भाई सही कहा आपने, लोग पढ़ तो लेते हैं पर कमेंट और लाइक नहीं करते, किसी की मेहनत की कोई परवाह नहीं बस पढ़ा और हिलाया और हो गया,।अब भीख मांगना पड़ेगा सबसे कि कहानी को सपोर्ट करो
इग्नोर लिस्ट ही अपडेट करना पसंद करूंगा
LAST 05 UPDATE पर जिनके लाइक आए होंगे वही रहेंगे पढ़ने वाले
बाकी सब ब्लॉक होंगे पोल वोटर्स
सेटिंग बदलने का वक्त आ गया है
Bhai aap bhi apni story continue Karo yrrभाई सही कहा आपने, लोग पढ़ तो लेते हैं पर कमेंट और लाइक नहीं करते, किसी की मेहनत की कोई परवाह नहीं बस पढ़ा और हिलाया और हो गया,।
और कुछ लोग तो हिलाते तक नहीं।भाई सही कहा आपने, लोग पढ़ तो लेते हैं पर कमेंट और लाइक नहीं करते, किसी की मेहनत की कोई परवाह नहीं बस पढ़ा और हिलाया और हो गया,।
Jbrdst update dono bete milkar maa ki boor ko pani pani kiye ja rhe hअध्याय 02
UPDATE 034
अमन के घर
रात में 08 बजने को हो रहे थे और डिनर के बाद ममता घर के मर्दों को खोजती हुई अपने कमरे की ओर बढ़ रही थी ,जहां अमन और मुरारी बैठे हुए अपनी योजनाएं गढ़ रहे थे और लंड कपड़ो के ऊपर से मसल रहे थे ।
लेकिन जैसे ही दरवाजे पर आहट हुई दोनों सतर्क हो गए
कमरे में ममता दाखिल होते हुए उसकी नजर बाप बेटे पर गई
: अरे देवर जी कहा है ?
: अह वो तो बाहर ही था , क्यों ?
मुरारी ने ममता के सवालों का जवाब दिया
: अरे खाना तैयार हो गया है और उनका पता नहीं
: कमरे में होगा अमन की मां कहा जाएगा इतनी रात में ( मुरारी ने कहा और उसकी नजर ममता के गीली साड़ी पर गई हो आगे पेट के पास भीग गई थी ) अरे ये भीग कैसे गई तुम
: ओह ये , क्या बताऊं । कितनी बार कहा आपको वो सिंक की टोटी सही करवा दो , इसकी चाची को बर्तन धुलने को कहा उसने तेजी से घुमाया पूरी टोटी हाथ में , वो बेचारी पूरी गीली हो गई और टोटी बंद करने के चक्कर में थोड़ी मै भी भीग गई
ममता ने उखड़ कर कहा
: अरे तो बदल लो कपड़े , सर्द मौसम है तबीयत बिगड़ जाएगी
मुरारी को फिक्रमंद देखकर ममता ने एक नजर उसे देखा और फिर मुस्कुरा कर अमन को देखने लगी
: हा हा बड़ा आपको मेरी फिकर है, अरे ऐसे कहो न कि शादी में काम कौन करेगा हूह ( ममता मुंह बना कर कमरे का दरवाजा बंद करने लगी )
इधर उसकी हरकत देखकर दोनों बाप बेटे फूलने लगे कि ममता शायद उनके सामने ही कपड़े निकालेंगी
दोनों की आंखों में उम्मीद की लहरें उठने लगी थीं और वो दोनों ने एक दूसरे को देखकर मुस्कराए
इधर सच में ममता अपनी साड़ी खोलने लगी और अपने पेट के आगे से साड़ी की प्लीट को खींचा और उसका पेटीकोट आगे से दिखने लगा
दोनों बाप बेटे के चेहरे पर मुस्कुराहट फैलने लगी , लंड में सुरसुराहट होने लगी
: अह , बेटा अमन
: हा मम्मी
: जरा ये कंधे की पिन निकालना तो ( ममता ने प्रयास करते हुए कंधे से पिन टटोल रही थी )
मुरारी ने आंखों से इशारा किया और अमन अपना लंड लोवर में सेट करता हुआ उठा और अपनी मां के पास पीछे खड़ा हो गया
उसका लंड अभी भी लोवर में तंबू बनाए हुआ था , मुरारी मोबाइल खोलकर कुछ चेक करने का नाटक कर रहा था लेकिन उसकी नजर लगातार अमन पर थी
: उम्मम क्या हुआ बेटा निकल नहीं रहा है क्या ?
