भाग २:
आर्यन ने गेट का हैंडल घुमाया। पुराना लोहा चरमराया और गेट धीरे से खुल गया। आंगन में शाम की मद्धम रोशनी फैली थी। नीम का पेड़ अब और बड़ा हो गया था, उसकी छांव पूरे आंगन पर छा रही थी। घर का मुख्य दरवाजा खुला था, अंदर से हल्की-हल्की बातें और बर्तनों की खनखन सुनाई दे रही थी।आर्यन ने कदम बढ़ाया और दरवाजे पर खड़ा हो गया। उसकी सांसें तेज थीं। वह बस चुपचाप खड़ा रहा, देखता रहा।अंदर रसोई में तीन औरतें थीं।सबसे पहले उसकी नजर अपनी मां पर पड़ी – सुमित्रा। उम्र करीब ४८ साल। दस साल पहले भी सुंदर थीं, अब भी वैसी ही लग रही थीं। गोरा रंग, लंबे काले बाल जो अब भी कमर तक थे, लेकिन अब कुछ चांदी के धागे मिले हुए थे। साड़ी में लिपटा उनका बदन अभी भी भरा-भरा और आकर्षक था – चौड़े कूल्हे, भारी स्तन जो साड़ी के ब्लाउज में मुश्किल से समा रहे थे, और कमर जो अब भी पतली थी। चेहरे पर वही ममता भरी मुस्कान। वह सब्जी काट रही थीं।उसके बगल में खड़ी थीं उसकी छोटी बहन रिया। अब वह २१ साल की हो चुकी थी। दस साल पहले की वो दुबली-पतली लड़की अब एक जवान औरत बन चुकी थी। लंबाई आर्यन जितनी ही, गोरा रंग, लंबे घने बाल जो उसने खुला छोड़ा था। उसका फिगर एकदम घंटाघर जैसा – पतली कमर, चौड़े कूल्हे और ऊपर से भरे हुए स्तन जो टाइट कुर्ती में साफ उभरे हुए थे। वह मां से कुछ पूछ रही थी, हंसते हुए।और फिर... चाची। नेहा चाची। ४२ साल। आर्यन की चाची, उसके पिता के छोटे भाई की विधवा। गांव में सबसे सुंदर औरत मानी जाती थीं। गजब का रंग – दूध जैसा गोरा। साड़ी हमेशा कम ही पहनती थीं, पेट हमेशा थोड़ा सा दिखता। पेट एकदम चपटा, कमर पतली, लेकिन नीचे से कूल्हे इतने भरे और गोल कि साड़ी में लहराते हुए चलती थीं तो नजर हटती नहीं थी। स्तन भारी और ऊंचे, ब्लाउज हमेशा टाइट। चेहरा इतना खूबसूरत कि शहर की मॉडल भी फीकी लगे। वह चाय छान रही थीं।अचानक रिया की नजर दरवाजे पर पड़ी। उसने चम्मच हाथ से छोड़ दिया।"भैया...?"उसकी आवाज कांपी। फिर चीख पड़ी – "भैया!!!"वह दौड़कर आई और आर्यन से ऐसे लिपट गई जैसे कभी अलग न होना चाहती हो। उसके नरम, भरे हुए स्तन आर्यन की छाती से दब गए। गर्मी और सुगंध उसकी सांसों में घुल गई।"भैया... तुम सच में आ गए... मैं सपना तो नहीं देख रही?"आर्यन ने उसे गले लगाया, उसकी पीठ पर हाथ फेरा। "नहीं रिया, सपना नहीं। मैं आ गया।"पीछे से सुमित्रा दौड़ी आईं। उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने आर्यन का चेहरा दोनों हाथों में लिया, रोते हुए बोलीं, "मेरा बेटा... मेरा राजा... दस साल... दस साल बाद..."वह उसे सीने से लगाकर रोने लगीं। उनके भारी स्तन आर्यन की छाती पर दबे, साड़ी का पल्लू सरक गया। आर्यन ने मां की पीठ सहलाई, उनकी गर्मी महसूस की।फिर नेहा चाची धीरे-धीरे आईं। उनकी आंखें भी नम थीं, लेकिन मुस्कान गजब की थी। वह आर्यन के सामने रुकीं, फिर बिना कुछ बोले उसे गले लगा लिया। उनका बदन आर्यन से पूरी तरह सटा। भारी स्तन, नरम पेट, चौड़े कूल्हे – सब कुछ महसूस हुआ। उनकी सांसें आर्यन की गर्दन पर गर्म लग रही थीं।"आर्यन... बेटा... कितना बड़ा हो गया है तू..." उनकी आवाज में मिठास और कुछ और था। वह पीछे हटीं, लेकिन हाथ अभी भी आर्यन के कंधे पर थे। उनकी नजर आर्यन के चेहरे से नीचे तक गई – उसके चौड़े कंधे, मजबूत सीना, फिर वापस आंखों में।सुमित्रा ने पीछे हटकर आर्यन को ऊपर से नीचे तक देखा। "अरे, ये क्या हालत बना रखी है? कपड़े गंदे, सामान कहां है? और इतना थका हुआ क्यों लग रहा है?"आर्यन ने मुस्कुराकर कहा, "मां, बस में सोते हुए बैग चोरी हो गया। सब कुछ गया – फोन, पैसे, कपड़े... सब।"तीनों एक साथ चिंतित हो गईं।रिया: "क्या?! भैया, सब कुछ? फिर तुम पैदल आए?"नेहा चाची ने आर्यन का हाथ पकड़ा, "चल अंदर आ, पहले नहा-धो, कपड़े बदल। मैं तेरे पुराने कपड़े निकालती हूं। अभी भी अलमारी में रखे हैं।"सुमित्रा: "हां बेटा, पहले आराम कर। खाना गरम कर रही हूं। आज तेरी पसंद की सारी चीजें बनाई हैं – आलू परवल, दाल, चिकन... सब।"आर्यन मुस्कुराया। घर की खुशबू, औरतों की गर्मजोशी, उनके बदनों की महक – सब कुछ उसे घर लौटने का अहसास दे रहा था।रिया ने उसका हाथ पकड़कर अंदर खींचा। "चलो भैया, मैं तुम्हें अपना कमरा दिखाती हूं। मैंने सजाया है सब।"नेहा चाची पीछे-पीछे आईं, उनकी साड़ी की लहरें चलते वक्त कूल्हों पर नाच रही थीं।आर्यन ने सोचा – दस साल बाद घर लौटा हूं... और ये घर अब पहले से कहीं ज्यादा... गर्म लग रहा है।