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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

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komaalrani

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छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

भाग ११४ हल्दी- बुच्ची और गप्पू पृष्ठ ११७८

अपडेट पोस्टेड, कृपया पढ़ें, आंनद लें, लाइक करें और कमेंट जरूर दें
 
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Chalakmanus

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मामी से जिन चुमवहिया,.
Teej-7ba078cf36e1c5558d64eba36d0bc79c.jpg


कांती बूआ आज सबसे आगे बैठीं थी, गाँव की औरतों की लड़कियों को जबरदस्त लीड कर रही थीं, सिल्क की सरकती हुयी साड़ी, जिसका आँचल जोबन पे टिकता नहीं था, मांग में भरभराता हुआ नाक तक लगाया सिन्दूर, छोटी सी नथ, कुछ पान से कुछ लिपस्टिक से रंगे भरे भरे होंठ, चम्पई रंग के खूब भरे काटने लायक गाल, गले में लम्बा मंगलसूत्र तो जो खूब लो कट ब्लाउज से छलकते दोनों जोबनो के बीच, दबा कुचला, और जोबन भी बस ऐसे की उनका मुकाबला, पूरे गाँव में सिर्फ उनकी भौजाई कर सकती थीं, सूरजु की माई, बड़की ठकुराईन, ३८ के जोबन तो ४० के बड़े बड़े चूतड़,

और गाना गाने में तो दस पांच गाँव में मुकाबला नहीं और गालियां तो ऐसी की मायके में उनकी भौजाइयां और ससुराल में उनकी ननदें, कान में ऊँगली डाल ले, और कान से ऊँगली निकलवा के सीधे कान में सुनाएँ, और अक्सर गाँव की गारियों में ननदो के ऊपर भौजाइयां अपने मरद को, देवर को, और अपने भाइयों को चढाती हैं। लेकिन कांती बूआ, तो अगली पीढ़ी तक, बाप और बेटे को भी नहीं छोड़ती थीं, और गदहा, घोडा, सांड सब कुछ,

खूब गरमाई थीं और उसका एक कारण और भी था, आज उनकी टीम में पूनम, चननिया ऐसी चार पांच गाँव की ब्याहता लड़कियां, सात आठ बहुएं, बुच्ची और लीला ऐसी कोरी कुँवारी आधी दर्जन से ज्यादा लड़कियां, और दूसरी ओर उनकी भौजी, सूरजु की माई के मायके वाली सब बैठीं थीं।



लेकिन सूरजु के ननिहाल वालियां भी कम जोश में नहीं थीं, उनके मायके से भी आज सुबह सुबह बहुत लोग आ गए थे,

मंझली मामी और मामा और उनकी दो बेटियां, बंबई से शीतल मौसी और उनकी बेटी और सूरजु की महतारी के मायके के और भी लोग आ गए थे। चुनिया, छोटी मामी, रामपुर वाली भाभी, मंजू भाभी और भी, सूरजु की माई की भौजाइयां पहले से ही थीं।

लेकिन आज मोर्चा सम्हाला था, मंझली मामी ने, और शीतल मौसी भले बियाहे के बाद बंबई चली गयी हों लेकिन गाँव के रीत रिवाज और गवनहि में कम नहीं थी। और सूरजु की महतारी क असल बहन झूठ।

असल में सरजू के न कोई सगे मामा, न मौसी और इसलिए सैकड़ो बीघा खेत, बाग़ बगीचा, ताल बड़ा सा घर, सब नवासे में मिला, बल्कि सूरजु के नाना ने सीधे सूरजु के नाम ही लिख दिया था।

पर गाँव के पट्टीदारी, रिश्तेदारी के मामा, मौसी की कमी नहीं थी, ननिहाल में और शीतल मौसी तो सूरजु की माई की चचेरी बहन, सटा हुआ घर, और सूरजु की माई से छह सात महीने बड़ी ही होंगी, मजाक करने में उनका अगर कोई मुकाबला करता था तो सूरजु की माई और अपनी इन दो नंदों पे भारी पढ़ती थीं, मंझली मामी और अब गाँव की बहुओ और लड़कियों के साथ सूरजु के ददिहाल वालों की आज वो ऐसी की तैसी कर रही थीं, गरियाये सूरजु ही जाते थे लेकिन ननिहाल वाले सूरजु की बूआ का नाम लेके, उनके गाँव की लड़कियों का नाम ले ले के और कांती बूआ, सूरजु की मामी, मौसी और ममेरी, मौसेरी बहनों को।