: हा मम्मी लग रहा है फंस गया है कहीं उम्मम
: अरे आराम से देख तुझे लगे नहीं
: हा वही कर रहा हूं मम्मी
अमन एड़ियों के बल हो गया जिससे उसका लंड लोवर के अंदर से ममता के कूल्हे के पास सट गया
अमन का ध्यान उस वक्त उस पर नहीं था क्योंकि लंड और कूल्हे का स्पर्श इतना स्पष्ट नहीं था कि अमन को कुछ महसूस हो
लेकिन मुरारी की नजर पड़ते ही उसके बदन में सिहरन होने लगी
जैसे ही अमन ने मुरारी की ओर देखा तो मुरारी ने आंखों से उसको उसके लंड की स्थिति के बारे में दिखाया , तो अमन के चेहरे पर एक शरारती मुस्कुराहट फैल गई और बाप के सामने अपनी स्थिति देख कर उसका लंड और विस्तार लेने लगा और इस पर तो उसका सुपाड़ा सच में आधा इंच उसकी मां के कूल्हे में चुभ गया
जिसका अहसास ममता को भी हुआ था ,
: मम्मी ये निकल नहीं रहा है
: अच्छा छोड़ एक तो खाना ठंडा हो रहा है , ब्लाउज के साथ निकाल देती हूं जरा आलमारी से मेरी नाइटी निकाल कर देना तो
ब्लाउज निकालने का सुनकर अमन और मुरारी की आंखे दुबारा से चमक उठी
दोनों के एक दूसरे को देखा और अमन मुस्कुरा कर ममता की अलमारी की ओर बढ़ गया
फिर आलमारी खोलकर , देखने लगा
: मम्मी कहा है ?
: अरे बेटा नीचे वाले में देख सब एक साथ रखी है
ममता की आवाज पर अमन की नजर अपनी मां की ओर गई
जो अपने ब्लाउज के हुक खोलकर हाथ पीछे कर ब्लाउज अपनी बाजुओं से उतार रही थी
जिससे उसके बड़े बड़े नंगे खरबूजे जैसे चूचे तन कर सामने आ गए थे
अमन का हलक सूखने लगा और उसने मुंह खोले हुए एक नजर मुरारी को देखा तो मुरारी मुस्कुराने लगा
अमन ने वापस नजरे फेर कर आलमारी से एक साटिन नाइटी निकाली
: मम्मी ये !!
ममता ने एक नजर उस नाइटी को देखा और एकदम उसका चेहरा गुलाबी हो गया
: धत्त पागल है क्या ? वो नहीं दूसरा कोई
ममता ने एक नजर मुरारी को देखा और मुरारी समझ गया कि ममता के शर्माने का कारण क्या था । क्योंकि अनजाने में ही अमन ने वो साटिन की नाइटी निकाली थी जो उसकी छातियों पर कस जाती है और उसके बड़े बड़े अंगूर जैसे निप्पल उभर आते है ।
: क्यों क्या हुआ ? कितना सॉफ्ट हैं और कलर भी प्यारा है
: अरे नहीं पागल ( ममता उसकी ओर जाती हुई बोली और अमन की आंखे बड़ी होने लगी जैसे जैसे ममता उसकी ओर बढ़ रही थी अपनी नंगी छातियां हिलाती हुई )
फिर ममता ने अलमारी से काटन की ढीली नाइटी निकाली
: उसको रख दे
: क्या हुआ इसमें ( अमन हल्के से बुदबुदाया )
: वो छाती पर टाइट आती है और सब दिखता है सामने से ( ममता मुस्कुरा कर बोली )
अमन का लंड कसने लगा था अपनी मां को पास में खड़ा देख कर
इधर मुरारी उठा और बाथरूम में चला गया और ममता ने नाइटी डाल ली
अपने पापा के हटते ही , अमन ने अपनी मां को अपने बाहों में भर लिया
: उफ्फ मेरी सेक्सी मम्मा , मिस यू
: हट पागल छोड़ , तेरे पापा अंदर ही है
ममता ने अमन को अलग किया और आंखे दिखाती हुई मुस्कुराई
अमन का लंड एकदम फड़फड़ाने लगा था
: और ये क्या है ?
