• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
44,499
80,792
304

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
Supreme
4,583
25,018
189
#178.

काली बिल्ली:
(5 दिन पहले ...... 12.01.02, शनिवार, 11:30, सीनोर राज्य की सीमा, मायावन, अराका द्वीप)

विशाल टेरोसोर अलबर्ट को उठाये आसमान में उड़ा चला जा रहा था। नीचे कुछ नन्हें टेरोसोर आसमान की ओर अपना मुंह उठाये, उस विशाल टेरोसोर के पीछे-पीछे तेज आवाज करते भाग रहे थे।

अलबर्ट का ध्यान टेरोसोर पर कम और नीचे जमीन की ओर ज्यादा था। उसे ऊंचाई से नीचे गिरने का ज्यादा डर दिख रहा था।

अलबर्ट ने अब एक बार ऊपर टेरोसोर के मुंह की ओर देखा। टेरोसोर अपनी लंबी चोंच में पहले से ही किसी जानवर को पकड़े था।

अब अलबर्ट की नजर टेरोसोर के पंजों की ओर गई, तो अलबर्ट हैरान हो गया क्यों कि इस समय टेरोसोर के पंजों में अलबर्ट के शरीर का कोई हिस्सा नहीं था।

वह टेरोसोर अलबर्ट की जैकेट को अपने पंजे से पकड़े था, यानि कि अगर जैकेट को खोल दिया जाता, तो अलबर्ट नीचे गिर सकता था।

यह देख अलबर्ट तेजी से सोचने लगा- “अगर ये टेरोसोर मुझे अपने घोसले में लेकर पहुंच गया? तो मेरा बचना बिल्कुल असंभव है, मुझे इसके पहले ही इस टेरोसोर की पकड़ से छूटना होगा।... वैसे तो जैकेट खोलते ही मैं आजाद हो जाऊंगा, पर इतनी ऊंचाई से नीचे गिरने पर तो मेरी मौत पक्का हो जायेगी.... इसलिये मुझे टेरोसोर के थोड़ा नीचे आने का इंतजार करना होगा।”

नन्हें टेरोसोर अब बहुत पीछे छूट गये थे, पर अलबर्ट को पता था कि वो पीछे से आ रहे होंगे।

तभी अचानक पता नहीं कहां से एक दूसरा विशाल पक्षी आकर, उस टेरोसोर के मुंह में पकड़े जानवर को छीनने की कोशिश करने लगा।

यह देख टेरोसोर ने एक बड़ी सी डाइव मारी और अब थोड़ा नीचे उड़ने लगा।

अलबर्ट को इस समय नीचे घने पेड़ दिखाई दिये और अब उन घने पेड़ों से अलबर्ट की ऊंचाई भी ज्यादा नहीं थी।

इससे अच्छा मौका अलबर्ट को फिर नहीं मिलता, अतः उसने एक झटके से अपनी जैकेट की ‘जिप’ को खोल दिया और अपने हाथ ऊपर की ओर कर लिये।

एक क्षण में ही अलबर्ट की जैकेट उसके शरीर से अलग हो गई और वह तेजी से नीचे घने पेड़ों की ओर गिरने लगा।

किस्मत अच्छी थी कि अलबर्ट का शरीर एक घने पेड़ की शाखाओं में उलझकर रुक गया और वह जमीन पर गिरने से बच गया।

अलबर्ट ने अपने शरीर का बैलेंस बनाया और पेड़ की शाखाओं से छूटकर वहीं बैठ गया।

अलबर्ट की निगाह अब नीचे की ओर जा रही थी। अलबर्ट का अंदाजा सही निकला, कुछ ही देर में चीखते हुए छोटे टेरोसोर उधर से गुजरे।

अगर अलबर्ट पेड़ से नीचे उतर गया होता, तो पक्का उसे इन नन्हें टेरोसोर का शिकार बन जाना था।

कुछ देर तक अलबर्ट नीचे देखता रहा और फिर कोई खतरा ना देख धीरे से नीचे उतर गया।

अब वह सुयश और बाकी सभी लोगों के बारे में सोचने लगा।

उसे पता था कि सभी लोग अब पोसाईडन पर्वत की ओर चले गये होंगे। अगर उन लोगों से मिलना है तो उसे भी पोसाईडन पर्वत की ओर जाना ही होगा।

अलबर्ट जानता था कि वैसे भी, वह अकेले इस भयानक जंगल में ज्यादा दिन तक सुरक्षित नहीं रह सकता।
यह सोच अलबर्ट अंदाजे से ही, पोसाईडन पर्वत की ओर चल दिया।
नीचे काफी सूखी पत्तियां पड़ी थीं, इसलिये अलबर्ट के चलने से वातावरण में तेज आवाज गूंज रही थी।

कुछ आगे चलते ही अलबर्ट का पैर एक गहरे गड्ढे पर पड़ा और वह अपने शरीर का संतुलन खो, तेजी से गहरे गड्ढे में जा गिरा।

पेड़ों की टहनियां और सूखी पत्तियां, गड्ढे के ऊपर पड़े होने की वजह से अलबर्ट को वह गड्ढा दिखाई नहीं दिया था। भला यही था कि उस गड्ढे में कोई पत्थर नहीं था, नहीं तो अलबर्ट का सिर फट जाना था।

अलबर्ट ने अब उस गड्ढे को ध्यान से देखा, वह एक बड़ा सा सूखा कुंआ था।

अलबर्ट को उस कुंए से निकलने का कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था। अभी दिन होने की वजह से सूर्य की थोड़ी रोशनी कुएं में आ रही थी।

तभी अलबर्ट को कुएं में एक दिशा पर एक हल्की रोशनी दिखाई दी। इस रोशनी की किरण ने अलबर्ट के अंदर एक नया उत्साह भर दिया।

वह अब कुएं के उस ओर आ गया, जहां से रोशनी नजर आ रही थी। वहां पहुंचते ही अलबर्ट आश्चर्य से भर गया क्यों कि उस स्थान पर पेड़ों की बेल के पीछे, एक विशाल बिल्ली के मुंह वाली गुफा नजर आ रही थी।

देखने से साफ पता चल रहा था कि यह गुफा किसी इंसान के द्वारा बनायी गई है। अलबर्ट उस बिल्ली वाली गुफा में प्रवेश कर गया।

उस गुफा में चारो ओर पत्थरों से बने अर्द्धचंद्राकार 5 दरवाजे बने थे, जिनके बीच में बहुत से महीन सुराख थे। उन सुराखों से जल की पतली धारा किसी झरने के तरह से गिर रही थी।

पर इस धारा का पानी जमीन पर कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे वह पानी जमीन पर गिरने के पहले ही कहीं गायब हो जा रहा है।

उन अर्द्धचंद्राकार दरवाजों के बीच, एक बिल्ली जैसे मुंह वाली देवी की मूर्ति खड़ी थी। जिसके दोनों हाथ आगे की ओर थे और उन हाथों के बीच एक सुनहरी धातु का पात्र रखा था।

उस पात्र के ऊपर से हवा में, कुछ पानी की बूंदें स्वतः बन रहीं थीं और वह बूंद एक-एक कर उस पात्र में गिर रही थी। पात्र जल से पूरा भरा था, पर फिर भी उसकी बूंदे, पात्र से बाहर नहीं गिर रहीं थीं।

उस देवी ने अपने दाहिने हाथ में एक सुनहरे रंग का ब्रेसलेट पहन रखा था, जो कि दूर से ही चमक रहा था।

उन अर्द्धचंद्राकार दरवाजों के पीछे, पत्थर से बनी दीवारों पर कुछ चित्रकारी की गई थी।

उस प्रत्येक चित्रकारी में चित्र कोई भी हो, पर एक काली बिल्ली को उस पात्र से जल पीते हुए दिखाया गया था।

यह देख अलबर्ट का खुराफाती दिमाग जाग उठा- “अवश्य ही इस पात्र में कोई ना कोई दिव्य जल है, जिसकी महत्वता दीवारों पर चित्रों के माध्यम से दर्शाई गई है। मुझे अवश्य ही इस जल को पीकर देखना चाहिये, भले ही मैं इसे पीने के बाद मैं काली बिल्ली ही क्यों ना बन जाऊं? और वैसे भी अब मैं अपनी पूरी जिंदगी तो जी चुका, फिर इन छोटे-छोटे प्रयोगों से क्या डरना ?” यह सोच अलबर्ट ने देवी के हाथ से उस पात्र को उठाया और पूरा का पूरा जल पी गया।

अलबर्ट ने पूरा जल पीने के बाद देवी के हाथ में कटोरा पुनः वापस रख दिया और ध्यान से अपने शरीर में हो रहे बदलाव को देखने लगा।

पर जब 10 मिनट के अपार निरीक्षण के बाद भी अलबर्ट को अपने शरीर में कोई बदलाव दिखाई नहीं दिया, तो वह निराश हो गया।

“लगता है सबको बेवकूफ बनाने के लिये दीवारों पर चित्रकारी की गई थी।” अलबर्ट ने गुस्साते हुए कहा।

अब अलबर्ट ने देवी के हाथ से वह ब्रेसलेट भी निकाल कर अपने हाथों में पहन लिया।

पर इसके बाद भी जब कुछ ना हुआ तो खीझकर अलबर्ट उस कुएं से निकलने का रास्ता ढूंढने लगा।


प्रश्नावली:

दोस्तों जैसा कि आप देख रहे हैं कि यह कहानी बहुत तेजी से बढ़ता जा रही है और हर पेज पर आपके दिमाग एक नया प्रश्न खड़ा करता जा रहा है।

प्रश्नों की संख्या अब इतनी ज्यादा हो चुकी है कि अब वह मस्तिष्क में एकत्रित नहीं हो पा रहे हैं। तो क्यों न इन सारे प्रश्नों को एक जगह पर एकत्रित कर लें-

1) ‘अटलांटिस का इतिहास‘ नामक किताब ‘लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस में कैसे पहुची ? क्या इसके लेखक वेगा के बाबा कलाट ही थे? क्या इस किताब से और भी राज आगे खुले?

2) माया से विदा लेने के बाद मेरोन और सोफिया का क्या हुआ? क्या माया कैस्पर को उसकी असलियत बता पायी ?

3) क्या जेनिथ सुयश के सामने तौफीक का राज खोल पायी ?

4) क्रिस्टी को नदी की तली से मिली, वह काँच की पेंसिल कैसी थी ?

5) शैफाली को मैग्ना की ड्रेस तक पहुंचाने वाली पेंग्विन और डॉल्फिन क्या थीं ?

6) पंचशूल का निर्माण किसने और क्यों किया था ?

7) ऐमू के अमरत्व का क्या राज है?

8) जैगन का सेवक गोंजालो कौन था ? क्या उसकी मूर्ति में भी कोई राज छिपा था ?

9) क्या सनूरा की शक्तियों का राज एक रहस्यमय बिल्ली है?

10) मैग्ना का ड्रैगन, लैडन नदी की तली में क्यों सो रहा था ? मेलाइट उसे क्यों जगाना चाहती थी ?

11) उड़नतश्तरी के अंदर मौजूद 6 फुट का हरा कीड़ा बाकी कीड़ों से अलग क्यों था? वह इंसानों की तरह कैसे चल रहा था?

12) मकोटा के सर्पदंड का क्या रहस्य था?

13) सागरिका, वेगिका, अग्निका आदि चमत्कारी पुस्तकों का क्या रहस्य था?

14) माया सभ्यता का अंत किस प्रकार हुआ?

15) माया को इतनी सारी देवशक्तियां कहां से प्राप्त हुईं?

16) कौन था ‘ओरस’? जिसे फेरोना ग्रह का राजा एलान्का ढूंढ रहा था।

17) क्या था फेरोना ग्रह के जनक, पेन्टाक्स का रहस्य?

18) क्या थी एण्ड्रोवर्स पावर? जिसके हरे ग्रह पर भेजने से एलान्का गुस्सा रहा था।

19) कौन थी रेने? जिसे एलान्का ने एण्ड्रोनिका का प्रतिनिधित्व करने को कहा था ? उसके पास कैसी शक्तियां थीं?

20) क्या शलाका आर्यन के पुत्र को ढूंढने अवन्ती राज्य गई?

21) कहां था आर्यन का पुत्र? क्या वह अब भी अष्टकोण में बंद था? या किसी ने उसे निकाल लिया था?

22) अष्टकोण के साथ रखी उस अमृत की दूसरी बूंद का क्या हुआ?

23) एण्ड्रोनिका में एलनिको और एनम के सिवा कितनी शक्तियां और थीं?

24) एण्ड्रोनिका में जाने के बाद धरा और मयूर का क्या हुआ?

25) गोंजालो का ऊर्जा द्वार, तिलिस्मा के ऊर्जा द्वार से कैसे टकरा गया?

26) कैश्वर अंतरिक्ष से किसे बुलाना चाह रहा था?

