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Erotica फागुन के दिन चार

komaalrani

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फागुन के दिन चार

भाग ५० रिपोर्ट पृष्ठ ४८८

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फागुन के दिन चार

भाग ५० रिपोर्ट

६,७०,९५४

मैंने डीबी को फोन लगाया और रिपोर्ट बनानी शुरू कर दी। हाँ जाली नोटों का रिपोर्ट में नहीं लिखा क्योंकि उसमे आधे से ज्यादा तो मेरा कयास था।

पर डीबी से दो बातें हो गयीं एक तो मैंने जिन कैश ट्रक्स से एटीम कैसेट स्वैप हुए थे उनके डिटेल दे दिए और उन्होंने बोला की उनके ड्राइवर और सिक्योरिटी स्टाफ की पूरी कुंडली का वो पता लगा लेंगे, और दूसरे जो लोग पैसो का काला सफ़ेद करते हों, मनी लांड्रिंग के धंधे में हों उनके ऊपर निगरानी से कुछ पता लगाने की कोशिश करें।

मैंने रीत ने जो शहरों के बारे में हिंट दिया था और डेट्स के बारे में। मगज अस्त्र का उसके लिए प्रयोग किया गया। मार्लो और स्मिथ दोनों की कुछ और जानकारी आ गई थी, उसे जोड़कर रिपोर्ट बनाने लगा।

बस दो बातें मैंने तय की अभी जाली नोटों के बारे में जबतक सब कुछ पक्का न हो जाए रिपोर्ट में नहीं डालूंगा लेकिन डीबी को अलग से बता के लोकल आपरेशन करेंगे। अगर इतना बड़ा जाली नोटों और हवाला का अंदाजा लग गया तो ये ऑपरेशन रीत के हाथ से निकल जाएगा।

और अगर दुष्टों को कोई रोक सकता है तो वो रीत ही है।

दूसरी बात
BoBBs भी कोड था यानी तीन शहर एयर ओल्ड लगा था मतलब उनके पुराने नाम यानि बनारस बड़ोदा और बंबई तीनो जगह बम बम तो मुझे रिपोर्ट में बनारस के साथ बड़ौदा और बंबई का भी जिक्र करना पड़ेगा हालांकि उसके बारे कम इन्फो है लेकिन मैंने अपने लैपी में अलग अलग फोल्डर उन शहरों के बारे में जो इन्फो थी इकठ्ठा कर ली थी।

टाइम जयादा नहीं था , मैंने सामने घड़ी पर निगाह डाली



किचेन गुड्डी के हवाले था तो आज वो वहीँ धंसी पड़ी थी और शीला भाभी एकदम उससे चिपकी और मंजू सहायक भूमिका में ,



मैंने रिपोर्ट बनानी शुरू कर दी।

नेम आफ आपरेशन- “आपरेशन त्राइडेंट…” नाम जो एनेमी ने दिया है।



इम्प्लिकेशन-- इसके तीन सम्भावित असर हैं, जो सब टेक्स्ट से जाहिर है। सब टेक्स्ट एक स्टोरी है बूब्ब्स ओन फायर



• शहर हैं, बनारस, बड़ौदा और बाम्बे। बनारस कन्फर्म है। बाकी दोनों शहरों में या उनके आसपास संभावित हमला होगा। बूब्ब्स में तीन “बी…” का प्रयोग किया गया है।

• हर हमले में तीन तरह का असर होगा। इमीडियेट, शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म। तीनों ही अब तक हुए किसी भी आतंकी हमले से ज्यादा घातक होंगे।

• तीनों जगहों पर हमले का आग से संबंध है। बनारस में ये स्पष्ट है। लेकिन बाकी दो के बारे में अभी लिंक करना होगा।



थ्रेट परसेप्शन



• इस हमले का असर अगर हम मुम्बई में हुए 26 नवंबर के हमले के असर को एक्स माने तो 3 से लेकर 8 एक्स तक होगा।


• लास ऑफ लाइफ बनारस के हमले में ही 175 से 225 तक संभावित है। बाकी जगहों के थ्रेट इससे कम नहीं होंगे।

• मुंबई हमले में साइकोलाजिकल एडवांटेज ज्यादा इसलिए मिला कि वो अटैक तीन दिन तक चला। इस बार तीन शहरों पे एक-एक दिन के गैप से एक बड़ी आतंक वादी गतिविधि होगी। तो मिडिया का अटेंशन जैसे ही तीसरे दिन कम होना शुरू होगा। अगला अटैक प्लान है। इस प्रकार लगातार करीब एक हफ्ते तक मिडिया कवरेज उन्हें मिलेगा। पब्लिसिटी टेरर की सबसे बड़ी ऑक्सीजन है और इसमें मीडिया मैनेजमेंट और डैमेज कंट्रोल भी मुश्किल होगा।

