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मेरी कल्पना (1)
आज मै जो कहानी आपको बताने जा रहा हूं, ये घटित हुई थी जब मैं अपनी दसवीं मे था। मै उस समय हॉस्टल में रहता था। हमारे स्कूल में एक बहुत ही हॉट टीचर थी जिनका नाम था "कल्पना" नाम जितना सुंदर था दिखने में भी वो बिल्कुल वैसी ही थी अबिष्मार्निय बोले तो एक नंबर माल थी।
कहानी शूरु होती है जब हमारे स्कूल में सालाना वार्षिक महोत्सव बनाने की तैयारी चल रही थी। उस समय चुकी वो हमारे क्लास की क्लास टीचर थी तो उन्हें भी एक स्टॉल्स लगाने की जिम्मेदारी दी गयी थी। चूँकि मैं होस्टल में रहता था तो उन्होंने मेरे साथ साथ दो और लड़को को चुना उन्हें असिस्ट करने के लिए।
मैं काफी खुश था इसी बहाने माल के पास रहने का मौका मिलने वाला था। हमने अपने स्टाल को काफी खूबसूरती से सजाया था। सबलोग तारीफ कर रहें थे। हमे पहला पुरस्कार मिला। कल्पना बहुत खुश थी। उसी खुशि में उसने हमें गले लगाया। उसके ममे जब मेरे बदन से जैसे ही सटे। पूरे शरीर मे एक बिजली सी दौर गयी। उस दिन मुझे एहसास हुआ मैडम के ममे बरे होने के साथसाथ काफी टाइट भी थे। मैंने उसी दिन थान लिया इस माल को एकदिन जरूर चखूँगा चाहे कुछ भी हो जाये।
समय बीतता गया मैडम का मैं चहेता बन गया था क्योंकि जितनी मेहनत मैं उनके सब्जेक्ट में करता था वो किसी सब्जेक्ट में नही। एकदिन की बात है होस्टल की वार्डन ने मुझे कुछ समान मैडम के घर पे पहुचाने का आदेश दिया। मैं चल पड़ा अपनी मंजिल की ओर सोचा काश मेरी किस्मत आज अच्छी हो। पर ऐसा कुछ नही हुआ मैडम के घर पहुंचा तो मैडम कुछ लड़को को पढ़ा रही थी। मैडम को जब सामान दिया तो बोली थोड़ी देर रुक जाओ कुछ नाश्ता करके जाना। मुझे तो लगा जैसे रास्ते खुल रहे थे जिसका अंत मैडम के बिस्तर पे होना था।
कुछ ही समय बाद सारे बच्चे चले गए। घर मे सिर्फ मैं और मैडम थे। मैडम बोली बस थोड़ी देर में कपड़े बदल कर आती हु। मैं बाहर सोफे पे बैठे उनका इंतजार करने लगा। मैं उनके खयालो में खोता जा रहा था "बिना कपड़ो के मैडम कैसी लगती होंगी, कैसे मैं उनके बदन के साथ खेलना चाहता था, कैसे मैं उनके बड़े बड़े मम्मे को मुह में लेकर उनका रसपान करना चाहता था।"
अचानक से मैडम कि आवाज आई जिससे मेरे सपने टूट गए।
मैडम जब मेरे सामने आई तो मैं उन्हें देखता ही राह गया। वो मेरे सामने एक बेहद खूबसूरत ब्लू रंग की नाइट ड्रेस में खरी थी।
मेरे मन मे अचानक ये खयाल आया कि इनके कपड़े फाड़कर अभी चढ़ाई करदु। पर मैने खुद पर कंट्रोल किया क्योंकि मुझे कुछ दोस्तो से पता चला था कि मैडम के पति शहर से बाहर रहते है।