पहला झगड़ा होता था, ढोलक किस पार्टी के कब्जे में रहेगी और सूरजु के मायकेवालियों ने बाजी मार ली थी, कांती बूआ के नेतृत्व में और पूनम ढोलक टनका रही थी और कांती बूआ की तगड़ी आवाज, और शुरू में तो रस्म रिवाज के ही गाने, हाँ साथ सूरजु के ननिहाल वाली भी दे रही थीं




बगिया में मोरवा बोले, अंगना में कउवा हो

घर घर देइ द नउनिया जाय के बुलव्वा हो।

आज हमरे बन्ने के चढ़ेले हरदिया हो,

आज हमरे भैया के चढ़ेले हरदिया हो

( गाँव की लड़कियों की आवाज थी और सबसे तेज कपूनमिया और चननिया की )

आज हमरे देवर के चढ़ेले हरदिया हो

( अबकी गाँव की बहुओं की और सबसे टनकदार रामपुर वाली भौजी )

अंगना में बैठहु आय के मोरे सब सखिया हो

हरदी लगावहु गाय के मंगल गितिया हो




और जैसे ही बुच्ची, लीला के साथ दूल्हे आये चौके पे बैठने, उनकी आँख अहिराने की पूनम से मिली, बल्कि लड़ी आउटर बचपन की सब शरारतें, कैसे ग्वालिन भौजी चिढ़ाती थीं, दूध और मलाई का मजाक कर के और माई और कहारिन भी साथ में, सूरजु जोर से मुस्कराये और पूनमिया भी, आँचल तो पूरा ढलक गया, कसी कसी छोटी छोटी चोली में से झांकते उछलते कूदते जोबन दावत देते नजर आये और पूनम भी जोर से मुस्करायी और होंठ ऐसे मुड़े जैसे कस के बचपन के दोस्त का चुम्मा ले रही हो।

कांती बूआ समझ गयी थीं की बुच्ची और लीला पे सूरजु के मायके वालों की निगाह है और उन दोनों की रगड़ाई सबसे ज्यादा होगी तो इशारे से उन्होंने उन दोनों को बुला लिया और बुच्ची और लीला गाँव की लड़कियों और भौजाइयों के झुण्ड में खो गयीं। पर पूनमिया खुल के दूल्हे से नैन मटक्का कर रही थी और उसे एक बात का फर्क भी नहीं पड़ रहा था की चार आँखों का ये खेल सब देख रहे हैं .

चुमावन को सबसे पहले मंझली मामी उठीं, अक्सर पहले भौजाई और बड़ी औरतों का नंबर लगता है लेकिन वो तो सूरजु क माई क भाभी थीं, तो उनका नंबर पहले लगना ही था। और मंझली मामी जीतनी सुन्दर थी, उतनी ही हर तरह से छिनार भी, हर तरह से छिनार मतलब बोल बात में, चाल ढाल में, मर्दो को छोड़िये लौंडों को देख के उनका आँचल जोबन पर नहीं टिकता था, दुजरि मीनिंग वाली बात और मुस्कान और आँख के इशारे, तो उठते ही उन्होंने क्या चूतड़ मटकाया, कैसे मुस्करायीं, और चुमावन के लिए आगे बढ़ी,

पर इधर पूनम तैयार थीं और ऊपर से कांती बूआ, मुस्करायी, और पूनम को इशारा किया, चल चालु हो जा, आखिर उन्ही भाभी की भाभी और गानों का लेवल बदल गया,




" मामी से जिन चुमावे दिया हो माई, अरे मामी से जिन चुमावे दिया हो माई

अरे मामी मामा से छुवायल बाड़ीं हो माई ,

अरे मामी चन्नर चच्चा से छुवायल बाड़ीं हो माई अरे सूरजु भैया के मंझली मामी


अब तो सूरजु के गाँव की सब लड़कियां लहरा लहरा के और कांती बूआ के इशारे पे गाने लगीं,



चन्नर चाचा से चुदवायल बाड़ीं हो माई, हमरे फूफा से जोबना दबवावे हो माई

" मामी से जिन चुमावे दिया हो माई, अरे मामी से जिन चुमावे दिया हो माई
Ye update bhi khatam..

