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अपडेट ६:
सुबह की हल्की रोशनी खिड़की से अंदर आ रही थी जब मेरी आँख खुली। मैंने फोन उठाया—इंस्टाग्राम पर कोई नया नोटिफिकेशन नहीं था। नेहा ने कल रात "Goodnight Aditya" कहने के बाद कोई मैसेज नहीं भेजा था। मैं मुस्कुराया—अच्छा है, उसे स्पेस देना भी ज़रूरी है।
मैं उठा और बाथरूम की ओर बढ़ा। रास्ते में नेहा के कमरे का दरवाज़ा खुला था—वह अंदर नहीं थी। शायद किचन में थी। मैंने जल्दी से अपना मॉर्निंग रूटीन पूरा किया—दाँत साफ किए, चेहरा धोया, और शॉर्ट्स बदलकर टी-शर्ट पहन ली।
जैसे ही मैं किचन के पास पहुँचा, तवे पर पराठा सेंकने की आवाज़ आ रही थी। नेहा ने हल्का पीला कुर्ता और व्हाइट लेगिंग्स पहन रखी थी। उसके बालों को ऊपर से बाँधा हुआ था, और गर्दन के पीछे के बालों की छोटी-छोटी लटें बिखरी हुई थीं।
वह चूल्हे के सामने खड़ी थी, पराठा पलटने के लिए थोड़ा झुकी—उसके नितंब लेगिंग्स में कसे हुए बिल्कुल सामने थे। गोल, मजबूत, और हर हरकत के साथ उनमें हल्की सी हलचल। मेरी नज़र उन पर जम गई—उस सफेद लेगिंग्स के नीचे का हर कर्व साफ दिख रहा था। एकदम परफेक्ट गोलाई, बीच में गहरी क्रीज़, और ऊपर की तरफ पतली कमर में समाती हुई।
"गुड मॉर्निंग, भैया," उसने पीछे मुड़कर देखा। "चाय बना दी है। तुम अपनी प्लेट ले लो।"
"गुड मॉर्निंग," मैंने कहा और अपनी नज़रें हटा लीं। "तुम्हारी मदद करूँ?"
"हाँ, प्लेट निकाल दो। पापा भी आ जाएँगे अब," उसने पराठा तवे से उतारते हुए कहा।
मैंने अलमारी से तीन प्लेट्स निकालीं और मेज़ पर रख दीं। उसने दो पराठे एक प्लेट में डाले, फिर दूसरे पराठे के लिए आटा बेलने लगी। उसके हाथ बेलन पर चल रहे थे, और हर बार जब वह जोर लगाती, उसके स्तन कुर्ते के नीचे हिलते। ब्रा की पतली पट्टियाँ कुर्ते के कंधों से झाँक रही थीं।
मैंने उसकी मदद करते हुए दूध औरचीनी का डिब्बा निकाला। इस बीच पिताजी आ गए।
"गुड मॉर्निंग," पिताजी ने कहा और मेज़ पर बैठ गए। "आज सुबह सुबह खुशबू कमाल की है। नेहा, तूने क्या बनाया है?"
"आलू के पराठे, पापा," उसने मुस्कुराकर कहा। "और साथ में दही भी रखा है।"
हम तीनों ने साथ में नाश्ता किया। पिताजी ने चाय की चुस्की ली और फिर बात शुरू की।
"मैं शुक्रवार सुबह निकल जाऊँगा और रविवार रात तक वापस आ जाऊँगा," पिताजी ने कहा। "तुम दोनों को घर संभालना होगा। और राज, तुम नेहा का ख्याल रखना।"
"बिल्कुल, पापा," मैंने कहा। "आप चिंता मत कीजिए। हम दोनों मिलकर सब संभाल लेंगे।"
"हाँ, पापा," नेहा ने कहा। "आप अपना टूर एन्जॉय कीजिए। हम यहाँ अपना खयाल रखंगे।"
"और पापा," मैंने थोड़ी गंभीर आवाज़ में कहा, "ड्रिंक सावधानी से करना। दोस्तों के साथ मस्ती करो, लेकिन अपना ख्याल रखना।"
पिताजी हँसे और बोले, "तू मुझे सिखाएगा? मैं अपना ख्याल रख लूँगा। और तुम अपना खयाल रखना और नेहाका भी।"
