aaaaahhhhh…Ghas…
Hum dono paagalon ki tarah ek dusre ko ghase jaa rahe thhe, main toh pahunchne hi waali thhi, Bhabhi bhi kamaal ka saath de rahi thhi, mere se raha nahin jaa raha thha, maine speed badha di. Bhabhi ne bhi ishaara samajh kar apne aap ko tight kar diya aur mujhe ghasne aur jhaddne mein madad kar rahi thhi, ek dum se jaise phawwaara chhut gaya, mera badan kaanpa, mere haath dheele padh gaye aur main peecchhe bistar pe gir gayi, badan ne do teen jhatke aur liye, aur phir duniya pehle jaisi ho gayi, Bhabhi bhi apne takiye pe peecchhe gir gayi, hamaare pair ab bhi ek dusre mein uljhe huey thhe. Hamaari saansein tez thhi, par hamaara badan halka ho chukka thha. Pasine ne chaadar ko bhigo diya thha. AC ka remote door pada thha, mez par, par utthne ka mann nahin kar raha thha.

Shaam ko Prem saat baje ghar pahuncha, Pulkit bhaiyya bhi aa chuke thhe, thandi ka mausam apne rang dikha raha thha. Aangan mein toh shaam ko jaa hi nahin sakte thhe. Maa aur bhabhi ne khaana laga diya. Hum sab rasoi mein baitthke din ki baatein karte karte khaa rahe thhe. Maa pados mein shaadi ke kisse suna rahi thhi, toh Prem kisi fast food ke gun gaa raha thha jahaan uske friend ne party di thhi, toh Pulkit apne office ke kisi problem ko leke baat kar raha thha. Prem meri taraf dekha.
Prem: Arre hamaara toh chalte hi rahega..Tum sunaao..Aaj ka din kaise raha..
Main: (kharaab sa moonh banaate huey): Bahut boring..
Iss baat pe bhabhi aur meri nazrein mili, main unhein aankh maar di, woh muskuraayi. Hamaara din itna bhi bura nahi thha. In fact in sab se toh acchha hi thha. Papa ka khaana ho gaya thha. Unhone hum sab ki taraf dekha.
Papa: Angan mein baitthe sab thodi der..Kya iraada hai..
Maa: Angan mein baitthenge toh haddiyaan akad jaayengi..Raat bhar garam tel ki maalish karwaana padegi aapko..
Papa: Arre..Itne budhe bhi nahin huey hain ki Kanpur ki thandi humein ghar mein bund rakh sake..Chalo..
Maa: Sab eke k razaai leke baitthna..Kal doctoron ke chakkar nahin kaatne hain mujhe..Pados ki shaadi teen din tak chalegi, aur meri zaroorat hai wahaan..
Maine Papa ka chehra dekha, woh waakeyi mein budhe toh thhe hi nahin, par maa buddhon jaisi baatein zaroor kar rahi thhi. Mere papa toh active lag rahe thhe, par maa shaayad inactive ho gayi thhi. Bechaare Papa. Bandook mein goliyaan baaki thhi, par hawa mein unhein chalaake zaaya nahin karna thha.
Main: Prem aur mere room mein razaaiyyaan bahut hain..Hum le aatein hain, aap log chaliye..
Maa: Main chai le aati hoon..Koi peeyega..Mujhe toh talab lagi hai..
Bhabhi: Maa chai main banaati hoon..Aap babuji ke saath aangan mein jaaiyye..
Maine dekha sabko, kitna pyaara sa ghar thha hamaara, par phir bhi kuch log poori tarah se khush nahin thhe. Kuch baatein, kuch armaan ab bhi dabe huey thhe, par mere nahin, na Prem ke, aur na ab Bhabhi ke. Bache thhe toh teen aur.
Main upar kamre mein chali gayi, cupboard ke upar padi razaaiyon ko utaarne lagi, Prem bhi aa gaya, usne meri madad ki, woh mujhe dekh raha thha, maine bhi koi harkat nahin ki. Woh mujhe dekhe jaa raha thha.
