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Incest आखिर पापा से चुदवा लिया मैंने

Xabhi

"Injoy Everything In Limits"
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अब आगे की कहानी मैं आपको थर्ड पर्सन में बताती हूँ|

रात को खाने के बाद जयशंकर जी बैठे कुछ हिसाब लगा रहे थे और मम्मी किचन में बिज़ी थी. सुगंधा अच्छी तरह जानती थी कि उसकी माँ किचन से एक घंटे पहले बाहर नहीं आने वाली. वो सारा काम निपटा कर ही बाहर आएंगी और सीधे सोने जाएंगी.
तब सुगंधा ने सोचा कि अभी कुछ करना चाहिए. वो धीरे से जयशंकर जी के पास आकर बैठ गई. वो एक पतली सी टी-शर्ट और पजामे में थी. उसके अन्दर उसने कुछ नहीं पहना हुआ था.

जयशंकर- तुम्हें कुछ चाहिए क्या सुगंधा?
सुगंधा- क्यों.. कुछ चाहिए होगा.. तभी आपके पास आऊंगी क्या? ऐसे नहीं बैठ सकती?
जयशंकर- अरे बेटी, तू तो मेरी जान है.. तुझे बैठने से कौन रोक सकता है?
सुगंधा- पापा पहले आप मुझे गोद में बिठा कर मेरे सर की मालिश करते थे ना.. बहुत अच्छा लगता था. मगर अब तो आप इतने बिज़ी हो गए हो कि मुझ पर ध्यान ही नहीं देते. बस सारा दिन काम काम करते हो.
जयशंकर- अरे तब तू छोटी थी.. इसलिए गोद में बैठा लेता था. अब तू बड़ी हो गई है.
सुगंधा- क्या पापा मैं कहाँ बड़ी हुई हूँ. वैसी ही तो हूँ.. आप बस बहाना कर रहे हो. साफ-साफ बोल दो ना कि आप मुझे प्यार नहीं करते.
जयशंकर- अरे ऐसा कुछ नहीं है बेटी.. तुम तो मेरी जान हो. मैं तुमसे प्यार कैसे नहीं करूँगा.. ऐसा हो सकता है क्या?
सुगंधा- अच्छा ये बात है… तो चलो ये काम को करो साइड में और मुझे पहले की तरह अपनी गोद में बिठा कर मेरी मालिश करो.

जयशंकर जी रात को सिर्फ़ लुंगी पहनते थे.. अन्दर कुछ नहीं और आज तो सुगंधा ने भी कुछ नहीं पहना था. अब जयशंकर जी उसे कुछ कह पाते, तब तक वो उनकी गोद में बैठ गई. जयशंकर जी का लंड सीधा सुगंधा की मुलायम गांड के नीचे दब गया.
जयशंकर जी कुछ समझ पाते, तब तक सुगंधा ने दूसरा पासा फेंक दिया- चलो पापा, अब मेरी गर्दन के पीछे से दबाओ, सर की मसाज करो.. जैसे आप पहले करते थे.

सुगंधा की गांड का स्पर्श पाकर लंड हरकत में आ गया. उसमें धीरे-धीरे तनाव आने लगा क्योंकि लंड और गांड के बीच बस जयशंकर जी की लुंगी और सुगंधा का पतला पजामा ही था. जयशंकर जी का लंड अकड़ रहा था, जिसे सुगंधा ने भी महसूस किया मगर वो तो अनजान बन कर बस अपने पापा को सिड्यूस कर रही थी.


सुगंधा- अब करो ना पापा.. क्या सोचने लगे?
जयशंकर जी की तो हालत देखने लायक थी मगर उन्होंने कुछ ग़लत नहीं सोचा और सुगंधा की गर्दन पर धीरे-धीरे दबाने लगे.. जैसे पहले करते थे.

सुगंधा अब किसी ना किसी बहाने हिल रही थी, जिससे गांड का दबाव लंड पे पड़ता और जयशंकर जी बस हल्की आह.. करके रह जाते.

सुगंधा- उफ़ पापा मेरी पीठ पे खुजली हो रही है.. प्लीज़ खुज़ला दो ना आप.

जयशंकर जी ने टी-शर्ट के ऊपर से खुज़ाया तो सुगंधा ने कहा- ऐसे नहीं.. आप मेरी टी-शर्ट ऊपर करके खुजाओ ना.

जयशंकर जी ने टी-शर्ट थोड़ी ऊपर की तो सुगंधा आगे की ओर झुक गई- पापा थोड़ा ऊपर करो ना प्लीज़.
जयशंकर- अरे कहाँ.. तू ठीक से बता ना?
सुगंधा- जहाँ आप कर रहे हो.. उससे थोड़ा ऊपर करो. वहीं खुजली हो रही है.

जयशंकर जी का हाथ सुगंधा की नंगी पीठ पर था.. जब उन्होंने टी-शर्ट और ऊपर की तो वो समझ गए कि सुगंधा ने ब्रा नहीं पहनी है.
सुगंधा- आह.. पापा यहीं.. हाँ अच्छे से करो ना.

जयशंकर जी का हाथ वहां था, जहाँ ब्रा के स्ट्रीप होते हैं. अब एक बाप के अन्दर धीरे-धीरे शैतान जाग रहा था, वो सोच रहे थे कि सुगंधा नादान है, इसे क्या पता चलेगा.. थोड़ा मज़ा ले लेना चाहिए.

जयशंकर जी ने खुजाते हुए एक उंगली थोड़ी आगे की तरफ़ निकाली. वो शायद सुगंधा के मम्मों को टच करना चाहते थे मगर बाप और बेटी के बीच इतनी जल्दी ये सब होना बहुत मुश्किल होता है. वो थोड़ा डर भी रहे थे तो बस उन्होंने एक बार कोशिश की, उसके पापा ने थोड़ा हॉंसला करके फिर अपना हाथ आगे बढ़ाया और फिर डरते डरते धीरे से अपनी एक उंगली अपनी बेटी के मुम्मों पर फेरी. दोनो के मुँह से सिसकारी निकल पड़ी. जयशंकर का लंड तो इतना टाइट हो गया था की जैसे फट जाएगा. उन्होने धीरे से फिर दुबारा से अपनी उंगली अपनी बेटी के मुम्मों पर फेरी. जब उन्हे अपनी बेटी से कोई भी नाराज़गी जैसा ना लगा तो फिर धीरे से उन्होने अपनी उंगली फिर बेटी के निपल पर फेर दी.

सुगंधा की तो साँस बहुत तेज चलने लगी थी. और उसकी चूत में तो जैसे पानी का झरना ही बहने लगा था. बाप बेटी दोनो बहुत गर्म हो गये थे. सुगंधा को लग रहा था की यदि ऐसा ही चलता रहा तो वो जल्दी ही अपने पापा से चुड़वाने में कामयाब हो जाएगी इसलिए वो चुपचाप बैठी अपने सखत हो चुके निप्पेल पर अपने पापा की उंगली का मज़ा लेती रही. इतने में अचानक किचन से उसकी मुम्मी के बाहर आने की आवाज़ आई तो जाई जी ने जल्दी से अपने हाथ अपनी बेटी के सख़्त मुम्मों पर से हटा लिए और फिर जल्दी से टी-शर्ट नीचे कर दी.

जयशंकर- बस हो गई ठीक.. चल अब उठ मुझे काम भी करना है.
सुगंधा- अरे अभी दो मिनट भी नहीं हुए पापा.. प्लीज़ गर्दन पे करो ना.. आप बहुत अच्छा करते हो, जिससे नींद बहुत अच्छी आती है.

सुगंधा धीरे-धीरे गांड को हिला रही थी.. जिससे लंड अब बेकाबू हो गया और ऊपर से जयशंकर जी ये जान गए कि सुगंधा ने ब्रा नहीं पहनी और गांड की रगड़ से उनको समझने में देर नहीं लगी कि पैंटी भी नहीं है. अब तो उनका लंड एकदम टाइट हो गया और उसमें दर्द भी होने लगा.

जयशंकर- अच्छा करता हूँ, एक मिनट उठ और ठीक से बैठ जा.
सुगंधा अपने मन में बोली कि पता है पापा.. आपका लंड खड़ा हो गया है, मगर सॉरी पापा इसको खड़ा करूँगी तभी आप किसी के साथ करने को तैयार होंगे.

जयशंकर- क्या सोच रही है.. उठ ना एक बार?
सुगंधा- मैं उठ जाऊंगी तो आप मुझे दोबारा नहीं बैठाओगे.
जयशंकर- अरे बैठ जाना तू… अच्छा थोड़ी उठ जा, बस फिर बैठ जाना ओके.

सुगंधा थोड़ी सी ऊपर हुई तो जयशंकर जी ने जल्दी से लंड को एड्जस्ट किया. अब वो लुंगी में तंबू बना रहा था, जैसे ही सुगंधा बैठी.. उन्होंने लंड को दोनों जाँघों के बीच से आगे निकाल दिया. पहले तो उनका लंड सिर्फ़ अपनी बेटी की चुतड़ों पर ही घिस रहा था पर अब ज्यों ही उनका लंड अपनी बेटी के दोनो टाँगों के बीच से आगे निकला तो वो सीधा चूत पर ही जा कर टकराया. बाप बेटी दोनो के ही मुँह से ज़ोर की सिसकारी निकल पड़ी.

सुगंधा अब तक जो भी कर रही थी, ये उसके लिए आसान नहीं था मगर वो हिम्मत करके सब कर रही थी. मगर जब अपने पापा का लंड उसने सीधे चुत पे महसूस किया तो उसकी जान निकल गई.

जयशंकर अपने मन में सोच रहे थे कि उफ़ ये क्या हो रहा है.. मैं अपनी ही बेटी की वजह से गर्म क्यों हो रहा हूँ.. नहीं ये ग़लत है.

सुगंधा मन में सोच रही थी कि आह.. पापा.. आपका लंड तो बहुत तन गया.. मेरी चुत ने अगर पानी छोड़ दिया तो मेरा पजामा गीला हो जाएगा उफ़ नहीं..

दोनों चुपचाप थे मगर ये चुप्पी ज़्यादा देर नहीं रही

अब सुगंधा ने ऐसी हरकत कर दी, जिससे जयशंकर जी के अन्दर का बाप छुप गया और एक उत्तेजित मर्द बाहर आ गया.

सुगंधा पीछे मुड़ी और उसने अपने पापा के गाल पे जोरदार किस कर दी और साथ ही साथ अपनी चुत को जल्दी से एक-दो बार लंड पे अच्छे से रगड़ भी दिया- आई लव यू पापा.. आप बहुत अच्छे हो.. रियली आप वर्ल्ड के बेस्ट पापा हो.
जयशंकर जी अब अपना कंट्रोल खो चुके थे. उन्होंने भी सुगंधा को कस के पकड़ लिया और अपना हाथ इस तरह सुगंधा के पेट पर रखा कि जब वो चाहे बस हल्का सा हाथ ऊपर करते और उस कमसिन कन्या के चूचे छू लेते.

थोड़ी देर ये नाटक चलता रहा. अब दोनों ही ज़्यादा उत्तेजित हो गए थे, सुगंधा की चुत रिसने लगी थी, अब ज़्यादा देर बैठना ख़तरे से खाली नहीं था और यही हाल जयशंकर जी का था. उनको लग रहा था अगर कुछ देर ऐसे ही चलता रहा तो वो अपना आपा खो देंगे और सुगंधा के मम्मों को मसल देंगे.

सुगंधा- आह.. पापा.. अपने आज कितने दिनों बाद ऐसे किया, मुझे बहुत अच्छा लगा. अब मुझे जाना चाहिए, आप अपना काम कर लो.
इतना कहते हुए सुगंधा उठ गई और बहुत आराम से पीछे मुड़ी ताकि जयशंकर जी को संभलने का मौका मिल जाए और वो लंड जो तना हुआ है उसे वो छुपा लें.

जयशंकर जी ने वैसा ही किया. जल्दी से उन्होंने लुंगी को ऊपर की तरफ़ समेट लिया, जिससे लंड का उभार दिखाई देना बंद हो गया.

सुगंधा अब जयशंकर जी के ठीक सामने खड़ी थी मगर उसने एक ग़लती कर दी उसे जल्दी वहां से निकल जाना चाहिए था क्योंकि चुत की जगह पे हल्का सा गीलापन था और जयशंकर जी की नज़र सीधी वहीं चली गई. जब सुगंधा को ये अहसास हुआ उसके तो पैर वहीं जम गए. अब उससे ना रुकते बन रहा था ना जाने की उसमें हिम्मत आ रही थी.


जयशंकर- जाओ सुगंधा बेटा.. अब सो जाओ.
सुगंधा- ज्ज..जी पापा बाय.
इससे ज़्यादा सुगंधा कुछ ना बोल सकी और फ़ौरन वहां से चली गई.

जयशंकर- इस लड़की को ये क्या हो गया. बिना ब्रा-पैंटी के मेरी गोद में बैठ गई और इसके नीचे गीलापन हुआ.. कहीं इसने लंड को महसूस तो नहीं किया. नहीं नहीं.. ये मैं क्या सोच रहा हूँ सुगंधा बच्ची है, ये बस इत्तेफ़ाक से हुआ है.
जयशंकर जी काफ़ी देर तक ऐसे ही बड़बड़ाते रहे, फिर मम्मी आ गई और वो अपने हिसाब में बिज़ी हो गए.
मम्मी- आपको सोना नहीं है क्या जी??
जयशंकर- तुम सो जाओ, मुझे थोड़ा काम है.. मैं बाद में सो जाऊंगा.