Lagta hai aap likhti rahe hum padhte rahe
 
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मामी से जिन चुमवहिया,.
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कांती बूआ आज सबसे आगे बैठीं थी, गाँव की औरतों की लड़कियों को जबरदस्त लीड कर रही थीं, सिल्क की सरकती हुयी साड़ी, जिसका आँचल जोबन पे टिकता नहीं था, मांग में भरभराता हुआ नाक तक लगाया सिन्दूर, छोटी सी नथ, कुछ पान से कुछ लिपस्टिक से रंगे भरे भरे होंठ, चम्पई रंग के खूब भरे काटने लायक गाल, गले में लम्बा मंगलसूत्र तो जो खूब लो कट ब्लाउज से छलकते दोनों जोबनो के बीच, दबा कुचला, और जोबन भी बस ऐसे की उनका मुकाबला, पूरे गाँव में सिर्फ उनकी भौजाई कर सकती थीं, सूरजु की माई, बड़की ठकुराईन, ३८ के जोबन तो ४० के बड़े बड़े चूतड़,

और गाना गाने में तो दस पांच गाँव में मुकाबला नहीं और गालियां तो ऐसी की मायके में उनकी भौजाइयां और ससुराल में उनकी ननदें, कान में ऊँगली डाल ले, और कान से ऊँगली निकलवा के सीधे कान में सुनाएँ, और अक्सर गाँव की गारियों में ननदो के ऊपर भौजाइयां अपने मरद को, देवर को, और अपने भाइयों को चढाती हैं। लेकिन कांती बूआ, तो अगली पीढ़ी तक, बाप और बेटे को भी नहीं छोड़ती थीं, और गदहा, घोडा, सांड सब कुछ,

खूब गरमाई थीं और उसका एक कारण और भी था, आज उनकी टीम में पूनम, चननिया ऐसी चार पांच गाँव की ब्याहता लड़कियां, सात आठ बहुएं, बुच्ची और लीला ऐसी कोरी कुँवारी आधी दर्जन से ज्यादा लड़कियां, और दूसरी ओर उनकी भौजी, सूरजु की माई के मायके वाली सब बैठीं थीं।



लेकिन सूरजु के ननिहाल वालियां भी कम जोश में नहीं थीं, उनके मायके से भी आज सुबह सुबह बहुत लोग आ गए थे,

मंझली मामी और मामा और उनकी दो बेटियां, बंबई से शीतल मौसी और उनकी बेटी और सूरजु की महतारी के मायके के और भी लोग आ गए थे। चुनिया, छोटी मामी, रामपुर वाली भाभी, मंजू भाभी और भी, सूरजु की माई की भौजाइयां पहले से ही थीं।

लेकिन आज मोर्चा सम्हाला था, मंझली मामी ने, और शीतल मौसी भले बियाहे के बाद बंबई चली गयी हों लेकिन गाँव के रीत रिवाज और गवनहि में कम नहीं थी। और सूरजु की महतारी क असल बहन झूठ।

असल में सरजू के न कोई सगे मामा, न मौसी और इसलिए सैकड़ो बीघा खेत, बाग़ बगीचा, ताल बड़ा सा घर, सब नवासे में मिला, बल्कि सूरजु के नाना ने सीधे सूरजु के नाम ही लिख दिया था।

पर गाँव के पट्टीदारी, रिश्तेदारी के मामा, मौसी की कमी नहीं थी, ननिहाल में और शीतल मौसी तो सूरजु की माई की चचेरी बहन, सटा हुआ घर, और सूरजु की माई से छह सात महीने बड़ी ही होंगी, मजाक करने में उनका अगर कोई मुकाबला करता था तो सूरजु की माई और अपनी इन दो नंदों पे भारी पढ़ती थीं, मंझली मामी और अब गाँव की बहुओ और लड़कियों के साथ सूरजु के ददिहाल वालों की आज वो ऐसी की तैसी कर रही थीं, गरियाये सूरजु ही जाते थे लेकिन ननिहाल वाले सूरजु की बूआ का नाम लेके, उनके गाँव की लड़कियों का नाम ले ले के और कांती बूआ, सूरजु की मामी, मौसी और ममेरी, मौसेरी बहनों को।