नेहा ने भी कहा, "हाँ पापा, और खाना भी सही से खाना। ड्रिंक ज़्यादा मत करना।"
"तुम दोनों मेरी मम्मी बन गए हो," पिताजी ने मज़ाक किया। हम सब हँसे।
नाश्ते के बाद मैंने अपना बैग उठाया और ऑफिस के लिए तैयार हो गया। नेहा किचन में बर्तन धो रही थी।
"भैया, जाते हो?" उसने पीछे मुड़कर पूछा।
"हाँ, ऑफिस का काम है। शाम को जल्दी आ जाऊँगा," मैंने कहा और घर से निकल गया।
ऑफिस में दिन कट गया। मीटिंग्स, प्रोजेक्ट डिस्कशन, और ईमेल्स—सब रूटीन था। लेकिन मेरे दिमाग में एक ही बात थी—शुक्रवार। पिताजी के जाने के बाद घर पर सिर्फ हम दोनों होंगे।
शाम को घर लौटा तो नेहा ड्रॉइंग रूम में थी। उसने कपड़े बदल लिए थे—एक ब्लैक टॉप और ब्लू जींस पहन रखी थी। टॉप उसके स्तनों पर कसा हुआ था, और उसके नीचे के कर्व्स साफ दिख रहे थे।
"भैया, आ गए?" उसने टीवी से नज़रें हटाए बिना पूछा।
"हाँ। कॉफी पियोगी? मैं कॉफी बनाने वाला हूँ," मैंने कहा।
"हाँ, मैं भी लूँगी।"
मैंने किचन में जाकर दो कप कॉफी बनाई। छत पर ले जाने का सोचा—वहाँ शांति होती है। मैंने कॉफी के कप लिए और नेहा को बुलाया।
"चलो छत पर बैठते हैं। थोड़ी ताज़ा हवा लेते हैं," मैंने कहा।
वह उपर आई और मेरे पीछे-पीछे छत पर आ गई। हमने चारपाई पर कॉफी रखी और बैठ गए। शाम की हल्की ठंडी हवा चल रही थी।
"सो क्या रही हो आजकल?" मैंने कॉफी की चुस्की लेते हुए पूछा।
"कुछ नहीं। बस घर का काम, नौकरी धूँदना" उसने कहा। "तुम्हारा क्या प्लान है इस वीकेंड?"
मैंने थोड़ा सोचा। "शायद शुक्रवार रात दोस्तों के साथ बाहर जाऊँ। लेट नाइट आउट। लेकिन जल्द घर बापस आऊंगा ।"
नेहा ने मुझे देखा। "तो मैं घर पर अकेली रहूँगी?"
वह चुप हो गई। थोड़ी देर बाद बोली, "भैया, मैं भी तो एन्जॉय करना चाहती हूँ। मैं भी तो बाहर जाना चाहती हूँ... नाइट लाइफ एन्जॉय करना चाहती हूँ। डिस्को, पब वब सबकुछ"।
मैंने चौंकने का नाटक किया। "क्या? तुम? इतनी भीड़, शराबी लोग—वहाँ तुम्हारे लिए कुछ नहीं है। पापा भी मना करते हैं।"
"पापा तो यहाँ नहीं होंगे!" उसने जोर देकर कहा। "और यह गोल्डन ऑपर्च्युनिटी है मेरे लिए। मैं ज़िंदगी में पहली बार नाइट लाइफ एन्जॉय करना चाहती हूँ। प्लीज़ भैया... मुझे भी ले चलिए ना।"
मैंने थोड़ी देर सोचा। असल में, मेरे दिमाग में तो पहले से ही प्लान था—भीड़ में उसके शरीर को छूना, उसकी कोमलता को महसूस करना। लेकिन मैंने दिखाया कि मैं हिचकिचा रहा हूँ।
"सोच... बहुत भीड़ होगी। और ड्रिंक्स... और शराबी लोग," मैंने कहा।
"तो तुम मेरे साथ होगे न?" उसने मेरी आँखों में देखा। "तुम मेरी देखभाल करोगे। प्लीज़ भैया... मुझे ले चलो। बस एक बार।"
मैंने गहरी साँस ली और मुस्कुराया। "ठीक है। मैं तुम्हें ले चलूँगा। बस तुम और मैं—किसी अच्छी डिस्को में चलेंगे।"
उसकी आँखों में चमक आ गई। "सच में? थैंक यू सो मच भैया!"
