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एक गंभीर लेखक के तौर पर आज ये मेरी कहानी लिखने की तीसरी कोशिश है.
60 फीसदी रियल इवेंट और 40 फीसदी इमेजिनेशन का भरपूर संगम, एक मादक जिसम की मालकिन के कामुक जिंदगीनामे का ये नरेशन है.
जो कोई और नहीं बल्कि मेरी मम्मी पदमा है.
अभी मेरी मम्मी 52 साल की है. भरा हुआ गदराया बदन.
भरे हुए वक्ष/चुचों पर मटर के दानों के साइज़ का गोल नुकीला निप्पल, हलके भूरे रंग का अरोला. गहरी नाभि.
आज मेरी मम्मी 52 साल की हैं, लेकिन उनका बदन अभी भी गदराया हुआ, भरा-पूरा और किसी भी इंसान जिसके पेट के निचे दो टट्टे और एक लुल्ली लटक रही है, वो मेरी मम्मी को देखकर उत्तेजित हो ही जाता है और उसका लुल्ली तुरंत खड़ा होकर लंड बन जाता है।
फुल जवानी की चरम सीमा पर, जहां पदमा का हर हिस्सा तना हुआ, मुलायम और कसा हुआ था। मम्मी का बदन गोरा-चिट्टा था, लेकिन वो गर्मी से थोड़ा सा सुनहरा चमकता था, जैसे रोजाना घर के काम और बाजार की धूप ने उसे एक नैचुरल ग्लो दे दिया हो।
कमर पतली लेकिन मजबूत, जहां से ऊपर भरे हुए स्तन शुरू होते थे – बड़े, गोल, भारी लेकिन बिल्कुल सख्त, जैसे कोई भी हाथ लगाए तो उछल पड़ें।
ब्लाउज के नीचे से मम्मी की चुचिया हमेशा ऊपर उठे हुए और उभरे रहते थे, साड़ी का पल्लू सरकने पर cleavage इतनी गहरी कि नजरें अटक जातीं।
निप्पल्स छोटे लेकिन नुकीले, मटर के दाने जितने, जो ठंड में या शरारत में तुरंत खड़े हो जाते – हल्के भूरे अरोला के बीच में वो गुलाबी-भूरे मिले हुए, संवेदनशील इतने कि हल्की सी हवा से भी सिहरन हो जाती।
पेट सपाट, लेकिन थोड़ा मुलायम – बच्चे के बाद भी टाइट, और नाभि इतनी गहरी कि उंगली अंदर डालने पर गर्माहट महसूस होती।
जांघें मोटी, गोरी, कसी हुई – चलते वक्त आपस में रगड़तीं, साड़ी की सिलवटें बनातीं, और जब वो झुककर काम करतीं तो जांघों का वो भराव साफ उभर आता।
गांड सबसे कमाल की – गोल, उभरी हुई, थिरकते हुए चुत्तड़, पीछे से देखकर लगता था कोई घोड़ी अपनी गाड़ मटका रही है और अब उसके ऊपर घोडा अपना लोड़ा लेकर चढ़ जायेगा. साड़ी में वो लहराती थी.
बाहें गोरी, मोटी लेकिन सुडौल, कंधे चौड़े – जब वो बाल बांधतीं तो बाजू की मांसपेशियां हल्की उभर आतीं। चेहरा – बड़ी-बड़ी आंखें, काजल लगी हुई, होंठ गुलाबी, रसीले और मोटे, मुस्कुराने पर गालों पर डिम्पल, और वो माथे पर छोटी सी बिंदी जो उनकी संस्कारी लुक को और गरम बनाती थी।
कुल मिलाकर, मेरी माँ 27 साल की पदमा एक ऐसी औरत थीं जिनकी बॉडी हर मर्द को पागल कर सकती थी – भरी हुई, कसी हुई, मुलायम लेकिन ताकतवर, और अंदर से जल रही हुई। आज जब याद करता हूं, तो लगता है कि उस उम्र में वो रंडी जैसी नहीं, बल्कि एक ऐसी जवान मादा थी जो हर समय नर से मिलन करने के लिए हीट पर ही चढ़ी रहती हो.

