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Meesa
Pyar na ho to zindagi kya hai
Yaar na ho to bandigi kya hai
Pyar na ho to zindagi kya hai
Yaar na ho to bandigi kya hai
Tujh se hi har khushi hai
Tere dam se aashiqi hai jaan le
तू दुआ बनके शामिल है मेरी हर इक साँस में,
तेरी बंदगी ही अब तो, मेरा दीनो-ईमान है।
लोग ढूँढते हैं ख़ुदा को पत्थरों के शहर में,
मेरे लिए तो तेरा चेहरा ही, मुकम्मल दीदार है।
सिर्फ लफ़्ज़ों का रिश्ता नहीं, रूह का इकरार है, खामोश निगाहों में जो ठहरा, वही मेरा प्यार है।
न ज़मीन की तलब, न फलक की कोई हसरत, तेरे एहसास में सिमटा, मेरा पूरा संसार है।
मैं वो अधूरी प्यास नहीं, जो दर-दर भटकती फिरे, मैं वो मुकम्मल समंदर हूँ, जिसमें लहरें ख़ुद गिरें।
हवाओं ने बहुत चाहा कि रुख मेरा बदल देंगी, मगर मैं वो चिराग़ हूँ, जो आंधियों में भी खिलें।
मैं थकती नहीं तेरा नाम दोहराते हुए, हँस देती हूँ तुझे ख़्वाब में पाते हुए।
ज़माना कहता है कि तू दूर है मुझसे कहीं, मगर दिल मुस्कुरा देता है सच छुपाते हुए।
मैं आईना देखूँ तो अक्स उसका नज़र आता है, मेरे लब चुप रहते हैं, पर दिल गुनगुनाता है। लोग जिसे तन्हाई समझकर तरस खाते हैं मुझपर, उसी अकेलेपन में वो साया बनकर साथ निभाता है।
भटकती फिर रही थीं दर-ब-दर तन्हा सी राहें, सुकून-ए-दिल की ख़ातिर खोलकर अपनी निगाहें।
न मन्नत की कोई चादर, न मंदिर की इबादत, मेरा प्यार ही बन गया मेरे ख़ुदा की दुआ है।
मिलेगा तू कहीं न कहीं, इसी उम्मीद में ज़िंदा हैं, तेरी ही बंदगी में अब ये सारा जग धुआँ है।
Takdeer me jo nahi uski Fariyaad na kr
Jo hona hai wo ho kar rahega
Tu Kal ki fikar main aaj ki husi brbaad na kr

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