• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Incest मेरी बीवियां, परिवार..…और बहुत लोग…

Should I include a thriller part in the story or continue with Romance only?

  • 1) Have a thriller part

    Votes: 48 41.0%
  • 2) Continue with Romance Only.

    Votes: 77 65.8%

  • Total voters
    117

Dhakad boy

Active Member
1,423
2,514
143
31st Update (हादसा)

दिनेश: सही कहा यार... चल मैं एक सेल्फी लेता हूँ और ऐसा कहते हुए वो अपने सीट उसे उठता है और फ़ोन ऑन करता है सेल्फी लेने के लिए. जब वो फ़ोन ऑन करता है तो उसकी आँखें एकदम बड़ी हो जाती है और मुँह खुला रह जाता है. वो वैसे ही पलट कर देखता है तो उसके चेहरे पे डर साफ़ नज़र आ रहा था....

माँ मुझे आपसे कुछ बात करनी है अकेले में....


अब आगे..

निशा अपनी माँ को कमरे में बुलाकर कहती है: माँ आपसे मुझे कुछ बात करनी है.

वसु थोड़ा चिंता जताते हुए: सब ठीक तो है ना?

निशा: हाँ सब ठीक है बस एक बात के लिए मुझे आपसे बात करनी है.

वसु: ठीक है 5 Min टाइम दे. अपना काम करके कमरे में आती हूँ. फिर 5 Min बाद वसु अपना काम करके कमरे में आती है जहाँ पहले से ही निशा वहां बैठे हुए वसु का इंतज़ार कर रही थी. वसु को कुछ समझ नहीं आता क्यों निशा उससे अकेले में बात करना चाहती थी. दोनों बिस्तर पे बैठते है.

वसु: हाँ बोल क्या बात है. कुछ समस्या है क्या?

निशा अपनी नज़रें थोड़ा नीचे करती हुई... समस्या तो नहीं है लेकिन फिर भी आपको बताना है.

वसु: बोलना फिर इतना क्यों घबरा रही है.

निशा: बात घबराने की नहीं है.

वसु: फिर भी बता... अगर मुझसे से कुछ बन पाया तो तेरी मदत कर दूँगी.

निशा फिर वसु से बोलना शुरू करती है.

निशा: हम लोग पिछले एक हफ्ते से बाहर थे हनीमून पे.

वसु: हाँ हमें तो पता है.

निशा: बात ये है की जब हम रात को आराम कर रहे थे तो दिनेश ने एक बात कही और मुझसे मेरा निर्णय माँगा. वसु को अब थोड़ी चिंता होने लगी... तो कहती है... क्या बोलै उसने तुझसे?

निशा: माँ बात ये है की आंटी भी अब आपकी उम्र की है और वो भी... ऐसा बोल कर निशा रुक जाती है.

वसु निशा की तरफ देखती है जैसे कह रही हो... आगे बोल...

निशा अपनी नज़रें झुकाये हुए कहती है... दिनेश कह रहा था की आंटी को भी अभी एक मर्द की ज़रुरत है... उसने काफी सोचा और बोलै की वो भी दीपू की तरह आंटी से शादी करना चाहता है और उसकी ज़िन्दगी में आप जैसी खुशियां देना चाहता है आंटी को. निशा ऐसे बोल कर रुक जाती है और अपनी नज़रें नीचे कर लेती है.

वसु जब ये बात सुनती है तो पहले उसे थोड़ा झटका लगता लेकिन फिर वो ऋतू को याद करती है तो उसे निशा/ दिनेश की बात का समझ आता है.

वसु: तो ये बात है जिसे तुझे परेशान कर रखा है.

निशा: हाँ माँ... दिनेश ने जब मुझसे ये बात कही तो मैं उसे मना नहीं कर सकी क्यूंकि उसने दीपू का भी नाम लिया था और कह रहा था की उसकी शादी आप दोनों से होने के बाद आप दोनों कितनी खुश है. वो वही ख़ुशी अपनी माँ को भी देना चाहता था... इसीलिए वो उनसे शादी करना चाहता है और मेरी राय मांगी.

वसु: तो तूने क्या कहा?

निशा: मैं उसे मना भी नहीं कर सकती थी क्यूंकि उसकी बात भी सही थी... इसीलिए मैंने भी हाँ कह दिया है. लेकिन वो कह रहा था की उसने इस बारे में आंटी से बात नहीं की है और मेरी हाँ के बाद ही वो उनसे बात करेगा.