मैडम को मैं जिस तरह से देख रहा था वो भी समझ रही थी ये लौंडे का नजर उनके हुस्न पे है। मैडम ने मुझे नास्ते में बिस्किट और दूध दिया। मैं दूध लेने से मना कर दिया क्यूंकि मुझे तो उनका दूध पीना था। जब उन्होंने न पीने का कारण जानना चाहा तो मैंने बोला ऐसेही। वो फिर से पूछी ग्लास वाले दूध के जगह कोई और दूध पीना चाहोगे। मैं एकबार के लिए सकपका गया ये कौनसी दूध की बात कर रही है। वो बोली मैं सब जानती हूं। तुम होस्टल वाले लड़के लोग मेरे बारे में क्या क्या बोलते हो। मैं बोला ऐसा कुछ नही है मैडम। वो बोली तुम भी कुछ कम नही हो। उसदिन जब मैंने तुम्हें गले लगाया था तो नीचे क्या था जो डंडे जैसा खड़ा था। मैं डर गया और बोला माफ कर दीजिये मैडम वो गलती से हो गया था।
वो बोली मुझे आज देखना है वो क्या चीज था, चलो अपनी पैंट उतारो, कुछ समय के लिए मैंने डर कर पैंट उतार दिया। मेरा लंड गर्म सरिये की तरह गरम और टाइट था जो उनके नाईट ड्रेस का असर था। उनके हाथों के स्पर्श से ही लन्ड साँप की तरह फ़ंफनाने लगा। उन्होंने लन्ड को पूरे मूठी में पकड़ने की कोशिश की जो बेकार था क्योंकि लंड की चौलाइ ज्यादा थी। हारकर उन्होंने उसे दोनो हाथो से पकड़ा। फिर अचानक उसे मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। मैं बोला मैडम आप ये क्या कर रही है। उन्होंने बोला वही जो तुम काफी समय से चाहते थे।
उसके बाद वो मुझे अपने बेडरूम में ले गई और उसपे मुझे ढकेल दिया। फीर अपनी नाइटी खोल दी। अब वो सिर्फ अपनी लाल पैंटी और लाल ब्रा में खड़ी थी।
मुझे एक बात याद आ गयी "लड़की अगर ब्रा और पैंटी दोनो एकही रंग का पहनकर आये तो ये मत समझना तुमने उसे सेक्स के लिए बोला है, बल्कि इसका ये मतलब है कि आज वो तुमसे चुदने के लिए सोचकर आयी है"
फिर वो मेरे उपर भूखी शेरनी की तरह मेरे ऊपर टूट पड़ी। मेरे पूरे बदन को चाटने लगी मैं भी अपने सारी डर छोर दिया आख़िर मैं भी तो यही चाहता था। मैं भी उन्हें बेइंतेहा चूमने लगा। मैं जब उनकी ब्रा का हुक खोल रहा था तो मुझे परेसानी हो रही थी। जिसपे वो हँसने लगी और बोली अभी तुम इस खेल में बच्चे हो बाबू, आगे बहुत कुछ सीखना है। उन्होंने फिर हुक खोल दिया।
आज मेरे सामने वो उनके वो रसीले, गठीले मम्मे थे जिनके बारे में सोचकर न जाने मैंने कितनी राते काटी थी। मैं उन्हें बेतहासा चूमने और काटने लगा वो बोली आराम से मैं कहीं भागने वाली नहीं हूं। पर मैं कहाँ रुकने वाला था, फिर मैंने पैंटी को फार दिया।
फिर हैम 69 की पोजीशन में आ गए। मैं उनके चूत को चाट रहा था और वो मेरे लन्ड को।
वो बोली अब बर्दास्त नही हो रहा है राजा अब मुझे तुम्हारा लण्ड मेरे we चूत की गहराइयों में चाहिए। मैं बोला इतनी भी क्या जल्दी है रानी। क्योंकि जो मजा ओरल में है वो पांच मिनट की चूत चुदाई में कहाँ। जब वो मुझे जोर देने लगी तो मैं भी ज्यादा इन्तेजार न कराना बेहतर समझा। वो सीधा लेट गई और मैं अपने लौरे को चूत में डालने लगा पर मेरी हर कोशिश बर्बाद जा रही थीं तब उन्होंने कहा मैंने कहा था न तुम्हें बहुत कुछ सीखना है बच्चे। वो जबभी मुझे बच्चा बोलती थी