Prem: Sab theek..
Main: Haan..Kyun..
Prem: Tu naaraaz lag rahi hai..
Main: Kyun..Main kyun naaraaz rahungi..
Prem: Nahin bas aise hi..
Main: Cha lab yeh uttha..Sab kaanp rahein honge neeche..
Prem ne razaaiyyaan utthaayi aur hum dono aangan mein aa gaye. Sab ko eke k de di aur bhabhi bhi chai leke aa gayi thhi. Mere liye kursi nahin thhi aur ek razaai bhi kum thhi. Main jhatt se papa ke god mein baitth gayi. Prem ne hum dono pe ek razaai Chadha di, Papa ne apne haathon se razaai ko aise chadhaaya ke hamaare dono badan ab razaai mein poori tarah dhakk gaye thhe.
Pulkit: (Jhootha gussa dikhaate huey): Bas..Iss ghar mein ya toh ise papa dikhtein hain ya phir Prem..Hain na maa..Hum toh jaise paraaye hain..Sautele types..
Main razaai utaar ke Pulkit ki taraf chal padhi.
Main: Acchha aisi baat hai na bhaiyya..Toh ab hataao razaai, main aapki god mein baitthti hoon, phir kehna mat kitna khaati hai yeh..Chaliye hataaiyye razaai..
Bhabhi mera aur Pulkit ka chehra dekh rahe thhe, Pulkit ne apne haath jod liye.
Pulkit: meri maa..Tu wahin baitth..Galti ho gayi..Yeh razaai mere liye kaafi nahin hai, tu kahaan aayegi ismein..
Main: Dekha maa..Bhaiyya ka dil hi itna chhota hai ke razaai bhi chhoti lagne lagi hai inhe..Papa ki razaai kaise barabar ho rahi hai..
Maa: Veena..Please mat ghoom aise..Ek toh maxi mein hai, woh bhi aangan mein..Thand lag jaayegi tujhe..
Main papa ke paas chali gayi, unhone razaai kholi aur main unke god mein baitth gayi, bhabhi mujhe hi dekh rahi thhi, maine unhein aankh maar di, unhonein muskuraate huey apna sar hila diya. Shaayad yeh soch ke ke main kisi ko nahin chhodungi iss ghar mein. Papa ne mujhe apne haathon se baandh diya, maine apne pair kursi pe Chadha diye thhe papa ke pairon ke beech aur apne ghutnon ko apne hi haathon se baandh liye thhe. Papa ke haath mere haath pe thhe. Main unke lund se thoda aage hi hoke baitthi thhi, taaki meri gaand unhein touch na kare. Tab tak sab theek thha. Prem ka khatam hi nahin ho raha thha, Pulkit jamaai pe jamaai le raha thha.
Maa: Pulkit.. Jaa so jaa..Kal subah office bhi toh jaana hai..
Bhabhi: Aap so jaaiyye..Main Veena ke saath baitth loongi thoda..Aaj use shikaayat thhi ke ghar mein koi nahin thha aur maine bhi use samay nahin diya..
Pulkit: Theek hai..Par dekh Veena..Sunday tak merese koi shikaayat mat karna, Sunday ko movie, lunch, dinner..Joh tu kahe, jahaan tu kahe..Cool..
Main: Mera kanjoos bhai badal gaya hai shaadi ke baad maa..Bhabhi aap great ho..
Prem: Arre le le Didi..Aisa mauka baar baar nahin aata..Bhaiyya..Par yeh treat sirf didi tak hi seemit hai yaa..
Pulkit: Maa nautanki se keh de key eh treat ghar mein sab ke liye hai..
Sab hans pade, Pulkit ne ek last jamaai khade khade li, main ab peecchhe sarak gayi, maa ki aankhein bund ho rahi thhi, aur yahaan shaadi thandi nahin, meri gaand ki wajah se papa ka lund tan raha thha. Maine bhi apne pairon ko papa ki tarah fold kar diye. Papa ne apne haath mere pet se baandh liye. Maa ab jhonke khaa rahi thhi, bhabhi utthke unke paas chali gayi.