वह उठी और मुझसे लिपट गई—एक गर्म जोशीला हग। उसके स्तन मेरी छाती से दब गए—उनकी कोमलता, उनकी गर्माहट मैं साफ महसूस कर सकता था। उसके निप्पल टॉप के नीचे सख्त हो गए थे—या शायद मैं केवल कल्पना कर रहा था।
"इट्स ओके," मैंने कहा और अपना हाथ उसकी पीठ पर रख दिया। "मैं वही करूँगा जो तुम्हें खुश करे।"
मैंने अपना हाथ उसकी पीठ पर रगड़ा—उसके ब्रा का स्ट्रैप साफ महसूस हो रहा था। पीठ की चिकनी त्वचा पर स्ट्रैप की पतली लकीर। मेरे हाथ को नीचे जाने का मन कर रहा था—उसके गांडके गोले तक, उनकी गोलाई को छूने के लिए। लेकिन मैंने खुद को रोका। अभी नहीं। सही समय आने दो।
उसने मुझसे अलग होकर मुस्कुराया। " आप बहुत अच्छे हो, भैया । आई लव यू, भैया।"
" रहने दे, ज्यादा मस्का मत मारो । वैसे मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ," मैंने कहा और कॉफी का आखिरी घूँट ले लिया।
फिर हमने कुछ देर बातें कीं। मैं उसकी कहानियाँ सुनता रहा। मैं उसे देखभाल और प्यार दिखा रहा था। मैं चाहता था कि वह मुझ पर भरोसा करे, बस भाई के रूप में ही नहीं बल्कि एक दोस्त के रूप में भी। मैं जब भी मौका मिलता, उसकी खूबसूरती और अकलमंदीकी तारीफ करता। वह बस मुस्कुराती और हँसती। जब भी मैं कोई मज़ाक करता, वह ठहाके लगाकर हँसती।
कुछ बातें और हँसी-मज़ाक के बाद, उसने कहा, "रात का खाना बनाने का समय हो गया।" मैंने कहा, "चलो!, मैं भी तुम्हारी मदद करूँगा।"
हम रसोई में गए और खाना बनाने लगे। खाना बनाते समय, जब वह मेरी तरफ मुँह नहीं कर रही होती, मैं पीछे से उसके प्यारीसी गांड घूरता और उन सफ़ेद लटकती बड़े आम पर नज़र डालता, जो मुझे तब दिखते जब वह मेरी तरफ झुकती। खाना बनाते समय मेरा लंड खड़ा हो गया, जिसे मैंने बड़ी मुश्किल से छिपाया। शायद यही वजह है कि मैं अपनी प्यारी बहन की मदद करते हुए रसोई में काम करना पसंद करने लगा।
शाम को डिनर टेबल पर पिताजी ने फिर से अपने टूर का जिक्र किया। "मैं कल सुबह पाँच बजे निकल जाऊँगा। रविवार रात तक वापस आ जाऊँगा। तुम दोनों का ध्यान रखना। राज, नेहा को अकेला मत छोड़ना।"
"जी पापा," मैंने और नेहा ने एक साथ कहा।
"और हाँ," पिताजी ने कहा, "अगर कोई ज़रूरत हो तो मुझे फोन कर लेना।"
डिनर के बाद हम तीनों थोड़ी देर बैठे, फिर पिताजी जल्दी सो गए। नेहा ने बर्तन धोए, और मैं अपने कमरे में चला गया।
कमरे में आते ही मैंने फोन चेक किया। इंस्टाग्राम पर आदित्य के नाम से नेहा—उफ़, श्रीया—को एक मैसेज भेजने का समय आ गया था।
लेकिन, पहले मैंने उसके कमेंट सेक्शन को स्क्रॉल करना शुरू किया। कई लोगों ने कमेंट किया था 'हॉट एस', 'हॉट और सेक्सी', 'ऐसे प्यारे बूब्स' वगैरह वगैरह। मैंने भी अपना कमेंट जोड़ा, 'खूबसूरत और हॉट! ऐसी हॉट लड़की पहले कभी नहीं देखी।'देखी"।
"हाय श्रीया! कैसी हो? आज कोई नई रील नहीं डाली?"
कुछ देर बाद उसका जवाब आया: "हाय आदित्य! मैं ठीक हूँ। आज कुछ नहीं बनाया। क्या सुझाव है?"