पहला झगड़ा होता था, ढोलक किस पार्टी के कब्जे में रहेगी और सूरजु के मायकेवालियों ने बाजी मार ली थी, कांती बूआ के नेतृत्व में और पूनम ढोलक टनका रही थी और कांती बूआ की तगड़ी आवाज, और शुरू में तो रस्म रिवाज के ही गाने, हाँ साथ सूरजु के ननिहाल वाली भी दे रही थीं




बगिया में मोरवा बोले, अंगना में कउवा हो

घर घर देइ द नउनिया जाय के बुलव्वा हो।

आज हमरे बन्ने के चढ़ेले हरदिया हो,

आज हमरे भैया के चढ़ेले हरदिया हो

( गाँव की लड़कियों की आवाज थी और सबसे तेज कपूनमिया और चननिया की )

आज हमरे देवर के चढ़ेले हरदिया हो

( अबकी गाँव की बहुओं की और सबसे टनकदार रामपुर वाली भौजी )

अंगना में बैठहु आय के मोरे सब सखिया हो

हरदी लगावहु गाय के मंगल गितिया हो




और जैसे ही बुच्ची, लीला के साथ दूल्हे आये चौके पे बैठने, उनकी आँख अहिराने की पूनम से मिली, बल्कि लड़ी आउटर बचपन की सब शरारतें, कैसे ग्वालिन भौजी चिढ़ाती थीं, दूध और मलाई का मजाक कर के और माई और कहारिन भी साथ में, सूरजु जोर से मुस्कराये और पूनमिया भी, आँचल तो पूरा ढलक गया, कसी कसी छोटी छोटी चोली में से झांकते उछलते कूदते जोबन दावत देते नजर आये और पूनम भी जोर से मुस्करायी और होंठ ऐसे मुड़े जैसे कस के बचपन के दोस्त का चुम्मा ले रही हो।

कांती बूआ समझ गयी थीं की बुच्ची और लीला पे सूरजु के मायके वालों की निगाह है और उन दोनों की रगड़ाई सबसे ज्यादा होगी तो इशारे से उन्होंने उन दोनों को बुला लिया और बुच्ची और लीला गाँव की लड़कियों और भौजाइयों के झुण्ड में खो गयीं। पर पूनमिया खुल के दूल्हे से नैन मटक्का कर रही थी और उसे एक बात का फर्क भी नहीं पड़ रहा था की चार आँखों का ये खेल सब देख रहे हैं .

चुमावन को सबसे पहले मंझली मामी उठीं, अक्सर पहले भौजाई और बड़ी औरतों का नंबर लगता है लेकिन वो तो सूरजु क माई क भाभी थीं, तो उनका नंबर पहले लगना ही था। और मंझली मामी जीतनी सुन्दर थी, उतनी ही हर तरह से छिनार भी, हर तरह से छिनार मतलब बोल बात में, चाल ढाल में, मर्दो को छोड़िये लौंडों को देख के उनका आँचल जोबन पर नहीं टिकता था, दुजरि मीनिंग वाली बात और मुस्कान और आँख के इशारे, तो उठते ही उन्होंने क्या चूतड़ मटकाया, कैसे मुस्करायीं, और चुमावन के लिए आगे बढ़ी,

पर इधर पूनम तैयार थीं और ऊपर से कांती बूआ, मुस्करायी, और पूनम को इशारा किया, चल चालु हो जा, आखिर उन्ही भाभी की भाभी और गानों का लेवल बदल गया,




" मामी से जिन चुमावे दिया हो माई, अरे मामी से जिन चुमावे दिया हो माई

अरे मामी मामा से छुवायल बाड़ीं हो माई ,

अरे मामी चन्नर चच्चा से छुवायल बाड़ीं हो माई अरे सूरजु भैया के मंझली मामी


अब तो सूरजु के गाँव की सब लड़कियां लहरा लहरा के और कांती बूआ के इशारे पे गाने लगीं,



चन्नर चाचा से चुदवायल बाड़ीं हो माई, हमरे फूफा से जोबना दबवावे हो माई

" मामी से जिन चुमावे दिया हो माई, अरे मामी से जिन चुमावे दिया हो माई


वाह कोमल मैम

बिना कुछ करें - करवाये इस अपडेट में जो रस बरसा है उसका तो कहना ही क्या !!!