Bhabhi: Maa..Chaliye..So jaaiyye..Aap thakk gayi hai aur kal phir aapko jaana hai..Chaliye main aapko kamre tak chhod aaun..
Maa haan mein sar hilaake utth gayi.
Maa: Tu baitth..Main jaati hoon..
Maa chali gayi, bhabhi aur meri nazrein mili, Prem mobile mein ghusa pada thha, maine bhabhi ki taraf ishaara kiya ke woh Prem ko sambhaale, Bhabhi ne darr ke sar naa mein hila diya, maine zor diya, toh bhabhi darr ke Prem ki taraf dekhi.
Bhabhi: prem..Shatranj khelega..
Prem: Arre why not bhabhi..Ek ek haath ho jaaye..
Bhabhi: Main laati hoon baazi..Tu baitth..
Papa ko merese problem ho rahi thhi, toh maine apni position thodi badal di. Ek pair ko mod ke unki taraf ho gayi, mera ghutna unke seene ki taraf thha, aur usi pair ki jaangh ab papa ke lund ko halka sa chhed rahi thhi. Papa ko ab apna haath meri peeth pe rakhhna pada, aur unki ungliyaan meri bagal ko chhoote huey meri chuchi taka a rahi thhi. Shaayad unhein yeh mehsoos hua ki maine bra nahin pehna hai. Bhabhi aa gayi aur Prem aur woh humse thoda door aamne saamne shatranj khelte baitth gaye. Main Papa se aur lipat gayi, unki ungliyaan ab meri chuchi ko chhoo rahi thhi. Maine apna moonh upar kiya.
Main: Mujhe thandi lag rahi hai Papa..
Papa: Toh upar jaake so jaa na..
Main jaan rahi thhi ke papa ko problem bahut ho rahi hai, unka lund meri jaangh se ghas ke tan gaya thha, aur unki ungliyaan meri chuchi ki side ko chhod nahin rahi thhi.
Main: Papa maine kaha thandi lag rahi hai..Neend nahi aa rahi hai..
Papa ne mujhe aur zor se lipat liya aura b main jaan gayi thhi ke unka embarrassment khatam ho chukka thha ek hadd tak. Ab woh apne tane huey lund ko bina jhijhakk meri jaangh se dabaaye huey thhe. Main ab poori tarah se unpe dabaav daal rahi thhi. Ab maine unka ek haath pakad ke apne chhaati se laga diya.
Main: Bahut thandi hai..
Papa: Toh kaha na upar razaai oddhke so jaa..
Main: Jaaiyye..Lagta hai aapko neend aa rahi hai..Aap so jaaiyye..
Papa: Acchha acchha baba naaraaz mat ho baitth..
Maine papa ka haath apne cleavage ke beechobeech daba diya, Papa ne haath nikaalne ki koshish ki.
Main: Papa kya hua..
Papa: (Mere kaan ke kareeb aate huey): Tu ne andar..Mera matlab hai..
Main: Bra nahi pehna hai..Yahi naa..
Papa: Aahista bol na..Woh log sun lenge..
Main papa ke kaan ke paas gayi.
Main: Maine toh chaddi bhi nahi pehni hai..
Papa ka lund aur tan ne ka ehsaas hua, aur unki ek ungli mere cleavage pe chal rahi thhi..
Papa: Woh toh pehle hi pata chal gaya thha mujhe..
Hum dono ki nazrein mili, vaasna thhi dono ki aankhon mein, unki ungli ab nipple pe chal rahi thhi. Maine apna haath ab unke gardan mein baandh diya. Mere honth unke gaal ko chhoo hi rahe thhe. Unhonein apna daanya haath saara ka saara mere bagal se meri maxi mein ghusa diya aur meri chuchi kass ke pakad liye.