27) माया ने कैस्पर से किस प्रकार से, महाविनाश की तैयारी करने की बात की थी?

28) महावृक्ष के स्वप्नतरु में कितने रहस्य छिपे थे?

29) सुनहरी ढाल और तलवार से ‘आकृति’ देवराज इंद्र से कैसे वरदान मांगना चाहती थी?

30) विक्रम बर्फ के गोले में कैसे पहुंच गया? उसकी स्मृति कैसे चली गई थी? जबकि वह एक अमर योद्धा था।

31) क्या विक्रम आकृति की दी हुई नीली अंगूठी उतारकर वारुणी से सम्पर्क कर सका?

32) क्या ओरैकल से मिलने के बाद आर्टेमिस ने आकृति का पीछा करना बंद कर दिया था?

33) क्या मुफासा और कागोशी को सच में कलाट ने मारा था?

34) कौन था जैगन का गुरु कुवान? क्या मकोटा को वुल्फा उसी से मिला था?

35) तीसरे पिरामिड में कुवान की मूर्ति के नीचे खड़े निष्क्रिय जीव योद्धा कौन थे?

36) क्या मकोटा सुरंग के रास्ते तिलिस्मा में प्रवेश कर सका?

37) क्या जैगन धरा के बेहोश होने की वजह से जाग गया था?

38) कौन था वह विचित्र जीव? जिसने आसमान से सभी पंक्षियों को मारकर वांशिगटन डी.सी. पर गिरा दिया था? क्या समुद्री जीवों को भड़काना भी उसी की हरकत थी?

39) क्या मेलाइट, रोजर को कस्तूरी मृग का रहस्य बता पाई?

40) वेदालय की देवशक्तियों का क्या रहस्य था?

41) सुर्वया के सिंहलोक में ‘चतुर्भुज सिंहराज’, शुभार्जना और दिव्यदृष्टि जैसी शक्तियां कहां से आयीं थीं? सुर्वया ने अपने परिवार के बारे में क्यों नहीं बताया?

42) क्या थी सीनोर द्वीप पर आयी वह अंजानी मुसीबत? जो कि एक विशाल आकृति में समुद्र की लहरों पर मौजूद थी।

43) क्या लुफासा और वीनस को मिलने वाला वह लाल रंग का पत्थर मैग्ना की जीवशक्ति ही थे?

44) क्या था उस रक्त भैरवी की डिबिया के अंदर, जिसे नीलाभ ने हनुका को दिया था?

45) कैश्वर के बनाए प्राणियों में भावनाओं का संचार कैसे शुरु हो गया था?

46) क्या विद्युम्ना की त्रिशक्ति, महावृक्ष के द्वारा बनाये गये भ्रमजाल से भी ज्यादा खतरनाक थीं?

47) बिल्ली वाली देवी के, पात्र के जल और ब्रेसलेट का क्या रहस्य था?

48) कैसा था तिलिस्मा का आगे का मायाजाल? क्या वह आगे और कठिन होता गया?

49) क्या त्रिकाली और व्योम, त्रिशाल और कलिका को विद्युम्ना के भ्रमन्तिका से छुड़ा पाये?

50) क्या तिलिस्मा में घुसे सभी लोग तिलिस्मा को पार कर काला मोती प्राप्त कर सके?

51) क्या था इन अद्भुत देवशक्तियों का रहस्य?

ऐसे ही ना जाने कितने सवाल होंगे जो आपके दिमाग में घूम रहे होंगें।

तो इंतजार कीजिए हमारे अगले भाग का जिसका नाम है-
“अद्भुत दिव्यास्त्र” जिसमें हम आपको ले चलेंगे, देवताओं के एक ऐसे अद्भुत संसार में, जहां पर दिव्यास्त्रों की उत्पत्ति के रहस्य छिपे हैं....................


कृति का संकलन हूं, नये शब्दों का संचार हूं मैं, अनकही गाथा हूं, या मस्तिष्क का विचार हूं मैं, मेरे कथनों की कल्पना का सागर असीम है,
लफ्जों में बिखरी हुई, वीणा की झंकार हूं मैं, मत दीजिये मेरे अलफाजों को पंक्तियों की चुनौती,
जो रुह को महका दे, फजा में बिखरी वो बयार हूं मैं, मेरा वजूद छाया है अनंत ब्रह्मांड की गहराई में सिमटा संसार हूं मैं”

दोस्तों जिस प्रकार इन्द्रधनुष में सात रंग होते हैं, ठीक उसी प्रकार लेखक की रचनाओं में भी सात रंग पाये जाते हैं। हर रंग अपने आप में एक अलग पहचान रखता है।


दोस्तों आप सबके सपोर्ट और रिव्यू ही मुझे ओर भी अधिक लिखने को प्रेरित करते है। तो अपना कीमती समय निकालकर कुछ शब्द लिखते रहिए। (राज शर्मा)

अच्छी बात यह है कि अल्बर्ट बच गया है और अपनी ख़ुराफ़ात जारी रख रहा है।
पढ़ कर ऐसा लगा कि सुपर कमाण्डो ध्रुव वाली एक बेहद पुरानी कहानी - 'आदमखोरों का स्वर्ग' जैसा कुछ होगा।
लेकिन निराशा हाथ लगी :) हा हा!

इस अपडेट से एक और बात सूझती है कि क्या पुराने 'मर गए' किरदार भी वापस आ सकते हैं?

इस अपडेट में इक्यावन प्रश्न हैं - इतने तो एग्जाम में भी नहीं हल किए।
लिहाज़ा प्रश्नों को पढ़ने की ज़हमत नहीं उठाई मैंने।

अब तो सीधे अगले अपडेट में मिलेंगे जहाँ दिव्यास्त्रों की बातें होंगी - जैसे अभी कोई कम दिव्य शक्तियों की बातें हो रही थीं।
:tongue: :tongue: :tongue:
 

Napster

Well-Known Member
7,542
19,723
188
#164.

“बहुत अच्छे क्रिस्टी। तुमने बहुत अच्छी चीज पर ध्यान दिया।” सुयश ने क्रिस्टी की तारीफ करते हुए कहा- “यानि की अगर हम उस किताब पर लिखी तारीख को सही कर दें तो मूर्ति के पैरों में लगी बेड़ियां अपने आप हट जायेंगी।”

“कैप्टेन, आपने मेरी तारीफ क्यों नहीं की ?” ऐलेक्स ने नकली मुंह बनाते हुए कहा।

ऐलेक्स का ऐसा मुंह देख सभी की चेहरे पर मुस्कान आ गई।

सुयश ने ऐलेक्स की ओर देखा और जोर से उसका गाल पकड़ कर खींच दिया। यह देख सभी हंस दिये।

“अच्छा अगली बात कि मूर्ति के हाथ में पकड़ी मशाल की फ्लेम भी गायब है, हमें उसे भी ढूंढना पड़ेगा।” सुयश ने सभी को फिर से काम की याद दिलाते हुए कहा।

“कैप्टेन, मशाल वाली जगह पर जाने के लिये तो सीढ़ियां बनी हैं, पर इस किताब वाली जगह पर कैसे जायेंगे, वहां जाने का तो कोई रास्ता नहीं है।” तौफीक ने सुयश को ध्यान दिलाते हुए कहा।

“हमें वहां पर उतरने के लिये एक लंबी और मजबूत रस्सी चाहिये होगी...जो कि शायद यहीं कहीं हमें ढूंढने पर मिल जाये?...पर पहले हमें मशाल वाली जगह पर चलना होगा।” सुयश यह कहकर वापस सीढ़ियों की ओर बढ़ गया।

कुछ देर में सभी मशाल वाली जगह पर थे।

यह जगह मूर्ति की सबसे ऊंची जगह थी, यहां से न्यूयार्क शहर का एक बहुत बड़ा हिस्सा दिख रहा था।

सभी ने चारो ओर देखा, पर मशाल की फ्लेम कहीं भी नजर नहीं आयी।
जब काफी देर तक मशाल की फ्लेम नहीं मिली, तो थककर ऐलेक्स ने कहा - “मशाल की फ्लेम का आकार काफी बड़ा है, ऐसे में उस फ्लेम को इस स्थान के अलावा मूर्ति में कहीं नहीं रखा गया होगा, क्यों कि अगर उसे कहीं और रखा गया होता, तो उसको उठाकर यहां तक लाने के लिये कुछ ना कुछ व्यवस्था जरुर होती? पर हमें यहां और कुछ नहीं दिखाई दे रहा? इसका मतलब कुछ तो जरुर ऐसा है, जिसे हम समझ नहीं पा रहे हैं?”

ऐलेक्स के शब्द सुन सुयश कुछ देर के लिये सोच में पड़ गया और फिर वह मशाल की सीढ़ियां चढ़कर मशाल की फ्लेम के पास आ गया।

सुयश कुछ देर तक मशाल की फ्लेम के ऊपर हवा में हाथ लहराता
रहा और अचानक से जैसे ही सुयश ने अपना हाथ नीचे किया, मशाल पर फ्लेम दिखाई देने लगी।

सुयश अब उतरकर नीचे आ गया। सुयश के नीचे आते ही सभी ने उसे घेर लिया।

“कैप्टेन, आप ने यह कैसे किया?” जेनिथ ने सुयश से पूछ लिया।

“दरअसल मुझे अपने पुराने समय की एक घटना याद आ गई।” सुयश ने कहा- “जब मैं xv साल का था, तो मुझे याद है कि अमेरिका के एक प्रसिद्ध जादूगर ‘डेविड कॉपरफील्ड’ ने सबके सामने जादू से, स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी को गायब कर दिया था, मैंने भी वह शोटी.वी. पर देखा था। उस समय तो सभी के लिये, यह एक बहुत बड़े जादू के समान था, पर बाद में पता चला कि स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी कहीं गायब ही नहीं हुआ था, जादूगर ने उसके सामने एक शीट लगा कर सिर्फ दुनिया की नजर में गायब किया था।

“तो जब ऐलेक्स यह कह रहा था कि मशाल की फ्लेम को कहीं और नहीं रखा जा सकता? तो मुझे लगा कि कहीं मशाल की फ्लेम अपनी जगह पर ही तो नहीं है, जिसे किसी अदृश्य शीट से ढक दिया गया हो। तभी मुझे उस अदृश्य चीज का ख्याल आया, जिससे कैश्वर ने 25 वीं खिड़की गायब की थी। बस यही सोचने के बाद, मैं उसे चेक करने के लिये मशाल के पास जा पहुंचा और मेरा सोचना बिल्कुल ठीक निकला। कैश्वर ने मशाल की फ्लेम को भी हमें भ्रमित करने के लिये अदृश्य कर रखा था।”

“तो कैप्टेन अब सिर्फ 2 चीजें ही बदलने को बची हैं।” तौफीक ने कहा- “एक तो किताब की तारीख बदल कर मूर्ति की बेड़ियां तोड़नी है और दूसरा मूर्ति का रंग भूरे से हरा करना है बस।”

“तो फिर पहले हमें तुरंत कहीं से रस्सी ढूंढनी होगी।” क्रिस्टी ने कहा।

“तो फिर सबसे पहले इस स्थान को ही ठीक से चेक कर लेते हैं और फिर वापस मुकुट वाले स्थान पर जायेंगे।” ऐलेक्स ने कहा।

सभी ने मशाल वाली जगह को हाथ से टटोलकर ठीक से देख लिया, पर वहां कुछ भी नहीं था।

इसके बाद सभी मुकुट वाले स्थान पर आ गये। पूरा कमरा सबने छान मारा, पर कहीं भी उन्हें रस्सी ना मिली।

यह देख जेनिथ ने हर खिड़की को खोलकर, उसके नीचे बाहर की ओर चेक करना शुरु कर दिया।

आखिरकार जेनिथ को सफलता मिल ही गई। उसका हाथ किसी अदृश्य चीज से टकराया।

“कैप्टेन!” जेनिथ ने खुशी से चीखते हुए कहा- “हम लोग रस्सी ढूंढ रहे थे, पर यहां इस खिड़की के नीचे बाहर की ओर अदृश्य सीढ़ियां हैं, जो कि नीचे किताब तक जा रहीं हैं।” यह सुन सुयश ने राहत की साँस ली।

“पर यह सीढियां तो अदृश्य हैं, बिना देखे इस पर से उतरना खतरे से खाली नहीं है।” क्रिस्टी ने कहा।

“इसीलिये तो मैं आप लोगों के साथ हूं।” शैफाली ने मुस्कुराते हुए कहा- “यह काम भी मुझसे अच्छा कोई नहीं कर सकता।”

सभी को शैफाली का तर्क सही लगा। अब शैफाली ने खिड़की के ऊपर चढ़कर अपना पहला कदम
सीढ़ियों पर रखा।

कुछ ही देर में टटोलते हुए शैफाली किताब तक पहुंच गई। शैफाली ने अब किताब के ऊपर लिखे रोमन अक्षरों को सही से सेट कर दिया।

जैसे ही किताब के अक्षर बदले, मूर्ति के पैर में बंधी बेड़ियां अपने आप खुल गईं। शैफाली धीरे-धीरे वापस ऊपर आ गई।

तभी एका एक स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी के ऊपर काले घनघोर बादल नजर आने लगे और मौसम बहुत ज्यादा खराब हो गया।

सभी आश्चर्य से ऊपर की ओर देख रहे थे, क्यों कि बादल सिर्फ स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी के ही ऊपर थे।
न्यूयार्क की ओर मौसम बिल्कुल साफ नजर आ रहा था।

तभी समुद्र का पानी भी जोर-जोर से ऊपर की ओर उछलने लगा।

“यह मौसम एकाएक कैसे खराब हो गया?” सुयश ने आश्चर्य से ऊपर आसमान की ओर देखते हुए कहा।

तभी अचानक सुयश को कुछ याद आया और वह चीखकर सभी से बोला- “तुरंत यहां से नीचे की ओर भागो, नहीं तो सब मारे जायेंगे।”

“ये आप क्या कह रहे हैं कैप्टेन?” ऐलेक्स ने आश्चर्यचकित होते हुए पूछा- “हमें यहां पर किससे खतरा है?”