मैं मुस्कुराया—अब खेल शुरू होता है।
"तुम्हारी रील्स बहुत अच्छी हैं। लेकिन तुम और भी बेहतर कर सकती हो। थोड़ा रिवीलिंग ड्रेस पहनो—तुम्हारी बॉडी परफेक्ट है, उसे दिखाने में कोई बुराई नहीं है। जितने ज्यादा व्यूज, उतने ज्यादा फैन्स।"
उसने जवाब दिया: "मतलब? कैसी ड्रेस?"
"सोचो—एक ब्रा और साड़ी। पीठ दिखे, कमर दिखे। एक अच्छा सा गाना—'ढक ढक ढक ढक करने लगा'—बैकग्राउंड में लगा दो। आजकल बहुत ट्रेंड मैं है । तुम्हारी रील बहुत वायरल होगी।"
कुछ देर का अंतराल। फिर उसका जवाब: "मैं सोचूँगी। थैंक्स फॉर द आइडिया। गुडनाइट आदित्य।"
लेकिन, मैं और बात करना चाहता था, मैंने और बात करने पर जोर दिया। उसने कहा, "मैं अभी व्यस्त हूं। मैं तुमसे जल्द ही बात करूंगी।" मुझे एक पल के लिए निराश हुआ। मैंने भारी मन से उसे वापस मैसेज किया।
"गुडनाइट श्रीया। सपनों में मिलते हैं।"
मैंने फोन रख दिया और बिस्तर पर लेट गया। दिमाग में शुक्रवार की रात का सीन चल रहा था—डिस्को की रोशनी, भीड़, और नेहा मेरे साथ।
मैंने आँखें बंद कीं और कल्पना की—वह मेरे सामने डांस कर रही है, उसके हाथ मेरे कंधों पर, मेरे हाथ उसकी कमर पर। धीरे-धीरे हमारे शरीर आपस में रगड़ खाते हैं, उसके स्तन मेरी छाती से दबते हैं, उसके नितंब मेरे हाथों में होते हैं। फिर एक गहरा किस—उसके होंठ, उसकी जीभ, हमारी साँसें मिलती हैं।
मेरा लंड शॉर्ट्स के नीचे सख्त हो गया था। मैंने हाथ बढ़ाया और उसे सहलाने लगा—लेकिन फिर रुक गया। नहीं। कल्पना को रहने दें। शुक्रवार को हकीकत बन जाएगी।
सुबह की हल्की रोशनी खिड़की से अंदर आ रही थी जब मेरी आँख खुली। मैंने फोन उठाया—इंस्टाग्राम पर कोई नया नोटिफिकेशन नहीं था। नेहा ने कल रात "Goodnight Aditya" कहने के बाद कोई मैसेज नहीं भेजा था। मैं मुस्कुराया—अच्छा है, उसे स्पेस देना भी ज़रूरी है।
मैं उठा और बाथरूम की ओर बढ़ा। रास्ते में नेहा के कमरे का दरवाज़ा खुला था—वह अंदर नहीं थी। शायद किचन में थी। मैंने जल्दी से अपना मॉर्निंग रूटीन पूरा किया—दाँत साफ किए, चेहरा धोया, और शॉर्ट्स बदलकर टी-शर्ट पहन ली।
जैसे ही मैं किचन के पास पहुँचा, तवे पर पराठा सेंकने की आवाज़ आ रही थी। नेहा ने हल्का पीला कुर्ता और व्हाइट लेगिंग्स पहन रखी थी। उसके बालों को ऊपर से बाँधा हुआ था, और गर्दन के पीछे के बालों की छोटी-छोटी लटें बिखरी हुई थीं।
वह चूल्हे के सामने खड़ी थी, पराठा पलटने के लिए थोड़ा झुकी—उसके नितंब लेगिंग्स में कसे हुए बिल्कुल सामने थे। गोल, मजबूत, और हर हरकत के साथ उनमें हल्की सी हलचल। मेरी नज़र उन पर जम गई—उस सफेद लेगिंग्स के नीचे का हर कर्व साफ दिख रहा था। एकदम परफेक्ट गोलाई, बीच में गहरी क्रीज़, और ऊपर की तरफ पतली कमर में समाती हुई।
"गुड मॉर्निंग, भैया," उसने पीछे मुड़कर देखा। "चाय बना दी है। तुम अपनी प्लेट ले लो।"
"गुड मॉर्निंग," मैंने कहा और अपनी नज़रें हटा लीं। "तुम्हारी मदद करूँ?"