कुल मिलाकर समां बांध कर रख दिया। इस कहानी पर अपडेट थोड़ा देर से आया लेकिन ऐसे अपडेट ने कसर निकाल कर रख दी

सूरजू बाबू के लिए इतना होमवर्क इकठ्ठा हो गया है कि कई शिफ्टों में काम करना पड़ेगा।

अब बारात जाने से पहले सूरजू बाबू जुलूस निकाल देंगे। जल्दी से इस कहानी पर अपडेट देने का श्रम करें।

बाकी आपकी इच्छा।

सादर
 

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कांती बूआ आज सबसे आगे बैठीं थी, गाँव की औरतों की लड़कियों को जबरदस्त लीड कर रही थीं, सिल्क की सरकती हुयी साड़ी, जिसका आँचल जोबन पे टिकता नहीं था, मांग में भरभराता हुआ नाक तक लगाया सिन्दूर, छोटी सी नथ, कुछ पान से कुछ लिपस्टिक से रंगे भरे भरे होंठ, चम्पई रंग के खूब भरे काटने लायक गाल, गले में लम्बा मंगलसूत्र तो जो खूब लो कट ब्लाउज से छलकते दोनों जोबनो के बीच, दबा कुचला, और जोबन भी बस ऐसे की उनका मुकाबला, पूरे गाँव में सिर्फ उनकी भौजाई कर सकती थीं, सूरजु की माई, बड़की ठकुराईन, ३८ के जोबन तो ४० के बड़े बड़े चूतड़,

और गाना गाने में तो दस पांच गाँव में मुकाबला नहीं और गालियां तो ऐसी की मायके में उनकी भौजाइयां और ससुराल में उनकी ननदें, कान में ऊँगली डाल ले, और कान से ऊँगली निकलवा के सीधे कान में सुनाएँ, और अक्सर गाँव की गारियों में ननदो के ऊपर भौजाइयां अपने मरद को, देवर को, और अपने भाइयों को चढाती हैं। लेकिन कांती बूआ, तो अगली पीढ़ी तक, बाप और बेटे को भी नहीं छोड़ती थीं, और गदहा, घोडा, सांड सब कुछ,

खूब गरमाई थीं और उसका एक कारण और भी था, आज उनकी टीम में पूनम, चननिया ऐसी चार पांच गाँव की ब्याहता लड़कियां, सात आठ बहुएं, बुच्ची और लीला ऐसी कोरी कुँवारी आधी दर्जन से ज्यादा लड़कियां, और दूसरी ओर उनकी भौजी, सूरजु की माई के मायके वाली सब बैठीं थीं।



लेकिन सूरजु के ननिहाल वालियां भी कम जोश में नहीं थीं, उनके मायके से भी आज सुबह सुबह बहुत लोग आ गए थे,

मंझली मामी और मामा और उनकी दो बेटियां, बंबई से शीतल मौसी और उनकी बेटी और सूरजु की महतारी के मायके के और भी लोग आ गए थे। चुनिया, छोटी मामी, रामपुर वाली भाभी, मंजू भाभी और भी, सूरजु की माई की भौजाइयां पहले से ही थीं।

लेकिन आज मोर्चा सम्हाला था, मंझली मामी ने, और शीतल मौसी भले बियाहे के बाद बंबई चली गयी हों लेकिन गाँव के रीत रिवाज और गवनहि में कम नहीं थी। और सूरजु की महतारी क असल बहन झूठ।

असल में सरजू के न कोई सगे मामा, न मौसी और इसलिए सैकड़ो बीघा खेत, बाग़ बगीचा, ताल बड़ा सा घर, सब नवासे में मिला, बल्कि सूरजु के नाना ने सीधे सूरजु के नाम ही लिख दिया था।

पर गाँव के पट्टीदारी, रिश्तेदारी के मामा, मौसी की कमी नहीं थी, ननिहाल में और शीतल मौसी तो सूरजु की माई की चचेरी बहन, सटा हुआ घर, और सूरजु की माई से छह सात महीने बड़ी ही होंगी, मजाक करने में उनका अगर कोई मुकाबला करता था तो सूरजु की माई और अपनी इन दो नंदों पे भारी पढ़ती थीं, मंझली मामी और अब गाँव की बहुओ और लड़कियों के साथ सूरजु के ददिहाल वालों की आज वो ऐसी की तैसी कर रही थीं, गरियाये सूरजु ही जाते थे लेकिन ननिहाल वाले सूरजु की बूआ का नाम लेके, उनके गाँव की लड़कियों का नाम ले ले के और कांती बूआ, सूरजु की मामी, मौसी और ममेरी, मौसेरी बहनों को।