: आपको देखकर हुआ है हीहीही ( अमन बड़ी बेशर्मी से बोला )
: तेरे पापा ने देख लिया तो ?
: जैसे पापा का नहीं हुआ होगा क्या आपको ऐसे देखकर ... मुझे लगता है वो तो हिलाने गए है अंदर हीही
: धत्त बदमाश, मार खायेगा अब सही कर उसे
अमन के दिमाग में बहुत सारे ख्याल आ रहे थे और उसकी उत्तेजना बढ़ रही थी
: मम्मी
: हा बोल न
: चूस दो न
: धत्त पागल है क्या ? हट अब
तभी बाथरूम में फ्लश चलने की आवाज आई और दोनों अलग हो गए
मुरारी के आने पर ममता अमन का उतरा हुआ मुंह देख रही थी ,
: आप लोग बाहर आओ , मै जरा ऊपर से सबको बुला कर आती हूं
फिर ममता अपने कूल्हे हिलाती हुई निकल गई
उसके जाते ही मुरारी मुस्कुरा कर अमन को देखा
: सीईईई पापा ये क्या था ? मम्मी तो जरा भी नहीं सोची
: अरे तू उसका बेटा है , इतना नहीं सोचेगी ब्लाउज उतराने में , असल मजा है जब पेटिकोट उठाएगी
अमन और मुरारी हंसते हुए बात करते हुए हाल में आ रहे थे और वही ममता अमन के कमरे में जा पहुंची , जहां सोनल अपने ट्रॉली बैग्स खोलकर बेड पर समान बिखेरे हुए बैठी थी निशा के साथ
: अरे बहु ये क्या लेकर बैठ गई तू भी , चल पहले खाना खा और आराम कर
ममता फिकर में बोली और निशा को ताज्जुब हुआ जिस तरह से सोनल को उसकी सास ने अपनापन जताया
: जी मम्मी जी , वो मैने सोचा कि कल शॉपिंग के लिए जाना है तो पहले अपने बैग खाली कर लूं , एक काम निपट जाएगा
: अच्छा अच्छा ठीक है कर लेना , लेकिन पहले चल खाना खाने और निशा बेटा तू भी आ जा । मै तेरी चाची को देख कर आती हूं
: जी मम्मी
सोनल उठने लगी और एकदम से ममता की नजर बिस्तर पर सोनल जहां बैठी थी वहां उसके पीछे एक पैकेट था ,जिसमें से कुछ चमकीली नीली एक डोरी बाहर निकली थी
ममता के भीतर की जिज्ञासा बढ़ने लगी
: अरे वो क्या है पन्नी में
ममता के इंडीकेशन से ही निशा और सोनल की आंखे बड़ी हो गई और वो मुस्कुराने लगी
: क्या हुआ बहु
सोनल निशा को देख रही थी कि क्या करूं और ऐसे में निशा झट से बिस्तर से उठ कर टिनटिनाती हुई चाल में मुस्कुराती हुई बाहर निकल ली : सोनल तू आना मै जा रही हूं
: अरे !! ( ममता को हैरानी हुई ) बहु ?? क्या बात है
: वो मम्मी जी
ममता ने लपक कर वो पैकेट उठाया और उसे खोलकर कर देखा तो वो भी मुस्कुराने लगी , उसमें कई तरह की रंग बिरंगी ब्रा पैंटी और बिकनी सेट थे
ममता ने मुस्कुरा कर अपनी नजर चुराती हुई बहु को देखा
: इसके लिए इतना शर्मा रही है , अच्छा इसमें मेरे लिए भी है न ? ( ममता ने माहौल को थोड़ा दोस्ताना करना चाहा ताकि उसकी बहु थोड़ी सहज हो सके )
: जी मम्मी , है
: हैं ? सच में !!
: हम्ममम ( सोनल ने हा में सर हिलाया ) वो आपकी और मम्मी( रागिनी ) के लिए, दोनो के लिए है उसमें
: हीही और तुझे मेरा साइज कैसे पता ?