"हाँ, प्लेट निकाल दो। पापा भी आ जाएँगे अब," उसने पराठा तवे से उतारते हुए कहा।
मैंने अलमारी से तीन प्लेट्स निकालीं और मेज़ पर रख दीं। उसने दो पराठे एक प्लेट में डाले, फिर दूसरे पराठे के लिए आटा बेलने लगी। उसके हाथ बेलन पर चल रहे थे, और हर बार जब वह जोर लगाती, उसके स्तन कुर्ते के नीचे हिलते। ब्रा की पतली पट्टियाँ कुर्ते के कंधों से झाँक रही थीं।
मैंने उसकी मदद करते हुए दूध औरचीनी का डिब्बा निकाला। इस बीच पिताजी आ गए।
"गुड मॉर्निंग," पिताजी ने कहा और मेज़ पर बैठ गए। "आज सुबह सुबह खुशबू कमाल की है। नेहा, तूने क्या बनाया है?"
"आलू के पराठे, पापा," उसने मुस्कुराकर कहा। "और साथ में दही भी रखा है।"
हम तीनों ने साथ में नाश्ता किया। पिताजी ने चाय की चुस्की ली और फिर बात शुरू की।
"मैं शुक्रवार सुबह निकल जाऊँगा और रविवार रात तक वापस आ जाऊँगा," पिताजी ने कहा। "तुम दोनों को घर संभालना होगा। और राज, तुम नेहा का ख्याल रखना।"
"बिल्कुल, पापा," मैंने कहा। "आप चिंता मत कीजिए। हम दोनों मिलकर सब संभाल लेंगे।"
"हाँ, पापा," नेहा ने कहा। "आप अपना टूर एन्जॉय कीजिए। हम यहाँ अपना खयाल रखंगे।"
"और पापा," मैंने थोड़ी गंभीर आवाज़ में कहा, "ड्रिंक सावधानी से करना। दोस्तों के साथ मस्ती करो, लेकिन अपना ख्याल रखना।"
पिताजी हँसे और बोले, "तू मुझे सिखाएगा? मैं अपना ख्याल रख लूँगा। और तुम अपना खयाल रखना और नेहाका भी।"
नेहा ने भी कहा, "हाँ पापा, और खाना भी सही से खाना। ड्रिंक ज़्यादा मत करना।"
"तुम दोनों मेरी मम्मी बन गए हो," पिताजी ने मज़ाक किया। हम सब हँसे।
नाश्ते के बाद मैंने अपना बैग उठाया और ऑफिस के लिए तैयार हो गया। नेहा किचन में बर्तन धो रही थी।
"भैया, जाते हो?" उसने पीछे मुड़कर पूछा।
"हाँ, ऑफिस का काम है। शाम को जल्दी आ जाऊँगा," मैंने कहा और घर से निकल गया।
ऑफिस में दिन कट गया। मीटिंग्स, प्रोजेक्ट डिस्कशन, और ईमेल्स—सब रूटीन था। लेकिन मेरे दिमाग में एक ही बात थी—शुक्रवार। पिताजी के जाने के बाद घर पर सिर्फ हम दोनों होंगे।
शाम को घर लौटा तो नेहा ड्रॉइंग रूम में थी। उसने कपड़े बदल लिए थे—एक ब्लैक टॉप और ब्लू जींस पहन रखी थी। टॉप उसके स्तनों पर कसा हुआ था, और उसके नीचे के कर्व्स साफ दिख रहे थे।
"भैया, आ गए?" उसने टीवी से नज़रें हटाए बिना पूछा।
"हाँ। कॉफी पियोगी? मैं कॉफी बनाने वाला हूँ," मैंने कहा।
"हाँ, मैं भी लूँगी।"
मैंने किचन में जाकर दो कप कॉफी बनाई। छत पर ले जाने का सोचा—वहाँ शांति होती है। मैंने कॉफी के कप लिए और नेहा को बुलाया।
"चलो छत पर बैठते हैं। थोड़ी ताज़ा हवा लेते हैं," मैंने कहा।
वह उपर आई और मेरे पीछे-पीछे छत पर आ गई। हमने चारपाई पर कॉफी रखी और बैठ गए। शाम की हल्की ठंडी हवा चल रही थी।
"सो क्या रही हो आजकल?" मैंने कॉफी की चुस्की लेते हुए पूछा।
"कुछ नहीं। बस घर का काम, नौकरी धूँदना" उसने कहा। "तुम्हारा क्या प्लान है इस वीकेंड?"