मुझे थोड़ा गुस्सा आ जाता था। फिर उन्होंने पकड़कर मेरे लन्ड को अपने चूत पे सेट किया और धक्का देने कहा। मैंने जोर से धक्का दिया आधा ही लन्ड अंदर गया था कि वो जोर से चिल्लाई मैंने उनके मुह को बंद कर दिया वो बोली बहुत दर्द हो रहा है पर तुम रुकना नही। फिर मैंने उनके होठों को चूमा और एक जोरदार धक्का दिया। मेरा पूरा लन्ड उनकी बच्चेदानी से टकरा रहा था। उनकी चीखे मेरे होंठो के बीच दबकर रह गयी।
मैं थोड़ी देर के लिए अपने लन्ड को रोके रखा और उनके निप्पल्स के साथ खेलने लगा ताकि उनका दर्द मजे में तब्दील हो सकें। थोड़ी देर के खेल के बाद वो तैयार थीं। अब मैं धीरे धीरे झटके मारने लगा। उन्हें मजा आ रहा था वो बोल रहीं थीं चोदो मुझे अपनी रखैल बना लो। मैं बोला आज से तू मेरी पर्सनल राँड है, मैं जब भी बुलाऊ चली आना। वो बोली जो हुक़्म मेरे मलिक।
अब मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी थी। मैं पहले ही दो बार झर चुका था क्योंकि ये मेरा पहली बार था। इस दौरान वो भी दो बार झर गयी थी। मैं थक चुका था फिरभी एक और राउण्ड कोशिश करना चाहता था। मैंने झटके तेज कर दिए वो भी बोली चोदो राजा इस चूत का सारा रास निकाल दो काफी दिनों से भूखी है। कुछ ही झटको बाद दोनों साथ साथ झर गए।
मैं उनके ऊपर लेटा रहा। उनके मम्मे के साथ खेल रहा था। उनको आँखों मे सुकून और संतोष का भाव दिख रहा था।
आगे की बात अगले भाग में।
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आज मै जो कहानी आपको बताने जा रहा हूं, ये घटित हुई थी जब मैं अपनी दसवीं मे था। मै उस समय हॉस्टल में रहता था। हमारे स्कूल में एक बहुत ही हॉट टीचर थी जिनका नाम था "कल्पना" नाम जितना सुंदर था दिखने में भी वो बिल्कुल वैसी ही थी अबिष्मार्निय बोले तो एक नंबर माल थी।
कहानी शूरु होती है जब हमारे स्कूल में सालाना वार्षिक महोत्सव बनाने की तैयारी चल रही थी। उस समय चुकी वो हमारे क्लास की क्लास टीचर थी तो उन्हें भी एक स्टॉल्स लगाने की जिम्मेदारी दी गयी थी। चूँकि मैं होस्टल में रहता था तो उन्होंने मेरे साथ साथ दो और लड़को को चुना उन्हें असिस्ट करने के लिए।
मैं काफी खुश था इसी बहाने माल के पास रहने का मौका मिलने वाला था। हमने अपने स्टाल को काफी खूबसूरती से सजाया था। सबलोग तारीफ कर रहें थे। हमे पहला पुरस्कार मिला। कल्पना बहुत खुश थी। उसी खुशि में उसने हमें गले लगाया। उसके ममे जब मेरे बदन से जैसे ही सटे। पूरे शरीर मे एक बिजली सी दौर गयी। उस दिन मुझे एहसास हुआ मैडम के ममे बरे होने के साथसाथ काफी टाइट भी थे। मैंने उसी दिन थान लिया इस माल को एकदिन जरूर चखूँगा चाहे कुछ भी हो जाये।
