बड़ौदा==मुम्बई,
• डेट- हमारी जानकारी के हिसाब से अटैक की डेट, 29 मार्च यानी होली के अगले दिन और बनारस के हमले के दो दिन बाद होगी। इसका समय, जो कि मेरा अपना विश्लेषण है, लेट इवनिंग यानी शाम साढ़े सात से साढ़े 10 बजे के अंदर ही होगा। इसके तीन कारण लग रहे हैं: पहला, इस हमले का सब टेक्स्ट बुब्ब्स आन फायर है। आग की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
जैसा की मैंने पहले भी कहा था की पब्लिसिटी खास तौर से इलेक्ट्रानिक मिडिया की और विजुअल पब्लिसिटी, टेरर के लिए आक्सीजन का काम करता है। इसलिए आग के लिए रात का ही बैकड्राप, उसकी भयावहता को दिखाने के लिए वो चुनेंगे।
दूसरा कारण, टेरर की अगर हम हिस्ट्री देखें तो अभी लेटेस्ट पूने में हुआ हमला रात में आठ साढ़े आठ के बीच हुआ था। मुम्बई में झावेरी बाजार और दादर का बाम्ब अटैक, दिल्ली में कनाटप्लेस में अटैक। और 26 नवंबर। रात में साढ़े 9 के आसपास शुरू हुआ था। इसका एक कारण लोगों की भीड़ तो है ही, टीवी का प्राईम टाइम भी है।
टेरर मारने से ज्यादा डर फैलाने में यकीन रखता है। अगर रात में कोई अटैक होगा भी तो इसका असर कम होगा और दूसरे रात में पब्लिसिटी भी लिस्ट होगी।
तीसरी बात, सिक्योरिटी अटेंशन भी उस समय थोड़ा स्लैक रहता है। रात यानी मिड नाईट के बाद सिक्योरिटी बहुत स्ट्रिक्ट रहती है।
• इकोनामिक असेसमेंट- रिपोर्ट्स के मुताबिक इन दोनों शहरों (मुम्बई और बड़ौदा) पे अटैक का मेन परपज, इकोनामिक टारगेट हो सकते हैं। पूरे भारत में सबसे ज्यादा इकोनॉमिक इन्वेस्टमेंट साउथ गुजरात में हो रहा है। बड़ौदा से लेकर अंकलेश्वर, हजीरा, सूरत और वापी एक बहुत बड़ा इन्वेस्टमेंट हब बनकर उभरा है।
बड़ौदा खुद एक ट्रांसपोर्ट हब है जिसके अगल-बगल, ट्रांसपोर्ट से जुड़े मल्टी नशनल इंडस्ट्री हैं, जैसे जनरल मोटर्स, बाम्बर्दियर, (जो डेल्ही मेट्रो और बाकी मेट्रोस के लिए कोचेज बनाती है), सीमेंस, अल्काटेल, ए बी बी और भी अनेक मल्टी नशनल कम्पनी। पेट्रोकेमिकल, फारमा, फर्टिलाइजर के साथ रोड, रेल और एयर नेटवर्क भी बहुत अच्छा है।
यहाँ पास में ही दाहेज में एक बहुत बड़े पेट्रोकेमिकल काम्प्लेक्स का निर्माण हो रहा है जहाँ का स्पेशल एकोनामिक जोन, विश्व के सबसे बड़े 50 इकोनामिक जोन में है।
• टेरर हिस्ट्री- बड़ौदा देश के उन गिने चुने बड़े शहरों में है जहाँ अभी तक टेरर अटैक नहीं हुआ है, जबकि बगल में अहमदाबाद और सूरत में ये हमले हो चुके हैं। इसका एक बहुत बड़ा कारण शायद पुलिस का जानकारी नेटवर्क और यहाँ के लोगों को माना जा सकता है।
• पासिबिल टार्गेट- ये कहना मुश्किल है की क्या टार्गेट होगा, जैसा की बनारस में है। लेकिन ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि क्या टार्गेट नहीं होगा। ह्युमन पापुलेशन सेंटर के टार्गेट होने की संभावना दो कारणों से कम है, एक तो वहां का पैंटर्न और दूसरी सबसे बड़ी बात की गुजरात में होली एक इतना इम्पोर्टेंट फेस्टिवल नहीं है। वहां सबसे ज्यादा भीड़ गरबा के समय में होती है तो अगर ह्यूमन टार्गेट होते तो अटैक का टाइम वही रखा जाता ना की ये समय।