पहला झगड़ा होता था, ढोलक किस पार्टी के कब्जे में रहेगी और सूरजु के मायकेवालियों ने बाजी मार ली थी, कांती बूआ के नेतृत्व में और पूनम ढोलक टनका रही थी और कांती बूआ की तगड़ी आवाज, और शुरू में तो रस्म रिवाज के ही गाने, हाँ साथ सूरजु के ननिहाल वाली भी दे रही थीं




बगिया में मोरवा बोले, अंगना में कउवा हो

घर घर देइ द नउनिया जाय के बुलव्वा हो।

आज हमरे बन्ने के चढ़ेले हरदिया हो,

आज हमरे भैया के चढ़ेले हरदिया हो

( गाँव की लड़कियों की आवाज थी और सबसे तेज कपूनमिया और चननिया की )

आज हमरे देवर के चढ़ेले हरदिया हो

( अबकी गाँव की बहुओं की और सबसे टनकदार रामपुर वाली भौजी )

अंगना में बैठहु आय के मोरे सब सखिया हो

हरदी लगावहु गाय के मंगल गितिया हो




और जैसे ही बुच्ची, लीला के साथ दूल्हे आये चौके पे बैठने, उनकी आँख अहिराने की पूनम से मिली, बल्कि लड़ी आउटर बचपन की सब शरारतें, कैसे ग्वालिन भौजी चिढ़ाती थीं, दूध और मलाई का मजाक कर के और माई और कहारिन भी साथ में, सूरजु जोर से मुस्कराये और पूनमिया भी, आँचल तो पूरा ढलक गया, कसी कसी छोटी छोटी चोली में से झांकते उछलते कूदते जोबन दावत देते नजर आये और पूनम भी जोर से मुस्करायी और होंठ ऐसे मुड़े जैसे कस के बचपन के दोस्त का चुम्मा ले रही हो।

कांती बूआ समझ गयी थीं की बुच्ची और लीला पे सूरजु के मायके वालों की निगाह है और उन दोनों की रगड़ाई सबसे ज्यादा होगी तो इशारे से उन्होंने उन दोनों को बुला लिया और बुच्ची और लीला गाँव की लड़कियों और भौजाइयों के झुण्ड में खो गयीं। पर पूनमिया खुल के दूल्हे से नैन मटक्का कर रही थी और उसे एक बात का फर्क भी नहीं पड़ रहा था की चार आँखों का ये खेल सब देख रहे हैं .

चुमावन को सबसे पहले मंझली मामी उठीं, अक्सर पहले भौजाई और बड़ी औरतों का नंबर लगता है लेकिन वो तो सूरजु क माई क भाभी थीं, तो उनका नंबर पहले लगना ही था। और मंझली मामी जीतनी सुन्दर थी, उतनी ही हर तरह से छिनार भी, हर तरह से छिनार मतलब बोल बात में, चाल ढाल में, मर्दो को छोड़िये लौंडों को देख के उनका आँचल जोबन पर नहीं टिकता था, दुजरि मीनिंग वाली बात और मुस्कान और आँख के इशारे, तो उठते ही उन्होंने क्या चूतड़ मटकाया, कैसे मुस्करायीं, और चुमावन के लिए आगे बढ़ी,

पर इधर पूनम तैयार थीं और ऊपर से कांती बूआ, मुस्करायी, और पूनम को इशारा किया, चल चालु हो जा, आखिर उन्ही भाभी की भाभी और गानों का लेवल बदल गया,




" मामी से जिन चुमावे दिया हो माई, अरे मामी से जिन चुमावे दिया हो माई

अरे मामी मामा से छुवायल बाड़ीं हो माई ,

अरे मामी चन्नर चच्चा से छुवायल बाड़ीं हो माई अरे सूरजु भैया के मंझली मामी


अब तो सूरजु के गाँव की सब लड़कियां लहरा लहरा के और कांती बूआ के इशारे पे गाने लगीं,



चन्नर चाचा से चुदवायल बाड़ीं हो माई, हमरे फूफा से जोबना दबवावे हो माई

" मामी से जिन चुमावे दिया हो माई, अरे मामी से जिन चुमावे दिया हो माई
Hot update … pura list ready ho gaya hai bhai ka kiski kiski milegi waaaah tooo good ….. now waiting for next part
 

Chalakmanus

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Bohot mazedaar update tha.

