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Erotica वूमंडली की लौंडिया

naag.champa

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वूमंडली की लौंडिया

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(मलाई- एक रखैल भाग -२)
अनुक्रमणिका

अध्याय १ // अध्याय २ // अध्याय ३ // अध्याय ४ // अध्याय ५
अध्याय ६ // अध्याय ७ // अध्याय ८ // अध्याय ९ // अध्याय १०
अध्याय ११ // अध्याय १२ // अध्याय १३ // अध्याय १४ // अध्याय १५
अध्याय १६ // अध्याय १७ (समाप्ति )
 
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naag.champa

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अध्याय १२



क्या मैं सो गई थी या फिर नशे में बेहोश हो गई थी ? मुझे नहीं मालूम। मेरे कानों में महिलाओं की बातचीत करने की अस्पष्ट बातचीत की दबी दबी आवाज सुनाई देने लगी और मैंने धीरे-धीरे अपनी आंखें खोली।

मैंने देखा कि मैं एक कमरे में जमीन पर बनी हुई एक अस्थाई बिस्तर के ऊपर लेटी हुई हूं। मेरे होठों के कोने से लाल टपक रही है, मेरे दोनों हाथ दोनों तरफ फैले हुए हैं और मेरे पैरों को भी फैला कर रख दिया गया है। उसके बाद मुझे एहसास हुआ कि मेरे बाल भी खुले हुए हैं और मैं बिल्कुल नंगी हूं। कमरे में एक पीले रंग की रोशनी छाई हुई थी और तब तक सूरज भी ढल चुका था और बाहर से कीड़े मकोड़े और मेंढक की आवाज आ रही थी। धीरे-धीरे मेरी नज़रें साफ होने लगी, मैंने देखा कि मेरे दोनों तरफ दो औरतें बैठी हुई है जिन्हें मैं अच्छी तरह जानती हूं एक तो है शैली खाला और दूसरी और कोई नहीं मेरी अपनी कमला मौसी।

और उसके साथ ही कमरे में आठ - दस महिलाएं और मौजूद थी, जिनमे फुलवा, शालिनी, सिस्टर सिलेस्टी और बाकी वह सब महिलाएं जो मेरे शुद्धिकरण के दौरान अंदर वाले बगीचे में नाच रही थी। और पहले की तरह तब भी सबके सब बिल्कुल नंगी थी और सब के बाल खुले हुए थे। यहां तक की कमला मौसी भी उसी हालत में थी|

कमला मौसी को इतने लोगों के बीच इस तरह से निसंकोच होकर इतने लोगों के बीच इस तरह से नंगी होकर बैठी देखकर मुझे थोड़ी हैरानी सी हुई और इधर बाकी लोगों को पता चल गया कि मेरी नींद खुल गई है और मेरा नशा धीरे-धीरे कट रहा है, मैंने मारे शर्म के अपने हाथों से अपने स्थानों और यौनांग को ढकने की कोशिश की; पर तभी कमला मौसी ने मुझसे कहा, " आखिरकार तेरी नींद पूरी हो ही गई... मुझे तेरी बहुत चिंता हो रही थी और मुझे रहा नहीं गया इसलिए मैं भी यहां चली आई ... अरी क्या हुआ ? मुझे नंगी देखकर इतनी हैरान क्यों हो रही है? आखिर मैं भी वूमंडली की सदस्या हूं... यहां किसी भी औरत को अपने तन पर कोई भी कपड़ा रखने की इजाजत नहीं है ... खैर मुझे इस बात की खुशी है कि तेरा शुद्धिकरण हो चुका है ... पर तुझे तो कोई होश ही नहीं था; तुझे उठा कर यहां लाने में सबको बड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी उसके बाद हम लोगों ने तेरे को थोड़ी सी पतली सी खिचड़ी खिलाई और उसके बाद तू तो घोड़े बेचकर सो गई"

इतने में फुलवा बोल उठी, "आपने ठीक कहा कमला मौसी आपकी लौंडिया बहुत भारी है"

यह सुनकर वहां मौजूद सारी औरतें खिलखिला कर हंस पड़ी।

इतने में शैली खाला उन सबको मजाकिया तौर पर दांती भी बोली, "अरे भाई, का तू लोग एह लौंडिया के छेड़न बंद करेलबे? जो भी भइल, बहुत बढ़िया से भइल... कमला मौसी के बहुत पहिले से इच्छा रहे कि एह लौंडिया के दूफला करवाई बे... सो स्वामी जी के आशीर्वाद से ई काम पहिलहीं हो चुकल रहे; और आज? आज बहुत खुशहाल दिन बा, कमला मौसी के लौंडिया के शुद्धिकरण हो गईल बा, अब स्वामी जी थोड़े समय में आके ग्रहण करीबे"

तभी फुलवा चहक उठी, "अच्छा शैली खाला ? स्वामी जी गुड़धानी खाँ कब हमारे बीच आएंगे और हमारी नई सदस्या मलाई को ग्रहण करेंगे? जब उन्होंने मुझे ग्रहण किया था तब तो आप सब लोग यहां मौजूद थे और आपने देखा था ... आज मुझे भी देखना है की मलाई जैसी सुंदर झिल्ली को स्वामी जी गुड़धानी खाँ कैसे और कितनी बार चोदेंगे?"

इस पर सिस्टर सिलेस्टी ने बड़े उत्साह के साथ कहा , "हां हां क्यों नहीं ? हमारे बीच एक नई सदस्या आई है... उसके ग्रहण के समय हम लोगों को तो यहां रहना ही पड़ेगा अर्धविराम स्वामी जी गुड़धानी खाँ बस कुछ ही देर में यहां आने वाले हैं। लेकिन उससे पहले तुम दोनों एक काम करो मलाई को बाहर ले जाकर पिशाब विशाब करवा कर लाओ... उसके बाद मैं उसे दोबारा से थोड़ा सा छाछ पिला दूंगी ताकि उसका नशा फिर से चढ़ जाए और हां एक बात का खास ध्यान रखना, जब मलाई पेशाब करने बैठेगी अब देखने की उसके बाल जमीन पर ना लगे पेशाब कर लेने के बाद उसकी योनि को अच्छी तरह से धो देना"

फुलवा और शालिनी ने मुझे सहारा देकर बिस्तर से उठाया, तभी भी मुझे हल्का-हल्का नशा सा छाया हुआ था वह दोनों मुझे बाहर ले गई और अब तक में पक्की तरह समझ गई थी कि स्वामी जी गुड़धानी खाँ मेरे साथ यौन संबंध बनाने वाले हैं - इसी को कहते हैं ग्रहण करना।


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***

फुलवा और शालिनी वापस मुझे कमरे में ले आई और उन्होंने मुझे बिस्तर पर बिठा दिया। कमला मौसी ने अपने हाथों से एक मिट्टी के को कुल्हड़ के जरिए मुझे वह नशीली छाछ पिलाई। इससे पहले भी मैं कमला मौसी के हाथों से नशीली चीज पी थी; पर वह था बियर।

उसे पीते पीते मैंने आसपास देखा जिस कमरे में मुझे रखा गया था वह कमरा काफी बड़ा था। लगभग एक गोडाउन जैसा। दीवारों के आसपास पुआल के बंडल बंधे हुए थे... यहां तक की जी बिस्तर पर मुझे लिटा कर रखा गया था वह भी मोबाइल का ही बना हुआ था और उसके ऊपर सिर्फ एक सफेद रंग की चादर बिजी हुई थी। मैं दीवार पर पीठ टेक कर बैठी हुई थी और मेरी आंखों के सामने दरवाजा था।

यह सब कुछ मुझे ठीक वैसा लग रहा था जैसा कि मैं अपने सपने में देखा था... वही सपना जिसमें कर हट्टे कट्टे लोग मुझे अगवा कर ले गए थे और और वह लोग मुझे ऐसे ही किसी जगह पर ले जाकर उन लोगों ने मेरे साथ बलात्कार किया था... लेकिन देखा जाए तो यहां कुछ ही देर बाद मेरा बलात्कार नहीं होने वाला था बल्कि मैं यहां इसलिए लाई गई थी ताकि मेरी शुद्धिकरण करवाई जाए, मेरी मांग का सिंदूर मेरे माथे से मिटा दिया जा सके और उसके बाद स्वामी जी आकर मुझे ग्रहण करें- यानी कि मेरे साथ यौन संभोग करें और मैं पवित्र हो जाऊं।

मैं लगभग दो कुल्हड़ नशीली छाछ पी चुकी थी कि इतने में सिस्टर सिलेस्टी ने कमला मौसी से कहा, "कमला मौसी मेरे ख्याल से आपको अपनी लौंडिया को थोड़ा सा और नशा करवा देना चाहिए। शुद्धिकरण के दौरान मैंने जब इसकी चूत मैं उंगली डाली थी, तभी मुझे पता चल गया था कि इसकी चूत बहुत टाइट है लगता है ठीक से इस्तेमाल नहीं हुआ है... मुझे तो डर है कि जब स्वामी जी गुड़धानी खाँ इसे चोदेंगे बहुत दर्द होगा ... पर अगर यह नशे में होगी तो उसे शायद उतना दर्द नहीं होगा"

कमला मौसी ने उनकी बात पर गौर फ़रमाया और फिर बोली, "हम औरतों को तो इतना दर्द सहना ही पड़ता है; पुरुष का लिंग चाहे कितना बड़ा ही क्यों ना हो हर योनि का यह कर्तव्य है कि वह उसे आश्रय दे... और मुझे यकीन है कि मेरी पालतू लौंडिया ऐसा जरूर करेगी"

इस पर शैली खाला ने कहा, " कमला दीदी, तुम जो जवन कहत रही ऊ एकदम सही बा; लेकिन देखे के बात इ बा कि जब स्वामी जी गुड़धानी खाँ शालिनी के ग्रहण कईले त बेचारी लड़की के बहुत दर्द भईल रहे... दर्द से उ छटपटहट रहीं... अवुरी हमनी के मजबूरी में उनुकर हाथ-गोड़ पकड़े के पड़ल, एहसे हमरा एकरा के राखे के पड़ल हमरा लागता कि सिस्टर सेलेस्टे सही कहत बा; उपर के नजरिया से स्वामी जी एक बेर चोदला के बाद तोहार लौंडिया के ना छोड़िहें, कम से कम चार बेर चोद जइहें"

यह सुनकर मैं चौंक उठी क्योंकि मेरे सपने में भी मुझे जबरदस्ती अगवा करके ले जाने वाले लोग चार ही थे।

यह बात सुनकर फुलवा फिर से चाहे उठी, " कमला मौसी कमला मौसी, एक वादा करो तुम अपनी लौंडिया को प्रेग्नेंट मत करवाना। मैं चाहती हूं कि वह हमारी सहेली बनकर रहे और हमारी ही तरह लेचारी करें "

कमला मौसी और शैली खाला ने एक दूसरे से नजरे मिलाई और फिर वह दोनों मुस्कुराए। मैं सिर्फ सर झुकाए चुपचाप बैठी हुई थी|

इस समय कमरे के कपाट खोलकर स्वामी जी गुड़धानी खाँ कमरे के अंदर दाखिल हुए। उनको देखते ही मैं चौंक उठी और मैंने देखा कि उन्होंने सिर्फ एक लंगोट पहन रखी थी उनका चेहरा दाढ़ी और मूंछों से भरा हुआ था और उनके कोहनी तक लंबे बाल खुले हुए थे।