• मुम्बई हमले में सबसे स्ट्रांग विजुअल ताज होटल में लगी आग का था। इन तीनों हमलों में आग का इस्तेमाल करने की योजना लग रही है। बनारस की प्लानिंग बहुत कुछ स्पष्ट है। बाकी को वर्कआउट करना होगा।



मोडस अपरेंडी

• इसमें 26 नवंबर से अलग, स्लीपर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। जैसा मुंबई बाम्ब ब्लास्ट में हुआ था कि एक्चुअल ऑपरेशन के कुछ पहले ही वो देश छोड़कर भाग गए थे। उसी तरह की योजना इस बार भी लग रही है। लेकिन 26 नवंबर की तरह सीमा पार से नियमित संपर्क है।

• ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए लोकल क्रिमिनल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। वो भी जो छोटे किस्म के हैं। और उनको हुजी के आपरेटर्स सपोर्ट कर रहे हैं।

• इसमें आपरेशन के बाद अगर कोई पकड़ा भी जाएगा तो वो लोकल क्रिमिनल्स ही होंगे इसलिए अन लाइक 26 नवंबर हमारे लिए क्रास बार्डर फिंगर प्रिंट्स ढूँढ़ना बहुत मुश्किल होगा।

• बाम्ब बनाने में हुजी के एक्सपर्ट्स का हाथ तो है, लेकिन वो पहले ही आकर जा चुका है। फाइनल असेम्बली लोकली ट्रेंड लोगों के पास है। ये ऑपरेशन सेल पैर्टन पे है। इसलिए एक सेल को नहीं मालूम है कि दूसरा सेल क्या कर रहा है। इसके साथ लाजिस्टिक सपोर्ट और फाइनेंस सपोर्ट अलग-अलग विंग्स के जरिये हैं जिनके बारे में स्लीपर को भी पता नहीं है। उसी तरह कंट्रोलर को फील्ड की डिटेल्स नहीं मालूम हैं।
 
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बनारस



बनारस के बारे में काफी डिटेल्स पता चल गए हैं।



टार्गेट-



पहला टार्गेट होलिका दहन होगा। होलिका दहन के समय उसके आसपास काफी बड़ी भीड़ रहती है और बड़ी होलिका में 200-300 लोग आसपास रहते हैं। ये असेसमेंट है कि कम से कम 7-8 होलिका को टार्गेट किया जाएगा। इस बार होलिका जलाने का समय रात में 8:20 है, इसलिए ये हमला टाइमर के जरिये बाम्ब को एक्सप्लोड करके होगा। इसके अलावा इसमें थर्मल डिवाइसेज भी हैं, तो अगर किसी भी तरह टाइमर फेल हुआ। (जैसा सूरत में बाम्ब अटैक में हुआ था) तो होलिका दहन की गरमी से ये बम explode हो जाएंगे। होलिका में तरह-तरह की सामग्री पड़ी रहती है। इसलिए होलिका दहन के काफी पहले कोई आदमी होलिका में इसे डालकर छुपा सकता है। हालांकि चूँकि टाइमर 24 घंटे का ही होगा, इसलिए वो होलिका दहन के 24 घंटे के अंदर ही होगा।



दूसरा संभावित टार्गेट घाट पर आरती है। इस बार होलिका दहन का समय। और घाट पर आरती का समय को इनसाइड कर रहा है। घाट पर हमला दो तरह से या दोनों तरह से साथ-साथ हो सकता है।

एक हमला बोट पे बाम्ब के के जरिये हो सकता है। रेकी के फोटोग्राफ्स से ये साफ जाहिर है।

दूसरा तरीका नदी से इस साइड से फायरिंग भी हो सकती है। जिसमें ए के 47 या स्नाइपर फायरिंग हो सकता है। कम से कम दो घाटों, दशाश्वमेध और अस्सी पे ये हमला हो सकता है। इनकी संख्या ज्यादा भी हो सकती है। घाट पर आरती के समय नदी के हमले का प्रभाव घातक होगा। हताहतों के अलावा, वहां पर अक्सर विदेशी पर्यटक भी होते हैं और उनके भी आहत होने की संभावना है। दूसरे उसका मीडिया का कवरेज भी होता है, इसलिए साइकोलाजिकल असर भी ज्यादा पड़ेगा।