उधर सुगंधा सीधे अपने बिस्तर पर जाकर लेट गई और उस पल को याद करने लगी.

सुगंधा- आज तो गड़बड़ हो गई.. शायद पापा ने मेरी गीली चुत देख ली.. मगर मैंने ये ठीक किया क्या? अब पापा सारी रात परेशान रहेंगे. माँ तो मानेगी भी नहीं.. काश किसी तरह उनका पानी निकल जाए तो उन्हें थोड़ा सुकून मिल जाए. ये माँ भी ना सेक्स नहीं करती हैं. कम से कम लंड चूस कर ही पापा को शांत कर सकती हैं.. मगर नहीं वो बिल्कुल नहीं करने वालीं.. काश मैं कुछ कर पाती.

बहुत देर तक सुगंधा ऐसे ही अपने आपसे बातें करती रही. फिर उसने सोचा कि अगर मौका मिल जाए तो शायद वो कुछ करेगी.

सुगंधा ऐसे ही ख्यालों में एक घंटे तक बिस्तर पर पड़ी रही, फिर अचानक उसने बाहर कुछ आहट सुनी तो वो जल्दी से उठी और बाहर गई. उसने देखा कि उसके पापा किचन से पानी ले रहे थे.

सुगंधा- अरे पापा आप सोये नहीं अभी तक..?
जयशंकर- बस अब सोने जा रहा हूँ.. मगर तू क्यों जागी हुई है? तुझे नींद नहीं आ रही क्या?
सुगंधा- कब से सोने की कोशिश कर रही हूँ.. मगर नींद आती ही नहीं.
जयशंकर- अच्छा ये बात है तो चल आज मैं तुझे सुला देता हूँ जैसे पहले सुलाता था.
सुगंधा- ओह वाउ पापा.. रियली मज़ा आएगा.. आज कितने टाइम बाद आपकी गोद में सर रख कर सोऊंगी और आप मेरे बालों में हाथ घुमा कर मुझे सुलाओगे.

जयशंकर जी सुगंधा के कमरे में आकर बेड पर पालथी मारकर बैठ गए और सुगंधा उनकी जाँघ पर सर रख कर लेट गयी.
जयशंकर- अब तू अपनी आँख बंद करके सोने की कोशिश कर.. मैं तेरे सर को सहला कर तुझे सुलाता हूँ.. ठीक है ना!
सुगंधा ने ‘ठीक है..’ कहा और आँखें बंद करके सोने की कोशिश करने लगी. थोड़ी देर ये सब चलता रहा जयशंकर जी बड़े प्यार से उसके सर पर हाथ घुमा रहे थे.

सुगंधा को अचानक अहसास हुआ कि वो पापा के लंड के कितने करीब है. वैसे तो उस वक़्त लंड सोया हुआ था, मगर सुगंधा के दिल में आया कि ये अच्छा मौका है, वो लंड के एकदम करीब है. अगर थोड़ी कोशिश करेगी तो उसके मुँह से लंड टच हो जाएगा.. मगर उसके लिए पहले लंड को खड़ा करना जरूरी है. फिर उसके दिमाग़ में एक आइडिया आया.

सुगंधा- पापा मेरे मुँह पर कोई कपड़ा डाल दो ना.. ऐसे तो मुझे नींद ही नहीं आएगी.
जयशंकर- अच्छी बात है.. तो ऐसा कर कोई दुपट्टा डाल ले या फिर ये चादर डाल कर सो जा, मैं चादर के ऊपर से तेरा सर सहला दूँगा और तुझे नींद आ जाएगी.
सुगंधा- हाँ ये ठीक रहेगा और पापा सिर्फ़ सर मत सहलाना.. गर्दन और कंधे भी दबाना.. मुझे अच्छा लगता है.
जयशंकर- अच्छा कर दूँगा. चल अब ये चादर डाल ले और सोने की कोशिश कर.

सुगंधा ने मुँह पर चादर डाल ली और जयशंकर जी उसके सर को सहलाने लगे. अब सुगंधा ने अपने हाथ चादर के अन्दर कर लिए थे और बहुत हल्के से वो लुंगी के ऊपर से लंड को छूने लगी. यानि कुछ इस तरह से छूने लगी कि जयशंकर जी को जल्दी समझ में नहीं आता कि वो टच कर रही है या उनका लंड ही वहाँ है.

सुगंधा की कोशिश कामयाब होने लगी. लंड महाराज इतनी सी छुवन भी भाँप गए और बस ख़ुशी के मारे फूलने लगे. अब जयशंकर जी का लंड खड़ा होगा तो उन्हें तो पता होगा ही ना, बस वो बेचैन हो गए और उन्होंने चादर में हाथ डाल कर लंड को एड्जस्ट किया ताकि सुगंधा को पता ना लगे. मगर सुगंधा तो अब फास्ट हो रही थी, तो फ़ौरन उसने जयशंकर जी को टोक दिया.

सुगंधा- पापा आप सर दबाओ ना.. चादर के अन्दर क्यों हाथ ला रहे हो.
जयशंकर- अरे वो थोड़ी खुजली हो रही थी तो बस खुजाने के लिए लाया था. तू सोने की कोशिश कर.. ऐसे ही बोलती रहेगी क्या?
सुगंधा- अच्छा अच्छा सो रही हूँ मगर अबकी बार आपको खुजली हो, तो मुझे बता देना.. मैं कर दूँगी. आप बस मेरा सर सहलाओ.

जयशंकर जी ने ‘ठीक है..’ कहा और फिर सर को सहलाने लगे. अब सुगंधा फिर से लंड पर उंगली घुमा रही थी और लंड था कि बस अकड़े जा रहा था.

जयशंकर जी ने बहुत ध्यान लगाया कि लंड से कुछ टच हो रहा है मगर सुगंधा इतने हल्के तरीके से छू रही थी, जिससे जयशंकर जी को समझ नहीं आ रहा था कि सुगंधा छू रही है या कपड़े की रगड़ से लंड खड़ा हुआ है.

अब जयशंकर जी सुगंधा के कंधे दबाने लगे और सुगंधा के चिकने जिस्म पर उनका हाथ लगते ही लंड ने जोरदार अंगड़ाई ली. अब लंड अपने पूरे शवाब पर आ गया था. सुगंधा को अब भी पता नहीं चल रहा था कि लंड किस पोज़िशन में है, वो बस हल्की सी उंगली टच कर रही थी. फिर उसने करवट लेने के बहाने जल्दी से पूरा हाथ लंड पर लगा दिया और उसको ये जानकार झटका लगा कि पापा का लंड काफ़ी बड़ा और एकदम कड़क है.
ये इतना अचानक हुआ कि जयशंकर भी समझ नहीं पाए कि सुगंधा ने जानबूझ कर लंड छुआ या अंजाने में हो गया.

सुगंधा के करवट लेने के बाद सारा मामला ही बदल गया. जयशंकर जी की लुंगी थोड़ी सरक गई और लंड का टोपा बाहर निकल आया. ये बात दोनों को ही नहीं पता थी. मगर जब सुगंधा थोड़ी आगे हुई उसके होंठ सीधे सुपारे से टच हुए. तो उसी पल जयशंकर जी भी समझ गए कि लंड बाहर निकल गया है. मगर वो कुछ नहीं बोले और वैसे ही सुगंधा की टी-शर्ट में हाथ डालकर उसकी गर्दन और पीठ को सहलाते रहे.

सुगंधा ने सोचा ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा. उसने धीरे से अपनी जीभ निकाल कर सुपारे पर घुमाई और जयशंकर जी फ़ौरन हरकत में आ गए.
जयशंकर- सुगंधा सो गई क्या.. कुछ बोल तो?
सुगंधा ने सांस रोक ली और चुपचाप वैसे ही पड़ी रही.

जयशंकर जी को लगा कि सुगंधा शायद सो गई है. उन्होंने धीरे से चादर हटाई तो अन्दर का नजारा देख कर उनके होश उड़ गए.

सुगंधा करवट लेकर सोई हुई थी और लंड पूरा बाहर था. सुगंधा के होंठ लंड से एकदम सटे हुए थे.

ये नजारा देख कर एक पल के लिए जयशंकर जी सब कुछ भूल गए और उनकी Xforum जाग गई. सुगंधा के नर्म होंठ लंड से सटे हुए थे और जयशंकर जी के शरीर में करंट दौड़ने लगा था. उन्होंने लंड को हाथ से पकड़ा और सुगंधा के होंठों पे रगड़ने लगे.

सुगंधा इस हमले के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी. वो घबरा गई और जल्दी से सीधी होकर लेट गई. अब उसकी साँसें तेज चल रही थीं और उसके चूचे साँसों के साथ ऊपर-नीचे होने लगे.

जयशंकर जी ने जल्दी से लुंगी ठीक की और लंड को अन्दर कर लिया. मगर उनकी नज़र अब सुगंधा के मदमस्त मम्मों पर जा टिकी.

जयशंकर जी ने एक-दो बार सुगंधा को आवाज़ दी. उसे हिलाया.. मगर वो जस की तस रही. अब सोई होती तो शायद जाग जाती.. मगर जागती हुई को कैसे जगाया जाए.

जयशंकर जी को जब यकीन हो गया कि सुगंधा सो गई है.. उन्होंने डरते हुए अपना एक हाथ सुगंधा के एक चूचे पे रख दिया, मगर उन्होंने कोई हरकत नहीं की, बस चूचे पर हाथ रखे हुए सुगंधा के चेहरे को देखते रहे.

सुगंधा अपने मन में सोचने लगी कि ओह गॉड.. पापा ये क्या कर रहे हो. मेरे चूचे पे हाथ क्यों रख दिया.. उफ़ अब मैं क्या करूँ?

सुगंधा सोच ही रही थी कि क्या करूँ तभी उसके कान में जयशंकर जी की धीमी आवाज़ आई- ओह सुगंधा.. तुम अब बड़ी हो गई हो.. उफ़ तेरे जिस्म में कितनी आग है.. देखो मेरा हाथ तेरे चूचे पे रखा हुआ कैसे जल रहा है. तूने तो आज मेरी आग भड़का दी है.. काश तेरी माँ भी तेरे जैसी गर्म होती. अब मैं क्या करूँ.. कहाँ जाऊं.. कैसे अपने इस लंड को शांत करूँ.

जयशंकर जी की बात सुनकर सुगंधा को बहुत दुख हुआ और वो अपनी माँ को कोसने लगी. फिर उसने डिसाइड किया कि अब जो हो देखा जाएगा. बस वो आज तो अपने पापा को शांत करके ही सोएगी.

जयशंकर जी ने अपना हाथ वापस हटा लिया, शायद वो डर रहे थे और सुगंधा को लगा कि अब शायद वो चले जाएँगे.

सुगंधा मन में बुदबुदाने लगी- ओह गॉड पापा तो जा रहे हैं.. ऐसे तो सारी रात ये परेशान ही रहेंगे. क्या करूँ सुगंधा.. कुछ कर तू.. ओह लगता है मुझे पापा को कुछ नजारा दिखाना ही होगा.

सुगंधा ने पेट पर खुजली के बहाने टी-शर्ट को ऊपर कर दिया और थोड़ी देर खुजा कर वो शांत हो गई. मगर उसके आधे चूचे अब नंगे हो गए और जयशंकर जी उन्हें देख कर अपने होश खो बैठे.

जयशंकर- हे भगवान ये आज मेरे साथ क्या हो रहा है.. मैं जितना सुगंधा से दूर जाना चाहता हूँ, हालात मुझे इसके और करीब ला रहे हैं. अब ऐसा नजारा सामने है, मैं जाऊं या रुकूं.. क्या करूँ.

जयशंकर जी दुविधा में थे. उनका लंड तो अकड़ कर उन्हें इशारा दे रहा था कि कली सामने है और तू जा रहा है.. मसल दे. मगर दिल बोल रहा था कि नहीं वो तेरी बेटी है, ये ग़लत है.. यहाँ से जा चला जा.

जयशंकर जी अभी किसी नतीजे पे पहुँच पाते, तब तक सुगंधा ने दूसरा धमाका कर दिया.

सुगंधा ने धीरे से आँख खोल कर देखा तो जयशंकर जी खड़े हुए कुछ सोच रहे थे. सुगंधा अपने मन में बोल रही थी- लगता है पापा इतने से नहीं रुकेंगे.. कुछ और करना होगा.

सुगंधा ने फिर खुजने के बहाने से अबकी बार अपने पजामे में हाथ डाल दिया और उसे थोड़ा नीचे कर दिया यानि पजामे को बस दो इंच और नीचे करती तो उसकी चुत का दीदार उसके पापा को हो जाता. मगर सुगंधा इतना कैसे कर रही थी, ये वही जानती थी. बिना चुदे ही उसकी गांड फट रही थी. ये तो पिछले दिनों की कुछ गंदी हरकतें थीं, जो उसमें इतनी हिम्मत आ गई. फिर भी डर से उसकी साँसें तेज हो गई थीं.

अब नजारा कुछ ऐसा था टी-शर्ट पूरी ऊपर.. और पजामा नीचे सरका हुआ था, जिससे सुगंधा का पूरा पेट नंगा और आधे मम्मों की झलक दिख रही थी. इसी के साथ उसकी चुत के ऊपर का हिस्सा भी दिख रहा था. इस हालत में एक बाप अपने अन्दर के मर्द के सामने हार गया.