उनके कमरे में दाखिल होते ही पूरे कमरे में बिल्कुल सन्नाटा सच्चा गया।

दरवाजे से मेरे बिस्तर तक करीब 10-12 कदम की दूरी थी। उनके आते ही साड़ी की सारी औरतें उनके दाएं और बाएं तरफ कतर बनाकर खड़ी हो गई और उसके बाद वह सब के सब अपने घुटनों के बल बैठकर अपना माथा जमीन पर टिका कर अपने बालों को सामने की तरफ फैला दिए। स्वामी जी गुड़धानी खाँ उनके बिछाए हुए बालों पर अपने पैर रखते हुए धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ने लगे।

मैं अब तक घबराई हुई चुपचाप नंगी खड़ी हुई थी और मैं अपने तन ढकने का जरा सा भी प्रयास नहीं किया था लेकिन वह जैसे ही मेरे एकदम करीब आ गए मैं भी तुरंत चुप कर घुटनों के बल बैठ गई और अपना माथा जमीन पर टिका कर अपने बालों को उनके आगे फैला दिए| उन्होंने मेरे बालों पर भी अपने दोनों पैर रखकर मुझे आशीर्वाद दिया और फिर दो कदम पीछे हटकर मुझे बालों से पड़कर एकदम सीधा खड़ा कर दिया और मुझे ऊपर से नीचे तक देखते हुए मानो मेरे शरीर और जवानी का निरीक्षण करने लगे क्योंकि इससे पहले मुझे उन्होंने नंगी हालत में बिल्कुल नहीं देखा था|

क्रमश:
 
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मलाई वूमंडली के बीच फंसी है या रजिया गुंडो के बीच आ फंसी है !
वूमंडली उन औरतों का समूह है जो तांत्रिक गुड़धानी खां की शिष्या हैं । ये सभी एक तरह से तांत्रिक की बिस्तर पार्टनर ही हैं ।
शराब और शबाब का कॉम्बिनेशन हमेशा ही खतरनाक कहे या फिर उत्तेजक रहा है । होश खोने के लिए यह दोनो चीज ही काफी है ।
कमला मैडम पहले से ही वूमंडली की सदस्या थी । शायद जानबूझकर उन्होने मलाई का जिस्मानी रिश्ता पहले सचिन अंकल से करवाया ताकि लड़की की झिझक कम हो जाए और फिर उसके बाद उसे वूमंडली के जमात मे शामिल करा दिया जाए ।
कमला मैडम वास्तव मे बहुत पहुंची हुई चीज है ।
बेहतरीन अपडेट नाग चंपा मैडम ।
आउटस्टैंडिंग अपडेट ।
 

Premkumar65

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अध्याय १

आज का दिन काफी व्यस्तता में बीता| कमला मौसी का दस कर्मा भंडार में जहां हर तरह की पूजा अर्चना की सामग्री जैसे की अगरबत्ती, बताशा, मिट्टी के दिए आदि इत्यादि मिलती है - आज काफी बिक्री हुई| कमला मौसी उम्र में मेरे से बड़ी है इसलिए दुकान दुकान के अंदर ज्यादातर काम में ही करती हूं|

आज मैं काफी थक गई थी इसलिए कमला मौसी ने जोमैटो से आलू के पराठे मंगा लिए और उसके साथ घर में मैं दही तड़का मैंने पहले से बना रखा था| दही तड़का बनाना मैं यूट्यूब से सीखा था|

आज का दिन काफी व्यस्तता में बीता| कमला मौसी का दस कर्मा भंडार में जहां हर तरह की पूजा अर्चना की सामग्री जैसे की अगरबत्ती, बताशा, मिट्टी के दिए आदि इत्यादि मिलती है - आज काफी बिक्री हुई| कमला मौसी उम्र में मेरे से बड़ी है इसलिए दुकान दुकान के अंदर ज्यादातर काम में ही करती हूं |

आज मैं काफी थक गई थी इसलिए कमला मौसी ने जोमैटो से आलू के पराठे मंगा लिए और उसके साथ घर में मैं दही तड़का मैंने पहले से बना रखा था| दही तड़का बनाना मैं यूट्यूब से सीखा था |

आजकल गर्मी न जाने इतनी क्यों बढ़ गई है इसलिए घर आते ही मैं सबसे पहले बाथरूम में जाकर अच्छी तरह से नहाई धोई और बालों में अच्छे से शैंपू भी किया| और जैसे ही मैंने सिर्फ एक नाइटी अपने ऊपर चढ़ा कर बाथरूम के बाहर कदम रखा टिंग- टाँग टिंग- टाँग टिंग- टाँग करके घंटी बज उठी| मैं जल्दी-जल्दी अपने बालों को समेट कर सर के ऊपर हल्के से जुड़े में बांधा और दरवाजा खोलते ही मैंने देखा कि सामने बंटी मिस्त्री खड़ा है|

बंटी मिस्त्री इस मोहल्ले में नल और पानी का काम किया करता है और वह इस काम में बिल्कुल माहिर है और साथ ही हमारे लिए कभी कबार सामान वगैरा भी लेकर आता है|

मैंने अपने बदन पर सिर्फ एक नाइटी चढ़ा रखी थी और शायद इसीलिए मेरी स्त्रियोचित शारीरिक विशेषताएं और वक्रताएं उसकी नज़रों ने निखर रही थीं| "कमला मौसी ने मुझे आप लोगों के लिए बीयर लाने के लिए कहा था"

यह कहकर उसने मुझे एक थैला पकड़ा दिया , जिसमें बियर की चार बोतलें रखी हुई थी और वह आपस में ठन ठन आवाज कर रही थी|

बंटी मिस्त्री को एहसास हो गया था कि मैं नाइटी के नीचे कुछ भी नहीं पहन रखा है और मेरे स्तनों की चूचियां नाइटी से साफ उभर रही है| मैं समझ गई थी कि वह मुझे आंखें फाड़ फाड़ कर घूर रहा है|

इसलिए मैंने उसे हल्का सा डांटते हुए कहा, "ठीक है, तुझे बाकी पैसे वापस करने की जरूरत नहीं है और आप आंखें फाड़ फाड़ कर क्या देख रहा है? जा भाग यहां से"

बंटी मिस्त्री पहले से थोड़ा बड़ा हो गया है| और जहां तक मैंने सुना है कि इस बार उनका नाम वोटर तालिका में भी आ गया है| पहले की तुलना में उनके शरीर स्वास्थ्य बेहतर हुआ है, उनके शरीर पर थोड़ा सा मांस चढ़ गया है और वह उम्र में बड़ा दिखने लगा है। ऐसा लगता है कि इस इस लड़के ने अब तक तो कोई ना कोई लड़की पटा ही ली होगी|

जहां तक मैं जानती हूं, मर्द लोग हमेशा हमेशा लड़कियों और औरतों को घूरते रहते हैं; इस बात का एहसास मुझे तब हुआ जब मैं बड़ी जवानी की दहलीज पर कदम रखा ही था। मेरा शरीर और स्तैण होने लगा था रूप निकल रहा था... तब से मैंने गौर किया था कि लोग बाग पहले मेरे चेहरे को देखते थे उसके बाद उनकी नज़रें मेरी छाती पर जा टिकति थी... मानो वह लोग नाप रहे हो कि मेरे स्तनों का विकास कितना हुआ है। शुरू शुरू में तो मुझे यह सब बहुत अटपटा लगता था; लेकिन जैसे दिन बीते गए मुझे मर्दों के घूरने की आदत सी पड़ गई।

खासकर अब, जब कमला मौसी अपनी दुकान में मुझे कटे कटे से खुले खुले से ब्लाउज पहनकर रहने को बोलता है... और जब उन्हें लगता है कि दुकान की बिक्री थोड़ी मंदी चल रही है; तो वह मेरे बाल खुलवा देती है... जहां तक मैं जानती हूं खुले बालों में मैं और भी सुंदर लगती हूं... इसलिए लोग बाग मुझे देखने के लिए ही सही दुकान में आते हैं और कुछ ना कुछ खरीद कर ली जाते हैं।

मैं यह सब सो ही रही थी कि इतने में मेरी नजर बाहर वाले कमरे में रखिए दो बड़े-बड़े थैलों पर पड़ी। इसमें हमारी ही दुकान का सामान अच्छे से सजाकर भरा हुआ था। मैंने जानकर भी अनजान बनते हुए कमला मौसी से पूछा " कमला मौसी में थालिया में आपने किसका समान इतना संभाल के भर रखा है?"

कमला मौसी ने अंदर से ही आवाज दिया, "आज हमारी दुकान में जो औरत आई थी ना? शैली खाला; यह सारा का सारा सामान वही रखवा कर गई है। कल तुझे जाकर यह सारा सामान उनके घर पहुंच कर आना होगा"

मुझे याद आया कि दोपहर को एक अधेड़ उम्र की औरत हमारी दुकान में आई थी। कमला मौसी ने उसका परिचय मेरे साथ शैली खाला के नाम से करवाया था। वह मेरे बारे में बहुत कुछ पूछ रही थी।

शैली खाला स्वामी जी गुड़धानी खाँ के आश्रम में रहती थी और कमला मासी ने मुझे यह भी बताया था कि वह स्वामी जी गुड़धानी खाँ के आश्रम में उन्हीं के साथ रहती है और साथ ही आश्रम के सारे के सारे काम वही संभालती है। किसी जमाने में वह स्वामी जी गुड़धानी खाँ की रखैल हुआ करती थी पर आज भी वह स्वामी जी की देखभाल करती है। अपने पति के रहते हुए भी सचिन अंकल के साथ शारीरिक संबंध बनाने के बाद मुझे रखैल शब्द बिल्कुल भी अटपटा नहीं लगता था।

स्वामी जी गुड़धानी खाँ एक भूत पिशाच और तांत्रिक सिद्ध व्यक्ति थे। और जहां तक मुझे मालूम था वहां हमेशा ही औरतोंकी भीड़ लगी रहती थी। सब के सब अपनी कोई ना कोई मनोकामना पूरी करने के लिए उनके पास जाते थे।

स्वामीजी गुड़धानी खाँ हमारे सबसे पक्के ग्राहक हैं। उन्होंने अपनी पैतृक संपत्ति पर काफी समय से कल्याणी हाईवे के पास अपना आश्रम बना रखा है, वे वहीं रहते हैं और जहां तक मुझे पता है वे अविवाहित हैं लेकिन उन्हें शादी करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि उनकी उम्र चालीस या पैंतालीस साल है। एक गृहिणी के रूप में उनके पास शैली खाला जो मौजूद है।

जब दुकान में शैली खाला अलावा और कोई नहीं था तब वह कमला मौसी के पास गई और मुझे सुनाते हुए बोली, "देखत बानी कि तोहार दुकान में बढ़िया बिक्री हो रहिल बा..."

कमला मौसी ने भी गर्व से उत्तर दिया, "सब तांत्रिक भूत पिशाच सिद्ध स्वामीजी गुड़धानी खाँ का आशीर्वाद है..."

शैली खाला कहे लगली, “ हां हां हां, ई स्वामी जी के आशीर्वाद जरूर ह, ऊपर से तुम अइसन लौंडिया पालबे के रखि... लोग एकरा के देखे को आवेला... ईहो एकदम कच्चि कलि थुबड़ी लागे रि... ई उन्निस- बीस के ऊपर न होगी। हम त पक्का जानी कि ई लौंडिया तोहार पेट से न जनमी..."