सोनल मुस्कुराने लगी
: उनको पता था ?
: किसको ? अमन को !! ( ममता को हैरानी हुई )
सोनल ने शर्मा कर हा में सर हिलाया
: लेकिन उसको कैसे पता ?
: शायद उन्होंने पापा जी से पूछा हो , वो कुछ सरप्राईज जैसा कह रहे थे ( सोनल लजा कर मुस्कुराते हुए बोली )
ममता अपने दिमाग के घोड़े दौड़ाने लगी । उसके दिमाग में कुछ चीजें उलझी और धुंधली थी और शायद इसी से उसका शक दूर हो सकता था आखिर बाप बेटे की दोस्ती किस हद तक आगे जा पहुंची है ।
: बहु एक मिनट , मुझे तेरी हेल्प चाहिए
: जी मम्मी कहिए
फिर ममता ने सोनल के कान में कुछ कहा और सोनल ने बस मुस्कुरा कर हुंकारी भरी । फिर सोनल को उसने नीचे जाने को कहा और खुद मंजू को बुलाने उसके कमरे की ओर बढ़ गई
मंजू के कमरे का दरवाजा लगभग भिड़का हुआ था और ममता ने जैसे ही कमरे का दरवाजा खोला उसकी आंखे फैल गई सामने का नजारा देख कर
और मन ही मन बड़बड़ाई : ये दोनो के दोनों ही ऐसे है , किसी में भी सब्र नहीं है
तभी उसे सोनल के कमरे के बंद होने की आहट हुई और वो झट से अंदर होकर मंजू के कमरे हो गई , फिर दरवाजा हौले से बंद कर
घूम कर अपने हाथ कमर पर रखते हुए आंखे महीन कर सामने का नजारा देखने लगी
सामने मंजू और मदन एक दूसरे में इतना खोए थे कि उन्हें इस बात की भनक ही नहीं थी कि ममता दरवाजा खोलकर अंदर आ गई थी
मदन बड़े जोश में उसके रसीले लिप्स चूस रहा था , मंजू की पीठ ममत की ओर ही थी और बात इतनी ही नहीं थी
मदन के हाथ तो अपनी मर्यादा लांघ चुके थे , उसने मंजू की साड़ी ऊपर कर उसके चूतड़ों को नंगा कर उन्हें अपने पंजों से खंरोच रहा है और फैला रहा था
ममता की नजर एक बार को मंजू के चर्बीदार चूतड़ों और फैली भूरी दरारों से झांकती उसकी गाड़ के सुराख पर गई और वो गिनगिना गई
उसने अपना गला खरासा और मुस्कुरा कर उन्हें देखा
एकदम से दोनों हड़बड़ाए और मंजू अपनी साड़ी सही करने लगी , फिर सर पर पल्लू करने लगी
लाज के मारे में मंजू ने ममत की ओर पीठ कर लिया था , लेकिन अभी भी पीछे से उसकी साड़ी थोड़ी खुली हुई थी
: वैसे मैने कुछ कहा था आपसे देवर जी उम्मम
मदन मुस्कुराया और कमरे से जाने लगा तो ममता उसके आगे खड़ी हो गई
: ये आखिरी बार है , अगली बार वीडियो बना कर तुम्हारे भइया को दिखाऊंगी समझे ( ममता ने हस कर उसको आंखों से घूरा )
फिर उसने मदन को जाने दिया जो तेजी से कमरे से निकल गया
मंजू भी लाज से वहां से निकलना चाहती थी
: रुको !!