शार्ट टर्म टार्गेट- बनारस में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति है। ये घटना दंगे के लिए ट्रिगर की तरह काम करेगी। दंगे के साथ ही उसकी खबर और पिक्चर तथा रियेक्सन की फोटुयें और साथ ही उसको सोशल नेटवर्किंग साइट्स पे डालने की तैयारियां हैं। साथ ही ब्लॉग भी हैं।



दंगे का असर आसपास के जिलों में भी पड़ेगा। पूरीसावधानी लेने पर भी काफी नुकसान होने का डर है। दूसरी बात, इसका असर अन्य राज्यों पर भी पड़ेगा और दंगे की विभीषिका बहुत भयानक होगी। इसका राजनीतिक असर भी पड़ेगा।



लांग टर्म टार्गेट- इसकी टाइमिंग इस तरह है की इससे अगर दंगे हुए तो एक मिस ट्रस्ट पैदा होगा और जो आलमी तबलीग (ग्लोबल कांफ्रेंस) होने वाली है उसकी आवाज बहुत तल्ख़ हो जायेगी।



दूसरा, इसके ग्लोबल रिपर्कशन होंगे। जो मेल-जोल की, समझौते की ताकतें हैं, वो कमजोर होंगी और हार्ड लाइनर्स को बढ़ावा मिलेगा। इससे उबरने में बहुत वक्त लगेगा।



मेन आपरेटिव- बनारस में मेन आपरेटर का नाम हमने जेड दिया है। यह एक बहुत पुराना “स्लीपर” है। इसके फिंगरप्रिंट्स और आइडेंटिटी किट से बने फोटो की ट्रेस किसी भी डेटाबेस में नहीं है। यह एक कम्युनिकेशन और स्पाई तकनीक में ट्रेंड ऑपरेटर है। कंट्रोलर के साथ कॉन्टैक्ट रखने के साथ यहाँ के सारे ऑपरेशन की जिम्मेदारी इसके ऊपर है। यहाँ तक की पूरे ओपरेशन का सब टेक्स्ट और कोड स्टोरी उसी ने “बूब्ब्स ओँ फायर…” बनारस से ही पोस्ट की है। इसका नाम मुन्ना बाबू होने की संभावना है। बाकी दोनों शहरों के अलावा, नेपाल और हैदराबाद से भी ये टच में है।



पाजिटिव बात ये है की हमने इसके पूरे कमुनिकेशन नेटवर्क, सेट फोन को ब्रेक कर लियाहै और बात के टेक्स्ट को भी डी साईफर किया जा रहा है। इसने जिस आपरेटर को शुरू में प्लान किया था, वो पुलिस की गिरफ्त में है। लेकिन हुजी के चार आपरेटिव आज शाम तक बनारस पहुँच रहे है और आशंका है की उनका इश्तेमाल इस आपरेशन के लिए किया जाएगा। लेकिन उन चारों के फोटोग्राफ पुलिस के पास हैं और उनकी जांच की जा रही है।



वेपन्स आफ आपरेशन- जिस बाम्ब को इश्तेमाल किया जाएगा, उसकी ड्राइंग हमारे पास है। ये अब तक के किसी भी टेरर अटैक में इस्तेमाल होने वाले बम से ज्यादा खतरनाक हैं। जो आदमी पुलिस की पकड़ में है उसने ये बताया है की उसे डिटोनेटर, टाइमर और शार्पनेल लगाने की ट्रेनिंग दी गई थी लेकिन उसे जो बाम्ब दिया गया था उसमें से ये तीनों चीजें निकाल ली गई थी।



लगभग 14-15 बाम्ब की उसने सूचना दी है। ये हो सकता है कि डिटोनेटर टाइमर जेड के पास हों और बाकी हाल्फ रेडी बाम्ब कहीं और छुपाये गए हों। जब हुजी के आपरेटिव आयेंगे तो अटैक के 12-14 घंटे पहले उन्हें दोनों चीजें दी जायेंगी। बाम्ब की असेंबली का काम शायद हुजी के मशहूर बाम्ब मेकर ने किया। हमारे कब्जे में आए आदमी को उसी ने डिटोनेटर और टाइमर लगाने के लिए ट्रेन किया था। हमारी जानकारी के हिसाब से यहाँ से वो फ्लाइट से नेपाल गया है, लेकिन ये डी-कॉय हो सकता है। इसके अलावा एके-47 और स्नाइपर गन्स भी इस्तेमाल में लाई जा सकती हैं।
 
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रिपोर्ट बनारस - आर॰डी॰एक्स॰-