अब जयशंकर की आँखों में सिर्फ़ वासना नज़र आ रही थी. वो धीरे से बिस्तर पर बैठ गए और सुगंधा की टी-शर्ट को पूरा ऊपर कर दिया. अब उस कमसिन कली के 30″ के दिल को छू लेने वाले चूचे पूरे नंगे होकर जयशंकर जी के सामने थे. वो नजारा देख कर उनके होंठ सूख गए. उनका मन कर रहा था कि जल्दी से सुगंधा के पिंक निप्पलों को चूस लें, मगर वो उठ ना जाए.. ये डर भी उनके मन में था.

वो थोड़ी देर ऐसे ही उस नजारे को देखते रहे, फिर हिम्मत करके उन्होंने एक चूचे को हाथ में लिया और धीरे-धीरे उसे दबाने लगे.
सुगंधा की तो हालत खराब थी, वो मुँह को कसके भींचे हुए पड़ी थी कि उसकी कहीं सिसकी ना निकाल जाए.

जयशंकर जी को लगा कि सुगंधा गहरी नींद में है, तो वो थोड़ा खुलकर उसके मम्मों को सहलाने लगे.. उसके निप्पलों को छेड़ने लगे. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद उन्होंने एक निप्पल अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसना शुरू किया. मगर ये कुछ ज़्यादा हो रहा था और सुगंधा के लिए अब अपने आपको रोक पाना मुश्किल था. वो नींद में फिर खुजाने के बहाने हिली और उसने अपनी टी-शर्ट को नीचे कर दिया. इस हरकत के कारण जयशंकर जी फ़ौरन उससे अलग हो गए.

सुगंधा- ओह गॉड.. ये पापा तो कुछ ज़्यादा ही गर्म हो गए हैं.. अब क्या करूँ ऐसे तो इन्हें पता लग जाएगा कि मैं उठी हुई हूँ.. हे भगवान कोई आइडिया दो.. मैं कैसे इन्हें शांत करूँ.

जयशंकर जी थोड़ी देर वैसे ही शांत बैठे रहे.. जब उनको लगा सुगंधा शांत है. तो उन्होंने अबकी बार सुगंधा का पजामा धीरे से नीचे किया और उसकी चुत को देख कर हल्के से बोल पड़े- वाह, क्या मस्त चुत है तेरी सुगंधा.. कोई नसीब वाला ही होगा जिसे तू मिलेगी. अब तूने मेरी आग तो भड़का दी है.. मगर इस लंड को कैसे शांत करूँ. तेरे साथ ज़्यादा कुछ कर भी नहीं सकता, तू जाग गई तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी.

जयशंकर जी बड़बड़ा रहे थे मगर अबकी बार सुगंधा ने एकदम ध्यान दिया तो उसे सब समझ आ गया. तभी उसके दिमाग़ में एक आइडिया आया और वो नींद में बोलने लगी.
सुगंधा- उम्म्म टीना प्लीज़, मुझे भी आईसक्रीम चूसनी है.. उम्म दो ना प्लीज़..

सुगंधा ने अपना मुँह खोल दिया था जयशंकर जी ने सोचा नींद में अपनी सहेली के साथ बात कर रही है. सुगंधा का खुला हुआ मुँह देख कर जयशंकर जी से रहा नहीं गया, वो उसके पास खड़े हो गए और धीरे से अपना सुपारा उसके होंठों पर टिका दिया.

सुगंधा तो ऐसे ही किसी मौके की तलाश में थी. उसने सुपारे को चाटना शुरू किया और मुँह में पूरा लंड लेने की कोशिश करने लगी, मगर जयशंकर जी का लंड काफ़ी मोटा था और सुगंधा नींद में थी तो ऐसे कैसे ले लेती. इससे तो उसकी चोरी पकड़ी जाती मगर उसका ये काम उसके पापा ने आसान कर दिया.

जयशंकर जी ने लंड पर दबाव बनाया और सुपारा उसके मुँह में घुसा दिया. अब सुगंधा धीरे-धीरे अपने पापा का लंड चूसने लगी.

जयशंकर- आह.. सुगंधा तेरी आईसक्रीम के चक्कर में तू अपने पापा का लंड चूस रही है.. उफ्फ बहुत मज़ा आ रहा है.

ये खेल आगे चलता.. इससे पहले एक गड़बड़ हो गई.. बाहर जोर की आवाज़ हुई शायद कोई बर्तन गिरा था और उस आवाज़ के होते ही जयशंकर जी ने जल्दी से लंड मुँह से निकाला और लुंगी में डाल लिया.

ना चाहते हुए भी सुगंधा की आँख खुल गई, शायद घबराहट की वजह से ऐसा हुआ था. मगर उसकी आँखें खुलीं तो सीधे जयशंकर जी की आँखों से मिल गईं. अब सुगंधा का दिमाग़ कंप्यूटर की तरह चलने लगा. एक ही पल में उसने बात को संभाल लिया.

सुगंधा ने एक जोरदार अंगड़ाई ली, जैसे वो बहुत गहरी नींद से जागी हो.

सुगंधा- उम्म्म उम्म्म पापा.. क्या हुआ इतनी जोर से आवाज़ आई.. मैं डर गई कैसी आवाज़ थी ये? और आप अभी तक यहीं हो.. मुझे कब नींद आई, पता भी नहीं चला.
जयशंकर- अरे कुछ नहीं बिल्ली होगी शायद.. तू सो जा.. मैं जाकर देखता हूँ.
सुगंधा- पापा मुझे डर लग रहा है.. प्लीज़ आप देख कर वापस आ जाना. मैं सो जाऊं फिर आप चाहें तो चले जाना.
जयशंकर- अच्छा ठीक है.. तू रुक, मैं बाहर देख कर आता हूँ.

जयशंकर जी बाहर चले गए और सुगंधा बिस्तर पे बैठ गई.

सुगंधा- शिट.. ये क्या किया मैंने.. मुझे ऐसे अचानक आँख नहीं खोलनी चाहिए थी. कहीं पापा को कुछ शक हो गया तो..! अब क्या करूँ वैसे पापा का लंड काफ़ी मोटा है शायद.. इसी लिए मेरे मुँह में नहीं जा रहा था. काश एक बार में देख पाती. अब पापा वापस आएँगे तो क्या करूँ.. कैसे उनको शांत करूँ, कुछ समझ में नहीं आ रहा.

तभी..
जयशंकर- मैंने कहा था ना बिल्ली होगी. उसको मैंने भगा दिया. चल अब तू सो जा, रात बहुत हो गई है. मैं अपने कमरे में जाता हूँ.. नहीं तेरी माँ उठेगी और मुझे वहां नहीं देखेगी तो घबरा जाएगी.


सुगंधा की ज़रा भी हिम्मत नहीं हुई कि वो कुछ बोले या उन्हें रुकने को कहे. उसने बस ‘हाँ’ में गर्दन हिला दी और चादर लेकर सो गई.

जयशंकर जी ने कुछ सोचा, फिर वो भी कमरे में चले गए. अब उनको कहाँ नींद आने वाली थी. बस बार-बार सुगंधा के चूचे और चिकनी चुत ही उन्हें दिखाई दे रही थी. उनका लंड बैठने का नाम नहीं ले रहा था. वो उठे और एक बार सुगंधा के कमरे के पास जाकर रुके, जब उन्हें लगा सुगंधा सो गई तो वो टॉयलेट में जाकर लंड को सहलाने लगे.

अब आपको बता दूँ कि सुगंधा भी सोयी नहीं थी, वो भी उन्हीं पलों को याद कर रही थी. तभी उसे अहसास हुआ कि कमरे के बाहर कोई है तो वो सोने का नाटक करने लगी. जब जयशंकर जी टॉयलेट में चले गए, तो वो धीरे से कमरे से बाहर आई और टॉयलेट के पास जाकर रुक गई.

जयशंकर जी अन्दर बैठे अपने लंड को सहला रहे थे और सुगंधा को याद कर रहे थे.

जयशंकर- आह.. सुगंधा बेटी… ये तूने क्या कर दिया.. उफ्फ तेरे हुस्न को देख कर आज तेरा बाप पागल हो गया. देख लंड कैसे अकड़ा हुआ है.. उफ्फ मैं तेरे होंठों का स्पर्श अभी तक महसूस कर रहा हूँ.. आह.. आह.. चूस ले सुगंधा.. जोर से चूस आह.. मज़ा आ रहा है.

अपने पापा के मुँह से अपने बारे में ऐसी गंदी बातें सुनकर सुगंधा भी उत्तेजित हो गई और उसने वहीं खड़ी रह कर अपने पजामे को नीचे किया. अब वो अपनी चुत को उंगली से रगड़ने लगी थी.

अब सीन देखिए.. अन्दर बाप और बाहर बेटी वासना की आग में जल रहे थे.

काफ़ी देर तक जयशंकर जी सुगंधा के नाम की मुठ मारते रहे और आख़िर उनके लंड ने पानी छोड़ ही दिया, इधर सुगंधा भी झड़ चुकी थी. उसका पूरा हाथ रस से भीग गया था. उसने जल्दी से पजामा ऊपर को किया और जल्दी से अपने कमरे में जाकर लेट गई.

सुगंधा- उफ्फ ये मुझे क्या हो गया था. मैं कैसे बाहर अपनी चुत को रगड़ रही थी. अगर माँ आ जातीं तो सस्स.. आज पानी निकालने में इतना मज़ा क्यों आया.. क्या पापा के बारे में सोच कर? नहीं नहीं.. ये ग़लत है. मुझे बस पापा को किसी और के साथ सेक्स करने के लिए तैयार करना है, इससे ज़्यादा कुछ नहीं.

सुगंधा ऐसे ही सोचती हुई सो गई और उधर जयशंकर जी पानी निकालने के बाद भी शांत नहीं हुए. वो बस रात भर सुगंधा के बारे में सोचते रहे और आख़िरकार उन्हें भी नींद ने अपने आगोश में ले लिया.
सुबह का सूरज क्या नई कहानी लेकर आएगा, ये तो सुबह ही पता लगेगा.

रोज की तरह जयशंकर जी जल्दी उठ गए और चाय पी रहे थे. जब बहुत देर तक सुगंधा अपने कमरे से बाहर नहीं आई.
जयशंकर- अरे आज सुगंधा नहीं उठी क्या.. उसको कॉलेज नहीं जाना क्या?
मम्मी- आपकी याददाश्त कमजोर हो गई है.. बादाम खाया करो, आज सनडे है और सनडे को कौन सा कॉलेज खुलता है?
जयशंकर- अरे हाँ.. याद आया. कल शाम तक तो याद था कि आज दुकान का माल आने वाला है, अभी पता नहीं कैसे भूल गया.
मम्मी- आज भी आप दुकान जाओगे क्या? मैं सोच रही थी कि आज मैं माता के मंदिर होकर आऊँगी.
जयशंकर- तो मुझसे तुझे क्या काम है.. चली जाना, किसने रोका है?

मम्मी- अरे सुगंधा भी तो घर पर है, अब लड़की को अकेली छोड़ कर जाऊं क्या?
जयशंकर- अरे तो मैं कौन सा शाम तक रहूँगा.. बस अभी गया और अभी आया. सामान की लिस्ट चैक करनी है, बाकी तो आदमी देख लेंगे.
मम्मी- ठीक है जी.. आप होकर आ जाओ, तब तक मैं अपना काम निपटा लेती हूँ और अपनी लाड़ली को भी उठा दो.. ताकि उसे भी नाश्ता करवा दूँ.

सुगंधा को उठाने की बात सुनकर जयशंकर जी के जिस्म में करंट दौड़ गया. उन्हें रात वाली बात याद आ गई, वो उठे और सुगंधा के कमरे में चले गए. उस वक़्त सुगंधा सीधी लेटी हुई थी. उसके बाल चेहरे पर थे और सांस के साथ सीना ऊपर-नीचे हो रहा था.

ये नजारा देख कर जयशंकर जी का मन डोल गया, वो उसके पास बैठ गए- सुगंधा उठ जाओ, सुबह हो गई है.

सुगंधा ने कोई रेस्पॉन्स नहीं दिया, वो वैसे ही बेसुध सोई रही. तब जयशंकर जी ने थोड़ी हिम्मत करके उसके मम्मों पे हाथ लगाया और धीरे से दबा दिया.. जिससे सुगंधा की नींद टूट गई और वो उठ गई. जयशंकर जी ने जल्दी से हाथ हटा लिया.
सुगंधा- उउउह क्या है.. पापा सोने दो ना.. आज छुट्टी है. आज तो मेरा बस सोने का मन कर रहा है.
जयशंकर- बच्चे तेरी माँ को मंदिर जाना है. तू उठ जा, नाश्ता कर ले. फिर मुझे भी दुकान जाना है.

सुगंधा उठ कर बैठ गई और उसने एक जोरदार अंगड़ाई ली और अपने पापा से लिपट गई- पापा, आप कितने अच्छे हो.. रात को अपने कितने प्यार से मुझे सुलाया.. मुझे बहुत अच्छी नींद आई.
जयशंकर- अच्छा ऐसी बात है.. तो मैं रोज तुझे ऐसे सुला दूँगा, चल अब उठ जा.
सुगंधा- पापा, आज दुकान मत जाओ ना. माँ भी जा रही हैं, मैं अकेली क्या करूँगी.
जयशंकर- अरे मैं अभी जाकर जल्दी आ जाऊंगा.. बस सामान की लिस्ट देखनी है.. फिर पूरा दिन तेरे साथ ही रहूँगा.