ममता ने थोड़े कड़े लहजे में कहा और मंजू की हिक्की बंध गई मानो
ममता मुस्कुरा कर उसके पीछे गई और नीचे बैठ कर उसकी साड़ी को पीछे से सही किया
: तुम तो कपड़े बदलने आई थी न
मंजू शर्मा के लाल हुई जा रही थी
: मै क्या करूं , भाभी वो नहीं मानते है और... ( मंजू बोलते हुए शर्मा कर रुक गई )
: पहले भी ऐसे ही थे तुम लोग ... भूली नहीं हूं
ममता के छेड़ने पर मंजू शर्मा उठी ।
: सॉरी ( मंजू थोड़ा उदास होकर बोली नजरे चुरा कर )
: अरे पागल है क्या ? तू भी न , मै तुझे ये सब करने से रोक नहीं रही न । देख मै इन मर्दों को जानती हूं इनको औरत और शराब दोनों एक सी दिखती है जब तलब हुआ एक शॉट लगा कर खत्म करना चाहते है । लेकिन ये हमारी जिम्मेदारी है कि उन्हें थोड़ा तरसाए , उन्हें रिझाए इतनी जल्दी तैयार होने की जरूरत नहीं है ।समझी
: जी ( मंजू मुस्कुरा कर ममता की बात समझ रही थी )
: देख कल मैने अमन के पापा को बाहर भेज दिया और नतीजा आज सुबह हीहीही... खैर वो तो तूने देखा ही था उम्मम
ममता मंजू को छेड़ रही थी और मंजू शर्मा कर मुस्कुरा रही थी
: अब चले ?
: जी चलिए
फिर दोनों कमरे से बाहर निकल कर हंसती हुई जीने से उतरने लगी
इस पर ममता ने हस कर कहा
: वैसे कुछ भी हो हमारी जोड़ी खूब जमेगी
: वो कैसे ? ( जीने से उतरते हुए मंजू ने सवालिया निगाहों से ममता को देखा )
तो ममता मुस्कुरा कर उसके पास आकर बोली : नीचे मै भी जल्दी कुछ नहीं पहनती और तू भी हीहीही
मंजू ममता का इशारा समझ गई थी कि ममता ने कब उसे बिना कच्छी के देख लिया था और लाज से पानी पानी हुईं जा रही थी
फिर सारे लोग खाने के लिए बैठ गए और वही मदन का मुंह बना हुआ था ।
जिस पर मुरारी की नजर पड़ी गई और उसने सोचा खाने के बाद वो मदन से बात करेगा
राज के घर
अपने भैया की बातों से अनुज का मूड एकदम उखड़ गया था , जिस तरह से राज ने उसका मजाक बनाया ।
किताबें खोलकर वो अपनी मां के बिस्तर पर बैठा था।
पढ़ना तो छोड़ो किताबे देखने का भी उसका कोई इरादा नहीं लग रहा था ।
एक तीव्र प्रतिरोधी प्रेम की भावना , जिसने उसमें अपनी मां पर वर्तमान में एकाधिकार की भावना प्रबल कर दी थी । इस वक्त वो रागिनी पर सबसे बड़ी दावेदारी खुद की पा रहा था , लेकिन मलाल इस बात का था कि वो चाह कर भी अपने उस किरदार के बंधन से आजाद नहीं हो सकता था जो छवि के साथ वो अपनी मां के सामने रहता है , एक मासूम दुलारा और लाडला बेटा । जिसमें अभी बहुत दुनिया की समझ नहीं है और वासना के जाल से अभी अछूता है ।
मगर अनुज का दिल ही जानता था कि वो कितना बेताब है अपनी मां को अपनी मर्दानगी दिखाने को , वो जताना चाहता था कि वो हर मामले में अपने भैया से कैसे बेहतर हो सकता है लेकिन ... घूम फिर पर सारी कहानी उसके छोटे होने और उसकी 10वीं की परीक्षा पर आकर रुक जाती थी ।
सर्द रात का सन्नाटा गहराता जा रहा था और अभी तो रात के महज 08 ही बजे थे , ना पंखे ही हनहनाहट और कुलर का शोर
पूरे घर में जो कुछ आवाजें उठ रही थी वो किचन से थी , थोड़ी बहुत बर्तनों की तो कुछ उसकी मां के बड़बड़ाने की ।
कारण अनुज साफ समझ रहा था और लेकिन उसकी वासना उसके ईगो को बहुत गहरे दबा चुकी थी और अमीन बिस्तर से सरक कर कमरे के दरवाजे से बाहर झांकने लगा
दो कदम हाल की तरफ और उसकी नजर किचन में गई
एकदम से चौक कर वो रुक गया
नंगे पैर जम से गए उन ठंडी टाइल्स की फर्श पर , पूरे बदन में कंपकंपी और उसने एक लंबी गहरी आह भरते हुए सामने देखा