वसु कुछ सोच कर: तूने सही किया बेटा. मैं जानती हूँ...तेरी सास भी अकेली है और वो अकेलापन कैसे होता है ये मैं भी अच्छे से जानती हूँ. अगर तेरी सास उसकी बात से मान जाए और वो भी ख़ुशी से जिए तो तुम सब लोगों के लिए अच्छा ही होगा. चिंता मत कर. अगर ज़रुरत पड़ी तो मैं भी तेरी सास से बात करती हूँ. वो मेरी भी अच्छी सहेली है. और वसु प्यार से निशा के गाल काटते हुए कहती है: तो अब तेरी सास तेरी सौतन बनने वाली है.

निशा इस बात से शर्मा जाती है और झूठे गुस्से से वसु के बाजू पे मारती है.

वसु: इसी बात के लिए तू इतनी परेशान थी?

निशा: हाँ.

वसु: ज़्यादा मत सोच. ऊपर वाला है ना... सब ठीक कर देगा और प्यार से वसु निशा को गले लगा लेती है.

निशा: एक और बात माँ.. वसु निशा की और सवालिया नज़र से देखती है तो निशा कहती है:ये सब दीपू को पहले से ही पता है. दोनों ने इस बारे में बात किया हुआ है. वसु ये बात सुनकर उसका मुँह खुला रह जाता है और सोचने लगती है की दीपू ने उसे अब तक बताया क्यों नहीं. लेकिन फिर अपने आप को संभालते हुए कहती है... ये तो अच्छी बात है. और वो इसीलिए की दिनेश ऐसा बड़ा निर्णय अकेले लेने से पहले हम सब को बता के कर रहा है और ना ही कोई चोरी छुपे कर रहा है. ये तो अच्छी बात है. चल दीपू जब आएगा तो मैं उससे इस बारे में भी बात करती हूँ.

वसु फिर निशा को प्यार से गले लगाती है तो इतने में दोनों कविता और दिव्या भी आ जाते है कमरे में. निशा वसु को आँखों से इशारा करती है की अभी उन्हें इस बारे में कुछ ना बताये. वसु को भी सही लगता है और कहती है की वो निशा से उसके हाल चाल के बारे में पूछ रही थी. निशा वहां बहुत खुश है तो मुझे भी अच्छा लगा और उसे गले लगा लिया. कविता और दिव्या ये सुनकर बहुत खुश हो जाते है और वो भी निशा को गले लगा कर प्यार से उसका माथा चूम लेते है.


वहीँ दूसरी जगह दीपू के कार में:

दिनेश जब अपनी सीट से उठकर सेल्फी लेने के लिए जब वो अपने फ़ोन के कैमरा को ऑन करता है तो कैमरा में दृश्य को देख कर पलटता है और उसकी आँखों में डर दिखने लगता है.

दिनेश ज़ोर से दीपू को चिल्लाता है: दीपू आईने में पीछे देख. दीपू जब दिनेश की बात सुनता है और वो अपने कार के आईने में देखता है तो वो जल्दी से अपना कार साइड करने की कोशिश करता है.

बात ये थी की जब दिनेश अपने कमरे में दृश्य को देख कर जब वो मुड़ता है तो उनके कार के ठीक १ मीटर पीछे एक ट्रक बहुत तेज़ी से आ रहा था और जब तक दिनेश दीपू से कहता है की वो अपनी कार को साइड में कर ले... तब तक बहुत देर हो चुकी थी. ट्रक अपनी पूरी रफ़्तार के साथ दीपू के कार को पीछे से ठोकता है (जब दीपू अपने कार को साइड करने की कोशिश कर रहा था). नतीजा ये होता है की वो ठोकर इतना ज़बरदस्त थी की दिनेश जिसका आधा बदन कार के ऊपर था और बाकी कार में (सेल्फी लेने के लिए) एकदम से कार से उड़ जाता है और लगभग १० मीटर दूर एकदम से गिर जाता है. उसके गिरते ही उसकी आधी जान निकल जाती है. दीपू बच जाता है क्यूंकि वो कार चला रहा था और सीट बेल्ट पहने हुए था. वो एक्सीडेंट की वजह से कार के Airbags उसे बचा लेता है लेकिन दिनेश बच नहीं पाता क्यूंकि वो एक तरह से आधा कार से बहार ही था.

वहां रोड पे हलचल मच जाती है और बाकी लोग भी उनकी मदत करने के लिए आ जाते है. वो ट्रक ड्राइवर कार को ठोकने के बाद अपनी सीट से कूद कर बगल में झाड़ियों में घुस कर वहां से भाग जाता है और जब तक लोगों को कुछ समझ आता तब तक वो गायब हो गया था.