यह सुनकर मैं एकदम चौंक गई और एक झटके में अपनी गर्दन घूमर उनकी तरफ मैंने देखा। और झटका की वजह से मेरे बालों का जुड़ा खुल गया। शैली खाला की नजर मुझ पर एकदम गढ़ गई... तब तक वह दुकान के अंदर आ चुकी थी, मैं झटपट बालों को समेट कर जुड़ा बांधने गई तो उन्होंने मुझे रोका और बोली, "ना ना ना हमार मीठी लौंडिया लडकी तोहार बाल पूरा खोला... हमरा के तोहार प्यारा बाल देखन दीं"

उसके बाद उसने मेरे बालों को अपने हाथों से सहलाया और फिर मेरे सामने खड़ी होकर हल्के से मेरे स्तनों को भी प्यार से दबाया और फिर एक आंख मार कर उसने कमला मौसी से पूछा, "ई उन्नीस बीस साल के सुन्दर लौंडिया हई, एह कुंवारी थुबड़ी के खरीदे खातिर कौन कौन खजाना बेच दिहनी?"

कमला मासी ने गर्व से हंसते हुए कहा, "हा हा हा हा... शैली खाला, यह लड़की थुबरी नही बल्कि फ़र्दा है फ़र्दा - बल्कि ब्याही हुई फ़र्दा है... और यह और हां यह उन्नीस बीस साल की नहीं है; इसकी उम्र उससे थोड़ी ज्यादा है हमारे यहां किराए पर रहती है... घर बैठे बैठे यह क्या करती? इसलिए मैंने इसको अपने साथ दुकान में आने को कहा... मेरा भी थोड़ा हाथ बंट जाता है और इसका दिल भी बहल जाता है "

ग्रामीण भाषा में 'थुबारी' का मतलब है कुंवारी लड़की जिसकी शादी नहीं हुई है और 'फ़र्दा ' का मतलब है ऐसी लड़की जिसके गुप्तांग में किसी पुरुष का लिंग डालकर उसकी सतीच्छद फाड़कर उसका कौमार्य भंग कर दिया गया हो... और ब्याही ही हुई फ़र्दा का मतलब एक ऐसी लड़की जिसका विवाह हो गया हो और उसके बाद उसे उसके कौमार्य से मुक्त किया गया हो...

शैली खाला ने मुझे दुकान में पहले भी देखा था पर उसे दिन यह सारी बात सुनकर मानव वह आसमान से गिरी और बोल पड़ी, "दैया रे दैया! हम तो देखबो न करि?! ईका हाथ मा शांखा पौला मांग मा पतली धरी का सिंदूर... हम तो ईका हाथ मा लाल लाल चूड़ी ही देखत रहिन, ई लौंडिया तुम्हार तरह बंगालिन हौ... अब हम समझिल... अब तक हम यहींन सोच राहिल कि ई लौंडिया कुंवारी थूबड़ी टाइट सील वाली हौ… पर एक बात बताओ कमला तोहार इस लौंडिया को ईका पति अच्छी तरह चटकानी और सफेदी देत ह कि नाहीं? एकरा बच्चा कच्चा हुआ कि नाही?”

पर एक बात बताओ कमला तोहार इस लौंडिया को ईका पति अच्छी तरह चटकानी और सफेदी देत ह कि नाहीं? एकरा बच्चा कच्चा हुआ कि नाही?”

ये बातें सुनकर मैं शर्म से लाल हो गयी और सिर झुका लिया. चटकानी का अर्थ है किसी लड़की को पुरुष द्वारा सहलाना या फिर प्यार से उसके पूरे बदन को मसलन; सफेदी प्रेम का अर्थ है - वीर्य स्खलन और इच्छा संतुष्टि... शैली खाला की भाषा बिल्कुल गवारों जैसी है, लेकिन मेरी तारीफ ही कर रही है... हां, मैं फर्दा हूं लेकिन ब्याही हुई फर्दा है... शादी के बाद, मेरे पति का लिंग मेरे गुप्तांगों में डाला गया और मैं कुंवारे पन से मुक्त हो गई मेरी सील यानि की हैमेन फट चुकी है...

"अब मैं तुमसे क्या छुपाऊं शैली खाला? इसकी शादी को कई साल हो गए; लेकिन यह सभी बच्चा नहीं हुआ| इसका पति बहुत ही दुबला पतला और कमजोर है | जब से मैं इन दोनों को साथ देखा मुझे बड़ी तकलीफ होती थी| इसलिए मैंने ठान ली कि मुझे इसकी मदद करनी चाहिए| और जब मेरे पति के दोस्त, वह है ना सचिन बाबू? वह जब अमेरिका से आए तो मैं इससे कहा कि मलाई, तू उनके कमरे में ही रह- सचिन बाबू ने इसको वह सुख दिया जो उसका पति नहीं दे सकता है| यह जी भर के और दिल खोल के चुदी है सचिन बाबू से... मैंने इसे कंडोम का इस्तेमाल करने से सख्त मना कर दिया था; लेकिन मैं इस बात का भी ध्यान रखा किसके पेट में बच्चा ना जाए... इसलिए मैं इसे x- pill खिला दिया करती थी... इसकी उम्र ही क्या है? अभी से अगर यह मां बन गई ऐसा समझ लो किसी गायक को हमने खूंटे में बाँध दिया है... सचिन बाबू के प्यार चटकानि और सफेदी से मैंने इसे दुफला बनवाया... लेकिन मैं अब इसका क्या करूं मुझे समझ में नहीं आ रहा"

गांव की भाषा में दुफला मतलब होता है एक ऐसी लड़की जो शादीशुदा हो लेकिन किसी दूसरे पुरुष के साथ संबंध बना चुकी हो। कमला मौसी ने मुझे दुफला बनाने की बात कुछ इस तरह से कहीं; मानो उसने बड़ी मुश्किल से एक लड़की से शादी करके उसकी दुनिया को बचाया हो।

शैली खाला बड़े ध्यान से कमला मौसी की बातें सुन रही थी| फिर उन्होंने दबे स्वर में कमला मौसी से कहा, "हमहुँ एह समस्या के एके गो समाधान दिखत राहिलबा, तू ई लौंडिया के हमनी के वूमंडली में शामिल कर लीं... ई लौंडिया मा सेक्स का इतना पानी भरल रहिन कि हमका लागे ई लौंडिया चार चार बिस्तर मा अपनी टांगे फैला सकींन... हम तो कही तू ईका द्वारा लेचरी करवा... हमार तो वैसन ही बहुत जान पहचान थई, रोज़ चुदेगी तोहार लौंडिया और हम दोनों का बहुत आमदनी भी होईलगी"

गांव की तरफ ज्यादातर शादीशुदा आदमी काम के सिलसिले में घर से बाहर रहते हैं| इसकी वजह से अक्सर अच्छे परिवार की लड़कियां दुल्हनें या फिर महिलाएं अपना अकेलापन या फिर पैसों की कमी को दूर करने के लिए अक्सर दूसरे आदमियों के साथ शारीरिक संबंध बना लेती है.... भले ही यह गलत हो लेकिन हमारे समाज में इसे गुप्त रूप से स्वीकार भी किया गया है|

लेचारी का मतलब है कि मैंने जो सुना है, गांव के ज्यादातर शादीशुदा पुरुष काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं, इस वजह से अक्सर अच्छे परिवार की लड़कियां, दुल्हन या महिलाएं दूसरे पुरुषों के साथ संबंध बनाती हैं... भले ही यह व्यभिचार हो, हमारे यहां इसे गुप्त रूप से स्वीकार किया जाता है समाज…

लेकिन वूमंडली का मतलब क्या है?


क्रमश:
Wowww nice story. A different idea.
 

Premkumar65

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अध्याय २

इसके बाद शैली खाला मेरे पास आकर मुझे कुछ जननी सवाल पूछने लगी, ता- झिल्ली... कवन साइज के पेनी पहनत रही? हम देख लील कि तोहार मम्मों का साइज काफी बड़का बड़का बा..."

मैंने धीरे से सर झुकाए जवाब दिया, “जी मैं चौतीस डीडी की ब्रा पहनती हूं...”

शैली खाला कि जैसे बंसी खिल गई और उसने कहा, "बहुत बढ़िया, बहुत बढ़िया! एतना बड़का बड़का स्तन के ऊपर ब्रा नहीं न पहिनी, निप्पल देखाई देत राहिल, और तोरा ब्लाउज भी बहुत बढ़िया बा, पीठ और छाती काफी खुला खुला, और स्तन के जोड़ी के बीच के क्लीवेज बढ़िया से देखाई देत ढील ... कमला ? तू ई लौंडिया को हमनी के भेज... तांत्रिक पिशाच सिद्ध स्वामी जी गुड़धानी खाँ एकरा के देख के प्रसन्न हो जइहें - आपन आशीर्वाद दीं”

मैंने मन में सोचा, स्वामीजी गुरधनी खान एक स्वामी जी गुड़धानी खाँ एक तांत्रिक हैं और मैं एक युवा सुंदर लड़की हूं। क्या मुझे आशीर्वाद देने का मतलब मेरे जैसी कच्ची-कली के साथ झिल्ली के साथ सेक्स करना है?

इसका जवाब मुझे तुरंत ही मिल गया क्योंकि कमला मौसी ने खिल खिला कर हंसते हुए कहा, “ठीक है मैं कल ही भेजती हूं इसे स्वामी जी के यहां, लेकिन शैली खाला एक बात का ध्यान रखना तुम्हारे यहां मेरी लौंडिया को कोई चोद ना दे... हा हा हा"

"ई चुदेगी ज़रूर चुदेगी; तोहार लौंडिया जी भर का चुदेगी, अगर हमरा स्वामी जी के आशीर्वाद राहिल तो... हम कहत बानी कि उ एक से नाही चार-चार से चुदेगी ... ठीक बा कमला दीदी, एक बात बताई? का तुम घर मा ई लौंडिया के कपड़े पहना कर राखत हो? अगर हम अइसन लौंडिया के पाले रहतीं त घर में पूरा नंगी रखले रहतीं... और बाल भी खुला छोड़े के कहतीं... ई लौंडिया हमर के वूमंडली खातिर बिल्कुल परफेक्ट बा”

***

मैंने चुस्कियां लेते-लेते बियर की दो बोतलें ख़त्म कर दीं और मैं ने साथ ही मैंने तीन आलू के पराठे भी खा लिए थे| लेकिन मैं बिल्कुल चुपचाप बैठी हुई थी कमला मौसी ने यह इस बात का गौर जरूर किया था और आंखें खुद को रोक न सकी और मुझसे पूछा, “क्या बात है? आज तू इतने चुपचाप क्यों है?”

उनके पूछने पर मेरी झिझक थोड़ी कटी और फिर मैंने कहा , "कमला मौसी मैं शैली खाला की बातों को याद कर रही थी- उसने कहा था कि अगर वह मुझे पाल रही होती ; तो शायद मुझे घर में ना ही कपड़े पहनने देती और ना ही मेरे बालों को बांधने देती... क्या तुम भी मेरे साथ ऐसा ही करती?"

कमला मौसी ने अपने चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान लिए हुए से मेरी तरफ देखा और फिर उन्होंने मुझसे पूछा, "क्यों? मेरे सामने नंगी होने में तुझे कोई एतराज है क्या?"