Imritiya jahan suraj ko tan or man se taiyaar kar di hai wahi kaam shastra ki bhi siksha de di hai.bus ab ek kuwari balika be apna imtehan dena hai.

Wahi buchhi nak chadhi,jo pehle baat baat pe chidti thi.ab chudwane ke liye taiyaar hai.or yahan tak ki apni sakhi ko bhi taiyaar karegi aage chal ke.

Buchhi to thi hi kuwari.lali to us se bhi kamsin kali hai.

Or imritiya ne to bhabhi ka farz nibha diya or dono kamsin kaliyo se apni kuwari nanado se suraju ke munna ko tel se apne samne massage karwa diya.

Imritiya ko pata tha ki haldi ke pehle agar koi kuwari ladki ya ladkiya kisi ke lund pe tel lagati hai to ladka chudakkad or ladki chudasi ho jati hai.

Dusri taraf surju ki bihaaita behen punam bhi sarju se apna pet fulana chahti hai.

Or uski saheli chandaniya bhi sayad iss kaam main sath de.
Or saryu ke hone wali patni ki charcha gaon gaon main hai ki wo padhi likhi hai😂😂😂😂😂



Bohot hi umda update tha.hawas ki parkastha ko aapne paar kar diya iss update main.haan time kafi liya.pure dedh mahine.par update ne sari sikayat dur kar di.

Kehte hai na intejaar ka fal mitha hota hai.

Ye to erotic story site kuch saalo se hai .main tab se padh raha hu jab mastraam or musafir hua karte the.uske baad ISS.phir bohot si.or aakhir main aap mili.sach main kya likhti hai aap.

Kuch sawal hai.
1.pehle suraj kiske golkunda pe chadhega??

Imritiya ya koi or??

Haan pehli baar to kheli khai hi chahiye.

2.aapne chandani ke baare main achhe se nahi bataya.dudharu gayi hai ?ya ye bhi abhi nahi biyai hai.

3.bich bich main kahani ko present main bhi laiye.jaise chhutki or uske jija,nanad rani ka ghar main maan samaan mila ki nahi.or nanad ki nanad ka vyavahaar ab kaisa hai .

4.kuch kaliya pathan tole se bhi mangwa lijiye.



Aapka niyamit pathak..
🙏🙏🙏🙏🙏
 

pprsprs0

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Bohot mazedaar update tha.

Imritiya jahan suraj ko tan or man se taiyaar kar di hai wahi kaam shastra ki bhi siksha de di hai.bus ab ek kuwari balika be apna imtehan dena hai.

Wahi buchhi nak chadhi,jo pehle baat baat pe chidti thi.ab chudwane ke liye taiyaar hai.or yahan tak ki apni sakhi ko bhi taiyaar karegi aage chal ke.

Buchhi to thi hi kuwari.lali to us se bhi kamsin kali hai.

Or imritiya ne to bhabhi ka farz nibha diya or dono kamsin kaliyo se apni kuwari nanado se suraju ke munna ko tel se apne samne massage karwa diya.

Imritiya ko pata tha ki haldi ke pehle agar koi kuwari ladki ya ladkiya kisi ke lund pe tel lagati hai to ladka chudakkad or ladki chudasi ho jati hai.

Dusri taraf surju ki bihaaita behen punam bhi sarju se apna pet fulana chahti hai.

Or uski saheli chandaniya bhi sayad iss kaam main sath de.
Or saryu ke hone wali patni ki charcha gaon gaon main hai ki wo padhi likhi hai😂😂😂😂😂



Bohot hi umda update tha.hawas ki parkastha ko aapne paar kar diya iss update main.haan time kafi liya.pure dedh mahine.par update ne sari sikayat dur kar di.

Kehte hai na intejaar ka fal mitha hota hai.