र॰डी॰एक्स॰-
अब यह कन्फर्म हो गया है कि इस ऑपरेशन के लिए आर॰डी॰एक्स॰ नेपाल बॉर्डर से आया है। यह एक गार्बेज ट्रक से आया है, जिससे उसकी रास्ते में चेकिंग ना हो और ना ही स्निफिंग से वो पता चले। वह गार्बेज ट्रक एक खड्डे में गिरा मिला है और टेस्ट से उसके अंदर आर॰डी॰एक्स॰ की पुष्टि हो गई है। यह भी पता चला है की गोरखपुर के एक माफिया से ऐ के 47 और स्नाइपर बन्दूक ली गई थी जो इस गार्बेज ट्रक से ही आई।

ट्रक के ड्राइवर की पहचान हो गई और उनसे पूछताछ की जा रही है। उन्होंने ये बताया है कि उन्हें ये बोला गया था कि अंधरा पुल के पास उसे छोड़कर चले जाएँ। लेकिन उसमें से एक आदमी एक चाय की दुकान पर रुक गया था। उसने दो आदमी को देखा जो ट्रक ले गए। एक की शक्ल उस बम मेकर से मिलती है और दूसरा एक लोकल क्रिमिनल है। जिसे पोलिस ने ट्रैक कर लिया है।

कम्युनिकेशन- जेड दो मोबाइल नंबरों का इश्तेमाल एक बोट से फिक्स्ड टाइम पे कमुनिकेट करने के लिए करता है। उसी के साथ वह वन टाइम फोन और अपने कंट्रोलर्स से बात करने के लिए थुर्य सेट फोन का इस्तेमाल करता है। वो सारे नंबर जिनसे उसने बोट से बात की है, सेट फोन सहित, लोकेशन के साथ ट्रैक हो गए हैं।

इसके साथ ही जिस दिन उसका पोटेंशियल आपरेटिव पकड़ा गया, उस दिन से पुलिस के और कुछ और इम्पोर्टेंट नंबर ट्रैक किये जाने शुरू हो गए है। ये ट्रेकिंग दो सरवर्स हो रही है, एक की लोकेशन मुंबई के पास है और दूसरा एक्रास बॉर्डर है।



अदर इश्यू- अन्य दोनों हमलों का असर इकोनॉमी पे भी पड़ने की संभावना है। अभी इकोनामी को ग्रोथ रेट कम है और डालर के मुकाबले रूपये की भी हालत खराब है। किसी भी ऐसी घटना से जिससे इकोनामी में विश्वास कम होगा। फारेन कैपिटल बजाय आने के और बाहर जाएगी। जिसका असर डालर के रेट पर पड़ेगा और हमारा इम्पोर्ट बिल बढ़ेगा।

सबसे ज्यादा इम्पोर्ट का खर्चा तेल और डिफेंस पे है। तेल का भी बहुत भाग ट्रांसपोर्ट और डिफेंस में खर्च होता है। इससे वो दोनों गतिविधियां प्रभावित होंगी।



• वर्क टू बी डन- सबसे पहले हमें बाम्ब्स और टाइमर्स को ट्रेस करना होगा। एक बार आपरेटर्स और जेड के ट्रेस होने पे इन्हें ट्रेस किया जा सकेगा। दूसरी बात यहाँ के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का पूरा पता लगाना होगा। साथ ही बड़ौदा और मुंबई में यहाँ के लिंक्स से पता करना होगा। हमारी वीकनेस ये है की पुलिस में भी कुछ मोल होने के चांस हैं और टाइम बहुत कम है, इसलिए हमने एक 6-8 लोगों का एक टेम्पोरेरी ग्रुप भी बनाया है। इसके अलावा हमें वर्स्ट केस सिनेरियो पे भी काम करना होगा।



• हेल्प- हमें आई॰बी॰ के लोगों की और बाकी स्टेट्स से हेल्प की जरूरत पड़ेगी। आर्मी को भी एडवांस में अलर्ट रखना होगा। नदी से अटैक होने की आशंका के चलते नेवल कमान्डोस को भी रखना होगा। और ये सारी बातें एकदम नीड टू नो बेसिस पे होंगी।



इतनी रिपोर्ट टाइप करके मैंने गहरी सांस ली और अंगड़ाई ली।
 
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शीला भाभी



डी॰बी॰ के बताए गए टार्गेट में अभी 20 मिनट बाकी थे। तभी भाभी अंदर आई और सीधे मेरे कंप्यूटर पे। (वह पहले भी कई बार मुझे कंप्यूटर पे ब्ल्यू फिल्म देखते पकड़ चुकी थी)