उसकी मां रागिनी किचन में काम कर रही थी स्लैब के पास खड़ी होकर और राज उसके पीछे खड़े होकर अपनी मां के कमर को सहलाता हुआ उसके नंगी पीठ को चूम रहा था
: उम्मम धत्त क्या कर रहा है मारूंगी तुझे बदमाश , छोड़ मुझे गुदगुदी हो रही है
जिस तरह से रागिनी राज के चुम्बन के स्पर्श से सिहर कर मुस्कुरा रही थी अनुज भी समझ रहा था कि ऐसे कहने से भला कौन रुकेगा ।
अनुज का अंदाजा भी सही था , राज के हाथ कमर से बढ़ कर आगे रागिनी के मुलायम पेट को सहलाने लगे थे और होठ पीठ से सरक कर ऊपर गर्दन के पास
रागिनी के हाथ लगातार कड़ाही में सब्ज़ी को जलने से रोकने के लिए कलछी चला रहे थे लेकिन राज के होठों के चुम्बन से उसके बदन में जो आग भड़क रही थी वो उसको शांत भी कर सकती थी ।
रागिनी हर वो कोशिश कर रही थी कि वो राज को शब्दों से हो रोक सके
: तुझे कपड़े पहनने को कहा है न , जा पहन कर आ
: ओह्ह्ह मम्मी आपकी गाड़ कितनी मुलायम है अह्ह्ह्ह्ह कितनी गद्देदार है सीईईई ओह्ह्ह
: धत्त हीही कितना गंदा बोलता है तू छोड़ अब ... अरे पागल है क्या छोड़ न
राज रागिनी को पकड़ कर पैंट के ऊपर से अपना लंड अपनी मां की गाड़ पर ठोकर मारने लगा और यहां ये नजारा देख कर अनुज का लंड झटके देने लगा लोवर में
एक ओर उसके लंड की गर्मी बढ़ रही थी तो नंगे पैर में ठंडी फर्श से सर्दी भी चढ़ रही थी , रह रह कर उसका ध्यान बट जा रहा था और इधर कब राज ने अपना मूसल निकाल लिया पता ही नहीं चला
खुले किचन में अब वो अपने लंड को अपनी मां के चूतड़ों पर साड़ी के ऊपर से ठोकरें मार रहा है
: हाय दैय्या कितना टाइट है रे सीईईई उम्मम रुक न जा बेटा अह्ह्ह्ह सब्जी गिर जायेगी
रागिनी सब्जी चला रहा थी और राज अपनी पैंट जांघों तक खोले हुए उसको पीछे से पकड़ कर उसकी गाड़ में साड़ी के ऊपर से ही पेल रहा था
अनुज का लंड भी अब बगावत पर आ पहुंचा था और उसने लोवर के ऊपर से उसको भींचने लगा था ।
रागिनी का खाना तैयार हो गया था वो राज से अलग होकर सिंक के पास आ गई , हाथ धुलने के लिए
: अब अंदर कर उसे और जा कपड़े पहन कर आ , मान जा बेटा सर्दी लग जाएगी
रागिनी ने उसके गाल छू कर बड़े दुलार में बोली
लेकिन राज को आज कुछ ज्यादा ही जुनून था और उसने अपनी मां से चिपकना नहीं छोड़ा ।
झुक कर कूल्हे के पास चूमते हुए उसने पीछे से रागिनी की साड़ी ऊपर करनी शुरू कर दी
रागिनी के हाथ सिंक में बर्तन धुलने के लिए व्यस्त थे और राज ने जैसे मौके का फायदा उठा लिया
रागिनी की साड़ी और पेटीकोट एक साथ कूल्हे तक और उसकी चमकती गोरी गाड़ सामने
अह्ह्ह्ह क्या नजारा है मम्मी उफ्फ कितनी मुलायम गाड़ है आपकी और भइया... खायेगा क्या उसे .. अरे नहीं
अनुज की जुबान लग ही गई और राज ने साड़ी उठाए हुए अपनी मां के पैंटी के साइड से नंगे चूतड़ों को चूमने लगा
ये स्पर्श पाते ही रागिनी सिहर उठी , उसकी बुर पनियाने लगी थी जिस तरह से राज पिछले 15 मिनट से उसे तंग कर रहा था
रागिनी भी तड़प कर राज के मुंह की ओर अपने चूतड़ों को धकेल कर सिसकी : ओह्ह्ह्ह बेटा उम्मम अह्ह्ह्ह्ह
एकदम से अनुज अपना लंड का कर भींच लिया और रागिनी की नजर उस पर गई
एक पल को दोनों की निगाहे मिली और अनुज सरपट भाग कर अपने मा के कमरे में बिस्तर में कम्बल ओढ कर किताब निहारने लगा ।
इंतजार तो अनुज को भी था कि कब उसकी मां उसे बुलाने आएगी
05 , 07 और फिर 10 मिनट हुए
अनुज की बेचैनी बढ़ने लगी कि बाहर क्या हो रहा होगा ?