समय बीतता गया मैडम का मैं चहेता बन गया था क्योंकि जितनी मेहनत मैं उनके सब्जेक्ट में करता था वो किसी सब्जेक्ट में नही। एकदिन की बात है होस्टल की वार्डन ने मुझे कुछ समान मैडम के घर पे पहुचाने का आदेश दिया। मैं चल पड़ा अपनी मंजिल की ओर सोचा काश मेरी किस्मत आज अच्छी हो। पर ऐसा कुछ नही हुआ मैडम के घर पहुंचा तो मैडम कुछ लड़को को पढ़ा रही थी। मैडम को जब सामान दिया तो बोली थोड़ी देर रुक जाओ कुछ नाश्ता करके जाना। मुझे तो लगा जैसे रास्ते खुल रहे थे जिसका अंत मैडम के बिस्तर पे होना था।
कुछ ही समय बाद सारे बच्चे चले गए। घर मे सिर्फ मैं और मैडम थे। मैडम बोली बस थोड़ी देर में कपड़े बदल कर आती हु। मैं बाहर सोफे पे बैठे उनका इंतजार करने लगा। मैं उनके खयालो में खोता जा रहा था "बिना कपड़ो के मैडम कैसी लगती होंगी, कैसे मैं उनके बदन के साथ खेलना चाहता था, कैसे मैं उनके बड़े बड़े मम्मे को मुह में लेकर उनका रसपान करना चाहता था।"
अचानक से मैडम कि आवाज आई जिससे मेरे सपने टूट गए।
मैडम जब मेरे सामने आई तो मैं उन्हें देखता ही राह गया। वो मेरे सामने एक बेहद खूबसूरत ब्लू रंग की नाइट ड्रेस में खरी थी।
मेरे मन मे अचानक ये खयाल आया कि इनके कपड़े फाड़कर अभी चढ़ाई करदु। पर मैने खुद पर कंट्रोल किया क्योंकि मुझे कुछ दोस्तो से पता चला था कि मैडम के पति शहर से बाहर रहते है।
मैडम को मैं जिस तरह से देख रहा था वो भी समझ रही थी ये लौंडे का नजर उनके हुस्न पे है। मैडम ने मुझे नास्ते में बिस्किट और दूध दिया। मैं दूध लेने से मना कर दिया क्यूंकि मुझे तो उनका दूध पीना था। जब उन्होंने न पीने का कारण जानना चाहा तो मैंने बोला ऐसेही। वो फिर से पूछी ग्लास वाले दूध के जगह कोई और दूध पीना चाहोगे। मैं एकबार के लिए सकपका गया ये कौनसी दूध की बात कर रही है। वो बोली मैं सब जानती हूं। तुम होस्टल वाले लड़के लोग मेरे बारे में क्या क्या बोलते हो। मैं बोला ऐसा कुछ नही है मैडम। वो बोली तुम भी कुछ कम नही हो। उसदिन जब मैंने तुम्हें गले लगाया था तो नीचे क्या था जो डंडे जैसा खड़ा था। मैं डर गया और बोला माफ कर दीजिये मैडम वो गलती से हो गया था।
वो बोली मुझे आज देखना है वो क्या चीज था, चलो अपनी पैंट उतारो, कुछ समय के लिए मैंने डर कर पैंट उतार दिया। मेरा लंड गर्म सरिये की तरह गरम और टाइट था जो उनके नाईट ड्रेस का असर था। उनके हाथों के स्पर्श से ही लन्ड साँप की तरह फ़ंफनाने लगा। उन्होंने लन्ड को पूरे मूठी में पकड़ने की कोशिश की जो बेकार था क्योंकि लंड की चौलाइ ज्यादा थी। हारकर उन्होंने उसे दोनो हाथो से पकड़ा। फिर अचानक उसे मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी। मैं बोला मैडम आप ये क्या कर रही है। उन्होंने बोला वही जो तुम काफी समय से चाहते थे।
उसके बाद वो मुझे अपने बेडरूम में ले गई और उसपे मुझे ढकेल दिया। फीर अपनी नाइटी खोल दी। अब वो सिर्फ अपनी लाल पैंटी और लाल ब्रा में खड़ी थी।
मुझे एक बात याद आ गयी "लड़की अगर ब्रा और पैंटी दोनो एकही रंग का पहनकर आये तो ये मत समझना तुमने उसे सेक्स के लिए बोला है, बल्कि इसका ये मतलब है कि आज वो तुमसे चुदने के लिए सोचकर आयी है"