“आफिस का काम कर रहे हो…” उन्होंने गहरी सांस लेकर पूछा और मेरे पास बैठ गईं।



“हाँ थोड़ा सा…” मैंने बोला और एक नया पेज रिपोर्ट में खोला।

“तुम ना। मैं देख रही हूँ सुबह से, इसी से चिपके हो। अरे, मैंने तुम्हें बनारस से गुड्डी को साथ लाने को बोला था। तो मैंने सोचा था कि कुछ उसका मन लगा रहेगा। कुछ। और वो सुबह से या तो काम में लगी हुई है या शीला भाभी उसके पीछे पड़ी हुई है। थोड़ा उसके साथ टाइम पास करो। लेकिन तुम तो छुट्टी पे आये हो ना…” उन्होंने सीरियस होकर पूछा।


कुछ बात टालने की गरज से, कुछ उत्सुकता वश मैंने पूछा- “भाभी ये शीला भाभी का क्या चक्कर है। ये आई किस लिए हैं…”

“अरे यार। भाभी मुश्कुरायीं थोड़े अपने फार्म में आई, बोली- “इनकी शादी के 5-6 साल हो गए हैं कोई बच्चा नहीं हुआ। तो किसी ने इनसे कहा था कि यहाँ एक साधू हैं, वो गंडा बांधते हैं, भभूत देते हैं। तो कल उनसे मिलकर वो काम तो उन्होंने कर लिया। मैंने ही कहा कि अब दो-तीन दिन होली रह गई है, यहीं रुक जाइए। तो मान गईं…”


“लेकिन इतने दिन शादी के हुए तो। इनके पति। और डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाया…” मैंने बोला।


भाभी खिलखिलाने लगी, फिर हल्के से बोली- “सब ठीक है डाक्टर ने बोला है। लेकिन तुम्हीं क्यों नहीं कुछ कर देते अपना भभूत दे दो ना। इधर-उधर नाली में बहाते होगे…”

फिर उन्होंने ने राज खोला- “उनके पति बालक प्रिय हैं। और वो भी बाटम (पैसिव), भाभी ने मेरी संगत में ये सब शब्द सीख लिए थे। और थोड़ा होता भी नहीं उनसे। और नतीजा ये हो गया कि ये भी थोड़ा कन्याप्रेमी हो गई। कुछ तो शादी के पहले से ही थी और अब ज्यादा…”

अब मेरी समझ में आया की ओ गुड्डी के पीछे क्यों पड़ी थी और गुड्डी उनसे क्यों बच रही थी और मेरी ओर भी जिस तरह से वो देख रही थी।



“दे दो न बिचारी को वीर्य दान…” भाभी हँसकर बोली।

“धत्…” मैं शर्माया।

“अरे इसमें शर्माने की क्या बात है। वो भी बचपन की खिलाड़ी हैं तुम्हारी भी अच्छी ट्रेनिंग हो जायेगी मजा मिलेगा। और बिचारी का काम हो जाएगा…” भाभी ने मेरे गाल पे कसकर चिकोटी काटी और जाते-जाते बोली- “जल्दी आओ गरम गरम गुझिया निकल रही है…” और चली गईं।

बचपन से मुझे होली में कड़ाही के पास बैठने का शौक था और भाभी के आने के बाद तो और भी। मैंने बगल में बैठकर कभी चूल्हे की रोशनी में उनके गोरे गुलाबी दमकते चेहरे को और कभी कड़ाही में छनन छनन होती गुझिया और हर लाट जो निकलता उसमें से एक भाभी के हाथ से मेरे मुँह में। कभी मैं भाभी को स्कूल की गप्प सुनाता कभी उनके छोटे मोटे काम करता।



लेकिन आज ये रिपोर्ट। इसके साथ मुझे सपोर्टिंग डाकुमेंट्स भी अनेक्स करने होंगे।
 
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स्मिथ



स्मिथ का तब तक मेसेज आया।

मुम्बई के फोन काल्स में अरेबिया और बगदाद का जिक्र बार-बार आया था। और जानकारी मिली बड़ौदा और मुंबई के बारे में। एक तो जो मार्लो ने मेरे फोन को ट्रेस करने वाले कूकीस को पिगी बैक करके उनके सर्वर में घुसने में सफलता हासिल की थी अब उसके रिजल्ट और मिल गए थे।



डेट और लोकेशन तथा परपज भी थोड़ा और स्पेसिफिक हो गया था। ये पता चला था की अन लाइक बनारस, जहां ह्युमन और कम्युनल और सोशल फेब्रिक पे अटैक था, इन दोनों जगहों पे उसका असर इकोनोमिक डेवलपमेंट से जुडा हुआ था। तभी मुझे याद आया कि मैंने इसी बात को सोचकर दो लोगों को और मेसेज किया था। एक तो सी॰एम॰आई॰ई॰ (सेंटर फार मानिटरिंग इन्डियन इकोनामी) का 12 साल तक एडिटर था और दूसरा क्रिसिल से जुड़ा हुआ था।