“पहले भागो, रास्ते में बताता हूं।” यह कहकर सुयश भी तेजी से सीढ़ियां उतरने लगा।

किसी को कुछ भी समझ में नहीं आया कि सुयश क्यों सबको भागने के लिये कह रहा है, पर फिर भी सभी सुयश के पीछे भागने लगे।

भागते-भागते सुयश ने चिल्ला कर कहा- “यह मूर्ति तांबे की बनी है, जिसके कारण यह मूर्ति आसमान की बिजली को अपनी ओर खींचती है। इसी वजह से पूरे साल में इस पर कम से कम 300 बार बिजली गिरती है। अगर हमारे यहां रहते, वह बिजली इस पर गिरी तो हम झुलस जायेंगे।”

सुयश के शब्द सुन सभी डर गये और तेजी से सीढ़ियां उतरने लगी।

तभी कहीं पानी में जोर की बिजली गिरी, जिसकी वजह से समुद्र के पानी ने मूर्ति को भिगा दिया।

समुद्र के पानी में भीगते ही स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी का रंग भूरे से, हल्का हरा हो गया।

तभी सभी मूर्ति के नीचे मौजूद पत्थर पर पहुंच गये। अभी यह जैसे ही पत्थर के पास पहुंचे, तभी मूर्ति के ऊपर एक जोर की बिजली गिरी।

बिजली के गिरने से तेज प्रकाश चारो ओर फैल गया। अगर सुयश सभी को लेकर समय पर नीचे नहीं आया होता, तो अब तक सभी बिजली में झुलस गये होते।

तभी सुयश की निगाह मूर्ति के हरे रंग पर गई।

“लगता है समुद्र का पानी मूर्ति पर गिरने से ऑक्सीकरण के द्वारा मूर्ति हरी हो गई है।” सुयश ने कहा- “पर अगर मूर्ति हरी हो गई है तो अभी तक यह माया जाल टूटा क्यों नहीं?” सुयश के चेहरे पर आश्चर्य के भाव उभरे।

तभी एक और बिजली आकर मूर्ति पर गिरी। बिजली की रोशनी में सुयश ने जो देखा, उसे देखकर उसकी रुह फना हो गई।

बगल वाली स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी जिंदा हो गई थी और उन्हीं की ओर आ रही थी।

सुयश के चेहरे के भावों को बदलता देख सभी की निगाह उस ओर चली गई, जिधर सुयश देख रहा था।

दूसरी मूर्ति को जिंदा होते देख सबकी हालत खराब हो गई क्यों कि इस समय किसी के भी पास कोई भी चमत्कारी शक्ति नहीं थी और बिना किसी चमत्कारी शक्ति के 151 फुट ऊंची धातु की प्रतिमा को पराजित करना इनमें से किसी के भी बस की बात नहीं थी।

“अब क्या करें कैप्टेन?” क्रिस्टी ने घबराए स्वर में कहा- “बिजली अभी चमकना बंद नहीं हुई है, इसलिये हम मूर्ति के अंदर भी नहीं जा सकते और बाहर रहे तो ये दूसरी मूर्ति हमें मार देगी और इस मूर्ति को हम किसी भी प्रकार से परजित नहीं कर सकते।”

क्रिस्टी की बात तो सही थी, पर पता नहीं क्यों अभी भी सुयश तेजी से कुछ सोच रहा था।

अचानक सुयश जोर से चिल्लाया- “तुम लोग कुछ देर तक इससे बचने की कोशिश करो, मैं देखता हूं कि मैं क्या कर सकता हूं?” यह कहकर सुयश तेजी से सीढ़ियां चढ़कर वापस ऊपर की ओर भागा।

किसी की समझ में नहीं आया कि सुयश क्यों अब मूर्ति के ऊपर जाकर अपनी मौत को दावत दे रहा है, पर अभी सबका ध्यान दूसरी मूर्ति की ओर था।

दूसरी मूर्ति चलती हुई पहली मूर्ति के पास आयी और पानी में हाथ लगाकर उसे गिराने का प्रयत्न करने लगी।

सभी उसे देखकर मूर्ति वाले पत्थर के नीचे छिपकर खड़े हो गये थे।

अभी तक दूसरी मूर्ति की निगाह इनमें से किसी पर नहीं पड़ी थी, इसलिये वह बस पहली मूर्ति को उखाड़ने का प्रयत्न ही कर रही थी।

उधर सुयश लगातार सीढ़ियां चढ़ता जा रहा था, इस समय जैसे उस पर किसी थकान का कोई असर नहीं हो रहा था।

कुछ ही देर में सुयश मूर्ति के मुकुट वाले स्थान पर पहुंच गया, अब वो तेजी से जमीन पर टटोलते हुए जापानी पंखा ढूंढ रहा था।

कुछ देर की मेहनत के बाद सुयश के हाथ वह जापानी पंखा लग गया। सुयश ने तेजी से उस पंखे को वापस बंद कर दिया।

ऐसा करते ही पहली मूर्ति के मुकुट की सारी किरणें सिमट कर एक हो गईं और दूसरी मूर्ति अपनी जगह पर स्थिर हो गई।

तभी फिर से एक जोर की बिजली आसमान से पहली मूर्ति पर गिरी, परंतु आश्चर्यजनक ढंग से वह सारी बिजली बिना सुयश को क्षति पहुंचा ये उस एक किरण से निकलकर दूर पानी में जा गिरी। यह देख सुयश के चेहरे पर मुस्कान खिल गई।

अब उसने जापानी पंखें के द्वारा पहली मूर्ति की किरण को इस प्रकार सेट कर दिया कि अगर अब पहली मूर्ति पर बिजली गिरे तो वह परावर्तित होकर दूसरी मूर्ति पर जा गिरे।

अब बस सुयश को इंतजार था, एक बार फिर से बिजली के पहली मूर्ति पर गिरने का। और इसके लिये सुयश को ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा।

कुछ ही देर में आसमान में फिर जोर की बिजली कड़की और पहली मूर्ति पर आ गिरी।

इसी के साथ पहली मूर्ति के मुकुट में बनी किरण ने, बिजली को संकेन्द्रित करके दूसरी मूर्ति की ओर भेज दिया।

दूसरी मूर्ति पर बिजली गिरते ही वह मूर्ति टूटकर कणों में परिवर्तित हो गई। और इसी के साथ आसमान में छाए घने बादल कहीं गायब हो गए।

अब सुयश ने एक बार फिर से जापानी पंखे का प्रयोग कर पहली मूर्ति की सातो किरणों को पहले के समान कर दिया।

जैसे ही मूर्ति अपने वास्तविक रुप में आयी, मूर्ति जिस पत्थर पर खड़ी थी, उसमें एक नया द्वार खुल गया, जो कि इस बात का प्रमाण था कि तिलिस्मा का यह द्वार भी पार हो चुका है।

अब सभी को बस सुयश के नीचे आने का इंतजार था। जैसे ही सुयश नीचे आया, सभी ने सुयश के नाम का जोर का जयकारा लगाया।

कुछ देर खुशी मनाने के बाद सभी शांत हो गये।

अब ऐलेक्स ने आखिर पूछ ही लिया- “आपने यह सब कैसे किया कैप्टेन?”

“मैंने सोचा कि दूसरी मूर्ति अगर पहली मूर्ति की सब कमियां दूर करने के बाद जिंदा हुई है, तो वापस पहली मूर्ति में कमी लाकर दूसरी मूर्ति को रोका जा सकता था। यही सोचकर मैंने जापानी पंखे के द्वारा मूर्ति के मुकुट में फिर से कमी ला दी, जिससे दूसरी मूर्ति अपने स्थान पर ही रुक गई। अब रही बात उस मूर्ति को नष्ट करने की, तो मैंने यह देखा कि बिजली उस मूर्ति पर नहीं गिर रही है, इसका साफ मतलब था कि वह मूर्ति तांबे से नहीं बनी है।"

“अब बची बात इस मूर्ति की तो तांबा हमेशा नमक वाले पानी से रिएक्शन कर एक बैटरी का रुप ले लेता है और समुद्र के पानी में नमक था, यानि कि जितनी बार बिजली इस मूर्ति पर गिर रही थी, वह इसे चार्ज करती जा रही थी, अब बस उस बिजली को बढ़ाकर सही दिशा देने की जरुरत थी और वह सही दिशा मैंने सभी किरणों को एक करके कर दी। इस प्रकार से नयी गिरी बिजली, मूर्ति में स्टोर की हुई बिजली के साथ संकेन्द्रित होकर एक दिशा में जाने लगी। जिसे देखकर मैंने उस किरण का मुंह दूसरी मूर्ति की ओर कर दिया और इसी के साथ वह दूसरी मूर्ति नष्ट हो गई।”

“वाह कैप्टेन! आपने तो कमाल कर दिया ।” क्रिस्टी ने सुयश की तारीफ करते हुए कहा- “हम तो सोच भी नहीं सकते थे कि इतनी बड़ी मूर्ति को बिना किसी चमत्कारी शक्ति के भी पराजित किया जा सकता है।”

“जिस समय तुमने बिना किसी शक्ति के रेत के सभी जीवों को पराजित किया था, यह भी बिल्कुल वैसे ही था।” सुयश ने क्रिस्टी से कहा- “हमें किसी भी चीज को पराजित करने के लिये सही समय पर सही सोच की जरुरत होती है बस...और वह सही सोच हममें से सबके पास है।”

सुयश के शब्दों से सभी प्रभावित हो गए। कुछ देर बाद सभी अगले द्वार में प्रवेश कर गये।


जारी रहेगा_____✍️
बहुत ही अद्भुत अविस्मरणीय मनमोहक और रोमांचकारी धमाकेदार अपडेट है भाई मजा आ गया
 

Napster

Well-Known Member
7,542
19,723
188
#165.

अंधेरे का देवता:
(16.01.02, बुधवार, 13:50, मकोटा महल, सीनोर राज्य, अराका द्वीप)

लुफासा जब मेलाइट, रोजर और सुर्वया का परिचय पूछ रहा था, तभी मकोटा ने लुफासा को सिग्नल भेजकर अपने महल में बुलवा लिया था।

पर आज पूरा 1 दिन बीत जाने के बाद भी मकोटा, लुफासा से मिला नहीं था। लुफासा इंतजार करते-करते पूरी तरह से परेशान हो गया था, पर मकोटा से वह कुछ कह भी नहीं सकता था।

एक तो मकोटा महल में उन काले भेड़ियों के अलावा कोई था भी तो नहीं, तो लुफासा आखिर पूछता भी तो किससे? कि मकोटा को मिलने में और कितना समय लगेगा? बहरहाल लुफासा के पास और इंतजार करने के अलावा कुछ नहीं था।

आखिरकार एक लंबे इंतजार के बाद, उस कमरे का एक दरवाजा खुला और उसमें से मकोटा चलकर आता दिखाई दिया।

मकोटा को देख लुफासा ने राहत की साँस ली और झुककर मकोटा को अभिवादन किया।

“कल से तुम्हें बुलाने के बाद अचानक से पिरामिड में काम कुछ बढ़ गया था, इसलिये मिलने में कुछ ज्यादा ही समय लग गया। उम्मीद है तुम्हें कोई परेशानी नहीं हुई होगी?” मकोटा ने लुफासा को देखते हुए कहा।

लुफासा का मन किया कि इस मकोटा की गंजी खोपड़ी पर कोई डंडा फेंक कर मार दे, पर उसने अपनी भावनाओं पर काबू करते हुए ‘ना ’ में अपना सिर हिला दिया।

मकोटा लुफासा के सामने पड़ी कुर्सी पर बैठते हुए बोला- “देखो लुफासा, तुम अराका का भविष्य हो। मैं चाहता हूं कि तुम अराका ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण पृथ्वी पर राज करो, बस इसी लिये मैं दिन-रात मेहनत कर रहा हूं। मेरी मेहनत को देखते हुए तुम्हारा भी हक बनता है कि तुम भी पूरे दिल से मेरा साथ दो।....और अब वैसे भी मेरे सपने को पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता....मेरा मतलब है कि तुम्हें राजा बनने से।..... देखो लुफासा, मैंने पिछले कुछ दिनों में तुम्हें कई कार्य सौंपे, पर तुम इतनी शक्तियां होने के बाद भी, किसी भी कार्य में सफल नहीं हो पाये।

“जब मैंने ध्यान से सोचा तो मुझे लगा कि ये तुम्हारी शक्तियों का दोष नहीं है, सिर्फ तुम्हारी मानसिक स्थिति का दोष है। तुम अपने स्वयं के निर्णय लेने में भी बहुत असमंजस में दिखते हो। और ऐसा इसलिये है कि तुम्हें मैं ज्यादा कुछ नहीं बताता। पर आज मैंने तुम्हें सबकुछ बताने का निर्णय लिया है। जिससे आगे भविष्य में तुम अपने अच्छे-बुरे को पहचान सको। ये पहचान सको कि तुम्हारे साथ कौन खड़ा है? और तुम्हारे विरुद्ध कौन है?”