ना सिसकी या कोई आवाज !
घड़ी का कांटा बढ़ता ही जा रहा था ।
अनुज वापस से बिस्तर छोड़ने के फिराक में था कि उसे रागिनी के पायलों की खनक मिली और एकदम से वो किताबों में सर जमा कर बैठ गया
रागिनी कमरे में दाखिल हुई और अनुज का ड्रामा देख कर मुस्कुराई
: खाना बाहर खाएगा कि यही लाऊं
अनुज ने नजर उठा कर देखा तो सामने रागिनी खड़ी मुस्कुरा रही थी और अनुज मुस्कुराने लगा
: मुझे पता है कितना पढ़ रहा है तू
: सॉरी हीही
: तांक झांक करना जरूरी है उम्मम
रागिनी ने थोड़ा घूरा उसे और अनुज हसने लगा
: वैसे मै राज के पास जा रही हूं उसके कमरे में खाने , तू यही खा ले
अनुज एकदम से चौक गया कि सारी सुविधा राज को ही मिलेगी क्या
: क्यों ? मेरे साथ खाओ न
: तू बोल ही नहीं रहा है एक भी बार , अच्छा चल यही लाती हूं , ठीक है
अनुज खुश हो गया और रागिनी थाली लेकर आई और दोनों ने साथ में खाना खाया
फिर अनुज थाली किचन में रख कर वापस आया और कमरे में देखा तो उसकी मां अपनी साड़ी कंधे से सरका कर कमरे में खड़ी ब्लाउज खोल रही थी
अनुज का लंड अकड़ने लगा था
उसने एक नजर अपने भैया के कमरे में डाला जो मोबाइल पर एक वीडियो देख रहा था कान में इयरफोन लगाए और खाना खा रहा था
अनुज वापस अपनी मां के पास आ गया
रागिनी थोड़ा मुस्कुराई : तू डरेगा नहीं न अकेले सोने में
: क्यों आप वापस नहीं आओगी मेरे पास ( अनुज उखड़ कर बोला )
: अगर भइया नहीं आने दिया तो ( रागिनी ने जान बुझ कर छेड़ा अनुज को )
: अरे तो कह देना न कि आपको मेरे पास सोना है
: अच्छा और वो मान जाएगा उम्मम
रागिनी अपना ब्लाउज खोल चुकी थी और साड़ी वापस से अपने छातियों पर रख दिया
जिससे एक झलक भर मिली अनुज को अपनी मां के नंगी मोटी चूचियों की और फिर से पर्दे में आ गई थी
अगर ध्यान से देखता अनुज तो अभी भी साड़ी के आरपार रागिनी की छातियां साफ झलक रही थी और अनुज ने तिरछी आंखों से देखा भी
अनुज भीतर से बेचैन हो रहा था
वो कहना चाहता था कि मम्मी रुक जाओ मेरे पास , मै वो सब दे सकता हूं जो आपको राज भैया से मिलेगा
लेकिन एक डर एक बंधन अभी भी हावी था उस पर
: तो मै जाऊं
: ऐसे ही ? , आप कुछ पहनने वाले थे न
: तूने कहा था कि पापा की पसंद न पहन कर जाऊ तो ( रागिनी बोल कर मुस्कुराई अपने होठ दबा कर )
अनुज ने अब खुल कर अपनी मां का कामुक रूप देखा
साड़ी में बड़े ही कामुक ढंग से अपनी नंगी छातियां को बिना ब्रा ब्लाउज के छुपाए हुए खड़ी थी
जिन्हें देखकर अनुज का मुंह में पानी आने लगा था और लंड अकड़ने लगा था ।
: तेरे पापा को मै ऐसे ही पसंद हूं , थोड़ी गांव वाली फिलिंग चाहिए होती है , जैसे गांव में औरते बिना ब्लाउज के सिर्फ साड़ी लपेट कर रहती है