मैं चुपचाप खाना खाना जारी रखा लेकिन कमला मौसी मेरे सर पर हाथ फेरती हुई बोली, "सच-सच बताऊं ? अगर तू वास्तव में शैली खाला की पालतू लड़की होती तो शायद सचमुच वह तुझे घर में बिल्कुल नंगी ही रखती और हां तुझे अपने बालों को भी बढ़ने की इजाजत नहीं देती"

मैंने हैरानी से पूछा, "ऐसा क्यों?"

कमला मौसी ने बिल्कुल ऐसे मुझे समझाया जैसे मानो कि किसी छोटे बच्चों को समझ रही हो, "तो जैसी सुंदर लौंडिया को कपड़े पहन कर रखना सुंदर घने रेशमी लंबे बालों को बाँध कर रखना सुंदरता का अपमान है..."

फिर मैं भी शरारत से उनसे पूछा , "अगर बंटी मिस्त्री ने मुझे नंगी हालत में देख लिया होता तो?"

कमला मौसी ने हँसकर कहा, “और क्या हो सकता था? बंटी मिस्त्री बड़ा हो गया है... और इसके अलावा शैली खाला ने जो कहा... वह बात मुझे पसंद आ गई... सच कहूं तो, वास्तव में तुझे लेचारी करने के बारे में सोचना चाहिए इससे तेरा भी दिल बहला रहेगा..."

मैंने चुस्कियां लेते-लेते बियर की दो बोतलें ख़त्म कर दीं और मैं ने साथ ही मैंने तीन आलू के पराठे भी खा लिए थे| लेकिन मैं बिल्कुल चुपचाप बैठी हुई थी कमला मौसी ने यह इस बात का गौर जरूर किया था और आंखें खुद को रोक न सकी और मुझसे पूछा, “क्या बात है? आज तू इतने चुपचाप क्यों है?”

उनके पूछने पर मेरी झिझक थोड़ी कटी और फिर मैंने कहा , "कमला मौसी मैं शैली खाला की बातों को याद कर रही थी- उसने कहा था कि अगर वह मुझे पाल रही होती ; तो शायद मुझे घर में ना ही कपड़े पहनने देती और ना ही मेरे बालों को बांधने देती... क्या तुम भी मेरे साथ ऐसा ही करती?"

कमला मौसी ने अपने चेहरे पर शरारत भरी मुस्कान लिए हुए से मेरी तरफ देखा और फिर उन्होंने मुझसे पूछा, "क्यों? मेरे सामने नंगी होने में तुझे कोई एतराज है क्या?"

मैं चुपचाप खाना खाना जारी रखा लेकिन कमला मौसी मेरे सर पर हाथ फर्टिलि हुई बोली, "सच-सच बताऊं ? अगर तू वास्तव में शैली खाला की पालतू लड़की होती तो शायद सचमुच वह तुझे घर में बिल्कुल नंगी ही रखती और हां तुझे अपने बालों को भी बढ़ने की इजाजत नहीं देती"

मैंने हैरानी से पूछा, "ऐसा क्यों?"

कमला मौसी ने बिल्कुल ऐसे मुझे समझाया जैसे मानो कि किसी छोटे बच्चों को समझ रही हो, "तो जैसी सुंदर लौंडिया को कपड़े पहन कर रखना सुंदर घने रेशमी लंबे बालों को बाँध कर रखना सुंदरता का अपमान है..."

फिर मैं भी शरारत से उनसे पूछा , "अगर बंटी मिस्त्री ने मुझे नंगी हालत में देख लिया होता तो?"

कमला मौसी ने हँसकर कहा, “और क्या हो सकता था? बंटी मिस्त्री बड़ा हो गया है... और इसके अलावा शैली खाला ने जो कहा... वह बात मुझे पसंद आ गई... सच कहूं तो, वास्तव में तुझे लेचारी करने के बारे में सोचना चाहिए इससे तेरा भी दिल बहला रहेगा..."

कमला मौसी की बातें सुनकर मेरा दिल धक से रह गया|

मैंने हैरानी से पूछा, "मतलब?"

कमला मासी ने अपना हाथ मेरे गाल पर रखा और मेरे एक स्तन को दबाया और मुझसे कहा, “क्या तुझे याद नहीं कि मैंने क्या कहा था? भगवान ने तुझे एक योनि दी है... क्या तू इससे जिंदगी भर मूतती ही रहेगी? देख, मलाई, अगर जैसा मैं कहती हूं तू अगर वैसा करेगी और अगर तुम मेरी सब बात मानेगी; वह तो यकीन मान; ये तेरा भला ही होगा और तू ऐश करेगी... मैं हूँ न तेरी कमला मौसी? तो तू किसी भी बात की कोई भी चिंता मत कर"

***

जब अनिमेष घर पर नहीं होता, तुम्हें कमला मौसी के साथ ही उनके बिस्तर पर ही सो जाती हूँ| लेकिन सोने से पहले मैं उनके हाथों और पैरों की अच्छी तरह मालिश कर देता हूं।

ऐसा करने के बाद कब उनसे लिपटकर सो गई मुझे याद नहीं | लेकिन सोते वक्त बार-बार मुझे शैली खाला की बातें याद आ रही थी- 'ई लौंडिया मा सेक्स का इतना पानी भरल रहिन कि हमका लागे ई लौंडिया चार चार बिस्तर मा अपनी टांगे फैला सकींन... हम तो कही तू ईका द्वारा लेचरी करवा...

और यह सब सोच सोच कर मेरे पेट के निचले हिस्से में एक अजीब सी शरारत भरी गुदगुदी भी हो रही थी।

अचानक रात को एक अजीब सा सपना देखने के बाद मेरी नींद खुल गई। कमला मौसी के तकिए के नीचे रखी हुई टॉर्च जलाकर मैंने देखा किरात के एक बजकर तीस मिनट हो रहे थे।

कमला मासी अभी भी मुझसे लिपट कर सो रही हैं, उनका एक पैर मेरी कमर पर चढ़ा रखी थी, मैंने किसी तरह धीरे धीरे से खुद को उनके आलिंगन से मुक्त किया, फिर बाथरूम में जाकर नहाने लगी । नहाने के बाद मैंने तौलिये से अच्छी तरह से अपने हाथ, पैर और बाल पोंछे। पर अजीब सी बात है, मेरा शरीर और दिमाग ठंडा क्यों नहीं हो रहा है?

मैंने नाइटी पहनी और कमला चाची के बगल में लेट गई और कुछ देर तक छत की ओर देखती रही...

फिर, अब और न रह पाने के कारण, मैंने एक बार पीछे मुड़कर देखा, कमला मौसी अभी भी गहरी नींद में सो रही थीं।

अपने अजीब से सपने के बारे में सोचते हुए, मैंने अपनी नाइटी को अपनी कमर के ऊपर तक तक खींच लिया, अपने पैरों को फैलाया, अपनी उंगलियों को अपने यौनांग में डाला और धीरे-धीरे हिलाना और हस्तमैथुन करना शुरू कर दिया, और खुद को शांत करने की कोशिश करने लगी।

मेरी नैया अभी मझधार में ही पहुंची थी कि अचानक कमला मौसी जग गई और बोली, “रुक रुक रुक रुक... तेरे बाल अभी भी गले हैं। इतनी रात को तो दोबारा से नहा कर आई है क्या? और यह तो कर क्या रही है? जरा ठहर तेरे को मैं उंगली की देता हूं चिंता मत कर, तू चिंता मत कर; मैं हूं ना तेरी मौसी। बस एक बात का ध्यान रखना, मैं जैसा कहती हूं अगर तू वैसा ही करेगी... मेरी अगर बात मानकर चलेगी, तो यकीन मान तेरा भला ही होगा… तू ऐश करेगी"

मैंने कांपती आवाज़ में पूछा, "क्या तुम जग रही हो कमला मौसी?"

क्रमश:
Superb update.
 

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अध्याय ३



"हां, मैं तभी जाग गई थी जब तू नहाने के लिए बाथरूम में गई थी... मुझे अच्छी तरह पता है कि तेरा पति तुझे बिल्कुल भी संतुष्टि नहीं दे पाता है... इसलिए तू कई कई रात, अपने पति के घर रहते हुए भी; अपने शरीर में भटकती हुई वासना की गर्मी को शांत करने के लिए ठंडे पानी से नहा कर आती है|

आज भी तेरे साथ वैसा ही हुआ। मैं भी कभी तेरी उम्र की हुआ करती थी और मैं भी एक औरत हूं; इसलिए औरत के मन और शरीर को मैं अच्छी तरह समझ सकती हूं। कई बार मैंने सोचा कि जहां तक हो सके मैं खुद तुझे यौन संतुष्टि जाकर दूँ... लेकिन आज तक किसी न किसी वजह से मैं जीजाक्ति रही... तू मेरा यकीन मान अगर मैं मर्द होती तो शायद मैं तेरा अकेलापन और तेरी जिंदगी का यह खोखलापन दूर करने की जरूर कोशिश करती है... अच्छा अब एक अच्छी लड़की की तरह अपनी टांगें फैला दे... शर्मा मत। चल चल चल इतना शर्मा क्यों रही है अपनी टांगों को फैला? भगवान ने तुझे एक योनि दी है, क्या तू इसे सारी जिंदगी सिर्फ पिशाब ही करती रहेगी?"

"कमला मौसी न जाने मुझे कैसा-कैसा लग रहा है" मैंने इसी सकते हुए कहा।

"तुझे कैसा लग रहा है? क्या चल रहा है तेरे दिमाग में तू अपनी कमला मौसी को खुलकर नहीं बताएगी?" यह कहते-कहते कमला मौसी ने मेरे बदन से मेरी नाइटी उतार कर मुझे बिल्कुल नंगी कर दिया|

मैं बोलना शुरू किया, "ठीक है लेकिन क्या बताऊं मौसी? मैं सपना देख रही थी कि मैं एक गांव में अकेली तालाब में सिर्फ एक पेटिकोट पहन कर- जिससे कि मेरी छाती से जंग तक ढकी रहे; नहा रही थी... अचानक कहीं से वहां चार लोग आए और मुझे जबरदस्ती उठा कर ले गए"

कमला मौसी मेरे पूरे बदन को प्यार से सहलाती हुई बोली, "हां हां हां बोलते रह बोलते रह... तूने कहा तुझे उठा कर ले गए? मतलब तुझे अगवा करके ले गए? अगर चार आदमी एक जवान लड़की को अगवा करके ले जाते हैं, फिर क्या हुआ बोलते रह"

मैं बोलना जारी रखा, " उन्होंने मेरे हाथ और पैर बांध दिए थे| मेरे मुंह पर भी पट्टी बंधी हुई थी ताकि मैं चिल्ला ना सकूं और मैं लगभग अधनंगी हो चुकी थी... वह मुझे अपने किसी अड्डे में ले गए"

"उसके बाद क्या हुआ?"

मैं बोलना जारी रखा, "मुझे अभी भी अच्छी तरह याद है, उन लोगों ने जहां मुझे रखा था वह किसी तरह का एक गोदाम घर जैसा था। आसपास पुआल के बंडल बंधे हुए थे। एक कोने में सिर्फ एक स्टॉल रखा हुआ था जिसके ऊपर एक मोटी सी मोमबत्ती चल रही थी। फिर वह चारों जमीन पर बैठकर और मुझे दिखाते हुए शराब पीने लगे। शराब पीते पीते वह मुझे पत्ते पत्ते इशारे कर रहे थे चिढ़ा रहे थे और कह रहे थे कि आज उन्हें एक अच्छा सा शिकार मिल गया है"

कमला मौसी ने पूछा, " अच्छा वह लोग दिखने में कैसे थे?"