• वेपन ऑफ अटैक- ये जानकारी है कि एक नई और अलग किस्म के बम का शायद इस्तेमाल होगा। इसके बनाने में हुजी के बाम्ब मेकर का हाथ होने का पूरा चांस है।
बनारस में जो आदमी पकड़ा गया है हालांकि उसने बोला है की उसने एक काठमांडू का एयर टिकट देखा था लेकिन वो एक डिकाय हो सकता है। पुलिस ने बाबतपुर एयरपोर्ट से जो सी॰सी॰टीवी फूटेज देखे हैं उनसे भी यही लगता है। बनारस से बड़ौदा के लिए सावर्मती एक्सप्रेस एक सीधी ट्रेन है। हो सकता है कि उसने इस ट्रेन का इस्तेमाल किया हो क्योंकि भीड़ में ट्रेन में चेक करना मुश्किल रहता है।
• स्लीपर- बड़ौदा में जो मेन कान्टैक्ट प्वाइंट या स्लीपर है उसकी सिर्फ लोकेशन मालूम है जहाँ से उसने सेट फोन से कंट्रोलर से बात किया। ये लोकेशन शहर के एकदम बाहरी हिस्से में, उत्तर-पश्चिम की ओर आनंद की ओर है, लेकिन माही नदी के पहले है। स्लीपर के जो फोन ट्रैक हो पायें है उनके अनुसार वो दो से तीन किलोमीटर रेंज में से ही बात करता है।
• वर्क फार अस- हमें जल्द से जल्द अटैक के डिटेल्स, मेथोदोलोअजी, वेपन्स के बारे में पता करना होगा।
मुम्बई, इकोनोमिक असेसमेंट
यहाँ के बारे में डिटेल्स अभी बड़ौदा से भी थोड़ी कम हैं।
सिर्फ ये पता चला है कि अटैक 31 को होगा और ये अब तक के हमले से अलग होगा।
इसके पहले भी मुंबई में कोई पैटर्न रिपीट नहीं हुआ। मुंबई ब्लास्ट, ट्रेन और 26 नवंबर एकदम अलग-अलग थे; ये उन सबसे अलग होगा। अभी तक जो काल्स ट्रेस हुए हैं वो ज्यादातर, मुम्बई सेन्ट्रल या नागपाड़ा के इलाके से या साउथ बाम्बे के हैं। ये भी आशंका है की हमले में समुद्र का इश्तेमाल हो। हमें जल्दी से जल्दी उन लोगों को ट्रेस करना होगा। सिर्फ एक बात का ये अंदाजा लग रहा था कि ये अटैक अब तक के हुए सारे हमलों में भीषणतम होगा।
दूसरी बात ये थी की चूँकि उसके पहले दो हमले हो चुके होंगे, उन्हें इस बात का अहस्सास होगा की पुलिस की एलर्ट पीक पर होगी और अगर उस समय भी वो कुछ बड़ा कर गुजरने में कामयाब हो गए तो एक जबर्दस्त क्राइसिस आफ कान्फिडेंस होगी। 26 नवंबर के बाद सारे वलनरेबल जगहों पे सी॰सी॰टीवी लग गए हैं इसलिए लैंड बेस्ड अटैक होने के चांसेज कम लग रहे हैं, फिर भी हमें मुम्बई पुलिस को वार्न करना होगा की अलग-अलग एरिया के सी॰सी॰टीवी और उनके फूटेज को अभी से 24 घंटे चेक करें। वहां के फोन की एनलिसिस और लोकेशन शाम तक क्लियर हो जायेंगे, लेकिन ज्यादातर सोर्सेज, साउथ बाम्बे, सेन्ट्रल बाम्बे, खास तौर से नागपाड़ा, कालबा देवी इलाके के और कुछ इस्टर्न सबर्ब्स के हैं।
मैंने रिपोर्ट यहीं पे ब्रेक की। जब तक और ज्यादा हार्ड फैक्ट्स नहीं मिल जाएँ, तब और कुछ जोड़ना बेकार था। लेकिन इतना भी आई॰बी॰ और उन स्टेट्स को अलर्ट करने के लिए काफी था।