अनुज का लंड लोवर में बड़ा सा तंबू बना चुका था और वो उसे छिपाना भी नहीं चाहता था
उसके दिमाग में कुछ और बात उसे अटका रही थी
: मम्मी
: हम्मम
: एक बात कहूं ( अनुज मुस्कुराया ) गुस्सा नहीं करोगे न
: क्या बोल न
: वो गांव की औरतें तो पैंटी भी नहीं पहनती न हीही
रागिनी ने होठ सिकोड़ कर अनुज की बातों को सुना और मुस्कुराई
: वैसे सच कहा तूने , उसकी भी जरूरत नहीं है
एकदम से रागिनी ने साड़ी के अंदर हाथ डाला और बिना कुछ दिखाए बड़ी चतुराई से अपनी पैंटी निकाल एक सोफे पर फेक दी
अनुज ने उड़ती हुई पैंटी को सोफे पर गिरता देखा और उसका लंड एकदम फड़फड़ाने लगा था
अब कौन सी बात हो सकती थी जिससे वो अपनी मां को रोक ले , उसका हर एक प्रयास अबतक विफल हो रहा था
: मम्मी !!
: हम्ममम ( रागिनी के दरवाजे की ओर बढ़ते कदम रुक गए ) क्या बोल न
: कुछ नहीं ( अनुज एक फीकी से मुस्कान से बोला )
रागिनी उसके मन की उदासी समझ रही थी और एक नजर उसने कमरे के दरवाजे के पास खड़े हुए राज के रूम में देखा और इशारे से अनुज को पास बुलाया
अनुज चल कर उसके पास गया
रागिनी की सांसे थोड़ी बेचैन थी उस वक्त और अनुज का मन उदास था
रागिनी ने वापस बाहर देखा और धीरे से अपनी साड़ी का पल्लू नीचे से उठा कर एक चुची अनुज के सामने नंगी कर दी
: जल्दी से पी ले
अनुज की आंखे चमक उठी , एक पल को तो उसे समझ भी आया कि क्या हो रहा है लेकिन अपनी मां की नंगी चुची देखकर वो लपक कर आगे बढ़ा और दोनों हाथों से अपनी मां की रसीली चूची पकड़ के निप्पल को मुंह में लगा लिया
रागिनी मन ही मन मुस्कुराई कि दोनों भाइयों का पहला स्पर्श एक जैसा ही है
अनुज तेजी से उसकी छाती हाथों में घुला कर पीने लगा और रागिनी उसका सर सहलाने लगी : ओह बेटा बस हो गया छोड़ न
अनुज ने भी थोड़ी मनमानी की और लगा कर मुंह से अपनी मां के निप्पल खींचने में , रागिनी को दर्द आ होने लगा और वो अनुज को धकेलने लगी और अनुज ने छोड़ दिया
: पागल , तू तो उसे भी बड़ा है हवशी है
बोलकर रागिनी मुस्कुराई और अपनी साड़ी सहेजने लगी
अनुज खुश था अपनी मां की रसीली चूची का स्वाद लेकर और रागिनी जाने को हुई
: मम्मी , प्लीज दरवाजा मत लगाना
रागिनी ने आंखे नचा कर उसे देखा और कमरे से निकल कर सामने राज के कमरे में चली गई
और अनुज खुश होकर अपना लंड भींचने लगा
इस इंतजार में कि आगे क्या क्या होने वाला है और अब वो उस नाउम्मीदी से बाहर आ चुका था कि वो राज से पीछे रह जाएगा ... क्योंकि उसकी मां ने उसे दुबारा से एक उम्मीद दे दी थी और अनुज जल्द ही अपने सपने सच होने के आसार साफ दिख रहे थे ।
जारी रहेगी
( पढ़ कर लाइक कमेंट करने में कंजूसी न करे , व्यस्तता ज्यादा है फिर भी अपडेट देने की कोशिश पूरी है .. धन्यवाद )