दीपू की कार तो बर्बाद हो ही गयी थी उस ठोकर की वजह से और वो कार रोड के बगल में लुड़का हुआ था. कुछ लोग जल्दी से वहां आकर दीपू को कार से बहार निकालते है क्यूंकि वो थोड़ा बेहोश हो गया था. भले ही Airbags ने उसे बचा लिया था लेकिन उसे भी थोड़ी चोटें आयी थी. लेकिन दीपू को जल्दी होश आ जाता है और वो दिनेश के बारे में पूछता है.

दिनेश बहुत ज़ख़्मी हो गया था और वो तो जैसे अपनी आखरी सांसें गईं रहा था. दीपू उसे इतनी ज़ख़्मी हालत में देख कर अपने आप को संभालते हुए उसके पास दौड़ कर जाता है और फिर कुछ वहां के आदमी पुलिस की मदत से उन दोनों को अपनी कार में बिठा कर उन दोनों को हॉस्पिटल लेकर जाते है.

(इतने में पुलिस भी वहां आ जाती है और भीड़ को संभालते हुए रास्ता साफ़ करने में रहती है. वो ट्रक को ज़प्त , कर लेते है और वहां लोगों से पूछने लगते है की वहां वो एक्सीडेंट कैसे हुआ. )

जब दीपू और दिनेश को कार में बिठा कर हॉस्पिटल लेकर जाने की तैयारी करते है तो वहां के भीड़ में से वो आदमी (जिसको दोनों ने पुलिस से शिकायत कर के जेल भिजवाया था, 21st Update) उन दोनों को देख कर मन में सोचता है... एक गया लेकिन एक बच गया... अगली बार उसका भी नंबर लगता हूँ.... ऐसा सोचते हुए वो चुपके से वहां से निकल जाता है.


<Flashback>

बात उस समय की थी जब दिनेश और निशा अपने हनीमून पे गए हुए थे. उस समय वो अकाउंटेंट जिसको दोनों ने पुलिस के हवाले कर गिरफ्तार करवाया था वो bail लेकर जेल से बाहर आ जाता है और गुस्से में सोचता है की उन दोनों की वजह से वो जेल गया है और दोनों से बदला लेने की सोच लेता है.

वो आदमी ठीक किसम का आदमी नहीं था.... लेकिन ऋतू ने किसीके कहने पे अपने कंपनी में उसे नौकरी दी थी... (जब दिनेश और दीपू अपनी पढाई कर रहे थे कॉलेज में और उन दोनों ने इस कंपनी को अपने हाथ में लिया नहीं था. )लेकिन उसे (ऋतू) को क्या पता था की वो इतना नीच आदमी निकलेगा और कंपनी में ही चोरी करेगा. वो कंपनी के कुछ १- २ लोगों से उन दोनों के बारे में पूछता है तो उसे पता लगता है की फिलहाल सिर्फ दीपू ही ऑफिस आ रहा है और दिनेश छुट्टी पे है.

जब दिनेश अपने हनीमून से वापस आकर ऑफिस में दीपू से मिलता है तो ये बात उस अकाउंटेंट को पता चल जाता है और फिर अपने कमीने मन से उन दोनों को उड़ाने का प्लान बनाता है और इसी के चक्कर में किसीसे बात कर के वो ट्रक उन दोनों पे हमले के लिए सेट कर लेता है.


<End of Flashback>

कार में फिर जल्दी से दीपू और दिनेश को हॉस्पिटल ले जाते है. कार में दीपू दिनेश को अपने गोद में रख कर उसे देखता रहता है और उसे देख कर उसकी आँखों में आंसूं आ जाते है क्यूंकि उसकी हालत बहुत ही ख़राब थी.

फिर उसे याद आता है की वो कहाँ है और फिर वो अपने घर फ़ोन करता है.

दीपू फ़ोन पे: घबराते हुए और टूटी हुई आवाज़ में... माँ तुम सब लोग xxx हॉस्पिटल आ जाओ.

वसु: क्या हुआ बेटा? हॉस्पिटल क्यों?

दीपू: रोते हुए और टूटी हुई आवाज़ में... मैं जो कह रहा हूँ जल्दी करो और बाकी सब को भी साथ लाना.

वसु: हॉस्पिटल का नाम और दीपू की डरी हुई आवाज़ सुनकर उसके भी पसीने छूटने लगते है और पूछती है की क्या हुआ है?

दीपू: अभी वो सब बात करने के लिए समय नहीं है. निशा और ऋतू आंटी को भी साथ लाना.

वसु: ये बात सुनकर उसको भी डर लगने लगता है और फ़ोन पे ही ज़ोर से चिल्लाती है की क्या हुआ है. सब तो ठीक है ना?