मकोटा के शब्द सुनकर लुफासा और सतर्क हो गया। वह समझ गया कि मकोटा उसके आस-पास कोई और जाल बुनना चाह रहा है।

“तुम मेरे साथ पिरामिड चलो, मैं आज तुम्हें सारा सच बताना चाहता हूं।” यह कहकर मकोटा कुर्सी से उठकर खड़ा हो गया।

मकोटा को उठकर जाते देख लुफासा भी मकोटा के पीछे-पीछे चल दिया।

लुफासा जान गया था कि कुछ भी हो पर आज मकोटा के कई रहस्यों से पर्दा उठने वाला था।

कुछ ही देर में भेड़ियों के रथ पर बैठकर मकोटा और लुफासा सीनोर राज्य में स्थित, उन 4 पिरामिडों के पास पहुंच गये।

मकोटा ने अपना रथ पिरामिड नंबर 4 के पास रोका, यह देख लुफासा हैरान हो गया क्यों कि आज तक उसने किसी को भी पिरामिड नंबर 4 में जाते हुए नहीं देखा था? मकोटा, लुफासा को लेकर पिरामिड नंबर 4 में प्रवेश कर गया।

पिरामिड नंबर 4 के बीच में 2 ताबूत रखे थे। मकोटा लुफासा को लेकर उन्हीं ताबूतों के पास पहुंच गया।
उन ताबूतों का ऊपरी हिस्सा पारदर्शी शीशे का बना था। लुफासा आश्चर्य से उन ताबूतों को देखने लगा।

“तुम्हें पता है लुफासा कि इन ताबूतों में कौन है?” मकोटा ने लुफासा से पूछा।

लुफासा ने अपना सिर ना के अंदाज में हिला दिया।

“इन ताबूतों में ‘मुफासा और कागोशी’ की लाश हैं।” मकोटा ने कहा।

मकोटा के शब्द सुनते ही लुफासा पर बिजली सी गिर गई।

“आपका मतलब है कि इन ताबूतों में मेरे माता-पिता की लाशें हैं?” लुफासा ने शीशे के पास अपना चेहरा लाकर, अंदर झांकते हुए कहा।

“हां ये तुम्हारे माता-पिता की ही लाश हैं, जिन्हें आज से 22 वर्ष पहले सामरा राज्य के राजा कलाट ने मार दिया था।” मकोटा के शब्द रहस्य से भरे थे।

“कलाट ने?” लुफासा कलाट का नाम सुन आश्चर्य से भर उठा।

“चलो मैं तुम्हें शुरु से सुनाता हूं।” लग रहा था कि आज मकोटा सारे रहस्य खोलने के मूड में था-

“तुम्हें पता है कि सामरा और सीनोर के लोगों की औसत आयु 800 वर्ष होती है, पर दोनों ही राज्यों के नियम के अनुसार जिस व्यक्ति को राजा बनाया जाता है, उसे 600 वर्षों तक अपने राज्य पर शासन करना होता है, इस दौरान वह पुत्र या पुत्री उत्पन्न नहीं कर सकता। तो आज से 625 वर्ष पहले भी, इसी प्रकार से सीनोर का राजा मुफासा को और सामरा का राजा कलाट को बनाया गया। तुम तो जानते ही हो कि सामरा और सीनोर की दुश्मनी हजारों वर्षों से चली आ रही थी। इस दुश्मनी की वजह से दोनों ही अपनी शक्तियों को बढ़ाना चाहते थे।

“पर इस कहानी में नया मोड़ तब आया, जब सन् 1908 में मध्य साइबेरिया के जंगलों में एक बहुत बड़ा उल्का पिंड गिरा। मुफासा उस उल्का पिंड की जांच के लिये साइबेरिया जा पहुंचा। वहां पहुंचकर मुफासा को पता चला कि वह कोई उल्का पिंड नहीं, बल्कि बुद्ध ग्रह की एक यान रुपी प्रयोगशाला थी। जिसमें बुद्ध ग्रह के जीव, हरे कीड़े थे, जो कि पृथ्वी पर एक प्रयोग करने आ रहे थे, परंतु पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करते समय, किसी प्रकार उनका यान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वह साइबेरिया के जंगलों में जा गिरे।

“उन बुद्ध ग्रह के हरे कीड़ों ने मनुष्यों से तो अपना यान छिपा लिया, परंतु मुफासा से नहीं छिपा पाये। मुफासा को जब हरे कीड़ों के आने का उद्देश्य पता चला, तो वह उनकी मदद को तैयार हो गया, पर बदले में वह उनके देवता जैगन से मिलना चाहता था। हरे कीड़े सहर्ष ही इस बात पर तैयार हो गये। जैगन से मिलने के बाद यह तय हुआ कि मुफासा पृथ्वी पर हरे कीड़ों की शक्तियों के विस्तार के लिये पिरामिड बनवायेगा और बदले में जैगन उन्हें वैज्ञानिक शक्तियां देकर शक्तिशाली बनायेगा। अब शुरु हुआ धरती पर पिरामिडों का निर्माण। बुद्ध गह की मदद से धरती पर कुल 8 पिरामिडों का निर्माण हुआ, जिसमें 4 पिरामिड सीनोर राज्य में, 2 पिरामिड मैक्सिको में और 2 पिरामिड मिस्र में बनवाये गये।

“ सारा कार्य बहुत गुपचुप तरीके से किया गया। दरअसल हरे कीड़े मनुष्यों के शरीर की ऊर्जा खींचकर, अपना आकार बढ़ाना चाहते थे, जिससे वह हर प्रकार के वातावरण में जिंदा रह सकें। इस कार्य की
शुरुआत के लिये जब जैगन पृथ्वी पर आया, तब तुम और वीनस 2-3 साल के थे। मुफासा का राजा होने का कार्यकाल अब खत्म हो चुका था। मुफासा ने जैगन से काला मोती प्राप्त करने के लिये मदद मांगी, तभी पता नहीं कैसे धरा, मयूर और कलाट ने हमारे इस पिरामिड पर हमला कर दिया।

"जहां एक ओर धरा ने अपनी धरा शक्ति से जैगन को पृथ्वी से बांध दिया, वहीं दूसरी ओर अराका द्वीप के नियमों के विपरीत जाने की वजह से कलाट ने तुम्हारे पिता और माता को मार दिया। सभी के यहां से जाने के बाद, मैंने तुम्हारे माता और पिता के शरीर पर एक रसायन का लेप लगाकर इस ताबूत में रख दिया। मुझे पता था कि जब जैगन जागेगा, तो अपने गुरु ‘कुवान’ की मदद से तुम्हारे माता-पिता को फिर से जिंदा कर देगा क्यों कि जैगन की अंधेरी शक्तियां भी कुवान की ही देन थीं। पर जब 15 वर्षों के बाद भी जैगन नहीं जागा, तो हमने जैगन के सेवक गोंजालो के कहने से, स्वयं अदृश्य शक्तियों के स्वामी कुवान की साधना करनी शुरु कर दी।

“ कुवान के आशीर्वाद से हमें भेड़ियों की फौज और मेरा सेवक वुल्फा मिला। अब हम कुवान के आदेशानुसार काला मोती को प्राप्त करने के लिये, दूसरे पिरामिड से तिलिस्मा के अंदर तक एक सुरंग बना रहे हैं, जिससे हम बिना तिलिस्मा में प्रवेश किये ही काला मोती को प्राप्त कर लें और तुम्हारे माता-पिता को जिन्दा करके कलाट से बदला ले सकें।” यह कहकर मकोटा कुछ देर के लिये रुक गया और ध्यान से लुफासा के चेहरे को देखने लगा।

लुफासा मकोटा की बातें सुनकर बहुत तेजी से कुछ सोच रहा था, यह देख मकोटा फिर से बोल उठा-

“अगर तुम्हें सबकुछ समझ आ गया हो और अगर तुम मेरी बात से सहमत हो तो मुझे बताओ, तब मैं इसके आगे की बात बताऊं?”

“पहले मुझे ये बताये कि ये सारी बातें सनूरा को क्यों नहीं पता ? जबकि वह तो पिछले 600 वर्षों से सीनोर राज्य की सेनापति है।” लुफासा ने अपना शक प्रकट करते हुए कहा।

“मुफासा का साइबेरिया जाना और जैगन से मिलकर पिरामिड बनवाना बहुत ही गुप्त रखा गया था, इस बात का पता तो तुम्हारी माँ कागोशी को भी नहीं था, फिर सनूरा को कैसे होता? और अब रही बात कलाट के तुम्हारे माता-पिता को मारने की बात, तो उस समय सनूरा किसी कार्य से अराका द्वीप से बाहर गई थी? उसके आने के बाद हमने कलाट की बात उसे इसलिये नहीं बताई कि यह बात सुनकर कहीं तैश में आकर सामरा राज्य पर हमला ना बोल दे और उस समय तक सामरा राज्य की शक्तियां हमसे ज्यादा थीं, इसलिये मैं बस समय आने का इंतजार कर रहा था, जिससे उचित समय पर मैं ये सारी बातें तुम्हें स्वयं बता सकूं।” मकोटा ने कहा।

“अब मुझे ये बताइये कि कलाट ने मेरी माँ को क्यों मारा, उसने किसी का क्या बिगाड़ा था?” लुफासा ने क्रोध में आते हुए कहा।

“कलाट ने जब तलवार से तुम्हारे पिता पर हमला किया, उस समय तुम्हारी माँ बीच में आ गई, जिससे वह भी मारी गई।” मकोटा ने कहा।

“जैगन के इस प्रयोग से तो पूरी इंसानियत खतरे में पड़ रही थी, आप लोगों ने जैगन की बात मानने ये पहले ये क्यों नहीं सोचा?” लुफासा ने कहा।

“मनुष्य पहले भी अटलांटियन के आगे कुछ नहीं थे, इसलिये अटलांटियन को कभी भी मनुष्यों की चिंता नहीं रही।....ऐसा मैं नहीं ...तुम्हारे पिता का कहना था। मैं तो बस उनकी आज्ञा का पालन कर रहा था।” मकोटा ने उदास होते हुए कहा।

“ठीक है, अब आप मुझसे क्या चाहते हैं?” लुफासा ने कहा।

“चलो मैं पहले तुम्हें बाकी के पिरामिड दिखाता हूं, फिर कहीं बैठकर बात करेंगे।” यह कहकर मकोटा तीसरे पिरामिड की ओर बढ़ गया।

तीसरे पिरामिड में एक विशाल भेड़िया मानव की मूर्ति लगी थी, जिसके पीछे की ओर एक काँच की लिफ्ट लगी थी। मकोटा उसी लिफ्ट में बैठा कर, लुफासा को जमीन के नीचे की ओर ले गया।

यहां चारो ओर लगभग 20 काँच के कैप्सूल दिखाई दे रहे थे, जिसमें बहुत से विचित्र जीव योद्धा खड़े दिखाई दे रहे थे, परंतु वह सभी निष्क्रिय थे।

“ये सभी योद्धा अलग-अलग जीवों से मिलाकर बनाये गये हैं, जिसे बाद में कुवान अपनी शक्तियों से जीवित करेंगे। यह सभी योद्धा हमें सामरा राज्य से युद्ध में जीत दिलायेंगे।” यह कहकर मकोटा लुफासा को वहां से भी लेकर दूसरे पिरामिड की ओर चल दिया।