मेरा शक ये था कि मुझे सबसे पहले इकोनामिक वूलनेबिलिटीज़ जाननी चाहिए।



ये बात मुझे कार्लोस ने सिखाई थी। सबसे इम्पोर्टेंट चीज हैक करना है तो वो है दुश्मन का दिमाग, उसके सोचने का तरीका। और मैं उसी के तरीके से सोच रहा था। 26 नवंबर के बाद से इंटरनल सिक्योरिटी खास तौर पे मुम्बई और बड़ौदा जैसे शहरों में। तो अपने सबसे महत्वपूर्ण रिसोर्सेज का इश्तेमाल वो तभी करेगा और उस तरह करेगा, जिससे उसका अधिकतम फायदा हो। तो इसके लिए वह हमारे सबसे कमजोर पाइंट ढूँढ़ेगा और उसी पर हमला करेगा।



इसलिए वो जो टार्गेट चुनेगा उसमें इसका अहम रोल होगा और इसिलए दो ऐसे लोगों को जो जानते हैं की वो क्या कह रहे हैं। उनसे रिक्वेस्ट किया था की वो इकोनामिक वल्नरेबिलिटि के बारे में जो ताजा स्थिति है और अगले 5-6 महीनों तक जिसका असर होगा वो बताएं।

वह रिपोर्ट क्लाउड सर्वर पर उन लोगों ने पोस्ट कर दी थी।



फिर मैंने भुवन को लिंक किया।

भुवन, आई॰एस॰आर॰ओ॰ का बनाया पोर्टल है। मेरा पास इसका वो लिंक था जो सिकुरिटी फोर्सेज के लिए क्लियार्ड है। मैं इसको सीधे नेशनल रिमोट सेंसिंग एजेंसी के सर्वर के जरिये लिंक कर लेता था और इसमें मात्र 10 मीटर की ऊपर की उंचाई का क्लियर व्यू मिल जाता था। बड़ौदा और मुम्बई से जो सेटलाइट काल की लोकेशंस मिली थीं, उन्हें मैंने इस मैप में अडजस्ट किया। मेरी नजर घड़ी पे पड़ी, ओपस। बस 20 मिनट रह गए थे डेडलाइन के।

मैंने रिपोर्ट लिखनी शुरू की। यह मेन रिपोर्ट के एनक्लोजर की तरह थी। बड़ौदा और मुम्बई के बारे में जानकारी बहुत कम थी लेकिन जो भी थी रिपोर्ट में मैंने डाल दी। वैसे भी आई॰बी॰ और वहां की लोकल पोलिस उसे असेस करेगी ही।
 
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बड़ौदा==मुम्बई,



• डेट- हमारी जानकारी के हिसाब से अटैक की डेट, 29 मार्च यानी होली के अगले दिन और बनारस के हमले के दो दिन बाद होगी। इसका समय, जो कि मेरा अपना विश्लेषण है, लेट इवनिंग यानी शाम साढ़े सात से साढ़े 10 बजे के अंदर ही होगा। इसके तीन कारण लग रहे हैं: पहला, इस हमले का सब टेक्स्ट बुब्ब्स आन फायर है। आग की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी।



जैसा की मैंने पहले भी कहा था की पब्लिसिटी खास तौर से इलेक्ट्रानिक मिडिया की और विजुअल पब्लिसिटी, टेरर के लिए आक्सीजन का काम करता है। इसलिए आग के लिए रात का ही बैकड्राप, उसकी भयावहता को दिखाने के लिए वो चुनेंगे।



दूसरा कारण, टेरर की अगर हम हिस्ट्री देखें तो अभी लेटेस्ट पूने में हुआ हमला रात में आठ साढ़े आठ के बीच हुआ था। मुम्बई में झावेरी बाजार और दादर का बाम्ब अटैक, दिल्ली में कनाटप्लेस में अटैक। और 26 नवंबर। रात में साढ़े 9 के आसपास शुरू हुआ था। इसका एक कारण लोगों की भीड़ तो है ही, टीवी का प्राईम टाइम भी है।



टेरर मारने से ज्यादा डर फैलाने में यकीन रखता है। अगर रात में कोई अटैक होगा भी तो इसका असर कम होगा और दूसरे रात में पब्लिसिटी भी लिस्ट होगी।



तीसरी बात, सिक्योरिटी अटेंशन भी उस समय थोड़ा स्लैक रहता है। रात यानी मिड नाईट के बाद सिक्योरिटी बहुत स्ट्रिक्ट रहती है।