वसु को फ़ोन पे ज़ोर से चिल्लाने से बाकी तीनो भी वहां वसु के पास आ जाते है और उसको डरा हुआ और गंभीर देख कर पूछते है की क्या हुआ है?

इतने में दीपू फ़ोन काट देता है तो वसु जल्दी से उठकर अपने आप को ठीक करते हुए कहती है.... मुझे अभी ज़्यादा कुछ नहीं पता है. दीपू हम सब को xxx हॉस्पिटल आने को कहा है. मुझे बहुत डर लग रहा है और उसने ये भी कहा है की निशा और उसकी सास को भी साथ लाये. वसु की ये बात सुनकर उन तीनो को भी पसीना आने लगता है और वो भी बहुत घबरा जाते है.

वसु: बेटी तुम जाकर ऋतू को यहाँ ले आओ. इतने में हम तैयार हो जाते है.

निशा को कुछ समझ नहीं आता और वो भी डरी हुई थी तो वो वैसे ही अपने घर निकल जाती है. उसके जाने के बाद दिव्या फिर से दीपू को फ़ोन करती है लेकिन दीपू फ़ोन नहीं उठाता. इससे उनको भी बहुत डर लगता है और फटाफट तैयार हो जाते है. वो लोग जैसे हालत में थे वैसे ही जाने को तैयार हो जाते है.

इतने में निशा और ऋतू भी वहां आ जाते है और ऋतू भी रोते हुए पूछती है की क्या हुआ है..

वसु: मुझे भी ज़्यादा कुछ पता नहीं है. सिर्फ इतना की दीपू ने फ़ोन कर के xxx हॉस्पिटल आने को कहा है.

फिर वो सब भी हॉस्पिटल के लिए निकल जाते है लेकिन उन सब के चेहरे पे डर साफ़ नज़र आ रहा था. रास्ते में कोई किसीसे बात नहीं कर रहा था क्यूंकि सब की हालत ऐसी ही थी.


वहीँ हॉस्पिटल में:

दीपू और दिनेश को जल्दी ही हॉस्पिटल ले जाय जाता है. दीपू तो थोड़ा ठीक था लेकिन दिनेश का बहुत बुरा हाल था. उसका पूरा बदन खून से लतपथ था और उसे होश भी नहीं रहता. डॉक्टर्स उसे जल्दी ही ऑपरेशन रूम में ले जाते है और १ डॉक्टर दीपू को चेक कर के उसके ज़ख्म को देख कर उसे कुछ दवाई देता है और कहता है की ज़्यादा घबराने की बात नहीं है. वो १- २ दिन में ठीक हो जाएगा.

दीपू: मेरा दोस्त कैसा है? वो बच तो जाएगा ना?

डॉक्टर: कह नहीं सकते. वो अभी ऑपरेशन रूम में है. जब डॉक्टर्स बाहर आएंगे तो वही बता सकते है.

१५- २० Min बाद डॉक्टर ऑपरेशन रूम से बाहर आकर दीपू से कहता है की उसकी हालत बहुत खराब है. बहुत खून बह गया है और उसके बचने की उम्मीद बहुत कम है. दीपू जब ये बात सुनता है डॉक्टर से तो उसका रोना बंद नहीं होता. इतने में वहां पर वसु और बाकी सब भी आ जाते है और दीपू को वैसी हालत में देख कर उनसे भी रहा नहीं जाता और दीपू को पकड़ कर वो भी रोने लग जाते है.

वसु दीपू को देख कर: क्या हुआ बेटा. तुझे भी बहुत चोट लगी है. दिनेश कहाँ है?

दीपू: रोते हुए, माँ दिनेश की हालत बहुत खराब है. उसे ऑपरेशन रूम में ले गया है. निशा जब ये बात सुनती है तो वो वही ज़मीन पे गिर जाती है. दिव्या और कविता दोनों उसे उठाते है और कहते है की कुछ नहीं होगा बेटा. धैर्य रखो. ऋतू भी भी वैसे ही हालत थी.

इतने में डॉक्टर वहां आता है और पूछता है की दिनेश के कोई सम्बन्धी है क्या.

दीपू पूछता है क्यों तो डॉक्टर कहता है की वो अब ज़्यादा देर नहीं रहेगा. अगर कोई उसे देखना चाहे तो एक बार उसे देख सकते है.