मैंने थोड़ा सोचा। "शायद शुक्रवार रात दोस्तों के साथ बाहर जाऊँ। लेट नाइट आउट। लेकिन जल्द घर बापस आऊंगा ।"
नेहा ने मुझे देखा। "तो मैं घर पर अकेली रहूँगी?"
वह चुप हो गई। थोड़ी देर बाद बोली, "भैया, मैं भी तो एन्जॉय करना चाहती हूँ। मैं भी तो बाहर जाना चाहती हूँ... नाइट लाइफ एन्जॉय करना चाहती हूँ। डिस्को, पब वब सबकुछ"।
मैंने चौंकने का नाटक किया। "क्या? तुम? इतनी भीड़, शराबी लोग—वहाँ तुम्हारे लिए कुछ नहीं है। पापा भी मना करते हैं।"
"पापा तो यहाँ नहीं होंगे!" उसने जोर देकर कहा। "और यह गोल्डन ऑपर्च्युनिटी है मेरे लिए। मैं ज़िंदगी में पहली बार नाइट लाइफ एन्जॉय करना चाहती हूँ। प्लीज़ भैया... मुझे भी ले चलिए ना।"
मैंने थोड़ी देर सोचा। असल में, मेरे दिमाग में तो पहले से ही प्लान था—भीड़ में उसके शरीर को छूना, उसकी कोमलता को महसूस करना। लेकिन मैंने दिखाया कि मैं हिचकिचा रहा हूँ।
"सोच... बहुत भीड़ होगी। और ड्रिंक्स... और शराबी लोग," मैंने कहा।
"तो तुम मेरे साथ होगे न?" उसने मेरी आँखों में देखा। "तुम मेरी देखभाल करोगे। प्लीज़ भैया... मुझे ले चलो। बस एक बार।"
मैंने गहरी साँस ली और मुस्कुराया। "ठीक है। मैं तुम्हें ले चलूँगा। बस तुम और मैं—किसी अच्छी डिस्को में चलेंगे।"
उसकी आँखों में चमक आ गई। "सच में? थैंक यू सो मच भैया!"
वह उठी और मुझसे लिपट गई—एक गर्म जोशीला हग। उसके स्तन मेरी छाती से दब गए—उनकी कोमलता, उनकी गर्माहट मैं साफ महसूस कर सकता था। उसके निप्पल टॉप के नीचे सख्त हो गए थे—या शायद मैं केवल कल्पना कर रहा था।
"इट्स ओके," मैंने कहा और अपना हाथ उसकी पीठ पर रख दिया। "मैं वही करूँगा जो तुम्हें खुश करे।"
मैंने अपना हाथ उसकी पीठ पर रगड़ा—उसके ब्रा का स्ट्रैप साफ महसूस हो रहा था। पीठ की चिकनी त्वचा पर स्ट्रैप की पतली लकीर। मेरे हाथ को नीचे जाने का मन कर रहा था—उसके गांडके गोले तक, उनकी गोलाई को छूने के लिए। लेकिन मैंने खुद को रोका। अभी नहीं। सही समय आने दो।
उसने मुझसे अलग होकर मुस्कुराया। " आप बहुत अच्छे हो, भैया । आई लव यू, भैया।"
" रहने दे, ज्यादा मस्का मत मारो । वैसे मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ," मैंने कहा और कॉफी का आखिरी घूँट ले लिया।
फिर हमने कुछ देर बातें कीं। मैं उसकी कहानियाँ सुनता रहा। मैं उसे देखभाल और प्यार दिखा रहा था। मैं चाहता था कि वह मुझ पर भरोसा करे, बस भाई के रूप में ही नहीं बल्कि एक दोस्त के रूप में भी। मैं जब भी मौका मिलता, उसकी खूबसूरती और अकलमंदीकी तारीफ करता। वह बस मुस्कुराती और हँसती। जब भी मैं कोई मज़ाक करता, वह ठहाके लगाकर हँसती।
कुछ बातें और हँसी-मज़ाक के बाद, उसने कहा, "रात का खाना बनाने का समय हो गया।" मैंने कहा, "चलो!, मैं भी तुम्हारी मदद करूँगा।"