• इकोनामिक असेसमेंट- रिपोर्ट्स के मुताबिक इन दोनों शहरों (मुम्बई और बड़ौदा) पे अटैक का मेन परपज, इकोनामिक टारगेट हो सकते हैं। पूरे भारत में सबसे ज्यादा इकोनॉमिक इन्वेस्टमेंट साउथ गुजरात में हो रहा है। बड़ौदा से लेकर अंकलेश्वर, हजीरा, सूरत और वापी एक बहुत बड़ा इन्वेस्टमेंट हब बनकर उभरा है।



बड़ौदा खुद एक ट्रांसपोर्ट हब है जिसके अगल-बगल, ट्रांसपोर्ट से जुड़े मल्टी नशनल इंडस्ट्री हैं, जैसे जनरल मोटर्स, बाम्बर्दियर, (जो डेल्ही मेट्रो और बाकी मेट्रोस के लिए कोचेज बनाती है), सीमेंस, अल्काटेल, ए बी बी और भी अनेक मल्टी नशनल कम्पनी। पेट्रोकेमिकल, फारमा, फर्टिलाइजर के साथ रोड, रेल और एयर नेटवर्क भी बहुत अच्छा है।



यहाँ पास में ही दाहेज में एक बहुत बड़े पेट्रोकेमिकल काम्प्लेक्स का निर्माण हो रहा है जहाँ का स्पेशल एकोनामिक जोन, विश्व के सबसे बड़े 50 इकोनामिक जोन में है।



• टेरर हिस्ट्री- बड़ौदा देश के उन गिने चुने बड़े शहरों में है जहाँ अभी तक टेरर अटैक नहीं हुआ है, जबकि बगल में अहमदाबाद और सूरत में ये हमले हो चुके हैं। इसका एक बहुत बड़ा कारण शायद पुलिस का जानकारी नेटवर्क और यहाँ के लोगों को माना जा सकता है।



• पासिबिल टार्गेट- ये कहना मुश्किल है की क्या टार्गेट होगा, जैसा की बनारस में है। लेकिन ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि क्या टार्गेट नहीं होगा। ह्युमन पापुलेशन सेंटर के टार्गेट होने की संभावना दो कारणों से कम है, एक तो वहां का पैंटर्न और दूसरी सबसे बड़ी बात की गुजरात में होली एक इतना इम्पोर्टेंट फेस्टिवल नहीं है। वहां सबसे ज्यादा भीड़ गरबा के समय में होती है तो अगर ह्यूमन टार्गेट होते तो अटैक का टाइम वही रखा जाता ना की ये समय।



• वेपन ऑफ अटैक- ये जानकारी है कि एक नई और अलग किस्म के बम का शायद इस्तेमाल होगा। इसके बनाने में हुजी के बाम्ब मेकर का हाथ होने का पूरा चांस है।



बनारस में जो आदमी पकड़ा गया है हालांकि उसने बोला है की उसने एक काठमांडू का एयर टिकट देखा था लेकिन वो एक डिकाय हो सकता है। पुलिस ने बाबतपुर एयरपोर्ट से जो सी॰सी॰टीवी फूटेज देखे हैं उनसे भी यही लगता है। बनारस से बड़ौदा के लिए सावर्मती एक्सप्रेस एक सीधी ट्रेन है। हो सकता है कि उसने इस ट्रेन का इस्तेमाल किया हो क्योंकि भीड़ में ट्रेन में चेक करना मुश्किल रहता है।



• स्लीपर- बड़ौदा में जो मेन कान्टैक्ट प्वाइंट या स्लीपर है उसकी सिर्फ लोकेशन मालूम है जहाँ से उसने सेट फोन से कंट्रोलर से बात किया। ये लोकेशन शहर के एकदम बाहरी हिस्से में, उत्तर-पश्चिम की ओर आनंद की ओर है, लेकिन माही नदी के पहले है। स्लीपर के जो फोन ट्रैक हो पायें है उनके अनुसार वो दो से तीन किलोमीटर रेंज में से ही बात करता है।



• वर्क फार अस- हमें जल्द से जल्द अटैक के डिटेल्स, मेथोदोलोअजी, वेपन्स के बारे में पता करना होगा।