जयशंकर जी के दिमाग़ में अभी भी कोई विचार नहीं आया था. वो बाहर जाकर वापस कुर्सी पे बैठ गए. सुगंधा जल्दी बाहर आ गई उसके बाद नाश्ता किया और अपनी माँ का हाथ बंटाने लगी.

जयशंकर जी वहां से निकल गए.

सुगंधा ने मेनडोर अनलॉक किया हुआ था और खिड़की से छुपकर वो अपने पापा के आने का इन्तजार कर रही थी.

सुगंधा- ओह पापा कहाँ रह गए, आ जाओ ना जल्दी से.. आपके लिए अभी तक मैं नहाई भी नहीं हूँ. आज मैं आपको अपना जिस्म दिखाना चाहती हूँ. मैं आपकी सोई हुई Xforum आज जगा दूँगी. फिर आप किसी को भी चोदने को राज़ी हो जाओगे.

सुगंधा ये बातें सोच ही रही थी तभी उसे पापा आते हुए दिखाई दिए. वो जल्दी से भाग कर अपने कमरे के बाथरूम में चली गई और अपने कपड़े निकाल दिए.

जैसा सुगंधा ने सोचा, ठीक वैसा ही हुआ. जयशंकर जी अन्दर आए और बिना आवाज़ किए वो सीधे सुगंधा के कमरे में आ गए. शायद उनके मन में भी चोर था. सुगंधा ने की-होल से उन्हें आता देखा तो पानी का शावर चालू कर दिया और मज़े से गुनगुनाते हुए नहाने लगी.

जयशंकर जी धीरे से की-होल के पास बैठ गए और जैसे ही उन्होंने अन्दर देखा, उनका लंड एक झटके में खड़ा हो गया.. जैसे कोई बरसों का प्यासा हो.

सुगंधा के जवान जिस्म को देख कर जयशंकर जी के अन्दर वासना भर गई. उनका दिल करने लगा कि अभी अन्दर जाकर उसके खड़े निपल्स को चूस के उसके मदमस्त चूचों को मसल डालें और उसकी कुँवारी चुत का सारा रस पी जाएं. मगर बीच में जो बाप और बेटी के रिश्ते की दीवार थी.. उसको कैसे तोड़ें.

जयशंकर जी ने अपना लंड बाहर निकाल लिया और सुगंधा की सुलगती जवानी को देखते हुए वो लंड को सहलाने लगे.
सुगंधा को पता था कि बाहर उसके पापा उसकी जवानी का मज़ा लूट रहे हैं. ये सोचकर उसके निप्पल हार्ड हो गए, चुत में खुजली होने लगी मगर उसने अपने आप पर काबू रखा. सुगंधा ये बिल्कुल नहीं चाहती थी कि अपने पापा के सामने वो चुत को रगड़े या कुछ ऐसी हरकत करे, जिससे उसके पापा उसे गंदी लड़की समझें. वो तो बस अनजान बन कर अपने पापा को मज़े देना चाहती थी.

जब सुगंधा नहा चुकी तो उसने अपने जिस्म को अच्छे से पौंछा और सिर्फ़ टॉवल लपेट कर वो बाहर आ गई. तब तक जयशंकर जी वहां से बाहर निकल गए थे और फिर उन्होंने बाहर से सुगंधा को आवाज़ दी, जैसे वो अभी-अभी घर में दाखिल हुए हों.

जयशंकर- सुगंधा कहाँ हो तुम? देखो मैं जल्दी आ गया ना.
सुगंधा ने कोई जवाब नहीं दिया और बस मुस्कुराते हुए धीरे से बोली- वाह पापा, मेरे जिस्म को देख कर आँखें सेंक ली, अब बहाना बना रहे हो. वैसे आपका लंड भी तो मेरी चुत की तरह फड़क रहा होगा, उसे तो मैं ही अपने मुँह से चूस-चूस कर ठंडा करूँगी. देखना आप.
सुगंधा- मैं नहा रही थी पापा.. बस अभी कपड़े पहन कर आती हूँ.
जयशंकर- अरे घर में ही तो रहना है, कपड़े पहनने की क्या जरूरत है.

जयशंकर जी को पता नहीं क्या हो गया था. वो कुछ भी बोल रहे थे मगर फ़ौरन उन्हें अहसास हुआ तो बात बदल दी.
जयशंकर- एमेम… मेरा मतलब है जल्दी से कुछ भी पहन ले.. कोई घर में पहनने लायक कपड़े.. समझ गई ना..!
सुगंधा- ओके पापा, बस अभी एक मिनट में आई.

सुगंधा ने अपने कपड़ों में से एक कॉटन की मैक्सी निकाली और पहन ली. इसके अन्दर उसने कुछ नहीं पहना था.

सुगंधा- ये लो आ गई. पापा इस मैक्सी में मैं कैसी लग रही हूँ?
जयशंकर- वाह बहुत अच्छी लग रही हो मगर ये तो वो पुरानी वाली है ना?
सुगंधा- हाँ पापा मगर ये पतली है.. तो इसमें आराम रहता है और वैसे भी आज मैंने ये बहुत दिनों बाद पहनी है.
जयशंकर- अच्छी बात है.. बैठ कर बातें करेंगे.
सुगंधा- पापा पहले आप कपड़े तो बदल लो, ऐसे पैन्ट पहन कर काम करोगे क्या?

जयशंकर जी को लगा सुगंधा सही बोल रही है और वैसे भी उनका इरादा उसके मज़े लेने का था तो पैन्ट में मज़ा नहीं आता, इसलिए वो अन्दर गए और सिर्फ़ लुंगी और बनियान पहन कर आ गए, उसके बाद बाथरूम का लॉक लगा दिया.

जयशंकर- ले भाई, ये काम तो हो गया, अब बोल?
सुगंधा- पापा, पहले आप मेरे साथ कितना रहते थे मगर अब तो आप बहुत बिज़ी रहते हो.. मेरे साथ खेलते ही नहीं.
जयशंकर- अरे मेरा तो बड़ा मन है तेरे साथ खेलने का.. मगर डर लगता है.
सुगंधा- कैसा डर पापा..? मैं आपकी बात का मतलब कुछ समझी नहीं.
जयशंकर- व्व..वो मेरा मतलब है तुझे कोई चोट ना लग जाए इसलिए.
सुगंधा- हा हा हा हम कौन सा कुश्ती लड़ने वाले हैं जो चोट लगेगी.
जयशंकर- हाँ ये भी है. चल आज तेरे मन की बात पूरी करते हैं, बोल क्या खेलेगी?

सुगंधा सोचने लगी कि ऐसा कौन सा खेल खेले, जिससे वो पापा को मज़ा दे सके और उनका लंड भी देख सके. रात से उसके मन में ख्याल था कि पापा का लंड कैसा होगा.

सुगंधा- कुछ समझ में नहीं आ रहा पापा क्या खेल खेलूँ.
जयशंकर- अरे अभी तो बोल रही थी खेलते नहीं. अब खुद ही सोच में पड़ गई. चल ऐसा कर मैं तुझे गोदी में बिठा कर झूला झुला देता हूँ और तेरे सर की मालिश भी कर दूँगा. बोल क्या कहती है.

सुगंधा मन में- अच्छा पापा बड़ी जल्दी है आपको मज़ा लेने की.. मेरी चुत से लंड टच करना चाहते हो क्या.

जयशंकर- अरे कुछ तो बोल.. हाँ या ना.. ऐसे पुतला बन कर क्यों खड़ी हो गई..?

जयशंकर जी की बात सुनकर सुगंधा के दिमाग़ में एक आइडिया आया- वाउ पापा क्या आइडिया दिया है, ये मस्त है इसमें मज़ा आएगा.
जयशंकर- अरे क्या आइडिया आया मुझे भी बता.
सुगंधा- पापा हम एक खेल खेलते हैं जिसमें एक पुतला बन जाएगा और दूसरा उसके जिस्म से छेड़खानी करेगा, लेकिन उसको हिलना नहीं है. वो सिर्फ़ बोल सकता है. ये टाइम देख कर खेलेंगे जो ज़्यादा देर तक टिका रहा, वो जीत जाएगा और हारने वाले की बात मानेगा.
जयशंकर- नहीं नहीं, इसमें कुछ मज़ा नहीं आएगा थोड़ी सी गुदगुदी की और खेल खत्म.. कुछ और सोच, जिसमें मज़ा आए.

सुगंधा ने थोड़ी देर सोचा मगर उसके दिमाग़ में कोई आइडिया नहीं आया, जिससे वो खेल के बहाने पापा को मज़ा दे सके. साथ ही जयशंकर जी भी इसी सोच में थे कि कैसे वो सुगंधा को लंड चुसवाए, उनके दिल में बस यही बात थी कि एक बार सुगंधा उनका लंड चूस दे और वो उसके निपल्स चूस सकें.

सुगंधा- मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा आप सोचो, मुझे तो भूख लगने लगी है. मैं फ़्रीज़ से केला लेकर आती हूँ. आपको भी एक लाकर दूँ क्या.

जयशंकर जी सुगंधा के पास गए और उसके चेहरे को पकड़ कर मुस्कुराने लगे.
सुगंधा- क्या हुआ? केला चाहिए आपको भी?
जयशंकर- नहीं सुगंधा मेरे दिमाग़ में एक खेल आ गया है. तू ये बता अगर केला खाने की वजह चूसा जाए तो कैसा लगेगा?
सुगंधा- हा हा हा पापा, आप भी ना कुछ भी.. ये कैसा खेल हुआ? भला कोई केला भी चूसने की चीज है क्या?
जयशंकर- अरे पगली पता है मुझे.. मगर ये एक खेल है. अच्छा सुन तुझे मैं ठीक से समझाता हूँ. देख इस खेल में आँखें और हाथ बंद होंगे. मैं तुझे फ़्रीज़ की कोई भी चीज जैसे केला हो या कोई सब्जी जैसे भिंडी या तुरयी, कुछ भी मुँह में दूँगा. तू उसे चूस कर बताना वो क्या है?

जयशंकर जी की बात सुनकर सुगंधा की आँखों में चमक आ गई, वो समझ गई इस खेल में उसे लंड चूसने को मिलेगा और साथ ही साथ वो अपने पापा की होशियारी पर फिदा हो गई. मगर उसे थोड़ा शक हुआ अगर जयशंकर जी ने लंड ना चुसवाया तो फिर उसने भी दिमाग़ दौड़ाया और फिर बोली- वाओ पापा, ये गेम तो बहुत मस्त सोचा आपने, मगर फ़्रीज़ में क्या-क्या है ये तो मुझे पता है. फिर सब्जी की तो खुशबू से ही पता लग जाएगा कोई ऐसी चीज चूसने को देना, जिसका आसानी से पता ना लग सके. जैसे पेन या पेन्सिल या कोई भी ऐसी चीज जिसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो. हाँ साथ में सब्जी भी यूज करना ताकि कन्फयूजन रहे और खेल लंबा चले.

जयशंकर जी ये सुनकर बड़े खुश हुए कि सुगंधा ने उनकी मुश्किल आसान कर दी.
जयशंकर- हाँ ऐसे ही करेंगे, चलो अब पहले तुम्हारी आँख और हाथ बाँध दूँ.
सुगंधा- क्यों मेरी क्यों.. आपकी क्यों नहीं? आप टेस्ट करोगे और बताओगे, मैं नहीं बताने वाली.

सुगंधा ने तो जयशंकर जी के अरमानों पर पानी फेर दिया मगर ये भी उसकी अपने पापा को तड़पने की एक साजिश थी.
जयशंकर- अरे नहीं आइडिया मैंने दिया, तो मैं ही पहले खेलूँगा. आँख तुम्हें बंद करनी होगी समझी!
सुगंधा ने थोड़ी ज़िद की, मगर फिर वो मान गई. वैसे भी उसे मानना ही था.

जयशंकर- तुम यहा कुर्सी पर बैठोगी, पीछे तुम्हारे हाथ बाँध दूँगा और आँख पर पट्टी.. ताकि ना तुम छूकर पता कर सको, ना देख कर, समझी!
सुगंधा- पापा इस सबकी क्या जरूरत है मैं हाथ नहीं लगाऊंगी और सच्ची में आँख भी बंद रखूँगी, प्लीज़ ऐसे ही करते है ना.
जयशंकर- नहीं खेल के कुछ नियम होते हैं, उसी हिसाब से खेलना चाहिए.

सुगंधा मान गई तो जयशंकर जी ने उसे कुर्सी पे बैठा कर पीछे हाथ बाँध दिए और आँखें भी बंद कर दीं.
जयशंकर- इन्तजार कर.. बस मैं अभी सब चीजें लेकर आता हूँ हाँ..!
जयशंकर के जाने के बाद सुगंधा दिल ही दिल में बहुत खुश थी कि आज तो उसे पापा का लंड खुलकर चूसने को मिलेगा.

जयशंकर- हाँ तो सुगंधा तैयार हो तुम? और हाँ सिर्फ़ जीभ और होंठों से पता करना है.. किसी भी चीज को दाँत मत लगाना.
सुगंधा मन में- ओह पापा डरो मत.. मैं आपके लंड को प्यार से चुसूंगी, काटूंगी नहीं, बस जल्दी से मेरे मुँह में आप अपना लंड घुसा दो.
जयशंकर- कुछ सुन भी रही है तू.. मैंने अभी क्या कहा तुमसे?
सुगंधा- हाँ पापा सुन लिया, अब शुरू करो.

जयशंकर जी ने पहले सुगंधा के मुँह में रोटी बेलने का बेलन दिया और थोड़ी देर में सुगंधा ने बता दिया. उसके बाद केला, पेन्सिल दिया, वो भी सुगंधा ने बता दिया.