फिर वो मेरे उपर भूखी शेरनी की तरह मेरे ऊपर टूट पड़ी। मेरे पूरे बदन को चाटने लगी मैं भी अपने सारी डर छोर दिया आख़िर मैं भी तो यही चाहता था। मैं भी उन्हें बेइंतेहा चूमने लगा। मैं जब उनकी ब्रा का हुक खोल रहा था तो मुझे परेसानी हो रही थी। जिसपे वो हँसने लगी और बोली अभी तुम इस खेल में बच्चे हो बाबू, आगे बहुत कुछ सीखना है। उन्होंने फिर हुक खोल दिया।
आज मेरे सामने वो उनके वो रसीले, गठीले मम्मे थे जिनके बारे में सोचकर न जाने मैंने कितनी राते काटी थी। मैं उन्हें बेतहासा चूमने और काटने लगा वो बोली आराम से मैं कहीं भागने वाली नहीं हूं। पर मैं कहाँ रुकने वाला था, फिर मैंने पैंटी को फार दिया।
फिर हैम 69 की पोजीशन में आ गए। मैं उनके चूत को चाट रहा था और वो मेरे लन्ड को।
वो बोली अब बर्दास्त नही हो रहा है राजा अब मुझे तुम्हारा लण्ड मेरे we चूत की गहराइयों में चाहिए। मैं बोला इतनी भी क्या जल्दी है रानी। क्योंकि जो मजा ओरल में है वो पांच मिनट की चूत चुदाई में कहाँ। जब वो मुझे जोर देने लगी तो मैं भी ज्यादा इन्तेजार न कराना बेहतर समझा। वो सीधा लेट गई और मैं अपने लौरे को चूत में डालने लगा पर मेरी हर कोशिश बर्बाद जा रही थीं तब उन्होंने कहा मैंने कहा था न तुम्हें बहुत कुछ सीखना है बच्चे। वो जबभी मुझे बच्चा बोलती थी मुझे थोड़ा गुस्सा आ जाता था। फिर उन्होंने पकड़कर मेरे लन्ड को अपने चूत पे सेट किया और धक्का देने कहा। मैंने जोर से धक्का दिया आधा ही लन्ड अंदर गया था कि वो जोर से चिल्लाई मैंने उनके मुह को बंद कर दिया वो बोली बहुत दर्द हो रहा है पर तुम रुकना नही। फिर मैंने उनके होठों को चूमा और एक जोरदार धक्का दिया। मेरा पूरा लन्ड उनकी बच्चेदानी से टकरा रहा था। उनकी चीखे मेरे होंठो के बीच दबकर रह गयी।
मैं थोड़ी देर के लिए अपने लन्ड को रोके रखा और उनके निप्पल्स के साथ खेलने लगा ताकि उनका दर्द मजे में तब्दील हो सकें। थोड़ी देर के खेल के बाद वो तैयार थीं। अब मैं धीरे धीरे झटके मारने लगा। उन्हें मजा आ रहा था वो बोल रहीं थीं चोदो मुझे अपनी रखैल बना लो। मैं बोला आज से तू मेरी पर्सनल राँड है, मैं जब भी बुलाऊ चली आना। वो बोली जो हुक़्म मेरे मलिक।
अब मैंने अपनी रफ्तार बढ़ा दी थी। मैं पहले ही दो बार झर चुका था क्योंकि ये मेरा पहली बार था। इस दौरान वो भी दो बार झर गयी थी। मैं थक चुका था फिरभी एक और राउण्ड कोशिश करना चाहता था। मैंने झटके तेज कर दिए वो भी बोली चोदो राजा इस चूत का सारा रास निकाल दो काफी दिनों से भूखी है। कुछ ही झटको बाद दोनों साथ साथ झर गए।
मैं उनके ऊपर लेटा रहा। उनके मम्मे के साथ खेल रहा था। उनको आँखों मे सुकून और संतोष का भाव दिख रहा था।
आगे की बात अगले भाग में।
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