60 फीसदी रियल इवेंट और 40 फीसदी इमेजिनेशन का भरपूर संगम, एक मादक जिसम की मालकिन के कामुक जिंदगीनामे का ये नरेशन है.
जो कोई और नहीं बल्कि मेरी मम्मी पदमा है.
अभी मेरी मम्मी 52 साल की है. भरा हुआ गदराया बदन.
भरे हुए वक्ष/चुचों पर मटर के दानों के साइज़ का गोल नुकीला निप्पल, हलके भूरे रंग का अरोला. गहरी नाभि.
- भरे हुए उन्नत उरोज(स्तन/वक्ष/चूची), जो सांस के साथ ऊपर-नीचे लहराते हैं,
- और उन पर मटर के दानों जैसे गोल-नुकीले निप्पल्स,
- हल्के भूरे रंग का अरोला जो उत्तेजना में और गहरा हो जाता है।
- गहरी नाभि, जो पेट की सपाट चादर में एक गड्ढे की तरह लगती है।
फुल जवानी की चरम सीमा पर, जहां पदमा का हर हिस्सा तना हुआ, मुलायम और कसा हुआ था। मम्मी का बदन गोरा-चिट्टा था, लेकिन वो गर्मी से थोड़ा सा सुनहरा चमकता था, जैसे रोजाना घर के काम और बाजार की धूप ने उसे एक नैचुरल ग्लो दे दिया हो।
कमर पतली लेकिन मजबूत, जहां से ऊपर भरे हुए स्तन शुरू होते थे – बड़े, गोल, भारी लेकिन बिल्कुल सख्त, जैसे कोई भी हाथ लगाए तो उछल पड़ें।
ब्लाउज के नीचे से मम्मी की चुचिया हमेशा ऊपर उठे हुए और उभरे रहते थे, साड़ी का पल्लू सरकने पर cleavage इतनी गहरी कि नजरें अटक जातीं।
निप्पल्स छोटे लेकिन नुकीले, मटर के दाने जितने, जो ठंड में या शरारत में तुरंत खड़े हो जाते – हल्के भूरे अरोला के बीच में वो गुलाबी-भूरे मिले हुए, संवेदनशील इतने कि हल्की सी हवा से भी सिहरन हो जाती।
पेट सपाट, लेकिन थोड़ा मुलायम – बच्चे के बाद भी टाइट, और नाभि इतनी गहरी कि उंगली अंदर डालने पर गर्माहट महसूस होती।
जांघें मोटी, गोरी, कसी हुई – चलते वक्त आपस में रगड़तीं, साड़ी की सिलवटें बनातीं, और जब वो झुककर काम करतीं तो जांघों का वो भराव साफ उभर आता।
गांड सबसे कमाल की – गोल, उभरी हुई, थिरकते हुए चुत्तड़, पीछे से देखकर लगता था कोई घोड़ी अपनी गाड़ मटका रही है और अब उसके ऊपर घोडा अपना लोड़ा लेकर चढ़ जायेगा. साड़ी में वो लहराती थी.
बाहें गोरी, मोटी लेकिन सुडौल, कंधे चौड़े – जब वो बाल बांधतीं तो बाजू की मांसपेशियां हल्की उभर आतीं। चेहरा – बड़ी-बड़ी आंखें, काजल लगी हुई, होंठ गुलाबी, रसीले और मोटे, मुस्कुराने पर गालों पर डिम्पल, और वो माथे पर छोटी सी बिंदी जो उनकी संस्कारी लुक को और गरम बनाती थी।
कुल मिलाकर, मेरी माँ 27 साल की पदमा एक ऐसी औरत थीं जिनकी बॉडी हर मर्द को पागल कर सकती थी – भरी हुई, कसी हुई, मुलायम लेकिन ताकतवर, और अंदर से जल रही हुई। आज जब याद करता हूं, तो लगता है कि उस उम्र में वो रंडी जैसी नहीं, बल्कि एक ऐसी जवान मादा थी जो हर समय नर से मिलन करने के लिए हीट पर ही चढ़ी रहती हो.

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