सुगंधा- पापा मैं जीत गई, मैंने सब चीज सही बताई हैं.
जयशंकर- अरे अभी कहाँ.. अब लास्ट चीज बाकी है. इसका नाम बता तब तू जीतेगी.
सुगंधा- अच्छा तो लाओ, उसमें क्या है अभी उसका नाम भी बता देती हूँ.

जयशंकर जी अब उत्तेजित हो गए थे, उन्होंने अपना लंड लुंगी से बाहर निकाला, जो अभी आधा ही खड़ा था.. यानि पूरे शबाब पे नहीं आया था.

जयशंकर- ये अनोखी चीज है सुगंधा, ध्यान से बताना तू.. ठीक है?

इतना कहकर वो लंड को उसके होंठों के एकदम पास ले गए.
Yaar bhai aapki kahani me kamukta ki Inteha Ho gyi. Ek beti ne jaha apne baap ko itna uttejit kr diya ki vo apne land ko apni beti ke muh main daal chusvane se na rok sake... Superb updates bhai sandar jabarjast hot erotic bhai
 

Nasn

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Good story...

Lekin Koi

Married Daughter father
par lambi New Thread Nahin mil rahi hai.
 
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Sameer choudhary

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जयशंकर जी ने बहुत ध्यान लगाया कि लंड से कुछ टच हो रहा है मगर सुगंधा इतने हल्के तरीके से छू रही थी, जिससे जयशंकर जी को समझ नहीं आ रहा था कि सुगंधा छू रही है या कपड़े की रगड़ से लंड खड़ा हुआ है.

अब जयशंकर जी सुगंधा के कंधे दबाने लगे और सुगंधा के चिकने जिस्म पर उनका हाथ लगते ही लंड ने जोरदार अंगड़ाई ली. अब लंड अपने पूरे शवाब पर आ गया था. सुगंधा को अब भी पता नहीं चल रहा था कि लंड किस पोज़िशन में है, वो बस हल्की सी उंगली टच कर रही थी. फिर उसने करवट लेने के बहाने जल्दी से पूरा हाथ लंड पर लगा दिया और उसको ये जानकार झटका लगा कि पापा का लंड काफ़ी बड़ा और एकदम कड़क है.
ये इतना अचानक हुआ कि जयशंकर भी समझ नहीं पाए कि सुगंधा ने जानबूझ कर लंड छुआ या अंजाने में हो गया.

सुगंधा के करवट लेने के बाद सारा मामला ही बदल गया. जयशंकर जी की लुंगी थोड़ी सरक गई और लंड का टोपा बाहर निकल आया. ये बात दोनों को ही नहीं पता थी. मगर जब सुगंधा थोड़ी आगे हुई उसके होंठ सीधे सुपारे से टच हुए. तो उसी पल जयशंकर जी भी समझ गए कि लंड बाहर निकल गया है. मगर वो कुछ नहीं बोले और वैसे ही सुगंधा की टी-शर्ट में हाथ डालकर उसकी गर्दन और पीठ को सहलाते रहे.

सुगंधा ने सोचा ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा. उसने धीरे से अपनी जीभ निकाल कर सुपारे पर घुमाई और जयशंकर जी फ़ौरन हरकत में आ गए.
जयशंकर- सुगंधा सो गई क्या.. कुछ बोल तो?
सुगंधा ने सांस रोक ली और चुपचाप वैसे ही पड़ी रही.

जयशंकर जी को लगा कि सुगंधा शायद सो गई है. उन्होंने धीरे से चादर हटाई तो अन्दर का नजारा देख कर उनके होश उड़ गए.

सुगंधा करवट लेकर सोई हुई थी और लंड पूरा बाहर था. सुगंधा के होंठ लंड से एकदम सटे हुए थे.

ये नजारा देख कर एक पल के लिए जयशंकर जी सब कुछ भूल गए और उनकी Xforum जाग गई. सुगंधा के नर्म होंठ लंड से सटे हुए थे और जयशंकर जी के शरीर में करंट दौड़ने लगा था. उन्होंने लंड को हाथ से पकड़ा और सुगंधा के होंठों पे रगड़ने लगे.

सुगंधा इस हमले के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी. वो घबरा गई और जल्दी से सीधी होकर लेट गई. अब उसकी साँसें तेज चल रही थीं और उसके चूचे साँसों के साथ ऊपर-नीचे होने लगे.

जयशंकर जी ने जल्दी से लुंगी ठीक की और लंड को अन्दर कर लिया. मगर उनकी नज़र अब सुगंधा के मदमस्त मम्मों पर जा टिकी.

जयशंकर जी ने एक-दो बार सुगंधा को आवाज़ दी. उसे हिलाया.. मगर वो जस की तस रही. अब सोई होती तो शायद जाग जाती.. मगर जागती हुई को कैसे जगाया जाए.

जयशंकर जी को जब यकीन हो गया कि सुगंधा सो गई है.. उन्होंने डरते हुए अपना एक हाथ सुगंधा के एक चूचे पे रख दिया, मगर उन्होंने कोई हरकत नहीं की, बस चूचे पर हाथ रखे हुए सुगंधा के चेहरे को देखते रहे.

सुगंधा अपने मन में सोचने लगी कि ओह गॉड.. पापा ये क्या कर रहे हो. मेरे चूचे पे हाथ क्यों रख दिया.. उफ़ अब मैं क्या करूँ?

सुगंधा सोच ही रही थी कि क्या करूँ तभी उसके कान में जयशंकर जी की धीमी आवाज़ आई- ओह सुगंधा.. तुम अब बड़ी हो गई हो.. उफ़ तेरे जिस्म में कितनी आग है.. देखो मेरा हाथ तेरे चूचे पे रखा हुआ कैसे जल रहा है. तूने तो आज मेरी आग भड़का दी है.. काश तेरी माँ भी तेरे जैसी गर्म होती. अब मैं क्या करूँ.. कहाँ जाऊं.. कैसे अपने इस लंड को शांत करूँ.

जयशंकर जी की बात सुनकर सुगंधा को बहुत दुख हुआ और वो अपनी माँ को कोसने लगी. फिर उसने डिसाइड किया कि अब जो हो देखा जाएगा. बस वो आज तो अपने पापा को शांत करके ही सोएगी.

जयशंकर जी ने अपना हाथ वापस हटा लिया, शायद वो डर रहे थे और सुगंधा को लगा कि अब शायद वो चले जाएँगे.

सुगंधा मन में बुदबुदाने लगी- ओह गॉड पापा तो जा रहे हैं.. ऐसे तो सारी रात ये परेशान ही रहेंगे. क्या करूँ सुगंधा.. कुछ कर तू.. ओह लगता है मुझे पापा को कुछ नजारा दिखाना ही होगा.

सुगंधा ने पेट पर खुजली के बहाने टी-शर्ट को ऊपर कर दिया और थोड़ी देर खुजा कर वो शांत हो गई. मगर उसके आधे चूचे अब नंगे हो गए और जयशंकर जी उन्हें देख कर अपने होश खो बैठे.

जयशंकर- हे भगवान ये आज मेरे साथ क्या हो रहा है.. मैं जितना सुगंधा से दूर जाना चाहता हूँ, हालात मुझे इसके और करीब ला रहे हैं. अब ऐसा नजारा सामने है, मैं जाऊं या रुकूं.. क्या करूँ.

जयशंकर जी दुविधा में थे. उनका लंड तो अकड़ कर उन्हें इशारा दे रहा था कि कली सामने है और तू जा रहा है.. मसल दे. मगर दिल बोल रहा था कि नहीं वो तेरी बेटी है, ये ग़लत है.. यहाँ से जा चला जा.

जयशंकर जी अभी किसी नतीजे पे पहुँच पाते, तब तक सुगंधा ने दूसरा धमाका कर दिया.

सुगंधा ने धीरे से आँख खोल कर देखा तो जयशंकर जी खड़े हुए कुछ सोच रहे थे. सुगंधा अपने मन में बोल रही थी- लगता है पापा इतने से नहीं रुकेंगे.. कुछ और करना होगा.

सुगंधा ने फिर खुजने के बहाने से अबकी बार अपने पजामे में हाथ डाल दिया और उसे थोड़ा नीचे कर दिया यानि पजामे को बस दो इंच और नीचे करती तो उसकी चुत का दीदार उसके पापा को हो जाता. मगर सुगंधा इतना कैसे कर रही थी, ये वही जानती थी. बिना चुदे ही उसकी गांड फट रही थी. ये तो पिछले दिनों की कुछ गंदी हरकतें थीं, जो उसमें इतनी हिम्मत आ गई. फिर भी डर से उसकी साँसें तेज हो गई थीं.

अब नजारा कुछ ऐसा था टी-शर्ट पूरी ऊपर.. और पजामा नीचे सरका हुआ था, जिससे सुगंधा का पूरा पेट नंगा और आधे मम्मों की झलक दिख रही थी. इसी के साथ उसकी चुत के ऊपर का हिस्सा भी दिख रहा था. इस हालत में एक बाप अपने अन्दर के मर्द के सामने हार गया.

अब जयशंकर की आँखों में सिर्फ़ वासना नज़र आ रही थी. वो धीरे से बिस्तर पर बैठ गए और सुगंधा की टी-शर्ट को पूरा ऊपर कर दिया. अब उस कमसिन कली के 30″ के दिल को छू लेने वाले चूचे पूरे नंगे होकर जयशंकर जी के सामने थे. वो नजारा देख कर उनके होंठ सूख गए. उनका मन कर रहा था कि जल्दी से सुगंधा के पिंक निप्पलों को चूस लें, मगर वो उठ ना जाए.. ये डर भी उनके मन में था.

वो थोड़ी देर ऐसे ही उस नजारे को देखते रहे, फिर हिम्मत करके उन्होंने एक चूचे को हाथ में लिया और धीरे-धीरे उसे दबाने लगे.
सुगंधा की तो हालत खराब थी, वो मुँह को कसके भींचे हुए पड़ी थी कि उसकी कहीं सिसकी ना निकाल जाए.

जयशंकर जी को लगा कि सुगंधा गहरी नींद में है, तो वो थोड़ा खुलकर उसके मम्मों को सहलाने लगे.. उसके निप्पलों को छेड़ने लगे. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद उन्होंने एक निप्पल अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसना शुरू किया. मगर ये कुछ ज़्यादा हो रहा था और सुगंधा के लिए अब अपने आपको रोक पाना मुश्किल था. वो नींद में फिर खुजाने के बहाने हिली और उसने अपनी टी-शर्ट को नीचे कर दिया. इस हरकत के कारण जयशंकर जी फ़ौरन उससे अलग हो गए.

सुगंधा- ओह गॉड.. ये पापा तो कुछ ज़्यादा ही गर्म हो गए हैं.. अब क्या करूँ ऐसे तो इन्हें पता लग जाएगा कि मैं उठी हुई हूँ.. हे भगवान कोई आइडिया दो.. मैं कैसे इन्हें शांत करूँ.

जयशंकर जी थोड़ी देर वैसे ही शांत बैठे रहे.. जब उनको लगा सुगंधा शांत है. तो उन्होंने अबकी बार सुगंधा का पजामा धीरे से नीचे किया और उसकी चुत को देख कर हल्के से बोल पड़े- वाह, क्या मस्त चुत है तेरी सुगंधा.. कोई नसीब वाला ही होगा जिसे तू मिलेगी. अब तूने मेरी आग तो भड़का दी है.. मगर इस लंड को कैसे शांत करूँ. तेरे साथ ज़्यादा कुछ कर भी नहीं सकता, तू जाग गई तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी.

जयशंकर जी बड़बड़ा रहे थे मगर अबकी बार सुगंधा ने एकदम ध्यान दिया तो उसे सब समझ आ गया. तभी उसके दिमाग़ में एक आइडिया आया और वो नींद में बोलने लगी.
सुगंधा- उम्म्म टीना प्लीज़, मुझे भी आईसक्रीम चूसनी है.. उम्म दो ना प्लीज़..

सुगंधा ने अपना मुँह खोल दिया था जयशंकर जी ने सोचा नींद में अपनी सहेली के साथ बात कर रही है. सुगंधा का खुला हुआ मुँह देख कर जयशंकर जी से रहा नहीं गया, वो उसके पास खड़े हो गए और धीरे से अपना सुपारा उसके होंठों पर टिका दिया.

सुगंधा तो ऐसे ही किसी मौके की तलाश में थी. उसने सुपारे को चाटना शुरू किया और मुँह में पूरा लंड लेने की कोशिश करने लगी, मगर जयशंकर जी का लंड काफ़ी मोटा था और सुगंधा नींद में थी तो ऐसे कैसे ले लेती. इससे तो उसकी चोरी पकड़ी जाती मगर उसका ये काम उसके पापा ने आसान कर दिया.

जयशंकर जी ने लंड पर दबाव बनाया और सुपारा उसके मुँह में घुसा दिया. अब सुगंधा धीरे-धीरे अपने पापा का लंड चूसने लगी.

जयशंकर- आह.. सुगंधा तेरी आईसक्रीम के चक्कर में तू अपने पापा का लंड चूस रही है.. उफ्फ बहुत मज़ा आ रहा है.

ये खेल आगे चलता.. इससे पहले एक गड़बड़ हो गई.. बाहर जोर की आवाज़ हुई शायद कोई बर्तन गिरा था और उस आवाज़ के होते ही जयशंकर जी ने जल्दी से लंड मुँह से निकाला और लुंगी में डाल लिया.