Papa: Ab khush..
Maine unke gaal pe kiss kiya. Apna baanya haath neeche le jaake unke lund ke supaade ko do ungli ke beech kass liya, aur aise hi unke seene pe padi rahi. Unka haath ab meri chuchi se utarke mere pet pe jaa raha thha, maine apne pair thode se phaila diye, unki beech ki ungli ab mere jhaanton se khel rahi thhi, main unke paas gayi.
Main: Aakhri baar aapne maa ko kab..
Papa: Pata nahin..Saal.. Do saal pehle..
Mere sawaal pe unki ungli aur neeche sarki, meri chut ke honth pe kured rahe thhe.
Main: Papa..Aap baahar kyun nahin koi intezaam..
Papa: Nahi..Chhota sheher hai..Koi na koi dekh lega..
Main: Toh ghar mein..
Papa: Ghar mein kaun hai..
Main: Jiska picchwaada aap rasoi ghar mein dopahar mein ghoor rahe thhe..
Papa ne apni aankhein bund kar li aur meri chut pe chumti kaat li.
Papa: Teri aankhon se kuch bachta bhi hai ya nahin..Woh mere bete ki patni hai..
Main: Jab main aapke saath aise..Toh woh kyun nahin..Uski gaand toh pasand hai aapko..Shaayad meri bhi..
Papa: Shaadi ke baad kya ho gaya hai tujhe..
Main: Shaadi ke baad hi toh sab hota hai papa..
Papa: Yeh dono kab utthke jaayenge..
Main: Papa..Maa ne aapko kabhi choosa hai..
Papa mere kaan ke paas aaye.
Papa: Kabhi nahin..
Main: Toh aapne kabhi bhi kisi aurat ke moonh mein apna lund nahin daala..
Papa ki ek masti bhari siski nikal gayi.
Papa: Aaj tak maine kabhi poori tarah se sex..
Main: Chudai..
Papa: Chudai nahi enjoy ki..
Main: Main aapko sab karwaaungi..
Papa ne ab ek ungli meri chut mein ghusa hi di, aur baaki mutthi se meri chut ko pakad baitthe.
Main: Apna naada kholiye na..
Papa: Yahaan..Woh log..
Main: Unko pata bhi nahin chalega ke aapka lund meri chut mein hai..
Papa ne apna naada khol diya, itne mein Prem aur Bhabhi utthe aur hamaari taraf aaye.
Bhabhi: Hara diya isne mujhe..Ab neend aa rahi hai..
Papa: Theek hai beta..Aap log so jaao..Ise main apne kamre mein sula dunga..
Main chup unke seene mein sar chhupaaye sone ki acting kar rahi thhi. Bhabhi ne ek nazar dekha, phir woh dono wahaan se chale gaye, papa peecchhe mudd ke upar ki taraf dekh rahe thhe, jab satisfied ho gaye, toh meri taraf mude, main unke chehre ko dekhi.
Main: Papa kahin chaliye..
Papa: Peecchhe godaam mein chalein..
Main: Kahin bhi..Jahaan hum nange chudai kar sake..
Papa: Chal utth..
Hum dono peecchhe ke godaam mein aa gaye, andar aate hi papa ne darwaaza lock kar diya, aur mujhe peeche se jakad liya, unke haath meri maxi ke andar meri chuchiyon pe thhe. Woh apna lund meri gaand pe ghase jaa rahe thhe. Maine unke naada apne haath peecchhe kar ke khol diya, unka pyjama gir gaya aur unka tana lund aazaad ho gaya, maine use apni mutthi mein kass liya, ab woh bhi meri maxi upar utthaake mujhe nangi kar diye, mujhe paltaaya aur behtahaasha choome lage, maine unka lund apni mutthi mein kaid kar liya thha.
Main: Papa peecchhe ki taraf chaliye, yahaan darwaaze se koi hamaari baatein sun lega..
Papa: Chal wahaan boriyon ke peechhe chal, wahaan light bhi hai..
 
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