हम रसोई में गए और खाना बनाने लगे। खाना बनाते समय, जब वह मेरी तरफ मुँह नहीं कर रही होती, मैं पीछे से उसके प्यारीसी गांड घूरता और उन सफ़ेद लटकती बड़े आम पर नज़र डालता, जो मुझे तब दिखते जब वह मेरी तरफ झुकती। खाना बनाते समय मेरा लंड खड़ा हो गया, जिसे मैंने बड़ी मुश्किल से छिपाया। शायद यही वजह है कि मैं अपनी प्यारी बहन की मदद करते हुए रसोई में काम करना पसंद करने लगा।
शाम को डिनर टेबल पर पिताजी ने फिर से अपने टूर का जिक्र किया। "मैं कल सुबह पाँच बजे निकल जाऊँगा। रविवार रात तक वापस आ जाऊँगा। तुम दोनों का ध्यान रखना। राज, नेहा को अकेला मत छोड़ना।"
"जी पापा," मैंने और नेहा ने एक साथ कहा।
"और हाँ," पिताजी ने कहा, "अगर कोई ज़रूरत हो तो मुझे फोन कर लेना।"
डिनर के बाद हम तीनों थोड़ी देर बैठे, फिर पिताजी जल्दी सो गए। नेहा ने बर्तन धोए, और मैं अपने कमरे में चला गया।
कमरे में आते ही मैंने फोन चेक किया। इंस्टाग्राम पर आदित्य के नाम से नेहा—उफ़, श्रीया—को एक मैसेज भेजने का समय आ गया था।
लेकिन, पहले मैंने उसके कमेंट सेक्शन को स्क्रॉल करना शुरू किया। कई लोगों ने कमेंट किया था 'हॉट एस', 'हॉट और सेक्सी', 'ऐसे प्यारे बूब्स' वगैरह वगैरह। मैंने भी अपना कमेंट जोड़ा, 'खूबसूरत और हॉट! ऐसी हॉट लड़की पहले कभी नहीं देखी।'देखी"।
"हाय श्रीया! कैसी हो? आज कोई नई रील नहीं डाली?"
कुछ देर बाद उसका जवाब आया: "हाय आदित्य! मैं ठीक हूँ। आज कुछ नहीं बनाया। क्या सुझाव है?"
मैं मुस्कुराया—अब खेल शुरू होता है।
"तुम्हारी रील्स बहुत अच्छी हैं। लेकिन तुम और भी बेहतर कर सकती हो। थोड़ा रिवीलिंग ड्रेस पहनो—तुम्हारी बॉडी परफेक्ट है, उसे दिखाने में कोई बुराई नहीं है। जितने ज्यादा व्यूज, उतने ज्यादा फैन्स।"
उसने जवाब दिया: "मतलब? कैसी ड्रेस?"
"सोचो—एक ब्रा और साड़ी। पीठ दिखे, कमर दिखे। एक अच्छा सा गाना—'ढक ढक ढक ढक करने लगा'—बैकग्राउंड में लगा दो। आजकल बहुत ट्रेंड मैं है । तुम्हारी रील बहुत वायरल होगी।"
कुछ देर का अंतराल। फिर उसका जवाब: "मैं सोचूँगी। थैंक्स फॉर द आइडिया। गुडनाइट आदित्य।"
लेकिन, मैं और बात करना चाहता था, मैंने और बात करने पर जोर दिया। उसने कहा, "मैं अभी व्यस्त हूं। मैं तुमसे जल्द ही बात करूंगी।" मुझे एक पल के लिए निराश हुआ। मैंने भारी मन से उसे वापस मैसेज किया।
"गुडनाइट श्रीया। सपनों में मिलते हैं।"
मैंने फोन रख दिया और बिस्तर पर लेट गया। दिमाग में शुक्रवार की रात का सीन चल रहा था—डिस्को की रोशनी, भीड़, और नेहा मेरे साथ।
मैंने आँखें बंद कीं और कल्पना की—वह मेरे सामने डांस कर रही है, उसके हाथ मेरे कंधों पर, मेरे हाथ उसकी कमर पर। धीरे-धीरे हमारे शरीर आपस में रगड़ खाते हैं, उसके स्तन मेरी छाती से दबते हैं, उसके नितंब मेरे हाथों में होते हैं। फिर एक गहरा किस—उसके होंठ, उसकी जीभ, हमारी साँसें मिलती हैं।
मेरा लंड शॉर्ट्स के नीचे सख्त हो गया था। मैंने हाथ बढ़ाया और उसे सहलाने लगा—लेकिन फिर रुक गया। नहीं। कल्पना को रहने दें। शुक्रवार को हकीकत बन जाएगी।