ना चाहते हुए भी सुगंधा की आँख खुल गई, शायद घबराहट की वजह से ऐसा हुआ था. मगर उसकी आँखें खुलीं तो सीधे जयशंकर जी की आँखों से मिल गईं. अब सुगंधा का दिमाग़ कंप्यूटर की तरह चलने लगा. एक ही पल में उसने बात को संभाल लिया.

सुगंधा ने एक जोरदार अंगड़ाई ली, जैसे वो बहुत गहरी नींद से जागी हो.

सुगंधा- उम्म्म उम्म्म पापा.. क्या हुआ इतनी जोर से आवाज़ आई.. मैं डर गई कैसी आवाज़ थी ये? और आप अभी तक यहीं हो.. मुझे कब नींद आई, पता भी नहीं चला.
जयशंकर- अरे कुछ नहीं बिल्ली होगी शायद.. तू सो जा.. मैं जाकर देखता हूँ.
सुगंधा- पापा मुझे डर लग रहा है.. प्लीज़ आप देख कर वापस आ जाना. मैं सो जाऊं फिर आप चाहें तो चले जाना.
जयशंकर- अच्छा ठीक है.. तू रुक, मैं बाहर देख कर आता हूँ.

जयशंकर जी बाहर चले गए और सुगंधा बिस्तर पे बैठ गई.

सुगंधा- शिट.. ये क्या किया मैंने.. मुझे ऐसे अचानक आँख नहीं खोलनी चाहिए थी. कहीं पापा को कुछ शक हो गया तो..! अब क्या करूँ वैसे पापा का लंड काफ़ी मोटा है शायद.. इसी लिए मेरे मुँह में नहीं जा रहा था. काश एक बार में देख पाती. अब पापा वापस आएँगे तो क्या करूँ.. कैसे उनको शांत करूँ, कुछ समझ में नहीं आ रहा.

तभी..
जयशंकर- मैंने कहा था ना बिल्ली होगी. उसको मैंने भगा दिया. चल अब तू सो जा, रात बहुत हो गई है. मैं अपने कमरे में जाता हूँ.. नहीं तेरी माँ उठेगी और मुझे वहां नहीं देखेगी तो घबरा जाएगी.


सुगंधा की ज़रा भी हिम्मत नहीं हुई कि वो कुछ बोले या उन्हें रुकने को कहे. उसने बस ‘हाँ’ में गर्दन हिला दी और चादर लेकर सो गई.
Muje bhi meri beti ko chodna hai koi idea do yaar
 

Sameer choudhary

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Muje bhi apni beti ko chodna hai koi idea do yaar
जयशंकर जी ने बहुत ध्यान लगाया कि लंड से कुछ टच हो रहा है मगर सुगंधा इतने हल्के तरीके से छू रही थी, जिससे जयशंकर जी को समझ नहीं आ रहा था कि सुगंधा छू रही है या कपड़े की रगड़ से लंड खड़ा हुआ है.

अब जयशंकर जी सुगंधा के कंधे दबाने लगे और सुगंधा के चिकने जिस्म पर उनका हाथ लगते ही लंड ने जोरदार अंगड़ाई ली. अब लंड अपने पूरे शवाब पर आ गया था. सुगंधा को अब भी पता नहीं चल रहा था कि लंड किस पोज़िशन में है, वो बस हल्की सी उंगली टच कर रही थी. फिर उसने करवट लेने के बहाने जल्दी से पूरा हाथ लंड पर लगा दिया और उसको ये जानकार झटका लगा कि पापा का लंड काफ़ी बड़ा और एकदम कड़क है.
ये इतना अचानक हुआ कि जयशंकर भी समझ नहीं पाए कि सुगंधा ने जानबूझ कर लंड छुआ या अंजाने में हो गया.

सुगंधा के करवट लेने के बाद सारा मामला ही बदल गया. जयशंकर जी की लुंगी थोड़ी सरक गई और लंड का टोपा बाहर निकल आया. ये बात दोनों को ही नहीं पता थी. मगर जब सुगंधा थोड़ी आगे हुई उसके होंठ सीधे सुपारे से टच हुए. तो उसी पल जयशंकर जी भी समझ गए कि लंड बाहर निकल गया है. मगर वो कुछ नहीं बोले और वैसे ही सुगंधा की टी-शर्ट में हाथ डालकर उसकी गर्दन और पीठ को सहलाते रहे.

सुगंधा ने सोचा ऐसा मौका दोबारा नहीं मिलेगा. उसने धीरे से अपनी जीभ निकाल कर सुपारे पर घुमाई और जयशंकर जी फ़ौरन हरकत में आ गए.
जयशंकर- सुगंधा सो गई क्या.. कुछ बोल तो?
सुगंधा ने सांस रोक ली और चुपचाप वैसे ही पड़ी रही.

जयशंकर जी को लगा कि सुगंधा शायद सो गई है. उन्होंने धीरे से चादर हटाई तो अन्दर का नजारा देख कर उनके होश उड़ गए.

सुगंधा करवट लेकर सोई हुई थी और लंड पूरा बाहर था. सुगंधा के होंठ लंड से एकदम सटे हुए थे.

ये नजारा देख कर एक पल के लिए जयशंकर जी सब कुछ भूल गए और उनकी Xforum जाग गई. सुगंधा के नर्म होंठ लंड से सटे हुए थे और जयशंकर जी के शरीर में करंट दौड़ने लगा था. उन्होंने लंड को हाथ से पकड़ा और सुगंधा के होंठों पे रगड़ने लगे.

सुगंधा इस हमले के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी. वो घबरा गई और जल्दी से सीधी होकर लेट गई. अब उसकी साँसें तेज चल रही थीं और उसके चूचे साँसों के साथ ऊपर-नीचे होने लगे.

जयशंकर जी ने जल्दी से लुंगी ठीक की और लंड को अन्दर कर लिया. मगर उनकी नज़र अब सुगंधा के मदमस्त मम्मों पर जा टिकी.

जयशंकर जी ने एक-दो बार सुगंधा को आवाज़ दी. उसे हिलाया.. मगर वो जस की तस रही. अब सोई होती तो शायद जाग जाती.. मगर जागती हुई को कैसे जगाया जाए.

जयशंकर जी को जब यकीन हो गया कि सुगंधा सो गई है.. उन्होंने डरते हुए अपना एक हाथ सुगंधा के एक चूचे पे रख दिया, मगर उन्होंने कोई हरकत नहीं की, बस चूचे पर हाथ रखे हुए सुगंधा के चेहरे को देखते रहे.

सुगंधा अपने मन में सोचने लगी कि ओह गॉड.. पापा ये क्या कर रहे हो. मेरे चूचे पे हाथ क्यों रख दिया.. उफ़ अब मैं क्या करूँ?

सुगंधा सोच ही रही थी कि क्या करूँ तभी उसके कान में जयशंकर जी की धीमी आवाज़ आई- ओह सुगंधा.. तुम अब बड़ी हो गई हो.. उफ़ तेरे जिस्म में कितनी आग है.. देखो मेरा हाथ तेरे चूचे पे रखा हुआ कैसे जल रहा है. तूने तो आज मेरी आग भड़का दी है.. काश तेरी माँ भी तेरे जैसी गर्म होती. अब मैं क्या करूँ.. कहाँ जाऊं.. कैसे अपने इस लंड को शांत करूँ.

जयशंकर जी की बात सुनकर सुगंधा को बहुत दुख हुआ और वो अपनी माँ को कोसने लगी. फिर उसने डिसाइड किया कि अब जो हो देखा जाएगा. बस वो आज तो अपने पापा को शांत करके ही सोएगी.

जयशंकर जी ने अपना हाथ वापस हटा लिया, शायद वो डर रहे थे और सुगंधा को लगा कि अब शायद वो चले जाएँगे.

सुगंधा मन में बुदबुदाने लगी- ओह गॉड पापा तो जा रहे हैं.. ऐसे तो सारी रात ये परेशान ही रहेंगे. क्या करूँ सुगंधा.. कुछ कर तू.. ओह लगता है मुझे पापा को कुछ नजारा दिखाना ही होगा.

सुगंधा ने पेट पर खुजली के बहाने टी-शर्ट को ऊपर कर दिया और थोड़ी देर खुजा कर वो शांत हो गई. मगर उसके आधे चूचे अब नंगे हो गए और जयशंकर जी उन्हें देख कर अपने होश खो बैठे.

जयशंकर- हे भगवान ये आज मेरे साथ क्या हो रहा है.. मैं जितना सुगंधा से दूर जाना चाहता हूँ, हालात मुझे इसके और करीब ला रहे हैं. अब ऐसा नजारा सामने है, मैं जाऊं या रुकूं.. क्या करूँ.

जयशंकर जी दुविधा में थे. उनका लंड तो अकड़ कर उन्हें इशारा दे रहा था कि कली सामने है और तू जा रहा है.. मसल दे. मगर दिल बोल रहा था कि नहीं वो तेरी बेटी है, ये ग़लत है.. यहाँ से जा चला जा.

जयशंकर जी अभी किसी नतीजे पे पहुँच पाते, तब तक सुगंधा ने दूसरा धमाका कर दिया.

सुगंधा ने धीरे से आँख खोल कर देखा तो जयशंकर जी खड़े हुए कुछ सोच रहे थे. सुगंधा अपने मन में बोल रही थी- लगता है पापा इतने से नहीं रुकेंगे.. कुछ और करना होगा.

सुगंधा ने फिर खुजने के बहाने से अबकी बार अपने पजामे में हाथ डाल दिया और उसे थोड़ा नीचे कर दिया यानि पजामे को बस दो इंच और नीचे करती तो उसकी चुत का दीदार उसके पापा को हो जाता. मगर सुगंधा इतना कैसे कर रही थी, ये वही जानती थी. बिना चुदे ही उसकी गांड फट रही थी. ये तो पिछले दिनों की कुछ गंदी हरकतें थीं, जो उसमें इतनी हिम्मत आ गई. फिर भी डर से उसकी साँसें तेज हो गई थीं.

अब नजारा कुछ ऐसा था टी-शर्ट पूरी ऊपर.. और पजामा नीचे सरका हुआ था, जिससे सुगंधा का पूरा पेट नंगा और आधे मम्मों की झलक दिख रही थी. इसी के साथ उसकी चुत के ऊपर का हिस्सा भी दिख रहा था. इस हालत में एक बाप अपने अन्दर के मर्द के सामने हार गया.

अब जयशंकर की आँखों में सिर्फ़ वासना नज़र आ रही थी. वो धीरे से बिस्तर पर बैठ गए और सुगंधा की टी-शर्ट को पूरा ऊपर कर दिया. अब उस कमसिन कली के 30″ के दिल को छू लेने वाले चूचे पूरे नंगे होकर जयशंकर जी के सामने थे. वो नजारा देख कर उनके होंठ सूख गए. उनका मन कर रहा था कि जल्दी से सुगंधा के पिंक निप्पलों को चूस लें, मगर वो उठ ना जाए.. ये डर भी उनके मन में था.

वो थोड़ी देर ऐसे ही उस नजारे को देखते रहे, फिर हिम्मत करके उन्होंने एक चूचे को हाथ में लिया और धीरे-धीरे उसे दबाने लगे.
सुगंधा की तो हालत खराब थी, वो मुँह को कसके भींचे हुए पड़ी थी कि उसकी कहीं सिसकी ना निकाल जाए.

जयशंकर जी को लगा कि सुगंधा गहरी नींद में है, तो वो थोड़ा खुलकर उसके मम्मों को सहलाने लगे.. उसके निप्पलों को छेड़ने लगे. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद उन्होंने एक निप्पल अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसना शुरू किया. मगर ये कुछ ज़्यादा हो रहा था और सुगंधा के लिए अब अपने आपको रोक पाना मुश्किल था. वो नींद में फिर खुजाने के बहाने हिली और उसने अपनी टी-शर्ट को नीचे कर दिया. इस हरकत के कारण जयशंकर जी फ़ौरन उससे अलग हो गए.

सुगंधा- ओह गॉड.. ये पापा तो कुछ ज़्यादा ही गर्म हो गए हैं.. अब क्या करूँ ऐसे तो इन्हें पता लग जाएगा कि मैं उठी हुई हूँ.. हे भगवान कोई आइडिया दो.. मैं कैसे इन्हें शांत करूँ.

जयशंकर जी थोड़ी देर वैसे ही शांत बैठे रहे.. जब उनको लगा सुगंधा शांत है. तो उन्होंने अबकी बार सुगंधा का पजामा धीरे से नीचे किया और उसकी चुत को देख कर हल्के से बोल पड़े- वाह, क्या मस्त चुत है तेरी सुगंधा.. कोई नसीब वाला ही होगा जिसे तू मिलेगी. अब तूने मेरी आग तो भड़का दी है.. मगर इस लंड को कैसे शांत करूँ. तेरे साथ ज़्यादा कुछ कर भी नहीं सकता, तू जाग गई तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी.

जयशंकर जी बड़बड़ा रहे थे मगर अबकी बार सुगंधा ने एकदम ध्यान दिया तो उसे सब समझ आ गया. तभी उसके दिमाग़ में एक आइडिया आया और वो नींद में बोलने लगी.
सुगंधा- उम्म्म टीना प्लीज़, मुझे भी आईसक्रीम चूसनी है.. उम्म दो ना प्लीज़..