फिर दीपू, निशा और ऋतू रोते हुए और डरते हुए वो रूम में जाते है. उसकी हालत देख कर निशा और ऋतू की हालत बहुत ख़राब हो जाती है. दिनेश भी धीरे से अपनी आँखें खोलता है और फिर दीपू को बुला कर उसका हाथ पकड़ता है. वो फिर ऋतू और निशा को भी इशारा करता है की उसके पास आये. जब वो दोनों रोते हुए उसके पास आते है तो वो दोनों का हाथ पकड़ कर दीपू के हाथ में देता है जैसे दीपू से कह रहा हो की उनका ख्याल रखना.

दीपू रोते हुए कहता है की तू चिंता मत कर. तू जल्दी से ठीक हो जाएगा और तू खुद ही इनकी देखभाल करेगा.

दीपू का इतना ही कहना था की दिनेश एक ज़ोर के सांस लेता है और फिर उसकी आँखें बड़ी हो जाती है और बदन एकदम स्थिर हो जाता है. दीपू उसे हिलाते हुए बात करने की कोशिश करता है. इतने में वहां डॉक्टर भी आ जाता है और फिर दिनेश को देख कर उसकी आँखें बंद कर देता है और बताता है की अब दिनेश छोड़ कर चला गया है दीपू, निशा और ऋतू की तरफ देखता है. निशा ये देख कर वहीँ फिर से बेहोश हो जाती है.

डॉक्टर्स फिर निशा को वहीँ दुसरे कमरे में भर्ती करते है और उसका इलाज करते है. उनको पता था की निशा शॉक की वजह से बेहोश हो गयी है और वो ठीक हो जायेगी.

2 Min बाद दीपू रूम से बाहर आता है जहाँ वसु, दिव्या और कविता उनका इंतज़ार कर रहे थे. दीपू को रोता हुआ देख कर वसु रोते हुए पूछती है की दिनेश कैसा है.

दीपू: माँ आप आंटी के पास रहो.

वसु: बोल ना क्या हुआ है?

दीपू जब ये बात कहता है दिव्या और कविता दोनों अंदर जाते है और अंदर का नज़ारा देख कर उनसे भी रहा नहीं जाता और वो भी फुट फुट कर रोते रहते है और जाकर ऋतू को पकड़ लेते है और सब साथ में वहीँ बैठ जाते है क्यूंकि उनके सामने दिनेश बेजान सा पड़ा हुआ था. वसु भी फिर अंदर आती है और वो भी देख कर वहीँ एक कुर्सी पे बैठ जाती है और रोने लगती है. थोड़ी देर बाद जब वो अपने आप को संभालती है तो दिव्या से पूछती है....

वसु: दिव्या निशा कहाँ है? वो दिखाई नहीं दे रही है. दिव्या भी फिर देखती है की वहां निशा नहीं है. वो बहार दौड़ कर दीपू के पास आकर पूछती है तो दीपू बताता है की उसको दुसरे कमरे में भर्ती किया हुआ है.

फिर वहां पर पुलिस भी आ जाती है और वो एक्सीडेंट के बारे में पूछती है. दीपू फिर बताता है की क्या और कैसे हुआ. पुलिस का एक कांस्टेबल कहता है की १- २ दिन में थाने आकर विस्तार से जानकारी दे. फिर १- २ घंटे बाद दीपू और बाकी सब दिनेश को घर ले जाते है. वसु वहीँ हॉस्पिटल से मनोज, मीना और बाकी सब को भी फ़ोन कर के वहां की जानकारी देती है और सब से कहती है की जल्दी आ जाए. इन १- २ घंटे में डॉक्टर्स निशा को कुछ दवाई वगैरा देते है और कहते है की घर में आराम करने से वो ठीक हो जायेगी.

घर में एकदम दुखों का माहौल था लेकिन कर भी कुछ नहीं सकते थे. अब वहां का वातावरण भी ऐसा ही था. शाम तक मनोज, मीना और बाकी सब भी आ जाते है और फिर से सब एक दुसरे को गले लग कर रोते हुए एक दुसरे को आसरा देते है. इन सब में वसु को सब से ज़्यादा फ़िक्र निशा और ऋतू की थी क्यूंकि आखिर में दिनेश उसका पति और बेटा था. वो घर आकर पूरा दिन उनके साथ ही रहती है. वो दोनों ज़्यादा बात नहीं कर रहे थे लेकिन वसु ये बात समझ सकती थी.


फिर अगले दिन दिनेश का अंतिम संस्कार कर दिया जाता है. दीपू वसु से कहता है की निशा और ऋतू को अपने साथ ही रखे और उन्हें अकेला उनके घर में ना रखे. वसु भी ये बात मान जाती है और कुछ दिन के लिए उन दोनों को अपने पास ही रखती है…
Shandar update bhai
Story me kya hi to turn dala hai
Dhekte hai aage kya hota hai
 
Top