मैंने जवाब दिया, "तगड़े तगड़े से काले काले से"

पता नहीं उन लोगों का वर्णन देते देते मेरे दिमाग में बंटी मिस्त्री का चेहरा क्यों उभर कर आ रहा था।

फिर कमला मौसी ने सब कुछ जानते हुए भी अनजान बनते हुए मुझसे कहा, "अच्छा एक बात बता? तुझे क्या लगता है वह लोग तुझे इस तरह से उठाकर क्यों ले आए थे?"

मुझे लगा कि मेरे मां के अंदर जैसे बांध टूट गया और मैं फूट-फूट कर रोने लगी और मैंने कहा, " वह लोग मुझे भोगने के लिए उठा कर लेकर आए थे कमला मौसी"

कमला मौसी ने हैरानी जताते हुए कहा, "है ? भोगेंगे मतलब ?"

"वह मेरे साथ बलात्कार करेंगे मौसी"

"हैं? वह लोग तेरे साथ बलात्कार करेंगे? मतलब तुझे जबरदस्ती पकड़ कर कर तुझे जमीन पर चित करके लिटा के रखेंगे? उसके बाद कोई तेरे हाथ पकड़ कर रखेगा और कोई तेरी टांगों को फैला कर पकड़ कर रखेगा और फिर उनमें से एक तेरे ऊपर चढ़कर अपना लंड तेरी चुत में जबरदस्ती घुस देगा? उसके बाद वह तब तक हिलाता रहेगा जब तक की उसकी सफेदी यानी की वीर्य तेरी चुत में फूट नहीं पड़ता?"

"हां हां हां कमला मौसी हां"

“अच्छा अच्छा अच्छा, अब रो मत लड़की, रो मत" कमला मौसी ने मुझे दिलासा देने की कोशिश की फिर वह कहने लगी, "देख, वह लोग जब सपने में तेरा बलात्कार करने में उतारु हो रखे हैं, तो ऐसा तो वह तभी कर पाएंगे, जब वह लोग तुझे पूरी तरह नंगी कर दे; देख मैं भी तो तुझे नंगी कर दिया है... अब मैं धीरे-धीरे तेरी चुत में उंगली डालकर हिला रही हूं.... तू अपने सपना के बारे में बताती रह”

फिर उन्होंने पुआल का एक ढेर काटा और उसे बिस्तर की तरह जमीन पर बिछा दिया। फिर उन्होंने मुझे कठपुतली की तरह उठाया और पुआल के बिस्तर पर जबरदस्ती लिटा दिया. उनमें से दो लोगों ने मेरे पैरों फैलाकर पकड़ कर रखे और उनमें से तीसरे ने ने मेरे हाथ मेरे सिर के ऊपर खींच लिए और मेरे हाथों को कस कर जमीन पर दबाये रखा... और फिर उनमें से चौथा, मुझ पर चढ़कर अपना लिंग मेरी योनि जबरदस्ती में डाल दिया।'

कमला मौसी ने मेरी बात सुनी और कहा, "हां, उन्होंने तेरी जैसी अनछुई लड़की जो को उठाया है... वे तेरे जैसी खूबसूरत को लड़की पाकर बहुत खुश हैं... क्योंकि वे जानते हैं कि उनके ऐसे दुर्लभ शिकार में हर किसी का हिस्सा है" ... यह कहते हुए, कमला मौसी ने अपनी दो उंगलियाँ मेरी योनी में डाल दीं। मैं एक मीठे मीठे दर्द से कराह उठी... "आह!"

कमला मौसी धीरे-धीरे अपनी उंगलियां मेरी योनि के अंदर बाहर अंदर बाहर करती हुई मिथुन करने लगी... और मैं चुपचाप ऐसे ही लेटे लेटे इस चीज के मजे लेने लगी।

थोड़ी देर के लिए कमरे के अंदर एक अजीब सी खामोशी छा गई फिर कमला मौसी ने पूछा, " ग्रुप क्यों गई लड़की? बोलना फिर क्या हुआ?"

अब मेरे साथ से गहरी और तेज होने लगी थी इसलिए मैं हल्का-हल्का हाँफते हुए बोलना जारी रखा, "अब क्या बताऊं मौसी ? न जाने क्यों, अचानक यह सब मुझे बहुत अच्छा लगने लगा... मैं सपने में ही यह सोचने लगी कि यह लोग मुझे जबरदस्ती अपना शिकार बनना चाहते हैं... मुझे भोगना चाहते हैं... लेकिन यह लोग इसके साथ यह भी सोच रहे हैं कि मैं इनका जबरदस्त विरोध करूंगी... और मैं जितना इनका विरोध करूंगी; यह लोग मेरे साथ उतनी ही ज्यादा जबरदस्ती करेंगे | उनको और मजा आएगा कि लोग मेरे बदन को मसल मसल के और जोर लगा के मेरा बलात्कार करेंगे... और यकीन मानो कमला मौसी, मुझे ऐसा लग रहा था कि मानो यह सब मेरे साथ सचमुच का हो रहा हो और जैसा कि मैंने कहा अब तो मुझे भी बहुत मजा आने लगा था... इसलिए मैं जानबूझकर सपने में ही और चीखने चिल्लाने लगी... छटपटाना लगी... और हां मुझे ऐसा लग रहा था... यह चार लोग; जो मुझे यहां जबरदस्ती उठाकर यहां लेकर आए हैं... वह पूरा का पूरा मजा ले रहे थे"

इतना बोलने के बाद मेरे अंदर और इतनी शक्ति नहीं बची थी कि मैं और कुछ बोल सकूं; क्योंकि कमला मौसी ने अपनी उंगलियों से मुझे मैथुन करने की बढ़ा दी थी और मेरा दम फूलने लगा था।

मैं सिर्फ आहें भरती रही , "आआआह! आआआह! उममममह"

मुझे ऐसा लग रहा था कि कमला मौसी शायद मेरी नस-नस से वाकिफ थी| उनको मेरी हालात का अच्छी तरह अंदाजा था... इसलिए उन्होंने मैथुन की गति और बढ़ा दी... कुछ ही देर बाद मेरे अंदर परमानंद और एक महा संतोष का जबरदस्त विस्फोट हुआ...

मैं एकदम निढाल होकर हाँफने और सुस्ताने लगी... कमला मौसी ने मेरी योनि से अपनी उंगलियां निकाल कर थोड़ा सा दम लेने के बाद मुझसे कहा, " मैं तेरी सारी बातें सुनी और समझी| मैं बहुत दिनों से सोच रही थी कि तुझे एक बात बोलूंगी इसलिए आज मैं तुझे कुछ बताने वाली हूं; पर मेरी बातें सुनकर अपनी कमला मौसी को बुरा मत समझना"

मैंने कांपती हुई आवाज में पूछा, " कौन सी बात कमला मौसी ?"

कमला मौसी ने एक गंभीर स्वर में मुझसे कहा, "जैसा कि मैं देख रही हूं, तो काफी दिनों से यौन के स्वाद और और उससे प्राप्त हुई संतुष्टि से वंचित है| इसलिए तेरे शरीर के साथ-साथ तेरा मन भी इतना गरम हो जा रहा है और शायद इसीलिए तो ऐसे ऐसे सपने देख रही है... अब तो मुझे ऐसा लगने लगा है कि तुझे शांत करने के लिए कम से कम चार आदमियों की जरूरत पड़ेगी| चिंता मत कर; तू चिंता मत कर मैं हूं ना तेरी मौसी? बस एक बात का ध्यान रखना, मैं जैसा कहती हूं अगर तू वैसा ही करेगी... मेरी अगर बात मानकर चलेगी, तो यकीन मान तेरा भला ही होगा… तू ऐश करेगी"

यह कहकर कमला मौसी मुझसे लिपटकर मेरे बगल में लेट गई और वह मुझे तब तक पुचकारती , सहलाती और चूमती गई कि जब तकमैं गहरी नींद में सोने गई...

क्रमशः
Lovely update.
 

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अध्याय ४


जब मेरी नींद खुली, मैं अपने आप को बिल्कुल एक अच्छी नींद सोई हुई और तरोताजा महसूस कर रही थी| भोर की गुलाबी-गुलाबी रोशनी बाहर छाई हुई थी- फिर मुझे एहसास हुआ कि मैं और कमला मौसी अभी भी एक दूसरे से लिपटे हुए थे और हम दोनों बिल्कुल नंगी थी|

मैंने धीरे-धीरे अपने आप को उनके आलिंगन से मुक्त किया और फिर चुपचाप जमीन पर पड़ी हुई नाइटी उठाकर अपने ऊपर चढ़ा ली और कमला मौसी का नंगा बदन मैंने एक चद्दर से ढक दिया और बिल्कुल दबे पांव कमरे से बाहर निकाल कर बाथरूम में जाकर अपने मुंह हाथ धोएं|

सुबह की नित्य-क्रिया करके मैंने जल्दी-जल्दी घर में झाड़ू लगाई, फर्श पर पोंछा लगाया और फिर जब मैं किचन में घुसी; तो मैंने देखा कि कमला मौसी चाय बना रही थी|

मुझे नहीं पता कि आजकल मेरे साथ क्या हो रहा है? दुकान पर आए स्वामीजी स्वामी जी गुड़धानी खाँ की रखैल ने तो मेरी खूब तारीफ की बरसात ही उसने यह भी कहा था कि उसकी इच्छा है कि वह मुझे नंगी देखे... फिर बातों ही बातों में कमला मौसी ने भी मुझसे पूछा था- क्यों? मेरे सामने नंगी होने में तुझे कोई एतराज है क्या?

और सबसे बड़ी बात, पिछली रात जो मेरे और कमला मौसी बीच हुआ उसका एहसास मेरे दिलों दिमाग पर छाने लगा लगा और मुझे शर्म आ रही थी और थोड़ी ग्लानि भी हो रही थी|

मैं चुपचाप रसोई घर से बाहर जाने लगी तो कमला मौसी ने मेरी तरफ शरारत भरी मुस्कान लिए मुझे तिरछी नजरों से देखते हुए कहा, "मलाई? तूने तो मेरी वाली नाइटी पहन रखी है..."