सुगंधा ने अपना मुँह खोल दिया था जयशंकर जी ने सोचा नींद में अपनी सहेली के साथ बात कर रही है. सुगंधा का खुला हुआ मुँह देख कर जयशंकर जी से रहा नहीं गया, वो उसके पास खड़े हो गए और धीरे से अपना सुपारा उसके होंठों पर टिका दिया.

सुगंधा तो ऐसे ही किसी मौके की तलाश में थी. उसने सुपारे को चाटना शुरू किया और मुँह में पूरा लंड लेने की कोशिश करने लगी, मगर जयशंकर जी का लंड काफ़ी मोटा था और सुगंधा नींद में थी तो ऐसे कैसे ले लेती. इससे तो उसकी चोरी पकड़ी जाती मगर उसका ये काम उसके पापा ने आसान कर दिया.

जयशंकर जी ने लंड पर दबाव बनाया और सुपारा उसके मुँह में घुसा दिया. अब सुगंधा धीरे-धीरे अपने पापा का लंड चूसने लगी.

जयशंकर- आह.. सुगंधा तेरी आईसक्रीम के चक्कर में तू अपने पापा का लंड चूस रही है.. उफ्फ बहुत मज़ा आ रहा है.

ये खेल आगे चलता.. इससे पहले एक गड़बड़ हो गई.. बाहर जोर की आवाज़ हुई शायद कोई बर्तन गिरा था और उस आवाज़ के होते ही जयशंकर जी ने जल्दी से लंड मुँह से निकाला और लुंगी में डाल लिया.

ना चाहते हुए भी सुगंधा की आँख खुल गई, शायद घबराहट की वजह से ऐसा हुआ था. मगर उसकी आँखें खुलीं तो सीधे जयशंकर जी की आँखों से मिल गईं. अब सुगंधा का दिमाग़ कंप्यूटर की तरह चलने लगा. एक ही पल में उसने बात को संभाल लिया.

सुगंधा ने एक जोरदार अंगड़ाई ली, जैसे वो बहुत गहरी नींद से जागी हो.

सुगंधा- उम्म्म उम्म्म पापा.. क्या हुआ इतनी जोर से आवाज़ आई.. मैं डर गई कैसी आवाज़ थी ये? और आप अभी तक यहीं हो.. मुझे कब नींद आई, पता भी नहीं चला.
जयशंकर- अरे कुछ नहीं बिल्ली होगी शायद.. तू सो जा.. मैं जाकर देखता हूँ.
सुगंधा- पापा मुझे डर लग रहा है.. प्लीज़ आप देख कर वापस आ जाना. मैं सो जाऊं फिर आप चाहें तो चले जाना.
जयशंकर- अच्छा ठीक है.. तू रुक, मैं बाहर देख कर आता हूँ.

जयशंकर जी बाहर चले गए और सुगंधा बिस्तर पे बैठ गई.

सुगंधा- शिट.. ये क्या किया मैंने.. मुझे ऐसे अचानक आँख नहीं खोलनी चाहिए थी. कहीं पापा को कुछ शक हो गया तो..! अब क्या करूँ वैसे पापा का लंड काफ़ी मोटा है शायद.. इसी लिए मेरे मुँह में नहीं जा रहा था. काश एक बार में देख पाती. अब पापा वापस आएँगे तो क्या करूँ.. कैसे उनको शांत करूँ, कुछ समझ में नहीं आ रहा.

तभी..
जयशंकर- मैंने कहा था ना बिल्ली होगी. उसको मैंने भगा दिया. चल अब तू सो जा, रात बहुत हो गई है. मैं अपने कमरे में जाता हूँ.. नहीं तेरी माँ उठेगी और मुझे वहां नहीं देखेगी तो घबरा जाएगी.


सुगंधा की ज़रा भी हिम्मत नहीं हुई कि वो कुछ बोले या उन्हें रुकने को कहे. उसने बस ‘हाँ’ में गर्दन हिला दी और चादर लेकर सो गई.
 

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सुगंधा- नहीं पापा मुझे शर्म आती है.

जयशंकर जी ने साफ़ साफ़ कह दिया- ये क्या बात हुई सुगंधा, तुम मेरा लौड़ा कई बार चूस चुकी हो और मुझसे अपनी चुत चटवा चुकी हो.. अब कैसी शर्म?
सुगंधा- छी: पापा ये आज आप कैसी बातें कर रहे हो.. मैं नहीं सोती यहाँ.. मैं जा रही हूँ.

सुगंधा उठ कर जाने लगी तो जयशंकर जी ने उसे पकड़ लिया और बिस्तर पे गिरा कर खुद उसके ऊपर आ गए और अब दोनों की गर्म साँसें एक-दूसरे के होंठों पे पड़ रही थी. बस किसी के पहल करने की देर थी.

सुगंधा- नहीं पापा.. ये ग़लत है आप ऐसा नहीं कर सकते.. मैं आपकी बेटी हूँ.
पापा- सुगंधा कुछ ग़लत नहीं है. इन दिनों हम दोनों ने जो किया, वो यही तो था. बस हम दोनों अनजान बने हुए थे और आज खुलकर मज़ा करेंगे.

पापा- मेरी बेटी, तुम कितनी अच्छी हो. आई लव यू डार्लिंग मगर तुम शायद ये भूल गई कि अगर तुम मुझे तड़पाओगी तो तुम भी तो साथ में तड़पोगी ना.. अब तुम्हें भी तो लंड की जरूरत पड़ेगी तो कोई और क्यों? तुम ही मेरे साथ कर लो ना.. ताकि घर की बात घर में ही रहे.
सुगंधा- नहीं पापा मुझे डर लगता है.. इससे बहुत दर्द होता है.. नहीं नहीं.. मैं नहीं करूँगी.
पापा- अरे तूने कभी किया ही नहीं तो तुझे क्या पता दर्द होगा.
सुगंधा- पापा मैं कोई बच्ची नहीं हूँ. इतना तो पता ही है, इसके लिए करना जरूरी नहीं है.
पापा- अच्छा तू किसी और पे भरोसा मत कर.. मैं तेरा बाप हूँ मुझपे तो तुझे भरोसा है ना, मैं बहुत आराम से करूंगा… एकदम धीरे-धीरे..!
सुगंधा- पापा, मैं आपका लंड चूस कर पानी निकाल देती हूँ ना.. प्लीज़ मुझे बहुत डर लग रहा है. मेरा सेक्स करने का कोई इरादा नहीं था, आप समझो ना प्लीज़.

सुगंधा के चेहरे पर डर साफ नज़र आ रहा था.
पापा- देख सुगंधा, तू मेरी बात सुन आज नहीं तो कल तुझे चुदाई करनी ही होगी. मुझसे नहीं तो किसी और से.. या शादी के बाद अपने पति से तो चुदेगी ही, तब क्या होगा.. सोच?
सुगंधा- पापा, पता नहीं मुझे इससे इतना डर क्यों लगता है.
पापा- अच्छा तुझे कैसे पता दर्द का.. कुछ तो हुआ होगा? तू खुलकर मुझे बता ना!

सुगंधा ने बताया वो एक बार नहा रही थी तब नीचे साबुन लगाते टाइम ग़लती से उसकी उंगली अन्दर चली गई तो बहुत दर्द हुआ था.. तब से उसको डर लगता है. सुगंधा ने एक झूठी कहानी सुनाई .

जयशंकर जी समझ गए कि सुगंधा को सेक्स फोबिया है यानि इंसान किसी भी चीज का वहाँ अपने मन में तय कर लेता है, फिर वही उसका डर बन जाता है. हालांकि सुगंधा ने कभी चुदाई नहीं की थी मगर एक बार चुत रगड़ते टाइम उसकी उंगली जरा सी अन्दर घुस गई थी बस उसी पल से उसको अहसास हुआ कि ये छोटी सी उंगली से इतना दर्द हुआ तो लंड से कितना होगा और यही डर धीरे-धीरे उसको चुदाई के खिलाफ कर चुका था.

पापा- अच्छा ये बात है.. चल जाने दे मैं तेरी चुदाई नहीं करूंगा मगर तुझे मैं खुलकर प्यार तो कर सकता हूँ ना.. उसमें तो तू मेरा साथ देगी ना.
सुगंधा- हाँ पापा, सेक्स के अलावा आप कुछ भी कहो… मैं करने को रेडी हूँ.
पापा- तो ठीक है ये नाइटी निकाल दे, मैं रोशनी में तेरे जिस्म को देखना चाहता हूँ.. इसे चूसना चाहता हूँ तेरे निपल्स को निचोड़ कर इनका रस पीना चाहता हूँ.
सुगंधा- चुप करो पापा, मुझे आप से शर्म आ रही है.

जयशंकर जी ने अपनी लुंगी उतार दी और लंड को हाथ से सहलाते हुए बोले- अरे लंड चूसने में शर्म नहीं आई तो देखने में कैसी शर्म? ये देख कैसे मेरा लंड तुझे बुला रहा है.. चल अब निकाल दे.
सुगंधा- पापा आप ही निकाल लो ना प्लीज़.

सुगंधा ने इशारा दे दिया तो जयशंकर जी आगे बढ़े और बेटी को नंगी कर दिया अब वो ऊपर से नीचे तक सुगंधा को निहार रहे थे और मन ही मन अपनी कामयाबी पे खुश हो रहे थे, उन्होंने सुगंधा को बिस्तर पर लेटाया; उसके नर्म होंठों को अपने होंठों से जकड़ लिया और फिर एक लंबी किस के बाद वो सुगंधा की जीभ को चूसने लगे.
अब सुगंधा भी खुलकर उनका साथ दे रही थी.

अब जयशंकर जी उसके मम्मों पर टूट पड़े और निप्पलों को ऐसे चूसने लगे जैसे कोई बच्चा दूध पी रहा हो.
सुगंधा- आह.. पापा नहीं.. आह.. मज़ा आ रहा है.. आप बहुत अच्छे हो.. आह.. चूसो उफ्फ ऐसे ही दबाओ इन्हें आह..
जयशंकर जी मंजे हुए खिलाड़ी थे और सुगंधा नादान कली थी, उसको तो मज़ा आना ही था. अब जयशंकर उसके गले पर सीने के ऊपर पेट पर हर जगह चूम रहे थे, चाट रहे थे और सुगंधा तड़प रही थी.

धीरे-धीरे जयशंकर जी अब नीचे चुत पर आ गए और सुगंधा की जांघें चूसने लगे. अब सुगंधा की उत्तेजना बहुत बढ़ गई थी चुत के बाँध को रोके रखना अब उसके बस का नहीं था.
सुगंधा- ससस्स पापा आह नहीं.. आह.. उफ़फ्फ़.. मेरा पानी निकालने वाला है.
जयशंकर जी समझ गए कि अब रस की धारा आने वाली है, वो जल्दी से बेटी की चुत से चिपक गए और चुत को होंठों में दबा कर चूसने लगे. उसी पल सुगंधा की चुत का लावा बह गया वो कमर को हिला हिला कर झड़ने लगी और जयशंकर जी सारा रस चाट गए.

सुगंधा- आह.. पापा उफ़फ्फ़.. बस भी करो जान निकाल कर मानोगे क्या.. आह.. आज तो आपने मेरी चाटे बिना ही पानी निकाल दिया.
पापा- क्या चाटे बिना.. चुत बोल सुगंधा.. मुझे तेरे मुँह से सुनकर अच्छा लगेगा.
सुगंधा- नहीं मुझे शर्म आती है.
पापा- अरे नंगी चुत को चटवा सकती है तो पापा की ख़ुशी के लिए बोल नहीं सकती.
सुगंधा- अच्छा ठीक है चुत को आपने चाटा.. मुझे अच्छा लगा. बस अब आप खुश..!
पापा- हाँ मेरी जान खुश. अब तू क्या करेगी.. वो भी बोल कर बता.
सुगंधा- मैं आपके इस लंबे लंड को चूस कर ठंडा करूंगी और आपका रस पीऊंगी.
पापा- आह.. मज़ा आ गया तेरे मुँह से ये चुत और लंड सुनना कितना अच्छा लगता है.
सुगंधा- चलो अब आप लेट जाओ और मैं भी आपको उसी तरह मज़ा दूँगी जैसे अपने मुझे अभी दिया है.
पापा- ठीक है सुगंधा जैसा तेरा मन करे, तू कर ले.. निकाल ले अपने मन की.

जयशंकर जी लेट गए तो सुगंधा उन्हें किस करने लगी. उनके सीने पर भी किस किया.. फिर उसकी लंड चूसने की ललक उसको नीचे ले गई और वो मज़े से लंड को चूसने लगी. साथ ही साथ वो गोटियां भी चूस रही थी.

पापा- आह.. सुगंधा आज तूने मेरी बरसों की तमन्ना पूरी कर दी.. आह.. उफ्फ.. चूस मेरी जान आ चूस.
पापा की बातें सुगंधा को और जोश दिला रही थी. अब वो और तेज़ी से लंड को चूस रही थी.
पापा- आह.. सुगंधा चूस.. तेरे होंठों में इतनी गर्मी है..तो तेरी चुत कैसी होगी उफ्फ चूस आह…

काफ़ी देर तक ये चुसाई चलती रही उसके बाद जयशंकर जी झड़ गए. सुगंधा ने उनका पूरा वीर्य गटक लिया और लास्ट बूँद भी जीभ से छत कर साफ कर दी.
Meri beti ko bhi aise hi loda chusvana hai
 

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पापा- बस कुछ देर की बात है जान, उसके बाद हमेशा के लिए तू मेरी हो जाएगी.

जयशंकर जी ने सुगंधा को बांहों में लिया और उसको किस करने लगे. वो उसके मम्मों को भी दबा रहे थे. कभी कानों पर हल्का सा काट देते, तो कभी किस करते.