यह पिरामिड पिछले 2 पिरामिडों से बड़ा था। दूसरे पिरामिड के एक कमरे में कुछ हरे कीड़े जमीन में सुरंग खोद रहे थे।

एक कमरे में गोंजालो जख्मी हालत में लेटा था, और हरे कीड़े उसका इलाज कर रहे थे।

“यह गोंजालो कैसे जख्मी हो गया, इसके पास तो बहुत सी शक्तियां थीं।” लुफासा ने मकोटा से पूछा।

“आजकल समय ही खराब है...मैंने तुम्हें जिस देवी शलाका से मिलाया था, वह भी झूठी निकली और मेरी कई शक्तियां लेकर भाग गई। उधर गोंजालो जब सामरा राज्य मे छिपकर खबर लाने गया था, तो किसी अज्ञात इंसान ने गोंजालो पर महाशक्ति से हमला कर दिया, बहुत मुश्किल से गोंजालो बचकर वापस आ पाया है।”

मकोटा ने कहा- “मुझे तो यही समझ नहीं आ रहा कि एक इंसान के पास महाशक्ति आयी कैसे?.... उधर गोंजालो का ऊर्जा द्वार, तिलिस्मा के ऊर्जा द्वार से टकरा गया, जिससे तिलिस्मा का कोई जीव भी भाग निकला, पर हम जैसे ही उस द्वार से घुसने चले, वह द्वार पुनः बंद हो गया।”

“तिलिस्मा का ऊर्जा द्वार?” लुफासा ने हैरान होते हुए कहा।

“हां, हमें भी नहीं मालूम था कि पिरमिड के पीछे तिलिस्मा का कोई छिपा ऊर्जा द्वार है, नहीं तो हम पहले ही उस द्वार से छिपकर तिलिस्मा में प्रवेश कर जाते, पर अब तो वह भी बंद हो गया। अब तो सुरंग ही एक
मात्र रास्ता है, अगर वहां भी कोई अड़चन नहीं आयी तो?” मकोटा ने कहा- “बस एक ही चीज हमारे साथ अच्छी हुई है.....ना जाने कैसे धरा शक्ति ने काम करना बंद कर दिया जिससे जैगन होश में आ गया है....
अब अगर तुम और सनूरा भी दिल से हमारा साथ देना शुरु कर दो, तो फिर हम जल्दी ही तुम्हारे माता-पिता को भी जिंदा कर लेंगे और फिर जीत हमारी ही होगी।”

“मैं तो पहले भी आपका साथ दे रहा था, फिर भी मैं आपके हर कार्य को करने के लिये अब अपनी जी-जान लगा दूंगा। आप बस आदेश करें मांत्रिक” लुफासा ने कहा और मकोटा के सामने अपने घुटने टेक कर सिर झुका दिया।

मकोटा ने रहस्य बताने के बहाने लुफासा को अपनी ओर करना चाहा था, लुफासा इस बात को अच्छी तरह से समझ रहा था, पर फिर भी अपने माता-पिता के नाम पर, वह भी मकोटा का साथ देने को मजबूर था।

लुफासा का यह रुप देख मक्कार मकोटा मुस्कुरा दिया....आखिर उसकी चाल कामया ब हो ही गई।


जारी रहेगा_____✍️
बहुत ही शानदार लाजवाब और अद्भुत मनमोहक रोमांचक अपडेट है भाई मजा आ गया
आखिर मकोटा ने लुफासा को अपने मक्कारी के जाल में फसा ही लिया
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
 

kas1709

Well-Known Member
12,851
13,983
228
#178.

काली बिल्ली:
(5 दिन पहले ...... 12.01.02, शनिवार, 11:30, सीनोर राज्य की सीमा, मायावन, अराका द्वीप)

विशाल टेरोसोर अलबर्ट को उठाये आसमान में उड़ा चला जा रहा था। नीचे कुछ नन्हें टेरोसोर आसमान की ओर अपना मुंह उठाये, उस विशाल टेरोसोर के पीछे-पीछे तेज आवाज करते भाग रहे थे।

अलबर्ट का ध्यान टेरोसोर पर कम और नीचे जमीन की ओर ज्यादा था। उसे ऊंचाई से नीचे गिरने का ज्यादा डर दिख रहा था।

अलबर्ट ने अब एक बार ऊपर टेरोसोर के मुंह की ओर देखा। टेरोसोर अपनी लंबी चोंच में पहले से ही किसी जानवर को पकड़े था।

अब अलबर्ट की नजर टेरोसोर के पंजों की ओर गई, तो अलबर्ट हैरान हो गया क्यों कि इस समय टेरोसोर के पंजों में अलबर्ट के शरीर का कोई हिस्सा नहीं था।

वह टेरोसोर अलबर्ट की जैकेट को अपने पंजे से पकड़े था, यानि कि अगर जैकेट को खोल दिया जाता, तो अलबर्ट नीचे गिर सकता था।

यह देख अलबर्ट तेजी से सोचने लगा- “अगर ये टेरोसोर मुझे अपने घोसले में लेकर पहुंच गया? तो मेरा बचना बिल्कुल असंभव है, मुझे इसके पहले ही इस टेरोसोर की पकड़ से छूटना होगा।... वैसे तो जैकेट खोलते ही मैं आजाद हो जाऊंगा, पर इतनी ऊंचाई से नीचे गिरने पर तो मेरी मौत पक्का हो जायेगी.... इसलिये मुझे टेरोसोर के थोड़ा नीचे आने का इंतजार करना होगा।”

नन्हें टेरोसोर अब बहुत पीछे छूट गये थे, पर अलबर्ट को पता था कि वो पीछे से आ रहे होंगे।

तभी अचानक पता नहीं कहां से एक दूसरा विशाल पक्षी आकर, उस टेरोसोर के मुंह में पकड़े जानवर को छीनने की कोशिश करने लगा।

यह देख टेरोसोर ने एक बड़ी सी डाइव मारी और अब थोड़ा नीचे उड़ने लगा।

अलबर्ट को इस समय नीचे घने पेड़ दिखाई दिये और अब उन घने पेड़ों से अलबर्ट की ऊंचाई भी ज्यादा नहीं थी।

इससे अच्छा मौका अलबर्ट को फिर नहीं मिलता, अतः उसने एक झटके से अपनी जैकेट की ‘जिप’ को खोल दिया और अपने हाथ ऊपर की ओर कर लिये।

एक क्षण में ही अलबर्ट की जैकेट उसके शरीर से अलग हो गई और वह तेजी से नीचे घने पेड़ों की ओर गिरने लगा।

किस्मत अच्छी थी कि अलबर्ट का शरीर एक घने पेड़ की शाखाओं में उलझकर रुक गया और वह जमीन पर गिरने से बच गया।

अलबर्ट ने अपने शरीर का बैलेंस बनाया और पेड़ की शाखाओं से छूटकर वहीं बैठ गया।

अलबर्ट की निगाह अब नीचे की ओर जा रही थी। अलबर्ट का अंदाजा सही निकला, कुछ ही देर में चीखते हुए छोटे टेरोसोर उधर से गुजरे।

अगर अलबर्ट पेड़ से नीचे उतर गया होता, तो पक्का उसे इन नन्हें टेरोसोर का शिकार बन जाना था।

कुछ देर तक अलबर्ट नीचे देखता रहा और फिर कोई खतरा ना देख धीरे से नीचे उतर गया।

अब वह सुयश और बाकी सभी लोगों के बारे में सोचने लगा।

उसे पता था कि सभी लोग अब पोसाईडन पर्वत की ओर चले गये होंगे। अगर उन लोगों से मिलना है तो उसे भी पोसाईडन पर्वत की ओर जाना ही होगा।

अलबर्ट जानता था कि वैसे भी, वह अकेले इस भयानक जंगल में ज्यादा दिन तक सुरक्षित नहीं रह सकता।
यह सोच अलबर्ट अंदाजे से ही, पोसाईडन पर्वत की ओर चल दिया।
नीचे काफी सूखी पत्तियां पड़ी थीं, इसलिये अलबर्ट के चलने से वातावरण में तेज आवाज गूंज रही थी।

कुछ आगे चलते ही अलबर्ट का पैर एक गहरे गड्ढे पर पड़ा और वह अपने शरीर का संतुलन खो, तेजी से गहरे गड्ढे में जा गिरा।

पेड़ों की टहनियां और सूखी पत्तियां, गड्ढे के ऊपर पड़े होने की वजह से अलबर्ट को वह गड्ढा दिखाई नहीं दिया था। भला यही था कि उस गड्ढे में कोई पत्थर नहीं था, नहीं तो अलबर्ट का सिर फट जाना था।

अलबर्ट ने अब उस गड्ढे को ध्यान से देखा, वह एक बड़ा सा सूखा कुंआ था।

अलबर्ट को उस कुंए से निकलने का कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था। अभी दिन होने की वजह से सूर्य की थोड़ी रोशनी कुएं में आ रही थी।

तभी अलबर्ट को कुएं में एक दिशा पर एक हल्की रोशनी दिखाई दी। इस रोशनी की किरण ने अलबर्ट के अंदर एक नया उत्साह भर दिया।

वह अब कुएं के उस ओर आ गया, जहां से रोशनी नजर आ रही थी। वहां पहुंचते ही अलबर्ट आश्चर्य से भर गया क्यों कि उस स्थान पर पेड़ों की बेल के पीछे, एक विशाल बिल्ली के मुंह वाली गुफा नजर आ रही थी।

देखने से साफ पता चल रहा था कि यह गुफा किसी इंसान के द्वारा बनायी गई है। अलबर्ट उस बिल्ली वाली गुफा में प्रवेश कर गया।

उस गुफा में चारो ओर पत्थरों से बने अर्द्धचंद्राकार 5 दरवाजे बने थे, जिनके बीच में बहुत से महीन सुराख थे। उन सुराखों से जल की पतली धारा किसी झरने के तरह से गिर रही थी।

पर इस धारा का पानी जमीन पर कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे वह पानी जमीन पर गिरने के पहले ही कहीं गायब हो जा रहा है।

उन अर्द्धचंद्राकार दरवाजों के बीच, एक बिल्ली जैसे मुंह वाली देवी की मूर्ति खड़ी थी। जिसके दोनों हाथ आगे की ओर थे और उन हाथों के बीच एक सुनहरी धातु का पात्र रखा था।

उस पात्र के ऊपर से हवा में, कुछ पानी की बूंदें स्वतः बन रहीं थीं और वह बूंद एक-एक कर उस पात्र में गिर रही थी। पात्र जल से पूरा भरा था, पर फिर भी उसकी बूंदे, पात्र से बाहर नहीं गिर रहीं थीं।

उस देवी ने अपने दाहिने हाथ में एक सुनहरे रंग का ब्रेसलेट पहन रखा था, जो कि दूर से ही चमक रहा था।

उन अर्द्धचंद्राकार दरवाजों के पीछे, पत्थर से बनी दीवारों पर कुछ चित्रकारी की गई थी।

उस प्रत्येक चित्रकारी में चित्र कोई भी हो, पर एक काली बिल्ली को उस पात्र से जल पीते हुए दिखाया गया था।

यह देख अलबर्ट का खुराफाती दिमाग जाग उठा- “अवश्य ही इस पात्र में कोई ना कोई दिव्य जल है, जिसकी महत्वता दीवारों पर चित्रों के माध्यम से दर्शाई गई है। मुझे अवश्य ही इस जल को पीकर देखना चाहिये, भले ही मैं इसे पीने के बाद मैं काली बिल्ली ही क्यों ना बन जाऊं? और वैसे भी अब मैं अपनी पूरी जिंदगी तो जी चुका, फिर इन छोटे-छोटे प्रयोगों से क्या डरना ?” यह सोच अलबर्ट ने देवी के हाथ से उस पात्र को उठाया और पूरा का पूरा जल पी गया।

अलबर्ट ने पूरा जल पीने के बाद देवी के हाथ में कटोरा पुनः वापस रख दिया और ध्यान से अपने शरीर में हो रहे बदलाव को देखने लगा।

पर जब 10 मिनट के अपार निरीक्षण के बाद भी अलबर्ट को अपने शरीर में कोई बदलाव दिखाई नहीं दिया, तो वह निराश हो गया।

“लगता है सबको बेवकूफ बनाने के लिये दीवारों पर चित्रकारी की गई थी।” अलबर्ट ने गुस्साते हुए कहा।

अब अलबर्ट ने देवी के हाथ से वह ब्रेसलेट भी निकाल कर अपने हाथों में पहन लिया।

पर इसके बाद भी जब कुछ ना हुआ तो खीझकर अलबर्ट उस कुएं से निकलने का रास्ता ढूंढने लगा।


प्रश्नावली:

दोस्तों जैसा कि आप देख रहे हैं कि यह कहानी बहुत तेजी से बढ़ता जा रही है और हर पेज पर आपके दिमाग एक नया प्रश्न खड़ा करता जा रहा है।

प्रश्नों की संख्या अब इतनी ज्यादा हो चुकी है कि अब वह मस्तिष्क में एकत्रित नहीं हो पा रहे हैं। तो क्यों न इन सारे प्रश्नों को एक जगह पर एकत्रित कर लें-

1) ‘अटलांटिस का इतिहास‘ नामक किताब ‘लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस में कैसे पहुची ? क्या इसके लेखक वेगा के बाबा कलाट ही थे? क्या इस किताब से और भी राज आगे खुले?