अब मुझे ध्यान आया सुबह उठकर ध्यान न देते हुए मैंने जमीन पर पड़ी हुई जो नाइटी उठाई थी वह कमला मौसी की थी|

जैसे ही मुझे इस बात का एहसास हुआ हम दोनों खिल खिलाकर हंस पड़ी और मुझे जो असहजता महसूस हो रही थी वह अचानक गायब हो गई|

चाय नाश्ते के बाद कमला मौसी मुझे ऊपर हमारे कमरे में ले गई जहां मैं और मेरे पति अनिमेष यहां किराए पर रहते थे|

अलमारी से कपड़े निकाल कर कमला मौसी ने खुद मुझे सजया।

मुझे मेरी अच्छी वाली लाल बॉर्डर और क्रीम कलर की साड़ी पहना दी और एक लाल रंग का ब्लाउज जो की काफी लोकाट और बैकलेस और उसके स्टेप्स काफी पतले पतले थे| ब्लाउज इतना कटा कटा और खुला खुला सा था कि इस ब्लाउज को पहनने के बाद मेरी पीठ और स्थानों की वक्र रेखा और विपाटन काफी हद तक दिखता था| ऐसा ब्लाउज पहनने के बाद ब्रा पहनना बिल्कुल नामुमकिन होता है| इसलिए मैंने ब्रा नहीं पहनी

कमला मौसी ने बड़े जतन के साथ मेरे बालों में कंघी करके साइड में एक मांग निकली थी, जिसकी वजह से मेरा सिंदूर बालों से ढक गया था और फिर उन्होंने मेरे माथे पर एक लाल रंग की बड़ी सी बिंदी लगा दी। फिर बड़े जतन से उन्होंने मेरे नाखूनों में नेल पॉलिश लगाई और मेरे होठों पर एक भड़कीले लाल रंग की लिपस्टिक लगाने से पहले दो-तीन बार मेरे होठों को उन्होंने चूमा फिर मुझे आईने के सामने खड़ा करके मुझे और मेरे प्रतिबिंब को निहारने लगी, "वाह, बड़ी सुंदर लग रही है तू, मलाई"

यह कहकर कमला मौसी ने मेरे सर की चांदी के ऊपर जैसे तैसे बंधा हुआ जुड़ा खोल कर बड़े जतन से मेरे बालों में कंघी किया और फिर उन्होंने एक लटकता जुड़ा बांध दिया| फिर मेरे कानों में बड़े-बड़े झुमके पहना दिए |

मैं उत्सुकता से खुद के प्रतिबिंब को आईने में देखा, मेरे गर्दन तक मेरे बाल बिल्कुल ढीले ढाले से थे जुड़ा ठीक मेरे गर्दन के नीचे लटक रहा था और मेरे चेहरे पर एक अजीब सी स्रैण चमक झलक रही थी... मैं तो सिर्फ स्वामी जी गुड़धानी खाँ के घर सामान पहुंचाने जा रही थी|

ऐसे काम कितनी बार तो बंटी मिस्त्री हमारे लिए कर चुका है और इस काम के लिए हम उसे पैसे भी देते थे|

पता नहीं क्यों कमला मौसी मुझे स्वामी जी गुड़धानी खाँ की आश्रम में भेजना चाहती थी वह भी इतना सजा धजा कर...

मैंने सब ख्यालों में खोई हुई थी कितने में कमला मौसी का फोन बज उठा|

"हां हां शैली खाला; आपका सारा सामान तैयार है... बस में मलाई को तुम्हारे यहां भेजना ही वाली थी... बस वह निकल ही रही है... मैं जानती हूं कि स्वामी जी गुड़धानी खाँ कि यहां उनके खास भक्त आसनसोल से आए हुए हैं... ठीक है ठीक है, चिंता मत करो मेरी लौंडिया तुम्हारे यहां पहुंचने वाली है... हैं? है क्या कहा तुमने? अरे नहीं नहीं नहीं, फिलहाल मेरी लौंडिया बिल्कुल साफ सुथरी है| जहां तक मैं जानती हूं, उसके मासिक होने में अभी दो-तीन दिन का वक्त है, इसलिए जो सामान आपके पास भेज रही हूं, उसमें अशुद्ध का कोई कारण ही नहीं है"

मैं समझ गई कि कमला मौसी और शैली खाला आपस में बात कर रहे थे... लेकिन वह मेरे मासिक के बारे में बातें क्यों कर रहे थे... बड़ी अजीब बात है; जहां तक मुझे मालूम है स्वामी जी गुड़धानी खाँ कोई आम तंत्र-मंत्र वाले साधु महात्मा नहीं है बल्कि वह एक तांत्रिक भूत और पिशाच सिद्ध व्यक्ति है... वह भगवान की पूजा नहीं करते|

ऑटो स्टैंड घर से 5 मिनट का पैदल रास्ता था| लेकिन मैंने जो दो थैली अपने हाथों में पकड़ रखी थी वह काफी वजनी थे| लेकिन मुझे ज्यादा देर चलना नहीं पड़ा, एक टोटो (ई-रिक्शा) वाले ने मुझे डर से ही देख लिया और अपना फोटो लेकर उसने मेरे पास आकर मुझे ताड़ते हुए पूछा पूछा, "कहां जाना है दीदी ?"

मैंने कहा, “स्वामीजी गुरुधानी खार का आश्रम”

उसकी नजरों से ऐसा लग रहा था कि उससे पहले से ही मालूम है कि मुझे कहां जाना है फिर उसने उससे कहा, "ठीक है; लेकिन रास्ता बहुत लंबा है, दीदी। इसलिए आपको टोटो रिजर्व करके जाना होगा - और वहां से आते वक्त मुझे ख़ाली न आना पड़ेगा इसलिए मैं रास्ते में एक-दो सवारी जरूर चढ़ाऊंगा"

मेरे दोनों के दोनों थैली काफी भारी थे और हमारा घर खरदह टाउन रेलवे फाटक के पास था और स्वामी जी गुड़धानी खाँ का आश्रम कल्याणी हाईवे के मुहाने पर था| सचमुच रास्ता काफी लंबा है इसलिए मैंने टोटो वाले से कोई बहस नहीं की|

थोड़ी दूर जाने के बाद ही टोटो वाले को दूसरी सवारी मिल गई| एक अधेड़ उम्र की महिला और उसके साथ एक लड़की जिसकी उम्र शायद मेरे बराबर की ही होगी| बड़ी अजीब सी बात है मैंने देखा कि इन दोनों के माथे पर भी मेरी तरह लाल रंग की बड़ी सी बिंदिया लगी हुई थी|

वह लोग भी स्वामी जी गुड़धानी खाँ के आश्रम जाने वाले थे और हम लोगों में बातचीत शुरू होने में ज्यादा वक्त नहीं लगा|

उसे अधेड़ उम्र की औरत ने मुझसे पूछा, "तो क्या तुम भी स्वामी जी गुड़धानी खाँ की वूमंडली में शामिल हो चुकी हो?"

यह सुनकर मुझे शैली खाला की बात याद आ गई उसने कहा था- ई लौंडिया हमर के वूमंडली खातिर बिल्कुल परफेक्ट बा...

लेकिन मैं तो वूमंडली के बारे में कुछ नहीं जानती, "माफ कीजिएगा, मुझे इस बारे में कुछ नहीं मालूम"

वह अधेड़ और की औरत और वह लड़की दोनों हंस पड़े और मैंने गौर किया कि टोटो वाला भी रियर व्यू मिरर में मुझे देखकर एक अजीब तरह से मुस्कुरा रहा था|

फिर उसे दिन उम्र की महिला ने मुझसे कहा, "इसका मतलब है कि तुम बिल्कुल नई नवेली हो... तुम्हें इस बारे में कुछ नहीं मालूम। कई महिलाएं स्वामी जी स्वामी जी गुड़धानी खाँ की भक्त है। वह अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए स्वामी जी के पास आती हैं... शायद तुम्हें इतना तो पता ही होगा कि स्वामी जी गुड़धानी खाँ कोई आम तंत्र-मंत्र वाले साधु महात्मा नहीं है बल्कि वह एक तांत्रिक भूत और पिशाच सिद्ध व्यक्ति है... वह भगवान की पूजा नहीं करते... और ना ही कोई दुआ ताबीज करते हैं... इसलिए यूं तो ज्यादातर महिलाएं ही उनके पास अपनी इच्छा पूर्ति के लिए आती है लेकिन अगर कोई आदमी अपनी समस्या का समाधान करना चाहता हो तो उसे भी अपने साथ एक औरत को स्वामी जी गुड़धानी खाँ कि यहां लाना पड़ता है... अपनी इच्छा पूर्ति या फिर अपनी समस्या का समाधान का मोल चुकाने के लिए... और जो महिलाएं स्वामी जी गुड़धानी खाँ की शरण में आती है; वह ज्यादातर स्वामी जी गुड़धानी खाँ की अनुगामी बन जाती हैं... और ऐसी औरतों के समूह को वूमंडली का नाम दिया गया है... और मुझे तो पूरी उम्मीद है कि तुम भी जल्द ही वूमंडली में शामिल होने वाली हो"

मैंने पूछा, "औरतें अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए स्वामी जी गुड़धानी खाँ जैसे किसी सिद्ध पुरुष के पास जाती है यह बात तो मेरी समझ में आ गई, लेकिन अगर कोई आदमी उनके पास जाए तो उन्हें अपने साथ एक औरत को लाना जरूरी होता है, ऐसा क्यों?"

मेरी बात सुनकर वह अधेड़ उम्र की औरत और उसके साथ आई लड़की, कहां का मार कर हंस उठी, फिर उसे औरत ने कहा, " तुम सचमुच कुछ भी नहीं जानती हो| तुम्हारे माथे पर बड़ी सी लाल रंग की बिंदिया देखकर मैंने सोचा कि तुम भी वुमंडली की सदस्या हो... मुझे तो लग रहा था कि तुम्हारा शुद्धिकरण और आशीर्वाद प्राप्ति भी हो चुकी है... खैर जो भी हो, तो बहुत जल्दी ही सब कुछ समझ जाओगी... लेकिन एक बात बताओ तुम्हारी शक्ल बहुत जानी पहचानी से लग रही है, ऐसा लगता है कि मैं तुमको पहले भी कहीं देखा है... ओह हां, अब याद आया तुम कमला दीदी की दस-कर्मा भंडार वाली दुकान में काम करती हो ना?"

मैंने कहा, "जी हां, मैं और मेरे पति कमला मौसी के यहां किराए पर रहते हैं; पर मेरे पति अक्सर काम के सिलसिले में घर से बाहर रहते हैं और मैं घर में अकेली ना रहूं, इसलिए मैं कमला मौसी का दुकान में थोड़ा हाथ बंटा दिया करती हूँ"

इसके बाद मैंने गौर किया कि किसी ने भी कोई बात नहीं की और वह अधेड़ उम्र की महिला, उसके साथ आई हुई लड़की एक अजीब सी मुस्कुराहट अपने चेहरे पर लिए सिर्फ मेरी तरफ देख रहे थे यहां तक की टोटोवाला भी रियर व्यू मिरर में मुझे देख देख कर इस अजीब तरह से मुस्कुरा रहा था।

न जाने क्यों मुझे ऐसा लग रहा था कि इन सबको शायद ऐसा कुछ मालूम है जिस बात का मुझे नहीं पता...


क्रमशः
Nice flow of story.
 

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अध्याय ५



टोटोवाला ने हमें सीधे स्वामीजी गुरुधानी खार आश्रम के द्वार पर छोड़ दिया। आश्रम कल्याणी हाईवे बिल्कुल लगा हुआ है। लगभग 14 फीट ऊंची दीवारों से घिरा हुआ एक विशाल भूखंड

इसके बीचों-बीच में एक बड़ी दो मंजिला आयताकार इमारत है। पूरी संपत्ति विभिन्न प्रकार के पौधों से भरी हुई है और बाहर से ऐसा लगता है कि इमारत के अंदर एक बड़े से बगीचे जैसी जगह है क्योंकि अंदर बड़े पेड़ -पौधे दिखाई दे रहे थे|


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इसके अलावा मैंने एक कर हैरान करने वाली बात को गौर किया| स्वामी जी गुड़धानी खाँ के यहां आई हुई सभी महिलाओं के माथे पर लाल रंग की बड़ी सी बिंदिया सजी हुई थी और जिन्होंने सिंदूर पहन रखा था उनके सिंदूर का रंग नारंगी था|

मेरे साथ टोटो में आई हुई वह अधेड़ उम्र की औरत और वह लड़की न जाने भीड़ में कहां गायब हो गई है| कौतूहल वश मेरी आंखें उन्हीं को ढूंढ रही थी कि मेरी नजर एक जाने पहचाने चेहरे पर पड़ी- बंटी मिस्त्री|

मुझे देखते ही वह देश कदमों मेरी तरफ आया| मुस्कुराते हुए उससे पूछा, "अरे बंटी? तू यहां क्या कर रहा है?"