Ye to erotic story site kuch saalo se hai .main tab se padh raha hu jab mastraam or musafir hua karte the.uske baad ISS.phir bohot si.or aakhir main aap mili.sach main kya likhti hai aap.

Kuch sawal hai.
1.pehle suraj kiske golkunda pe chadhega??

Imritiya ya koi or??

Haan pehli baar to kheli khai hi chahiye.

2.aapne chandani ke baare main achhe se nahi bataya.dudharu gayi hai ?ya ye bhi abhi nahi biyai hai.

3.bich bich main kahani ko present main bhi laiye.jaise chhutki or uske jija,nanad rani ka ghar main maan samaan mila ki nahi.or nanad ki nanad ka vyavahaar ab kaisa hai .

4.kuch kaliya pathan tole se bhi mangwa lijiye.



Aapka niyamit pathak..
🙏🙏🙏🙏🙏
👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻
 
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rajkomal

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ek hoti h story sidhi si..........isne usko pataya aur sex shuru. aur ek hoti h komal ji ki story, kab kaisa turn le aur branch se branch nikalne lage. mast h ji. esi tharak lagi h ki puri story re read kar raha hu.
 
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komaalrani

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Very nice, superb gazab updates, awesome writing abilities
👌👌👌👌👌
🌶️🌶️🌶️🌶️
💦💦💦
💯💯
This is your greatness. A writer of your capability comes on this thread
This is an honour to this thread .

Thanks soooooooooooo much


:thanks: :thanks: :thanks: :thanks: :thanks: :thanks: :thanks: :thanks:
 

komaalrani

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Intejaar to bohot karwaya..

Par...

Kehte hai nai na intejar ka phal mitha hota hai.

Ek dum wese hi.

Ek dum gramin parivesh..

Geeto ki to puchho hi mat.

Maza aa gaya
yes intezaar ka kaarn bhi tha.

mujhe lagata tha ki meri baaki stories par bhi kuch comments kuch views aane chaahiye, lekin maine promise kiya tha ki 26 janaury ke baad update de dungi

aur baat aapki sahi hai aise update likhne me jyada time lagata hai, bahoot si stories me gaaon hota hai lekin vo shahar aisa hi lagata hai aur maine poori koshish ki aaj se bis tis saal pahle ke gaaon ke rasm rivaaj ka poora maahaul bane. sex ke alava bhi baate hon

bahhoot bahoot thanks aage ka part abhi likh rhi hun aur usme bhi vahi gaaon ki khushbu aayegi .

thank u GIF
 

komaalrani

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Jab kheli khai imritiya ki suja di suraj ne to buchhi ka kya hoga .

Dekhte hai aage kya hota hai.

Bohot hi mazedaar ja raha hai komal g.
बहुत आभार धन्यवाद

और अभी तो बुच्ची से भी कच्ची एक कली आएगी, इसी पार्ट में और उसका हिंट पिछले एक भाग में ही मैंने दे दिया था ( भाग १११ ) जब बड़की ठकुराइन ने मुन्ना बहू से कहा था

" कुँवारी भी, एकदम कच्ची कोरी भी, अरे एक बार सील तोड़े रहेगा, खून खच्चर देखे रहेगा तो घबड़ायेगा नहीं, तो नई दुल्हिन खूब नखड़ा करती है, भौजाई कुल सिखाई के भेजी रहती हैं, और ये तो ऐसे ही दस बार बोलेगी की मैं तो पढ़ाई वाली हूँ, और फिर एक से नहीं, बुच्चिया तो ठीक लेकिन कम से कम दो तीन और कच्ची कोरी, भरौटी में है एक दो, बुच्ची से भी कच्ची, कम उमर वाली लेकिन देह में करेर, मुन्ना बहू को बोलती हूँ, वो ये सब काम में तेज है, कल हल्दी में ले आएगी,"

तो बस मुन्ना बहू ले आयी और इस भाग में इसलिए और कुछ नए पात्र आये,

एक बात और है इमरतिया और सूरज के अलावा कुछ और भी देह संबंधो की झलक होनी चाहिए तो उसके लिए पात्र कहानी में आने चाहिए

मैं कोशिश करती हूँ की आने वाले भागों की पदचाप कम से कम एक दो भाग पहले से ही सुनाई देने लगे

एक बार फिर सभी कहानियों पर साथ देने के लिए धन्यवाद
 
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