2) माया से विदा लेने के बाद मेरोन और सोफिया का क्या हुआ? क्या माया कैस्पर को उसकी असलियत बता पायी ?

3) क्या जेनिथ सुयश के सामने तौफीक का राज खोल पायी ?

4) क्रिस्टी को नदी की तली से मिली, वह काँच की पेंसिल कैसी थी ?

5) शैफाली को मैग्ना की ड्रेस तक पहुंचाने वाली पेंग्विन और डॉल्फिन क्या थीं ?

6) पंचशूल का निर्माण किसने और क्यों किया था ?

7) ऐमू के अमरत्व का क्या राज है?

8) जैगन का सेवक गोंजालो कौन था ? क्या उसकी मूर्ति में भी कोई राज छिपा था ?

9) क्या सनूरा की शक्तियों का राज एक रहस्यमय बिल्ली है?

10) मैग्ना का ड्रैगन, लैडन नदी की तली में क्यों सो रहा था ? मेलाइट उसे क्यों जगाना चाहती थी ?

11) उड़नतश्तरी के अंदर मौजूद 6 फुट का हरा कीड़ा बाकी कीड़ों से अलग क्यों था? वह इंसानों की तरह कैसे चल रहा था?

12) मकोटा के सर्पदंड का क्या रहस्य था?

13) सागरिका, वेगिका, अग्निका आदि चमत्कारी पुस्तकों का क्या रहस्य था?

14) माया सभ्यता का अंत किस प्रकार हुआ?

15) माया को इतनी सारी देवशक्तियां कहां से प्राप्त हुईं?

16) कौन था ‘ओरस’? जिसे फेरोना ग्रह का राजा एलान्का ढूंढ रहा था।

17) क्या था फेरोना ग्रह के जनक, पेन्टाक्स का रहस्य?

18) क्या थी एण्ड्रोवर्स पावर? जिसके हरे ग्रह पर भेजने से एलान्का गुस्सा रहा था।

19) कौन थी रेने? जिसे एलान्का ने एण्ड्रोनिका का प्रतिनिधित्व करने को कहा था ? उसके पास कैसी शक्तियां थीं?

20) क्या शलाका आर्यन के पुत्र को ढूंढने अवन्ती राज्य गई?

21) कहां था आर्यन का पुत्र? क्या वह अब भी अष्टकोण में बंद था? या किसी ने उसे निकाल लिया था?

22) अष्टकोण के साथ रखी उस अमृत की दूसरी बूंद का क्या हुआ?

23) एण्ड्रोनिका में एलनिको और एनम के सिवा कितनी शक्तियां और थीं?

24) एण्ड्रोनिका में जाने के बाद धरा और मयूर का क्या हुआ?

25) गोंजालो का ऊर्जा द्वार, तिलिस्मा के ऊर्जा द्वार से कैसे टकरा गया?

26) कैश्वर अंतरिक्ष से किसे बुलाना चाह रहा था?

27) माया ने कैस्पर से किस प्रकार से, महाविनाश की तैयारी करने की बात की थी?

28) महावृक्ष के स्वप्नतरु में कितने रहस्य छिपे थे?

29) सुनहरी ढाल और तलवार से ‘आकृति’ देवराज इंद्र से कैसे वरदान मांगना चाहती थी?

30) विक्रम बर्फ के गोले में कैसे पहुंच गया? उसकी स्मृति कैसे चली गई थी? जबकि वह एक अमर योद्धा था।

31) क्या विक्रम आकृति की दी हुई नीली अंगूठी उतारकर वारुणी से सम्पर्क कर सका?

32) क्या ओरैकल से मिलने के बाद आर्टेमिस ने आकृति का पीछा करना बंद कर दिया था?

33) क्या मुफासा और कागोशी को सच में कलाट ने मारा था?

34) कौन था जैगन का गुरु कुवान? क्या मकोटा को वुल्फा उसी से मिला था?

35) तीसरे पिरामिड में कुवान की मूर्ति के नीचे खड़े निष्क्रिय जीव योद्धा कौन थे?

36) क्या मकोटा सुरंग के रास्ते तिलिस्मा में प्रवेश कर सका?

37) क्या जैगन धरा के बेहोश होने की वजह से जाग गया था?

38) कौन था वह विचित्र जीव? जिसने आसमान से सभी पंक्षियों को मारकर वांशिगटन डी.सी. पर गिरा दिया था? क्या समुद्री जीवों को भड़काना भी उसी की हरकत थी?

39) क्या मेलाइट, रोजर को कस्तूरी मृग का रहस्य बता पाई?

40) वेदालय की देवशक्तियों का क्या रहस्य था?

41) सुर्वया के सिंहलोक में ‘चतुर्भुज सिंहराज’, शुभार्जना और दिव्यदृष्टि जैसी शक्तियां कहां से आयीं थीं? सुर्वया ने अपने परिवार के बारे में क्यों नहीं बताया?

42) क्या थी सीनोर द्वीप पर आयी वह अंजानी मुसीबत? जो कि एक विशाल आकृति में समुद्र की लहरों पर मौजूद थी।

43) क्या लुफासा और वीनस को मिलने वाला वह लाल रंग का पत्थर मैग्ना की जीवशक्ति ही थे?

44) क्या था उस रक्त भैरवी की डिबिया के अंदर, जिसे नीलाभ ने हनुका को दिया था?

45) कैश्वर के बनाए प्राणियों में भावनाओं का संचार कैसे शुरु हो गया था?

46) क्या विद्युम्ना की त्रिशक्ति, महावृक्ष के द्वारा बनाये गये भ्रमजाल से भी ज्यादा खतरनाक थीं?

47) बिल्ली वाली देवी के, पात्र के जल और ब्रेसलेट का क्या रहस्य था?

48) कैसा था तिलिस्मा का आगे का मायाजाल? क्या वह आगे और कठिन होता गया?

49) क्या त्रिकाली और व्योम, त्रिशाल और कलिका को विद्युम्ना के भ्रमन्तिका से छुड़ा पाये?

50) क्या तिलिस्मा में घुसे सभी लोग तिलिस्मा को पार कर काला मोती प्राप्त कर सके?

51) क्या था इन अद्भुत देवशक्तियों का रहस्य?

ऐसे ही ना जाने कितने सवाल होंगे जो आपके दिमाग में घूम रहे होंगें।

तो इंतजार कीजिए हमारे अगले भाग का जिसका नाम है-
“अद्भुत दिव्यास्त्र” जिसमें हम आपको ले चलेंगे, देवताओं के एक ऐसे अद्भुत संसार में, जहां पर दिव्यास्त्रों की उत्पत्ति के रहस्य छिपे हैं....................


कृति का संकलन हूं, नये शब्दों का संचार हूं मैं, अनकही गाथा हूं, या मस्तिष्क का विचार हूं मैं, मेरे कथनों की कल्पना का सागर असीम है,
लफ्जों में बिखरी हुई, वीणा की झंकार हूं मैं, मत दीजिये मेरे अलफाजों को पंक्तियों की चुनौती,
जो रुह को महका दे, फजा में बिखरी वो बयार हूं मैं, मेरा वजूद छाया है अनंत ब्रह्मांड की गहराई में सिमटा संसार हूं मैं”

दोस्तों जिस प्रकार इन्द्रधनुष में सात रंग होते हैं, ठीक उसी प्रकार लेखक की रचनाओं में भी सात रंग पाये जाते हैं। हर रंग अपने आप में एक अलग पहचान रखता है।


दोस्तों आप सबके सपोर्ट और रिव्यू ही मुझे ओर भी अधिक लिखने को प्रेरित करते है। तो अपना कीमती समय निकालकर कुछ शब्द लिखते रहिए। (राज शर्मा)
Nice update....
 

Napster

Well-Known Member
7,542
19,723
188
#166.

चैपटर-9
सपनों का संसार:
(तिलिस्मा 3.3)

सुयश के साथ सभी अगले द्वार में प्रवेश कर गये।

तिलिस्मा के इस द्वार में प्रवेश करते ही सभी को लगभग 100 फुट ऊंची एक किताब दिखाई दी। जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘सपनों का संसार’ लिखा था।

उस किताब में एक दरवाजा भी लगा था। दरवाजे के अंदर कुछ सीढ़ियां बनीं थीं, जो कि ऊपर की ओर जा रहीं थीं। सभी उस दरवाजे में प्रवेश कर गये और सीढ़ियां चढ़कर ऊपर की ओर चल दिये।

लगभग 50 सीढ़ियां चढ़ने के बाद सभी को फिर से एक दरवाजा दिखाई दिया। सभी उस दरवाजे से अंदर प्रवेश कर गये।

अब वह सभी एक ऊंचे से प्लेटफार्म पर खड़े थे और ऊपर आसमान की ओर ऐसे सैकड़ों प्लेटफार्म दिखाई दे रहे थे।

हर प्लेटफार्म के चारो ओर कुछ सीढ़ियां और 2 दरवाजे बने थे। सारे प्लेटफार्म हवा में झूल रहे थे।

“यह सब क्या है? और हमें जाना कहां है?” ऐलेक्स ने सुयश को देखते हुए कहा।

“पता नहीं, पर मुझे लगता है कि हमें अपने सामने मौजूद दूसरे दरवाजे में घुसने पर ही पता चलेगा कि हमें जाना कहां है?” सुयश ने कहा।

यह सुनकर क्रिस्टी अपने सामने मौजूद दरवाजे में प्रवेश कर गई, अब क्रिस्टी उनसे काफी ऊंचाई पर बने दूसरे प्लेटफार्म पर दिखाई दी।

“कैप्टेन आप लोग भी ऊपर आ जाइये, मुझे लगता है कि हमें इन प्लेटफार्म के द्वारा ही ऊपर की ओर जाना है।” क्रिस्टी ने तेज आवाज में कहा।

क्रिस्टी की आवाज सुन सभी उस दरवाजे में प्रवेश कर गये।

इसी प्रकार कई बार अलग-अलग दरवाजों में प्रवेश करने के बाद, आखिरकार उनका दरवाजा एक बादल के ऊपर जाकर खुला।

जैसे ही सभी बादल के ऊपर खड़े हुए, वह दरवाजा और प्लेटफार्म दोनों ही गायब हो गये।

अब सभी ने अपने चारो ओर नजर डाली। इस समय वह सभी जिस बादल पर खड़े थे, वह लगभग 200 वर्ग फुट का था और बिल्कुल सफेद था।

उस बादल से 100 मीटर की दूरी पर एक बड़ा सा गोला सूर्य के समान चमक रहा था, उसकी रोशनी से ही पूरा क्षेत्र प्रकाशमान था।

“क्या वह कृत्रिम सूर्य है?” जेनिथ ने उस सूर्य के समान गोले की ओर देखते हुए कहा।

“लगता है कैश्वर ने यह द्वार कुछ अलग तरीके से बनाया है।” सुयश ने कहा- “वह सामने का गोला कृत्रिम सूर्य है, जो सूर्य के समान ही रोशनी दे रहा है। हम इस समय बादलों के ऊपर खड़े हैं। पर इन दोनों के अलावा यहां पर कुछ नजर नहीं आ रहा। ना तो बाहर निकलने का कोई दरवाजा दिख रहा है और ना ही यह समझ में आ रहा है कि यहां पर करना क्या है?”