जयशंकर जी अब सुगंधा के एक-एक कपड़े को धीरे-धीरे निकाल रहे थे. लगभग 15 मिनट के इस प्यार में पापा ने अपनी बेटी सुगंधा को एकदम नंगी कर दिया था और खुद के कपड़े भी निकाल दिए थे.

सुगंधा- ओह पापा… आप कितने अच्छे हो इस्स… इतना प्यार कर रहे हो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है… उई… काटो मत ना पापा.
पापा- क्या करूं तू है ही इतनी मस्त, एकदम रस मलाई की तरह कि चाटने और काटने को दिल कर रहा है.
सुगंधा- अच्छा ये बात है… फिर मैं आपके लंड पर काटूं, तब आप कुछ मत कहना.
पापा- अरे ऐसी ग़लती मत करना अगर वहाँ काटेगी ना… तो वो उसका बदला तेरी चुत से ले लेगा, फिर मत कहना कि दर्द होता है.
सुगंधा- अच्छा मेरे पापा मैं हार गई, अब बातें ही करोगे या आगे भी बढ़ाओगे… मेरी चुत बहुत तड़प रही है.

जयशंकर जी समझ गए कि अब बातों का कोई फायदा नहीं. वो फिर शुरू हो गए और सुगंधा के शरीर को मज़े से चूसने लगे. धीरे-धीरे वो उसकी चुत पे पहुँच गए और जीभ से चुत को चाटने लगे. साथ ही उन्होंने उंगली से चुत को फैला कर सुगंधा के दाने को चूसना शुरू किया, जिससे सुगंधा के जिस्म में 440 वॉल्ट का करंट लगा, वो तड़पने लगी.

सुगंधा- ससस्स आह… पापा अपने ये क्या कर दिया… आह बहुत मजा आ रहा है… अइ ओफ्फ… चूसो आह…

जयशंकर जी बिना कुछ बोले अपने काम में लगे हुए थे. एक बार उन्होंने उंगली पर थूक लगाया और धीरे से चुत में थोड़ा घुसा दिया, जिससे सुगंधा तड़प उठी.

सुगंधा- आआ नहीं ओफ्फ… पापा दर्द हो रहा है आह… निकालो ना बाहर… आह…
पापा- मेरी जान चुप रह कर बस मजा ले, सीधे लंड घुसा दूँगा तो तुझे ज़्यादा तकलीफ़ होगी, इसलिए पहले उंगली से थोड़ी देर तेरी चुत को खोलने दे ताकि बाद में दर्द कम हो और ज़्यादा मजा आए.

सुगंधा समझ गई कि अब पापा जो कर रहे हैं, उसके भले के लिए ही होगा. वो बस मादक सिसकारियां लेती रही और उसने पापा को कह दिया कि आप जो करना चाहते हो करो… अब नहीं रोकूंगी.
पापा जी धीरे-धीरे उंगली से अपनी सगी बेटी की चूत को चोदने लगे. शुरू में उसको दर्द हुआ फिर जब उंगली चुत में एड्जस्ट हो गई तो उसको मजा आने लगा.

सुगंधा- आह… सस्स पापा इससे तो बहुत मजा आ रहा है… अब दर्द कम है… आह… करो और अन्दर तक घुसा दो ओफ्फ… आह…

सुगंधा की उत्तेजना देख कर अब जयशंकर जी ने दो उंगलियां एक साथ चुत में घुसा दीं और उसका अंजाम वही हुआ… सुगंधा के मुँह से दर्द भरी आवाज़ निकली, मगर वो सहन कर गई और वैसे ही पड़ी रही. कुछ देर बाद उसको मजा आने लगा और अब वो एकदम चरम पर पहुँच गई थी. उसकी साँसें तेज हो गईं और वो कमर को हिला-हिला कर मजा लेने लगी.

सुगंधा- आह… ससस्स… ज़ोर से करो पापा आह… फास्ट आह… मजा आ रहा है अइ और करो.
पापा- सुगंधा तेरी चुत में बहुत आग है… मेरी उंगली झुलस रही है… बाहर ये हाल है तो अन्दर तो क्या पता कितनी आग होगी… ले मेरी बेटी आने दे तेरी रस की धारा… तेरा पापा तैयार है पीने को.

पापा ने अब अपने होंठ चुत पर टिका दिए थे ताकि सुगंधा का रस सीधा उनके मुँह में जाए.
सुगंधा- आह पापा आह… चाटो… मैं गई उफ़फ्फ़ चूसो आह… ज़ोर से करो… मेरी चुत पापा आह… चाट लो.
सुगंधा कमर को हिला कर झड़ने लगी और उसका सारा रस पापा चट कर गए. अब बेटी तो शांत हो गई थी. मगर पापा जी का लंड पूरे उफान पर था और चुत को देख कर सलामी दिए जा रहा था.

सुगंधा- आह… पापा मजा आ गया अब मुझे भी आपका लंड चूसने दो ताकि उसकी आग में ठंडी कर सकूं और आपको भी आराम दूँ.
पापा- नहीं मेरी जान, तू सिर्फ़ चूस कर इसको गीला कर दे… बाकी आज इसको तो मैं तेरी चुत से ही ठंडा करूँगा.
सुगंधा- ठीक है पापा जी, लाओ आप खड़े हो जाओ… मैं आराम से इसको चूस कर गीला करती हूँ, फिर आप भी मेरी चुत को चाट कर गीला कर देना ताकि ये मूसल आराम से अन्दर घुस जाए और मुझे तकलीफ़ ना दे.

पापा- एक काम कर… मेरे ऊपर लेट कर लंड चूस और मैं तुम्हारी चुत को चूस कर चुदाई के लायक बना देता हूँ, इससे दोनों को मजा आएगा.

सुगंधा को बात समझ आ गई. अब वो दोनों 69 के पोज़ में हो गए और चुसाई शुरू कर दी. थोड़ी देर बाद सुगंधा फिर से गर्म हो गई और जयशंकर पापा का लंड भी अब चुत में जाने को बेताब हो रहा था तो उन्होंने सुगंधा को सीधा लेटाया और कमर के नीचे तकिया लगा दिया ताकि चुत का उभार ऊपर उठ जाए और वो लंड को आसानी से उसमें घुसा सके.

सुगंधा- पापा आराम से करना, इसमें आज के पहले उंगली भी नहीं गई और आज आपका ये अज़गर घुसने वाला है.
पापा- डरो मत बेटा… मैं बड़े आराम से डालूँगा बस तू थोड़ा सहन करना.

सुगंधा जानती थी कि उसको दर्द होगा मगर कही बात उसको याद थी कि जितना बड़ा लंड होता है, मजा भी उतना ही ज्यादा देता है. बस इसी चक्कर में वो जोश में होश खो बैठी.
सुगंधा- ठीक है पापा… अब आप हो तो आप जैसे चाहो डाल दो. मैं बर्दाश्त करने की कोशिश करूँगी.

पापा लंड को चुत के ऊपर रगड़ने लगे. कभी लंड से चुत पे ज़ोर से मारते, जिससे सुगंधा को बहुत मजा आ रहा था.
सुगंधा- आह… सस्स पापा आपका लंड है या डंडा… आउच लगता है एयेए…
पापा- क्यों मेरी बेटी को मजा नहीं आ रहा क्या… बंद कर दूँ मारना… सीधे पेल दूँ?
सुगंधा- नहीं पापा… मजा आ रहा है, करते रहो… ओफ्फ… पापा चुत के ऊपर रगड़ो ना… ज़ोर ज़ोर से… उसमें ज़्यादा मजा आ रहा था.

जयशंकर जी समझ गए कि अब सुगंधा की उत्तेजना बढ़ रही है और जब ये एकदम गर्म हो जाएगी, तब चोदना सही रहेगा. यही सोच कर उन्होंने लंड को ज़ोर ज़ोर से चुत पर रगड़ना शुरू कर दिया और साथ ही साथ हाथों से सुगंधा की जाँघों को भी मसलने लगे, जिससे सुगंधा का मजा दुगुना हो गया.

सुगंधा- आह… पापा… बहुत मजा आ रहा है उफ़फ्फ़ आपने तो चुत में आग लगा दी… अब मत तड़पाओ ना आह… प्लीज़ ओफ्फ…
पापा- सुगंधा अब वक़्त आ गया बेटा… ले संभाल लेना ठीक है.

जयशंकर जी ने चुत को फैलाया और अपना मोटा सुपारा चुत की फांकों में घुसेड़ने लगे.

सुगंधा की चुत बहुत टाइट थी और सुपारा बड़ा था, वो अन्दर जा नहीं पा रहा था तो जयशंकर जी ने चुत और लंड पर अच्छे से थूक लगाया और दोबारा कोशिश की. इस बार सुपारा चुत को फैलाता हुआ अन्दर घुस गया और उसके साथ ही सुगंधा को असीम दर्द हुआ मगर उसने मुँह से एक आवाज़ भी नहीं निकाली, बस दाँत भींचे पड़ी रही.

जयशंकर जी ने सुपारा फँसा कर हल्का सा धक्का मारा तो लंड 2″ चुत में घुस गया और इस बार सुगंधा की बर्दाश्त की ताक़त हार गई, उसके मुँह से दर्द भरी चीख निकली और आँखों से आँसुओं की धारा बह गई.
पापा- बस बेटी… रो मत, अब नहीं डालूँगा… मैं इतना ही रखूँगा.
सुगंधा- आह… आह… पापा मेरी जान निकल रही है ओफ्फ… एयेए…

जयशंकर जी ने सुगंधा को बहलाया कि वो आराम से करेंगे. थोड़ी देर वो उसी अवस्था में रहे और सुगंधा की चुत के ऊपर हाथ घुमाते रहे, जब उसका दर्द कम हुआ तो वो 2″ लंड को ही चुत में अन्दर बाहर करने लगे.
सुगंधा- आ यस पापा आह… करो… अब दर्द नहीं है… आह… करो.

सुगंधा की मादक सिसकारियां जयशंकर जी को पागल बना रही थीं. उन्होंने कमर को पीछे किया और ज़ोर का झटका मारा जिससे आधे से ज़्यादा लंड चुत को फाड़ता हुआ अन्दर घुस गया. सुगंधा के मुँह से दर्द भरी चीख निकली मगर जल्दी से जयशंकर जी ने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और कमर को फिर पीछे किया और एक और जोरदार झटका मार दिया. अबकी बार पूरा लंड चुत की गहराई में खो गया और सुगंधा की आँखें चढ़ गईं, उनमें से लगातार आँसू बह रहे थे, मगर जयशंकर जी बहुत बड़े खिलाड़ी थे. वो वैसे के वैसे पड़े रहे, उन्होंने ज़रा भी हरकत नहीं की.

कुछ मिनट तक बिना हिले जयशंकर जी पड़े रहे, फिर उनको अहसास हुआ कि सुगंधा अब नॉर्मल हो चली है तो उन्होंने उसके होंठ आज़ाद कर दिए.

पापा- सॉरी बेटा, तुम्हारी चुत बहुत टाइट थी तो धीरे से लंड जा नहीं रहा था इसलिए मैंने ज़ोर से पेल दिया, मगर अब तू टेंशन मत ले, अब तू कहेगी तभी मैं हिलूँगा.
सुगंधा- आह… पापा अपने तो एमेम मेरी जान ही निकाल दी आज ओफ्फ… अब बस और अन्दर मत डालना… आह… बहुत दर्द हो रहा है.
पापा- अब बचा ही क्या… जो डालूँगा तेरी चुत ने मेरा पूरा लंड निगल लिया है मेरी जान.

सुगंधा को यकीन नहीं हुआ कि इतना बड़ा लंड पूरा चला गया मगर जयशंकर के समझाने पर वो मान गई. थोड़ी देर दोनों नॉर्मल रहे फिर सुगंधा को पूछ कर जयशंकर जी धीरे-धीरे लंड को हिलाने लगे.

सुगंधा- आह… उई नहीं… आह… दुख़्ता है पापा आह… ससस्स बहुत दर्द हो रहा है.
पापा- बस थोड़ी देर की बात है बेटा… फिर नहीं होगा. तू आँखें बंद करके मजा ले बस.

थोड़ी देर ऐसे ही धीरे-धीरे चुदाई चलती रही. अब सुगंधा का दर्द कम हो गया और उसकी उत्तेजना बढ़ गई थी अब उसकी दर्द भरी आहें मादक सिसकारियों में बदल गई थीं- आह… सस्स पापा आह… करो आह… मजा आ रहा है उफ़ फास्ट करो चोद दो अपनी बेटी को… आह… फास्ट पापा फास्ट एयेए अइ आह…

सुगंधा अब चरम सीमा पर थी और जयशंकर जी भी बहुत देर से कंट्रोल किए हुए थे. ऐसी गर्म चुत के आगे वो कब तक टिक पाते, अब उनका लावा भी बहने को तैयार था.
पापा- आह… ले बेटी… तेरी चुत को आज अपने लंड के रस से भर दूँगा ले… आह…

अगले 2 मिनट जयशंकर जी ने फुल स्पीड से सुगंधा की चुदाई की और दोनों बाप बेटी एक साथ झड़ गए. जयशंकर जी वैसे ही सुगंधा पे पड़े रहे.


अगले 2 मिनट जयशंकर जी ने फुल स्पीड से सुगंधा की चुदाई की और दोनों बाप बेटी एक साथ झड़ गए.
Meri beti bhi aise hi chudegi
 
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