बंटी मिस्त्री ने मुझे अपने चेहरे पर एक चुटीली मुस्कान लिए मेरे चेहरे की ओर देखा... उसकी नज़रें बता रही थी कि मैं वास्तव में काफी सुंदर और आकर्षक लग रही हूँ और फिर मर्दों की स्वभाव के अनुसार उसकी नज़रें मेरी साड़ी के आँचल से ढके मेरे स्तनों पर पड़ी और और उसने उत्तर दिया दिया, "आपको तो पता है ना मलाई दीदी, मैं जल और नल का कारीगर हूं, जहां जल और नल की समस्या होती है- वहां मुझे बुला लिया जाता है... और यहां तो मुझे काफी बड़ा काम मिला हुआ है… और आप यहां क्या कर रही हैं?”

मैंने कहा, "मैं तो स्वामी जी गुड़धानी खाँ के यहां यह सामान पहुंचाने आई थी..."

मैं जब बंटी मिस्त्री से बात कर रही थी तब पता नहीं कब आ कर शैली खाला मेरे पीछे खड़ी थी, उसने कहा "अरे मलाई, कब आईल इहां? हे भगवान, तू त पूरा पसीना से तर-बतर हो गइल ह .. ई मौसम भी बहुत अजीब बा। कई दिन से बारीश होखे वाला बा , फिर भी बरखा नइखे होखत, एही से नमी आ दम घुटना बढ़ गइल बा." यह कहकर उसमें एक प्लास्टिक का मुड्डा मेरे पास लाकर रखा और बोली, " तू एक काम कर तू खिड़की के लगे बइठ के आराम करीं थोड़ देर.. अरे बंटी अइसन आँख फाड़ फाड़ कर का दे रख रहा तो मलाई को? के ई सब सामान स्टोरेज रूम में रख लीं।"

बंटी ने मेरे हाथों से भारी भारी थैलों को लिया और फिर उन्हें यथा स्थान पर रखना चला गया |

उसके बाद शैली खान ने झुक कर मेरे गालों को सहलाते हुए मुझसे कहा , "मलाई तू बिल्कुल ठीक समय पर आई है , थोड़ी देर बाद ही मैं तुझे स्वामी जी गुड़धानी खाँ के दर्शन के लिए ले जाऊंगी..." इतने में शैली खाला ने गौर किया कि मैं बड़ी उत्सुकता के साथ यहां आई हुई दूसरी औरतों को देख रही हो , खासकर उनके माथे पर सजी बड़ी-बड़ी लाल-लाल बिंदिया और उनके मांग में भारी नारंगी रंग की सिंदूर को...

शायद मेरे मन की बात को भांप कर शैली खला ने मुझसे कहा , "और हां एक बात और हम सब स्वामी जी गुड़धानी खाँ को स्वामी जी या फिर सिर्फ स्वामी कह कर बुलाते हैं... यहां के उसूलों के मुताबिक हम - यानी के स्वामी जी के महिला अनुयाई लोग या फिर उनकी वूमंडली अपने माथे पर अपने पति के नाम की बिंदिया लगती है और अपनी मांग में स्वामी जी के नाम का नारंगी रंग का सिंदूर भरती है "

शैली खाला शायद मुझे एक ही सांस में गागर में सागर थमा गई, इसलिए मुझे समझने में थोड़ी देर लग रही थी... पर फिर भी मैंने वह सवाल दोहराया मेरे मन में घूम रहा था , "वूमंडली मतलब?"

शैली खाला ने एक अजीब से इरादे से भरी मुस्कान लिए हुए मेरी तरफ देखा और फिर बोली, "वूमंडली के बा? हाहाहा! इहे नाम ह स्वामीजी के महिला भक्तन के एगो समूह के - बहुत जल्दी तू भी स्वामीजी के दिहल सिंदूर के माथे प पहिरब - ठीक ओसही जइसे तेरी कमला मासी अपना पति के मौत के पहले पहिरले रहली... जल्दिये तू भी पहिरब जल्द ही तोहार भी शुद्धिकरण हो जावेगी और तू भी स्वामी जी गुड़धानी खाँ की आशीर्वाद लेकर हमारे ग्रुप से जुड़ जाएगी- तू भी बनेगी वूमंडली की लौंडिया"

जिस खिड़कीके पास में बैठी थी, उस खिड़की से इस भूखंड का आंतरिक भाग दिखाई दे रहा था। मैंने देखा कि इस संपत्ति के अंदर एक बड़ा सा बगीचा है लेकिन यह पूरी तरह से पेड़ों से ढका हुआ है इसलिए बगीचे के अंदर का हिस्सा ठीक से नहीं देखा जा सकता।

थोड़ी देर बाद एक लड़की आई और मुझे एक छोटी प्लेट में एक मिठाई और एक गिलास पानी दिया।

मुझे याद नहीं कि मैं कितनी देर तक खिड़की के पास बैठा रही। थोड़ी देर बाद ऐसा लगा मानो कमरे में महिलाओं की भीड़ अचानक काम होती हुई गायब हो गई हो। ऐसा लग रहा था कि सब के सब अब अपने-अपने घरों को चल दिए हैं| इस विशाल हॉल में केवल एक दो महिलाएँ और शैली खाला आपस में बातें कर रही थीं।

फिर अचानक मुझे लगा कि अंदर वाले बगीचे में शायद कोई है । मैंने ठीक से से देखने की कोशिश की; तभी मैंने देखा कि एक आदमी बगीचे में लगे हैंडपंप से बाल्टी में पानी भरकर नहा रहा है। पेड़ पौधों की पत्तियों के बीच से ही मैंने देखा कि मैं एक अधेड़ उम्र के आदमी जिसके सिर पर कोहनी तक बाल थे, शरीर की संरचना सुगठित और मजबूत थी... उसकी छाती बालों से भरी हुई थी और उसके पूरे चेहरे पर साबुन का झाग था|

उसने एक लाल रंग की लंगोट पहन रखी थी जो शायद उसके गुप्तांगों को ढकने का एक असफल प्रयास कर रही थी | उसका प्रकांड लंबा और मोटा लिंग और उसके अंडकोषों का आकर स्पष्ट रूप से झलक रहा था |

यह देखकर मेरे पेट के निचले हिस्से में एक अजीब सी गुदगुदी महसूस होने लगी, मेरे दिल की धड़कन अचानक बढ़ गई और मेरे अंदर जैसे कि मानो एक अपवित्र कामना की वासना जागने लगी| मुझे ऐसा लग रहा था कि मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित हो रही हूं इसलिए मुझे पसीना आने लगा मुझे समझने में देर नहीं लगी कि यह आदमी और कोई नहीं बल्कि स्वयं स्वामी जी गुड़धानी खाँ ही है| मैंने आज तक इनका नाम ही सुना था और आज देख भी लिया| स्वामी जी ने नहाने का मक्का पानी की बाल्टी में डुबोया और फिर अपने ऊपर पानी डालने लगे| मैंने सोचा कि अब उनके चेहरे और आंखों पर लगा साबुन का झाग धुल जाएगा और हो ना हो वह मुझे देख लेंगे... इसलिए मैं छत से वहां से हट गई और दीवार से टिक कर खड़े होकर हाँफने लगी।

“का बात है मलाई, तू अतना पसीना से तर-बतर होये काहे अईसन हांफत रहील ?”, अचानक मुझे शैली खाला की आवाज सुनाई दी।

मैं हाँफते हुए जवाब दिया, "आज बहुत गर्मी है शैली खाला"

"हँ, तू एकदम सही कहत रहीं, आजु सचहूँ बहुते गरमी बा... एही के कारण स्वामी जी गुड़धानी खाँ सबेरे दू बेर नहा चुकल रहीं...आ वइसे भी पता ना काहे हमरा लागत बा कि तोरा तबियत बहुत ठीक नइखे... इहे बा काहे हम तोहरा के सीधे स्वामी जी के दर्शन में ले जाइब, ओकरा बाद तू सीधा घरे चली जा"

शैली खाला की बातें सुनकर मेरे दिल की धड़कन और पेट के निचले हिस्से की गुदगुदी और बढ़ गई| मैं जब भी आंखें बंद करती, मेरी आंखों के सामने स्वामी जी का लंगोट से ढका प्रकांड मोटा लंबा लिंग और उनके अंडकोष की छवि उभर कर आती है... मेरे पति अनिमेष के अंग तो स्वामी जी के आगे कुछ भी नहीं है... अगर वह अंडरवियर भी पहन कर रहता है तो शायद पता ही नहीं चलता कि सामने उसके कुछ है... और अनिमेष के अंगों के मुकाबले स्वामी जी का? बाप रे बाप!

"चल मलाई, अब हम तोका के स्वामी जी गुड़धानी खाँ के कमरे में ले जाइब" यह कहकर शैली खाला ने मेरे बालों का जुड़ा खोल दिया| कमला मौसी ने मुझे पहले ही बताया था कि स्वामी जी गुड़धानी खाँ एक सिद्ध पुरुष है और शिष्टाचार के अनुसार मुझे या फिर मुझे सी लड़कियों को उनके आगे घुटने टेक कर बैठ के और फिर अपना माथा जमीन पर टिका के अपने बालों को उनके सामने फैला देना होगा... ताकि वह मेरे बालों अपने पैर रखकर मुझे आशीर्वाद दे सके|

शायरी खाना मुझे अंदर के कमरे में ले गई | वहां मैंने देखा कि तांत्रिक भूत पिशाच सिद्ध स्वामी जी गुड़धानी खाँ लाल रंग का वस्त्र पहने हुए विकासन पर बैठे हुए हैं... उनकी अध् गीले बकोहनी तक लम्बे बाल खुले हुए हैं उनकी आंखें बिल्कुल लाल है... शायद किसी नशीली वस्तु के कारण और चेहरे पर एक सम्मोहित कर देने वाली मुस्कान। उनका यह रूप देखते ही मेरे अंदर फिर से वही अपवित्र कामना की वासना जागने लगी|


क्रमशः
Swami ji ke charno me aa gai hai .
 

naag.champa

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Swami ji ke charno me aa gai hai .
आदरणीय पाठक मित्र जी,

मेरी कहानी पढ़कर आपको पसंद आई इस बात कि मुझे खुशी है और आपके मूल्यवान मंतव्य के लिए धन्यवाद। कृपया कहानी के साथ बनी रहिएगा उम्मीद है कि अगले अपडेट्स भी आपको पसंद आएंगे।
 

naag.champa

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मलाई वूमंडली के बीच फंसी है या रजिया गुंडो के बीच आ फंसी है !
वूमंडली उन औरतों का समूह है जो तांत्रिक गुड़धानी खां की शिष्या हैं । ये सभी एक तरह से तांत्रिक की बिस्तर पार्टनर ही हैं ।
शराब और शबाब का कॉम्बिनेशन हमेशा ही खतरनाक कहे या फिर उत्तेजक रहा है । होश खोने के लिए यह दोनो चीज ही काफी है ।
कमला मैडम पहले से ही वूमंडली की सदस्या थी । शायद जानबूझकर उन्होने मलाई का जिस्मानी रिश्ता पहले सचिन अंकल से करवाया ताकि लड़की की झिझक कम हो जाए और फिर उसके बाद उसे वूमंडली के जमात मे शामिल करा दिया जाए ।
कमला मैडम वास्तव मे बहुत पहुंची हुई चीज है ।
बेहतरीन अपडेट नाग चंपा मैडम ।
आउटस्टैंडिंग अपडेट ।
आदरणीय पाठक मित्र SANJU ( V. R. ) जी,