तभी शैफाली की नजर आसमान की ओर गई। आसमान पर नजर पड़ते ही शैफाली आश्चर्य से भर उठी।

“कैप्टेन अंकल, जरा ऊपर आसमान की ओर देखिये, वहां पर बहुत कुछ विचित्र सा है?” शैफाली ने सुयश को आसमान की ओर इशारा करते हुए कहा। शैफाली की बात सुन सभी ने आसमान की ओर देखा।

अब सभी अपना सिर उठाये विस्मय से ऊपर की ओर देख रहे थे।

“यह आसमान में क्या चीजें बनी हैं?” ऐलेक्स ने बड़बड़ाते हुए कहा।

“मुझे लग रहा है कि हमारे सिर के ऊपर आसमान नहीं बल्कि जमीन है, आसमान पर तो हम लोग खड़े हैं, यानि कि यहां पर सब कुछ उल्टा-पुल्टा है।” क्रिस्टी ने कहा।

“सब लोग जरा ध्यान लगाकर देखो कि वहां ऊपर क्या-क्या चीजें है?” सुयश ने सभी से कहा।

“कैप्टेन मुझे वहां एक खेत दिखाई दे रहा है, जिस में एक किसान बीज बो रहा है।” तौफीक ने कहा।

“मुझे उस खेत के बाहर 5 मूर्तियां दिखाई दे रहीं हैं, शायद वह किसी देवी-देवता की मूर्तियां हैं, उन मूर्तियों पर कुछ लिखा भी है, पर यह भाषा मैं पढ़ना नहीं जानती।” जेनिथ ने कहा।

“वह मूर्तियां सूर्य, चंद्र, इंद्र, पवन और पृथ्वी की हैं।” सुयश ने मूर्तियों की ओर देखते हुए कहा- “और उस पर हिंदी भाषा में लिखा है।” यह कहकर सुयश ने सभी को उन देवी देवताओं के बारे में बता दिया।

“कैप्टेन खेत से कुछ दूरी पर एक बड़ा सा तालाब बना है, जिससे समुद्र जैसी लहरें उठ रहीं हैं।” ऐलेक्स ने कहा- और उसके सामने एक बड़ा सा कमरा बना है, जिस पर एक तीर ऊपर की ओर मुंह किये हुए लगा है। उस तीर के सामने एक बड़ी सी पवनचक्की जमीन पर गिरी पड़ी है।”

“यह तो कोई बहुत अजीब सी पहेली लग रही है....क्यों कि ना तो हम सूर्य के पास जा सकते हैं और ना ही ऊपर जमीन की ओर.....और इन बादलों में कुछ है नहीं?...फिर इस पहेली को हल कैसे करें?” क्रिस्टी ने कहा।

सभी बहुत देर तक सोचते रहे, परंतु किसी को कुछ समझ नहीं आया कि करना क्या है? तभी जेनिथ की निगाह सूर्य की ओर गई।

“कैप्टेन सूर्य अपना रंग बदल रहा है...अब वह सुनहरे से सफेद होता जा रहा है।” जेनिथ ने कहा।

जेनिथ की बात सुन सभी सूर्य की ओर देखने लगे। जेनिथ सही कह रही थी, सूर्य सच में एक किनारे से सफेद हो रहा था।

“मुझे लग रहा है कि सूर्य धीरे-धीरे चंद्रमा में परिवर्तित हो रहा है।” शैफाली ने कहा- “यानि दिन के समय यही सूर्य बन जाता है और रात को यही चंद्रमा बन जाता है।”

“मुझे लगता है कि हमें थोड़ी देर और इंतजार करना चाहिये, हो सकता है कि रात होने पर चंद्रमा हमें कोई मार्ग दिखाए?” तौफीक ने कहा।

तौफीक की बात सुन सभी आराम से वहीं सफेद बादल पर बैठ गये।

धीरे-धीरे सूर्य पूरी तरह से चंद्रमा में परिवर्तित हो गया, अब सभी ध्यान से चंद्रमा को देखने लगे।

“कैप्टेन चंद्रमा में एक द्वार बना है, मुझे लगता है कि हमें उसी द्वार से बाहर जाना है।” जेनिथ ने कहा।

“चलो एक परेशानी तो दूर हुई, कम से कम ये तो पता चला कि हमें जाना कहां है?” सुयश ने खुशी भरे शब्दों में कहा- “अब हमें बस चंद्रमा तक जाने का रास्ता ढूंढना है। क्यों कि इन बादलों से चंद्रमा के बीच सिर्फ हवा ही है।”

“मुझे लगता है कि हमें यहां से कूद कर जमीन तक जाना होगा, चंद्रमा का रास्ता अवश्य ही नीचे से होगा।” ऐलेक्स ने कहा।

“अरे बुद्धू, हम खुद ही नीचे हैं, कूदने से ऊपर कैसे चले जायेंगे?” क्रिस्टी ने ऐलेक्स से हंस कर कहा।

“तो फिर अगर कोई चीज इन बादलों से गिरे तो वह कहां जायेगी? हमसे भी नीचे....या फिर ऊपर जमीन की ओर?” ऐलेक्स की अभी भी समझ में नहीं आ रहा था।

“रुको अभी चेक कर लेते हैं।” यह कहकर क्रिस्टी ने अपनी जेब में रखा एक फल निकाला और उसे कुछ दूरी पर फेंक दिया।

वह फल नीचे जाने की जगह तेजी से ऊपर जमीन की ओर चला गया।

“अब समझे, जमीन और उसका गुरुत्वाकर्षण ऊपर की ओर ही है, हम लोग सिर्फ ऊंचाई पर खड़े हैं और हमें उल्टा दिख रहा है बस। ....और अगर तुमने यहां से कूदने की कोशिश की तो तुम्हारी हड्डियां भी टूट जायेंगी या फिर तुम मर भी सकते है, क्यों कि हमारी ऊंचाई बहुत ज्यादा है।” क्रिस्टी ने ऐलेक्स को समझाते हुए कहा।

सुयश ने कहा- “मुझे तो लगता है कि अवश्य ही अब इन बादलों में कुछ ना कुछ छिपा है...खाली हाथ तो हम लोग इस द्वार को पार नहीं कर पायेंगे।”

सुयश की बात सुन सभी उस सफेद बादल में हाथ डालकर, टटोल कर कुछ ढूंढने की कोशिश करने लगे।

तभी शैफाली का हाथ बादल में मौजूद किसी चीज से टकराया। शैफाली ने उस चीज को खींचकर निकाल लिया। वह एक 3 फुट का वर्गाकार शीशा था।

“पहले मेरे दिमाग में यह बात क्यों नहीं आयी।” सुयश ने शीशे को देख अपने सिर पर हाथ मारते हुए कहा- “और ढूंढो...हो सकता है कि कुछ और भी यहां पर हो ?”

तभी जेनिथ ने खुशी से कहा- “कैप्टेन, मुझे यह छड़ी मिली है।” सुयश ने जेनिथ के हाथ में थमी छड़ी को देखा। वह एक साधारण लकड़ी की छड़ी लग रही थी।

सभी फिर से बादलों से कुछ और पाने की चाह में उन बादलों का मंथन करने लगे। पर काफी देर ढूंढने के बाद भी बादलों से कुछ और ना मिला।

“यहां तो सिर्फ एक शीशा और छड़ी थी, इन दोनों के द्वारा भला हम चंद्रमा तक कैसे पहुंच सकते हैं?” क्रिस्टी ने कहा।

“इन दोनों के द्वारा हम चंद्रमा तक नहीं पहुंच सकते, पर इनका कुछ ना कुछ तो उपयोग है।” यह कहकर सुयश ने शीशे को चंद्रमा की रोशनी की ओर कर दिया, पर उसमें चंद्रमा की परछाईं दिखने के सिवा कुछ नहीं हुआ।

धीरे-धीरे कई घंटे और बीत गये। अब चंद्रमा फिर से सूर्य में परिवर्तित होने लगा।

सूर्य की पहली किरण सुयश के माथे से आकर टकराई, तभी सुयश के दिमाग में एक विचार कौंधा।

अब सुयश ने शैफाली से शीशा लेकर सूर्य की दिशा में कर दिया।

सूर्य की किरणें शीशे से टकरा कर परावर्तित होने लगीं। अब सुयश ने जमीन की ओर ध्यान से देखा।

खेत में बैठा किसान बीज बोने के बाद, बार-बार ऊपर बादलों की ओर देख रहा था। कभी-कभी वह अपने माथे पर आये पसीने को, अपने कंधे पर रखे कपड़े से पोंछ रहा था।

अब सुयश की निगाह इंद्र की मूर्ति पर पड़ी। इंद्र की मूर्ति देखने के बाद सुयश के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई।

सुयश की मुस्कान देखकर सभी समझ गये कि सुयश को अवश्य कोई ना कोई उपाय मिल गया है?

“कुछ समझ में आया तुम लोगों को?” सुयश ने सभी से पूछा। सभी ने ना में सिर हिला दिया।

यह देख सुयश ने बोलना शुरु कर दिया- “मुझे भी अभी सबकुछ तो समझ में नहीं आया है, पर उस किसान को देखकर यह साफ पता चल रहा है कि उसे बीज बोने के बाद बारिश का इंतजार है और वह बारिश हमें करानी पड़ेगी।”

“यह कैसे संभव है कैप्टेन? हम भला बारिश कैसे करा सकते हैं?” तौफीक ने सुयश का मुंह देखते हुए आश्चर्य से पूछा।

“संभव है....मगर पहले मुझे ये बताओ कि धरती पर बारिश होती कैसे है?” सुयश ने उल्टा तौफीक से ही सवाल कर दिया।

“समुद्र का पानी, सूर्य की गर्मी से वाष्पीकृत होकर, बादलों का रुप ले लेता है और बादल जब आपस में टकराते हैं या फिर उनमें पानी की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो वह बूंदों के रुप में धरती की प्यास बुझाते हैं।” तौफीक ने कहा।

“अब जरा जमीन की ओर देखो। सूर्य की रोशनी उस तालाब के ऊपर नहीं पड़ रही है, इसीलिये किसान के खेत पर बारिश नहीं हो रही है।” सुयश ने तालाब की ओर इशारा करते हुए कहा।

“पर हम सूर्य की रोशनी को तालाब की ओर कैसे मोड़ पायेंगे?” क्रिस्टी के चेहरे पर उलझन के भाव नजर आये।

“इस शीशे की मदद से।” सुयश ने कहा- “इसकी मदद से हम सूर्य के प्रकाश को परावर्तित कर उस तालाब पर डाल सकते हैं।”

“पर यह प्रक्रिया तो बहुत लंबी चलती है। क्या हमें शीशा इतनी देर तक पकड़े रखना पड़ेगा?” ऐलेक्स ने पूछा।

“पता नहीं कितना समय लगेगा, पर इसके सिवा दूसरा कोई रास्ता भी नहीं है?” यह कहकर सुयश ने शीशे को इस प्रकार पकड़ लिया, कि अब सूर्य की रोशनी उससे परावर्तित होकर तालाब पर जाकर पड़ने लगी।

लगभग 2 घंटे की अपार सफलता के बाद, तालाब का पानी वाष्पीकृत होकर बादलों का रुप लेने लगा।

यह देख सभी में नयी ऊर्जा का संचार हो गया। अब सभी बारी-बारी शीशे को पकड़ रहे थे।

अब उनके सफेद बादल का रंग धीरे-धीरे काला होने लगा।

लगभग आधे दिन के बाद उनके बादलों का रंग पूर्ण काला हो गया। अब उस बादल के बीच बिजली भी कड़क रही थी, पर आश्चर्यजनक तरीके से वह बिजली इनमें से किसी को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा रही थी।

बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली की चमक देख किसान खुशी से नाचने लगा।

पर बादलों को बरसाना कैसे था? यह किसी को नहीं पता था?

सुयश की निगाह अब जेनिथ के हाथ में पकड़ी छड़ी की ओर गई। सुयश ने वह छड़ी जेनिथ के हाथ से ले ली।

सुयश ने बादल पर जैसे ही वह छड़ी मारी, बादल से जोर की आवाज करती बिजली निकली और जमीन पर स्थित उस घर के ऊपर बने तीर में समा गई।

सुयश ने 2-3 बार ऐसे ही किया। अब बादल से तेज मूसलाधार बारिश शुरु हो गई और धरा की प्यास बुझाने, पृथ्वी की ओर जाने लगी।

बहुत ही विचित्र नजारा था। बादलों से निकली हर बूंद ऊपर की ओर जा रही थी।

तभी सूर्य के सतरंगी प्रकाश से आसमान में एक बड़ा इंद्रधनुष बन गया। सभी को पता था कि यह सब कुछ असली नहीं है, फिर भी वह सभी मंत्रमुग्ध से प्रकृति के इस सुंदर दृश्य को निहार रहे थे।

बूंदों ने अब किसान के खेत पर बरसना शुरु कर दिया। बूंदों के पड़ते ही अचानक किसान का बोया हुआ बीज अंकुरित हो गया।

कुछ ही देर में वह अंकुरित बीज एक लता का रुप ले उस बादल की ओर बढ़ने लगा।

सभी आश्चर्य से उस पृथ्वी के पौधे को बढ़ता हुआ देख रहे थे। 10 मिनट में ही उस लता धारी वृक्ष ने, बादलों से पृथ्वी तक एक विचित्र पुल का निर्माण कर दिया।

तभी वह शीशा और छड़ी गायब हो गये।

“यही है वह रास्ता, जिससे होकर हमें पृथ्वी तक पहुंचना है।” सुयश ने धीरे से पेड़ की लताओं को पकड़ा और सरककर नीचे जाने लगा।

सुयश को ऐसा करते देख, सभी उसी प्रकार से सुयश के पीछे आसमान से उतरने लगे। कुछ ही देर बाद सभी जमीन पर थे।