मुम्बई, इकोनोमिक असेसमेंट



यहाँ के बारे में डिटेल्स अभी बड़ौदा से भी थोड़ी कम हैं।



सिर्फ ये पता चला है कि अटैक 31 को होगा और ये अब तक के हमले से अलग होगा।



इसके पहले भी मुंबई में कोई पैटर्न रिपीट नहीं हुआ। मुंबई ब्लास्ट, ट्रेन और 26 नवंबर एकदम अलग-अलग थे; ये उन सबसे अलग होगा। अभी तक जो काल्स ट्रेस हुए हैं वो ज्यादातर, मुम्बई सेन्ट्रल या नागपाड़ा के इलाके से या साउथ बाम्बे के हैं। ये भी आशंका है की हमले में समुद्र का इश्तेमाल हो। हमें जल्दी से जल्दी उन लोगों को ट्रेस करना होगा। सिर्फ एक बात का ये अंदाजा लग रहा था कि ये अटैक अब तक के हुए सारे हमलों में भीषणतम होगा।



दूसरी बात ये थी की चूँकि उसके पहले दो हमले हो चुके होंगे, उन्हें इस बात का अहस्सास होगा की पुलिस की एलर्ट पीक पर होगी और अगर उस समय भी वो कुछ बड़ा कर गुजरने में कामयाब हो गए तो एक जबर्दस्त क्राइसिस आफ कान्फिडेंस होगी। 26 नवंबर के बाद सारे वलनरेबल जगहों पे सी॰सी॰टीवी लग गए हैं इसलिए लैंड बेस्ड अटैक होने के चांसेज कम लग रहे हैं, फिर भी हमें मुम्बई पुलिस को वार्न करना होगा की अलग-अलग एरिया के सी॰सी॰टीवी और उनके फूटेज को अभी से 24 घंटे चेक करें। वहां के फोन की एनलिसिस और लोकेशन शाम तक क्लियर हो जायेंगे, लेकिन ज्यादातर सोर्सेज, साउथ बाम्बे, सेन्ट्रल बाम्बे, खास तौर से नागपाड़ा, कालबा देवी इलाके के और कुछ इस्टर्न सबर्ब्स के हैं।



मैंने रिपोर्ट यहीं पे ब्रेक की। जब तक और ज्यादा हार्ड फैक्ट्स नहीं मिल जाएँ, तब और कुछ जोड़ना बेकार था। लेकिन इतना भी आई॰बी॰ और उन स्टेट्स को अलर्ट करने के लिए काफी था।
 
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Phagun ke din chaar started on 7th February 2024



kr


आदरणीय komaalrani जी,

आपकी लोकप्रिय रचना 'फागुन के दिन चार' की द्वितीय वर्षगांठ पर आपको अशेष शुभकामनाएं..!!

आपकी सृजन-यात्रा इसी प्रकार अनवरत और यशस्वी रहे, यही मंगलकामना है..!!
 

komaalrani

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आदरणीय komaalrani जी,

आपकी लोकप्रिय रचना 'फागुन के दिन चार' की द्वितीय वर्षगांठ पर आपको अशेष शुभकामनाएं..!!

आपकी सृजन-यात्रा इसी प्रकार अनवरत और यशस्वी रहे, यही मंगलकामना है..!!
बहुत आभार, चित्र बहुत ही अच्छा है। मेरी कई कहानियां आपके कमेंट्स से अनुप्राणित होती हैं आपका साथ, सहयोग हमेशा से मिलता रहता है।
Thanks Thank You GIF by @InvestInAccess


अनुरोध है की इस पचासवें अपडेट पर आप दो चार शब्द अपने सुझाव के जरूर दें।

एक बार फिर से आभार।

 

vakharia

Supreme
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बहुत आभार, चित्र बहुत ही अच्छा है। मेरी कई कहानियां आपके कमेंट्स से अनुप्राणित होती हैं आपका साथ, सहयोग हमेशा से मिलता रहता है।
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अनुरोध है की इस पचासवें अपडेट पर आप दो चार शब्द अपने सुझाव के जरूर दें।

एक बार फिर से आभार।
आपने ५०वें भाग पर मेरी राय मांगी है.. लेकिन मैं यह कहना चाहूँगा की अभी मेरा पूरा ध्यान आपकी दूसरी कालजयी रचना 'जोरू का गुलाम' पर ही केंद्रित रहा है.. दुर्भाग्यवश, 'फागुन के दिन चार' के साथ अभी मैं वह निरंतरता नहीं बना पाया हूँ की उस पर कमेन्ट कर सकूँ..

मुझे लगता है कि बिना पूरी कहानी और किरदारों को समझे, बीच में से किसी एक अपडेट पर कुछ भी कह देना आपकी बेहतरीन लेखनी के साथ नाइंसाफी होगी.. मैं इसे अधूरा या चलताऊ नहीं पढ़ना चाहता.. पर जल्द ही कोशिश करूंगा की इसे पढ़ पाऊँ
 
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