आपकी मूल्यवान मंतव्य के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

जी हां, आपने बिल्कुल सही फरमाया कमला मौसी बहुत ही पहुंची हुई चीज है और वह भी वूमंडली के सदस्या है।

जब से उसने मलाई को देखा था, उसे उसके प्रति एक लगाओ हो गया था। कमला मौसी यह समझती थी कि मलाई की सुंदरता और जवानी की कद्र उसका पति ठीक से नहीं कर पा रहा है। और उसे अंदर ही अंदर यह भी मालूम था कि मलाई भी, यौन संतुष्टि के मामले में अपने पति से ना खुश है और दिन-ब-दिन वह सिर्फ पड़े पड़े सूख रही है। इसलिए पिछले खंड में कमला मौसी ने उसके संबंध अपने स्वर्गीय पति के दोस्त सचिन अंकल के साथ करवा दिए... और अब वह यह चाहती है कि मलाई की जवानी ऐसे ही पड़े पड़े ना सुख और दूसरी सबसे अहम बात; वह मलाई को अपने वश में रखना चाहती है ताकि आगे चलकर मलाई जैसी लड़की उसके बुढ़ापे का सहारा बन सके।

कृपया कहानी के साथ बनी रहिएगा, आप जैसे पाठक मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है।
 
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अध्याय १३



स्वामी जी गुड़धानी खाँ के बदन से शराब की तीव्र गंध आ रही थी। उनकी आंखें बिल्कुल लाल हो रखी थी और अध खुली थी। उन्होंने कहा, "भई एक बात तो बिल्कुल सही है। शैली खाला ने बिल्कुल सही कहा था। तुम एक अच्छी जात की झिल्ली पाल रही हो कमला। इसके अंदर इसकी जवानी पूरी तरह से खेल रही है ... इसके बाल इसके कूल्हे से भी नीचे तक लंबे हैं ... गाने घुंघराले और रेशमी ... इसके स्थानों का जोड़ा बिल्कुल भरा पूरा और बड़ा-बड़ा है ... जब यह चलती है या फिर हिलती डुलती है तो उसके स्तनों के जोड़े किसी भरे हुए मटके की तरह इसकी सुंदरता और जवानी का रस छलकते हैं और इसके कूल्हे? एकदम चौड़े चौड़े और मांसल है जब यह चलती है तो बड़े ही मादक तरीके से यह मटकते हैं..." उसके बाद स्वामी जी गुड़धानी खाँ एक गहरी सांस अंदर खींची और फिर बोले, "अरे यह खुशबू कहां से आ रही है? ओह!अच्छा। यह तो इस झिल्ली के प्राकृतिक फेरोमोंस है ... भई कमला ? अब तो तुम बूढी हो रही हो ... तुम्हारी देखभाल करने के लिए, तुम्हारी आमदनी पूरी करने के लिए तुम्हें तो किसी की जरूरत है ... इस लौंडिया का खून गर्म है... तुमने बिलकुल सही निर्णय दिया है। आज के बाद यह भी मेरी वूमंडली की सदस्या बन जाएगी ... मैं अपनी लालसा, वासना के साथ-साथ अपनी तांत्रिक क्रिया भी पूरी कर दूंगा ताकि जिंदगी भर यह तुम्हारे वश में रहे"

स्वामी जी गुड़धानी खाँ की बातें सुनकर कमला मौसी के आंसुओं का बाँध एकदम टूट गया। वह उनके पैरों पर गिरकर फूट-फूट कर रोने लगी, " स्वामी जी गुड़धानी खाँ! आप मेरा उद्धार कीजिए ... मेरे पास जो मेरी सबसे बड़ी संपत्ति थी मैंने उसे आपके चरणों में निछावर कर दिया ... आप मेरी इस झिल्ली को ग्रहण कीजिए उसे आशीर्वाद दीजिए"

स्वामी जी गुड़धानी खाँ ठहरे एक तांत्रिक भूत और पिशाच सिद्ध महापुरूष। वह अपने भक्तों की समस्याओं की का समाधान करने के लिए तांत्रिक क्रिया तो करते ही हैं पर वह उन्हें कोई ताबीज वगैरा नहीं देते। वह दान दक्षिणा के साथ-साथ अपने भक्तों के परिवार की किसी महिला के साथ यौन संपर्क बनाते हैं और बाद में ऐसी कई महिलाएं उनकी वूमंडली में शामिल हो जाया करती है।

कमला मौसी भी अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए स्वामी जी गुड़धानी खाँ की शरण में आई थी। कमला मौसी की यह इच्छा थी कि मैं जिंदगी भर उन्हीं का साथ दूं, उनकी देखभाल करूँ, उनका घर और उनकी दुकान संभालुँ ...

कमला मासी को मेरी आज्ञाकारिता, अनुपालन, सेवा और देखभाल पसंद आई थी। वह मुझे कभी खोना नहीं चाहती थी... यह कभी भी नहीं चाहती थी कि मेरा मन बदल जाए और मैं उन्हें छोड़कर कहीं चली जाऊं... यह सब मैं अब पूरी तरह समझ चुकी थी ... और इसी के साथ-साथ कमला मौसी को यह भी गवारा नहीं था कि मेरी जवानी यूं ही पड़े पड़े सूखती रहे, इसलिए वह यह भी चाहती थी कि मैं वूमंडली की सदस्या बन कर लेचरी करूँ ... यानी शादीशुदा होने के बावजूद मैं पराए मर्दों के साथ संबंध बनाउं ... जिससे मेरी भी यौन संतुष्टि की मनोकामना पूरी हो।

मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा था और मुझे बहुत डर लग रहा था। स्वामी जी गुड़धानी खाँ आपने मुझे बालों से पकड़ कर खड़ा करके रखा था... और कुछ ही देर बाद वह मुझे ग्रहण करने वाले थे और जब तक उन्हें पूर्ण यौन संतुष्टि नहीं मिल जाती वह मुझे भोगने वाले थे ... अब यह सोचने वाली बात थी कि वह एक पराए मर्द थे और मैं एक शादीशुदा युवती ... हमारे समाज में शादीशुदा औरतें अपनी मांग में अपने पति के नाम का सिंदूर लगती हैं और सिर्फ अपने पति को ही अपना तन मन और यौवन समर्पित करती है ... लेकिन मेरी हालत बिलकुल अलग थी, इससे पहले भी अपने पति के रहते हुए भी मैंने सचिन अंकल के साथ यौन संबंध बनाए थे। कमला मौसी के अनुसार मैं इसकी हकदार थी इसलिए जानबूझकर उन्होंने मुझे 'दूफला' बनवाया ... और सच कहूं तो 'दूफला' बनने के बाद मुझे काफी शांति मिली थी... लेकिन यहां यह सब क्या हो रहा है?

कुछ ही घंटों पहले इसी आश्रम में मेरा शुद्धिकरण हो चुका है। यहां की महिलाओं ने षष्टामृत यानी की दही, घी, सरसों का तेल, मेहंदी, एक लड़की की मां के स्तनों का दूध और स्वामी जी के मूत्र के मिश्रण से मेरी मांग का सिंदूर धुला दिया है। अभी मैं बिल्कुल मुक्त हूं। मुक्त? नहीं मैं मुक्त तो नहीं हूं; शैली खाला के अनुसार मैं तो कमला मौसी की लौंडिया हूं ... यानी कि एक दासी, बाँधी, झिल्ली, या फिर सिर्फ एक रखेल ... मैं जानती हूं की कमला मौसी स्वामी जी गुड़धानी खाँ की परम भक्त हैं; लेकिन वह यह क्या कर रही है?

मैंने डरते डरते स्वामी जी की आंखों की तरफ एक बार देखा मुझे ऐसा लग रहा था कि उनकी दृष्टि मेरे शरीर को भेद कर मेरी अंतरात्मा तक को देख रही है ... मेरा सर चकरा गया ... उनकी नज़रें जैसे कि मानो मेरे दिमाग को पिघला रही थी ... इसलिए अगले ही पल मुझे लगने लगा ... नहीं नहीं नहीं, मैं यह सब क्या सोच रही हूं? कमला मौसी मुझे बहुत प्यार करती है- उन्होंने मुझसे ठीक ही कहा था ... औरतों की जिंदगी में ऐसी बहुत सी बातें होती है जिन्हें हमेशा गुप्त ही रखा जाता है ... यहां तक कि वह अपने पति को भी इन सब बातों के बारे में नहीं बताती है और जरूरत भी नहीं है ... कमला मौसी ठीक ही कहती है, भगवान ने मुझे एक योनि दी है, क्या मैं सारी जिंदगी उससे सिर्फ पेशाब करती रहूंगी? यह तो मेरे खेलने कूदने के दिन है मैं क्या अपनी जवानी को ऐसे ही पड़े पड़े सूखने दूंगी?.... यह मुझे भी मंजूर नहीं ... मेरी कमला मौसी है ना? बस मुझे एक बात का ध्यान रखना होगा, मेरी कमला मौसी जैसा-जैसा कहती है अगर मैं वैसा वैसा करूं और उनकी हर बात मन कर चलूँ तो यकीनन मेरा भला ही होगा और मैं ऐश करूंगी।


Pre-Cop-Malai.jpg

मैं यही सब सो रही थी और मुझे ध्यान ही नहीं की कब मुझे लिटा दिया गया है। कमरे में मौजूद सभी महिलाएं एक-एक करके बाहर चली गई और बाहर खिड़कियों से पूछ कर अंदर देखने लगी खासकर उनमें से जो सबसे कम उम्र की दो लड़कियां थी जैसे की शालिनी और फुलवा वह दोनों सबसे ज्यादा उतावली थी ...

सिर्फ शैली खाला और कमला मौसी ही कमरे के अंदर रह गई। इतने में स्वामी जी गुड़धानी खाँ अपनी लंगोटी उतार दी। मैंने अपनी अध्आं-खुली आखों से देखा, स्वामी जी का लिंग सचमुच बहुत ही मोटा और लंबा था और वह इस वक्त किसी तलवार की तरह और खड़ा हो रखा था और यह लिंग काम से कम 2 इंच मोटा तो जरूर ही होगा उनके अंडकोष भी बड़े-बड़े थे... मैंने अपनी जिंदगी में इतना बड़ा पुरुषांग कभी नहीं देखा था ... मैं जाती थी की स्वामी जी अपना लिंग मेरी योनि में प्रविष्ट करेंगे ... अगर ऐसा हुआ तो हो सकता है कि मेरी योनि फट जाएगी और हो सकता है काफी खून भी निकलेगा ... यह सब ठीक वैसा ही होगा जैसा कि शायद किसी कुंवारी लड़की के साथ पहली बार यौन संबंध बनाया जा रहा हो ... शायद मुझे बहुत दर्द होगा और शहद में बहुत छटपटाउंगी भी; शायद इसीलिए शायरी खान और कमला मौसी अंदर ही रह गई ताकि अगर जरूरत पड़े तो वह मुझे जबरदस्ती पकड़ कर रखेंगी। लेकिन कमला मौसी ने तो कहा था जितना बड़ा और मोटा लिंग लड़कियों के लिए वह उतना ही मजेदार साबित होता है ... देख मेरे भाग्य में क्या लिखा हुआ है?


क्रमशः
 
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