“अब जाकर कुछ बेहतर महसूस हुआ।” ऐलेक्स ने लंबी साँस छोड़ते हुए कहा- “ऊपर से उल्टा देखते-देखते दिमाग चकरा गया था।

सुयश ने अब खेत के चारो ओर देखा। सभी के बादलों से उतरते ही वह पेड़ और किसान दोनों ही गायब हो गये थे।

सुयश सभी को लेकर खेत से बाहर आ गया। बाहर अब 2 ही मूर्तियां दिख रहीं थीं।

“कैप्टेन, यह 3 मूर्तियां कहां गायब हो गईं?” क्रिस्टी ने कहा।

“जिन मूर्तिंयों का कार्य खत्म हो गया, वह मूर्तियां स्वतः गायब हो गयीं। जैसे सूर्य की मूर्ति का कार्य सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करने तक था। इंद्र की मूर्ति का कार्य बिजली और बारिश तक ही सीमित था और पृथ्वी की मूर्ति का कार्य पेड़ को बड़ा होने तक था।” सुयश ने सभी को समझाते हुए कहा।

“इसका मतलब अब चंद्र और पवन का काम बचा है।” जेनिथ ने कहा।

“बिल्कुल ठीक कहा जेनिथ...और इन्हीं 2 मूर्तियों के कार्य के द्वारा ही हम तिलिस्मा के इस द्वार को पार कर पायेंगे।” सुयश ने जेनिथ को देखते हुए कहा- ‘चलो सबसे पहले उस जमीन पर पड़ी पवनचक्की को
देखते हैं। जरुर उसी से हमें चंद्रमा तक जाने का रास्ता मिलेगा।”

सभी को सुयश की बात सही लगी, इसलिये वह तालाब के किनारे स्थित उस मैदान तक जा पहुंचे, जहां पर जमीन पर वह पवनचक्की पड़ी थी।

पवनचक्की का आकार काफी बड़ा था। उस पवनचक्की के बीच में एक गोल प्लेटफार्म बना था। उस प्लेटफार्म पर चढ़ने के लिये सीढियां बनीं थीं।

सभी सीढ़ियां चढ़कर उस प्लेटफार्म के ऊपर आ गये। प्लेटफार्म के ऊपर एक बड़ा सा लीवर लगा था।

प्लेटफार्म का ऊपरी हिस्सा जालीदार था, जो कि एक मजबूत धातु से बना लग रहा था। उस जालीदार हिस्से के नीचे नीले रंग का कोई द्रव भरा हुआ था।

“वह द्रव किस प्रकार का हो सकता है?” तौफीक ने कहा - “वह ऐसी जगह पर रखा है जो कि पूरी तरह से बंद है इसलिये हम सिर्फ उसे देख ही सकते हैं।”

“मैं उस द्रव को सूंघ भी सकता हूं।” ऐलेक्स ने अपनी नाक पर जोर देते हुए कहा- “वह किसी प्रकार का ‘कास्टिक’ है, जिससे साबुन बनाया जाता है।”

“साबुन???” जेनिथ ने आश्चर्य से कहा- “साबुन का यहां क्या काम हो सकता है?”

“कोई भी काम हो...पर अब यह तो श्योर हो गया है कि यही पवनचक्की हमें चंद्रमा तक पहुंचायेगी क्यों कि एक तो यह बिल्कुल सूर्य के नीचे है और दूसरा अभी पवनदेव का काम बचा हुआ है....अब बस ये देखना है कि इस पवनचक्की को शुरु कैसे करना है?” सुयश ने कहा- “चलो चलकर उस कमरे को भी देख लें, हो सकता है कि पवनचक्की का नियंत्रण उसी कमरे में ही हो?”

सभी पवनचक्की के पास बने, उस कमरे के अंदर आ गये। कमरे में एक बहुत बड़ी सी मशीन रखी थी, जिसमें कुछ लाल रंग की लाइट जल रहीं थीं।

सुयश ने ध्यान से पूरी मशीन को देखा और फिर बोल उठा- “पवनचक्की इस मशीन से ही चलेगी। इस कमरे की छत पर जो तीर लगा है, असल में वह तड़ित-चालक (लाइटनिंग अरेस्टर) है, जिसका प्रयोग नये भवनों के निर्माण में किया जाता है।

"तड़ित चालक भवनों के ऊपर गिरने वाली आसमानी बिजली को, जमीन के अंदर भेज कर भवनों की सुरक्षा करता है। पर इस कमरे पर लगे, तड़ित-चालक पर जब बिजली गिरी तो उसने सारी बिजली को इस मशीन में सुरक्षित कर लिया था। अब उसी बिजली के द्वारा पवन-चक्की को हम चला सकते हैं और वह पवनचक्की हमें किसी ना किसी प्रकार से चंद्रमा पर भेज देगी।”

“इसका मतलब इसे शुरु करने के बाद हमें पवनचक्की पर मौजद उस प्लेटफार्म पर जाकर खड़े होना होगा और वहां मौजूद लीवर को दबाते ही, पवनचक्की हमें चंद्रमा पर भेज देगी।” क्रिस्टी ने कहा।

“बिल्कुल ठीक कहा क्रिस्टी...जरुर ऐसा ही होगा।” जेनिथ ने भी क्रिस्टी की हां में हां मिलाते हुए कहा।

“तो फिर देर किस बात की, चलिये मशीन को शुरु करके एक बार देख तो लें।” ऐलेक्स ने कहा।

सुयश ने सिर हिलाया और मशीन से कुछ दूरी पर लगे, एक ऑन बटन को दबा दिया, पर ऑन बटन के दबाने के बाद भी मशीन शुरु नहीं हुई।

अब सुयश फिर ध्यान से उस मशीन के मैकेनिज्म को समझने की कोशिश करने लगा।

“यह मशीन ऐसे स्टार्ट नहीं होगी।” नक्षत्रा ने जेनिथ को समझाते हुए कहा- “इस मशीन का कोई भी कनेक्शन ऑन बटन के साथ नहीं है, इसका मतलब मशीन के ऑन बटन को स्टार्ट करने के लिये कोई और तरीका है....जेनिथ जरा एक बार कमरे में पूरा घूमो...मैं देखना चाहता हूं कि यहां और क्या-क्या है?”

नक्षत्रा के ऐसा कहने पर जेनिथ कमरे में चारो ओर घूमने लगी।

तभी एक छोटी सी मशीन को देख नक्षत्रा ने जेनिथ को रुकने का इशारा किया- “यह मशीन टरबाइन की तरह लग रही है, और यही छोटी मशीन, एक तार के माध्यम से ऑन बटन के साथ जुड़ी है...तुम एक काम करो सुयश को यह सारी चीजें बता दो, मैं जानता हूं कि वह समझ जायेगा कि उसे आगे क्या करना है?”

जेनिथ ने नक्षत्रा की सारी बातें सुयश को समझा दीं।

“ओ.के. टरबाइन को चलाने के लिये हमें किसी सोर्स की जरुरत होती है, फिर चाहे वह हवा हो या फिर पानी.....पानी....बिल्कुल सही, ये टरबाइन तालाब की लहरों से स्टार्ट किया जा सकता है और देखो इसका तार भी बहुत लंबा है।”

सुयश अब तौफीक और ऐलेक्स की मदद से उस भारी टरबाइन को लेकर तालाब के किनारे आ गया।

तालाब के किनारे टरबाइन को रखने का एक प्लेटफार्म भी बना था, पर इस समय तालाब का पानी बिल्कुल शांत था।

यह देख सुयश का चेहरा मुर्झा सा गया।

“क्या हुआ कैप्टेन? आप उदास क्यों हो गये?” ऐलेक्स ने कहा- “आपने तो कहा था कि तालाब के पानी से यह टरबाइन चलायी जा सकती है?”

“जब हम ऊपर बादलों पर थे, तो तालाब का पानी किसी समुद्र की लहर की भांति काम कर रहा था, पर अभी यह बिल्कुल शांत है और टरबाइन को चलाने के लिये हमें लहरों की जरुरत पड़ेगी।” सुयश ने कहा।

“कैप्टेन अंकल, आप परेशान मत होइये, मैं जानती हूं कि तालाब का पानी अभी शांत क्यों है?” शैफाली ने कहा।

शैफाली के शब्द सुन सुयश आश्चर्य से शैफाली की ओर देखने लगा।

“कैप्टेन अंकल समुद्र की लहरों के लिये चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण ही जिम्मेदार माना जाता है और आप देख रहे हैं कि अभी दिन है और आसमान में सूर्य निकला हुआ है। मुझे लगता है कि जैसे ही शाम होगी और आसमान में चंद्रमा निकलेगा, तालाब का पानी फिर से लहरों में परिवर्तित हो जायेगा और वैसे भी हम दिन में आसमान में जाकर करेंगे भी तो क्या? यहां से निकलने का द्वार तो चंद्रमा में मौजूद है। इसलिये आप बस थोड़ा सा इंतजार कर लीजिये बस...।” शैफाली ने कहा।

शैफाली के शब्दों से एक पल में सुयश सब कुछ समझ गया।

“अच्छा तो इसी के साथ पवन और चंद्रमा की मूर्तियों का कार्य भी पूर्ण हो जायेगा।” सुयश ने खुश होते हुए कहा।

सभी अब चुपचाप वहीं बैठकर चंद्रमा के आने का इंतजार करने लगे।

जैसे ही सूर्य पूरी तरह से सफेद हुआ, शैफाली के कहे अनुसार तालाब का पानी लहरों में परिवर्तित होकर हिलोरें मारने लगा।

तालाब की लहरें अब टरबाइन पर गिरने लगीं, जिससे टरबाइन के अंदर मौजूद ब्लेड ने घूमना शुरु कर दिया।

सुयश टरबाइन पर पानी गिरता देख, भागकर कमरे में पहुंचा और उस मशीन का ऑन बटन दबा दिया।

एक घरघराहट के साथ मशीन ऑन हो गई। यह देख सुयश सभी को साथ लेकर पवनचक्की के ऊपर मौजूद जालीदार प्लेटफार्म पर पहुंच गया।

सुयश ने एक बार सभी को देखा और फिर वहां मौजूद उस लीवर को नीचे की ओर कर दिया।

एक गड़गड़ाहट के साथ विशालकाय पवनचक्की घूमना शुरु हो गई।

जहां सभी एक ओर इक्साइटेड भी थे, वहीं पर सावधान भी थे।

पवनचक्की ने जैसे ही गति पकड़ी, प्लेटफार्म के नीचे मौजूद नीले रंग का कास्टिक तेजी से जाली के ऊपर की ओर आया और जाली पर एक
विशालकाय बुलबुला बन गया।

सभी उस बुलबुले के अंदर बंद हो गये और इसी के साथ वह बुलबुला पवनचक्की की तेज हवाओं से ऊपर आसमान की ओर जाने लगा।

ऐलेक्स को छोड़ सभी को एकाएक शैफाली का बुलबुला और ज्वालामुखी वाला सीन याद आ गया।

“अब समझ में आया कि वहां नीचे कास्टिक क्यों रखा था।” सुयश ने मुस्कुराते हुए कहा।

“अपने ऐलेक्स की नाक तो बिल्कुल कुत्ते जैसी हो गई।” क्रिस्टी ने ऐलेक्स का मजाक उड़ाते हुए कहा।

“और तुम्हारी आँखें भी तो....।” कहते-कहते ऐलेक्स रुक गया।

“हां-हां बोलो-बोलो मेरी आँखें भी तो....किसी जानवर से मिलती ही होंगी।” क्रिस्टी ने मुंह बनाते हुए कहा।

“हां तुम्हारी आँखें बिल्कुल जलपरी के जैसी हैं, जी चाहता है कि इसमें डूब जाऊं।” अचानक से ऐलेक्स ने सुर ही बदल दिया।

क्रिस्टी को ऐलेक्स से इस तरह के जवाब की उम्मीद नहीं थी, इसलिये वह शर्मा सी गई।

“और तुम्हारा चेहरा इस चंद्रमा से भी ज्यादा खूबसूरत है।” ऐलेक्स क्रिस्टी को शर्माते देख किसी शायर की तरह क्रिस्टी की तारीफ करने लगा।

चांद पर थोड़ा गुरूर हम भी कर लें,
पर मेरी नजरें पहले महबूब से तो हटें..!!🥰


सभी क्रिस्टी और ऐलेक्स की इन मीठी बातों का आनन्द उठा रहे थे।

उधर वह बुलबुला धीरे-धीरे हवा में तैरता हुआ चंद्रमा तक जा पहुंचा।
सभी के चंद्रमा पर उतरते ही वह बुलबुला हवा में फट गया।

बुलबुले के फटते ही सभी चंद्रमा पर उतर गये और चंद्रमा के द्वार में प्रवेश कर गये।


जारी रहेगा_____✍️
फिर से एक अप्रतिम रोमांचक अद्भुत और विस्मयकारी अपडेट है भाई मजा आ गया
 
Top